News Aazad Bharat

क्रेडिट की होड़ में ट्रंप ने टैरिफ को बनाया हथियार: माइकल कुगलमैन ने अमेरिका की खिंचाई की

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत को झटका देते हुए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया. रूस से लगातार सस्ते दाम पर कच्चा तेल खरीदने से भड़के ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया है. इस कदम को एनालिस्ट ट्रंप की खुन्नस के तौर पर देख रहे हैं. साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के निदेशक माइकल कुगलमैन (Michael Kugelman) ने भारत और अमेरिका के बीच के स्ट्रैटेजिक संबंधों को बीते दो दशक का सबसे खराब संकट बताया. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि दोनों देशों की पार्टनरशिप का यह सबसे खराब दौर है. इससे दोनों के रिश्ते रसातल तक पहुंच सकते हैं. कुगलमैन ने कहा कि दुर्भाग्य से पिछले कुछ समय से दोनों देशों के रिश्ते जिस तरह से खराब दौर से गुजर रहे हैं. ट्रंप का यह ताजा फैसला हैरान करने वाला नहीं है. इस फैसल के हानिकारक प्रभाव के बावजूद…मुझे यह ज्यादा आश्चर्यजनक नहीं लगता कि अंत में राष्ट्रपति ने अपनी धमकी को पूरा करने का फैसला किया. राष्ट्रपति ट्रंप भारत जैसे अपने करीबी साझेदार पर भी अधिकतम दबाव बनाने से नहीं झिझकता. ट्रंप चाहते हैं कि भारत किसी तरह से रूस से कच्चा तेल खरीदना कम कर दे. इससे रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में मदद मिल रही है. हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के संबंध बहुआयामी हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में दोनों देश एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं. ऐसे में रिश्तों में उतार-चढ़ाव जायज है. यह पूछे जाने पर कि रूस से लगातार कच्चा तेल खरीदने पर राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को नहीं बल्कि भारत को सजा देने का फैसला क्यों किया? इसका जवाब देते हुए कुगलमैन ने कहा कि भारत ने जो किया, वो चीन ने नहीं किया. चीन ने सीजफायर कराने में राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका पर सवाल खड़े नहीं किए लेकिन भारत ने किए. इसलिए मुझे लगता है कि ट्रंप ने ट्रेड की आड़ में भारत पर अपनी खुन्नस निकाली है. यह हालांकि, दोहर मापदंड है. पाखंड है.. फिर इसे जो चाहे कह लें.  क्या चीन पर भारत की तरह लगेगा टैरिफ? ट्रंप की ओर से 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने पर भारत सरकार ने खुलकर आपत्ति जाहिर की है. ऐसे में जब रिपोटर्स ने ट्रंप से पूछा कि क्या चीन पर भी अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा? इस पर ट्रंप ने जवाब दिया कि हो सकता है.

उधमपुर में हुआ बड़ा हादसा, CRPF बंकर व्हीकल पलटा – 2 की जान गई, 12 घायल

उधमपुर  जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में बड़ा हादसा हो गया. यहां सीआरपीएफ का एक बंकर व्हीकल दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसा बसंतगढ़ इलाके के कंडवा क्षेत्र में हुआ, जहां सड़क पर अचानक वाहन बेकाबू होने के बाद पलट गया. इस हादसे में 2 सीआरपीएफ जवानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 12 अन्य जवान घायल हो गए. जानकारी के अनुसार, बंकर वाहन में कुल 23 जवान सवार थे. जैसे ही वाहन कंडवा-बसंतगढ़ मार्ग पर पहुंचा, तो वहां वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया. हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोगों को पता चला तो तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. सभी घायल जवानों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है. इस मामले को लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) संदीप भट ने कहा कि हादसे में दो जवानों की जान चली गई और घायल जवानों का इलाज जारी है. वहीं केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी हादसे को लेकर अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में दुख व्यक्त किया है. उन्होंने personally जिला उपायुक्त सलोनी राय से बात की है. उन्होंने कहा कि राहत कार्यों की निगरानी की जा रही है. मंत्री ने यह भी बताया कि स्थानीय लोग भी सहायता के लिए आगे आए हैं. फिलहाल पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, खराब सड़क और वाहन का बैलेंस बिगड़ना हादसे की वजह मानी जा रही है.

हाईकोर्ट जज नियुक्ति पर विवाद: आरती अरुण साठे के चयन पर विपक्ष की आपत्ति, भाजपा ने दी सफाई

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट में अधिवक्ता और भाजपा की पूर्व प्रवक्ता आरती अरुण साठे की बतौर न्यायाधीश नियुक्ति को लेकर देश में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इस पर गहरी आपत्ति जताते हुए न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्पष्ट किया है कि आरती साठे ने पार्टी से पिछले वर्ष ही इस्तीफा दे दिया था। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 जुलाई 2025 को आरती साठे को बॉम्बे हाई कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी। कॉलेजियम में शामिल चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बी.आर. गवई ने यह निर्णय लिया था। कॉलेजियम के अनुसार, उनकी नियुक्ति योग्यता, अनुभव और पेशेवर दक्षता के आधार पर की गई है। विपक्ष ने क्या कहा? विपक्षी दलों ने आरती साठे की नियुक्ति को “राजनीतिक पूर्वाग्रह” से प्रेरित बताया है। कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा, “एक राजनीतिक पार्टी की पूर्व प्रवक्ता अगर न्यायपालिका में बैठेंगी, तो आम नागरिक कैसे निष्पक्ष न्याय की उम्मीद कर सकता है?” कुछ नेताओं ने यह भी मांग की है कि इस नियुक्ति की नैतिक जांच की जाए। भाजपा की प्रतिक्रिया भाजपा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, “आरती साठे एक योग्य और प्रतिष्ठित अधिवक्ता हैं, और उन्होंने पार्टी से पिछले वर्ष त्यागपत्र दे दिया था। उनकी नियुक्ति पूरी तरह से संवैधानिक प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा के आधार पर की गई है।” आरती साठे का प्रोफाइल आरती अरुण साठे एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कर, वित्तीय और वाणिज्यिक मामलों में विशेष अनुभव हासिल किया है। वे पूर्व में भाजपा की प्रवक्ता रही हैं लेकिन उन्होंने 2024 में पार्टी पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके समर्थकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति योग्यता और पेशेवर दक्षता के आधार पर हुई है, न कि किसी राजनीतिक प्रभाव के चलते। निष्कर्ष: आरती साठे की नियुक्ति पर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के चलते यह नियुक्ति फिलहाल आगे बढ़ती दिख रही है। देखना यह होगा कि क्या भविष्य में इस पर न्यायिक या संवैधानिक बहस और तेज होती है।

चार साल बाद चीन जाएंगे पीएम मोदी, एससीओ समिट में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

नई दिल्ली  पीएम मोदी चीन दौरा 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन का दौरा करेंगे, जैसा कि बुधवार को बताया गया। शिखर सम्मेलन टियांजिन में आयोजित किया जाएगा, और यह दौरा 2019 के बाद मोदी की पहली चीन यात्रा है, और 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद पहली यात्रा है। यह उच्च-स्तरीय राजनयिक जुड़ाव दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक संभावित सुधार का संकेत देता है, जो पूर्वी लद्दाख में घातक सीमा गतिरोध के बाद से तनावपूर्ण बने हुए हैं।   पूर्व चीनी सैनिक वांग छी को भारत छोड़ने का मिला नोटिस, परिवार ने लगाई मदद की गुहार यह दौरा पूर्वी लद्दाख और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सीमा विवादों को लेकर भारत और चीन के बीच जारी तनाव की पृष्ठभूमि में हो रहा है। इस पर वैश्विक और क्षेत्रीय खिलाड़ी बारीकी से नजर रखे हुए हैं, खासकर क्योंकि दोनों एशियाई शक्तियां बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से जुड़ाव करते हुए तनावपूर्ण संबंधों को प्रबंधित करने की कोशिश कर रही हैं। बीजिंग में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में आठ सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे, जिनमें रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और ईरान शामिल हैं, जिन्होंने हाल ही में पूर्ण सदस्यता प्राप्त की है। मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात? पीएम मोदी का चीन दौरा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद पहली बार एक दुर्लभ व्यक्तिगत बैठक का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। जबकि दोनों नेता अन्य वैश्विक शिखर सम्मेलनों में एक-दूसरे से मिले हैं, तब से कोई औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता नहीं हुई है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन शिखर सम्मेलन के मौके पर पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बातचीत होने की संभावना है। भारत-चीन संबंध गलवान से धीरे-धीरे जुड़ाव तक मई 2020 के गलवान टकराव के बाद भारत-चीन संबंध बदतर हो गए हैं, जिसके दौरान 20 भारतीय सैनिक मारे गए थे। चीन के भी सैनिक मारे गए, हालांकि संख्या का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया गया है। हिंसक टकराव दशकों में द्विपक्षीय संबंधों में सबसे निचले बिंदु को चिह्नित करता है। तब से, दोनों पक्षों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव कम करने के लिए सैन्य और राजनयिक वार्ता की है। पिछले कुछ महीनों में, तनाव कम होने के संकेत मिले हैं: • भारत और चीन के बीच सीधी हवाई संपर्क फिर से खोलना • भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने का निर्णय • वीजा में ढील देने और सीमा पार नदियों पर जानकारी साझा करने के प्रस्ताव • भारत ने हाल ही में चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा बहाल करने की घोषणा की। एससीओ शिखर सम्मेलन 2025 सामरिक महत्व टियांजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में सभी आठ सदस्य देशों – भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान और ईरान के नेता शामिल होंगे, जो अभी पूर्ण सदस्य बना है। 2017 से सदस्य भारत ने इस मंच का इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद, विशेष रूप से पाकिस्तान से, के मुद्दों को उठाने और संप्रभुता का सम्मान करते हुए क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने के लिए किया है, जो चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की स्पष्ट निंदा है। आगामी शिखर सम्मेलन भारत की रणनीतिक कूटनीति पर ध्यान केंद्रित करता है, एससीओ जैसे बहुपक्षीय संरचनाओं के साथ सक्रिय जुड़ाव रखते हुए, क्वाड (भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका) जैसे अमेरिका के नेतृत्व वाले हिंद-प्रशांत समूहों के साथ संबंधों को मजबूत करता है। इसके बाद, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर इस साल की शुरुआत में एससीओ रक्षा और विदेश मंत्रियों की बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं। जयशंकर ने एक प्रारंभिक यात्रा पर बीजिंग में राष्ट्रपति शी से भी मुलाकात की, जिसमें संबंधों में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए नेतृत्व के नेतृत्व वाले संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। शिखर सम्मेलन में प्रमुख क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद है जैसे: • क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग • अफगानिस्तान में स्थिरता की बहाली • बहुपक्षीय व्यापार और ऊर्जा सहयोग • एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ना • यूरेशिया में संपर्क परियोजनाएं भारत के चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, विशेष रूप से इसके पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) कॉरिडोर के विरोध को दोहराने की संभावना है, जिसमें संप्रभुता के मुद्दे उठाए गए हैं। पीएम मोदी का दौरा एक राजनयिक सफलता और चीन के साथ संबंधों को सामान्य करने के नए प्रयासों का संकेत देता है, भले ही भारत अपने रणनीतिक और क्षेत्रीय हितों की रक्षा करता रहे।

मौसम विभाग की बड़ी चेतावनी: कई राज्यों में 12 अगस्त तक भारी बारिश का खतरा

उत्तराखंड उत्तराखंड में इस समय मौसम लगातार खराब बना हुआ है और स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 6 से 12 अगस्त तक राज्य के सभी जिलों के लिए भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा कई जगहों पर गर्जना और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है। अगले सात दिनों का मौसम पूर्वानुमान 6 अगस्त: सभी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश की संभावना है। गरज-चमक और तेज बारिश के दौर भी रहेंगे। 7 अगस्त: देहरादून, पौड़ी, बागेश्वर, चम्पावत और नैनीताल जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। पूरे राज्य में गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। 8 अगस्त: उत्तरकाशी, देहरादून, पौड़ी, बागेश्वर, चम्पावत और नैनीताल में भारी बारिश हो सकती है। तेज बारिश के साथ बिजली गिरने के भी आसार हैं।   9 अगस्त: देहरादून और बागेश्वर में भारी बारिश की चेतावनी है। बाकी जिलों में भी गरज और तेज बारिश के दौर रहेंगे। 10 अगस्त: उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर जिलों में भारी बारिश की संभावना है। पूरे राज्य में आकाशीय बिजली और तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 11 और 12 अगस्त: सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज और बौछारें पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग की चेतावनी IMD ने बताया है कि भारी बारिश से राज्य में भूस्खलन, नदियों का जलस्तर बढ़ना, सड़कों के अवरुद्ध होने, और निचले इलाकों में जलभराव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हाल ही में धराली और हरिद्वार में ऐसे हालात देखे जा चुके हैं। लोगों के लिए जरूरी सलाह     नदी और नालों के किनारे जाने से बचें।     पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा न करें।     मौसम की अपडेट पर नज़र रखें और अफवाहों से दूर रहें।     बच्चे और बुजुर्ग घरों में सुरक्षित रहें।     किसान फसलों को बचाने के लिए तिरपाल आदि का उपयोग करें।     मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखें।     किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन या स्थानीय अधिकारियों से तुरंत संपर्क करें। प्रशासन सतर्क रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस जैसे त्योहारों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को बढ़ा दिया है। आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी की जा रही है।

पाकिस्तान में मानसून की मार, जनजीवन अस्त-व्यस्त, बाढ़ को लेकर रेड अलर्ट

नई दिल्ली पाकिस्तान में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने कई क्षेत्रों में बाढ़ की चेतावनी जारी की है। ये चेतावनी ऐसे समय में जारी की गई है जब 5 से 8 अगस्त तक पाकिस्तान के ऊपरी और मध्य भागों में तीव्र मानसून के प्रभाव की आशंका है। इसके अलावा उत्तरी पाकिस्तान पर मानसूनी धाराओं और पश्चिमी द्रोणिका के प्रभाव से भारी बारिश होने की संभावना है। भारी बारिश के कारण पाकिस्तान में बाढ़ का अलर्ट भारी बारिश की वजह से सिंधु, चिनाब और रावी सहित पाकिस्तान की सभी प्रमुख नदियों में जल स्तर बढ़ने की संभावना है, जबकि रावी और चिनाब की सहायक नदियों में बाढ़ की संभावना जताई गई है। दूसरी तरफ, तरबेला, गुड्डू और सुक्कुर बैराज में बाढ़ फिलहाल निम्न स्तर पर है, लेकिन लगातार बारिश चश्मा और ताउंसा को भी निम्न बाढ़ स्तर की ओर धकेल सकती है। इसके अलावा, नौशेरा में काबुल नदी, स्वात नदी और पंजकोरा और उनसे जुड़ी धाराओं और नालों में लगातार बारिश के कारण जल स्तर में वृद्धि देखी जा सकती है। बारिश से बढ़ सकता है बाधों का जल स्तर मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में, हुंजा, शिगर और घांचे जिलों में जलधाराओं के नेटवर्क में पानी का प्रवाह सहायक नदियों के साथ संभावित बाढ़ का कारण बन सकता है। साथ ही बांधों में मौजूदा भंडारण से संकेत मिलता है कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में तरबेला जलाशय 94% पर है और भारी बारिश के कारण इसका जल स्तर बढ़ने की संभावना है। एनडीएमए लोगों के सतर्क रहने की चेतावनी दी एनडीएमए ने नदियों और नालों के पास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा है, क्योंकि रात में भारी बारिश के कारण अचानक जल स्तर बढ़ सकता है। बारिश के कारण अबतक कितना नुकसान? एनडीएमए की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 जून से अब तक मूसलाधार मानसूनी बारिश के कारण 140 बच्चों सहित कम से कम 299 लोगों की जान चली गई और 715 अन्य घायल हो गए। रिपोर्ट की मानें तो बारिश के कारण होने वाली घटनाओं में 715 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 239 बच्चे, 204 महिलाएं और 272 पुरुष शामिल हैं। अबतक, अचानक आई बाढ़ और भारी बारिश के कारण कुल 1,676 घर क्षतिग्रस्त हो गए और 428 जानवर मारे गए। इस बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में व्यापक विनाश हुआ है और स्थानीय समुदायों को भारी नुकसान पहुंचा है।

क्या ट्रंप की नीति से अमेरिका खुद फंसेगा जाल में? भारत नहीं, खुद पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की सदस्य शामिका रवि ने कहा है कि अमेरिका की तरफ से टैरिफ में किसी भी तरह की वृद्धि का बोझ कम आया वाले अमेरिकी परिवारों पर पड़ेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि भारत एक अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं रहा। उन्होंने एलान किया कि वह अगले 24 घंटों में भारत पर टैरिफ में काफी वृद्धि करेंगे। ट्रंप का टैरिफ वास्तव में वैश्विक बाजारों में उपलब्ध सस्ते सामानों पर एक कर है, जिसका बोझ कम आय वाले अमेरिकी परिवारों पर पड़ेगा। रवि ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'ये टैरिफ अंतत: कम आय वाले अमेरिकी परिवारों से वहां की सरकार को हस्तांतरित होते हैं।'   भारत पर 25 फीसदी टैरिफ एक अगस्त को ट्रंप ने पारस्परिक टैरिफ दरों में संशोधन शीर्षक से एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें भारत के लिए 25 प्रतिशत की भारी वृद्धि सहित पांच दर्जन से अधिक देशों के लिए टैरिफ बढ़ा दिया गया था। हालांकि, कार्यकारी आदेश में उस जुर्माने का उल्लेख नहीं था, जो ट्रंप ने कहा था कि भारत को रूसी सैन्य उपकरण और ऊर्जा की खरीद के कारण चुकाना होगा। पिछले हफ्ते, ट्रंप ने भारत और रूस के घनिष्ठ संबंधों पर तीखा हमला करते हुए दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मृत बताया था। इस टिप्पणी ने नई दिल्ली को यह कहने के लिए प्रेरित किया कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है भारत की जीडीपी पर नहीं पड़ेगा असर     उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई के एक अध्ययन के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर घोषित 25 प्रतिशत टैरिफ का देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर प्रभाव नगण्य रहेगा। संगठन ने कहा कि इसकी वजह यह है कि इससे अमेरिका को केवल 8.1 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा। अमेरिका द्वारा घोषित टैरिफ गुरुवार से प्रभावी होने की संभावना है।     पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा जारी इस शोध पत्र में अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कई उपायों की भी सिफारिश की गई है। पीएचडीसीसीआई के प्रेसिडेंट हेमंत जैन ने कहा, 'हमारा विश्लेषण दर्शाता है कि अमेरिका द्वारा भारत पर घोषित 25 प्रतिशत टैरिफ के परिणामस्वरूप भारत के कुल वैश्विक व्यापारिक निर्यात पर केवल 1.87 प्रतिशत और भारत के सकल घरेलू उत्पाद पर बहुत मामूली 0.19 प्रतिशत का प्रभाव पड़ेगा।'     अध्ययन में कहा गया है कि 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर (भारत के कुल वैश्विक निर्यात का 1.87 प्रतिशत) का निर्यात किया था और जिस तरह के टैरिफ का एलान किया गया है, उससे 8.1 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा। टैरिफ का असर जिन सेक्टर के निर्यात पर पड़ेगा, उसमें इंजीनियरिंग सामान पर 1.8 अरब डॉलर का, रत्न एवं आभूषण पर 93.2 करोड़ डॉलर का और सिले-सिलाए कपड़ों पर 50 करोड़ डॉलर का असर पड़ेगा।  

बिहार वोटर विवाद: शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को लगाई फटकार, मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग (ईसी) को निर्देश दिया है कि वह बिहार के ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए करीब 65 लाख मतदाताओं की पूरी जानकारी 9 अगस्त तक पेश करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह जानकारी उन राजनीतिक दलों के साथ-साथ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) नाम की एनजीओ को भी दी जाए, जिसने इस मुद्दे पर याचिका दाखिल की है। क्या है मामला? चुनाव आयोग ने बिहार में 24 जून को 'विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर)' शुरू किया था। इसके तहत 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई, जिसमें 7.24 करोड़ मतदाता दिखाए गए। लेकिन इसमें से 65 लाख से अधिक वोटरों के नाम हटा दिए गए। चुनाव आयोग का कहना है कि ये लोग या तो मर चुके हैं, दूसरी जगह स्थायी रूप से चले गए हैं, या दो जगहों पर नाम था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ? जस्टिस सूर्यकांत, उज्जल भुयान और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने चुनाव आयोग से कहा, 'हमें हर उस वोटर की जानकारी चाहिए जिसका नाम हटाया गया है। ये देखें कि किस आधार पर नाम हटे हैं।' वहीं एनजीओ की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि, 'राजनीतिक पार्टियों को हटाए गए वोटरों की लिस्ट दी गई है, लेकिन इसमें यह नहीं बताया गया कि कौन मरा है, कौन शिफ्ट हुआ है, या किसका नाम गलत तरीके से हटा।' कोर्ट ने चुनाव आयोग को कहा कि वह 9 अगस्त तक जवाब दाखिल करे, ताकि 12-13 अगस्त को इस मामले पर पूरी सुनवाई हो सके। एडीआर की याचिका में क्या मांग की गई? एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने मांग की है कि 65 लाख हटाए गए नामों की पूरी सूची प्रकाशित की जाए। हर नाम के साथ यह भी बताया जाए कि उसे क्यों हटाया गया, मौत, स्थायी स्थानांतरण या कोई अन्य वजह। चुनाव आयोग ने कोर्ट में क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने हलफनामा देकर कहा, 'हम वोटर लिस्ट को साफ करने का काम कर रहे हैं। हमारा मकसद है कि अपात्र लोग हटें और केवल सही लोग वोटर लिस्ट में रहें।' एसआईआर के दौरान आयोग ने क्या दिया आंकड़ा इसमें मौत की वजह से करीब 22.34 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। वहीं स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए करीब 36.28 लाख मतदाताओं के नाम भी मतदाता सूची से हटाए घए हैं। वहीं जिन मतदाताओं के नाम दो जगहों पर थे उनकी संख्या करीब 7.01 लाख है। सुप्रीम कोर्ट ने की पहले क्या की थी टिप्पणी इससे पहले 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए तो वह तुरंत हस्तक्षेप करेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि आधार कार्ड और वोटर आईडी को गंभीरता से मान्य दस्तावेज माना जाए और इनसे नाम हटाने की बजाय जोड़ने की प्रक्रिया पर जोर दिया जाए।

ट्रंप की ट्रेड वॉर जारी: भारत पर टैरिफ दोगुना, अब देना होगा 50% शुल्क

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को एक बार फिर झटका दिया है। अमेरिकी सरकार ने भारत पर 25 प्रतिशत एक्स्ट्रा टैरिफ की घोषणा की है। ट्रंप सरकार पिछले कुछ दिनों से भारत पर रूसी तेल खरीदने और यूक्रेन युद्ध में रूस को फंडिंग का आरोप लगा रहा है। ट्रंप ने मंगलवार को चेतावनी दी थी कि वो 24 घंटे के भीतर भारत पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं। ट्रंप सरकार पहले ही भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा चुकी है। पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और भारत में व्यापारिक तनाव देखने को मिल रहा है। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन ने भारत पर रूसी तेल खरीदने का आरोप लगाया था। ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल ऐलान किया था कि वो 24 घंटे के भीतर भारत पर एक्स्ट्रा टैरिफ लगाएंगे। बुधवार को ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ की घोषणा कर दी। इसके तहत अब भारत पर अमेरिका ने 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। भारत पर टैरिफ से घर में ही घिरे ट्रंप ट्रंप के भारत को लेकर दी जा रही टैरिफ धमकी उनके ही घर अमेरिका में बवाल कर रही है। रिपब्लिकन नेता और पूर्व गवर्नर निक्की हेली ने ट्रंप के फैसले की आलोचना की थी। हेली ने दो टूक शब्दों में ट्रंप को सलाह दी थी कि वो भारत से संबंध खराब न करे। उन्होंने चेतावनी दी थी कि भारत से तनाव की स्थिति में सीधा-सीधा फायदा चीन को होगा। निक्की हेली ने कहा था कि ट्रंप को भारत और चीन को एक समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। बता दें कि ट्रंप ने पहले चीन से व्यापारिक युद्ध में 125 फीसदी तक टैरिफ बढ़ा दिया था। इसके बाद दोनों पक्षों में बातचीत हुई और फिर ट्रंप सरकार ने चीन को टैरिफ पर 90 दिन की मोहलत दी। भारत दिखा चुका सख्ती ट्रंप के आरोपों और टैरिफ धमकियों पर भारत अमेरिका को सख्त जवाब दे चुका है। बीते दिनों भारतीय विदेश मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में कहा था कि अमेरिका और यूरोपीय संघ खुद रूस से व्यापार कर रहा है और वो भारत को कैसे ऐसा करने से रोक सकता है। भारत ने यह भी कहा कि 2022 में यूक्रेन युद्ध के दौरान जब भारत ने रूस से तेल व्यापार शुरू किया, तब अमेरिका ने ही उसका प्रोत्साहन किया था। भारत ने यह भी कहा कि उसके लिए देश के नागरिकों के हित और सुरक्षा सर्वोपरी हैं, सरकार अपने मूल्यों से समझौता नहीं करेगी।  

CISF भर्ती को मिली हरी झंडी, 700 जवान करेंगे इस खास स्थल की निगरानी

नई दिल्ली सरकार ने कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरियट (सीसीएस) की सुरक्षा बढ़ाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक बल (सीआईएसएफ) को 700 से ज्यादा कर्मियों की भर्ती की मंजूरी दे दी है। सीसीएस के पहले भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बुधवार, (06 अगस्त, 2025) को किया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, सभी 10 सीसीएस बिल्डिगों की सुरक्षा सीआईएसएफ की केंद्र सरकार भवन सुरक्षा (सीजीबीएस) यूनिट करेगी। ये यूनिट गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है। सीआईएसएफ विंग देश की राजधानी में सभी मौजूदा केंद्रीय सरकारी मंत्रालयों और उससे जुड़े विभागों की सुरक्षा करता है।   735 अतिरिक्त कर्मियों की नियुक्ति को दी मंजूरी सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्रालय ने हाल ही में सीजीबीएस इकाई के लिए 735 अतिरिक्त कर्मियों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। ये कर्मी बिल्डिंग नंबर 1, 2 और 3 की सुरक्षा करेंगे। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे सीसीएस बिल्डिंग चालू होंगी, यूनिट को ज्यादा मानव संसाधनों की जरूरत होगी और उम्मीद है कि जल्द ही वो उपलब्ध कराए जाएंगे। कितनी हो जाएगी यूनिट की क्षमता नए मानव संसाधन के साथ सीजीबीएस यूनिट की क्षमता लगभग 5 हजार कर्मियों की हो जाएगी। सूत्रों ने ये भी बताया कि यूनिट को तालकटोरा स्टेडियम स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के विस्तार कार्यालय और चाणक्यपुरी स्थित सुषमा स्वराज भवन की सुरक्षा के लिए लगभग 200 अतिरिक्त कर्मियों की भी मंजूरी दी गई है। सीसीएस बिल्डिंग संख्या 1 और 2 का निर्माण अगले महीने तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि सीसीएस 10 का निर्माण अगले साल अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा। सीसीएस बिल्डिंग नंबर 6 और 7 का प्रोजेक्ट अक्टूबर 2026 तक पूरा होगा। कर्तव्य भवन-03 में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एमएसएमई, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय स्थित है।