भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल (एम्स भोपाल) ने साक्ष्य-आधारित चिकित्सा दिशा-निर्देशों के विकास में देशभर के 27 तकनीकी संसाधन केंद्रों के बीच उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए दूसरा (रजत) स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि संस्थान की अनुसंधान क्षमता, शैक्षणिक उत्कृष्टता और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस मूल्यांकन प्रक्रिया का उद्देश्य चिकित्सा संस्थानों द्वारा विकसित साक्ष्य-आधारित (Evidence-Based) दिशा-निर्देशों की गुणवत्ता, उपयोगिता और प्रभावशीलता का आकलन करना था। एम्स भोपाल की विशेषज्ञ टीम ने वैज्ञानिक शोध, विस्तृत डेटा विश्लेषण तथा बहु-विषयक सहयोग के माध्यम से दिशा-निर्देशों का विकास किया, जिन्हें उच्च स्तर की सराहना प्राप्त हुई।
संस्थान प्रशासन ने इस उपलब्धि को टीमवर्क और सतत प्रयासों का परिणाम बताया। अधिकारियों के अनुसार, साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धति रोगियों को सुरक्षित, प्रभावी और मानकीकृत उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह उपलब्धि न केवल एम्स भोपाल बल्कि मध्यप्रदेश के लिए भी गौरव का विषय है।
एम्स भोपाल के निदेशक ने सभी संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं एवं कर्मचारियों को इस सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि संस्थान भविष्य में भी अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।
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एम्स भोपाल की टीम साक्ष्य-आधारित चिकित्सा दिशा-निर्देशों के विकास में राष्ट्रीय स्तर पर रजत स्थान प्राप्त करने के उपलक्ष्य में।