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मुंगेली पुलिस को चकमा देकर फरार हुआ चोरी का आरोपी, दिल्ली से ला रही थी टीम

ग्वालियर मध्यप्रदेश के ग्वालियर में छत्तीसगढ़ मुंगेली पुलिस को चोरी का आरोपी चकमा देकर फरार हो गया। मुंगेली पुलिस दिल्ली से गिरफ्तार कर उसे छत्तीसगढ़ ले जा रही थी। तभी मुरार बड़ागांव हाईवे स्थित ढाबे पर पुलिस भोजन के लिए रुकी थी। भोजन करने में व्यस्त पुलिस को देख आरोपी रफू चक्कर हो गया। देर रात तक मुंगेली और मुरार थाना पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी रही लेकिन हाथ नहीं आया। ढाबे में भोजन के दौरान भाग निकला दअरसल मुंगेली कोतवाली थाना पुलिस चोरी के आरोपी संदीप महिलांगे निवासी सिंगारपुर थाना भाटापारा जिला बलौदा बाजार को दिल्ली से गिरफ्तार कर मुंगेली ले जा रही थी। देर रात पुलिस टीम मुरार थाना क्षेत्र के एक ढाबे पर एक साथ भोजन करने बैठ गई। इसी दौरान पुलिस कर्मियों का ध्यान उसकी तरफ से हट गया और चोर उनकी नजर बचाकर भाग निकला। जब पुलिस टीम को सुध आई तो उनके हाथ पैर फूल गए। इसकी सूचना मुरार थाना को दी। आरोपी का अभी तक पता नहीं चला आरोपी के फरार होने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। मुंगेली और मुरार थाना पुलिस आरोपी की तलाश में जुट गई लेकिन आरोपी का अभी तक कुछ भी पता नहीं चल सका। मुंगेली पुलिस ने मुरार थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने शिकायत पर फरार आरोपी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी रोबिन जैन सीएसपी ग्वालियर ने दी।

प्रदेश के सभी बांधों एवं जलाशयों की निरंतर करें निगरानी : जल संसाधन मंत्री सिलावट

भोपाल.  जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी बांधों एवं जलाशयों की निरंतर निगरानी की जाए और सभी सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं। विभाग के अधिकारी, जिला प्रशासन एवं सभी संबंधित अधिकारियों से समन्वय बनाकर कार्य करें। सभी जिलों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष प्रभावी रूप से कार्य करें और अतिवृष्टि एवं बाढ़ की जानकारी राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष को भेजते रहें। बांधों से जल छोड़ने की जानकारी सभी संबंधियों को दी जाए और विशेष रूप से मुनादी करवाकर व अन्य साधनों से आमजन को समय से पूर्व उपलब्ध कराई जाए। मंत्री सिलावट ने शुक्रवार को मुख्य अभियंता बोधी कार्यालय स्थित राज्य बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्रदेश में वर्षा और जलाशयों में जलभराव की स्थिति की समीक्षा की। मंत्री सिलावट ने निर्देश दिए कि मानसून के इस चुनौती पूर्ण समय में पूर्ण सजगता और सक्रियता के साथ कार्य करें, जिससे प्रदेश में कोई भी अप्रत्याशित घटना न हो और न ही किसी प्रकार से जान-माल का नुकसान हो। बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन राजेश राजौरा, मुख्य अभियंता आर डी अहिरवार सहित सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि प्रदेश में बारिश की स्थिति अच्छी है. इस मानसून में मध्यप्रदेश में आज तक 711.30 मि.मी. वास्तविक वर्षा दर्ज की गई है, जो प्रदेश की औसत वर्षा से 59% अधिक है। राज्य के पूर्वी हिस्से में औसत से 62% अधिक एवं पश्चिमी हिस्से में औसत से 55% अधिक वर्षा दर्ज की गई है। विगत वर्ष आज की स्थिति में मध्यप्रदेश में वास्तविक वर्षा 480.40 मिलीमीटर दर्ज हुई थी, जो कि प्रदेश की औसत वर्षा से 8% अधिक थी। प्रदेश के प्रमुख बांधों में जल भराव की स्थिति भी अच्छी है। विगत वर्ष आज दिनांक की स्थिति में प्रदेश के प्रमुख बांधों में लगभग 50.07% औसत जल भराव था, जबकि इस वर्षाकाल में अच्छी बारिश के चलते प्रदेश के प्रमुख बांधों में 72.75% जलभराव हो चुका है। प्रदेश के 18 बांधों के जल द्वार खोले जा चुके हैं। मंत्री सिलावट ने बताया कि प्रदेश के सभी प्रमुख बेसिन में बांधों के जल ग्रहण क्षेत्र में मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी वर्षा के पूर्वानुमान, पानी की आवक और बांधों के गवर्निंग लेवल के दृष्टिगत गेटों का संचालन किया जा रहा है, जिससे बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में है। रिजर्वायर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम में चिन्हित प्रदेश के 286 प्रमुख बांधों में से 104 बांधों में 90% से अधिक, 31 बांधों में 75% से 90% तक तथा 46 बांधों में 50% से 75% तक जल भराव हो चुका है. इसी प्रकार 52 बांधों में 25 प्रतिशत से 50% तक, 25 बांधों में 10% से 25% तक तथा शेष प्रमुख बांधों में 10% से कम जल भराव हुआ है। मंत्री सिलावट ने बताया कि प्रदेश के प्रमुख 18 बांधों के द्वार खोले जा चुके हैं। बरगी जबलपुर बांध के पांच, बिलगांव डिंडोरी के दो, गोपी कृष्ण सागर गुना का एक, इंदिरा सागर खंडवा के 12, कोतवाल फीडर मुरैना के दो, कुटनी छतरपुर के दो, मणिखेड़ा शिवपुरी के 10, मनुअर शिवपुरी के दो, मटियारी मंडला के 6, मोहिनी पिकअप वियर शिवपुरी के दो, ओंकारेश्वर के 19, पगारा मुरैना के दो, पगरा फीडर सागर के सात, पवई पन्ना का एक, राजघाट अशोकनगर के 8, संजय सागर विदिशा का एक, थावर मंडला का एक तथा अपर ककेटो श्योपुर का एक गेट खोले जा चुके हैं। बाँधों के जल ग्रहण क्षेत्र में वर्षा के पूर्वानुमान एवं जल आवक के अनुसार निकासी की जा रही है, जिससे बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में है। जल निकासी की निरंतर आमजन और सभी संबंधितों को समय से पूर्व सूचना दी जा रही है। नदी बेसिन में जलभराव की स्थिति नर्मदा बेसिन अंतर्गत प्रमुख बांधों के जलग्रहण क्षेत्र में औसत से अधिक वर्षा दर्ज होने से लगभग सभी बाँधों में जल भराव की स्थिति सामान्य से अधिक है। जबलपुर जिले में बरगी बांध 62.01 प्रतिशत, रायसेन जिले में बारना 78.9 प्रतिशत, नर्मदापुरम में तवा बांध 82.45 प्रतिशत, सीहोर में कोलार बांध 64.37 प्रतिशत, खंडवा में इंदिरा सागर बांध 88.80 प्रतिशत एवं ओंकारेश्वर बांध 94.85 प्रतिशत भर चुका है। प्रदेश के गंगा बेसिन अंतर्गत निर्मित बड़ी परियोजनाओं में शहडोल स्थित बाणसागर में 63.68 प्रतिशत एवं सीधी स्थित महान बांध में 80.81 प्रतिशत जलभराव हो चुका है। बाणसागर बॉध के जलग्रहण क्षेत्र में गत दिनों भारी वर्षा दर्ज की गई। वैनगंगा बेसिन अंतर्गत प्रदेश के प्रमुख बांधो में पेंच छिंदवाड़ा में 63.38 प्रतिशत, संजय सरोवर सिवनी में 69.80 प्रतिशत एवं बालाघाट स्थित राजीव सागर में 32.05 प्रतिशत जल भराव है। माही एवं ताप्ती बेसिन में प्रमुख बांध पारसडोह 60.64 प्रतिशत, माही मेन और माही सब्सिडरी बांध में क्रमश: 42.32 प्रतिशत एवं 20.17 प्रतिशत जल भराव हुआ है। बेतवा बेसिन बेसिन अंतर्गत प्रमुख बांधो में भोपाल जिले में स्थित केरवा एवं कलियासोत बांध में क्रमश: 52.78 एवं 60.91 प्रतिशत जल भराव की स्थिति है। सम्राट अशोक सागर हलाली 61.75 प्रतिशत, संजय सागर बांध 70.71 प्रतिशत और राजघाट 73.18 प्रतिशत भर चुके हैं। चंबल बेसिन में गांधी सागर बांध 52.42 प्रतिशत, मोहनपुरा 75.59 प्रतिशत और कुण्डलिया 42.08 प्रतिशत भर गए हैं। प्रदेश के शेष बेसिन जैसे सिंध, केन और धसान में भी बांधों के जलग्रहण क्षेत्र में माह जुलाई में अत्यधिक वर्षा दर्ज हुई है। प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के छतरपुर, टीकमगढ़, निवारी जिलों में गत दिनों भारी वर्षा दर्ज की गई। धसान बेसिन में बाणसुजारा बांध 53.43 प्रतिशत एवं पन्ना में पवई बांध 50.67 प्रतिशत जलभराव में है। इसी प्रकार ग्वालियर-चंबल संभाग में दतिया, भिण्ड, शिवपुरी, श्योपुर एवं अशोक नगर में भी भारी वर्षा दर्ज की गई है। सिंध बेसिन पर स्थित आवदा बांध 100.00 प्रतिशत, हरसी 105.52 प्रतिशत, अपर काकेटो 44.94 प्रतिशत, काकेटो 100.98 प्रतिशत, मड़ीखेड़ा 74.30 प्रतिशत, मोहिनी पिकअपवेयर 58.99 प्रतिशत जल भराव की स्थिति में हैं।  

राजस्व में बंपर उछाल, GST कलेक्शन ₹1.96 लाख करोड़ के पार गया

नईदिल्ली   केंद्र सरकार ने जुलाई महीने के जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े जारी कर दिए हैं। बीते जुलाई में जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 1.96 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है। यह लगातार 7वां महीना है जब जीएसटी कलेक्शन 1.80 लाख करोड़ रुपये से जयादा है। हालांकि, यह वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के औसत 2.1 लाख करोड़ रुपये से कम है। यह ग्रोथ डोमेस्टिक ट्रांजैक्शन के साथ-साथ आयात से अधिक कलेक्शन के कारण हुई, जो स्थिर आर्थिक गतिविधि का संकेत है। हालांकि, डेवलपमेंट की गति पिछले महीनों की तुलना में धीमी रही। कुल ग्रॉस जीएसटी राजस्व में शामिल ग्रॉस कलेक्शन में सीजीएसटी ₹35470 करोड़ है। वहीं, एसजीएसटी की बात करें तो 44059 करोड़ रुपये है। इसके अलावा आईजीएसटी ₹1,03,536 करोड़ रहा। इसमें आयात पर एकत्रित ₹51626 करोड़ शामिल है। वहीं, उपकर की बात करें तो ₹12670 करोड़ (आयात पर एकत्रित ₹1086 करोड़ सहित) पर पहुंच गया। किस राज्य के कलेक्शन में कितना ग्रोथ जुलाई के दौरान मध्य प्रदेश के टैक्स कलेक्शन में 18% की वृद्धि देखी गई, जो बड़े राज्यों में सबसे आगे रहा। वहीं, बिहार के कलेक्शन में 16% की वृद्धि दर्ज की गई जबकि आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में क्रमशः 14% और 12% की वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी ओर, मणिपुर, मिजोरम और झारखंड में क्रमशः -36%, -21% और -3% की गिरावट दर्ज की गई। महाराष्ट्र 30,590 करोड़ रुपये से अधिक कलेक्शन के साथ सबसे बड़ा कंट्रीब्यूटर बना रहा। जून में जीएसटी कलेक्शन इससे पहले जून में जीएसटी कलेक्शन 6.2 प्रतिशत बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। बता दें कि जीएसटी कलेक्शन मई में 2.01 लाख करोड़ रुपये रहा था। वहीं, इस साल अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 2.37 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्चस्तर पर पहुंच गया था। GST के 8 साल पूरे पिछले महीने देश में GST लागू हुए 8 साल पूरे हो गए हैं। 1 जुलाई 2017 को देश में GST लागू किया गया था। इस दौरान टैक्स कलेक्शन के आंकड़ों ने नया रिकॉर्ड बनाया है। वित्त वर्ष 2024-25 में ग्रॉस GST कलेक्शन 22.08 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो 5 साल पहले 2020-21 में सिर्फ 11.37 लाख करोड़ था। यानी, 5 साल में टैक्स वसूली लगभग दोगुनी हो गई है। 2024-25 में हर महीने औसत GST कलेक्शन 1.84 लाख करोड़ रुपए रहा। ये 5 साल पहले 2020-21 में 95 हजार करोड़ रुपए था। टैक्सपेयर्स की संख्या भी दोगुनी से ज्यादा बढ़ी GST लागू होने के वक्त 2017 में रजिस्टर्ड टैक्सपेयर्स की संख्या 65 लाख थी, जो अब बढ़कर 1.51 करोड़ से ज्यादा हो गई है। इससे सरकार का टैक्स बेस भी मजबूत हुआ है। सरकार का कहना है कि GST लागू होने के बाद टैक्स कलेक्शन और टैक्स बेस दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इससे देश की फिस्कल पोजिशन मजबूत हुई है और टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी और आसान बना है। इतिहास में सबसे बड़ा टैक्स कलेक्शन अप्रैल 2025 में सरकार ने अप्रैल 2025 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) से 2.37 लाख करोड़ रुपए जुटाए थे। सालाना आधार पर इसमें 12.6% की बढ़ोतरी हुई थी। ये GST कलेक्शन का रिकॉर्ड है। इससे पहले हाईएस्ट जीएसटी कलेक्शन का रिकॉर्ड अप्रैल 2024 में बना था। तब सरकार ने 2.10 लाख करोड़ रुपए जुटाए थे। इकोनॉमी की हेल्थ दिखाता है GST कलेक्शन जीएसटी कलेक्शन इकोनॉमिक हेल्थ का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। हायर कलेक्शन मजबूत उपभोक्ता खर्च, औद्योगिक गतिविधि और प्रभावी कर अनुपालन का संकेत देते हैं। अप्रैल महीने में बिजनेसेज अक्सर मार्च से वर्ष के अंत के लेन-देन को क्लियर करते हैं, जिससे टैक्स फाइलिंग्स और कलेक्शन्स में वृद्धि होती है। KPMG के नेशनल हेड अभिषेक जैन ने कहा कि अब तक का हाईएस्ट GST कलेक्शन मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था को दर्शाता है। 2017 में लागू हुआ था GST सरकार ने 1 जुलाई 2017 को देशभर में GST लागू किया था। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के 17 करों और 13 उपकरों को हटा दिया गया था। GST के 7 साल पूरे होने पर वित्त मंत्रालय ने पिछले सात वर्षों के दौरान हासिल की गई उपलब्धियों को लेकर पोस्ट किया। GST एक इनडायरेक्ट टैक्स है। इसे कई तरह के इनडायरेक्ट टैक्स जैसे VAT, सर्विस टैक्स, परचेज टैक्स, एक्साइज ड्यूटी को रिप्लेस करने के लिए 2017 में लागू किया गया था। GST में 5, 12, 18 और 28% के चार स्लैब हैं। GST को चार हिस्सों में डिवाइड किया गया है:     CGST (केंद्रीय जीएसटी): केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किया जाता है।     SGST (राज्य जीएसटी): राज्य सरकारों द्वारा एकत्र किया जाता है।     IGST (एकीकृत जीएसटी): अंतरराज्यीय लेनदेन और आयात पर लागू, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विभाजित।     उपकर: स्पेसिफिक पर्पज के लिए फंड जुटाने के लिए स्पेसिफिक गुड्स (जैसे, लग्जरी आइटम्स, तंबाकू) पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त शुल्क।

आयुष मंत्री परमार ने वैद्य आपके द्वार योजना ई-संजीवनी पोर्टल का किया शुभारंभ

भोपाल.  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने शुक्रवार को भोपाल स्थित निवास कार्यालय में आयुष विभाग की "वैद्य आपके द्वार योजना" अंतर्गत ई-संजीवनी पोर्टल (स्वस्थ भारत) का प्रदेश स्तरीय वर्चुअल शुभारम्भ किया। भारत सरकार के निर्देशानुसार यह सुविधा पूरे देश में एक साथ ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से संचालित हैं और अब सुविधा मध्यप्रदेश में भी प्रारंभ की गई है। आयुष मंत्री परमार ने ई-संजीवनी पोर्टल के शुभारम्भ अवसर पर पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध डॉक्टर से बात कर स्वास्थ्य परामर्श भी प्राप्त किया। उन्होंने आयुष विभाग को शुभकामनाएं एवं बधाई दीं। परमार ने कहा कि आमजन "वैद्य आपके द्वार योजना" अंतर्गत ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से निःशुल्क आयुष चिकित्सा परामर्श लेकर स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं। ज्ञातव्य है कि "वैद्य आपके द्वार योजना" अंतर्गत बेहतर जनस्वास्थ्य के लिए टेलीमेडिसिन ऐप द्वारा मोबाइल पर घर बैठे आयुर्वेद, होम्यापैथी और यूनानी चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। यह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) से जुड़ा है और बहुभाषी सहायता प्रदान करता है। डॉक्टर-टू-डॉक्टर मॉडल का उपयोग करते हुए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को उच्च-स्तरीय या विशेषज्ञ डॉक्टरों से वास्तविक समय में परामर्श करने में सक्षम भी है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आयुष डी.पी. आहूजा एवं आयुक्त आयुष सुउमा आर माहेश्वरी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

बारिश का सिलसिला जारी रहेगा! अगले दो महीने तक कई राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश जैसे इलाकों में इस साल मॉनसून में अब तक अच्छी बारिश हुई है। गुरुग्राम, गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के तमाम इलाकों में इस साल अच्छी बारिश हुई है। कई मोहल्ले और सोसायटियों में तो लगातार पानी भरने की शिकायतें आती रहती हैं। इस बीच मौसम विभाग का कहना है कि अगस्त और सितंबर में भी सामान्य से अधिक बारिश होगी। इसका अर्थ है कि दिल्ली-एनसीआर, यूपी, हरियाणा समेत समूचे उत्तर भारत को अधिक बारिश के लिए पहले से तैयारी कर लेनी चाहिए। मौसम विभाग का कहना है कि अगस्त में सामान्य बारिश रहेगी। इसके अलावा सितंबर में सामान्य से अधिक वर्षा का अनुमान है। इस तरह लॉन्च पीरियड एवरेज को देखें तो दो महीने में 106 फीसदी बारिश होगी, जो सामान्य से 6 फीसदी अधिक है। हालांकि ऐसा देश के सभी हिस्सों में नहीं होगा। इस साल उत्तर पश्चिम भारत यानी यूपी, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब और उत्तराखंड में अच्छी बारिश होगी। इसके अलावा पूर्वी भारत, मध्य भारत और पश्चिमी भारत के ज्यादातर राज्यों में बारिश सामान्य से कम रहेगी। महत्वपूर्ण तथ्य है कि इस साल बिहार, बंगाल और ओडिशा में अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। आमतौर पर उत्तर बिहार में अच्छी बारिश होती रही है। इस बीच मौसम विभाग ने ब्लॉक स्तर पर भी बारिश का अनुमान जताने की व्यवस्था की है। पूरे देश के 7,200 ब्लॉकों का मौसम कैसा रहेगा, कब बारिश होगी और कब आसमान साफ रहेगा, यह पूरी जानकारी दी जाएगी। इसकी व्यवस्था ब्लॉक-वाइज रेनफॉल मॉनिटरिंग स्कीम (BRMS) के माध्यम से की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि इसके जरिए रियलटाइम जानकारी मिलेगी। अब तक मौसम विभाग की ओर से जिलावार जानकारी ही दी जाती थी। माना जा रहा है कि अब मौसम विभाग का अनुमान अधिक सटीक हो सकेगा। अब ब्लॉक स्तर पर मौसम का आएगा अनुमान आमतौर पर जिला स्तर के अनुमान में किसी एक हिस्से में बारिश होती थी और कहीं नहीं होती थी। इसे लोग मौसम विभाग के अनुमान से जोड़ते थे कि वह गलत साबित हुआ। अब ब्लॉक लेवल पर अनुमान दिया जाएगा। मौसम विभाग ने जून और जुलाई की मॉनसून बारिश का भी आंकड़ा दिया है। मौसम विभाग का कहना है कि जून और जुलाई में ज्यादातर राज्यों में सरप्लस बारिश हुई है, लेकिन मध्य, पश्चिम और पूर्वी भारत के कई राज्यों में अनुमान से कम बारिश हुई है।

शहर को मिलेगा राहत? आवारा कुत्तों पर लगाम के लिए दिल्ली सरकार का तीन-स्तरीय प्लान

नई दिल्ली दिल्ली में आवारा कुत्तों और मवेशियों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं. हाल ही में एक 6 वर्षीय बच्ची की कुत्ते के काटने से मृत्यु ने इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ा दिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस समस्या के समाधान के लिए कानूनी संशोधनों सहित विभिन्न उपायों पर चर्चा की गई. बैठक में यह सुझाव दिया गया कि यदि अदालत से अनुमति मिलती है, तो इन कुत्तों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है. दिल्ली सरकार ने इस मुद्दे के समाधान के लिए एक व्यापक योजना बनाई है, जिसमें आवारा कुत्तों को माइक्रोचिप लगाने और उनके लिए आश्रय केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है. इस पहल को भारतीय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा तैयार की जाने वाली नई नीति का समर्थन प्राप्त होगा, और दिल्ली सरकार इस योजना के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करेगी. हालांकि, मौजूदा पशु जन्म नियंत्रण नियम 2023 में आवश्यक प्रावधानों की कमी के कारण इसमें संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही है. कानून में बदलाव की तैयारी और बैठक के प्रमुख बिंदु दिल्ली सरकार ने Animal Birth Control (ABC) Rules, 2023 में संशोधन पर विचार करना शुरू कर दिया है. वर्तमान में ये नियम केवल नसबंदी की अनुमति देते हैं, लेकिन आवारा कुत्तों को अन्यत्र स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं देते. सरकार गंभीर मामलों में इन कुत्तों को दूसरी जगह भेजने के लिए अदालत का रुख करने की योजना बना रही है. इस संदर्भ में एक बैठक में बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के उपायों पर भी चर्चा की गई. अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार है जब अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है. क्यों बनी यह स्थिति? सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता हाल ही में रोहिणी के पूठ कलां क्षेत्र में एक बच्ची की रेबीज से हुई मृत्यु ने समाज में गहरा आक्रोश उत्पन्न किया है. इस घटना के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में प्रतिदिन हो रहे सैकड़ों कुत्ते के काटने के मामलों पर चिंता व्यक्त की. कोर्ट ने यह भी कहा कि ये घटनाएं नागरिकों पर न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक रूप से भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं, और विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा अधिक है. अब आगे क्या? सरकार वर्तमान में अंतिम निर्णय से पूर्व कानूनी सलाह और न्यायालय के रुख का इंतजार कर रही है. हालांकि, इस मुद्दे पर हो रही गतिविधियों से यह स्पष्ट होता है कि दिल्ली सरकार और न्यायपालिका दोनों ही इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए सहमत हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिलोकेशन की अनुमति मिलती है, तो यह पूरे देश के लिए एक उदाहरण स्थापित कर सकती है.

अमित शाह को वामपंथी सांसदों का पत्र, छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर उठाए सवाल

रायपुर छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और मानव तस्करी मामले में सियासत गरमाई हुई है। इसकी चिंगारी अब दिल्ली तक पहुंच गई है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को घेरने में लगा है। अल्पसंख्यकों को लेकर उन पर जमकर आरोप लगाये जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और मानव तस्करी मामले में कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को लेकर वामपंथी दलों के सांसदों ने  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को खत लिखा है। पत्र लिखकर इस संबंध में शीघ्र हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। इससे पहले प्रदेश के दुर्ग में दो कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के सांसदों ने भी सोमवार को संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया था। ननों को रिहा करने की मांग की थी। दुर्ग रेलवे स्टेशन पर कथित मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण के आरोप में दो ननों सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई बजरंग दल के एक स्थानीय पदाधिकारी की शिकायत के बाद की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ये तीनों व्यक्ति नारायणपुर की तीन लड़कियों का जबरन धर्मांतरण और तस्करी कर रहे थे। संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन और आईयूएमएल केईटी मोहम्मद बशीर सहित यूडीएफ सांसदों ने संसद भवन परिसर के मकर द्वार के सामने प्रदर्शन किया था। इस दौरान वे पोस्टर लिए हुए थे जिन पर ‘अल्पसंख्यकों पर हमले बंद करो’ लिखा था। वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा था कि , “यूडीएफ सांसदों ने दुर्ग (छत्तीसगढ़) में कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी और उत्पीड़न के खिलाफ आज संसद के बाहर प्रदर्शन किया। इन निर्दोष महिलाओं ने कुछ भी गलत नहीं किया लेकिन फिर भी हिंसक भीड़ ने उन्हें निशाना बनाया।” उन्होंने आरोप लगाया, “भाजपा-आरएसएस के परिवेशी तंत्र के तहत सभी अल्पसंख्यकों को अपराधी समझा जाता है और असामाजिक तत्वों को उनकी आस्था का पालन कर रहे नागरिकों को डराने के लिए छोड़ दिया जाता है। छत्तीसगढ़ में बजरंग दल के गुंडों और पुलिस के बीच की यह जुगलबंदी भाजपा की धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति वास्तविक मंशा को दर्शाती है।” कांग्रेस नेता ने कहा कि वे ननों की तत्काल रिहाई और उनके साथ न्याय की मांग करते हैं। वेणुगोपाल और केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीसन ने इसे भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों पर हमलों का एक और उदाहरण बताया। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है और संविधान के तहत अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। अब यहां जानिये क्या है पूरा मामला दुर्ग रेलवे स्टेशन में 25 जुलाई शुक्रवार को इस मामले में जमकर हंगामा हुआ था। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने धर्मांतरण की आशंका को लेकर जमकर प्रदर्शन किया था। बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता स्टेशन परिसर में पहुंचे थे। जय श्रीराम के नारे लगाते हुए विरोध जताया था। स्थिति पर काबू पाने के लिये भारी संख्या में पुलिस बल और जीआरपी को मौके पर तैनात किया गया था। इस प्रकरण में जीआरपी पुलिस ने दो नन और युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच कर रही है। शुरुआती जांच के बाद दो नन और युवक पर धारा 143 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस प्रकरण की जांच कर रही है। पकड़े गये थे दो नन सिस्टर, एक युवक और  तीन आदिवासी युवतियां बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दो नन सिस्टर, एक युवक और  तीन आदिवासी युवतियों को घेर रखा था। इन आदिवासी युवतियों को बहला-फुसलाकर यूपी के आगरा में ले जाने का आरोप था। जहां उनके धर्मांतरण की योजना थी। ये तीनों आदिवासी युवतियां नारायणपुर जिले के ग्राम ओरछा की निवासी थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इन लड़कियों की उम्र कम है और इनमें से कोई भी आठवीं कक्षा से आगे की नहीं पढ़ी हैं। इनके माता-पिता को भी इस संबंध में जानकारी नहीं है। युवक पर ऐसे मामले में शामिल होने का आरोप छत्तीसगढ़ बजरंग दल पदाधिकारी रवि निगम ने आरोप लगाते हुए कहा कि  जो युवक पकड़ा गया था, वह पहले भी इस तरह की घटनाओं में संलिप्त रहा है। आदिवासी लड़कियों का धर्म परिवर्तन करा चुका है। राज्य में धर्म परिवर्तन के खिलाफ कठोर कानून तुरंत लागू किया जाए। मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार दुर्ग जीआरपी ने दो ननों को मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, जहां से दो ननो समेत एक युवक को जेल भेज दिया गया था। इतना ही नहीं दो ननों और युवक की गिरफ्तारी के बाद जमानत याचिका लोअर कोर्ट के बाद सेशन कोर्ट ने खारिज कर दी थी। सेशन कोर्ट से जज अनीश दुबे ने कहा हमें यह प्रकरण सुनने का अधिकार नहीं है। यह मानव तस्करी से जुड़ा मामला था,जिसकी सुनवाई बिलासपुर की एनआईए कोर्ट में हो सकती है। दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करने का आरोप अब इस मामले में जमकर राजनीति हो रही है। कांग्रेस और सीपीआई के प्रतिनिधि मंडल ननों से मुलाकात कर केंद्रीय जेल पहुंचे थे। मुलाकात के बाद दोनों ही पार्टियों ने सरकार पर दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। दोनों ही राजनीतिक दलों ने प्रदेश की बीजेपी सरकार को आदिवासियों और ईसाईयों का विरोधी करार दिया है। वहीं सीपीआई वरिष्ठ नेत्री वृंदा करात ने कहा है कि झूठे केस में ननों को गिरफ्तार करके जेल में डालना अन्याय है।  

बोधघाट परियोजना को लेकर सीएम साय सक्रिय, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री से की मुलाकात

नई दिल्ली, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल से सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान राज्य की महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं, विशेषकर बस्तर क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री सी आर पाटिल को अवगत कराया कि बोधघाट परियोजना बस्तर की सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और ऊर्जा उत्पादन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र दशकों से विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा है। वर्तमान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि इस क्षेत्र को नक्सल हिंसा से मुक्त कर आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया जाए। उन्होंने बताया कि बस्तर के लिए प्रस्तावित बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना से लगभग 8 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 125 मेगावाट विद्युत उत्पादन सुनिश्चित किया जा सकेगा। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री साय ने यह भी बताया कि बस्तर क्षेत्र में अब नक्सल प्रभाव में उल्लेखनीय कमी आई है और विकास कार्यों के लिए अनुकूल वातावरण बन रहा है। ऐसे में बोधघाट जैसी परियोजनाएं इस क्षेत्र को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में निर्माण संबंधी आवश्यक पहल करने के विषय में विस्तार से चर्चा की। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए परियोजना से संबंधित प्रस्तावों का शीघ्र तकनीकी परीक्षण कराने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री साय ने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार के सहयोग से बोधघाट परियोजना शीघ्र साकार रूप लेगी और यह बस्तर की आर्थिक उन्नति और सामाजिक बदलाव का प्रमुख आधार बनेगी।

रेल नेटवर्क विस्तार: भोपाल-इटारसी-बीना रूट पर चौथी लाइन के लिए सर्वे कार्य शुरू

भोपाल  रेलवे यातायात को सुगम, तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में भोपाल मंडल के अंतर्गत इटारसी-भोपाल-बीना खंड पर चौथी रेल लाइन परियोजना की शुरुआत कर दी गई है। इस परियोजना के पूरा होने से न केवल माल और यात्री परिवहन की क्षमता में इजाफा होगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन को भी नया आयाम मिलेगा। वर्तमान में इस खंड पर पहले से मौजूद तीन रेल लाइनों पर भारी यातायात का दबाव है, जिससे ट्रेनों की गति और समयबद्धता पर असर पड़ता है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि चौथी लाइन के निर्माण से यह दबाव कम होगा और मालगाड़ियों के निर्बाध संचालन के साथ-साथ यात्री ट्रेनों को भी समय पर और बेहतर ढंग से चलाया जा सकेगा। सर्वे और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी परियोजना के तहत इटारसी से भोपाल और फिर भोपाल से बीना तक सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। सर्वे के पूर्ण होते ही नियमानुसार आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। इसमें स्थानीय प्रशासन के सहयोग से भूमि स्वामियों को उचित मुआवजा दिए जाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। महत्वपूर्ण जिलों से होकर गुजरेगा रूट यह चौथी रेल लाइन मप्र के नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, भोपाल, विदिशा और सागर जैसे जिलों से होकर गुजरेगी। इन जिलों में रेलवे नेटवर्क के विस्तार से आवागमन की सुविधा बढ़ेगी और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। परियोजना से इन क्षेत्रों में आवागमन के समय में कमी आएगी और साथ ही माल परिवहन की लागत और समय में भी कमी आएगी। निर्माण, रखरखाव और संचालन से जुड़े कार्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। साथ ही, इस परियोजना के तहत माल गोदाम, लॉजिस्टिक्स हब जैसे रेलवे से जुड़े अन्य ढांचागत विकास से आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा। सर्वे कार्य किया जा रहा है     चौथी लाइन के निर्माण के लिए इटारसी से लेकर बीना खंड तक सर्वे का कार्य जारी है। सर्वे पूर्ण होने के बाद आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। – नवल अग्रवाल, पीआरओ, भोपाल मंडल बीना-इटारसी के बीच बिछेगी चौथी रेल लाइन रेलवे के अधिकारियों की मानें तो बीना से इटारसी के बीच चौथी रेल लाइन बिछाने के बाद सुपरफास्ट और एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें 160 से 220 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ेंगी। इतना ही नहीं ट्रैफिक का लोड भी कम होगा और ट्रैफिक क्लियर मिलने के कारण अभी जो गाड़ियां आउटर पर खड़ी करनी पड़ती हैं उन्हें भी खड़ा नहीं करना पड़ेगा जिसके कारण समय की काफी बचत होगी। बीना से इटारसी के बीच की दूरी 230 किमी. है जिसे पूरा करने में अधिकतर ट्रेनों को 4 से साढ़े 4 घंटे का वक्त लगता है। चौथी रेलवे लाइन की सर्वे रिपोर्ट रेलव बोर्ड को भेजने की जानकारी देते हुए रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि उम्मीद है कि 2025 में ही चौथी रेल लाइन का काम शुरू हो जाएगा और अगले 3 साल में चौथी रेल लाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। बीना-भोपाल-इटारसी रूट व्यस्ततम रूट है जिस पर रोजाना सैकड़ों ट्रेनें चलती हैं। 160 से 220 की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें भोपाल रेल मंडल के डीआरएम देवाशीष त्रिपाठी ने बताया कि "बीना से इटारसी के बीच तीसरी रेल लाइन का काम पूरा हो चुका है. नवंबर 2023 से इस पर ट्रेनें चल रही हैं. तीसरी लाइन के चालू होने से भोपाल मंडल को 10 से अधिक नई ट्रेनें मिली हैं. इन ट्रेनों में वंदे भारत, महामना, सिंगरौली-पुणे हमसफर और आरकेएमपी-एलटीटी एक्सप्रेस आदि शामिल हैं. इससे बाकी मंडलों को भी फायदा पहुंचा है. अब चौथी रेल लाइन बिछाने के बाद सुपरफास्ट और एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें 160 से 220 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ेंगी. ट्रैफिक क्लियर होने से अधिक देर तक आउटर में भी नहीं खड़े रहना पड़ेगा." वर्तमान में लगते हैं 4 से 5 घंटे बीना से इटारसी की दूरी 230 किलोमीटर है. इस दूरी को तय करने में निजामुद्दीन-जबलपुर सुपरफास्ट को 4 घंटे 20 मिनट लगते हैं. इसी प्रकार ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस और कुशीनगर बीना से इटारसी पहुंचने में करीब 4 घंटे का समय लेती है. 3 लाइनों में लोड के कारण ट्रेन को समय अधिक लगता है. लेकिन चौथी रेल लाइन बिछने के बाद लोड कम हो जाएगा और ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी. यानि नई रेल लाइन बिछने के बाद बीना से इटारसी के बीच यात्रा करने पर 2 से ढाई घंटे की बचत होगी. 3 साल में पूरा होगा चौथी रेल लाइन का काम डीआरएम देवाशीष त्रिपाठी ने बताया कि "चौथी लाइन बिछाने के लिए सर्वे की रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेज दी गई है. 2025 में ही इसका काम शुरू हो जाएगा. बीना से इटारसी के बीच चौथी रेल लाइन बनने के बाद ट्रेनों की रफ्तार 160 से 220 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ जाएगी. अगले 3 साल में चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी. इसका मतलब है कि बीना से इटारसी का सफर 2 से ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा." केंद्रीय बजट में मिले 14,745 करोड़ रुपये केंद्रीय रेलवे बजट में मध्य प्रदेश के लिए 14,745 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इससे मध्य प्रदेश में जहां ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, वहीं यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होगा. अभी बीना-भोपाल-इटारसी रूट मालगाड़ी और पैसेंजर ट्रेन के लिए काफी जरूरी है. यह व्यस्ततम रूट में गिना जाता है. वर्तमान में इस रूट से सैकड़ों एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती हैं. चौथी नई लाइन न केवल यात्रा के समय को कम करेगी बल्कि माल ढुलाई को भी आसान बनाएगी. इससे प्रमुख शहरों की आपस में कनेक्टिविटी बेहतर होगी.   

आश्रम-छात्रावासों के विद्यार्थियों का भविष्य संवारने की महती जिम्मेदारी अधिकारियों की – नेताम

रायपुर कृषि तथा किसान कल्याण और आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने जिला मुख्यालय कांकेर में बालोद, धमतरी और कांकेर के अधिकारियों की बैठक लेकर दोनों विभागों की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने तीनों जिलों में बीज एवं उर्वरक वितरण तथा किसानों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। उन्होंने जैविक कृषि, कोदो-कुटकी और उन्नत खेती के लिए किसानों के बीच इनसे संबंधित योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। उन्होंने इस बारे में किसानों को लगातार जागरूक और प्रेरित करने को कहा। विधायक आशाराम नेताम और आदिवासी विकास विभाग के आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।  कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सहकारी समितियों में भंडारित उर्वरकों को किसानों की मांग के अनुसार तत्काल वितरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कृषि एवं उद्यानिकी फसलों को और अधिक उन्नत बनाने तथा इनसे जुड़ी योजनाओं की पहुंच सभी किसानों तक सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों से मृदा को होने वाले दुष्प्रभावों से किसानों को जागरूक करने को कहा। उन्होंने उद्यानिकी के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने युवाओं को रिफ्रेशर प्रशिक्षण एवं तकनीकी जानकारी देने को भी कहा। नेताम ने मुनगा, ऑयल पॉम, कोदो-कुटकी जैसे रोजगारमूलक फसलों का क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने क्षेत्र की जलवायु के अनुरूप मसाला वर्गीय फसल लेने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।  आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि आश्रम-छात्रावासों में निवासरत विद्यार्थियों का भविष्य संवारने की बड़ी जिम्मेदारी अधिकारियों की है। विभाग द्वारा जो दायित्व सौंपे गए हैं, उन्हें पूरी इच्छाशक्ति के साथ निभाएं। उन्होंने तीनों जिलों के सहायक आयुक्तों को हर सप्ताह 8-10 छात्रावासों का आकस्मिक निरीक्षण करने तथा वहां की वस्तुस्थिति से अवगत होकर अपने कलेक्टर को जानकारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने आश्रम-छात्रावासों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने आश्रम-छात्रावासों के लंबित एवं अपूर्ण निर्माण कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने तथा पूरे परिसर में सघन पौधरोपण करने के साथ ही वहां नियमित साफ-सफाई, बिजली, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं हर हाल में सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।  राज्य मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष भरत मटियारा, कांकेर के कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, जिला पंचायत के सीईओ हरेश मंडावी और कृषि विभाग के संचालक तथा राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक अजय कुमार अग्रवाल सहित तीनों जिलों के कृषि और आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारी भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।