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टोल से अरबों की कमाई! भारत में किस राज्य का योगदान सबसे ज्यादा?

नई दिल्ली  जब भी आप अपनी गाड़ी से किसी राष्ट्रीय राजमार्ग या एक्सप्रेसवे पर निकलते हैं तो एक चीज का सामना जरूर करते हैं – टोल प्लाजा। यह सिर्फ एक टैक्स नहीं है बल्कि भारत सरकार की कमाई का एक बड़ा जरिया भी बन चुका है। अब सवाल ये उठता है कि देश में कुल कितने टोल प्लाजा हैं और इनसे हर दिन कितनी कमाई होती है? इस सवाल का जवाब जानकर आप चौंक सकते हैं। क्योंकि टोल टैक्स से हर दिन करोड़ों की कमाई हो रही है जो सीधे देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में इस्तेमाल हो रही है। देश में कितने टोल प्लाजा हैं? सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 तक देशभर में कुल 1,087 टोल प्लाजा सक्रिय हैं। ये टोल प्लाजा भारत के विशाल 1.5 लाख किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का हिस्सा हैं। हालांकि, इन सभी सड़कों पर टोल नहीं लिया जाता। वर्तमान में करीब 45,000 किलोमीटर सड़क नेटवर्क पर टोल वसूली होती है। पिछले कुछ वर्षों में टोल प्लाजा की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। पिछले 5 सालों में ही 457 नए टोल प्लाजा बनाए गए हैं। यह बढ़ोतरी न सिर्फ नए सड़कों के निर्माण का संकेत देती है बल्कि देशभर में फास्टैग टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग का भी परिणाम है। हर दिन कितनी होती है टोल से कमाई? अगर आप सोचते हैं कि टोल प्लाजा से मामूली कमाई होती होगी तो आप गलत हैं। लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, देश के 1,087 टोल प्लाजा से हर दिन औसतन 168.24 करोड़ रुपये की कमाई होती है। यह आंकड़ा सालाना आधार पर 61,408.15 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। इस रकम का उपयोग सड़कों के रखरखाव, नए निर्माण और आधारभूत संरचना को मजबूत करने में किया जाता है। फास्टैग से बढ़ी टोल की वसूली फास्टैग सिस्टम लागू होने के बाद से टोल वसूली की प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता दोनों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। अब टोल प्लाजा पर डिजिटल पेमेंट के माध्यम से न सिर्फ समय की बचत हो रही है बल्कि टोल चोरी जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी तरीके से लगाम लगी है। इसका सीधा असर टोल संग्रह पर पड़ा है। अगर आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2019-20 में टोल वसूली जहां 27,504 करोड़ रुपये थी वहीं वर्ष 2023-24 में यह बढ़कर 55,882 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यानी मात्र चार वर्षों में टोल से होने वाली कमाई लगभग दोगुनी हो चुकी है। पिछले पांच वर्षों में कुल टोल वसूली का आंकड़ा 1.93 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है, जो यह दर्शाता है कि फास्टैग ने किस तरह से देश के टोल सिस्टम को अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाया है।   देश के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टोल प्लाजा हर टोल प्लाजा से होने वाली कमाई समान नहीं होती। देश में कुछ ऐसे मार्ग हैं जहां से भारी संख्या में वाहन गुजरते हैं और इन मार्गों पर स्थित टोल प्लाजा सबसे अधिक कमाई करते हैं। इन रूट्स पर खासतौर से औद्योगिक ट्रैफिक, भारी वाणिज्यिक वाहन और हाई डिमांड यात्रा मार्ग होने के कारण टोल वसूली काफी अधिक होती है। सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टोल प्लाजा में गुजरात के वडोदरा-भरूच खंड पर स्थित भरथना टोल प्लाजा पहले स्थान पर है, जिसने वर्ष 2023-24 में अकेले 472.65 करोड़ रुपये की कमाई की। इसके बाद राजस्थान का शाहजहांपुर टोल प्लाजा, पश्चिम बंगाल का जलाधुलागोरी टोल प्लाजा, उत्तर प्रदेश का बड़ाजोर टोल प्लाजा और हरियाणा का घरौंडा टोल प्लाजा क्रमशः दूसरे से पांचवें स्थान पर आते हैं। इन सभी टोल प्लाजा से प्रतिवर्ष सैकड़ों करोड़ रुपये की कमाई होती है जो देश के राजमार्गों के वित्तीय योगदान को दर्शाती है। टोल टैक्स से कैसे बदल रहा है भारत का रोड नेटवर्क? टोल वसूली से प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग केवल राजस्व जुटाने तक सीमित नहीं है बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य देश के सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना है। इस राशि का इस्तेमाल सड़कों के नियमित रखरखाव और मरम्मत, नई सड़कों और एक्सप्रेसवे के निर्माण, सड़क सुरक्षा में सुधार और डिजिटल टोलिंग सिस्टम को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किया जाता है। इससे न केवल देशभर में यात्रा अधिक सहज और सुरक्षित हुई है बल्कि फास्टैग जैसी तकनीकों के कारण यात्रियों का कीमती समय भी बच रहा है, जिससे सड़क परिवहन पहले से कहीं अधिक कुशल और तेज़ बन चुका है।  

पटियाला में संकट की आहट, सतर्क रहने की अपील

पटियाला हिमाचल प्रदेश में हो रही भारी बारिश के कारण जहां पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, वहीं पटियाला में भी खतरे की घंटी बज चुकी है। दरअसल, घग्गर नदी में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और पिछले 24 घंटों में यह तेजी से बढ़ा है। इसी को देखते हुए पटियाला प्रशासन ने घग्गर नदी के आसपास बसे एक दर्जन से अधिक गांवों के लिए एडवाइजरी जारी की है और लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच चुका है, जिस कारण राजपुरा, घनौर और अन्य आसपास के इलाकों के लोगों से नदी की ओर न जाने की अपील की गई है। इस दौरान पटियाला की उपायुक्त (डीसी) प्रीति यादव ने नागरिकों से सतर्क रहने, अफवाहें न फैलाने और पानी से संबंधित किसी भी आपात स्थिति की तुरंत सूचना जिला कंट्रोल रूम के नंबर 0175-2350550 पर देने की अपील की है। दूसरी ओर, पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बारिश के चलते ब्यास और सतलुज नदियों में भी जलस्तर बढ़ रहा है। हरीके हेड से लेकर हुसैनीवाला हेड तक 20,000 से 25,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। हुसैनीवाला हेड पर तीन से चार गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है, जो फाजिल्का की ओर जाएगा। इधर, कांगड़ा और होशियारपुर जिले के तलवाड़ा में ब्यास नदी पर बने पोंग डैम का जलस्तर भी केवल 24 घंटे में तीन फीट तक बढ़ गया है। बुधवार शाम पांच बजे यहां भी डैम के गेट खोलने की तैयारी है। प्रशासन ने निचले इलाकों के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। 

श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर: वैष्णो देवी बोर्ड को मिला नया CEO, जानिए नाम

श्रीनगर/जम्मू  जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल Manoj Sinha के निर्देश पर प्रशासन में बड़ा फेरबदल किया गया है जिसके तहत 14 अधिकारियों को ट्रांसफर किया गया है जिनमें जिला उपायुक्त भी शामिल हैं। मंगलवार को प्रशासनिक स्तर पर हुए फेरबदल में 10 आई.ए.एस. और 4 जे.के.ए.एस. अधिकारियों को बदला गया है। सामान्य प्रशासनिक विभाग (जी.ए.डी.) के आयुक्त सचिव एम. राजू की ओर से जारी आदेश के तहत श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के  CEO Anshul Garg को डिवीजनल कमिश्नर कश्मीर के पद पर नियुक्त किया गया है जबकि जिला उपायुक्त Sachin Kumar Vaishya को श्री माता वैष्णो देवी श्राईन बोर्ड का CEO नियुक्त किया गया है। कठुआ के डिप्टी कमिश्नर डॉ. राकेश मिन्हास को जम्मू का नया जिला उपायुक्त बनाया गया है। 

शिमला ट्रैजेडी: तेज रफ्तार ने छीने तीन युवा जीवन, पब्बर नदी बना काल

हिमाचल  शिमला जिले के रोहड़ू क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है। चिड़गांव के पास एक कार पब्बर नदी में गिर गई, जिसमें तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल है। यह हादसा रात करीब 12 बजे हुआ, जब चार युवक स्थानीय लैला मेले से रोहड़ू की तरफ लौट रहे थे। पुलिस को आशंका है कि खराब मौसम और तेज बारिश के कारण कार सड़क से फिसलकर नदी में जा गिरी। सूचना मिलते ही पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद नदी से तीनों युवकों के शव बाहर निकाले गए। मृतकों की पहचान चिड़गांव क्षेत्र के रहने वाले विशाल ठाकुर, अभय खंडियान और हिमांशू के तौर पर हुई है। इस हादसे में घायल हुए चौथे युवक हर्ष चौहान को तुरंत रोहड़ू अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना से पूरे इलाके में शोक का माहौल है। यह दुर्घटना स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ी त्रासदी है, क्योंकि चारों युवक एक ही क्षेत्र के रहने वाले थे। पुलिस का कहना है कि वे इस दुखद घटना के कारणों की पूरी तरह से जांच कर रहे हैं।  

इमरजेंसी मिशन बना काल: मेडिकल विमान क्रैश में किसी की नहीं बची जान

वाशिंगटन  अमेरिका के उत्तरी एरिजोना के नवाजो नेशन में मंगलवार को एक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने और फिर उसमें आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने एक बयान में यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, यह चिकित्सीय परिवहन विमान था जिसमें बीमार, घायल या जरूरतमंद मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता था। न्यू मेक्सिको के अल्बुर्क की सीएसआई विमानन कंपनी से संबंधित यह विमान चिनले के हवाई अड्डे के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस विमान में चिकित्साकर्मी सवार थे और वे एक मरीज को लेने अस्पताल जा रहे थे। संघीय विमानन प्रशासन के अधिकारियों ने एक ईमेल में बताया कि विमान दोपहर में हवाई अड्डे पर उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें बताया गया कि राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड और एफएए मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के कारण का पता नहीं चल पाया है। नवाजो नेशन के शीर्ष नेता बुउ न्यग्रेन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस हादसे के बारे में जानकर उन्हें दुख हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘ये वे लोग थे जिन्होंने दूसरों को बचाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और नवाजो नेशन में उनकी कमी हमेशा खलेगी।''   

दिल्ली समेत पूरे देश में बिजली बिल में बढ़ोतरी तय, सुप्रीम कोर्ट ने दी सशर्त अनुमति

नई दिल्ली  देश की राजधानी दिल्ली में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दिल्ली में बिजली की दरें बढ़ाने की अनुमति दे दी है। यह फैसला उन बकाया भुगतानों से जुड़ा है, जो बिजली वितरण कंपनियों को सरकार से मिलने थे। क्या हैं सुप्रीम कोर्ट की शर्तें? सुप्रीम कोर्ट ने बिजली की कीमतें बढ़ाने की मंजूरी देते हुए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें रखी हैं। कोर्ट ने कहा कि बढ़ोतरी Reasonable and Affordable होनी चाहिए। इसके अलावा कीमतें दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) द्वारा तय की गई सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने DERC को एक विस्तृत रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह बताया जाए कि बिजली की दरें कैसे, कब और कितनी बढ़ाई जाएंगी। रिपोर्ट के अनुसार ये बढ़ी हुई दरें सभी तरह के उपभोक्ताओं – व्यक्तिगत, आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक  पर लागू होंगी। अन्य राज्यों पर भी पड़ेगा असर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे देश के अन्य राज्यों पर भी पड़ सकता है। दरअसल यह मामला बिजली वितरण कंपनियों के Regulatory assets के बकाया भुगतानों को लेकर था। कोर्ट ने सभी लंबित भुगतानों को अगले चार साल के भीतर चुकाने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि जिन राज्यों में लंबे समय से ये भुगतान अटके हुए हैं, वहां भी आने वाले चार सालों में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं। नियामक परिसंपत्तियों का मतलब उन बकाया भुगतानों से है, जो बिजली वितरण कंपनियां राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली सप्लाई के बदले मांगती हैं। 

अमेरिकी दबाव को भारत ने किया खारिज, रूस से दोस्ती में नहीं आएगी कोई रुकावट

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को  25% टैरिफ लगाने की धमकी  और रूस से तेल खरीद को लेकर  प्रतिबंधों की चेतावनी के बावजूद, भारत ने साफ किया है कि वह  रूस के साथ अपने रक्षा और रणनीतिक सहयोग को कमजोर नहीं होने देगा । मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार और रूस के उप रक्षा मंत्री कर्नल जनरल अलेक्जेंडर फोमिन के बीच हुई बैठक में दोनों देशों ने मजबूत रक्षा सहयोग की पुन: पुष्टि की। ट्रंप की सख्त भाषा: "भारत को कीमत चुकानी होगी" हाल ही में ट्रंप ने दो कड़े रुख अपनाए।    ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि यदि भारत रूस से तेल और हथियार खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका भारत से आयात होने वाले कई प्रमुख उत्पादों पर  25% आयात शुल्क (Tariff) लगा सकता है। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि रूस से कच्चा तेल और रक्षा उपकरण खरीदने पर भारत को CAATSA के तहत सजा दी जा सकती है।  ट्रंप ने कहा कि "भारत अगर रूस को समर्थन देता है, तो उसे अमेरिका से व्यापार में इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।"    भारत का दो टूक जवाब  भारत ने दो टूक कहा है कि उसकी नीति "रणनीतिक स्वायत्तता"  पर आधारित है, और वह  किसी दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकेगा। रूस से भारत की दोस्ती गहरी और पुरानी है और हमेशा रहेगी। भारत और रूस के संबंध ऐतिहासिक और विश्वसनीय रक्षा साझेदारी पर आधारित हैं। भारत रूस से Su-30MKI,  S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, पनडुब्बी तकनीक, और ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली सहित कई सामरिक रक्षा सौदे कर चुका है। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत के राजदूत विनय कुमार और रूसी उप रक्षा मंत्री फोमिन की यह बैठक "पारंपरिक गर्मजोशी और दोस्ती के माहौल में" हुई जिसमे रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और मज़बूत करने की रणनीति,  हथियार प्रणालियों के संयुक्त विकास और विनिर्माण पर चर्चा की गई तथा  भारत-रूस के बीच सैन्य-तकनीकी सहयोग को लंबी अवधि तक बनाए रखने का संकल्प लिया।   भारत की संतुलित नीति  अमेरिका और पश्चिमी देशों की नाराज़गी के बावजूद भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल आयात  करना जारी रखा। भारत संयुक्त राष्ट्र और अन्य मंचों पर  यूक्रेन युद्ध पर संतुलित रुख अपनाता रहा है।  विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की यह रणनीति उसे बहुध्रुवीय वैश्विक शक्ति** के रूप में उभार रही है। भारत का मानना है कि रूस के साथ रक्षा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करते हैं।रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता (Aatmanirbharta)  को बढ़ावा देते हैं और  पश्चिमी दबाव के बावजूद  वैश्विक स्तर पर स्वतंत्र कूटनीति को दर्शाते हैं।  

ट्रंप की धमकियों को नजरअंदाज कर रूस में भारत का डिप्लोमैटिक गेम प्लान शुरू, डोभाल और जयशंकर एक्शन में

नई दिल्ली  टैरिफ पर अमेरिकी दादागीरी, ट्रंप के बड़बोले बयानों के बीच भारत ने यूएस समेत दुनिया को रणनीतिक स्वायत्तता का संदेश दिया है. रूस के साथ कच्चे तेल, S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर बात करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल मॉस्को पहुंच चुके हैं. अगले कुछ ही दिनों में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी रूस की यात्रा पर जाने वाले हैं. भारत की ओर से ये दो हाई प्रोफाइल यात्राएं तब हो रही हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति भारत को लगातार टैरिफ की धमकियां दे रहे हैं. ट्रंप की धमकी तब आ रही है जब वे भारत पर 25 फीसदी का टैरिफ लगा चुके हैं. इसके बाद मंगलवार को उन्होंने कहा कि भारत अच्छा ट्रेडिंग पार्टनर नहीं है और वे इंडिया पर टैरिफ को और भी बढ़ा देंगे. ट्रंप की आपत्ति भारत के रूस से कच्चे तेल की खरीद पर है. ट्रंप का आरोप है कि भारत इससे न सिर्फ रूस की वॉर मशीन को चला रहा है बल्कि इस तेल को बाजार में बेचकर फायदा भी कमा रहा है. इस घड़ी में भारत ने रूस में अपने डिप्लोमैटिक मिशन को बेहद सक्रिय कर दिया है. भारत ने रूस से तेल खरीद पर स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता का परिचय देते हुए कहीं से भी यह मैसेज नहीं दिया है कि अब वो रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा. भारत अभी अपनी जरूरत का 35 से 40 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से खरीदता है. भारत चीन के बाद रूस के कच्चे तेल का दूसरा बड़ा खरीदार है. गौरतलब है कि एनएसए अजित डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर की रूस यात्राओं के बाद ही रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा भी प्रस्तावित है. हालांकि इसकी तारीख अभी तय नहीं है. बता दें कि ट्रंप भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाओं को डेड इकोनॉमी बता चुके हैं. रूस ने ट्रंप की ओर से भारत को दी जा रही टैरिफ धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि ये 'अवैध व्यावसायिक दबाव' हैं.  क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा, "हम ऐसे कई बयान सुनते हैं जो दरअसल देशों को रूस के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ने के लिए मजबूर करने की धमकियां और प्रयास हैं. हम ऐसे बयानों को वैध नहीं मानते. संप्रभु देशों को अपने हितों के आधार पर व्यापार और आर्थिक सहयोग में अपने साझेदार चुनने का अधिकार होना चाहिए और है भी." सोमवार रात को भारत केविदेश मंत्रालय ने अमेरिकी धमकियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "भारत को निशाना बनाना अनुचित और अविवेकपूर्ण है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि, "भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा." डोभाल और रूसी लीडरशिप के बीच चर्चा के प्रमुख बिंदू ट्रंप की धमकियों के बीच डोभाल और जयशंकर की यह यात्रा भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और रूस के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने का स्पष्ट संदेश देती है. इन दोनों नेताओं की रूस दौरे पर इन मुद्दों पर चर्चा संभावित है. रक्षा सहयोग: अजित डोभाल रूसी समकक्षों के साथ रक्षा उद्योग सहयोग पर बातचीत करेंगे. इसमें अतिरिक्त S-400 मिसाइल सिस्टम की खरीद, भारत में इसके रखरखाव के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्टर की स्थापना और रूसी Su-57 फाइटर जेट्स के खरीद पर चर्चा हो सकती है. रूसी तेल की आपूर्ति: इस दौरे में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और रूसी तेल की आपूर्ति पर भी चर्चा होगी. भारत रूस से लगभग 35 से 40 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है. रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले ये आंकड़ा मात्र 0.2% था. रूसी तेल की कम कीमत ने भारत को घरेलू ईंधन की कीमतें स्थिर रखने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन देने में मदद की है.  भारत ने जोर देकर कहा कि वह अपनी राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देगा. भारत ने कहा है कि हम अपने उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देंगे. अगर रूसी कच्चा तेल अन्य स्रोतों से सस्ता है, तो हम अपने नागरिकों को क्यों दंडित करें.? ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने भी कहा कि भारत का रूसी तेल व्यापार पारदर्शी रहा है और यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर करने में मदद करता है. मोदी-पुतिन शिखर सम्मेलन की तैयारी: यह यात्रा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा और आगामी भारत-रूस शिखर सम्मेलन की तैयारियों का हिस्सा है.  भारत ने दिया रणनीतिक स्वायत्तता का संदेश डोभाल और जयशंकर की मॉस्को यात्राएं भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता का मजबूत संदेश देती हैं. भारत और रूस के बीच संबंध 1947 से चले आ रहे हैं और 2000 में रणनीतिक साझेदारी संधि के बाद से हर साल शिखर सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं. 2021 से दोनों देश 2+2 वार्ता (विदेश और रक्षा मंत्रियों की संयुक्त बैठक) भी आयोजित करते हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ मतदान से परहेज किया है.  ट्रम्प की धमकियों के बावजूद भारत ने स्पष्ट किया है कि वह रूस के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को बनाए रखेगा, यह न केवल तेल व्यापार तक सीमित है बल्कि रक्षा, ऊर्जा और उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को भी शामिल करता है. रूस ने भी भारत के व्यापारिक भागीदार चुनने के अधिकार का समर्थन किया है इसे संप्रभु देशों का मूलभूत अधिकार बताया. 

धनखड़ जैसी ऐतिहासिक जीत दोहराएगा NDA? उपराष्ट्रपति चुनाव में BJP का पलड़ा भारी

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद बीजेपी ने उनके विकल्प की तलाश शुरू कर दी है. उपराष्ट्रपति पद के चुनाव का औपचारिक ऐलान होने के साथ ही सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 'डिनर डिप्लोमेसी' के जरिए उपराष्ट्रपति के लिए विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं, तो बीजेपी ने भी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी सियासी कवायद शुरू कर दी है.  चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए 9 सितंबर को मतदान का ऐलान किया है, जिसके लिए नामांकन की प्रक्रिया 7 अगस्त से शुरू हो रही है. बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व उपराष्ट्रपति पद के लिए व्यापक समर्थन जुटाने की रणनीति बनाने में जुट गया है.  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सोमवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की एक अहम बैठक हुई, जिसमें उपराष्ट्रपति पद के चुनाव को लेकर मंथन किया गया. इसके अलावा जगदीप धनखड़ जैसी बड़ी जीत के लिए गैर-एनडीए दलों का समर्थन जुटाने का प्लान बनाया गया है. पार्टी के सामने उपराष्ट्रपति पद के लिए जगदीप धनखड़ का विकल्प ढूंढने के साथ-साथ 2022 की तरह बड़ी जीत हासिल करने की चुनौती है.  बीजेपी उपराष्ट्रपति पद के लिए एक ऐसे नेता को उम्मीदवार बनाने की रणनीति बना रही है, जो पार्टी के साथ-साथ आरएसएस की विचारधारा में भी फिट बैठ सके. इसके अलावा, एनडीए के साथ-साथ दूसरे दलों का समर्थन भी उसके नाम पर आसानी से जुटाया जा सके. इसकी कमान अमित शाह ने अपने हाथ में संभाल रखी है.  उपराष्ट्रपति पद के लिए 9 सितंबर को होगा चुनाव चुनाव आयोग ने 1 अगस्त को देश के 17वें उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. 7 अगस्त को अधिसूचना जारी हो जाएगी, जिसके साथ नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. उपराष्ट्रपति पद के लिए 21 अगस्त तक उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे. 22 अगस्त को नामांकन पत्रों की जांच होगी और उम्मीदवार 25 अगस्त तक अपने नाम वापस ले सकते हैं.  उपराष्ट्रपति पद पर एक से ज्यादा उम्मीदवार होने पर 9 सितंबर को मतदान होगा. संसद भवन के कमरा नंबर एफ-101 वसुधा, प्रथम तल में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा. वोटिंग खत्म होने के बाद मतगणना शुरू हो जाएगी. इस तरह, नतीजे 9 सितंबर की शाम तक घोषित कर दिए जाएंगे. लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मतदान में हिस्सा लेते हैं.  उपराष्ट्रपति के लिए बीजेपी की सियासी कवायद बीजेपी ने उपराष्ट्रपति चुनाव की सियासी हलचल को देखते हुए अपनी तैयारी शुरू कर दी है. इकोनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक, अमित शाह के कार्यालय में सोमवार को एक बैठक हुई, जिसमें बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महासचिव बीएल संतोष, महासचिव विनोद तावड़े और सुनील बंसल जैसे नेता शामिल हुए थे. बैठक में आगामी राज्यों के चुनाव के साथ-साथ उपराष्ट्रपति पद के चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई.  बीजेपी नेतृत्व ने तय किया है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग के लिए एनडीए सांसदों के लिए एक ट्रेनिंग सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें उन्हें मतदान प्रक्रिया और बैलेट पेपर के प्रारूप से अवगत कराया जाएगा. इसके अलावा, एनडीए के साथ-साथ गैर-एनडीए दलों का समर्थन जुटाने की रणनीति बनाई गई है. इसके लिए पार्टी के कुछ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपने की योजना बनाई गई है ताकि समय रहते उनसे संपर्क और संवाद करके समर्थन जुटाया जा सके. धनखड़ से भी बड़ी जीत का बीजेपी बना रही प्लान बीजेपी की कोशिश जगदीप धनखड़ से भी बड़ी जीत की इबारत लिखने की है. 2022 में उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ थे, तो विपक्ष की तरफ से कांग्रेस नेता मारग्रेट अल्वा उम्मीदवार थीं. धनखड़ ने मारग्रेट अल्वा को भारी मतों से हराया था. जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे, जबकि मारग्रेट अल्वा को 182 सांसदों का ही समर्थन मिल सका था.  जगदीप धनखड़ को मिली भारी मतों से जीत में एनडीए दलों के समर्थन के साथ-साथ कई गैर-एनडीए दलों का भी अहम योगदान था. नवीन पटनायक की बीजेडी, जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस और मायावती की बसपा ने एनडीए के प्रत्याशी जगदीप धनखड़ को समर्थन दिया था. इस बार भी उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी ने 2022 की तरह समर्थन की उम्मीद लगाई हुई है. बीजेपी ने वाईएसआर कांग्रेस, बीआरएस और बीजेडी के नेताओं से संपर्क साधने का काम अपने नेताओं को सौंप दिया है.  विपक्ष उपराष्ट्रपति के लिए तलाश रहा संयुक्त प्रत्याशी विपक्षी इंडिया गठबंधन उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारी में जुट गया है, जिसके लिए संयुक्त उम्मीदवार उतारने की योजना बना रहा है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 7 अगस्त को विपक्षी इंडिया गठबंधन के नेताओं को अपने आवास पर दावत दी है, जिसमें माना जा रहा है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए संयुक्त उम्मीदवार को लेकर फैसला किया जाएगा. इस तरह, कांग्रेस ने विपक्षी दलों की किलेबंदी अभी से शुरू कर दी है, ताकि 2022 की तरह किसी तरह की कोई गलती न हो.  2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यह पहली बार है, जब इंडिया गठबंधन के नेता एकजुट हो रहे हैं. राहुल गांधी ने दावत ऐसे समय रखी है, जब अगले उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है. ऐसे में उपराष्ट्रपति पर संयुक्त रणनीति तैयार करने की कोशिश में राहुल गांधी लगे हैं. विपक्षी दलों का मानना है कि एक मजबूत उम्मीदवार के साथ वे उपराष्ट्रपति चुनाव को रोचक बना सकते हैं, और भले ही एनडीए के उम्मीदवार को जीत से न रोक सकें, लेकिन धनखड़ जैसी बड़ी जीत से जरूर पीछे रख सकते हैं.  धनखड़ से बड़ी जीत के लिए बीजेपी को क्या करना होगा बीजेपी की रणनीति एक ऐसे उम्मीदवार की तलाश करना है, जिसके नाम को आगे करके विपक्षी किलेबंदी में सेंध लगाई जा सके. यह कदम बीजेपी की क्षेत्रीय संतुलन और व्यापक समर्थन हासिल करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. लोकसभा और राज्यसभा के कुल 782 सांसद हैं, जिसमें से बीजेपी को करीब 425 सांसदों का समर्थन हासिल है. लेकिन धनखड़ को मिले 528 वोटों से करीब 103 वोट कम है. ऐसे में धनखड़ जैसी जीत के लिए एनडीए को 100 से ज्यादा … Read more

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: एल्विश यादव के खिलाफ ट्रायल पर रोक, सरकार और शिकायतकर्ता से जवाब तलब

 नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर एल्विश यादव को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रही सांप के जहर से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है। एल्विश यादव ने इस मामले में चार्जशीट और मुकदमे की प्रक्रिया को चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई तक निचली अदालत में मामले की सुनवाई नहीं होगी। क्या है मामला? नोएडा पुलिस ने एल्विश यादव समेत कुछ लोगों पर सांप का जहर पार्टी में इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया था। आरोप था कि उन्होंने एक पार्टी में अवैध तरीके से सांपों और जहर का इस्तेमाल किया था। इस मामले में वन विभाग और पुलिस की जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की गई थी। एल्विश यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उनके खिलाफ गलत और बिना सबूत के आरोप लगाए गए हैं। उनका कहना है कि वे निर्दोष हैं और उन्हें झूठा फंसाया गया है। यूपी सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले में अपने खिलाफ आरोपपत्र और आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली एल्विश यादव की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता गौरव गुप्ता को नोटिस जारी किया। शीर्ष अदालत इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ यादव की अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। आरोपपत्र में विदेशियों समेत अन्य लोगों की तरफ से रेव पार्टियों में मनोरंजन के लिए साँप के जहर का सेवन करने का आरोप लगाया गया है। पिछले साल मार्च में नोएडा पुलिस ने किया था गिरफ्तार एल्विश यादव को पिछले साल मार्च में नोएडा पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किया था। मामले में उनके वकील ने उच्च न्यायालय में तर्क दिया था कि आवेदक और सह-आरोपी के बीच कोई कारणात्मक संबंध स्थापित नहीं होने के अलावा, उसके पास से कोई सांप, मादक या मनोविकारजनक पदार्थ बरामद नहीं हुआ था। वकील ने आगे कहा था कि हालांकि सूचना देने वाला अब पशु कल्याण अधिकारी नहीं है, फिर भी उसने खुद को पशु कल्याण अधिकारी बताते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। एल्विश यादव को एक जाने-माने प्रभावशाली व्यक्ति और टेलीविजन पर कई रियलिटी शो में दिखाई देने वाला व्यक्ति बताते हुए वकील ने कहा था कि एफआईआर में उनकी संलिप्तता ने मीडिया का बहुत ध्यान आकर्षित किया है।