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रूस से तेल पर भारत अडिग, टैरिफ वॉर के बीच ट्रंप को मिला करारा जवाब

नई दिल्ली भारत ने अमेरिका की टैरिफ वाली कार्रवाईयों को नजरअंदाज करते हुए अपने पुराने और भरोसेमंद सहयोगी रूस से तेल की खरीद जारी रखने का फैसला किया है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारत की तेल रिफाइनरियां रूसी कंपनियों से तेल प्राप्त करना जारी रखे हुए हैं। उनके आपूर्ति संबंधी निर्णय कीमत, कच्चे तेल की गुणवत्ता, भंडार, रसद और अन्य आर्थिक कारकों पर निर्भर होते हैं। सूत्रों के अनुसार, रूसी तेल पर कभी कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। इसके बजाय, G7 और यूरोपीय संघ (EU) द्वारा एक मूल्य सीमा व्यवस्था लागू की गई थी ताकि रूस की आय को सीमित करते हुए वैश्विक आपूर्ति को जारी रखा जा सके। भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने इस फ्रेमवर्क के तहत 60 डॉलर प्रति बैरल की अधिकतम सीमा का सख्ती से पालन किया है। अब EU ने इसे घटाकर 47.6 डॉलर प्रति बैरल करने की सिफारिश की है, जिसे सितंबर से लागू किया जाएगा। भारत ने वैश्विक तेल संकट को टाला मार्च 2022 में जब रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में अफरातफरी मची थी, तब ब्रेंट क्रूड की कीमतें 137 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इसी दौरान भारत ने रणनीतिक निर्णय लेते हुए रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद शुरू की, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में संतुलन बना रहा और महंगाई को काबू में रखने में मदद मिली। सूत्रों के अनुसार, अगर भारत ने रूसी तेल न खरीदा होता और OPEC+ देशों की उत्पादन कटौती (5.86 mb/d) भी जारी रहती, तो तेल की कीमतें 137 डॉलर से भी ऊपर जा सकती थीं। इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई और ऊर्जा संकट और गहरा जाता। भारत ने सिर्फ अपने ऊर्जा हितों की रक्षा नहीं की बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाई। इस दौरान भारत ने ईरान और वेनेज़ुएला जैसे उन देशों से तेल नहीं खरीदा, जिन पर वास्तव में अमेरिका के प्रतिबंध लागू हैं।

अखिलेश यादव का बीजेपी पर वार – ‘शिक्षा से दुश्मनी कर रही है सरकार’

लखनऊ सपा प्रमुख अखिलेश यादव स्कूलों के मर्जर को लेकर भाजपा सरकार पर लगातार हमलावर है. अखिलेश यादव ने शुक्रवार को करारा हमला बोला था. अखिलेश यादव ने कहा था कि शिक्षा का अधिकार अखंड होता है और रहेगा. प्राइमरी स्कूलों को बंद करने जा रही भाजपा सरकार का नया फरमान उसकी शिक्षा विरोधी नीति की नैतिक हार है. यह पीडीए पाठशाला आंदोलन की महाजीत है. अब अखिलेश ने एक बार फिर से भाजपा पर निशाना साधा है. अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा है कि ‘उत्तर प्रदेश की जनता समझ गई है कि स्कूल बंद करना दरअसल पीडीए समाज के खिलाफ भाजपा की एक बहुत बड़ी साजिश है. जिससे एकतरफ पीडीए समाज के लोग पढ़ न पाएं और मानसिक रूप से भाजपा का विरोध न कर पाएं, दूसरी तरफ इन स्कूलों में बनने वाले बूथ न बन पाएं. जिससे पीडीए समाज वोट न डाल सके. भाजपा का ये सामाजिक-मानसिक और राजनीतिक षड्यंत्र हम कभी सफल नहीं होने देंगे. भाजपा जाए तो शिक्षा आए.’ बता दें कि अखिलेश यादव पहले भी कह चुके हैं कि भाजपा चाहती है कि गरीब, पिछड़े, दलित शिक्षा से दूर रहें. अगर वे पढ़ लिख जाएंगे तो भाजपा की गलत नीतियों का विरोध करेंगे और सवाल पूछेंगे. भाजपा सवालों से डरती है. लोगों को शिक्षित करने के बजाय उन्हें अशिक्षित बनाए रखना चाहती है.

मंगलमय हनुमानजी करते हैं मंगल दोष को दूर

मंगल दोष के प्रभाव स्वरूप घर में बिजली का सामान जल्दी जल्दी खराब होने लगता है, रक्त सम्बंधित बीमारियां होने लगती हैं। मंगल दोष से पीड़ित व्यक्ति में धैर्य की कमी होती है। यह आजमाएं:- -मंगल दोष से पीड़ित जातक को छोटे भाई बहनों का ख्याल रखना चाहिए। -मंगलवार के दिन हनुमानजी के चरण से सिन्दूर ले कर उसका टीका माथे पर लगाना चाहिए। -बंदरों को गुड़ और चने खिलाने चाहिए। -अपने घर में लाल पुष्प वाले पौधे या वृक्ष लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए। यह बहुत गलत और दोषपूर्ण भ्रान्ति या अवधारणा में प्रचलित है। की 28 वें वर्ष के बाद मांगलिक दोष नहीं रहता। ग्रहों का सेनापति मंगलदेव 28 वें वर्ष में अपना शुभ फल प्रदान करता है यह सत्य है किन्तु अपनी दशा अन्तर्दशा, प्रत्यंतर दशा या गोचर में कभी भी अपना अशुभ फल प्रगट कर सकता है। अतः 28 वें वर्ष के बाद मांगलिक दोष की समाप्ति या निवृति कभी नहीं होती। व्यर्थ की बातों या अफवाओं पर ध्यान ना देवें। मंगल दोष निवारण हेतु उपाय स्वरूप लाल वस्त्र ले कर उसमें दो मुठ्ठी मसूर की दाल बांधकर मंगलवार के दिन किसी भिखारी को दान करनी चाहिए और साथ ही समयानुसार उज्जैन आकर अंगारेश्वर महादेव पर गुलाल पूजन और भात पूजन करवानी चाहिए। मंगल दोष होने पर ये न करें:- -यदि कुंडली में आपका मंगल पीड़ित है तो आपको क्रोध नहीं करना चाहिए। -अपने आप पर नियंत्रण नहीं खोना चाहिए। -मंगल दोष से पीड़ित को किसी भी चीज में जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए और भौतिकता में लिप्त नहीं होना चाहिए। क्या आप मंगल दोष से प्रभावित है? यदि सोते समय आपकी आंखे थोड़ी थोड़ी खुली रहती है या आपका मुंह सोते वक्त खुला रहता है। सामने की तरफ सीधा देखने पर भी आंख का हीरा या कोर्निया थोड़ा उपर की तरफ हो या आंख के हिरे या कोर्निया की नीचे की सफेदी दिखती हो तो इसका मतलब आप मंगलीक है। ऐसे लोगो का मंगल कुंडली में 2, 4, 7, और 8 या 12वें घर में होता है। जिनका मंगल पीड़ित है उन्हें मंगलवार के दिन व्रत करना चाहिए और ब्राह्मण अथवा किसी गरीब व्यक्ति को भर पेट भोजन कराना चाहिए। मंगल दोष या मंगल पीड़ित जातक को उज्जैन आकर अंगारेश्वर महादेव पर भात पूजन, गुलाल और गुलाब पूजन से विशेष अभिषेक पूजन करवाना चाहिए, तत्काल चमत्कारिक परिणाम मिलते हैं। इसके साथ ही मंगल पीड़ित व्यक्ति के लिए प्रतिदिन 10 से 15 मिनट ध्यान करना उत्तम रहता है। मंगल दोष से पीड़ित व्यक्ति जब भी अपना घर बनवाये तो उसे घर में लाल पत्थर अवश्य लगवाना चाहिए।  

मतदाता सूची कार्य में जुटे कर्मचारियों को राहत, ECI ने बढ़ाया मानदेय

नई दिल्ली बिहार में चल रहे वोटर लिस्ट रिवीजन के बीच चुनाव आयोग ने बीएलओ समेत अन्य कर्मियों के मानदेय में दोगुना तक की बढ़ोतरी की है। बूथ लेवल पदाधिकारी (बीएलओ) को अब 6000 के बजाय 12000 रुपये मानदेय मिलेगा। वहीं, वोटर लिस्ट रिवीजन के काम के लिए उन्हें अलग से 6000 रुपये का विशेष भत्ता भी मिलता रहेगा। बीएलओ सुपरवाइजर के मानदेय को भी 12 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा वरीय अधिकारियों जैसे एईआरओ और ईआरओ को भी चुनाव आयोग भत्ता देगा। रिवीजन के काम के लिए जो बीएलओ को 1 हजार रुपये का अतिरिक्त मानदेय मिलता था, चुनाव आयोग ने उसे भी बढ़ाकर 2000 रुपये कर दिया है। इसके अलावा निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) को 30 हजार रुपये और सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (एईआरओ) को 25 हजार रुपए का मानदेय देने का निर्णय लिया गया है। इन्हें अब तक कोई भत्ता या मानदेय नहीं मिल रहा था। शनिवार को आयोग ने इस संबंध में दिए गए आदेश की जानकारी दी। बता दें कि बीते 10 सालों से बीएलओ और सुपरवाइजर के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी। नया मानदेय देश भर में लागू होगा। बिहार से शुरू हुआ वोटर लिस्ट रिवीजन का काम अन्य राज्यों में भी होगा, इसे देखते हुए आयोग ने यह फैसला लिया है। बिहार में बीएलओ को कुल 24 हजार मिलेंगे बिहार विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे वोटर लिस्ट रिवीजन के दौरान बीएलओ को कुल 24 हजार का मानदेय मिलेगा। चुनाव आयोग की ओर से 12000 मानदेय के साथ मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए अलग से 6000 रुपये विशेष भत्ता भी दिया जा रहा है। वहीं, बिहार की नीतीश सरकार ने भी पिछले महीने बीएलओ को एकमुश्त 6000 रुपये की राशि देने का ऐलान किया था। इस तरह बीएलओ को कुल 24 हजार मिलेंगे।

शाहरूख, मैसी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, रानी मुखर्जी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार

नई दिल्ली,  किंग खान के नाम से मशहूर शाहरूख खान और अभिनेता विक्रांत मैसी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता तथा रानी मुखर्जी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। राजधानी दिल्ली के नेशनल मीडिया सेंटर में शुक्रवार को 71वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की घोषणा की गई। शाहरुख खान और विक्रांत मैसी को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया है। शाहरुख को उनकी फिल्म 'जवान' और विक्रांत को '12वीं फेल' के लिए अवॉर्ड मिला है। रानी मुखर्जी को फिल्म मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। फिल्म ‘कटहल’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म के लिये चुना गया है। करण जौहर की ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ को संपूर्ण मनोरंजन के लिए सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। विधु विनोद चोपड़ा निर्देशित ‘12वीं फेल’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म चुना गया, जबकि ‘द केरला स्टोरी’ के लिए सुदीप्तो सेन ने सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवॉर्ड अपने नाम किया। सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार दिया गया। ‘सैम बहादुर’ को वेशभूषा और मेकअप के लिए भी सम्मानित किया गया। सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफी का पुरस्कार रॉकी और रॉनी की प्रेम कहानी (हिंदी) के लिये कोरियोग्राफर वैभवी मचेंट को मिला। फ्लॉवरिंग मैन को सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म का पुरस्कार; गॉड वल्चर एंड ह्यूमन को सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र का पुरस्कार मिला। विजयराघवन और मुथुपेट्टई सोमू भास्कर ने सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता तथा उर्वशी और जानकी बोडीवाला ने सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार जीता। हनु-मान को (एनिमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक) में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला। सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म का पुरस्कार गिद्ध द स्कैवेंजर को मिला। इससे पूर्व 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के निर्णायक मंडल ने आज वर्ष 2023 के विजेताओं की घोषणा की। इस घोषणा से पहले, फीचर फिल्म निर्णायक मंडल के अध्यक्ष आशुतोष गोवारिकर, गैर-फीचर फिल्म निर्णायक मंडल के अध्यक्ष श्री पी. शेषाद्रि, संयुक्त सचिव (फिल्म्स) डॉ. अजय नागभूषण एमएन ने वर्ष 2023 के 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के विजेताओं की सूची प्रस्तुत की। इस अवसर पर पीआईबी की महानिदेशक सुश्री मट्टू जे पी सिंह भी उपस्थित थीं। इस वर्ष पुरस्कारों के लिए कुल 332 फीचर फिल्म प्रविष्टियाँ, 115 गैर-फीचर फिल्म प्रविष्टियाँ, 27 पुस्तक प्रविष्टियाँ और 16 समीक्षक प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं।  

60 लाख नए सदस्य जोड़े, भाजपा नेताओं को मिला सम्मान, सीएम हाउस बना मेगा इवेंट का गवाह

रायपुर भारतीय जनता पार्टी में छत्तीसगढ़ से 60 लाख नए सदस्यों को जोड़ने पर भाजपा रायपुर में विशेष कार्यक्रम करने जा रही है। इस अभियान में सक्रिय रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं का CM साय सम्मान करेंगे। यह समारोह नवा रायपुर स्थित CM हाउस में होगा। इतनी बड़ी संख्या में नए सदस्य जुड़ने पर पार्टी इसे जश्न की तरह मनाएगी। पार्टी के आला नेताओं ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। सम्मान पाने वालों की लिस्ट में सांसद, विधायक, पार्षद, जिला संयोजक और कार्यकर्ता शामिल हैं। अब पढ़े किस विधायक ने सदस्य बनाने में किया टॉप, किस जिलों से कितने सदस्यों का सम्मान होगा। बीजेपी ने नवंबर में इसे अपने सोशल मीडिया पेज में शेयर किया था। बीजेपी ने नवंबर में इसे अपने सोशल मीडिया पेज में शेयर किया था। सबसे पहले पढ़े सदस्यता अभियान कब शुरू हुआ छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने 3 सितंबर 2024 को सदस्यता अभियान की शुरुआत की थी। अध्यक्ष ने सीएम विष्णुदेव साय को पहली सदस्यता दिलाई थी। सीएम के बाद प्रदेश स्तर पर अभियान चला। कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों ने मिलकर 60 लाख नए सदस्यों को जोड़ा। इस अभियान को लेकर किरण सिंहदेव ने भाजपा के सभी नगर अध्यक्षों, जिलाध्यक्षों और सदस्यता अभियान प्रभारियों को निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों में स्पष्ट था, कि पार्टी का सदस्य बनाते वक्त पूरी सावधानी बरतें। सदस्यता अभियान के दौरान बीजेपी नेताओं ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों और मंडलों में बैठक लेकर केंद्र प्रभारी, बूथ प्रभारी और मंडल स्तर के पदाधिकारियों की लिस्ट जारी की थी। सदस्य बनाने में टॉप-3 में आए ये MLA संगठन के पदाधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, संगठन में नए सदस्य जोड़ने पर बीजेपी विधायक रिकेश सेन, भावना बोहरा और अजय चंद्राकर टॉप 3 श्रेणी में आए है। वहीं रायपुर शहर से 12 नेता हैं, जिन्होंने 3 हजार से अधिक सदस्य बनाए हैं। इनमें विधायक पुरंदर मिश्रा, राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, सहित अन्य लोग शामिल हैं। कार्यकर्ताओं के तप को हम सबका प्रणाम- किरण सिंह देव किरण सिंहदेव ने किया कार्यकर्ताओं का अभिनंदन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव सिंह ने कहा कि, प्रदेशभर के सभी कार्यकर्ताओं ने निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा सदस्य बनाकर भाजपा के सांगठनिक आधार को दृढ़ करके कमाल कर दिखाया है। सदस्यता अभियान के लक्ष्य को आसानी से निर्धारित समय में हासिल करने के लिए सभी कार्यकर्ताओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि 60 लाख के लक्ष्य से भी अधिक सदस्य बनाने वाले सभी कार्यकर्ताओं का सम्मान समारोह कार्यकर्ताओं की ऊर्जा और उत्साह को कई गुना बढ़ाएगा। इस तरह बीजेपी ने बनाए सदस्य भारतीय जनता पार्टी ने सदस्यता अभियान को सफल बनाने के लिए 2 सितंबर से ऑनलाइन माध्यम से काम शुरू कर दिया था। अभियान के तहत नए सदस्यों को जोड़ने के लिए मिस्ड कॉल, नमो एप, वेबसाइट और क्यूआर कोड स्कैन जैसे डिजिटल तरीकों का सहारा लिया गया। पार्टी के नियमों के मुताबिक, बीजेपी की सदस्यता की अवधि 5 साल होती है। इस अवधि के बाद सदस्यता समाप्त हो जाती है, और व्यक्ति को दोबारा सदस्यता लेनी होती है। इसी प्रक्रिया के तहत पार्टी हर पांच सालों में सदस्यता अभियान चलाकर पुराने सदस्यों का नवीनीकरण और नए सदस्यों को जोड़ने का कार्य करती है। इन जिलों में भी अलग-अलग नेताओं को दी गई थी जिम्मेदारी     सुकमा में ओजस्वी मंडावी, अरुण सिंह भदौरिया और हूंगाराम मरकाम, जी. वेंकट और सुखलाल पुजारी।     दंतेवाड़ा में श्रीनिवास राव मद्दी, विजय तिवारी, कुमार सिंह भदौरिया।     नारायणपुर में दिनेश कश्यप, बृजमोहन देवांगन और गौतम गोलछा।     कोंडागांव में महेश कश्यप, प्रवीण सिंह बदेशा और मनोज जैन, महावीर सिंह राठौर, निरंजन सिन्हा और सुमित्रा मारकोले।     बालोद में भोजराज नाग, प्रीतम साहू और यशवंत जैन।     बलौदाबाजार में पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, प्रदेश उपाध्यक्ष लक्ष्मी वर्मा और श्याम बाई साहू।     महासमुंद में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, पूनम चंद्राकर और डॉ विमल चोपड़ा को जिम्मेदारी दी गई है।     जांजगीर-चांपा में विधायक धरमलाल कौशिक, कमला देवी पाटले, सौरभ सिंह और अंबेश जांगड़े।     सक्ती में प्रदेश उपाध्यक्ष शिवरतन शर्मा, मेघाराम साहू और जगन्नाथ पाणिग्रही।     मुंगेली में सांसद कमलेश जांगड़े और विधायक पुन्नूलाल मोहले।     कोरबा में कृषि मंत्री रामविचार नेताम और ननकीराम कंवर।     सारंगढ़-बिलाईगढ़ में मंत्री टंकराम वर्मा और निर्मल सिन्हा।     जशपुर में राधेश्याम राठिया और रणविजय सिंह जूदेव।     बलरामपुर में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और उद्धेश्वरी पैकरा।     सूरजपुर में सांसद चिंतामणि महाराज और रामसेवक पैकरा।     ​​​​​​कोरिया में विधायक रेणुका सिंह और भैयालाल राजवाड़े।     मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और चंपादेवी पावले।     खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, प्रदेश महामंत्री रामजी भारती, कोमल जंघेल और विक्रांत सिंह।     मोहला-मानपुर- अंबागढ़ चौकी में प्रदेश उपाध्यक्ष मधुसूदन यादव, प्रदेश महामंत्री भरतलाल वर्मा और संजीव शाह     राजनांदगांव में विधायक अमर अग्रवाल, खूबचंद पारख और अशोक शर्मा।     बेमेतरा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे, विधायक ईश्वर साहू, लाभचंद बाफना, विधायक दीपेश साहू और प्रदेश मंत्री अवधेश चंदेल को को जिम्मेदारी दी गई है।

युवक पर भालू का हमला, सूरजपुर के ग्रामीण दहशत में

सूरजपुर सूरजपुर जिले के तमोर पिंगला के ग्राम रमकोला निवासी 40 वर्षीय रामफल जंगल में किसी काम से गया हुआ था। तभी उसका भालू और उसके शावकों से सामना हो गया। इससे पहले की रामफल वहां से भाग पाता भालू ने उसे नोच डाला। जंगल में रामफल बुरी तरह जख्मी हो गया। इसी बीच आसपास के ग्रामीणों ने जब उसे गंभीर हालत में देखा तो उसे तुरंत उपस्वास्थ्य केंद्र ले गए। हालत नाजुक होने पर उसे प्राथमिक उपचार उपरांत युवक की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें अंबिकापुर रेफर कर दिया। वर्तमान में उनका इलाज अम्बिकापुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा था। उनकी हालत नाजुक होने पर उन्हें रायपुर रेफर किया गया है। ग्रामीणों ने जंगल में गश्त बढ़ाने की मांग तमोर पिंगला अभ्यारण्य कुल 608.52 वर्ग किलोमीटर में फैला है। जंहा भालू, तेंदुआ, सांभर, हाथी समेत अन्य वन्य जीवों का निवास करते है। इस अभ्यारण्य के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को जानवरों का डर बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में वन्य जीवों का आना-जाना आम हो गया है, उन्होंने वन विभाग से जंगल में गश्त बढ़ाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। ग्रामीणों के बीच इस हादसे से फैल दहशत इस घटना के बाद रमकोला और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदूपत्ता संग्रहण और अन्य कार्यों के लिए जंगल पर उनकी आजीविका निर्भर है, लेकिन ऐसी घटनाएं उनकी जान जोखिम में डाल रही हैं।

निजी स्कूलों को झटका: हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, फीस रेगुलेशन एक्ट को बताया संविधानसम्मत

रायपुर  छत्तीसगढ़ में अब निजी स्कूल (Private Schools) मनचाही फीस नहीं वसूल सकेंगे। सरकार इसको लेकर नियम लागू कर सकती है। हाईकोर्ट (High Court) ने राज्य सरकार के “छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2020” (Chhattisgarh Non-Government School Fee Regulation Act, 2020) और उससे जुड़े नियमों को पूरी तरह संवैधानिक करार देते हुए, निजी स्कूल संघ की याचिका को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) में आती है। राज्य सरकार को निजी स्कूलों की फीस तय करने का पूरा अधिकार है। याचिका में उठाए गए तर्क खारिज निजी स्कूलों ने अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14 (Right to Equality) और 19(1)(g) (Right to Practice Profession) का उल्लंघन बताया था। लेकिन कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता एक संघ है, न कि व्यक्तिगत नागरिक। इसलिए वे इन अनुच्छेदों का हवाला नहीं दे सकते। हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिल सकती है। इसके तहत फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति आवश्यक होगी। अधिनियम की धारा 10 के तहत कोई भी स्कूल बिना जिला शुल्क निर्धारण समिति की अनुमति के फीस नहीं बढ़ा सकता। साथ ही प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच में हुई। दरअसल, राज्य सरकार ने साल 2020 में छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम लागू करने का निर्णय लिया था। इसके लागू होने के बाद प्रदेश में संचालित निजी स्कूलों के एसोसिएशन ने साल 2021 में हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसमें कहा कि वे गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह अधिनियम उनकी स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) में हस्तक्षेप करता है। फीस तय करने का अधिकार केवल प्रबंधन के पास होना चाहिए, इसमें सरकारी हस्तक्षेप अनुचित है। प्राइवेट स्कूलों ने बताया समानता के अधिकार का उल्लंघन याचिका में प्राइवेट स्कूल की तरफ से बताया गया कि अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता का अधिकार और 19(1)(g) व्यवसाय करने की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए अधिनियम को असंवैधानिक बताया। वहीं, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में आती है। अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता और न्यायोचित शुल्क तय करना है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निजी स्कूल भी इस नियम से मुक्त नहीं हो सकते। हाईकोर्ट ने कहा- संघ है याचिकाकर्ता, नागरिक नहीं हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता संघ नागरिक नहीं हैं, ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देकर संवैधानिक अधिकारों का हवाला नहीं दिया जा सकता। फीस के लिए नियम तय करना राज्य सरकार का अधिकार है। अधिनियम का उद्देश्य केवल फीस में पारदर्शिता लाना है। कोई अधिनियम केवल इस आधार पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि उससे किसी को असुविधा हो रही है। फैसले से छात्रों और अभिभावकों को मिलेगी राहत हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिल सकती है। अब निजी स्कूलों को फीस तय करने में जवाबदेही और पारदर्शिता बरतनी होगी। इसमें अभिभावकों की भागीदारी और जिला स्तरीय समिति की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। साथ ही प्राइवेट स्कूलों के लिए राज्य शासन के निर्देशों के तहत ही फीस ली जा सकती है। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगेगा लगाम हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य शासन प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगा सकती है। इसके तहत शासन प्राइवेट स्कूलों की फीस बढ़ाने की सीमा तय भी कर सकेगी। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान भी अधिनियम में शामिल किया गया है। अधिनियम के तहत जिला और राज्य स्तर पर फीस निर्धारण समितियों का गठन अनिवार्य होगा। जिलों में कलेक्टर इसके अध्यक्ष होंगे, जबकि राज्य स्तर पर स्कूल शिक्षा मंत्री समिति के प्रमुख होंगे। ये समितियां निजी स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस की नीति तय करेंगी। जानिए अधिनियम में क्या है प्रावधान अधिनियम की धारा 10 के अनुसार, कोई भी निजी स्कूल बिना समिति की अनुमति के फीस नहीं बढ़ा सकता। अगर फीस बढ़ानी हो, तो स्कूल प्रबंधन को कम से कम 6 महीने पहले प्रस्ताव देना होगा। समिति को 3 महीने में निर्णय लेना होगा। फीस वृद्धि की अधिकतम सीमा 8 फीसदी तय की गई है। वहीं, अभिभावक संघ भी फीस वृद्धि पर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। समिति को ऐसी आपत्तियों पर सुनवाई करनी होगी। समितियों को सिविल कोर्ट जैसे अधिकार दिए गए हैं, जिससे वे स्कूल से रिकॉर्ड मांग सकते हैं और सुनवाई कर सकते हैं। शिकायत पर हो सकती है कार्रवाई अब स्कूलों को फीस रजिस्टर, वेतन, व्यय, उपस्थिति, भवन किराया से संबंधित दस प्रकार के रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग इसकी जांच कर सकता है। वहीं, अगर कोई स्कूल समिति की अनुमति से अधिक फीस वसूलता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

मुख्यमंत्री साय की दिल्ली बैठक खत्म, बस्तर विकास और कैबिनेट विस्तार पर हुआ मंथन

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने तीन दिवसीय दिल्ली दौरे के बाद शनिवार सुबह रायपुर लौट आए। इस दौरे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित भाजपा के कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। दौरा राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहा, जिसमें छत्तीसगढ़ के विकास, बस्तर की पहचान और बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार जैसे अहम विषयों पर मंथन हुआ। मुख्यमंत्री साय ने एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि दिल्ली दौरे में उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा आलाकमान से हुई। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के विजन "अंजोर@2047", राज्य के राज्योत्सव, और अगले छह महीनों तक चलने वाले आयोजनों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। सीएम साय ने बस्तर ओलंपिक को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की योजना का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इसे 'खेलो इंडिया ट्राइब गेम्स' के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे बस्तर को नई सांस्कृतिक और खेल पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में मिली सफलताएं इस दिशा में सकारात्मक संकेत हैं। जल्द होगा मंत्रिमंडल विस्तार दिल्ली दौरे की एक और अहम उपलब्धि रही मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सकारात्मक संकेत। सीएम साय ने कहा कि थोड़ा इंतजार कीजिए, बहुत जल्द मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा आलाकमान से इस विषय पर गहन चर्चा हुई है और संभावना जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में नए मंत्रियों का शपथग्रहण हो सकता है। सीएम साय ने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय कुल 12 मंत्रियों ने शपथ ली थी। लेकिन बृजमोहन अग्रवाल के सांसद निर्वाचित होने के बाद दो मंत्री पद रिक्त हो गए, जिन्हें भरने की कवायद कई बार शुरू होकर भी अधूरी रह गई थी। अब उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस गतिरोध का समाधान निकल जाएगा।

PM मोदी ने दिया ट्रंप को जवाब, कहा- भारत बन रहा तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

वाराणसी  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत की अर्थव्यवस्था को 'डेड इकोनॉमी' बताया था. उनके इस तंज के जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से करारा संदेश दिया और कहा कि भारत अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है. पीएम मोदी ने देशवासियों को स्वदेशी अपनाने का संकल्प दिलाया और कहा कि अब समय आ गया है कि हर भारतीय, हर खरीदारी में देशहित को प्राथमिकता दे. प्रधानमंत्री ने साफ कहा- अब भारत भी हर चीज को परखने के लिए सिर्फ एक ही तराजू इस्तेमाल करेगा- वो है, भारतीय पसीने से बनी चीजें. उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है जब देश का हर नागरिक, हर दुकानदार और हर उपभोक्ता इस मंत्र को अपनाए कि हम वही खरीदेंगे जो भारत में बना हो, जिसे भारतीय हाथों ने गढ़ा हो और जिसमें हमारे देश का पसीना हो. वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में यह सिर्फ सरकार की नहीं, हर भारतवासी की जिम्मेदारी है. प्रधानमंत्री का कहना था कि आज दुनिया की अर्थव्यवस्था कई आशंकाओं से गुजर रही है. अस्थिरता का माहौल है. ऐसे में दुनिया के देश अपने-अपने हितों पर फोकस कर रहे हैं. भारत भी दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है. इसलिए भारत को भी अपने आर्थिक हितों को लेकर सजग रहना ही है. भारत को भी अपने किसानों, लघु उद्योगों, युवाओं और रोजगार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देनी होगी. उन्होंने आगे कहा, भारत को अब सजग रहना होगा. कौन सी चीज खरीदनी है, इसका सिर्फ एक ही तराजू होगा- वो जिसमें भारत के किसी नागरिक का पसीना बहा हो. हम वही चीजें खरीदेंगे जो भारत में बनी हों. भारतीय कौशल से बनी हों, भारतीय हाथों से बनी हों. यही हमारे लिए असली स्वदेशी है. 'हर नागरिक बने स्वदेशी का प्रचारक' प्रधानमंत्री मोदी ने इस संकल्प को सिर्फ सरकार या राजनीतिक दलों तक सीमित ना रखकर हर नागरिक की जिम्मेदारी बताया. उन्होंने कहा, सरकार इस दिशा में हर प्रयास कर रही है. लेकिन देश के नागरिक के रूप में हमारे कुछ दायित्व हैं. ये बात सिर्फ मोदी नहीं, हिंदुस्तान के हर व्यक्ति को हर पल बोलते रहना चाहिए- दूसरे को कहते रहना चाहिए. जो देश का भला चाहते हैं, जो देश को तीसरे नंबर की इकोनॉमी बनाना चाहते हैं, उसे अपने संकोच को छोड़कर देशहित में हर पल देशवासियों के अंदर एक भाव जगाना होगा- वह संकल्प है, हम स्वदेशी को अपनाएं. मोदी ने साफ किया कि 'वोकल फॉर लोकल' और 'मेक इन इंडिया' को अब केवल नारा नहीं, व्यवहारिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा. 'व्यापारी सिर्फ स्वदेशी माल बेचें, यही सच्ची देशसेवा' प्रधानमंत्री ने देश के व्यापारियों और उद्योगजगत से विशेष आग्रह किया और कहा, अब समय आ गया है कि सिर्फ और सिर्फ स्वदेशी उत्पादों को ही बेचा जाए. उन्होंने कहा, मैं व्यापार जगत से जुड़े भाइयों को आगाह करता हूं- अब हमारी दुकानों पर सिर्फ स्वदेशी सामान बिकना चाहिए. यही देश की सच्ची सेवा होगी. जब हर घर में नया सामान आए तो वो स्वदेशी ही हो, यही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए. पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक व्यापारिक दबाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन से आयात पर बहस और अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा के केंद्र में हैं.