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देशभर में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, आज से 6, 7, 8, 9 जुलाई तक कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली देशभर में मानसून अब रफ्तार पकड़ चुका है और इसके साथ ही खतरे की घंटी भी बजने लगी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आज से 9 जुलाई 2025 के बीच कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान उत्तर भारत से लेकर मध्य और पूर्वी हिस्सों तक मौसम बिगड़ने के पूरे आसार हैं। पहाड़ी इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन का जोखिम है, जबकि मैदानी राज्यों में बिजली गिरने और तेज हवाओं से जनजीवन प्रभावित हो सकता है। किस राज्यों में जारी हुआ ऑरेंज अलर्ट? IMD ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, चंडीगढ़, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसका मतलब है कि इन क्षेत्रों में भारी बारिश के चलते सतर्कता और तैयारी दोनों जरूरी हैं। पहाड़ी राज्यों में अलर्ट: हिमाचल और उत्तराखंड हिमाचल प्रदेश: 5 से 7 जुलाई तक शिमला, सोलन, मंडी और किन्नौर जैसे जिलों में भारी बारिश की चेतावनी। पहाड़ों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ की आशंका जताई गई है। उत्तराखंड: देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जैसे क्षेत्रों में भारी वर्षा संभावित है। स्थानीय प्रशासन ने नदियों और जलधाराओं के पास जाने से मना किया है। मध्य और पूर्व भारत पर साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर मध्य प्रदेश: साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में भारी बारिश की संभावना है। छत्तीसगढ़: महासमुंद, रायगढ़, जशपुर, सरगुजा और कोरबा जैसे उत्तरी जिलों में मूसलधार बारिश के आसार हैं। तेज हवाओं (30-40 किमी/घंटा) और गरज-चमक का भी अनुमान है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में राहत और चेतावनी दिल्ली और एनसीआर में अगले 5 दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी। हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जबकि पूर्वी यूपी के गोरखपुर, बलिया, बनारस जैसे जिलों में बिजली गिरने और बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।  राजस्थान: पूर्वी जिलों में भारी बारिश, पश्चिम में हल्की बौछारें -पूर्वी राजस्थान (कोटा, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर आदि) में 5 से 9 जुलाई तक लगातार भारी बारिश का अनुमान है। -पश्चिमी जिलों जैसे जैसलमेर, बीकानेर और जोधपुर में हल्की से मध्यम बारिश संभव है।  IMD की चेतावनी और एहतियात मौसम विभाग ने साफ किया है कि आने वाले दिनों में जलभराव, ट्रैफिक जाम, पेड़ों के गिरने, बिजली गिरने, और भूस्खलन जैसी घटनाओं की संभावना बहुत अधिक है। लोगों से अपील की गई है कि: -नदियों, जलाशयों और निचले इलाकों से दूर रहें। -बिजली कड़कने के समय खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे शरण न लें। -भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में यात्रा से बचें। -स्थानीय प्रशासन और मौसम अपडेट्स पर नजर रखें।  

काम मत करो, बच्चे पैदा करो… आबादी बढ़ाने के लिए चीन की जनता को मिलेंगे ₹12 लाख

बीजिंग  दुनिया भर के तमाम देशों में घटती युवा आबादी चिंता का सबब बनी हुई है. सरकारें युवाओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए मां और उसके नवजात शिशुओं के लिए कई स्कीमें भी ला रही हैं, लेकिन फिर भी जन्म दर नहीं बढ़ रही. लिहाजा अब जच्चा-बच्चा के बाद अब पुरुषों यानी पिता को प्रोत्साहन देने की तैयारी है. चीन इसमें पहल करेगा और ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले पिता भी अब मालामाल होंगे. बच्चों के जन्म पर पिता को भी नकद इनाम मिलेगा.  चीन के सबसे अधिक आबादी वाले सिचुआन प्रांत ने शादी की छुट्टी को 3 से बढ़ाकर 20 दिन कर दिया है. अगर आप शादी से पहले मेडिकल चेकअप भी कराते हैं तो आपको 5 दिन की और छुट्टी मिल जाएगी. यानी कुल 25 दिन की छुट्टी, वो भी पूरी सैलरी के साथ. ये प्रस्ताव फिलहाल जून महीने तक लोगों की राय के लिए खुला है. क्यों देना पड़ा छुट्टियों का ये तोहफा? कन्फ्यूशियस की धरती कहे जाने वाले शेडोंग प्रांत में भी शादी की छुट्टी अब 18 दिन कर दी गई है. शांक्सी और गांसू जैसे प्रांतों ने तो इसे और आगे बढ़ाकर 30 दिन तक कर दिया है. चीन में फिलहाल केंद्र स्तर पर सिर्फ 3 दिन की शादी छुट्टी का प्रावधान है जो 1980 से चला आ रहा है. दरअसल, चीन में शादी करने वाले लोगों की संख्या लगातार घट रही है. 2025 की पहली तिमाही में केवल 1.81 मिलियन जोड़ों ने शादी की रजिस्ट्रेशन करवाई, जो पिछले साल के मुकाबले 8% कम है. 2023 में थोड़ी बढ़त के बाद आंकड़े फिर गिर गए और अब ये स्तर 1980 के बाद सबसे नीचे है. कितने पैसे मिलेंगे ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन सरकार बच्चे पैदा करने वाली माता को हर साल 3,600 युआन देगी। भारतीय रुपये में यह लगभग 42,000 रुपये होता है। यह पैसा बच्चे के तीन साल के होने तक मिलता रहेगा। स्टेट काउंसिल इंफॉर्मेशन ऑफिस ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। उल्लेखनीय है कि इस समय चीन की जनसंख्या 141.05 करोड़ है। क्यों आई ऐसी नीति चीन में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। इसलिए सरकार यह कदम उठा रही है। पिछले साल, चीन में सिर्फ 95.4 लाख बच्चे पैदा हुए। साल 2016 में यह संख्या लगभग दोगुनी थी। उल्लेखनीय है कि सरकार ने साल 2016 में चीन ने 'एक बच्चा नीति' को खत्म कर दिया था।स चीन में 'वन चाइल्ड पॉलिसी' खत्म हुए लगभग दस साल हो गए हैं। लेकिन, इसके बाद भी परिवार ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। वहां शादी करने वाले लोगों की संख्या भी पिछले पचास सालों में सबसे कम हो गई है। इसका मतलब है कि आने वाले सालों में और भी कम बच्चे पैदा होंगे। चीन की स्थानीय सरकारें (Local Government) बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए कई तरीके अपना रही हैं। वे लोगों को पैसे और मकान देने की कोशिश कर रही हैं। इनर मंगोलिया के होहोट जैसे शहर दूसरे बच्चे के लिए 50,000 युआन और तीसरे बच्चे के लिए 100,000 युआन दे रहे हैं। SCMP के अनुसार, यहां लोगों की कमाई कम है, इसलिए यह पैसा बहुत मायने रखता है। दूसरे देशों में इस तरह की योजनाओं के मिले-जुले नतीजे देखने को मिले हैं। दक्षिण कोरिया में स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2024 में भुगतान बढ़ा दिया। एक साल बाद, जन्म दर में 3.1% की वृद्धि हुई – यह नौ सालों में पहली वृद्धि थी। जापान एक अलग रास्ता दिखाता है। वहां 2005 से अधिक चाइल्डकैअर केंद्र खोलकर, इसने अपनी प्रजनन दर में 0.1 की वृद्धि की। स्टडी से पता चलता है कि अतिरिक्त नकदी कुछ लोगों के लिए मददगार हो सकती है। 144,000 से अधिक माता-पिता के एक हालिया सर्वेक्षण में पाया गया कि सिर्फ 15% लोग और बच्चे चाहते थे। 1,000 युआन की संभावित सब्सिडी के बारे में जानने के बाद, यह आंकड़ा 8.5 प्रतिशत बढ़ गया। शादी कम, बच्चे और भी कम कम शादियां सीधे तौर पर घटती जन्मदर से जुड़ी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अब युवा तब तक शादी नहीं करना चाहते जब तक उन्हें बच्चे की प्लानिंग न करनी हो. ऊपर से पढ़ाई और करियर में व्यस्तता, और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सोच ने पारंपरिक शादी की धारणा को और कमजोर किया है. सरकार क्या कर रही है? चीन अब शादी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को भी आसान बना रहा है. अब किसी भी शहर में शादी का रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है हुकौ (घरेलू पंजीकरण) की जरूरत नहीं. साथ ही, मैटरनिटी और पितृत्व अवकाश भी बढ़ाया जा रहा है. हालांकि कुछ लोगों को डर है कि आर्थिक दबाव की वजह से ये सारी छुट्टियां केवल कागजी बनकर न रह जाएं. इसी को देखते हुए सरकार कंपनियों को मदद देने की बात भी कर रही है.

सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया ने बनाया रिकॉर्ड, बनीं भारतीय नौसेना की पहली फाइटर पायलट

नई दिल्ली  भारतीय नौसेना की सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। वह नेवल एविएशन की फाइटर स्ट्रीम में शामिल होने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। यानी वह अब नौसेना के फाइटर प्लेन उड़ाने वाली पहली महिला बन गई हैं । विशेषज्ञों का मानना है यह उपलब्धि न केवल नौसेना के इतिहास में एक मील का पत्थर है, बल्कि यह महिलाओं के लिए लड़ाकू विमानन क्षेत्र के द्वार खोलने वाली प्रेरणादायक मिसाल भी है। दरअसल भारतीय नौसेना ने आईएनएस डेगा, विशाखापत्तनम में द्वितीय बेसिक हॉक कन्वर्जन कोर्स के स्नातक समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट अतुल कुमार धुल और सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया को ‘विंग्स ऑफ गोल्ड’ से सम्मानित किया गया। ‘विंग्स ऑफ गोल्ड’ का सम्मान रियर एडमिरल जनक बेवली, एसीएनएस (एयर) द्वारा प्रदान किया गया। इसी ऐतिहासिक अवसर पर सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया ने यह एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। नौसेना के मुताबिक वह अब नेवल एविएशन की फाइटर स्ट्रीम में शामिल होने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। भारतीय नौसेना का कहना है कि वे पहले से ही महिला अधिकारियों पायलट बनने का अवसर दे चुके हैं। महिलाओं को एमआर विमानों और हेलीकॉप्टरों में पायलट और नौसेना वायु संचालन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जा चुका है। अब फाइटर स्ट्रीम में एसएलटी आस्था पूनिया की नियुक्ति नौसेना विमानन में लैंगिक समावेशन के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह कदम नारी शक्ति को बढ़ावा देने के संकल्प को सशक्त बनाता है। दरअसल समुद्री जहाजों व युद्धपोतों के जरिए नौसेना देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करती है। इसके साथ ही नौसेना में फायटर पायलट भी होते हैं। ये वे अधिकारी हैं जो नौसेना के लड़ाकू विमान उड़ाते हैं। इनकी जिम्मेदारी समुद्र सीमा पर निगरानी रखना व दुश्मन को दूर रखने के लिए त्वरित कार्रवाई करना होता है। कई महत्वपूर्ण मौकों पर नौसेना के ये पायलट दुश्मन के ठिकानों और समुद्री बेड़े की भी जानकारी जुटाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि सब-लेफ्टिनेंट आस्था नौसेना विमानन की फाइटर स्ट्रीम में शामिल होने वाली पहली महिला बनीं। इसके साथ ही सब-लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया सभी बाधाओं को पार करते हुए नौसेना में महिला फाइटर पायलटों के एक नए युग का मार्ग प्रशस्त किया है। गौरतलब है कि भारतीय नौसेना की महिला पायलट टोही विमान और हेलीकॉप्टर स्ट्रीम में पहले से कार्यरत हैं। महिला पायलट नौसेना के टोही विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाती हैं। लेकिन आस्था पुनिया पहली महिला हैं जो नौसेना में लड़ाकू विमान उड़ाएंगी। हालाँकि नौसेना की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि फिलहाल उन्हें कौन से फाइटर जेट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारतीय नौसेना के पास कई तरह के फाइटर जेट हैं। नौसेना के ये फाइटर एयरक्राफ्ट आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत के से उड़ान भरने में सक्षम हैं। 

रेल में आग का कहर: यात्री सुरक्षित लेकिन रेलवे की लापरवाही पर उठी उंगली

कर्नाटक  कर्नाटक में एक बड़ा रेल हादसा टल गया जब उदयपुर जा रही हमसफर एक्सप्रेस के इंजन में अचानक आग लग गई। यह घटना उस वक्त हुई जब ट्रेन बेंगलुरु से गुजर रही थी। हादसे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ट्रेन के इंजन से धुआं और आग की लपटें साफ दिखाई दे रही हैं। यात्रियों में मची अफरातफरी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन के आगे वाले डिब्बों से धुआं उठता देख यात्रियों में हड़कंप मच गया। कुछ यात्रियों ने तुरंत चेन खींच कर ट्रेन को रुकवाया और अन्य लोगों को आग के बारे में सूचित किया। आनन-फानन में ट्रेन को रोका गया और रेलवे स्टाफ को इसकी जानकारी दी गई। फायर ब्रिगेड की टीम ने समय रहते काबू पाया सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीम घटनास्थल पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आग पर नियंत्रण पा लिया। सौभाग्य से किसी भी यात्री को कोई चोट नहीं आई और सभी लोग सुरक्षित हैं। समय रहते आग बुझा दिए जाने से एक बड़ा हादसा टल गया। रेलवे विभाग ने शुरू की जांच रेलवे विभाग ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग इंजन में किसी तकनीकी खराबी के कारण लगी हो सकती है। इंजन की उम्र और उसकी हालिया सर्विसिंग की भी समीक्षा की जा रही है।  

ड्रोन से मिलेगा जवाब! पाकिस्तान को घेरने की नई योजना पर काम शुरू

नई दिल्ली  भारत सरकार ने ड्रोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए नया बड़ा कदम उठाया है। पाकिस्तान को लेकर बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच, सरकार ने लगभग 1,950 करोड़ रुपए (234 मिलियन डॉलर) की नई योजना शुरू करने का फैसला किया है। इस योजना का उद्देश्य देश में नागरिक और सैन्य ड्रोन बनाने वाली कंपनियों को सहायता देना है, ताकि चीन और तुर्की से मदद पा रहे पाकिस्तान के ड्रोन प्रोग्राम का मुकाबला किया जा सके। ड्रोन रेस में भारत-पाकिस्तान मई में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक सीमा विवाद हुआ था, जिसमें दोनों देशों ने बड़े पैमाने पर ड्रोन का इस्तेमाल किया था। इस घटना ने यह साफ कर दिया कि ड्रोन अब आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन गए हैं। ऐसे में भारत ने अपनी ड्रोन निर्माण क्षमता को बढ़ाने की ठानी है। योजना का मकसद इस योजना के तहत अगले तीन सालों में ड्रोन, उसके पुर्जे, सॉफ्टवेयर, एंटी-ड्रोन सिस्टम और इससे जुड़ी सेवाओं का निर्माण बढ़ाने के लिए कंपनियों को इंसेंटिव दिया जाएगा। यह योजना पहले से चल रही 120 करोड़ रुपए की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव योजना से बड़ी और व्यापक है। पहले वाली योजना को ज्यादा सफलता नहीं मिली थी, क्योंकि स्टार्टअप्स को फंडिंग और रिसर्च में दिक्कतें आ रही थीं। 2028 तक ड्रोन पुर्जों का स्थानीय निर्माण सरकार चाहती है कि वित्त वर्ष 2027-28 तक कम से कम 40% महत्वपूर्ण ड्रोन पुर्जे भारत में ही बने। फिलहाल भारत कई ड्रोन पुर्जे, जैसे मोटर, सेंसर और कैमरा सिस्टम चीन से आयात करता है। इस नई योजना से इन पुर्जों का देश में निर्माण बढ़ेगा। रक्षा सचिव का बयान रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि सीमा संघर्ष के दौरान दोनों देशों ने ड्रोन और आत्मघाती ड्रोन का इस्तेमाल किया। इससे यह सीख मिली कि हमें स्वदेशी ड्रोन निर्माण को तेजी से बढ़ाना होगा ताकि मजबूत और सक्षम मिलिट्री ड्रोन इंडस्ट्री तैयार हो सके। ड्रोन आयात पर रोक, पुर्जों पर नहीं भारत ने ड्रोन के आयात पर रोक लगा दी है, लेकिन उसके पुर्जों को विदेशों से मंगवाया जा सकता है। अब सरकार उन कंपनियों को और लाभ देगी जो पुर्जे भारत से खरीदेंगी। साथ ही, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक कंपनियों को सस्ते लोन और रिसर्च फंडिंग उपलब्ध कराएगा। ड्रोन कंपनियों को फायदा इस समय भारत में 600 से ज्यादा कंपनियां ड्रोन या उससे जुड़े उत्पाद बना रही हैं। इस नई योजना से इन कंपनियों को काफी फायदा होगा और वे मजबूत बनेंगी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अगले 12-24 महीनों में ड्रोन क्षेत्र में लगभग 3,900 करोड़ रुपए खर्च कर सकता है।  

सेना का खुलासा: ऑपरेशन सिंदूर रोकने का फैसला रणनीतिक मास्टर स्ट्रोक था

नई दिल्ली  पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। भारत ने पाक की ओर से किए गए कायराना हमलों का भी मुंहतोड़ जवाब दिया था।   बीते मई के महीने में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालत बन गए थे। जंग में अपनी हालत पतली होती देख पाकिस्तान भारत के सामने सीजफायर के लिए गुहार लगाने लगा था, जिसके बाद भारत ने सीजफायर समझौते को मंजूरी दे दी थी। अब हाल ही में भारतीय सेना ने भारत के इस कदम को मास्टर स्ट्रोक बताया है। भारत के डिप्टी आर्मी चीफ राहुल आर सिंह ने भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर को सटीक सैन्य कार्रवाई बताते हुए कहा कि भारत ने सभी कार्रवाइयोंं को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया। लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा आयोजित ‘न्यू एज मिलिट्री टेक्नोलॉजीज’ कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रहे थे। डिप्टी चीफ ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने से लेकर खत्म करने तक के फैसले को एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा बताया। लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा, "हमने बिल्कुल आखिरी घड़ी में फैसला लिया कि किन नौ निशानों पर हमला किया जाएगा।" समझदारी भरा कदम इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्रवाई में जानबूझकर सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों को शामिल किया गया ताकि यह संदेश दिया जा सके कि हम एक हैं।" उन्होंने कहा, “भारत ने 21 टारगेट को फाइनल किया था, जिनमें से नौ लक्ष्यों पर हमला करना हमारे लिए समझदारी भरा कदम था।” उन्होंने कहा कि टारगेट का चयन करने के लिए तकनीक की भी मदद ली गई थी। क्यों रोकी गई कार्रवाई? डिप्टी चीफ ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर को रोकने का फैसला मास्टर स्ट्रोक था। उन्होंने कहा, "यह तय किया गया था कि जब भी हमला हो, हमें उनसे आगे रहना है। हालांकि यह भी योजना थी कि अपने लक्ष्यों को पूरा करने के बाद हम इस जंग को रोकने की कोशिश करेंगे।" उन्होंने आगे कहा, "युद्ध शुरू करना आसान है, लेकिन इसे नियंत्रित करना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए मैं कहूंगा कि सही समय पर इस संघर्ष को रोकना एक शानदार योजना थी।"  

रूस-पाकिस्तान में रेल समझौता, सेंट्रल एशिया तक कनेक्टिविटी बढ़ाने की तैयारी

इस्लामाबाद, मॉस्को भारत के मित्र देश कहने जाने वाले रूस से पाकिस्तान ने एक बड़ा समझौता करने में सफलता पाई है। इसके तहत रूस और सेंट्रल एशिया तक पाकिस्तान से ट्रेनों के जरिए कनेक्टिविटी होगी। इसके अलावा सड़क मार्ग से भी पाकिस्तान से लेकर रूस और सेंट्रल एशिया तक पहुंचा जा सकेगा। चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन से इतर आयोजित मीटिंग के दौरान पाकिस्तान के संचार मंत्री अब्दुल अलीम खान और रूस के परिवहन मंत्री आंद्रे सेरगेविच निकितिन के बीच इस अग्रीमेंट को लेकर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने कहा कि इससे रूस और पाकिस्तान के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग बढ़ेगा। इस अग्रीमेंट को पाकिस्तान अपनी बड़ी सफलता के तौर पर प्रचारित कर रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि इस समझौते से हमारा देश एक बड़ा ट्रांजिट हब बन जाएगा। इससे कारोबारी गलियारा बनेगा और माल की आवाजाही आसान हो सकेगी। रूस और सेंट्रल एशिया तक पहुंचना आसान होगा। रूस के मंत्री आंद्रे निकितिन ने कहा कि रूस और पाकिस्तान के सहयोग में वह ताकत है कि क्षेत्रीय समीकरण बदल जाएंगे। उन्होंने कहा कि रूस की यह प्रतिबद्धता है कि पाकिस्तान के साथ कनेक्टिविटी बढ़ाई जाए और कारोबार में भी इजाफा हो। बता दें कि रूस के साथ समझौते के लिए पाकिस्तान लगातार कोशिश करता रहा है। यही नहीं बीते कुछ सालों में जब भारत ने बड़े पैमाने पर रूस से तेल खरीदा तो पाकिस्तान ने भी उससे संपर्क साधा था। हालांकि रूस ने पाकिस्तान को सस्ता तेल देने से इनकार कर दिया था। बता दें कि रूस का भारत के साथ भी एक समझौता है, जिसके तहत इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है। इस कॉरिडोर के माध्यम से भारत की पहुंच सीधे यूरोप तक हो सकती है। माना जा रहा है कि इसी प्रतिस्पर्धा के कारण पाकिस्तान ने रूस के साथ यह करार किया है।  

कोलकाता गैंगरेप मामले में कई लड़कियों ने मनोजीत पर यौन उत्पीड़न के लगाए हैं आरोप

कोलकाता कोलकाता गैंगरेप मामले में टीएमसी के पूर्व छात्रनेता मनोजीत मिश्रा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। एक के बाद एक कई लड़कियों ने मनोजीत पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। ताजा मामले में एक छात्रा ने दावा किया है कि एक कमरे में मनोजीत ने उसके बाल खीचें थे और बालकनी में घसीट ले गया था। इसके बाद वह उसके कपड़े उतारने लगा था और फिर एक अन्य छात्रा के दरवाजा खटखटाने की वजह से वह बच सकी थी। मीडिया से बातचीत में छात्रा ने बताया कि यह घटना अक्टूबर 2023 की थी। छात्रा ने बताया कि एक कार्यक्रम के दौरान उसके पिता ने उसे बुलाया तो वह उनसे बात करने के लिए एक खाली कमरे में चली गई। उसने कहा, ''जैसे ही मैं बाहर निकलने वाली थी, मैंने देखा कि मनोजीत अंदर आया और उसने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। वह साफ तौर पर नशे में था और उसे वीड भी पी रखी थी। मैंने उससे कहा कि वह मुझे जाने दे, लेकिन उसने मेरी बात नहीं सुनी और मेरे करीब आता रहा।'' छात्रा लॉ के दूसरे ईयर की पढ़ाई कर रही है। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व युवा विंग नेता मनोजीत ने कमरे के अंदर उस समय छात्रा के साथ मारपीट की, जब अन्य छात्र बाहर नाच रहे थे और मौज-मस्ती कर रहे थे। उसने कहा कि उसने अपने साथ रखे रिमोट कंट्रोल का इस्तेमाल करके बाहर गानों की आवाज तेज कर दी, ताकि छात्रा की चीखें बाहर न जाएं। छात्रा ने आगे बताया, ''उसने (मनोजीत) मेरे बाल खींचे और मुझे कमरे की बालकनी में घसीटकर ले गया। मेरे कपड़े उतारने लगा… सौभाग्य से, एक सीनियर छात्रा ने दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया और जल्दी में वह कमरे से भाग गया।" कलकत्ता लॉ कॉलेज की एक छात्रा से मनोजीत समेत अन्य पर गैंगरेप का आरोप लगा है। वह इस मामले में मुख्य आरोपी है। मनोजीत समेत कुल चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। टीएमसी का पूर्व छात्रनेता होने की वजह से मनोजीत मामले के चलते टीएमसी पर बीजेपी निशाना साध रही है। इससे पहले, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को एक विधि कॉलेज में सामूहिक दुष्कर्म मामले की जांच की प्रगति पर एक हलफनामा दाखिल करने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया। न्यायमूर्ति सौमेन सेन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार को 10 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई पर उसके समक्ष जांच की केस डायरी भी पेश करने का निर्देश दिया। पीठ में न्यायमूर्ति स्मिता दास डे भी शामिल थीं। साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में 25 जून की शाम को कानून की एक छात्रा से कथित सामूहिक दुष्कर्म किए जाने के मामले में तीन जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। मुख्य आरोपी कॉलेज का भूतपूर्व छात्र है और संस्थान का संविदा कर्मचारी भी है।  

थप्पड़ विवाद पर फडणवीस का बयान – मराठी के सम्मान में हिंसा का समर्थन नहीं

मुंबई पिछले दिनों महाराष्ट्र के ठाणे जिले में कथित तौर पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं द्वारा एक फूड स्टॉल के मालिक को मराठी में बात नहीं करने पर पीटने के मामले में अब राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने MNS कार्यकर्ताओं द्वारा दुकानदार की पिटाई की घटना पर दो टूक कहा कि ऐसी घटना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मराठी का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन मराठी की आड़ में गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बता दें कि मुंबई के पास मीरा रोड में फूड स्टॉल चलाने वाले 48 वर्षीय दुकानदार बाबूलाल चौधरी पर राज ठाकरे की MNS के सात कार्यकर्ताओं ने मराठी नहीं बोलने पर हमला कर दिया। चौधरी की पिटाई करते हुए MNS कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर चेतावनी दी कि अगर उसे इस क्षेत्र में व्यापार करना है तो मराठी बोलना होगा वरना दुकान चलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। जब दुकानदार ने कहा कि महाराष्ट्र में सभी भाषाएँ बोली जाती हैं, तो उस पर थप्पड़ों की बरसात कर दी गई। हुड़दंगियों को MNS का साथ राज ठाकरे की पार्टी MNS इस मामले में अपने कार्यकर्ताओं का साथ दे रही है और दावा किया कि दुकानदार ने मराठी का अपमान किया तभी उसके साथ उसके कार्यकर्ता सख्ती से पेश आए। दूसरी तरफ, MNS कार्यकर्ताओं की हरकतों का महाराष्ट्र के जूनियर गृह मंत्री योगेश कदम ने भी अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन किया है, जिन्होंने कहा कि मराठी का अपमान करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मराठी के नाम पर गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं हालांकि, एक प्रेस कॉन्प्रेन्स में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जो गृह मंत्रालय का भी जिम्मा संभाल रहे हैं, ने दो टूक कहा कि मराठी के नाम पर गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एक दिन पहले भाजपा कोटे से मंत्री नितेश राणे ने भी MNS के कार्यकर्ताओं की हरकत की आलोचना की और कहा, ‘‘एक हिन्दू व्यक्ति को पीटा गया…गरीब हिन्दुओं पर क्यों हमला किया जा रहा है? हिम्मत है तो नल बाजार या मोहम्मद अली रोड पर जाकर अपनी ताकत दिखाओ।’’ बता दें कि नल बाजार या मोहम्मद अली रोड दक्षिण मुंबई में मुख्यतः मुस्लिम बहुल इलाका है। हिन्दुओं को बांटने का एक प्रयास मंत्री राणे ने कहा, ‘‘क्या मोहम्मद अली रोड (इलाका) में दाढ़ी और टोपी वाले लोग शुद्ध मराठी बोलते हैं। क्या जावेद अख्तर या आमिर खान मराठी बोलते हैं।आपके पास उन्हें मराठी बोलने के लिए कहने का साहस नहीं है, लेकिन आप गरीब हिन्दुओं पर हमला कर रहे हैं।’’ राणे ने दावा किया कि हिंदी को लेकर विवाद हिन्दुओं को बांटने का एक प्रयास है। दरअसल, भाषा विवाद के जरिए राजनीतिक दल सामाजिक ध्रुवीकरण की कोशिशों में लगे हुए हैं, क्योंकि आने वाले समय में BMC चुनाव होने वाले हैं।  

भारत को सतर्क रहने की नसीहत, दलाई लामा उत्तराधिकारी पर चीन आक्रामक मुद्रा में

चीन दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन के मामले में चीन भारत को धमकी देने पर उतारू हो गया है। उसने भारत से तिब्बत से जुड़े मुद्दों पर सावधानी से काम करने के लिए कहा है, ताकि द्विपक्षीय संबंधों में सुधार पर इसका असर न पड़े। चीन ने शुक्रवार को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू की इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई है कि दलाई लामा को अपनी इच्छा के अनुसार चलना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने रिजिजू की टिप्पणियों पर एक सवाल का जवाब देते हुए मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि भारत को 14वें दलाई लामा की चीन विरोधी अलगाववादी प्रकृति से स्पष्ट होना चाहिए और शिजांग (तिब्बत) से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए। चीन तिब्बत को शिजांग कहता है। माओ ने कहा कि भारत को अपने शब्दों और कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए, शिजांग से संबंधित मुद्दों पर चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना बंद करना चाहिए और चीन-भारत संबंधों के सुधार और विकास पर प्रभाव डालने से बचना चाहिए। रिजिजू ने गुरुवार को जोर देकर कहा कि अगले दलाई लामा पर फैसला सिर्फ स्थापित संस्था और दलाई लामा लेंगे। उन्होंने कहा कि इस फैसले में कोई और शामिल नहीं होगा। यह दलाई लामा द्वारा अपने उत्तराधिकारी पर की गई टिप्पणियों पर भारत सरकार के किसी वरिष्ठ अधिकारी की पहली प्रतिक्रिया थी। बुधवार को तिब्बती आध्यात्मिक नेता ने कहा कि दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी और केवल गादेन फोडरंग ट्रस्ट – जिसकी स्थापना 2015 में उनके कार्यालय द्वारा की गई थी – को ही उनके अगले दलाई लामा को मान्यता देने का अधिकार होगा। रिजिजू की यह टिप्पणी नोबेल शांति पुरस्कार विजेता की उत्तराधिकार योजना को चीन द्वारा खारिज किए जाने के बाद आई है, जिसमें जोर दिया गया है कि किसी भी भावी उत्तराधिकारी को उसकी स्वीकृति की मुहर मिलनी चाहिए। रिजिजू, जो बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं, और उनके साथी केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, 6 जुलाई को धर्मशाला में दलाई लामा के 90वें जन्मदिन समारोह में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि जन्मदिन समारोह एक धार्मिक समारोह है और इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। माओ ने चीन के इस रुख को दोहराया कि दलाई लामा और तिब्बती बौद्ध धर्म के पंचेन लामा के उत्तराधिकारी के लिए घरेलू खोज, 'स्वर्ण कलश' से निकाले गए लॉटरी और केंद्र सरकार की मंजूरी के अनुरूप कठोर धार्मिक अनुष्ठानों और ऐतिहासिक परंपराओं का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान 14वें दलाई लामा इस प्रक्रिया से गुजरे थे और तत्कालीन केंद्र सरकार ने उन्हें मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को उन सिद्धांतों को बनाए रखना चाहिए और धार्मिक अनुष्ठानों, ऐतिहासिक परंपराओं, चीनी कानून और नियमों का पालन करना चाहिए।