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पौधारोपण अभियान-2025 के तहत उत्तर प्रदेश सरकार लगाएगी 37 करोड़ पौधे

लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार बुधवार को पौधारोपण अभियान-2025 के तहत राज्य के सभी जिलों में 37 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। राज्यव्यापी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सभी 75 जिलों में अभियान का नेतृत्व करेंगे। बयान में कहा गया कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को जिला नोडल अधिकारी नामित किया गया है जो मंगलवार सुबह तैयारियों की समीक्षा करने के लिए अपने-अपने जिलों में पहुंचेंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या और आजमगढ़ में पौधारोपण अभियान का नेतृत्व करेंगे, जबकि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बाराबंकी में अभियान में भाग लेंगी। बयान में कहा गया है कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मेरठ और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक लखनऊ में पौधारोपण अभियान में हिस्सा लेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार के सभी मंत्री बुधवार को राज्यव्यापी पौधारोपण अभियान में भाग लेंगे और अपने-अपने जिलों में पौधे लगाएंगे। सरकार ने पौधारोपण अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी 75 जिलों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं।  

काशी विश्वनाथ मंदिर में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक

वाराणसी धार्मिक नगरी वाराणसी से एक अहम खबर सामने आई है। अब काशी विश्वनाथ मंदिर में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया जिसमें मंदिर परिसर को प्लास्टिक मुक्त करने पर मुहर लगाई गई। इस बैठक में तय किया गया कि सावन माह के बाद यानी 10 अगस्त 2025 से किसी भी प्रकार का प्लास्टिक लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश नहीं मिल सकेगा। सावन माह से शुरू होगी जागरूकता मुहिम काशी विश्वनाथ मंदिर में 11 जुलाई से शुरू हो रहे सावन महीने के लिए अभी से तैयारियां चल रही हैं। सावन में लाखों भक्त रोज़ाना मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जल चढ़ाने के लिए आते हैं। इसी को देखते हुए रविवार को मंदिर प्रशासन की बैठक हुई जिसमें यह तय किया गया कि सावन महीने से ही बाबा के दरबार को प्लास्टिक से मुक्त करने की मुहिम चलाई जाएगी। मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि दिसंबर 2024 में मंदिर न्यास की तरफ से परिसर में प्लास्टिक को प्रतिबंधित करने के लिए फैसला लिया गया था जिसके बाद अब इस पर काम शुरू किया जाएगा। सावन माह में अलग-अलग कैंपेन के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा। प्लास्टिक के बर्तनों में पूजा सामग्री भी वर्जित मिश्रा ने आगे बताया कि श्रद्धालुओं को फल-फूल पूजन सामग्री वाले प्लास्टिक के साथ भी मंदिर परिसर में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। लोगों को बताया जाएगा कि वे किसी भी प्रकार के प्लास्टिक के पात्र में दूध, जल, माला या अन्य तरह की पूजा सामग्री को मंदिर के अंदर नहीं ले जा सकते हैं। भक्तों को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया पर भी विशेष अभियान चलाया जाएगा। मंदिर परिसर में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पहले ही रोक लग चुकी है और अब सावन महीने के बाद मंदिर परिसर में किसी भी तरह के प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगेगी। इससे मंदिर पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त हो जाएगा और पर्यावरण को संरक्षित करने में भी मदद मिलेगी। यह पहल धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करेगी।  

इलाहाबाद हाई कोर्ट से डिग्री मामले में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को बड़ी राहत

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को इलाहाबाद हाई कोर्ट से डिग्री मामले में बड़ी राहत दी है। दरअसल, कोर्ट ने दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है। आप को बता दें दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने उप मुख्यमंत्री की डिग्री मामले में पुनरीक्षण याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया कि केशव प्रसाद मौर्य ने जिस डिग्री के आधार पर पेट्रोल पंप लिया है और चुनाव में हलफनामा दायर किया वह अमान्य है। ऐसे में एफआईआर दर्ज कर विवेचना की जानी चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 25 मई को आदेश रिजर्व कर लिया था। फिलहाल इस मामले में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहत दे दी है।  

छांगुर बाबा अवैध धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार, ईडी करेगी विदेशी फंडिंग की जांच, 100 करोड़ का मालिक

लखनऊ  उत्तर प्रदेश एटीएस ने अवैध धर्मांतरण मामले में जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा को गिरफ्तार किया है। एटीएस की टीम ने छांगुर बाबा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी संपत्ति और नेटवर्क की परतें उधेड़ दी हैं। छांगुर बाबा एक समय सड़कों पर नग और अंगूठी बेचने का काम करता था। आज यह व्यक्ति 100 करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिक बन बैठा है। एटीएस की जांच में छांगुर बाबा और उसकी फर्जी संस्थाओं के खातों में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन का पता चला है। ईडी को सौंपी गई रिपोर्ट उत्तर प्रदेश एटीएस टीम ने अपनी डि़टेल्ड जांच रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंप दी है। अब ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच कर सकता है। एटीएस ने रिपोर्ट में बताया गया कि छांगुर बाबा ने पिछले 5-6 वर्षों में चौंकाने वाली गति से 100 करोड़ की दौलत और धर्मांतरण नेटवर्क खड़ा किया। आलीशान कोठियां, लग्जरी गाड़ियां और एक कॉलेज खोलने की योजना इसी का हिस्सा थीं। मधुपुर कोठी बना नेटवर्क का अड्डा बलरामपुर के मधुपुर गांव के छांगुर बाबा की आलीशान कोठी अवैध धर्मांतरण नेटवर्क का मुख्य अड्डा थी। इसी कोठी से पूरे भारत में फैले नेटवर्क का काम होता था। जांच में पता चला है कि छांगुर बाबा ने इसी परिसर में डिग्री कॉलेज शुरू करने की योजना भी बनाई थी, जिसके लिए भवन का निर्माण कार्य भी शुरू किया जा चुका था। फिलहाल उसकी गिरफ्तारी के बाद यह योजना अधर में लटक गई है। 14 सहयोगियों की तलाश जारी, पत्रकार भी शामिल एटीएस और एसटीएफ की टीमें छांगुर बाबा के 14 मुख्य फरार सहयोगियों की तलाश में जुटी हैं। इनमें कथित पत्रकार पैमैन रिजवी सहित पिंकी हरिजन, महबूब, हाजिरा शंकर और सगीर जैसे नामचीन चेहरे शामिल हैं। गिरोह के सदस्य आजमगढ़, औरैया और सिद्धार्थनगर जैसे जिलों से ताल्लुक रखते हैं। कई पर पहले से मुकदमे दर्ज हैं। विदेश यात्राएं और खाड़ी देशों से फंडिंग यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अमिताभ यश के अनुसार, छांगुर बाबा अब तक 40 से 50 बार इस्लामिक देशों की यात्रा कर चुका है। जांच में यह भी सामने आया है कि बलरामपुर में उसने कई संपत्तियां खरीदी हैं और खाड़ी देशों से उसे भारी विदेशी फंडिंग मिली है। एटीएस इस विदेश कनेक्शन की भी गहराई से जांच कर रही है। 14 सहयोगियों की तलाश, देशभर में फैला नेटवर्क छांगुर बाबा के नेटवर्क के 14 मुख्य सहयोगियों की तलाश में एटीएस और एसटीएफ की टीमें जुटी हैं. इनमें कथित पत्रकार से लेकर अन्य नामचीन चेहरे शामिल हैं. जिन नामों की तलाश है उनमें महबूब, पिंकी हरिजन, हाजिरा शंकर, पैमैन रिजवी (कथित पत्रकार) और सगीर शामिल हैं. इनकी गिरफ्तारी से गिरोह के नेटवर्क के और गहरे राज सामने आ सकते हैं. गिरोह के कई सदस्य आजमगढ़, औरैया, सिद्धार्थनगर जैसे जिलों से हैं और इनके खिलाफ पहले से एफआईआर दर्ज है. कॉलेज खोलने की योजना मधपुर में आलीशान कोठी बनाने के बाद, झांगुर बाबा ने उसी परिसर में डिग्री कॉलेज खोलने की योजना बनाई थी. इसके लिए उसने भवन का निर्माण भी शुरू कर दिया था. फिलहाल उसकी ये योजनाएं उसकी गिरफ्तारी और जांच के चलते ठप पड़ गई हैं. बाबा ने 50 बार इस्लामिक देशों की यात्रा की यूपी के ADGP (लॉ एंड ऑर्डर) अमिताभ यश ने बताया कि जमालुद्दीन बाबा ने अब तक 40 से 50 बार इस्लामिक देशों की यात्रा की है. जांच में यह भी पाया गया है कि बलरामपुर में उसने कई संपत्तियां भी खरीदी हैं. उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और यूपी एटीएस जांच कर रही है. फिलहाल इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और एसटीएफ का कहना है कि इस नेटवर्क की पहुंच पूरे भारत में फैली हुई है. विदेशी फंडिंग खासकर खाड़ी देशों से आने की बात सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है. दो गिरफ्तार, जांच जारी फिलहाल इस मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और एसटीएफ ने बताया कि यह नेटवर्क देशभर में फैला हुआ है। एजेंसियों की कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में बड़े खुलासे होने की संभावना है।

प्रथम स्थान पाने वाले विकास खंड को 2.5 करोड़ रुपए , दूसरे को 1.5 करोड़ रुपए, तीसरे को 1 करोड़ रुपए देगी योगी सरकार

विष्णुपुरा उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'आकांक्षात्मक विकास खण्ड' योजना के तहत वर्ष 2024-25 की वार्षिक डेल्टा रैंकिंग जारी की गई है. जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पांच विकास खंडों को 20 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन विकास खंडों को सम्मानित करेंगे. प्रदेश के नियोजन विभाग की ओर से की गई रैंकिंग में जालौन, रामपुरा (जालौन), देवकली (गाजीपुर), विष्णुपुरा (कुशीनगर) और मड़िहान (मिर्जापुर) विकास खंडों ने टॉप 5 में जगह बनाई है. इन विकास खंडों को उनके समग्र विकास जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, बुनियादी ढांचा और सामाजिक प्रगति में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए यह सम्मान दिया जाएगा. रैंकिंग के आधार पर तय हुई राशि प्रोत्साहन राशि को प्रदर्शन के क्रम में बांटा गया है. प्रथम स्थान पाने वाले विकास खंड को 2.5 करोड़ रुपए , दूसरे को 1.5 करोड़ रुपए, तीसरे को 1 करोड़ रुपए और शेष दो टॉप परफॉर्मर्स को 50-50 लाख रुपए दिए जाएंगे. योगी सरकार का मानना है कि इससे अन्य विकास खंडों को भी प्रेरणा मिलेगी और जिलेवार प्रतिस्पर्धा के माध्यम से समग्र ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलेगी. स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में जालौन का जलवा रैंकिंग के अनुसार, रामपुरा (जालौन) ने स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि खेसराहा (सिद्धार्थनगर) और जालौन विकास खंड ने क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान पाया है. शिक्षा के क्षेत्र में भी जालौन और रामपुरा ने पहला और दूसरा स्थान अर्जित किया, जबकि देवकली (गाजीपुर) तीसरे स्थान पर रहा. वहीं बलिया, सोनभद्र और बदायूं के कुछ विकास खंडों का प्रदर्शन शिक्षा व स्वास्थ्य दोनों में कमजोर रहा. कृषि और बुनियादी ढांचे में भी दिखा असर कृषि क्षेत्र में विष्णुपुरा (कुशीनगर) सबसे आगे रहा. जबकि अंबेडकरनगर के टांडा और संभल का संभल विकास खंड भी टॉप तीन में शामिल हुए. बुनियादी ढांचे के विकास में सैदनगर (रामपुर) शीर्ष पर रहा, जबकि नवाबगंज (फर्रूखाबाद) और असफपुर (बदायूं) ने भी उल्लेखनीय सुधार दिखाया. सामाजिक विकास में सैदनगर सबसे आगे सामाजिक विकास श्रेणी में भी सैदनगर (रामपुर) पहले स्थान पर रहा. इसके अलावा पीलीभीत का पूरनपुर, मीरजापुर का मड़िहान, संभल का राजपुरा और चित्रकूट का पहाड़ी विकास खंड भी बेहतर प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे. जहां विकास की रफ्तार धीमी रही रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कुछ विकास खंड अब भी पिछड़े हुए हैं. शुकुलबाजार (अमेठी), गौरीबाजार (देवरिया) और निचलौल (महराजगंज) जैसे क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक विकास के क्षेत्र में अब भी तेज़ प्रयासों की आवश्यकता है. सरकार ने संकेत दिए हैं कि इन क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन और निगरानी की व्यवस्था की जाएगी.

राम मंदिर में पहली बार होगा ध्वजारोहण समारोह, प्रधानमंत्री मोदी और हजारों विशिष्ट अतिथि रहेंगे मौजूद

अयोध्या  रामलला के प्राण प्रतिष्ठा की ऐतिहासिक गूंज अभी भी जनमानस में ताजा है। राम मंदिर ट्रस्ट अब एक और भव्य अध्याय जोड़ने जा रहा है। नवंबर में प्रस्तावित ध्वजारोहण समारोह को लेकर तैयारियों ने गति पकड़ ली है। इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन एक बार फिर अयोध्या को भक्तिभाव, वैदिक अनुष्ठानों और विश्व भर से जुटने वाले श्रद्धालुओं से सराबोर कर देगा। ध्वजारोहण समारोह को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तर्ज पर ही भव्यता प्रदान की जाएगी। मंदिर ट्रस्ट की ओर से मेहमानों की सूची तैयार की जा रही है, जिनमें देश-विदेश के संत, धर्माचार्य, प्रतिष्ठित गणमान्य अतिथि और रामभक्त शामिल रहेंगे। अनुमान है कि हजारों की संख्या में अतिथि इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनेंगे। अयोध्या में मेहमानों की आगवानी के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। ट्रस्ट और प्रशासनिक तंत्र ने कमरे बुक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रमुख होटल, धर्मशालाएं और गेस्ट हाउसों में आवास की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को भी चाक-चौबंद किया जा रहा है। नवंबर में समारेाह के लिए शुभ मुहूर्त भी ज्योतिषियों से निकलवाया जा रहा है। 16 नवंबर व 25 नवंबर दो शुभ तिथियों में से किसी एक तिथि के चयन पर विमर्श हो रहा है।   161 फीट ऊंचे शिखर पर होगा ध्वजारोहण राम मंदिर के 161 फीट ऊंचे शिखर पर रामध्वज फहराया जाएगा। इसके अलावा परिसर के अन्य सभी मंदिरों के शिखर पर ध्वज फहराया जाएगा। रामध्वज का आरोहण केवल एक प्रतीकात्मक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम की विजय और धर्म की प्रतिष्ठा का उद्घोष होगा। यह आयोजन मंदिर निर्माण की पूर्णता की ओर बढ़ते कदम का संकेत भी माना जा रहा है। ध्वज पताका को वैदिक मंत्रोच्चार, संगीत, और विशेष पूजा विधियों के साथ मंदिर के शिखर पर फहराया जाएगा। कार्यक्रम में विविध प्रकार के अनुष्ठान भी होंगे। रामकथा का भी आयोजन संभव है। इस अवसर पर देश के कई प्रसिद्ध संगीतज्ञ व कलाकार प्रस्तुतियां देंगे, जिससे समारोह की भव्यता बढ़ेगी।  

यात्रियों के लिए जरूरी सूचना: कांवड़ यात्रा में पश्चिम यूपी के रूट में बदलाव, 10 जुलाई से डायवर्जन लागू

सहारनपुर यूपी में कांवड़ यात्रा को लेकर पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड़ में आ गया है। इसके तहत पश्चिम यूपी में सुरक्षा की व्यू रचना तैयार कर ली है। सहारनपुर में जिलाधिकारी और एसएसपी ने पैदल मार्च किया। दोनों अधिकारियों ने खामियां मिलने पर आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए। इसके साथ ही दस जुलाई से रूट डायवर्जन प्लान भी लागू हो जाएगा। शनिवार को जिलाधिकारी मनीष बंसल और एसएसपी आशीष तिवारी ने घंटाघर से नेहरू मार्केट, श्रीराम चौक, चौकी सराय, शहीदगंज बाजार, दाल मंडी पुल, अरबी मदरसा सहित अनेक इलाकों में पुलिस-फोर्स के साथ पैदल मार्च किया। दोनों अधिकारियों ने मुहर्रम के तहत चल रहे जुलूस के मार्ग भी देखे। इसके साथ ही घंटाघर पर अंबाला रोड और देहरादून रोड (कांवड़ मार्ग) की व्यवस्था देखी। जिलाधिकारी और एसएसपी ने अधीनस्थों को खामियों को दूर करने के निर्देश दिए। वहीं, कांवड़ मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। एसएसपी आशीष तिवारी ने डायल 112 पर तैनात पुलिसकर्मियों की बैठक ली। एसएसपी आशीष तिवारी ने कहा कि सूचना मिलते ही तत्काल प्रभाव से पुलिस मौके पर पहुंचे। अंतिम चरण में डायवर्जन थाना गागलहेड़ी क्षेत्र के काली नदी से सरसावा बाईपास कांवड़ मार्ग है। यहां पर डाक कांवड़ सबसे अधिक गुजरती हैं, इसलिए सभी वाहनों को प्रतिबंध किया जाएगा। आटो, ई-रिक्शा, बाइक को भी बंद किया जाएगा। इनके जाने के लिए घंटाघर चौक, आंबेड़कर चौक, दर्पण तिराहे वाले रास्ते खुल रहेंगे। कांवड़ यात्रा मार्ग पर क्रास करने वाले बिंदु आंबेडकर चौक, घंटाघर और दर्पण तिराहा बस स्टैंड की व्यवस्था – 11 जुलाई से 24 जुलाई तक देहरादून रोडवेज बस स्टैंड से हरिद्वार, देहरादून, मेरठ, दिल्ली जाने वाली बसें कांशीराम अस्थायी बस स्टैंड से संचालित होंगी, जिन्हें दिल्ली रोड से चुनहेटी कट से बाईपास होते हुए चलाया जाएगा। – 11 जुलाई से 24 जुलाई तक हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, गंगोह, नकुड़ जाने वाली रोडवेज बसें मानकमऊ बस स्टैंड से कुम्हारहेड़ा कट से बाईपास होते हुए संचालित होंगी। कांवड़ यात्र के दौरान यह रहेगी यातायात व्यवस्था – सहारनपुर से गाजियाबाद, दिल्ली जाने वाले वाहन अंबाला-देहरादून बाईपास से संचालित होकर सरसावा चौकी, शाहजहांपुर, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत होकर जाएंगे। इसी मार्ग से वापसी होगी। – सहारनपुर से दिल्ली, गाजियाबाद जाने वाली हल्के वाहन गागलहेड़ी, नागल, देवबंद, रोहाना कलां होकर चलेंगे। – सहारनपुर से मुजफ्फरनगर की तरफ जाने वाले हल्के वाहनों को सहारनपुर बाईपास से कोलकी कट, नागल, रोहाना कलां से होकर निकाला जाएगा। – सहारनपुर से यमुनानगर, अंबाला जाने वाले भारी वाहनों को बाईपास से सरसावा चौकी, शाहजहांपुर, यमुनानगर से निकाला जाएगा। इसी मार्ग से वापस होंगे। – सहारनपुर से हरिद्वार जाने वाले भारी वाहन 11 से 17 जुलाई तक सहारनपुर बाईपास से गागलहेड़ी, छुटमलपुर, भगवानपुर, रुड़की होकर जाएंगे। इसके बाद भारी वाहन 18 से 24 जुलाई तक सहारनपुर बाईपास से गागलहेड़ी, छुटमलपुर, चौकी मोहंड, आशारोड़ी चौकी, देहरादून, हरिद्वार निकलेंगे। इसी मार्ग से वापस होंगे। – सहारनपुर से देहरादून जाने वाले भारी वाहन देहरादून बाईपास (देहरादून-अंबाला हाईवे) से गागलहेड़ी, छुटमलपुर, मोहंड चौकी, आशारोड़ी चौकी होकर जाएंगे। – सहारनपुर से शामली की ओर जाने वाले भारी वाहन रामपुर मनिहारान, नानौता, जलालाबाद होकर जाएंगे। हल्के वाहन भी इसी मार्ग से चलेंगे। – यमुनानगर की ओर से आने वाले वाहन शाहजहांपुर से चिलकाना मोड, दुमझेड़ा, बेहट, कलसिया, मुजफ्फराबाद, छुटमलपुर होते हुए भगवानपुर उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करेंगे। इसी मार्ग से वापसी होंगे।  

झांसी स्टेशन पर समय रहते मिली मदद, महिला कर्मचारियों ने कराई सुरक्षित डिलीवरी

झांसी उत्तर मध्य रेलवे के झांसी स्टेशन पर उस समय एक बच्ची की किलकारी गूंज उठी जब महिला रेलवे कर्मचारियों एवं डॉक्टरों की मदद से एक महिला की सुरक्षित डिलीवरी कराई गई. डिलीवरी के बाद महिला को निकटवर्ती अस्पताल भेजा गया. उत्तर मध्य रेलवे के झांसी स्टेशन पर शनिवार को उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला जब एक महिला यात्री की प्रसव पीड़ा के बीच रेलवे कर्मचारियों की तत्परता से प्लेटफॉर्म पर ही सुरक्षित डिलीवरी कराई गई. रेलवे जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार ने प्रेस नोट के माध्यम से यह जानकारी साझा की. दरअसल, ट्रेन संख्या 15066 पनवेल-गोरखपुर एक्सप्रेस में पनवेल से बाराबंकी जा रही एक गर्भवती महिला को रास्ते में अचानक तेज प्रसव पीड़ा होने लगी. महिला की हालत बिगड़ती देख तुरंत रेलवे हेल्पलाइन से संपर्क किया गया और इसके बाद झांसी रेल कंट्रोल को जानकारी दी गई. सूचना मिलते ही रेलवे की महिला कर्मचारी टीम, मेडिकल टीम और अन्य स्टाफ अलर्ट मोड पर आ गए. जैसे ही ट्रेन वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्टेशन पर पहुंची, महिला यात्री को रेलवे मेडिकल टीम, रेलवे टिकट चेकिंग स्टाफ पाली प्रभारी पीएन सोनी एवं महिला टिकट कर्मचारियों, उप स्टेशन अधीक्षक वाणिज्य मणि राय तथा स्टेशन पर उपस्थित आर्मी डॉक्टर की सहायता द्वारा तत्परता से अटेंड किया गया.   महिला की सुरक्षित डिलीवरी इसके बाद रेलवे की ओर से मौजूद डॉ. टीम तथा महिला चेकिंग स्टाफ लिली कुशवाहा, राखी कुशवाहा, ज्योतिका साहू एवं कविता अग्रवाल की मदद से झांसी स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर ही महिला की सुरक्षित डिलीवरी करवाई. बिना देर किए प्लेटफॉर्म को अस्थायी प्रसव कक्ष में बदल दिया गया और सुरक्षित डिलीवरी कराई गई. महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया.इस दौरान  लिली कुशवाहा ने बिना किसी हिचक के अपने वस्त्रों की परवाह किए बिना नवजात कन्या को सुरक्षित संभाला और माँ को सौंपा. डिलीवरी के बाद महिला को प्राथमिक उपचार के बाद एंबुलेंस के माध्यम से निकटवर्ती अस्पताल भेजा गया. जहां दोनों स्वास्थ्य बताए जा रहे हैं.

देवशयनी एकादशी: काशी में गंगा स्नान के लिए उमड़े श्रद्धालु, लगाई आस्था की डुबकी

वाराणसी सनातन धर्म में विशेष महत्व रखने वाली देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर रविवार को काशी के गंगा घाटों पर श्रद्धालु उमड़ पड़े। श्रद्धालुओं ने सुबह दशाश्वमेध घाट सहित अन्य प्रमुख घाटों पर गंगा स्नान किया और भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि इस दिन गंगा में डुबकी लगाने से पापों का नाश होता है और पुण्य फलों में वृद्धि होती है। सुबह से ही घाटों पर स्नान और पूजन का सिलसिला शुरू हो गया। दशाश्वमेध घाट पर महिलाओं के साथ ही बच्चे और बुजुर्ग भी आस्था की डुबकी लगाते नजर आए। प्रतापगढ़ से काशी पहुंचे श्रद्धालु शिवम ने बताया, “एकादशी के दिन गंगा नदी में स्नान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यता है कि कई पाप और दोष खत्म हो जाते हैं।” राजन कुमार ने बताया, “गंगा में स्नान करने से तन-मन दोनों पवित्र हो जाते हैं और पूजा-पाठ से कई पुण्य फल मिलते हैं। हम लोग आज के दिन अन्न का त्याग कर फलाहार ही खाते हैं, व्रत रखते हैं और भोलेनाथ के साथ नारायण की पूजा करते हैं।” दशाश्वमेध घाट के पुरोहित विवेकानंद पाण्डेय ने बताया, “आषाढ़ मास की एकादशी है। आज के दिन व्रत-पूजन करने से कई लाभ मिलते हैं। भक्त भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वो उनके दुख-दर्द दूर करें।” ‘हर-हर महादेव’ और ‘नारायण-नारायण’ के जयघोष से घाटों का माहौल भक्तिमय बन गया। श्रद्धालुओं ने गंगा जल से भगवान विष्णु का अभिषेक किया, पीले फूल, तुलसी पत्र और पंचामृत अर्पित किए। वहीं, कई भक्तों ने विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया और दान-पुण्य के कामों में हिस्सा भी लिया। इस दिन किए गए दान को विशेष फलदायी माना जाता है। हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव संभालते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है, जो 6 जुलाई से शुरू होकर 1 नवंबर को देवउठनी एकादशी तक चलेगा। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है, क्योंकि मान्यता है कि भगवान विष्णु की अनुपस्थिति में शुभ कार्यों में उनका आशीर्वाद नहीं मिलता।  

सीएम योगी ने कहा- भारत की एकता और अखंडता के लिए समर्पित रहा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ था। उन्होंंने मात्र 33 वर्ष की उम्र में कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वह एक प्रखर वक्ता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और महान शिक्षाविद थे। सीएम योगी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पूरा जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित था। बंगाल के अकाल के दौरान उनकी सेवाओं को पूरा देश स्मरण करता है। उनका जीवन भारत की एकता और अखंडता के लिए समर्पित रहा। डॉ. मुखर्जी ने आजादी के बाद पंडित नेहरू के नेतृत्व में बनी पहली सरकार में भारत के खाद्य एवं उद्योग मंत्री के रूप में देश में खाद्य की आत्मनिर्भरता और औद्योगीकरण की नींव रखी थी, जो नए भारत में भी स्पष्ट देखने को मिलता है। उन्होंने नेहरू सरकार के तुष्टिकरण की नीति के विरोध में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। इतना ही नहीं भारतीय जनसंघ का गठन और उसके पहले अध्यक्ष होने के साथ जब भारत के संविधान में नेहरू सरकार ने कश्मीर को 370 धारा के माध्यम से अलग स्टेटस देने का प्रयास किया और परमिट सिस्टम जम्मू-कश्मीर के लिए लागू किया, उसके खिलाफ सबसे पहले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ही आवाज उठाई थी। उन्होंने उस समय एक देश में ‘दो प्रधान, दो विधान और दो निशान’ नहीं चलेंगे का नारा दिया था। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के इन सपनों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साकार किया। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीर में धारा 370 को समाप्त करके कश्मीर को भारत के संविधान के अनुरूप शेष भारत के साथ जोड़ते हुए ‘एक विधान एक प्रधान और एक निशान’ के साथ भारत की लोकतांत्रिक धारा के साथ जोड़ने का अभिनव प्रयास किया है। आज जम्मू कश्मीर तेजी के साथ विकास कर रहा है, जो श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के संकल्पों की विजय है। यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में संभव हो पाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया भर में इन्वेस्टमेंट के बेहतरीन डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि औद्योगीकरण की नींव को आजाद भारत में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने प्रारंभ किया था और आज उसका एक बहुत ही वृहद स्वरूप देश में देखने को मिल रहा है। इस सदी की सबसे बड़ी महामारी के दौरान जब पूरी दुनिया त्रस्त थी, उस दौरान भारत ने अपने यहां 80 करोड़ लोगों को फ्री में राशन की सुविधा का लाभ दिया, जो आज भी निरंतर चल रहा है। यह सभी संकल्प श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को साकार करने वाला है।