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UP में शराब की दुकान खोलने का क्रेज, एक ठेके के लिए 265 आवेदन – ये हैं लाइसेंस के नियम और फायदे

लखनऊ  देश में शराब की बिक्री लगातार बढ़ रही है, राज्य सरकारों की इससे झोली भरती है, अप्लीकेशन फीस, लाइसेंस चार्ज और फिर हर बोतल पर कमीशन यानी TAX से सरकार को मोटी कमाई होती है. राज्य सरकारें अपने हिसाब से आबकारी नीतियों पर बदलाव करती रहती हैं, ताकि पारदर्शिता के साथ-साथ सरकार की आय भी बढ़ती रहे.   इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की आबकारी नीति वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कई महत्वपूर्ण बदलावों के साथ लागू की गई है. उत्तर प्रदेश सरकार की मानें तो नई आबकारी नीति 2025-26 का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना, शराब व्यापार में पारदर्शिता लाना और मिलावट को रोकना है. ई-लॉटरी के माध्यम से लाइसेंस आवंटन प्रक्रिया को निष्पक्ष और आसान बनाया गया है.  अगर उत्तर प्रदेश में आप शराब की दुकान का लाइसेंस लेना चाहते हैं तो आपको ऑनलाइन आवेदन करना होगा. इसकी पूरी जानकारी आपको आबकारी विभाग की वेबसाइट या जिला आबकारी विभाग से मिल जाएगी. लाइसेंस के लिए आवेदन उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (www.upexcise.in) पर ऑनलाइन जमा करना होगा.  एक अनुमान के मुताबिक वित्त-वर्ष 2024-25 के दौरान उत्तर प्रदेश में करीब 12533 शराब और बीयर दुकानें थीं. इनमें अंग्रेजी शराब की 6,563 और बीयर की 5970 दुकानें थीं. कंपोजिट दुकानों को लेकर आबकारी विभाग ने अंग्रेजी शराब और बीयर की दुकानों की कुल संख्या 9,362 कर दी है. अब आइए बताते हैं, आप कैसे उत्तर प्रदेश में शराब और बीयर की दुकान खोल सकते हैं…  सरकार का दावा है कि शराब की दुकान का लाइसेंस प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाया गया है. उत्तर प्रदेश आबकारी नीति 2025-26 के अनुसार कंपोजिट दुकानों पर अंग्रेजी शराब, बीयर और वाइन की बिक्री एक साथ की जा सकेगी. यानी सूबे में कुल शराब की दुकानों की संख्या में जो कमी आई है, उसकी ये वजह है. पहले अंग्रेजी शराब, बीयर और वाइन की अलग-अलग दुकानें होती थीं, जिसे अब एकसाथ खोलने की अनुमति दे दी गई है, जिससे दुकानों की संख्या घटी है, यानी दुकानें बंद नहीं हुई हैं, विलय कर दिया गया है.   ई-लॉटरी सिस्टम से लाइसेंस का वितरण उत्तर प्रदेश में शराब (देशी, विदेशी, बीयर) और भांग की दुकानों के लाइसेंस अब ई-लॉटरी के माध्यम से आवंटित किए जा रहे हैं. पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण (रिन्यूवल) इस बार नहीं होगा. हालांकि, वित्तीय वर्ष 2026-27 में लाइसेंस रिन्यूवल का विकल्प उपलब्ध होगा. एक व्यक्ति, फर्म या कंपनी पूरे प्रदेश में अधिकतम दो दुकानों का लाइसेंस प्राप्त कर सकती है. एक व्यक्ति को दो से अधिक दुकानों का लाइसेंस नहीं मिलेगा, जिससे शराब व्यापार में एकाधिकार (मोनोपॉली) को रोका जा सके. कंपोजिट दुकान किसे कहते हैं? इस आर्टिकल में ऊपर कंपोजिट दुकानों का जिक्र है. दरअसल सूबे की सरकार ने पहली बार 'कंपोजिट शॉप्स' का नया विकल्प दिया है. जहां एक ही दुकान पर देशी शराब, विदेशी शराब, बीयर और वाइन बेची जा सकती है. इससे पहले बीयर की दुकानें अलग थीं. अभी भी इन दुकानों पर शराब पीने की अनुमति नहीं होगी. हालांकि ग्राहकों को शराब पीने की सुविधा देने के लिए कंपोजिट दुकानों को मॉडल शॉप में परिवर्तित किया जा सकेगा. इसके लिए अलग से शुल्क देना पड़ेगा. मॉल या मल्टीप्लेक्स में प्रीमियम दुकानें खोलने की अनुमति नहीं है. लेकिन हवाई अड्डों, मेट्रो और रेलवे स्टेशनों पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के साथ खोली जा सकती हैं.  प्रोसेसिंग शुल्क यानी आवदेन शुल्क (ये रकम वापस नहीं की जाएगी): देशी शराब की दुकान: 65,000 रुपये कंपोजिट दुकान: 90,000 रुपये मॉडल शॉप: 1,00,000 रुपये भांग की दुकान: 25,000 रुपये उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में आबकारी नीति 2025-26 के तहत करीब 1,987.19 करोड़ रुपये प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में जमा हुए थे. यह शुल्क गैर-वापसी योग्य है, यानी ये वापस नहीं किए गए. सरकार को केवल अप्लीकेशन से करीब 2000 करोड़ रुपये की कमाई हुई. बता दें, यूपी आबकारी विभाग चार श्रेणियों में 27,308 शराब की दुकानों के लिए ऑनलाइन लॉटरी आयोजित की थी, लॉटरी में 2 लाख से ज्यादा आवेदन आए थे, जिनमें औसतन प्रति दुकान के लिए 15 आवेदक थे. सबसे ज्यादा आवेदन मिश्रित शराब (Composite Liquor) की दुकानों के लिए मिले, ग्रेटर नोएडा में एक दुकान के लिए 265 आवेदन प्राप्त मिले. राज्य में 1 अप्रैल 2025 से नई आबकारी नीति लागू हो गई है.  अगर आप उत्तर प्रदेश में कंपोजिट दुकान के लिए आवेदन करते हैं, तो आपको कुल 90,000 रुपये प्रोसेसिंग शुल्क या आवेदन शुल्क के तौर जमा करना होगा, और ये किसी भी स्थिति में वापस नहीं किया जाएगा. भले ही आपका आवेदन अस्वीकार हो जाए, आप लॉटरी में चयनित न हों, या आप बाद में प्रक्रिया से हट जाएं. इसलिए नई आबकारी नीति को देखते हुए कह सकते हैं, अब केवल गंभीर आवेदक ही प्रक्रिया में भाग लें, और लाइसेंस मिले या ना मिले आवेदन शुल्क के तौर पर 25 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक चुकाने ही पड़ेंगे.  लाइसेंस पाने की योग्यता  आवेदक कम से कम 21 वर्ष का भारतीय नागरिक होना चाहिए. एक व्यक्ति केवल एक आवेदन कर सकता है, लेकिन विभिन्न दुकानों के लिए आवेदन संभव है. आवेदक का आपराधिक रिकॉर्ड साफ होना चाहिए. परिवार (पति/पत्नी, आश्रित पुत्र, अविवाहित पुत्रियां, आश्रित माता-पिता) के सदस्यों को अलग-अलग आवेदन करने की अनुमति है.  आवेदन के लिए ये दस्तावेज जरूरी- पहचान पत्र (आधार कार्ड, वोटर आईडी) आयकर रिटर्न (पिछले तीन वर्ष का) शपथ पत्र (ई-लॉटरी आवेदन के साथ) प्रोसेसिंग शुल्क का भुगतान रसीद अन्य दस्तावेज- निवास प्रमाण पत्र और बैंक विवरण.  सभी पात्र आवेदनों की जांच जिला आबकारी अधिकारी द्वारा की जाती है. लॉटरी माध्यम से चयन के बाद आवेदकों को ईमेल और SMS के माध्यम से सूचित किया जाता है. परिणाम आबकारी विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध होते हैं.  नई आबकारी नीति में ये बदलाव भी: – चयन के बाद, लाइसेंस शुल्क (254-260 रुपये प्रति लीटर) और अन्य शुल्क जमा करना होगा. – देशी शराब अब एसेप्टिक ब्रिक पैक (टेट्रा पैक) में उपलब्ध होगी, जिससे मिलावट की संभावना कम होगी.  – सूबे के प्रत्येक जिले में फल आधारित शराब (फ्रूट वाइन) की एक दुकान होगी. मंडल मुख्यालयों पर लाइसेंस शुल्क 50,000 रुपये और अन्य जिला मुख्यालयों पर 30,000 रुपये है.  – सभी दुकानों पर दो CCTV कैमरे और जियो-फेंसिंग अनिवार्य होगी. … Read more

बाढ़ से बेहाल यूपी के 17 जिले, 402 गांव डूबे – राहत के लिए 11 मंत्री पहुंचे ज़मीन पर

कानपुर उत्तर प्रदेश इन दिनों बाढ़ के विकराल संकट से जूझ रहा है. गंगा, यमुना और अन्य नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और इसकी चपेट में अब तक 17 जिलों के 402 गांव आ चुके हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद राहत कार्यों की मॉनिटरिंग शुरू कर दी है. अब उन्होंने अपने कैबिनेट के 11 मंत्रियों को सीधे ग्राउंड ज़ीरो पर भेजकर बाढ़ राहत की निगरानी का जिम्मा सौंपा है. ये सभी मंत्री प्रभावित जिलों में पहुंच चुके हैं और राहत शिविरों, बांधों और जलभराव वाले गांवों का दौरा कर रहे हैं. 17 जिले बाढ़ की चपेट में, हजारों परिवार विस्थापित राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में उत्तर प्रदेश के जिन जिलों में बाढ़ का सर्वाधिक असर दिख रहा है, उनमें कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, आगरा, औरैया, चित्रकूट, बलिया, बांदा, गाज़ीपुर, मीरजापुर, प्रयागराज, वाराणसी, चंदौली, जालौन, कानपुर देहात, हमीरपुर, इटावा और फतेहपुर शामिल हैं. इन जिलों की 37 तहसीलों के 402 गांव बाढ़ की चपेट में हैं. राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी के अनुसार, कुल 84,392 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिनमें से अब तक 47,906 पीड़ितों को राहत सहायता दी जा चुकी है. ये आंकड़े खुद में संकट की गंभीरता को बयां करते हैं. 11 मंत्री पहुंचे मोर्चे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रभावित जिलों की सतत निगरानी के साथ ही अपने मंत्रियों को सीधे फील्ड में भेजा है. इनमें से कई मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में पहुंच चुके हैं और कई वहीं रात्रि विश्राम कर रहे हैं ताकि अगले दिन का दौरा भी निर्बाध रूप से हो सके. वाराणसी शहर दक्षिणी के विधायक एवं पूर्व मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने बाढ़ग्रस्त घरों तक स्वयं राहत सामग्री पहुंचाई। यहां जानिए कौन मंत्री किस जिले की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं: – नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ : प्रयागराज –  स्वतंत्र देव सिंह और संजय गंगवार : जालौन – स्वतंत्र देव सिंह और प्रतिभा शुक्ला : औरैया – रामकेश निषाद : हमीरपुर – जयवीर सिंह : आगरा – सुरेश खन्ना : वाराणसी – संजय निषाद : कानपुर देहात -धर्मवीर प्रजापति : इटावा – अजीत पाल : फतेहपुर – दयाशंकर सिंह 'दयालु' : बलिया 47 हजार से अधिक पीड़ितों को पहुंचाई गई मदद सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 493 नावों और मोटरबोट्स की मदद से राहत सामग्री बांटी जा चुकी है. 6,536 खाद्यान्न पैकेट और 76,632 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं. इसके अतिरिक्त, बाढ़ के कारण संकट में आए 2,759 मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है. बाढ़ की वजह से 343 मकानों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से 327 मामलों में पीड़ितों को सहायता राशि दी जा चुकी है. इसके साथ ही 4,015 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हुई है. 905 शरणालयों में 11 हजार से ज्यादा लोग ले रहे हैं आश्रय राज्य सरकार द्वारा बनाए गए 905 बाढ़ शरणालयों में फिलहाल 11,248 लोग अस्थायी रूप से रह रहे हैं. इन स्थानों पर भोजन, पीने का पानी, बिजली, शौचालय और चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की गई है. 757 मेडिकल टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में लगाया गया है, जो शरणार्थियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं. इसके अलावा 1,29,571 क्लोरीन टैबलेट और 37,089 ओआरएस पैकेट वितरित कर बाढ़ के बाद संभावित जलजनित बीमारियों से सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है. 500 क्विंटल भूसा और 29 लंगर, मवेशियों और लोगों दोनों की भूख का समाधान प्रभावित इलाकों में सिर्फ इंसानों की नहीं, मवेशियों की भूख का भी ध्यान रखा जा रहा है. अब तक 500 क्विंटल भूसा वितरित किया गया है. वहीं, पीड़ितों को गर्म और पौष्टिक भोजन मिले, इसके लिए 29 लंगर शिविर लगाए गए हैं जो दिन-रात काम कर रहे हैं. इसके अलावा 1,193 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं, जो पूरे समय इलाके की निगरानी कर रही हैं और जरूरत के अनुसार अलर्ट जारी कर रही हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी पीड़ित मदद से वंचित न रह जाए. उनका स्पष्ट संदेश है आपदा राहत में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

सीएम योगी की सौगात: रक्षाबंधन पर बहनों को मिलेगी मुफ्त रोडवेज यात्रा की सुविधा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सरकारी आवास पर कानून व्यवस्था अन्य प्रकार की विभागीय समीक्षा को लेकर बैठक कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने त्योहारों के महीनों में मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस बल को विशेष निगरानी करने के लिए निर्देशित किया। मिलावट को लेकर दिए कड़े निर्देेश इस दौरान सीएम योगी ने रक्षाबंधन और अन्य त्योहारों के मद्देनजर कड़े निर्देश दिए। उन्होंने खाद्यपदार्थों में मिलावट न हो इसके लिए जांच टीमोंं को सक्रिय करने के आदेश दिए। उन्होंने भाई बहन के त्योहार रक्षाबंधन को लेकर बहनों को उपहार दिया है। सीएम योगी अपने सरकारी आवास से उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की सभी प्रकार की बस सेवाओ को 8 अगस्त की सुबह से लेकर 10 अगस्त की रात्रि 12 बजे तक बसों की निःशुल्क यात्रा की सौगात दिया है। इस दौरान बहनों को एसी और नॉन एसी की सभी बसों जिसमे यूपीएसआरटीसी और उससे अनुबंधित बसों की यात्रा निःशुल्क रहेगी।

भारी बारिश से तबाही: 46 जिलों में अलर्ट, अब तक 9 मौतें, कई शहरों में स्कूल बंद

 लखनऊ यूपी में मानूसन पूरी तरह से सक्रिय है। प्रदेश में नदियों से सटे हुए 17 जिलों में बारिश का कहर है। रविवार को अलग-अलग जिलों में बारिश की वजह से नौ मौतें हुईं। सोमवार की सुबह सीतापुर जिले में दीवार गिरने से दो किशोरियों की मौत हो गई। यह संख्या जोड़ लें तो 24 घंटे में प्रदेश में बारिश से 11 मौतें हो गई है। भारी बारिश को देखते हुए राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के कई स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वे लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों और राहत विभाग को जरूरी दिशा-निर्देश दे रहे हैं, ताकि राहत कार्यों में कोई कमी न रहे। टीम-11 में शामिल मंत्रियों ने भी बाढ़ प्रभावित जिलों का रविवार को निरीक्षण किया। वर्तमान में प्रदेश के 17 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इन जिलों की 37 तहसीलें और 402 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ प्रभावित जिलों में कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, आगरा, औरैया, चित्रकूट, बलिया, बांदा, गाज़ीपुर, मीरजापुर, प्रयागराज, वाराणसी, चंदौली, जालौन, कानपुर देहात, हमीरपुर, इटावा और फतेहपुर शामिल हैं। इन सभी जिलों में राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं। वहीं एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी के जवान चौबीसो घंटे पेट्रोलिंग कर रहे हैं। राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने बताया कि 17 जिलों में कुल 84392 लोग प्रभावित हैं, जिनमें से 47906 लोगों को राहत सामग्री दी गई है। बाढ़ की वजह से 2759 मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया है। बाढ़ की चपेट में आने से अब तक 343 लोगों के मकानों को नुकसान पहुंचा है। इनमें से 327 लोगों को सहायता राशि मिल चुकी है। प्रदेश में 4015 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल बाढ़ की चपेट में आया है। इन प्रभावित क्षेत्रों में 493 नावों और मोटरबोट की सहायता से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। इन इलाकों में अब तक 6536 खाद्यान्न पैकेट और 76632 लंच पैकेट बांटे गए हैं। 29 लंगरों के जरिये पीड़ितों को भोजन की सुविधा दी जा रही है।    ये मंत्री बाढ़ प्रभावित इलाकों में करेंगे रात्रि विश्राम – नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’- प्रयागराज, मिर्जापुर व बांदा – स्वतंत्र देव सिंह और संजय गंगवार- जालौन – स्वतंत्र देव सिंह और प्रतिभा शुक्ला- औरैया – रामकेश निषाद- हमीरपुर – जयवीर सिंह- आगरा – सुरेश खन्ना- वाराणसी – संजय निषाद- कानपुर देहात – धर्मवीर प्रजापति- इटावा – अजीत पाल-फतेहपुर – दयाशंकर ''दयालु''- बलिया आज 46 जिलों में बारिश का अलर्ट यूपी में मानसून पूरी तरह से प्रभावी है। आज के लिए प्रदेश के तराई और आगरा मंडल के 15 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 31 अन्य जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट है और 64 जिलों में गरज चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मानसूनी ट्रफ लाइन अभी भी प्रदेश के तराई इलाकों की ओर है। आज तराई व आगरा क्षेत्र में भारी बारिश के आसार हैं। कल रविवार को तराई, पूर्वांचल समेत विभिन्न इलाकों में अच्छी बारिश देखने को मिली। तराई के कई जिलों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। लखीमपुर खीरी और भदोही में सर्वाधिक 120 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं चित्रकूट और प्रतापगढ़ में 110 मिमी, अलीगढ़ में 100 मिमी, वाराणसी, बलिया, प्रयागराज, मिर्जापुर में 90 मिमी बारिश हुई। रविवार की देर शाम गोंडा, बहराइच, सीतापुर, बाराबंकी में कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश हुई। यहां है भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, मथुरा, हाथरस, आगरा, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल, बदायूं व आसपास के इलाकों में।   यहां है भारी बारिश का यलो अलर्ट संतकबीरनगर, बस्ती, महाराजगंज, हरदोई, फरुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, अयोध्या, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, एटा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, जालौन व आसपास के इलाकों में।   लखनऊ सहित कई जिलों में अवकाश लखनऊ में रविवार से हो रही भारी बारिश के चलते एक से लेकर 12वीं तक के सभी बोर्ड के स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश पांडेय के द्वारा यह अवकाश घोषित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जो बच्चे स्कूल के लिए रवाना कर दिए गए हैं उन्हें वापस बुला लिया जाए। आदेश के देर से आने से कई स्कूलों के बच्चे रवाना हो गए थे। मालूम हो कि लखनऊ में बारिश रविवार से लगातार हो रही थी। अन्य जिलों में भी अवकाश घोषित लखनऊ के अलावा रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, बहराइच और अंबेडकर नगर में भी अवकाश घोषित किया गया है। डीएम के द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराया जाए। 

मुख्तार अंसारी का बेटा कानून के शिकंजे में, उमर अंसारी को पुलिस ने किया गिरफ्तार

गाजीपुर गाजीपुर पुलिस ने  पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के छोटे बेटे उमर अंसारी को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया. उमर को लखनऊ के दारुलशफा स्थित विधायक निवास से गिरफ्तार किया गया. पुलिस टीम उन्हें गाज़ीपुर ले गई है. उमर अंसारी के खिलाफ गाज़ीपुर जिले के मोहम्मदाबाद थाने में फर्जी दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया गया है. इस मामले में गाजीपुर पुलिस को एक गंभीर अनियमितता की जानकारी मिली, जिसके अनुसार उमर अंसारी ने यूपी गैंगस्टर अधिनियम की धारा 14(1) के तहत जब्त संपत्ति को छुड़वाने के लिए अदालत में एक याचिका दायर की थी. ये संपत्ति उनके पिता और गैंगस्टर एक्ट के तहत मृत घोषित पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी से संबंधित थी. याचिका के साथ जो दस्तावेज कोर्ट में दाखिल किया गया, उसमें उमर अंसारी ने अपनी मां अफशा अंसारी के फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज प्रस्तुत किया. जांच के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि हस्ताक्षर वास्तव में अफशा अंसारी के नहीं थे. इसके बाद गाज़ीपुर पुलिस ने उमर अंसारी पर जानबूझकर फर्जी दस्तावेज बनाने और न्यायालय को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया. उमर अंसारी की गिरफ्तारी को लेकर उनके भाई अब्बास अंसारी ने एक एक्स पोस्ट में बताया, "रात्रि 10:40 पर हमारे छोटे भाई उमर अंसारी को दारुल शिफ़ा स्थित आवास से कुछ पुलिसकर्मी उन्हें अपने साथ ले गये हैं." रणनीति के तहत उमर अंसारी ने बनाए फर्जी दस्तावेज! गाजीपुर पुलिस के अनुसार, उमर अंसारी ने ये कार्य "सोची-समझी रणनीति" के तहत अवैध लाभ उठाने की नीयत से किया था. इस पूरे मामले में उमर अंसारी के साथ-साथ वकील लियाकत अली को भी नामजद किया गया है. पुलिस ने इन धाराओं में दर्ज किया केस पुलिस ने बताया कि इस मामले में अपराध संख्या 245/2025 दर्ज की गई है, जिसमें धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) BNS के तहत कार्रवाई की जा रही है. उमर अंसारी को हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. गाजीपुर पुलिस ने कहा है कि इस पूरे मामले को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा की जाएगी. यह गिरफ्तारी कई राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है.  

योगी सरकार की सख्ती जारी, दालमंडी के अतिक्रमण चिन्हित; कार्रवाई की तैयारी

वाराणसी  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  दो दिवसीय वाराणसी दौरे पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने कानून व्यवस्था और विकास परियोजनाओं को लेकर अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें उन्होंने कई आवश्यक दिशा निर्देश दिया हैं. इसमें सबसे प्रमुख  वाराणसी के चर्चित दाल मंडी बाजार को लेकर सीएम योगी ने स्पष्ट कर दिया है कि बारिश के बाद सड़क चौड़ीकरण कार्य को शुरू किया जाए. इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फेक अकाउंट बनाकर माहौल खराब करने वालों पर भी पैनी नजर रखने के साथ-साथ सख़्ती से निपटने का आदेश दिया है. बारिश के बाद शुरू होगा दालमंडी का चौड़ीकरण कार्य वाराणसी के सर्किट हाउस में पुलिस अधिकारियों और जिला प्रशासन के साथ बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि अराजकता फैलाने वाले और कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले अराजक तत्वों को चिन्हित करके कड़ी कार्रवाई की जाए. इसके अलावा वाराणसी के सबसे बड़े थोक मार्केट दालमंडी पर होने वाले चौड़ीकरण कार्य को लेकर सीएम योगी ने दिशा निर्देश देते हुए कहा है कि – दालमंडी में सड़क चौड़ीकरण कार्य को बारिश के बाद तत्काल शुरू किया जाए. दालमंडी चौड़ीकरण अभियान काफी सुर्खियों में रहा है. दरअसल यहां पर सैकड़ो ऐसे दुकान मकान और धार्मिक स्थल हैं जो इस अभियान के जद में आ सकते हैं.  माहौल बिगड़ता वालों को किसी भी हाल में बख्शा न जाए – सीएम योगी अधिकारियों संग बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह भी स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फेक अकाउंट बनाकर माहौल खराब करने वालों पर पैनी नजर रखी जाए और उनसे पूरी तरह सख्ती से निपटा जाए. जातिगत विषय आधारित मुद्दों पर अराजकता फैलाने वाले, कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले अराजक तत्वों को चिन्हित करके कठोर कार्रवाई के लिए सीएम योगी ने दिशा निर्देश दिया है. इसके अलावा विकास परियोजनाओं को लेकर भी स्पष्ट किया कि 24 बड़ी परियोजनाएं गतिमान है जिनकी कीमत लगभग 15000 करोड रुपए है. वाराणसी के सभी परियोजनाओं को समय से पूरा करने के लिए निर्देश दिया है.  

रायबरेली में भीषण हादसा: बस-डंपर टक्कर , एक मौत, कई घायल

रायबरेली जिले में एक भीषण सड़क हादसा हुआ है. प्रयागराज से लखनऊ जा रही एक रोडवेज बस सड़क किनारे खड़े डम्पर से जा टकराई. हादसे में बस चालक की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं घटना में 6 से अधिक लोग घायल हुए हैं. घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस हादसे की जांच में जुट गई है. बता दें कि हादसा मिल एरिया थाना क्षेत्र के रतापुर चौराहे के पास हुआ. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि आसपास के इलाके में तेज धमाके जैसी आवाज गूंजी, जिसके बाद स्थानीय लोग तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े. हादसे में बस के ड्राइवर, 54 वर्षीय अंजनी कुमार शुक्ला की मौके पर ही मौत हो गई. बस में सवार लगभग आधा दर्जन यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए. स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दुर्घटनाग्रस्त बस के पास पहुंचकर रेसक्यू ऑपरेशन शुरू किया. घायल यात्रियों और ड्राइवर को तुरंत निकालकर जिला अस्पताल भेजा गया. जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद ड्राइवर अंजनी कुमार शुक्ला को मृत घोषित कर दिया. घायल यात्रियों की हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद लखनऊ के लिए रेफर कर दिया, जहां उनकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है. पुलिस ने मृतक की लाश का पंचनामा कर पीएम के लिए भेज दिया है.

योगी आदित्यनाथ का हमला: 2017 से पहले नौकरियां बिकती थीं, मेरिट का नहीं था मूल्य

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में होने वाली भर्तियों में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद हावी था। उस दौरान पैसों का लेन-देन, बोली और भेदभाव ने नौजवानों के भविष्य को अंधकारमय बना दिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी पुलिस दूरसंचार विभाग में चयनित 1,494 सहायक परिचालकों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान सीएम ने चयनित कई अभ्यर्थियों को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र वितरित किए।  उन्होंने कहा कि 2017 के पहले दंगे, अराजकता, गुंडागर्दी और आतंकी घटनाएं बढ़ गयीं और जनता में असुरक्षा का माहौल बन गया। कभी अयोध्या, काशी और लखनऊ की कचहरी में हमले होते थे तो कभी आतंकी हमले। इस दौरान सीआरपीएफ कैंप रामपुर को भी निशाना बनाया गया। वहीं वर्ष 2017 में डबल इंजन की सरकार बनने पर सबसे पहले भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए बड़े कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि पुलिस भर्ती बोर्ड का सुदृढ़ीकरण किया गया। इसी का परिणाम है कि पूरे देश में उत्तर प्रदेश सर्वाधिक पुलिस की भर्ती और सरकारी नौकरी देने वाले राज्यों में पहले स्थान पर है। अब तक हमारी सरकार साढ़े आठ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान कर चुकी है, जो पूरे देश में सबसे बड़ा आंकड़ा है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में पुलिस भर्ती प्रक्रिया में जो ऐतिहासिक बदलाव आए हैं, वे सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं हैं, बल्कि एक नई पहचान, सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक बन चुके हैं। वर्ष 2017 से अब तक उत्तर प्रदेश पुलिस में 2 लाख 17 हजार 500 से अधिक कार्मिकों की निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती की जा चुकी है, जो देश में सबसे बड़ा आंकड़ा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में भाजपा सरकार बनी, तो सबसे पहले भर्ती बोर्ड को मजबूत करने का काम किया गया। यह तय किया गया कि यदि किसी ने नौजवानों के भविष्य से खिलवाड़ किया तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। आज पूरे देश में उत्तर प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया नजीर बन गयी है। सीएम ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आने के बाद निवेश भी बढ़ा, जिससे करीब 2 करोड़ युवाओं को अपने जिले में ही रोजगार के अवसर मिले। वही नहीं, आउटसोर्सिंग, टेक्नोलॉजी और नीति-निर्माण के सहयोग से उत्तर प्रदेश देश की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वर्ष 2017-18 में पहली भर्ती हुई तो ट्रेनिंग क्षमता बेहद सीमित थी, लेकिन अब राज्य में 60,244 पुलिस कार्मिकों की ट्रेनिंग की व्यवस्था उत्तर प्रदेश पुलिस के ही ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स में की जा रही है। पहले जहां सिर्फ 3,000 कार्मिकों की ट्रेनिंग हो पाती थी, आज वही संख्या 60 हजार के पार पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि अब किसी भी जिले में सबसे ऊंचा और बेहतर भवन पुलिस का बैरक होता है। प्रदेश के 10 जिलों में जहां पहले पुलिस लाइन नहीं थी, वहां नए पुलिस लाइन और मुख्यालय बनाए गए हैं।  वर्ष 1971-72 से लंबित पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली को डबल इंजन की सरकार ने लागू किया। अब तक 7 नए पुलिस कमिश्नरेट बनाए गए हैं, जिससे पुलिसिंग में आधुनिकता और जवाबदेही दोनों बढ़ी है। योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश पुलिस एक मॉडल फोर्स बन चुकी है, जो दंगा मुक्त, अराजकता मुक्त और सुरक्षित प्रदेश की पहचान बन रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल की संवेदनशीलता और तत्परता का उदाहरण महाकुंभ जैसे आयोजन में देखने को मिला, जहां पुलिस के समर्पण और व्यवहार ने इसे सफल बनाया। उन्होंने पुलिस बल को याद दिलाया कि जनता की नजर सिर्फ उनके कार्य नहीं, बल्कि उनके व्यवहार पर भी होती है।  वहीं पुलिस विभाग में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस बल में 20 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गयी है। इसी के तहत टेलीकॉम विभाग में चयनित 1,494 अभ्यर्थियों में करीब 300 बेटियों का चयन हुआ है। वहीं आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री याेगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पुलिस विभाग में अग्निवीर को 20 प्रतिशत रिजर्वेशन देने का निर्णय किया गया है। इससे प्रशिक्षित और अनुशासित युवा पुलिस बल का हिस्सा बन सकेंगे। सीएम ने महाकुंभ में दूरसंचार विभाग के उत्कृष्ट कार्यों का प्रशंसा करते हुए कहा कि संचार व्यवस्था किसी भी पुलिस फोर्स की रीढ़ होती है। 25 करोड़ की आबादी वाला प्रदेश में कम्युनिकेशन और टेलीकॉम पुलिस की जिम्मेदारी कहीं कम नहीं होती। उन्होंने कुंभ के दौरान टेलीकॉम पुलिस के बेहतर प्रदर्शन की सराहना की और टेक्नोलॉजी को पुलिसिंग का अनिवार्य अंग बताया।

यूपी में ड्रोन पर कड़ा पहरा: प्रमुख सचिव और डीजीपी को कमान, NSA और गैंगस्टर एक्ट से होगी सख्ती

लखनऊ उत्तर प्रदेश में ड्रोन के जरिये दहशत फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीएम योगी के कार्यालय ने दो टूक चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (NSA)भी लगाया जाएगा। कार्यालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि बिना अनुमति के ड्रोन चलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख सचिव और डीजीपी को हर जिले में ड्रोन संचालन की समीक्षा करके कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

वाराणसी में बाढ़ का खतरा गहराया: अस्सी घाट पर सड़क तक पानी, मंदिर की सीढ़ियाँ डूबीं

वाराणसी काशी में गंगा खतरे के निशान 71.26 को पार गई है। शनिवार रात 12 बजे गंगा का जलस्तर 71.31 मीटर पहुंच गया। 84 घाटों को डुबोने के बाद अब गंगा शहर में प्रवेश कर चुकी हैं। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार से गंगा 14 सीढ़ी नीचे हैं। दशाश्वमेध घाट की तीन सीढ़ियां बची हैं। शीतला घाट पर मंदिर पूरी तरह से पानी में समाहित हो चुका है और सिंधिया घाट पर रत्नेश्वर महादेव के मंदिर के शिखर का कुछ हिस्सा ही नजर आ रहा है। नमो घाट पर बने स्क्ल्पचर भी डूब गए हैं। लोग घरों में फंसे हैं। अस्सी घाट पर गंगा का पानी सड़क पर बह रहा है। जगन्नाथ मंदिर के गेट के पास पहुंच गया है।   काशी में गंगा खतरे के निशान 71.26 को पार गई है। शनिवार रात 12 बजे गंगा का जलस्तर 71.31 मीटर पहुंच गया। 84 घाटों को डुबोने के बाद अब गंगा शहर में प्रवेश कर चुकी हैं। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार से गंगा 14 सीढ़ी नीचे हैं। दशाश्वमेध घाट की तीन सीढ़ियां बची हैं। शीतला घाट पर मंदिर पूरी तरह से पानी में समाहित हो चुका है और सिंधिया घाट पर रत्नेश्वर महादेव के मंदिर के शिखर का कुछ हिस्सा ही नजर आ रहा है। नमो घाट पर बने स्क्ल्पचर भी डूब गए हैं। लोग घरों में फंसे हैं। अस्सी घाट पर गंगा का पानी सड़क पर बह रहा है। जगन्नाथ मंदिर के गेट के पास पहुंच गया है। इन इलाकों में बाढ़ पीड़ितों के लिए नक्खीघाट स्थित चित्रकूट कॉन्वेंट इंटर कॉलेज और दनियालपुर के नवोदय पब्लिक स्कूल में राहत शिविर बनाया गया है। शिविरों में 147 शरणार्थी शनिवार तक शरण ले चुके थे। नक्खीघाट निवासी अनु देवी, जमाल अंसारी, सिमरन, हबीबा बीवी ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय दनियालपुर पास होने के बावजूद शिविर नहीं बना, जबकि राहत केंद्र उनके घरों से दूर हैं। लोग ऊंचे स्थानों पर निजी रूप से शरण लेने को विवश हैं।