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देश के लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करती रही है कांग्रेस-विश्वास सारंग

भोपाल, 13/08/2025। मध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि देश में लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी का शासन रहा और वह शुरू से देश के लोकतंत्र और निष्पक्ष संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करती रही है। वोट चोरी जैसे शब्द का प्रयोग करके राहुल गांधी देश के लोकतंत्र को अपमानित करने का काम कर रहे हैं, जो बिहार चुनाव में अपनी सुनिश्चित हार से जनता का ध्यान बंटाने तथा अपनी फेस सेविंग की कोशिश मात्र है।लोकतंत्र को बदनाम और उसका दुरुपयोग करती रही है कांग्रेसमध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि आजादी के बाद देश की जनता ने कांग्रेस को शासन करने का अधिकार दिया, लेकिन 1952 और उसके बाद जब-जब भी नेहरू परिवार और कांग्रेस की सरकारें देश में रही हैं, उन्होंने लोकतंत्र को बदनाम किया तथा उसका दुरुपयोग किया है। उन्होंने कहा कि 1952 में जब बाबा साहब अंबेडकर जी चुनाव लड़े थे, पं. नेहरू ने स्वयं उन्हें चुनाव हराने के लिए षडयंत्र रचा था। उनके चुनाव में 74433 वोटों को खारिज कराया गया था, जबकि अंबेडकर जी सिर्फ 14561 वोटों से चुनाव हारे थे। उसके बाद यह सिलसिला लगातार चलता रहा। 1952 के बाद 1957, आपातकाल और आपातकाल के बाद भी कांग्रेस ने हमेशा लोकतंत्र के दुरुपयोग का प्रयास किया। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी 90 से अधिक चुनाव हार चुकी है। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी की स्थिति पूरे देश में बदतर होती जा रही है और वह अपनी हार का ठीकरा कभी ईवीएम पर, तो कभी चुनाव आयोग पर फोड़ रहे हैं। अब यह सुनिश्चित हो गया कि बिहार के चुनाव में कांग्रेस और उसके सहयोगी बुरी तरह हारेंगे, तो मतदाता सूची पर प्रश्न चिन्ह लगाकर अपनी फेस सेविंग का काम कर रहे हैं।अपने गिरेबान में झांकें कांग्रेस और राहुल गांधीमध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मैं राहुल गांधी से यह कहना चाहता हूं कि सिर्फ गांधी सरनेम लगाने से काम नहीं चलेगा, उसके साथ नीयत भी नेक होना चाहिए। उन्हें यह विचार करना चाहिए कि देश के जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें बनी हैं, अगर निर्वाचन प्रक्रिया में कोई खराबी रही होती, तो क्या ये सरकारें बन पातीं? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता जो आरोप लगा रहे हैं, उसका खंडन तो स्वयं कांग्रेस की कर्नाटक सरकार के सहकारिता मंत्री राजन्ना ने कर दिया है। राहुल गांधी जिस वोट चोरी की बात करते हैं, उसका आरोप मंत्री राजन्ना ने अपनी ही सरकार पर लगाया है। मंत्री राजन्ना ने जब यह कहा कि हमारी सरकार ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की थी, तो उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। उन्हें सफाई देने का मौका तक नहीं दिया गया। इससे पता चलता है कि कांग्रेस का आंतिरक लोकतंत्र कितना बदहाल है।राहुल गांधी और कांग्रेस ने देश को बदनाम करने की सुपारी ली हैमध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मुझे लगता है कि राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता केवल और केवल देश को बदनाम करने की सुपारी लेकर और अर्बन नक्सलियों की तरह राजनीति कर रहे है। जिस तरह नक्सली बिना किसी जानकारी या तथ्य के व्यवस्था के खिलाफ असंतोष पैदा करने की कोशिश करते हैं, वही काम कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी कर रहे हैं। राहुल गांधी की झूठ, फरेब की राजनीति इन्हीं प्रयासों की कड़ी है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग और न्यायालय के सामने जाकर कभी कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है, केवल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाए जाते हैं। चुनाव आयोग ने कई बार कहा कि अगर आपको कोई आपत्ति है, तो आयोग में आकर बात कीजिए, लेकिन कांग्रेस के ये नेता जिनमें मध्यप्रदेश के भी कुछ नेता शामिल हैं, आयोग के पास नहीं गए। श्री सारंग ने कहा कि कांग्रेस के नेता संभवतः इस कहावत पर राजनीति कर रहे हैं कि ‘‘सौ बार झूठ बोलेंगे, तो वह सच हो जाएगा’’, लेकिन ऐसा होता नहीं है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है और उन्हें लगता है कि अगर नेहरू परिवार के नेतृत्व को बचाना है, तो झूठ-फरेब की राजनीति को आगे बढ़ाना होगा।जब-जब देश का सम्मान बढ़ा, तब-तब अपमान करती रही कांग्रेसमध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जब-जब दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ता है, तब-तब कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी देश की व्यवस्थाओं पर प्रश्न चिह्न लगाकर देश को बदनाम करने की कोशिश करते हैं। जब हमारी सेनाओं ने आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की, तो राहुल गांधी उस पर प्रश्न चिह्न लगाते हैं। जब एयर स्ट्राइक होती है, तो राहुल गांधी पाकिस्तान और चीन की भाषा बोलते हैं। अभी जब ऑपरेशन सिंदूर हुआ, तब भी कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेता देश के सम्मान को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। 15 अगस्त आ रहा है और पूरे देश का वातावरण तिरंगामय हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि तिरंगे के मान और सम्मान के लिए देश का हर व्यक्ति खड़ा है, ऐसे में देश के संविधान तथा संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर कांग्रेस और विपक्ष के नेता देश को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी नकारातमक विचाराधारा और कार्यपद्धति के कारण कांग्रेस लगातार नीचे जा रही है।भाजपा और श्री नरेन्द्र मोदी में ही अपना भविष्य देख रहा देशमध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह से हताश और निराश है। जनता में उसकी साख पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। देश की जनता ने यह मान लिया है कि उसका भविष्य भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ ही है। ऐसे में कांग्रेस को ‘नाच न आवे आंगन टेढ़ा’ की कहावत पर न चलते हुए अपनी नीति, नीयत और नेता को ठीक करना चाहिए। जब तक नीति ठीक नहीं होगी, नीयत साफ नहीं होगी और नेतृत्व सक्षम नहीं होगा, वह जनता के बीच अपनी पैठ नहीं बना सकती। केवल दूसरों को गाली देना कांग्रेस की मानसिकता बन गयी है। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी से निवेदन करता हूं कि देश में झूठ, फरेब और भ्रम की राजनीति बंद करे

वन्यजीव संरक्षण के लिए सक्रिय पहल जरूरी: वनमंत्री कश्यप ने अधिकारियों को दिए निर्देश

रायपुर : वनमंत्री कश्यप ने वन्यप्राणी के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष बल देने निर्देशित किया वनमंत्री कश्यप ने वन्यप्राणी के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष बल देने निर्देशित किया वन विभाग के कार्ययोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की ईको टूरिज्म में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ें बारनवापारा अभ्यारण्य क्षेत्र को बढ़ाने के दिए निर्देश ई-ऑक्शन की सराहना की रायपुर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने आज नवा रायपुर अटल नगर स्थित अरण्य भवन में विभागीय काम-काज की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि मोदी की गारंटी के तहत वनोपज खरीदी दर और बोनस की राशि का भुगतान के साथ ही देवगुड़ियों के संरक्षण, लेमरू हाथी रिजर्व से जुड़े मुद्दे, प्रोजेक्ट बघवा, किसान वृक्ष मित्र योजना और मानव पशु द्वंद से हुई जनहानि एवं कृषि उपज प्रभावित होने वाले किसानों को फसल क्षति कवर प्रदान करने प्राप्त आवेदनों का निराकरण कर लिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों का लगभग शत-प्रतिशत निराकरण कर दिया गया है। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि ई-ऑक्शन के माध्यम से वनोपज एवं काष्ठों की नीलामी की जा रही है। अपर मुख्य सचिव वन श्रीमती ऋचा शर्मा ने ई-ऑक्शन को राज्य में मिल रहे बेहतर प्रतिसाद की सराहना करते हुए अधिकरियों को बधाई दी। बैठक में मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव ने बताया कि वर्षा ऋतु-2025 में ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ के तहत वन विभाग और वन विकास निगम द्वारा 2 करोड़ 17 लाख पौधे रोपित किए गए हैं। वन विकास निगम द्वारा 4 माइक्रो फारेस्ट (मियावाकी) स्थलों पर 26 हजार पौधों का रोपण किया गया है। अधिकारियों ने मंत्री कश्यप को बताया कि 10.34 हेक्टेयर भूमि में 5 माइक्रो फारेस्ट (मियावाकी वन) की स्थापना प्रस्तावित है। मंत्री कश्यप ने वन विकास निगम के माध्यम से बारनवापारा अभ्यारण्य क्षेत्र को बढ़ाने के निर्देश अधिकरियों को दिए। उन्होंने माइक्रो फारेस्ट (मियावाकी) की स्थापना अर्बन क्षेत्रों में करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने वृक्षारोपण की प्रगति के संबंध में कहा कि वन विकास निगम के वर्किंग प्लान में वरिष्ठ अधिकारियों को रखे जाने से बेहतर परिणाम मिलेगा, जिससे मॉनिटरिंग अच्छे से होगी। उन्होंने कहा कि माइनिंग सहित सभी विभागों और शहरी क्षेत्रों में प्रमुखता से वृक्षारोपण किया जाए तथा टेक्निकल सपोर्ट के लिए नोडल अधिकारी बनाया जाए। वर्ष 2024-25 में 25 ईको टूरिज्म केन्द्रों से 2 करोड़ 62 लाख रूपए से अधिक की आय हुई है। मंत्री कश्यप ने कहा कि ईको टूरिज्म से प्राप्त होने वाली आय का उपयोग महिलाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार उपलब्ध करना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सभी ईको टूरिज्म केन्द्रों में बेहतर सुविधाओं का विस्तार करें। अधिकारियों ने बताया कि 7 नवीन ईको टूरिज्म केन्द्रों की स्थापना प्रस्तावित है, जिसका इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। बैठक में अधिकारियों ने मंत्री कश्यप को कैंपा मद से संचालित कार्यों की अद्यतन स्थिति और वन अधिकार पत्रधारी के नामांतरण और बटवारे की जानकारी से भी अवगत कराया। मंत्री कश्यप ने वन्यप्राणी संरक्षण, बाघ संरक्षण, अचानकमार्ग टायगर रिजर्व के ग्रामों के विस्थापन के प्रगति की समीक्षा की। लेमरू हाथी रिजर्व का विकास, तमोर पिंगला, सेमरसोत और बादखोल अभ्यारण्य में वन्यप्राणी संरक्षण और वन्य प्राणी से होने वाले जनहानि, फसल क्षति की भी विस्तृत समीक्षा की। राज्य वन एवं अनुसंधान संस्थान द्वारा एक वर्ष में कराए गए अनुसंधान कार्यों और उनकी गुणवत्ता की समीक्षा की। खदान प्रभावित क्षेत्रों में वन्यप्राणी संरक्षण की योजना और वृक्षारोपण कार्य की जानकारी ली और आगामी वर्ष के लिए की जाने वाली कार्ययोजना बनाने निर्देशित किया। उन्होंने वर्ष 2025-26 में तेन्दूपत्ता संग्रहण, चरणपादुका क्रय और वितरण, प्रधानमंत्री जनमन योजना, प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन वनधन विकास केन्द्र, राजमोहिनी देवी तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना, छात्र वृत्ति योजना की बिन्दुवार विस्तृत समीक्षा की। वन मंत्री कश्यप ने राजस्व में वृद्धि लाने के लिए सीमावर्ती राज्यों जैसे – महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्यप्रदेश राज्यों की प्रक्रिया का अध्ययन व आंकलन कर कार्ययोजना बनाने हेतु अधिकारियों को निर्देश दिए। मंत्री कश्यप ने कहा कि माइक्रो फारेस्ट के विस्तार के लिए ज्यादा से ज्यादा जनप्रतिनिधियों का सहयोग लें। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से वनवासियों द्वारा कार्यालय में प्राप्त आवेदन का तत्परता से निराकरण करें। इसी प्रकार विभागीय रिक्त पदों पर भर्ती जैसे सभी कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि वन प्रबंधन समिति के खाते में मार्च 2025 की स्थिति में 133 करोड़ 27 लाख रूपए से अधिक की लाभांश राशि उपलब्ध है। चक्रीय निधि में उपलब्ध राशि 116 करोड़ 65 लाख रूपए से अधिक की राशि है, जिसका उपयोग चक्रीय निधि से कराए जाने वाले कार्य जैसे – मछलीपालन, कोसा पालन, मधुमक्खी पालन, बतख पालन, मशरूम उत्पादन, महुआ लड्डू, लेमन ग्रास, दोना-पत्तल निर्माण, इमली प्रसंस्करण, डेयरी विकास, किराना दुकान, केन्टीन संचालन, ईको टूरिज्म संचालन हेतु वाहन क्रय आदि कार्यों के लिए 4 प्रतिशत वाार्षिक ब्याज पर ऋण प्रदान किया जाता है। इसके लिए प्रदेश में मुहिम चलाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को स्व-रोजगार से जोड़ने के निर्देश दिए। मंत्री कश्यप ने राजस्व प्राप्ति को बढ़ाने के लिए अन्य राज्यों का अध्ययन कर योजना बनाने के निर्देश दिए। निस्तारी वनोपज एवं पंजीकृत बंसोड़ों को बांस प्रदाय करना सुनिश्चित करें, ताकि उन्हें जीविकोपार्जन का साधन मिल सके। उन्होंने संबंधितों को निर्देश दिए कि वनों की अवैध कटाई, परिवहन पर कार्रवाई करना सुनिश्चित करें। कश्यप ने कहा कि वन विभाग के खाताधारी हितग्राहियों को सीधे उनके खाते में ई-कुबेर के माध्यम से भुगतान करना सुनिश्चित करें। अधिकारियों ने बताया कि हितग्राहियों को वर्ष 2024-25 में ई-कुबेर के माध्यम से 1400 करोड़ रूपए का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में किया गया है और वर्ष 2025-26 में 300 करोड़ रूपए का भुगतान हितग्राहियों को ई-कुबेर के माध्यम से किया गया है। मंत्री कश्यप ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एनटीपीएस के माध्यम से टीपी जारी करना सुनिश्चित करें। बिना टीपी के कोई भी वाहन वनोपज का परिवहन करते पाये जाने पर कठोर कार्रवाई करना सुनिश्चित करें। बैठक में वन क्षेत्रों में औषधीय पौधों के रोपण, नियद नेल्लानार योजना अंतर्गत जनजातीय समूह के सामाजिक आर्थिक कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से औषधीय पौध रोपण एवं आजीविका के अवसर को बढ़ाने, परंपरागत वैद्यों के प्रशिक्षण और विकास, … Read more

अब आसमान से तय होगा इंदौर-भोपाल का सफर, हेलीकॉप्टर सेवा के लिए प्रक्रिया शुरू

इंदौर अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (AICTSL) की बोर्ड बैठक का आयोजन बुधवार को महापौर और बोर्ड अध्यक्ष पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में शहर के सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल और यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसमें एक बड़ी घोषणा भी की गई, जिसमें बताया गया कि इंदौर से भोपाल के बीच अब हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है। जिसके लिए AICTSL एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगाने का निर्णय भी लिया गया है। हेलीकॉप्टर सेवा पर मिलने वाले प्रस्तावों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। रक्षाबंधन पर महिलाओं को मिलेगी मुफ्त यात्रा सुविधा महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बोर्ड बैठक में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। इसमें उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में महिला यात्रियों को शहर में संचालित सभी बसों में नि:शुल्क यात्रा की सौगात दी जाएगी। इसे उन्होंने माताओं और बहनों को रक्षाबंधन का उपहार बताया। बैठक में संभागायुक्त एवं बोर्ड उपाध्यक्ष दीपक सिंह, कलेक्टर एवं निदेशक आशीष सिंह, नगर निगम कमिश्नर एवं प्रबंध निदेशक शिवम वर्मा, आईडीए सीईओ रामप्रकाश अहिरवार, AICTSL सीईओ दिव्यांक सिंह सहित अन्य कई वरिष्ठ अफसर मौजूद थे।  50 नई इलेक्ट्रिक बसें चलाएंगे इंदौर में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में इस माह 50 नई इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतरेंगी। वर्तमान में शहर में बीआरटीएस कॉरिडोर पर 30 और अन्य मार्गों पर 50 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत प्रथम चरण में इंदौर को 150 इलेक्ट्रिक बसों की सौगात मिलने जा रही है। इन बसों के संचालन के लिए आईएसबीटी नायता मुंडला और देवास नाका पर दो नए इलेक्ट्रिक बस डिपो तैयार किए जाएंगे, जिसकी वित्तीय सहायता केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बस सेवा का होगा शुभारंभ इंदौर से आसपास के शहरों के लिए जल्द ही 26 इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। ये बसें इंदौर से उज्जैन, भोपाल, खरगोन, सेंधवा, खंडवा, बुरहानपुर, रतलाम, धार-मांडव और महेश्वर तक चलेंगी। निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। पीपीपी मॉडल पर भविष्य की इलेक्ट्रिक बसों के लिए ऑपर्च्युनिटी चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। नई एसी लग्जरी बस सेवाएं भी होंगी शुरू महापौर ने बताया कि पूर्व में की गई निविदा प्रक्रिया के आधार पर अब इंदौर से कोटा, मंदसौर होते हुए नीमच, जीरापुर और सोयत कला तक एसी बस सेवा भी प्रारंभ की जाएगी। पूर्व में आमंत्रित निविदा प्रक्रिया में कोई बोलीदाता न मिलने के कारण अब निगम स्वयं डबल डेकर बसें खरीदेगा। राष्ट्रीय स्तर पर जुड़ने की तैयारी, फिर से होंगी निविदाएं इंदौर को राष्ट्रीय मार्गों से जोड़ने के लिए कई शहरों के लिए फिर से निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। जिसमें राजकोट (वाया सूरत), रायपुर (वाया नागपुर), जयपुर, ग्वालियर, कानपुर (वाया झांसी), अहमदाबाद, उदयपुर, पुणे, मुंबई, अयोध्या, वाराणसी, नई दिल्ली, दमोह, बांसवाड़ा, भुसावल और शहडोल शामिल है। ई-बाइक से लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती मौजूदा माय बाइक प्रोजेक्ट के तहत शहर में 1500 साइकिलें सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। भविष्य में ई-बाइक सेवा भी शुरू करने पर विचार किया गया। AICTSL को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास AICTSL ने एबी रोड पर 42 यूनिपोल पर विज्ञापन के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। जल्द ही डिपो पर भी यूनिपोल लगाए जाएंगे और उन पर विज्ञापन के लिए बोली प्रक्रिया शुरू होगी।

मध्य प्रदेश में विज्ञान बना बदलाव की गाड़ी, ‘साइंस ऑन व्हील्स’ से टूट रही रूढ़ियां, संवर रहा भविष्य

शहडोल मध्यप्रदेश के जनजातीय जिलों में अब विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने का मजबूत हथियार बन चुका है। शहडोल जिले के शिक्षक संतोष कुमार मिश्रा की अनोखी पहल 'साइंस ऑन व्हील्स' (Science on Wheels) न सिर्फ ग्रामीण बच्चों में वैज्ञानिक सोच जगा रही है, बल्कि समाज में गहराई से जमी कुप्रथाओं के खिलाफ जागरूकता की अलख भी जगा रही है। शहडोल जिला, जहां आज भी कई ग्रामीण इलाकों में झाड़-फूंक, दागना और बाल विवाह जैसी परंपराएं प्रचलित हैं, वहां शिक्षक संतोष कुमार मिश्रा ने ‘साइंस ऑन व्हील्स’ की शुरुआत की। इस पहल का मकसद था विज्ञान को कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकालकर गांव-गांव तक पहुंचाना।   ‘साइंस ऑन व्हील्स’ के अंतर्गत एक चलती-फिरती साइंस वैन के ज़रिए स्कूल, खेत, गांव और छात्रावासों में जाकर विज्ञान की बेसिक और दिलचस्प जानकारी दी जाती है। इसमें बच्चों को विज्ञान के प्रयोग करवाए जाते हैं और उन्हें साइंस एंबेस्डर बनाया जाता है, ताकि वे अपने घर और समाज में वैज्ञानिक सोच फैला सकें। इस पहल की सबसे खास बात यह रही कि इसने बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया। जब ग्रामीण इलाकों की बच्चियों ने इन विज्ञान गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू किया, तो अभिभावकों को भी यह समझ में आने लगा कि उनकी बेटियां भी होशियार हैं। परिणामस्वरूप कई बच्चियों का बाल विवाह टला और वे स्कूल में बने रहने लगीं। ‘साइंस ऑन व्हील्स’ सिर्फ पढ़ाई का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह बेटियों को आत्मविश्वासी, जागरूक और स्वतंत्र सोच वाला नागरिक बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ है। अभिभावकों के साथ संवाद कर उन्हें बेटियों की शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही उन्हें यह बताया गया कि झाड़-फूंक, दागना जैसी परंपराएं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गलत हैं और इनसे दूर रहना चाहिए।

बाघों की सुरक्षा बनाम गांवों का अस्तित्व: क्या खाली कराए जाएंगे जंगल के किनारे बसे गांव?

उमरिया मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में इजाफा तो हो रहा है, लेकिन उनके प्राकृतिक आवास यानी जंगल सिकुड़ते जा रहे हैं। कारण है जंगल के भीतर बसे सैकड़ों गांव, जो न सिर्फ जगह घेर रहे हैं, बल्कि जंगल के संतुलन को भी प्रभावित कर रहे हैं। अब तक राज्य के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों से 200 से अधिक गांवों को विस्थापित किया जा चुका है। बावजूद इसके, इतने ही गांव अभी भी जंगलों के भीतर बसे हुए हैं। इनके कारण बाघों को उनके लिए जरूरी क्षेत्रफल नहीं मिल पा रहा है। साथ ही, इन गांवों की वजह से घास के मैदान विकसित नहीं हो पा रहे हैं, जो शाकाहारी वन्य जीवों के लिए जरूरी हैं।   घास के मैदान क्यों जरूरी हैं? जंगल के अंदर जब घास के मैदान नहीं बनते, तो शाकाहारी प्राणियों की संख्या कम हो जाती है, जिससे बाघ जंगल के कोर जोन से बाहर आकर गांवों की ओर बढ़ते हैं। वहां वे मवेशियों का शिकार करते हैं, जिससे मानव-पशु संघर्ष बढ़ता है। वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट डॉ. राकेश शुक्ला के अनुसार, जब तक जंगल के अंदर बसे गांवों को पूरी तरह से हटाया नहीं जाता, तब तक बाघों को उनका आवश्यक क्षेत्र नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी हाल ही में यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार विस्थापन प्रक्रिया को तेज करेगी और इसके लिए धन की कोई कमी नहीं होगी। सबसे ज्यादा प्रभावित टाइगर रिजर्व पन्ना टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा गांव बसे हैं। बांधवगढ़ के कोर जोन में 10 गांव हैं। पेंच टाइगर रिजर्व में 44, संजय टाइगर रिजर्व में 34, वीरांगना रानी दुर्गावती में 81 और कान्हा में 8 गांव अब भी मौजूद हैं। क्या कहते हैं आंकड़े? प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश की कोर और बफर जोन में गांव बसे हैं। उदाहरण के तौर पर, बांधवगढ़ में 165, कान्हा में 129, पेंच में 123 और सतपुड़ा में 62 बाघ हैं। 

मौसम विभाग की बड़ी चेतावनी: कई राज्यों में 12 अगस्त तक भारी बारिश का खतरा

उत्तराखंड उत्तराखंड में इस समय मौसम लगातार खराब बना हुआ है और स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 6 से 12 अगस्त तक राज्य के सभी जिलों के लिए भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा कई जगहों पर गर्जना और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है। अगले सात दिनों का मौसम पूर्वानुमान 6 अगस्त: सभी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश की संभावना है। गरज-चमक और तेज बारिश के दौर भी रहेंगे। 7 अगस्त: देहरादून, पौड़ी, बागेश्वर, चम्पावत और नैनीताल जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। पूरे राज्य में गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। 8 अगस्त: उत्तरकाशी, देहरादून, पौड़ी, बागेश्वर, चम्पावत और नैनीताल में भारी बारिश हो सकती है। तेज बारिश के साथ बिजली गिरने के भी आसार हैं।   9 अगस्त: देहरादून और बागेश्वर में भारी बारिश की चेतावनी है। बाकी जिलों में भी गरज और तेज बारिश के दौर रहेंगे। 10 अगस्त: उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर जिलों में भारी बारिश की संभावना है। पूरे राज्य में आकाशीय बिजली और तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 11 और 12 अगस्त: सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज और बौछारें पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग की चेतावनी IMD ने बताया है कि भारी बारिश से राज्य में भूस्खलन, नदियों का जलस्तर बढ़ना, सड़कों के अवरुद्ध होने, और निचले इलाकों में जलभराव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हाल ही में धराली और हरिद्वार में ऐसे हालात देखे जा चुके हैं। लोगों के लिए जरूरी सलाह     नदी और नालों के किनारे जाने से बचें।     पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा न करें।     मौसम की अपडेट पर नज़र रखें और अफवाहों से दूर रहें।     बच्चे और बुजुर्ग घरों में सुरक्षित रहें।     किसान फसलों को बचाने के लिए तिरपाल आदि का उपयोग करें।     मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखें।     किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन या स्थानीय अधिकारियों से तुरंत संपर्क करें। प्रशासन सतर्क रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस जैसे त्योहारों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को बढ़ा दिया है। आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी की जा रही है।

भोपाल गैस त्रासदी: गंभीर बीमार पीड़ितों की अनदेखी पर अब हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

भोपाल  भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े एक अहम मामले की अब सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में होने जा रही है। यूनियन कार्बाइड गैस लीक से प्रभावित हजारों लोगों को गलत तरीके से मामूली चोट या अस्थायी विकलांगता बता कर मुआवजा कम दिए जाने का आरोप है। पीड़ित संगठनों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में की गई। अपील के बाद अब यह मामला जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचा है। यहां इसकी सुनवाई 11 अगस्त को होगी। गंभीर पीड़ितों को मामूली घायल बताकर मुआवजा घटा भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा समेत कई संगठनों ने आरोप लगाया है कि हजारों पीड़ितों को, जिनकी सेहत पर गैस रिसाव का गहरा असर हुआ था, उन्हें जानबूझकर अस्थायी विकलांगता या मामूली चोट की श्रेणी में डाल दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें नाममात्र का मुआवजा मिला। इससे न तो उनका इलाज ठीक से हो पाया और न ही वे अपनी पीड़ा के लिए न्याय पा सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा – हाईकोर्ट तय करे मामला पीड़ितों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि केंद्र सरकार यह जांच कराए कि किन पीड़ितों को गलत तरीके से वर्गीकृत किया गया है। उन्हें उचित मुआवजे की श्रेणी में रखा जाए ताकि उनका इलाज और पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा था कि हाईकोर्ट इस मुद्दे का फैसला तथ्यों के आधार पर करे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि पीड़ितों को अपनी बात रखने का उचित मंच मिलना चाहिए। भोपाल गैस त्रासदी पीड़ित मुआवजा मामले पर एक नजर… भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े मामले की सुनवाई अब 11 अगस्त को जबलपुर हाईकोर्ट में होगी, जिसमें पीड़ितों को कम मुआवजा दिए जाने के आरोपों की जांच की जाएगी। गैस लीक से गंभीर रूप से प्रभावित लोगों को जानबूझकर मामूली चोट या अस्थायी विकलांगता की श्रेणी में डालकर उन्हें कम मुआवजा दिया गया, जिससे उनका इलाज और पुनर्वास प्रभावित हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच हाईकोर्ट को सौंपते हुए कहा कि पीड़ितों को न्याय पाने का उचित मंच मिलना चाहिए और उचित मुआवजा मिलना चाहिए। पीड़ित संगठनों का आरोप है कि कैंसर, किडनी फेलियर जैसे गंभीर मामलों वाले लोगों को भी मामूली चोट का शिकार बताया गया, जबकि उन्हें स्थायी विकलांगता की श्रेणी में होना चाहिए था। पीड़ित संगठनों ने सरकार की चूक और सिस्टम की बेरुखी को उजागर किया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में मुआवजा अपर्याप्त होने पर जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डाली थी। आज 6 अगस्त को यह मामला जबलपुर हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में लिस्ट हुआ था, लेकिन चीफ जस्टिस की बेंच अनुपलब्ध होने के कारण जस्टिस अतुल श्रीधर की डिविजनल बेंच ने इसे अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तारीख दे दी है। अब इसी दिन यह तय होगा कि आगे केस की सुनवाई कैसे चलेगी। कैंसर और किडनी फेलियर के मरीज भी गिनाए गए मामूली पीड़ितों में! पीड़ित संगठनों ने अदालत को बताया कि उनके पास ऐसे दर्जनों मामलों के प्रमाण हैं। इनमें मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस के कारण कैंसर, किडनी फेलियर और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भी मामूली या अस्थायी चोट का पीड़ित बताया गया है। उनका कहना है कि इन्हें स्थायी विकलांगता की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए था।   सरकार की चूक, सिस्टम की बेरुखी याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि जुलाई 2023 में जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की सुधारात्मक याचिकाएं खारिज की थीं, तो यह स्पष्ट कर दिया गया था कि यदि मुआवजा अपर्याप्त है, तो इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की ही होगी। पीड़ित अब इस नई कानूनी लड़ाई में उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उन्हें देर से ही सही, लेकिन न्याय जरूर मिलेगा।

तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने पर चर्चा, मंत्री परमार ने की बैठक की अगुवाई

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में बुधवार को विधानसभा स्थित समिति कक्ष में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग की परामर्शदात्री समिति की बैठक हुई। बैठक में विधायक सर्वश्री हरिबब्बू राय, इंजीनियर श्री नरेंद्र प्रजापति, श्री अशोक रोहाणी, डॉ तेज बहादुर चौहान, डॉ राजेंद्र पाण्डेय (राजू भैया), प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार श्री मनीष सिंह, संचालक कौशल विकास श्री गिरीश शर्मा और आयुक्त तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार श्री अवधेश शर्मा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में शासकीय योजनाओं, गतिविधियों एवं कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने के सुझाव विधायकों ने दिये। विधायकों ने स्थानीय उद्योग जगत की मांग एवं स्थानीय रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप संस्थान एवं पाठ्क्रमों के संचालन के सम्बन्ध में भी महत्वपूर्ण परामर्श दिए। इंजीनियरिंग, पॉलीटेक्निक एवं आईटीआई संस्थानों में अधिकाधिक सीट भरने के लिए आवश्यक सुझाव भी विधायकों ने दिए। तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री परमार ने विधायकगणों से प्राप्त विभिन्न सुझावों के अनुरूप आवश्यक कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन के लिए सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में पिछली बैठक का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। इंजीनियरिंग, पॉलीटेक्निक एवं आईटीआई महाविद्यालयों में प्रवेश का अद्यतन परिदृश्य, तकनीकी शिक्षा, कौशल एवं रोजगार संचालनालय अंतर्गत संचालित विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की अद्यतन स्थिति, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय एवं ग्लोबल स्किल्स पार्क की गतिविधियों, संस्थान एवं पाठ्यक्रम, विभिन्न छात्रवृत्ति, पदपूर्ति की प्रकिया एवं भर्तियों की अद्यतन स्थिति, विभागीय कार्यों एवं नवाचारों पर क्रियान्वयन, संकल्प पत्र के अनुरूप विभागीय क्रियान्वयन की प्रगति, विभिन्न बोर्ड अंतर्गत संचालित योजनाओं, विभिन्न इंटर्नशिप योजनाओं, स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन, रोजगार मेला एवं विद्यार्थियों के अध्ययन-अध्यापन और रोजगार से जुड़े विविध विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। स्थानीय एवं उद्योग जगत की मांग एवं आवश्यकतानुरूप संस्थान एवं पाठ्यक्रमों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।  

पाकिस्तान में मानसून की मार, जनजीवन अस्त-व्यस्त, बाढ़ को लेकर रेड अलर्ट

नई दिल्ली पाकिस्तान में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने कई क्षेत्रों में बाढ़ की चेतावनी जारी की है। ये चेतावनी ऐसे समय में जारी की गई है जब 5 से 8 अगस्त तक पाकिस्तान के ऊपरी और मध्य भागों में तीव्र मानसून के प्रभाव की आशंका है। इसके अलावा उत्तरी पाकिस्तान पर मानसूनी धाराओं और पश्चिमी द्रोणिका के प्रभाव से भारी बारिश होने की संभावना है। भारी बारिश के कारण पाकिस्तान में बाढ़ का अलर्ट भारी बारिश की वजह से सिंधु, चिनाब और रावी सहित पाकिस्तान की सभी प्रमुख नदियों में जल स्तर बढ़ने की संभावना है, जबकि रावी और चिनाब की सहायक नदियों में बाढ़ की संभावना जताई गई है। दूसरी तरफ, तरबेला, गुड्डू और सुक्कुर बैराज में बाढ़ फिलहाल निम्न स्तर पर है, लेकिन लगातार बारिश चश्मा और ताउंसा को भी निम्न बाढ़ स्तर की ओर धकेल सकती है। इसके अलावा, नौशेरा में काबुल नदी, स्वात नदी और पंजकोरा और उनसे जुड़ी धाराओं और नालों में लगातार बारिश के कारण जल स्तर में वृद्धि देखी जा सकती है। बारिश से बढ़ सकता है बाधों का जल स्तर मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में, हुंजा, शिगर और घांचे जिलों में जलधाराओं के नेटवर्क में पानी का प्रवाह सहायक नदियों के साथ संभावित बाढ़ का कारण बन सकता है। साथ ही बांधों में मौजूदा भंडारण से संकेत मिलता है कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में तरबेला जलाशय 94% पर है और भारी बारिश के कारण इसका जल स्तर बढ़ने की संभावना है। एनडीएमए लोगों के सतर्क रहने की चेतावनी दी एनडीएमए ने नदियों और नालों के पास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा है, क्योंकि रात में भारी बारिश के कारण अचानक जल स्तर बढ़ सकता है। बारिश के कारण अबतक कितना नुकसान? एनडीएमए की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 जून से अब तक मूसलाधार मानसूनी बारिश के कारण 140 बच्चों सहित कम से कम 299 लोगों की जान चली गई और 715 अन्य घायल हो गए। रिपोर्ट की मानें तो बारिश के कारण होने वाली घटनाओं में 715 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 239 बच्चे, 204 महिलाएं और 272 पुरुष शामिल हैं। अबतक, अचानक आई बाढ़ और भारी बारिश के कारण कुल 1,676 घर क्षतिग्रस्त हो गए और 428 जानवर मारे गए। इस बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में व्यापक विनाश हुआ है और स्थानीय समुदायों को भारी नुकसान पहुंचा है।

क्या ट्रंप की नीति से अमेरिका खुद फंसेगा जाल में? भारत नहीं, खुद पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की सदस्य शामिका रवि ने कहा है कि अमेरिका की तरफ से टैरिफ में किसी भी तरह की वृद्धि का बोझ कम आया वाले अमेरिकी परिवारों पर पड़ेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि भारत एक अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं रहा। उन्होंने एलान किया कि वह अगले 24 घंटों में भारत पर टैरिफ में काफी वृद्धि करेंगे। ट्रंप का टैरिफ वास्तव में वैश्विक बाजारों में उपलब्ध सस्ते सामानों पर एक कर है, जिसका बोझ कम आय वाले अमेरिकी परिवारों पर पड़ेगा। रवि ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'ये टैरिफ अंतत: कम आय वाले अमेरिकी परिवारों से वहां की सरकार को हस्तांतरित होते हैं।'   भारत पर 25 फीसदी टैरिफ एक अगस्त को ट्रंप ने पारस्परिक टैरिफ दरों में संशोधन शीर्षक से एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें भारत के लिए 25 प्रतिशत की भारी वृद्धि सहित पांच दर्जन से अधिक देशों के लिए टैरिफ बढ़ा दिया गया था। हालांकि, कार्यकारी आदेश में उस जुर्माने का उल्लेख नहीं था, जो ट्रंप ने कहा था कि भारत को रूसी सैन्य उपकरण और ऊर्जा की खरीद के कारण चुकाना होगा। पिछले हफ्ते, ट्रंप ने भारत और रूस के घनिष्ठ संबंधों पर तीखा हमला करते हुए दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मृत बताया था। इस टिप्पणी ने नई दिल्ली को यह कहने के लिए प्रेरित किया कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है भारत की जीडीपी पर नहीं पड़ेगा असर     उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई के एक अध्ययन के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर घोषित 25 प्रतिशत टैरिफ का देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर प्रभाव नगण्य रहेगा। संगठन ने कहा कि इसकी वजह यह है कि इससे अमेरिका को केवल 8.1 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा। अमेरिका द्वारा घोषित टैरिफ गुरुवार से प्रभावी होने की संभावना है।     पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा जारी इस शोध पत्र में अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कई उपायों की भी सिफारिश की गई है। पीएचडीसीसीआई के प्रेसिडेंट हेमंत जैन ने कहा, 'हमारा विश्लेषण दर्शाता है कि अमेरिका द्वारा भारत पर घोषित 25 प्रतिशत टैरिफ के परिणामस्वरूप भारत के कुल वैश्विक व्यापारिक निर्यात पर केवल 1.87 प्रतिशत और भारत के सकल घरेलू उत्पाद पर बहुत मामूली 0.19 प्रतिशत का प्रभाव पड़ेगा।'     अध्ययन में कहा गया है कि 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर (भारत के कुल वैश्विक निर्यात का 1.87 प्रतिशत) का निर्यात किया था और जिस तरह के टैरिफ का एलान किया गया है, उससे 8.1 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा। टैरिफ का असर जिन सेक्टर के निर्यात पर पड़ेगा, उसमें इंजीनियरिंग सामान पर 1.8 अरब डॉलर का, रत्न एवं आभूषण पर 93.2 करोड़ डॉलर का और सिले-सिलाए कपड़ों पर 50 करोड़ डॉलर का असर पड़ेगा।