भोपाल, 17 फरवरी 2026। All India Institute of Medical Sciences Bhopal (एम्स भोपाल) के बाल रोग विभाग ने अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के अवसर पर जागरूकता अभियान, शपथ कार्यक्रम और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने समय पर निदान और नियमित उपचार की आवश्यकता पर बल देते हुए धार्मिक एवं वैकल्पिक उपचार से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम डीन (अकादमिक) प्रो. रजनीश जोशी की उपस्थिति में आयोजित हुआ। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें बाल कैंसर सर्वाइवर्स ने भी सहभागिता की। इसके बाद चिकित्सकों, नर्सों और कर्मचारियों ने बाल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने की शपथ ली।
बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. शिखा मलिक ने बताया कि संस्थान में कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर के नेतृत्व में बच्चों के लिए समर्पित उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि उपचार पूरा होने के बाद भी नियमित फॉलो-अप अत्यंत आवश्यक है। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विकास गुप्ता ने चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और गैर-सरकारी संस्था कैनकिड्स-किड्सकैन सहित सभी सहयोगी संस्थाओं के प्रयासों की सराहना की।
बाल रक्त एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र चौधरी ने जानकारी दी कि पिछले सात वर्षों में बाल ऑन्कोलॉजी क्लिनिक में लगभग 1,250 बच्चों का पंजीकरण हुआ है। वर्तमान में 300 बच्चे उपचाराधीन हैं, जबकि 200 से अधिक बच्चे उपचार पूरा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में धार्मिक या वैकल्पिक उपचार संबंधी भ्रांतियों के कारण मरीज इलाज बीच में छोड़ देते हैं, जो एक गंभीर चुनौती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि World Health Organization (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 2030 तक बाल कैंसर में जीवित रहने की दर को 60 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समय पर उपचार और जागरूकता बेहद जरूरी है।
यूकार्यक्रम के दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कैंसर से जूझते हुए भी शैक्षणिक उत्कृष्टता हासिल करने वाले आयुषी साहू, करण बैसारे और राज बाल्मीकि को सम्मानित किया गया। अंत में विभाग के वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने ऐसे जागरूकता कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने का संकल्प दोहराया, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को समय पर उपचार मिल सके और उनकी जीवित रहने की संभावना बढ़ाई जा सके।