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शिक्षा को मिला प्रोत्साहन: मनोरा कॉलेज भवन हेतु 4.61 करोड़ की स्वीकृति

मुख्यमंत्री की घोषणा पर त्वरित अमल : मनोरा कॉलेज भवन निर्माण के लिए 4.61 करोड़ रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री की घोषणा का त्वरित असर: मनोरा कॉलेज के लिए 4.61 करोड़ मंजूर शिक्षा को मिला प्रोत्साहन: मनोरा कॉलेज भवन हेतु 4.61 करोड़ की स्वीकृति जशपुर जिले में शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मनोरा विकासखंड के शासकीय कॉलेज भवन के निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 61 लाख 25 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। यह स्वीकृति मुख्यमंत्री द्वारा अपने जशपुर प्रवास के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप दी गई है, जिस पर राज्य सरकार द्वारा तत्परता से अमल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जशपुर जिले के विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना और सड़क-पुल निर्माण से जुड़े कार्यों के लिए लगातार स्वीकृतियाँ दी जा रही हैं, ताकि विकास योजनाएं तेज़ी से धरातल पर उतर सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधाएं उनके निकट ही उपलब्ध हों। इसी उद्देश्य से मनोरा में कॉलेज भवन का निर्माण कराया जा रहा है। इसके साथ ही जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में भी ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। मनोरा में कॉलेज भवन निर्माण की स्वीकृति से क्षेत्र के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने मुख्यमंत्री की इस पहल के लिए उनका आभार प्रकट किया है।

यातायात सुधार की मिसाल बने भोपाल: न्यायमूर्ति सप्रे की पहल

हेलमेट, सीट बेल्ट सहित यातायात नियमों के पालन को बनाएं आदत नियम उल्लंघन और नशे में वाहन चलाने पर हो सख्त कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति अध्यक्ष के साथ जिला सड़क सुरक्षा समिति की हुई बैठक भोपाल सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री अभय मनोहर सप्रे ने कहा है कि भोपाल में सड़क सुरक्षा और यातायात सुधार के क्षेत्र में संगठित प्रयासों के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम सहित सभी संबंधित विभागों को गंभीरता, लगन और समर्पण भाव से कार्य करना होगा। उन्होंने समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर आगामी 3 माह में सकारात्मक बदलाव सुनिश्चित करने की अपेक्षा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा संबंधी समिति भोपाल को इस दिशा में हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मृत्यु की संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। न्यायमूर्ति श्री सप्रे की अध्यक्षता में शुक्रवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय भोपाल में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक हुई। बैठक में कलेक्टर श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह, पुलिस आयुक्त श्री हरिनारायणचारी मिश्र, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री पंकज श्रीवास्तव, नगर निगम आयुक्त श्री हरेन्द्र नारायण, सीईओ स्मार्ट सिटी श्रीमती अंजू अरुण कुमार, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती ईला तिवारी एवं एडीएम श्री अंकुर मेश्राम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि हेलमेट पहनने की आदत को बढ़ावा दिया जाए, सीट बेल्ट उपयोग के प्रति जागरूकता लाई जाए, शराब पीकर वाहन चलाने वालों एवं नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोक परिवहन को बढ़ावा दिया जाए ताकि सड़कों पर छोटे वाहनों का दबाव कम हो सके। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस विभाग सहित सभी शासकीय कर्मचारी वाहन चलाते समय अनिवार्य रूप से सीट बेल्ट/हेलमेट का उपयोग करें। स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाए। उन्होंने मीडिया से जन-जागरूकता अभियान को गति देने में सहयोग का भी आग्रह किया। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने भोपाल जिले के अंतर्गत विगत 5 वर्षों में हुई सड़क दुर्घटनाओं, ब्लैक स्पॉट चिन्हांकन एवं उनके सुधार कार्यों, चालानी कार्रवाई, जन-जागरूकता अभियानों और अन्य नवाचारों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का जीवन अमूल्य है और किसी की गलती से निर्दोष की जान न जाए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने निर्देश दिए कि वाहनों की फिटनेस की नियमित जांच की जाए, ड्राइविंग टेस्ट में सख्ती बरती जाए, बीमा और लाइसेंस की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाए तथा ओवरलोडिंग पर रोक के लिए विशेष कार्रवाई की जाए। सड़कों पर मानक गति सीमा का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों के लिए राहवीर योजना और कैशलेस ट्रीटमेंट योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। श्री सप्र ने कहा कि प्रशासन एवं पुलिस बड़ी संस्थाओं से अपील करे कि वे अपने कर्मचारियों के लिए परिवहन सुविधाएं, जैसे बसें आदि, उपलब्ध कराएं जिससे सड़कों से वाहनो का अत्यधिक दबाब कम हो। उन्होंने जिले के नागरिकों से भी आग्रह किया कि बच्चों को बचपन से ही सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए। कलेक्टर श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि भोपाल जिले में सड़क सुरक्षा और यातायात सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें नवाचार और जन-जागरूकता अभियान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बैठक में दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। पुलिस आयुक्त श्री हरिनारायणचारी मिश्र ने कहा कि पुलिस विभाग सड़क सुरक्षा को लेकर और अधिक सक्रियता से कार्य करेगा तथा जागरूकता अभियान को गति देकर उसे प्रभावी बनाया जाएगा।  

सेवानिवृत्त हुए प्रकाश सिंह, कलेक्ट्रेट सभागार में हुआ भावभीना विदाई समारोह

राजगढ़  जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में लंबे समय से कार्यरत एवं स्टे नंबर-2 और शस्त्र लाइसेंस शाखा के वरिष्ठ कर्मचारी प्रकाश सिंह की सेवानिवृत्ति के अवसर पर आज एक भावभीना विदाई समारोह कलेक्टर सभागार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर कार्यालय के समस्त अधिकारी-कर्मचारी, उनके परिजन और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह में श्री प्रकाश सिंह को उनके उत्कृष्ट सेवाभाव, विनम्र आचरण और कर्तव्यनिष्ठा के लिए पुष्पमालाओं, साफा एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। साथी कर्मचारियों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी और उनके साथ बिताए गए क्षणों को साझा किया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि श्री सिंह के परिजनों ने भी समारोह में भाग लेकर उनके सेवा-जीवन पर गर्व व्यक्त किया। समारोह के दौरान माहौल आत्मीयता और भावनाओं से भरा रहा। श्री प्रकाश सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “यह सेवा मेरे लिए सम्मान का विषय रही। कार्यालय मेरे परिवार जैसा रहा है, और आप सभी मेरे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।” उन्होंने सभी सहकर्मियों का आभार जताते हुए उन्हें स्नेहपूर्वक अलविदा कहा। समारोह में मौजूद सभी लोगों ने उनके स्वस्थ, सुखद एवं समृद्ध सेवानिवृत्त जीवन की कामना की।

नक्सल नेटवर्क पर शिकंजा कसने उतरी ED, संयुक्त अभियान में होगी भागीदारी

रायपुर नक्सलियों के खिलाफ ज्वाइंट एक्शन में अब ED भी शामिल होगी. टेरर फंडिंग को लेकर रायपुर में हुई बड़ी बैठक में “प्लान ऑफ एक्शन टू नक्सल” पर चर्चा के दौरान इस संबंध में फैसला लिया गया. बैठक में छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना,आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के आईजी, और डीआईजी शामिल थे. इस दौरान ED और NIA के अफसर से हाल में टेरर फंडिंग को लेकर हुए खुलासे पर चर्चा हुई. इसके साथ ED और NIA के ज्वाइंट ऑपरेशन पर जोर दिया गया. पूरी बैठक IB के स्पेशल डायरेक्टर ऋत्विक रूद्र ने ली. वित्तीय लेन-देने रोकने का काम करेगी ED इस संबंध में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ED का काम अगर ऐसे मामलों में वित्तीय लेनदेन है, तो उसे रोकना है. ये IB की भी सूचना हो सकती है कि लेनदेन की जानकारी निकाल लें. विभिन्न एजेंसियां ये काम करती हैं. ये दिखता है कि मामला ईडी को दिए जाने लायक है तो दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि चाहे नक्सलियों का अर्बन, लीगल, फाइनांसियल या रूरल बेस हो, सब पर एजेंसियां काम कर रही हैं.

एम.पी. ट्रांसको देवास में हुआ सी.पी.आर. प्रशिक्षण सत्र

सब-स्टेशन स्टाफ ने सीखी जीवन बचाने की तकनीक भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) द्वारा देवास व आसपास के सब-स्टेशनों में तैनात आउटसोर्स कर्मियों सहित अन्य कार्मिकों के लिए सी.पी.आर. (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) और आपातकालीन चिकित्सा तकनीकों पर केंद्रित एक विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन सिविल हॉस्पिटल देवास में किया गया। डॉ. बी.आर. शुक्ला (मेडिसिन विशेषज्ञ) और डॉ. कुलदीप एवं उनकी टीम द्वारा कर्मचारियों को जीवन रक्षक प्राथमिक चिकित्सा के व्यावहारिक गुर सिखाए गए। कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा सी.पी.आर. की तकनीकी जानकारी और उसका लाइव प्रदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि हृदयगति रुकने की स्थिति में शुरुआती तीन मिनट के भीतर दी गई सी.पी.आर. सहायता से मरीज के जीवित बचने की संभावना तीन गुना तक बढ़ जाती है। डॉ. शुक्ला ने कहा कि “हर व्यक्ति को जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी होनी चाहिए, सी.पी.आर. जैसी सरल विधि भी किसी की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। बिजली व्यवस्था से जुड़े स्टाफ अगर यह ज्ञान रखते हैं तो वे केवल अपने परिवार ही नहीं, समाज के लिए भी मददगार बन सकते हैं। स्वास्थ्य शिविर में देवास, चापड़ा, सोनकच्छ, शंकरगढ़, बरोठा, मक्सी, किशनगढ़ सहित 9 सबस्टेशनों के आउटसोर्स कर्मियों सहित लगभग 40 कर्मियों ने हिस्सा लिया।  

महाराष्ट्र में सुरक्षा एजेंसियों का एक्शन, नकली बर्थ सर्टिफिकेट के जरिये रह रहे बांग्लादेशी बेनकाब

मुंबई  महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य के कैबिनेट मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को बताया कि सरकार ने विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान करेगी। इसके साथ ही सभी जिलों को आदेश दिया गया है कि 15 अगस्त तक फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों की जांच पूरी कर उन्हें रद्द कर दिया जाए। सरकार ने साफ किया है कि अब किसी को भी फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी सुविधाएं नहीं दी जाएंगी। अवैध बांग्लादेशियों की पहचान की जाएगी बावनकुले ने कहा कि अब तक जिन अवैध घुसपैठियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा है, उन पर भी शिकंजा कसा जाएगा। उन्होंने बताया कि जिनके पास फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट हैं, उनकी पूरी लिस्ट तैयार की जा रही है और उन सभी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले इन लोगों को पहचान पत्र, स्कूल दाखिला, आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता का भ्रम पैदा कर सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा था। महाराष्ट्र में फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट पर कार्रवाई, अवैध बांग्लादेशियों की पहचान तेज फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट बनने की प्रक्रिया में स्थानीय अधिकारियों, एजेंटों और नेताओं की मिलीभगत सामने आई है। कई मामलों में नगरपालिका या पंचायत कार्यालय के कर्मचारियों ने बिना किसी दस्तावेज सत्यापन के पैसे लेकर प्रमाणपत्र जारी किए। कुछ ने स्कूलों के फर्जी रिकॉर्ड का सहारा लिया तो कुछ ने किराए के पते और जाली पहचान के जरिए यह फर्जीवाड़ा किया। डिजिटल रिकॉर्डिंग और दस्तावेजों की क्रॉस वेरिफिकेशन की कमी ने इस गड़बड़ी को बढ़ावा दिया। अब टास्क फोर्स हर बर्थ सर्टिफिकेट की फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए जांच करेगी। कांग्रेस पर बोला हमला बावनकुले ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि संसद में ‘ऑपरेशन महादेव’ को लेकर जो बयान दिए गए, वे सेना और देश के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि जब देश आतंकवादियों पर सख्त कार्रवाई करता है, तो कांग्रेस सवाल उठाने लगती है, जिससे उसकी मानसिकता साफ होती है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब ‘महादेव’ से भी नफरत करने लगी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर दी गई जानकारी को पूरी तरह तथ्यात्मक और पारदर्शी बताया। फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस इस सच्चाई को छुपाने की कोशिश कर रही है और पाकिस्तान जैसी भाषा बोल रही है, जिससे उसकी असलियत सामने आ गई है।

प्रकृतिक आपदा से पिड़ित व्यक्ति को उपलंब्ध कराई गई राहत राशि

प्रकृतिक आपदा से पिड़ित व्यक्ति को उपलंब्ध कराई गई राहत राशि कलेक्टर ने व्हीसी के माध्यम से अनुभागवार राहत राशि वितरण की समीक्षा    सिंगरौली प्रकृतिक आपदा अतिवृष्टि से पिड़ित जिले के ऐसे नागरिक जिनके आवास, फसल, पशु हानि सहित आकाशीय बिजिली की चपेट में आने से पिड़ित व्यक्तियो के राहत राशि वितरण की समीक्षा कलेक्टर श्री चन्द्र शेखर शुक्ला ने व्हीसी के माध्यम से की। एवं अनुभागवार राहत राशि वितरण की जानकारी ली। जिसके तहत सभी राजस्व अधिकारियो द्वारा अवगत कराया गया कि अपने अपने अनुभागो में पिड़ित व्यक्तियो के सम्पत्तियो का सर्वे कराकर उन्हे राहत राशि उपलंब्ध करा दी गई है।  कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियो को निर्देश दिए कि अपने  क्षेत्रो के  पटवारियो द्वारा एक बार फिर से सर्वे कराये कि कोई पिड़ित व्यक्ति छूट तो नही है अगर त्रृटिवस कोई पिड़ित छूट गया है तो उसके क्षतिग्रस्त सम्पत्ति का  आकलन कर राहत राशि उपलंब्ध कराये। उन्होने निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित करे कि कोई भी पिड़ित व्यक्ति राहत राशि से वंचित न रहे।

सभी 55 जिलो में लागू होंगे सड़क सुरक्षा के उपाय : मुख्य सचिव जैन

भोपाल सर्वोच्च न्यायालय सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष जस्टिस श्री अभय मनोहर सप्रे ने सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आव्हान किया है। उन्होंने मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन के साथ सड़क सुरक्षा को लेकर बैठक की। जस्टिस श्री सप्रे ने बैठक में उपस्थित समस्त अधिकारियों से आम आदमी के जीवन को सुरक्षित रखने का दायित्व निभाने की अपील भी की। उन्होंने सड़क सुरक्षा की गंभीरता के दृष्टिगत अधिकारियों को सलाह और मार्गदर्शन भी दिया। उन्होंने कहा कि स्वीडन में सड़क सुरक्षा को लेकर बहुत अच्छा काम हुआ है। वैसा काम हमारे देश में और मध्यप्रदेश में हम भी कर सकते हैं। सड़क दुर्घटना से प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ लाख लोगों की मृत्यु होती है। उनके जीवन को बचाने के लिए मिशन की शुरूआत मध्यप्रदेश से की है। उन्होंने बताया कि रोड सेफ्टी की मैदानी स्थिति जानने के लिए वे सड़क से ही अपनी यात्रा कर रहे है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश के लिए दीर्घकालीन एवं तात्कालिक नीति तैयार की जाकर क्रियान्वयन किया जाये। अच्छे काम करने वालों को प्रोत्साहित किया जाये तथा खराब सड़क बनाने वालों को ब्लैक लिस्ट करें। सड़कों पर इतनी सुरक्षा होनी चाहिये कि एक भी व्यक्ति की जान नहीं जाये। जस्टिस श्री सप्रे ने अधिकारियों से कहा कि लोगों की जान बचाने की आपको जिम्मेदारी दी गयी है और इस कार्य पर सुप्रीम कोर्ट पूरे समय ध्यान दे रहा है। जस्टिस सप्रे ने कहा कि जैसे मध्यप्रदेश के इंदौर ने स्वच्छता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, वैसे ही प्रदेश के शहर सड़क सुरक्षा में अपना स्थान बनायेंगे। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की है कि प्रदेश के अधिकारी लोगों की जान बचाने के लिए अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करेंगे। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि भारत सरकार की ही तरह तात्कालिक एवं दीर्घकालीन उपाय प्रदेश के सभी 55 जिलों में लागू किये जायेंगे। प्रदेश के 9 जिलों में सड़क सुरक्षा के लिए आई.आई.टी. मद्रास की मदद ली जायेगी और बाद में 6 और जिलों में यह किया जायेगा। सड़क सुरक्षा के लिए सभी एजेंसियों में समन्वय स्थापित किया जायेगा। पुलिस, नगरीय प्रशासन, स्वास्थ्य एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की टीम बनायी गयी है। इंजीनियरों को केपिसिटी बिल्डिंग के लिए प्रशिक्षण दिया जायेगा तथा सड़कों एवं ब्रिज की मरम्मत की जायेगी। मुख्य सचिव ने कहा कि हर जिले मे आटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन शुरू किया जायेगा। ड्राइविंग इंस्टीट्यूट की संख्या बढ़ायी जायेगी। यातायात नियमों का पालन कराया जायेगा। लोगों को हेलमेट लगाने के लिए प्रेरित किया जायेगा। सभी वाहनों का इंश्योरेंस किया जायेगा। चालान जनरेशन एवं पेमेण्ट सिस्टम दुरूस्त किया जायेगा। सड़क दुर्घटना में गोल्डन ऑवर में जान बचाने के प्रयास किये जायेंगे। एम्बुलेंस की व्यवस्थाएं सुधारी जायेंगी। इमरजेंसी रिस्पांस टाइम को बेहतर किया जायेगा। यातायात नियमों एवं सड़क सुरक्षा की जागरूकता के लिए स्कूलों में बताया जायेगा। जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें नियमित तौर पर आयोजित की जायेंगी। सड़क सुरक्षा कोष का उपयोग किया जायेगा। राहवीर योजना का भी व्यापक प्रचार-प्रसार करने की भी जानकारी दी गई। मुख्य सचिव श्री जैन ने जस्टिस श्री अभय मनोहर सप्रे को आश्वस्त किया कि मध्यप्रदेश के अधिकारी उनके निर्देश और मार्गदर्शन से बेहतर कार्य करेंगे। एक्शन प्लान से सड़क दुर्घटनाओं में तथा मृत्यु में कमी लाने के प्रयास सफल हो सकेंगे। नोडल अधिकारी एवं परिवहन आयुक्त श्री विवेक शर्मा ने राज्य के एक्शन प्लान का प्रस्तुतीकरण किया। बैठक में प्रमुख सचिव श्री संदीप यादव, परिवहन सचिव श्री मनीष सिंह, गृह सचिव श्रीमती कृष्णा वेणी-देशावतु, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय विकास, स्कूल शिक्षा, लोक निर्माण, मध्यप्रदेश सड़क निगम विकास निगम, एवं रेल्वे के अधिकारी उपस्थित रहे। समिति करेगी जिलों का भ्रमण सर्वोच्च न्यायालय सड़क सुरक्षा समिति भोपाल, नर्मदापुरम एवं नरसिंहपुर जिलों का भ्रमण कर जिला सड़क सुरक्षा समिति के साथ बैठक करेगी। इसके पूर्व समिति ने इंदौर जिले का भ्रमण कर बैठक की थी।  

महापौर की अध्यक्षता में मेयर इंन काउसिल की बैठक आयोजित

सिंगरौली   नगर पालिक निगम सिंगरौली की महापौर श्रीमती रानी अग्रवाल की अध्यक्षता एवं  मेयर इंन काउसिल के सदस्य खुर्शिद आलम, श्रीमती अंजना शाह, श्रीमती शिवकुमारी कुशवाहा, श्रीमती श्यामला, श्रीमती रीता देवी जापति, श्रीमती बबली शाह,, श्रीमती रूकमन प्रजापति,नगर निगम आयुक्त श्री डी.के शर्मा  के उपस्थिति में मेयर इंन काउसिल की बैठक आयोजित हुई। बैठक में सर्व प्रथम चर्चा उपरांत मेयर इंन काउसिल की पूर्व  बैठक के कार्यवाही विवरण का सर्वसम्मति  से पुष्टि की गई।  तत्पश्चात नगर निगम सिगरौली के वार्ड क्रमांक 32 में स्थित कादम्बरी काम्प्लेक्स के दुकानदारों द्वारा दुकानों के व्यवस्थापन किए जाने हेतु  प्राप्त आवेदन पत्र एवं पूर्व में जिन्हे दुकान आवटित की गई थी ऐसे आवंटियों के संबंध में विस्तार से चर्चा कर निर्णय लिया गया। मेयर इंन काउसिल की बैठक में म.प्र. अचल सम्पत्ति अन्तरण नियम 2016 में संशोधित नियम 2023 के तहत 5 वर्ष से  अधिक समय तक किराएदार के रूप में दुकानों में व्यवसायरत किराएदार को व्यवस्थापन  पद्यति से दुकानों का आंवटन किया जा सकता है। उपरोक्त सभी दुकानदार 5 वर्ष से अधिक समय से दुकानों में काबिज है। उपरोक्त सभी दुकानदार अप्रैल 2020 से दुकानों का किराया जमा करना बन्द कर दिया है। वर्ष 2025-26 के कलेक्टर गाइडलाईन अनुसार प्रति दुकान रूपये 5,90,58 लागत मूल्य निर्धारित हो रही है। अतः उपरोक्त वर्णित सभी किराएदारों से बकाया किराया मांह अप्रैल 2020 से वर्तमान तक का जमा कराते हुए म०प्र० अचल सम्पत्ति अन्तरण नियम 2023 के प्रावधान अनुसार व्यवस्थापन पद्यति से दुकानों के आवंटन के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान उपायुक्त आर पी बैस,  सहायक आयुक्त रूपाली द्विवेदी, सहाय आयुक्त  एच एम श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री प्रदीप चडार, लेखाधिकारी अनुपम दुबे,  सहायक यंत्री प्रवीण गोस्वामी, अभयराज सिंह, आलोक टीरु, एस एन द्विवेदी, सहायक विधि अधिकारी अक्षत उपाध्याय, आदि उपस्थित रहे।

दिल्लीवालों को बड़ी राहत: एक दशक बाद सबसे स्वच्छ हवा, देखें ताजा AQI रिपोर्ट

नई दिल्ली पिछले एक दशक में जुलाई का महीना दिल्ली के लिए सबसे स्वच्छ रहा, जहां औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 79 दर्ज किया गया, जो 2015 के बाद का सबसे कम आंकड़ा है. हाल ही में हुई रुक-रुक कर बारिश ने दिल्ली की वायु को साफ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे पूरे सप्ताह के दौरान वायु गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है. AQI में सुधार के पीछे बारिश का एक महत्वपूर्ण कारण है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में पिछले दस वर्षों में जुलाई का महीना सबसे अधिक स्वच्छ रहा. लगातार हो रही बारिश के कारण वायु गुणवत्ता में सुधार होता रहा, जिससे दिल्ली की हवा ने पिछले एक दशक के रिकॉर्ड को तोड़ दिया. बीते सालों में जुलाई के महीने में दिल्ली की हवा बीते वर्षों में जुलाई के दौरान दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) विभिन्न स्तरों पर रहा है. 2015 में यह 138.13, 2016 में 145.64, 2017 में 98.39, 2018 में 103.83, 2019 में 134, 2020 में 83.80, 2021 में 110.06, 2022 में 87.29, 2023 में 83.67, 2024 में 96 और 2025 में 79 दर्ज किया गया है. यह 2025 का AQI पिछले वर्षों की तुलना में सबसे कम है, जो वायु गुणवत्ता में सुधार का संकेत देता है. सामान्य से अधिक हुई बारिश जुलाई महीने में बारिश की मात्रा औसत से अधिक रही है, और शहर के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार वर्षा हो रही है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश की संभावना जताई है. इसके साथ ही, 31 जुलाई को बारिश के लिए यलो अलर्ट भी जारी किया गया है. AQI कितना बेहतर दिल्ली और एनसीआर में लगातार बारिश के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार हुआ है. जुलाई महीने में औसत AQI 79 दर्ज किया गया, जो 2015 के बाद से सबसे कम है. यह AQI संतोषजनक श्रेणी में आता है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, AQI को 0 से 50 के बीच अच्छा, 51 से 100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 के बीच मध्यम, 201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर माना जाता है. वायु प्रदूषण विशेषज्ञ ने क्या कहा? विशेषज्ञ इस दावे को लेकर संदेह में हैं. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की वायु प्रदूषण विशेषज्ञ और कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी ने बताया कि वायु गुणवत्ता में सुधार मौसम की परिस्थितियों का परिणाम है. उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण प्रदूषक पानी में मिल जाते हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर घटता है. इस वर्ष लगातार हो रही तीव्र बारिश को इस स्थिति का मुख्य कारण माना गया है. रॉयचौधरी ने सरकार के योगदान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सीमित समय में सभी उत्सर्जन डेटा की तुलना करना संभव नहीं है. मानसून के मौसम में इस तरह के आकलन करना उचित नहीं होगा. सर्दियों के महीनों में प्रदूषण के स्तरों का विश्लेषण करना आवश्यक है, ताकि यह पता चल सके कि सरकार की पहल सही दिशा में प्रगति कर रही हैं या नहीं. सामान्य से अधिक हुई बारिश जुलाई में बारिश की मात्रा पहले के औसत से अधिक रही है. दिल्ली के सफदरजंग मौसम केंद्र ने बुधवार सुबह 8:30 बजे तक 220.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की, जबकि इसका लंबा अवधि का औसत 209.7 मिमी है. इसी दिन शाम 5:30 बजे तक इस केंद्र ने 15 मिमी और बारिश दर्ज की. शहर के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हुई. पालम मौसम केंद्र ने बुधवार सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटों में 4.6 मिमी और सुबह 8:30 से शाम 5:30 बजे के बीच 28.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की. इसी समय में पूसा स्टेशन पर क्रमशः 37.5 मिमी और 12.5 मिमी बारिश हुई, जबकि जनकपुरी स्टेशन में देर दोपहर 11.5 मिमी बारिश हुई. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के एक अधिकारी के अनुसार, गुरुवार को भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी, जबकि शुक्रवार से बहुत हल्की से हल्की बारिश, गरज और बिजली गिरने की घटनाएं देखी जा सकती हैं.