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नंबर वन आने की होड़,पानी से गई जाने कोई मुद्दा नहीं

नंबर वन आने की होड़,पानी से गई जाने कोई मुद्दा नहीं

इंदौर के भागीरथपुरा की स्थिति बेहद चिंताजनक और संवेदनशील है। एक ओर शहर लगातार स्वच्छता रैंकिंग में शीर्ष स्थान पाने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर दूषित पानी से हो रही मौतों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य बिंदु:दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी:हाल ही में 75 वर्षीय शालिग्राम ठाकुर और 2 वर्षीय रिया की मौत हो गई। इससे पहले भी कई लोगों की जान जा चुकी है। मौतों की संख्या पर अस्पष्टता:करीब 2 महीने बीत जाने के बाद भी सरकार न तो मौतों की सही संख्या सार्वजनिक कर पाई है और न ही स्पष्ट रूप से मृत्यु का कारण बता पाई है। हाईकोर्ट का हस्तक्षेप:जनहित याचिका के बाद हाईकोर्ट ने एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया है, जो मामले की जांच करेगा। नगर निगम का दावा:निगम का कहना है कि पानी की लाइन बदलने का काम अंतिम चरण में है और नर्मदा जल की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। प्रशासन के अनुसार हालात सामान्य हैं। जमीनी हकीकत:स्थानीय लोग अब भी नलों से आने वाले पानी को पीने से डर रहे हैं, जिससे साफ है कि भरोसा बहाल नहीं हो पाया है। स्वच्छता रैंकिंग पर फोकस:निगम ने अब फिर से स्वच्छता सर्वेक्षण में पहले स्थान पर आने की तैयारी शुरू कर दी है। वार्ड स्तर पर अभियान की योजना और नया स्वच्छता गीत तैयार किया जा रहा है। बड़ा सवालजब एक इलाके में दूषित पानी से मौतें हो रही हों, तब क्या स्वच्छता रैंकिंग को प्राथमिकता देना उचित है?स्वच्छता सिर्फ सड़कों की सफाई या कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षित पेयजल भी इसका अहम हिस्सा है। भागीरथपुरा के हालात यह संकेत देते हैं कि जमीनी समस्याओं के समाधान के बिना केवल रैंकिंग पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होगा। जनता का भरोसा तभी लौटेगा जब पारदर्शिता, जवाबदेही और ठोस कार्रवाई दिखाई देगी।

राष्ट्रगीत में हुए बदलाव

राष्ट्रगीत में हुए बदलाव

दिल्ली-सरकार ने बड़ा निर्देश जारी किया केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) ने वंदे मातरम् को लेकर नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। अब सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और महत्वपूर्ण ऑफिशियल अवसरों पर राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंद बजाना या गाना अनिवार्य होगा। 1= 6 छंदों वाला यह संस्करण लगभग 3 मिनट 10 सेकंड का है, और इसे राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ से पहले प्रस्तुत किया जाएगा जब दोनों को एक साथ कार्यक्रम में बजाया/गाया जाता है। 2=जब ‘वंदे मातरम्’ बज रहा/गाया जा रहा हो, तो सभी उपस्थित लोगों को खड़े होकर सम्मान दिखाना आवश्यक है (जैसे राष्ट्रगान के लिए होता है)। 3= आदेश में कई महत्वपूर्ण सरकारी अवसरों का उल्लेख है — जैसे तिरंगे का फहराना, राष्ट्रपति या राज्यपाल के आगमन-प्रस्थान, और अन्य सरकारी समारोह — जहाँ अब छह छंद अनिवार्य होंगे। 4= यह फैसला वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने के अवसर पर लिया गया है और यह वंशानुगत अधिकारियों, राज्य सरकारों और संवैधानिक संस्थाओं को भेजा गया है। यह पहली बार है कि “वंदे मातरम्” के लिए एक स्पष्ट औपचारिक प्रोटोकॉल और समय-सीमा निर्धारित किया गया है; पहले केवल राष्ट्रगान (जन गण मन) के लिए ही ऐसा नियम मौजूद था। खबरों में यह भी बताया गया है कि सिनेमा हॉल आदि जैसे विशेष स्थानों पर गीत बजने पर खड़े होना अनिवार्य नहीं होगा, ताकि प्रदर्शन में व्यवधान न आए। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि पिछले साल कांग्रेस और बीजेपी के बीच इस विषय पर राजनीतिक बहस भी हुई थी, लेकिन सरकार ने नियम जारी कर पूरी छह-छंद वाली प्रस्तुति का निर्णय लिया है। क्या बदल रहा है? 🇮🇳 पहले: आमतौर पर वंदे मातरम् के केवल पहले दो छंद ही सरकारी कार्यक्रमों में गाए जाते थे। 📢 अब: सभी छह छंद का गायन/वादन अनिवार्य, 3:10 मिनट का पूरा संस्करण, और राष्ट्रगान से पहले प्रदर्शन। 🙋‍♂️ आचरण: खड़े होना अनिवार्य (कुछ विशेष स्थितियों को छोड़कर)।