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ट्रेन के यात्रियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़

इंदौर प्रयागराज 14115 ट्रेन में नियमों के विरुद्ध बिक रही पानी की बॉटल भोपाल – कुछ दिनों पहले इंदौर के बाहगीरात पूरा में दूषित पानी से कई लोगों की जान चली गई थी उस घटना से भी शायद रेलवे मंत्रालय ने कोई सीख नहीं ली अभी भी ट्रेनों में रेल नीर यात्रियों को मिल तो रहा है लेकिन इसके साथ साथ अन्य ब्रांड की पानी बॉटल भी धड़ल्ले से बेची जा रहे है ।भारतीय रेलवे की ट्रेनों में निर्धारित नियमों के विरुद्ध पानी की बोतलें बेचे जाने का मामला सामने आया है। यात्रियों का आरोप है कि ट्रेन के अंदर कुछ वेंडर तय कीमत से अधिक दर पर पानी बेच रहे हैं और कई मामलों में रेलवे द्वारा स्वीकृत ब्रांड के बजाय अन्य ब्रांड की बोतलें उपलब्ध कराई जा रही हैं। रेलवे के नियमों के अनुसार ट्रेनों में मुख्य रूप से Rail Neer ब्रांड का पैकेज्ड पेयजल बेचा जाना चाहिए। इसकी 1 लीटर बोतल की निर्धारित अधिकतम कीमत ₹14 तथा 500 मिलीलीटर की बोतल ₹9 तय की गई है। यदि Rail Neer उपलब्ध न हो, तो रेलवे द्वारा स्वीकृत अन्य ब्रांड भी इसी निर्धारित मूल्य पर ही बेचे जा सकते हैं। हालांकि कई यात्रियों का कहना है कि कुछ वेंडर 1 लीटर पानी की बोतल ₹20 तक में बेच रहे हैं। कुछ शिकायतों में यह भी सामने आया है कि बिना सील की बोतलें या अनधिकृत ब्रांड का पानी बेचा जा रहा है, जो रेलवे नियमों का उल्लंघन है। रेलवे सूत्रों के अनुसार अधिक कीमत वसूलना या बिना अनुमति के उत्पाद बेचना दंडनीय है। ऐसे मामलों में संबंधित वेंडर पर जुर्माना लगाया जा सकता है और अनुबंध रद्द करने की कार्रवाई भी संभव है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यदि ट्रेन में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूली जाए या अनधिकृत पानी बेचा जाए तो वे तुरंत रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच कर कार्रवाई की जाती है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे को नियमित जांच अभियान चलाकर इस तरह की अनियमितताओं पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए, ताकि यात्रियों को निर्धारित दर पर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके।

विश्व जन्मजात दोष दिवस

विश्व जन्मजात दोष दिवस

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल ने विश्व जन्मजात हृदय दोष जागरूकता दिवस पर दिया समय पर पहचान और उपचार का संदेशभोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल (एम्स भोपाल) ने विश्व जन्मजात हृदय दोष जागरूकता दिवस के अवसर पर लोगों को जन्मजात हृदय रोगों के प्रति जागरूक करते हुए समय पर पहचान और उपचार का संदेश दिया। संस्थान के विशेषज्ञों ने बताया कि जन्मजात हृदय दोष (Congenital Heart Disease) ऐसे हृदय संबंधी विकार हैं जो शिशु में जन्म के समय से मौजूद होते हैं। चिकित्सकों के अनुसार, यदि नवजात शिशु में सांस लेने में कठिनाई, त्वचा या होंठों का नीला पड़ना, वजन न बढ़ना, अत्यधिक थकान या बार-बार निमोनिया जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। एम्स भोपाल के विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं और सर्जरी की मदद से अधिकांश जन्मजात हृदय दोषों का सफल उपचार संभव है। कई मामलों में शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर दवा और नियमित निगरानी से भी स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। संस्थान ने गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसवपूर्व जांच कराने और जन्म के बाद नवजात की अनिवार्य स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी। साथ ही अभिभावकों से अपील की गई कि वे किसी भी संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज न करें। इस अवसर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विशेषज्ञों ने कहा कि सही समय पर निदान और उचित उपचार से जन्मजात हृदय दोष से पीड़ित बच्चों का जीवन सुरक्षित और स्वस्थ बनाया जा सकता है।