एम्स भोपाल का परिसर भौगोलिक रूप से विस्तृत है और अस्पताल व शैक्षणिक भवनों की संरचना कई स्थानों पर एक जैसी है। इसके कारण मरीजों, परिजनों और आगंतुकों को सही विभाग, वार्ड या कक्ष तक पहुँचने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कई बार लोग रास्ता न समझ पाने के कारण असहज महसूस करते हैं और संस्थान आने को लेकर झिझक भी अनुभव करते हैं।
इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए स्मार्ट नेविगेशन सिस्टम दो स्वरूपों में विकसित किया जा रहा है। पहला वेब-आधारित होगा, जिसमें परिसर के प्रमुख प्रवेश द्वारों और महत्वपूर्ण स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। आगंतुक इन क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन कर इंटरैक्टिव मानचित्र प्राप्त कर सकेंगे, जो वर्तमान स्थान से इच्छित स्थान तक चरणबद्ध दिशा-निर्देशन देगा।
दूसरा स्वरूप मोबाइल ऐप आधारित होगा। उपयोगकर्ता विशेष ऐप डाउनलोड कर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे। भवनों के बीच मार्गदर्शन के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जबकि भवनों के अंदर, जहाँ जीपीएस की सटीकता सीमित होती है, लगभग हर 15 मीटर पर रिले उपकरण लगाए जाएंगे। ये उपकरण सटीक दिशा-निर्देशन सुनिश्चित करेंगे।
परियोजना को प्रारंभिक तौर पर एक माह के पायलट चरण में लागू किया जाएगा। इस दौरान इसकी व्यवहार्यता, उपयोगकर्ता अनुभव और प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाएगा। सफल परिणाम मिलने पर इसे पूरे परिसर में लागू किया जाएगा।
संस्थान के अनुसार, इस पहल से मरीजों का समय बचेगा, बार-बार रास्ता पूछने की आवश्यकता कम होगी और परिसर में आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी। साथ ही बड़े और जटिल परिसर के कारण होने वाली झिझक भी कम होगी।
यह पहल डिजिटल परिवर्तन और मरीज-केंद्रित नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे एम्स भोपाल आधुनिक और स्मार्ट स्वास्थ्य अवसंरचना अपनाने वाले अग्रणी संस्थानों में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।