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पिता की हत्या कर शव को नहलाया और फेंक दिया बाहर, बेटी-पति गिरफ्तार

राजकोट पिता की बार-बार की जा रही लापरवाही और झगड़े ने बेटी दामाद को इतना गुस्सा दिला दिया कि दोनों ने मिलकर वृद्ध की हत्या कर दी। मामला गुजरात के राजकोट जिले का है। यहां मजूदरी करने वाला एक शख्स अपनी बेटी और दामाद के साथ रहता था। इस दौरान बेटी और दामाद से उपेक्षा करने को लेकर अक्सर लड़ाई होती रहती थी। 30 जून को एक बार फिर से बेटी और दामाद से शख्स का झगड़ा हुआ तो बेटी और दामाद के सिर पर खून सवार हो गया। दोनों पिता की लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से पीट-पीटकर हत्या कर दी और शव को उसके काम करने वाली जगह पर फेंक दिया। पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। शव को क्यों नहलाकर फेंका बाहर मामला राजकोट के पडाधरी तालुका का है। यहां के तरघाडी गांव में पिता की हत्या को अंजाम देने के बाद बेटी और दामाद ने इसे दुर्घटना की शक्ल देनी चाही। दोनों ने पहले शव को पानी से नहलाया और शव की साफ-सफाई करने के बाद उसे लेकर एक सूनसान जगह पर पहुंचे। यहां पहुंचने पर दोनों ने शव को सड़क किनारे फेंक दिया और घर वापस चले आए। कैसे खुला मामला शख्स का शव मिलने के बाद पुलिस को पहली ही नजर में शक हो गया कि यह दुर्घटना नहीं है, बल्कि हत्या की गई है। पुलिस ने अपनी लोकल इंटेलिजेंस टीम की सहायता से मामले का खुलासा कर दिया। पुलिस ने पहले बेटे कांति दमोर का पता लगाया और शख्स की तस्वीर दिखाई। बेटे ने पिता को पहचान लिया। बेटे ने बताया कि यह तस्वीर उसके पिता हिम्मत सिंह की है, जो राजकोट में मजदूरी करते हैं और अपने बेटी-दामाद के साथ रहते थे। इसके बाद पुलिस ने बेटी खेता अजनार और दामाद गणपत अजनार को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू कर दी। शुरू में दोनों टालमटोल की लेकिन कड़ाई से पूछताछ करने के बाद दोनों अपना जुर्म कबूल कर लिया। बेटी और दामाद ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि पिता हिम्मतसिंह बार-बार लापरवाही करते थे। इसके बाद उनसे तीखी बहस शुरू हो जाती थी और लड़ाई हो जाती थी। इसके बाद दोनों ने मिलकर लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से पीटा। पिटाई इतनी ज्यादा हुई की हिम्मत सिंह की मौत हो गई। गिरफ्तारी के डर से बेटी और दामानद ने मामले को दुर्घटना की शक्ल देने का पूरा प्रयास किया लेकिन, पुलिस की नजरों से नहीं बच पाए। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।  

तेल डील पर अमेरिका की धमकी! जयशंकर ने दिया कड़ा संदेश: समय आने पर देंगे जवाब

वाशिंगटन भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका द्वारा रूसी तेल के प्रमुख खरीदारों पर 500% टैरिफ लगाने की योजना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भारत उस समय उचित कदम उठाएगा, जब यह सामने आएगा। जयशंकर ने इसे "पुल को पार करने" की तरह बताया, जिसका मतलब है कि भारत इस मामले में तभी कोई ठोस रुख अपनाएगा, जब स्थिति स्पष्ट होगी। जयशंकर अमेरिका के चार दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि भारत ने अमेरिका के उस सांसद के सामने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर कर दी है, जिसने रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 500% शुल्क लगाने वाला विधेयक पेश किया है। जयशंकर ने वाशिंगटन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "ऐसे घटनाक्रम, जो भारत के हित में हों या उस पर प्रभाव डाल सकते हों, हम उन्हें बेहद करीब से ट्रैक करते हैं।" उन्होंने बताया कि भारत सरकार और भारतीय दूतावास अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के संपर्क में हैं। ग्राहम वही सीनेटर हैं, जिन्होंने यह सख्त विधेयक पेश किया है। विधेयक पेश करते समय उन्होंने विशेष रूप से भारत और चीन का नाम लेते हुए आरोप लगाया था कि ये देश मिलकर पुतिन का 70% तेल खरीद रहे हैं। जयशंकर ने कहा, "मुझे लगता है कि हमने अपनी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और हितों को ग्राहम के साथ स्पष्ट रूप से साझा किया है। अब यह देखना होगा कि यह बिल कितना आगे बढ़ता है। जब समय आएगा, तो हम उस पुल को पार करेंगे।" ट्रंप का समर्थन बना नई चुनौती इस विधेयक को और जटिल बना रहा है अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन। राष्ट्रपति ट्रंप इस विधेयक को समर्थन दे चुके हैं। यह विधेयक उन देशों पर 500% आयात शुल्क लगाने की मांग करता है, जो अब भी रूस से व्यापार कर रहे हैं- इनमें भारत और चीन शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधेयक अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वह रूस पर यूक्रेन युद्ध को लेकर बातचीत के लिए दबाव बनाना चाहता है। अगर यह विधेयक पास हो जाता है, तो भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। 500% शुल्क भारतीय व्यापार के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा। व्यापार समझौते की दौड़ इस बीच, भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। इस समझौते का उद्देश्य ट्रंप द्वारा अप्रैल में घोषित 26% जवाबी टैरिफ से बचना है। अगर यह समझौता हो जाता है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिका में बड़ी राहत मिल सकती है। भारत की रूस से बढ़ती तेल खरीद भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद लगातार बढ़ रही है। मई 2025 में यह आयात 1.96 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो पिछले 10 महीनों में सबसे अधिक है। अब स्थिति यह है कि भारत ने पश्चिम एशियाई देशों से ज्यादा तेल रूस से खरीदना शुरू कर दिया है। यह रुझान फरवरी 2022 के बाद से शुरू हुआ, जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया और पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए। इसके बाद रूस ने भारत और चीन जैसे देशों को रियायती दरों पर तेल बेचना शुरू किया, जिसे भारतीय रिफाइनरियों ने हाथों-हाथ लिया। भारत वर्तमान में अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 40-45% हिस्सा कच्चे तेल से पूरा करता है, जिसमें रूस की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।  

हादसे की तह तक जाएगी सरकार: पुरी कांड पर जांच टीम गठित, जनता से सहयोग की अपील

भुवनेश्वर ओडिशा सरकार के योजना और समन्वय विभाग ने 29 जून को पुरी के गुंडिचा मंदिर के पास हुई दुखद घटना पर जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक सार्वजनिक सूचना जारी की है। तीन श्रद्धालुओं की भगदड़ जैसी स्थिति के कारण मौत हो गई थी। इस घटना के बारे में गृह विभाग की अधिसूचना संख्या 1389/सी दिनांक 29 जून, 2025 के अनुसार, सरकार ने इस घटना की जांच कराने का आदेश दिया है। जांच की जिम्मेदारी ओडिशा के विकास आयुक्त और अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंप दी गई है। सरकार ने उन सभी व्यक्तियों या संस्थाओं से अनुरोध किया है, जिनके पास इस घटना से संबंधित कोई जानकारी या प्रमाण (जैसे वीडियो फुटेज) हैं। बता दें, लोग इसे 20 जुलाई, 2025 तक इमेल (पुरीट्रेजडीडॉटइनक्वारीऐटदरेटओडिशाडॉटजीओवीडॉटइन) के जरिए भेज सकते हैं। इसके अलावा, जो लोग व्यक्तिगत रूप से जानकारी देना चाहते हैं, वे निम्नलिखित स्थानों और समय पर विकास आयुक्त और अतिरिक्त मुख्य सचिव से मिल सकते हैं। राज्य अतिथि गृह ऐनिक्स, भुवनेश्वर में 9 जुलाई को 3:00 बजे के बाद मिल सकते हैं। वहीं विशेष सर्किट हाउस, पुरी से 10 जुलाई को 3:00 बजे के बाद मिल सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए, लोग दिए गए फोन नंबरों (0674) 2536882 / 2391970 पर भी संपर्क कर सकते हैं। इस घटना को लेकर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए पुरी के डीसीपी बिष्णु चरण पति और पुलिस कमांडेंट अजय पाधी को निलंबित कर दिया, जबकि कलेक्टर सिद्धार्थ एस स्वैन और एसपी बिनीत अग्रवाल का तबादला कर दिया। बता दें, सरकार इस मामले में पारदर्शिता के साथ जांच कर रही है, ताकि घटना के कारणों का सही रूप से पता चल सके और भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचा जा सके। सरकार ने इस पर जिम्मेदार व्यक्ति/संस्थाओं के खिलाफ उचित कार्रवाई का वादा किया है।  

किश्तवाड़ बना जंग का मैदान! दूसरे दिन भी फायरिंग, सुरक्षाबलों का ऑपरेशन जारी

जम्मू जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ लगातार दूसरे दिन भी जारी है। सुरक्षाबलों ने बुधवार से ही इलाके में आतंकियों को घेर रखा है। गुरुवार को एक बार फिर मुठभेड़ शुरू हुई। दोनों तरफ से रुक-रुककर गोलीबारी हो रही है। सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया रिपोर्ट मिलने के बाद बुधवार शाम को किश्तवाड़ जिले के चटरू इलाके में तलाशी अभियान चलाया। जैसे ही सुरक्षाबल छिपे हुए आतंकवादियों के करीब पहुंचे, उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई के बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। भारतीय सेना की नगरोटा स्थित व्हाइटनाइट कोर ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए बताया, “विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर किश्तवाड़ के कंजल मांडू में एक संयुक्त तलाशी अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान आतंकवादियों की सही जानकारी मिली और मुठभेड़ शुरू हुई।” किश्तवाड़ में मुठभेड़ ऐसे समय हुई है जब अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था पहलगाम और बालटाल स्थित दो आधार शिविरों में पहुंचा। गुरुवार को दूसरा जत्था भी जम्मू के भगवती नगर से अगले पड़ाव के लिए रवाना हुआ। 26 जून को उधमपुर जिले के बसंतगढ़ इलाके में भी मुठभेड़ हुई थी, जिसमें सुरक्षाबलों ने एक आतंकवादी को मार गिराया था। पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हमला किया था और 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या की थी। कथित तौर पर पर्यटकों के धर्म पूछकर उन्हें गोली मारी गई थी। इस बर्बर आतंकी हमले से पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। हालांकि कुछ दिन में ही भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में छिपे आतंकियों के 9 ठिकानों को ध्वस्त करके पहलगाम हमले का बदला लिया। भारत की कार्रवाई से भड़के पाकिस्तान ने सीमा पार से गोलाबारी और मिसाइलें दागनी शुरू की थीं। इन हमलों को भारत ने अपने मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मदद से नाकाम किया था। जवाबी कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान को बड़ा नुकसान भी पहुंचाया था। भारत ने मुरिदके (लाहौर के पास), बहावलपुर, कोटली और पीओके के मुजफ्फराबाद इलाकों में स्ट्राइक कीं, जिससे पाकिस्तान की सरकार घुटनों पर आई। बाद में सहमति के बाद सीजफायर की घोषणा की गई थी।  

36 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों का एक और जत्था आज जम्मू से घाटी के लिए रवाना हुआ

जम्मू 36 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों का एक और जत्था गुरुवार को जम्मू से घाटी के लिए रवाना हुआ। दूसरे जत्थे में 5246 तीर्थयात्री शामिल हैं, जिन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच जम्मू के कैनाल रोड स्थित भगवती नगर से घाटी के लिए भेजा गया। अधिकारियों ने बताया कि इन तीर्थयात्रियों में से 1993 यात्री बालटाल बेस कैंप जा रहे हैं, जबकि 3253 पहलगाम बेस कैंप जा रहे हैं। तीर्थयात्री ‘बम बम भोले’ और ‘हर हर महादेव’ के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। बाबा बर्फानी के दर्शन करने के लिए तीर्थयात्रियों में उत्साह दिखा। उन्होंने सरकार की ओर से मुहैया कराई गई सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं की तारीफ की। तीर्थयात्रियों ने भारतीय सेना पर पूरा भरोसा जताया। श्रद्धालुओं ने कहा कि सेना के जवानों ने हमें बहुत अच्छे से भगवती नगर तक पहुंचाया। केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से जो सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, वो बहुत अच्छी हैं। दूसरे जत्थे में कुछ ऐसे भी तीर्थयात्री हैं, जो पहली बार अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं। उन्होंने भी सुरक्षा के साथ यहां की सुविधाओं की तारीफ की। श्रद्धालुओं ने कहा कि वो बहुत खुश हैं, सरकार ने अच्छी व्यवस्थाएं की हैं। एक श्रद्धालु ने कहा कि वो 2019 से लगातार अमरनाथ यात्रा के लिए यहां आता है। इस बार बहुत अच्छा लग रहा है। सरकार ने अच्छी व्यवस्था की है। एक महिला ने सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां की व्यवस्थाओं को देखकर बहुत खुशी हुई। एक श्रद्धालु ने कहा, “जब संवेदनशील समय था, जब आतंकवादी हमले होते थे, उस समय भी भक्त इस यात्रा के लिए आते थे। अब बिल्कुल निर्भय होकर यहां श्रद्धालु आ रहे हैं।” एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, “पहले और अब की यात्रा में जमीन-आसमान का फर्क है। यहां दो-तीन गुना अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती है। पहले के मुकाबले चार गुना सुख-सुविधाएं यहां देखने को मिल रही हैं।” श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वो सिर्फ सुरक्षा काफिले के साथ ही जम्मू से घाटी की ओर यात्रा करें और अकेले न निकलें। अमरनाथ यात्रा 36 दिनों तक चलेगी और इस बार इसका समापन 9 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के दिन होगा।  

ब्रिटेन के एफ-35 लड़ाकू विमान ने जाने में असफल, बदली रणनीति

तिरुवनंतपुरम  केरल के तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ब्रिटिश रॉयल नेवी के F-35 फाइटर जेट ने 14 जून को इमरजेंसी लैंडिंग की थी और 19 दिन बाद भी इस विमान में आई खराबी को दूर नहीं किया जा सका है. अब सूत्रों से जानकारी सामने आई है कि फाइटर जेट को टुकड़े-टुकड़े करके सैन्य कार्गो विमान के जरिए वापस ब्रिटेन ले जाया जाएगा. दूर नहीं हो पाई विमान में आई खराबी विमान को केरल में ठीक करने की कई कोशिशों के बावजूद, फिफ्थ जेनरेशन का स्टील्थ फाइटर जेट इंजीनियरिंग की खराबी के कारण अभी तक जमीन पर ही खड़ा है. मामले से सूत्रों ने पुष्टि की है कि विमान को फिर से उड़ान भरने के लिए तैयार करने की सभी कोशिश अब तक फेल साबित हुई हैं. ऐसे में विमान को ले जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है.  लगातार हो रही देरी के अलावा, यूनाइटेड किंगडम से कोई भी इंजीनियरिंग टीम अभी तक भारत नहीं पहुंची है. सूत्रों ने बताया कि मरम्मत के लिए तीस इंजीनियरों के एक ग्रुप के तिरुवनंतपुरम पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन वे अभी तक नहीं पहुंचे हैं. अब टुकड़ों में वापस जाएगा जेट विमान की वापसी के लिए कोई डेडलाइन न होने के कारण, ब्रिटिश अधिकारी अब विमान को वापस लाने के लिए वैकल्पिक योजनाओं पर काम कर रहे हैं. विमान को आंशिक रूप से तोड़ना मिलिट्री ट्रांसपोर्ट की ओर से विमान को वापस ले जाने के सबसे बेहतर ऑप्शन के रूप में उभरा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन अब इस फाइटर जेट को C-17 ग्लोबमास्टर विमान में ले जाने पर विचार कर रहा है, जो इस विमान के लिए अलग तरह का कदम होगा. विमान के कलपुर्जों को खोलकर उन्हें ग्लोबमास्टर के जरिए सुरक्षित वापस ले जाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है. एयरपोर्ट पर हुई थी इमरजेंसी लैंडिंग एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा F-35B केरल के तट से 100 समुद्री मील दूर ऑपरेशन कर रहा था, जब खराब मौसम और फ्यूल की कमी के कारण विमान को इमरजेंसी हालात में तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर लैंड कराया गया. भारतीय वायु सेना ने सुरक्षित लैंडिंग में मदद की और फ्यूल भरने और रसद भी पहुंचाई. हालांकि, जब लड़ाकू विमान अपने एयरक्राफ्ट कैरियर पर लौटने की तैयारी कर रहा था, तो टैकऑफ से पहले की जांच के दौरान हाइड्रोलिक फेलियर का पता चला. इस समस्या को गंभीर माना जाता है क्योंकि यह जेट की सुरक्षित रूप से उड़ान भरने और उतरने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. तीन टेक्निशियंस वाली एक छोटी रॉयल नेवी टीम ने खराबी को ठीक करने की कोशिश की, लेकिन समस्या की जटिलता के कारण सफलता नहीं मिली. फाइटर जेट को CISF की सुरक्षा में एयरपोर्ट के बे-4 में पार्क किया गया है. शुरुआत में, रॉयल नेवी ने केरल में मॉनसून की बारिश के बावजूद, जेट को हैंगर में ले जाने के एअर इंडिया के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. बाद में, ब्रिटिश नौसेना ने जेट को हैंगर में ले जाने पर सहमति जताई. पर्यटन के लिए प्रचार का जरिया बना केरल में फंसा अत्याधुनिक ब्रिटिश विमान तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आपात लैंडिंग करने वाला ब्रिटेन की रॉयल नेवी का एफ-35बी लाइटनिंग फाइटर जेट अब अनजाने में ही केरल पर्यटन का प्रचार कर रहा है। यह अत्याधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट फिलहाल तकनीकी खराबी के कारण इस हवाई अड्डे पर खड़ा है और मरम्मत का इंतजार कर रहा है। लेकिन अब यह सैन्य मामला सिर्फ एयरबेस या सेना तक सीमित नहीं रह गया। अब इसे यात्रा और पर्यटन की दुनिया में एक रचनात्मक अंदाज में देखा जा रहा है।  केरल टूरिज्म का पोस्टर हो रहा वायरल केरल टूरिज्म के 'एक्स' हैंडल पर एक नया पोस्टर वायरल हो रहा है, जिसमें फाइडर जेट को केरल के नारियल के पेड़ों और हरे-भरे खूबसूरत बैकड्रॉप के सामने दिखाया गया है। पोस्टर में मजेदार अंदाज में लिखा है, 'केरल इतनी कमाल की जगह है कि अब यहां जाने का मन ही नहीं करता। जरूर सिफारिश करूंगा।' इसे मजाक में 'यूके एफ-35बी' का बयान बताया गया है। ऑनलाइन चर्चा सिर्फ इस पोस्टर तक सीमित नहीं रही।       एक्स यूजर्स ने दी ऐसी प्रतिक्रिया एक यूजर सुमोना चक्रवर्ती ने अपने पोस्ट में मजाकिया अंदाज में लिखा, 'अब ये नारियल तेल के बिना स्टार्ट ही नहीं होता।' यह केरल में नारियल तेल के इस्तेमाल पर एक हल्का-फुल्का तंज था। एक अन्य यूजर ‘द छागलतोका’ ने तो अपनी कल्पना और आगे बढ़ा दी। उन्होंने एक पोस्टर बनाया जिसमें वही लड़ाकू विमान एक सड़क किनारे चाय की दुकान के सामने खड़ा दिखाया गया और कैप्शन था- अब तो ये छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा। भाई को यहां शांति, ताड़ी और केले के चिप्स मिल गए।  मरम्मत का इंतजार कर रहा जेट ये एफ-35बी जेट दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है। इसकी कीमत 110 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा है। इस जेट ने 14 जून को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर आपात लैंडिंग की थी। जेट फिलहाल वहीं खड़ा है और तकनीकी खराबी के कारण उड़ान नहीं भर पा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ब्रिटेन से एविएशन इंजीनियर तिरुवनंतपुरम पहुंचेंगे और जेट की मरम्मत करेंगे।   

भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर का क्रेडिट ट्रंप कई बार खुद को दे चुके, सीजफायर की बात भारत-पाक के DGMO… एस जयशंकर

 नई दिल्ली / वाशिंगटन पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जारी है। इस दौरान भारत के एक्शन से बौखलाए पाकिस्तान ने जहर उगलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस बीच भारत में खून की नदियां बहाने की गिदड़भभकियां देने वाले पाक के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने अब यू टर्न ले लिया है। उन्होंने बुधवार को भारत से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने की मांग की है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करता रहा है, लेकिन वह हर बार इससे पल्ला झाड़ लेता था। बिलावल भुट्टो के भारत को लेकर बदले सुर दरअसल, इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बिलावल भुट्टो ने कहा कि हम आतंकवाद से लड़ने के लिए भारत के साथ ऐतिहासिक और अभूतपूर्व साझेदारी बनाने के लिए तैयार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत-पाकिस्तान एक दूसरे के विरोधी नहीं है। बिलावल भुट्टो ने आगे कहा कि भारत और पाकिस्तान को पड़ोसी बनकर रहना चाहिए और लोगों को आतंकियों से बचाने के लिए आगे आना चाहिए। सिंधु जल संधि के सस्पेंड होने से बिलावट भुट्टो ने भारत के खिलाफ कई बार कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था, लेकिन अब वे सभी लंबित विवादों के सामाधान के लिए भारत के सामने हाथ जोड़ रहे हैं।  इसके साथ ही भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को खारिज किया है कि अमेरिका ने ट्रेड का हवाला देकर दोनों देशों के बीच युद्धविराम करवाया है. हालांकि भारत की ओर से लगातार कहे जाने के बावजूद ट्रंप इस युद्धविराम का क्रेडिट लेने के मोह को छोड़ नहीं पा रहे हैं. ट्रंप को जहां भी मौका मिलता है वो इस बात को जरूर कहते हैं कि उन्होंने भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम करवाकर परमाणु संपन्न दो पड़ोसियों के बीच युद्ध रुकवा दिया है. ट्रंप इस बात को कई बार दोहरा चुके हैं.  वाशिंगटन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा ने विदेश मंत्री से पूछा कि जब ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर का ऐलान किया तो आपकी क्या प्रतिक्रिया थी, पीएमओ में क्या चल रहा था.क्या आपने अपनी असहमति की जाहिर करने के लिए तुरंत अमेरिकी प्रशासन से संपर्क किया? और इस पर व्हाइट हाउस का क्या कहना था? इसके अलावा विदेश मंत्री से यह भी पूछा गया कि क्या अमेरिका-भारत के संबंधों को निर्धारित करने में अब भी पाकिस्तान की कोई भूमिका है, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद? इस प्रश्न के जवाब में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि, "देखिए, आज भी भारत-अमेरिका के संबंधों में भारत-अमेरिका ही सेंट्रल फैक्टर हैं. हम एक बड़े देश हैं, हम दुनिया पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से हैं. हमारी जनसंख्या सबसे अधिक है. हमारा प्रभाव बढ़ रहा है. हमारे अंदर ये आत्म विश्वास होना चाहिए. और ये प्रश्न पूछने के दौरान भी झलकना चाहिए." सीजफायर के सवाल पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि, "उस समय क्या हुआ इसके रिकॉर्ड बहुत स्पष्ट हैं, सीजफायर को दो देशों के डीजीएमओ द्वारा तय किया गया था. इसलिए इसको मैं यहीं छोड़ता हूं." आतंकवाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये एक फैक्ट है कि कई देश आतंकवाद पर वो नजरिया नहीं रखते हैं जब इसका शिकार कोई दूसरा देश होता है, लेकिन अगर इस आतंकवाद का शिकार वे स्वयं होते हैं तो उनका नजरिया और स्टैंड अलग होता है.  बता दें कि भारत ने कई मौकों पर इस बात पर जोर दिया है कि हाल के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ लड़ाई को बंद करवाने में  न तो अमेरिका और न ही किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका थी. नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि भारत द्वारा 9-10 मई को पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हमला किए जाने के बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ के समक्ष युद्धविराम की पेशकश की थी. इसके बाद ही दोनों देश लड़ाई बंद करने पर सहमत हुए. 18 जून को जब पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 35 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई थी तो इस बातचीत की जानकारी देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी यही बात कही थी.  उन्होंने पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुए बातचीत के बारे में देश को जानकारी देते हुए कहा था कि, 'इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी भी स्तर पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते या भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका द्वारा मध्यस्थता के किसी प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं हुई, सैन्य कार्रवाई रोकने पर चर्चा भारत और पाकिस्तान के बीच दोनों सशस्त्र बलों के बीच संचार के मौजूदा चैनलों के माध्यम से सीधे हुई और इसकी पहल पाकिस्तान के अनुरोध पर की गई थी." इस दौरान भारत ने यह भी कहा कि भारत-पाकिस्तान के किसी भी मुद्दे पर इंडिया कभी भी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा.  

महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि दिशा सालियान की मौत में किसी भी तरह के संदेह की कोई गुंजाइश नहीं

मुंबई   महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि दिशा सालियान (28) की मौत में किसी भी तरह के संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है। दिशा, जो दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं, 9 जून, 2020 को मलाड की एक इमारत की 12वीं मंजिल से कथित तौर पर कूद गई थीं। सरकार की हाई कोर्ट दी गई इस रिपोर्ट में आदित्य ठाकरे का भी जिक्र किया गया है। कहा गया है कि उन्हें बेवजह बदनाम किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका का विरोध किया। सतीश सालियान अपनी बेटी के लिए न्याय चाहते हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी के साथ बर्बरतापूर्ण बलात्कार, हत्या की गई और इसे राजनीतिक रूप से दबाने की कोशिश की गई। दिशा सालियान के पिता ने की थी याचिका दिशा सालियान के पिता ने मांग की कि मामले की जांच शहर की पुलिस की SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) से CBI को सौंपी जाए। साथ ही, शिवसेना (UBT) के MLA आदित्य ठाकरे के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। मुंबई पुलिस का क्या दावा राज्य सरकार की ओर से मालवणी पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर शैलेन्द्र नागरकर ने जवाब दाखिल किया। उन्होंने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप आधारहीन और निराधार हैं। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है। नहीं मिला कोई सीमन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन और या शारीरिक हमले के कोई संकेत नहीं मिले। जांच में न ही सीमन या योनि में कोई जख्म पाया गया। जवाब में दिशा के बॉयफ्रेंड रोहन रॉय के फ्लैट से गिरने की परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताया गया है। उस रात दोस्तों के साथ पार्टी चल रही थी। दिशा सालियान की फ्रेंड्स ने क्या कहा राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि दिशा सालियान के पिता ने उनकी मौत के बारे में जो आरोप लगाए हैं, वे आधारहीन और निराधार हैं। उन्होंने शहर की पुलिस SIT से जांच CBI को ट्रांसफर करने की मांग की है। दिशा की सहेलियों ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ विवाद और अपने बिजनेस डील पूरी नहीं होने के कारण मानसिक तनाव में थी। बहुत नशे में थी दिशा सालियान दिशा की फ्रेंड्स ने कहा कि अपनी मौत से पहले वह बहुत ज्यादा नशे में थी। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी ने भी इसकी पुष्टि की है। जवाब में कहा गया है कि उस रात मौजूद सभी दोस्तों के बयान एक जैसे हैं। जवाब में कहा गया है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए, दिशा ने अपनी मर्जी से खिड़की से छलांग लगा दी…. और आत्महत्या कर ली। सीसीटीवी फुटेज में भी कुछ नहीं मिला राज्य सरकार ने यह भी कहा कि रोहन रॉय ने भी कहा कि पूरी घटना में कोई अन्य स्पष्ट गड़बड़ी और/या संदेह नहीं था। चार स्वतंत्र गवाहों ने दिशा के गिरने की आवाज सुनी और उसे घायल अवस्था में देखा। उसने गोल गले की टी-शर्ट और क्रीम कलर की फुल पैंट पहनी हुई थी। उसके दोस्त उसे अस्पताल ले गए। इमारत के सभी छह CCTV कैमरों में कोई भी आपत्तिजनक या संदिग्ध गतिविधि नहीं देखी गई। जवाब में कहा गया है कि SIT की जांच के नतीजे पहले के जांच अधिकारी के निष्कर्षों के साथ मेल खाते हैं। SIT आगे की जांच कर रही है। जवाब में यह भी बताया गया है कि पिता ने कई रिकॉर्डेड बयानों में या उनकी पत्नी वासंती ने, जिनका बयान एक मजिस्ट्रेट ने दर्ज किया था, अपनी बेटी की मौत के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया और न ही किसी पर संदेह जताया। उन्होंने जांच पर भी अविश्वास नहीं जताया। आदित्य ठाकरे को बताया निर्दोष आदित्य ठाकरे ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर मामले में सुनवाई करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि आदेशों से उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि वह महाराष्ट्र के एक बहुत ही प्रतिष्ठित परिवार से हैं और उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को बदनाम करने की कोशिशें की जा रही हैं। बुधवार को हाई कोर्ट ने सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। क्या है दिशा सालियान केस यह मामला 2020 का है, जब दिशा सालियान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। तब से, इस मामले में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह आत्महत्या थी, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि यह हत्या थी। अब, बॉम्बे हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है। देखना यह है कि कोर्ट इस मामले में क्या फैसला सुनाता है।

स्टंट करने के दौरान जो लोग अपनी ही गलती से जान गंवाते हैं, उन लोगों को मुआवजा देने के लिए बीमा कंपनी बाध्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली रफ्तार के शौकीनों और लापरवाही से गाड़ी चलाने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत का कहना है कि स्टंट करने के दौरान जो लोग अपनी ही गलती से जान गंवाते हैं, उन लोगों को मुआवजा देने के लिए बीमा कंपनी बाध्य नहीं है। एक शख्स की मौत के बाद अदालत पहुंचे उसके माता पिता को अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया। 18 जून, 2014 को एनएस रविश मल्लासांद्रा गांव से अरासिकरे के बीच फिएट लीनिया से यात्रा कर रहे थे। उस दौरान कार में उनके पिता, बहन और बच्चे बैठे हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविश बहुत लापरवाही से तेज रफ्तार में गाड़ी चला रहे थे और मैलानाहल्लीके पास गाड़ी का नियंत्रण खोने से पहले उन्होंने ट्रैफिक नियम तोड़े थे। यात्रा के दौरान गाड़ी रोड पर पलट गई। उस हादसे में रविश की मौत हो गई। उनकी पत्नी, बेटा और माता-पिता 80 लाख रुपये के मुआवजे की मांग कर रहे थे। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और दावा किया कि रविश के लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण हादसा हुआ। मोटर एक्सीडेंटल ट्रिब्युनल ने उनका दावा खारिज कर दिया था। बाद में वह कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचे और दावा किया कि टायर फटने के कारण हादसा हुआ। कोर्ट ने कहा, 'जब मृतक के कानूनी प्रतिनिधि की तरफ से दावा किया जाता है, तो यह साबित किया जाना जरूरी है कि मृतक लापरवाही से गाड़ी चलाने के लिए खुद जिम्मेदार तो नहीं है। साथ ही यह भी साबित किया जाना जरूरी है कि मृतक पॉलिसी में कवर हो ताकि बीमा कंपनी कानूनी हकदारों को भुगतान करें।' कोर्ट ने कहा, 'इस मामले में दुर्घटना तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुई और वह खुद को नुकसान पहुंचाने वाला व्यक्ति है। उसके कानूनी उत्तराधिकारी मुआवजे के लिए दावा नहीं कर सकते।' सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने जान गंवाने वाले परिवार को रहत नहीं दी। बेंच ने कहा कि परिवार बीमा कंपनी से भुगतान की उस स्थिति में मांग नहीं कर सकते, जब हादसा बगैर किसी बाहरी वजह के जान गंवाने वाले की गलती से ही हुआ हो।

पांच दशक की सबसे भयानक गिरावट डॉलर में आई- भारत और दुनिया पर क्या होगा असर

वाशिंगटन दुनिया की सबसे शक्तिशाली करेंसी यूएस डॉलर जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के पदभार ग्रहण करने के बाद से लगातार गिरावट पर है। इस पांच दशकों में सबसे खराब प्रदर्शन है। 2025 की पहली छमाही में इसमें लगभग 11% की गिरावट आई, जो 1973 के बाद से सबसे तेज छमाही गिरावट है और अपने 52-सप्ताह के उच्च स्तर से 13% नीचे है। डॉलर की गिरावट के 3 मुख्य कारण 1. अप्रत्याशित आर्थिक नीतियां ब्लूमबर्ग के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर (जैसे "लिबरेशन डे" टैरिफ) और फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता पर हमलों ने डॉलर की "सुरक्षित हेवन" छवि को क्षति पहुंचाई है। विदेशी निवेशकों ने अमेरिकी परिसंपत्तियों की बिकवाली तेज कर दी, जिससे डॉलर इंडेक्स में पहले छह महीनों में 10.8% की गिरावट आई। बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट के तहत टैक्स कट का विस्तार, स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाओं में कटौती, और कर्ज में $3.3 ट्रिलियन की वृद्धि से राजकोषीय घाटा बढ़ने की आशंका। अमेरिकी कर्ज का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुपात 124% से बढ़कर 2034 तक 134-156% हो सकता है। 2. रेटिंग डाउनग्रेड और निवेशकों का विश्वास घटा मई 2025 में मूडीज ने अमेरिकी सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को Aa1 कर दिया, जिसका कारण ब्याज भार बढ़ना और लगातार घाटा बने रहना बताया गया। विदेशी निवेशकों ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड और इक्विटी में अपनी पोजीशन कम करना शुरू कर दिया। विदेशी निवेशकों के पास अमेरिकी परिसंपत्तियों में $31 ट्रिलियन (इक्विटी: $19 ट्रिलियन, ट्रेजरी: $7 ट्रिलियन, कॉरपोरेट बॉन्ड: $5ट्रिलियन ) का जोखिम है, जिसमें कटौती से डॉलर पर दबाव बढ़ा। 3. ब्याज दरों में कटौती की अटकलें फेड द्वारा 2025 के अंत तक दो से तीन बार ब्याज दरें कम करने की संभावना से डॉलर का आकर्षण कम हुआ है। प्रशासन का दबाव है कि अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए दरें तेजी से घटाई जाएं। डॉलर के कमजोर होने से आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर गोल्ड : केडिया कमोडिटिज के प्रेसीडेंट अजय केडिया के मुताबिक डॉलर में गिरावट और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण केंद्रीय बैंक सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं। 2025 में सोना रिकॉर्ड ऊंचाई ($3,345/औंस) पर पहुंच गया है । वहीं, अमेरिकी टैरिफ की आशंका से व्यापारियों ने सोना स्विट्जरलैंड से अमेरिका (COMEX) स्थानांतरित किया, जिससे COMEX इन्वेंटरी 300 टन, जो कोविड के बाद सर्वोच्च स्तर है, तक पहुंच गई। दूसरी ओर लंदन में सोने की उपलब्धता कम होने से गोल्ड लीज रेट जनवरी 2025 में 5% तक पहुंच गया, हालांकि अब यह घटकर 1% रह गया है। भारत जैसे देशों के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा मई 2025 तक 60.66 अरब डॉलर हो गया, जो एक सप्ताह में $0.48 बिलियन की वृद्धि दर्शाता है। आरबीआई की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था में 1% की गिरावट भारत की विकास दर को 0.3% कम कर सकती है। कच्चा तेल अगर डॉलर कमजोर होता है और रुपया इसके मुकाबले मजबूत है तो इस क्षेत्र को राहत मिलेगी, क्योंकि यह आयात किया जाता है। कच्चे तेल का आयात बिल में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा कम खर्च करना होगा। कैपिटल गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक सामान सस्ते होंगे डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती से इस सेक्टर को भी राहत मिलेगी, क्योंकि रुपये की मजबूती से भारत में सस्ते कैपिटल गुड्स मिलेंगे। रुपये मजबूत हो तो इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र को भी लाभ हासिल होगा, क्योंकि सस्ते इलेक्ट्रॉनिक गु्ड्स आयात किए जा सकेंगे। रुपये की मजबूती का सकारात्मक असर जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर पर दिखाई देगा। इससे यह सस्ता होगा और आयात पर भी इसका असर आएगा। फर्टिलाइजर्स की कीमत घटेगी भारत बड़ी मात्रा में जरूरी खाद और रसायन का आयत करता है। रुपये की मजबूती से यह भी सस्ता होगा। आयात करने वालों को यह कम दाम में ज्यादा मिलेगा। इससे इस क्षेत्र को सीधा फायदा होगा। साथ ही किसानों को भी लाभ होगा,उनकी लागत घटेगी जिससे आय बढ़ेगी। सोना वर्सेज डॉलर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ, देश में डेफिसिट स्पेंडिंग के संकट और फेड पर ब्याज में कटौती के दबाव से निवेशकों का डॉलर से मोहभंग हुआ है। यही वजह है कि यूएस डॉलर बियर मार्केट टेरिटरी के करीब पहुंच गया है। हाल के वर्षों में कई देशों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी कम की है और सोने की हिस्सेदारी बढ़ाई है। ग्लोबल रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी 2025 की दूसरी तिमाही में 23% पहुंच गई जो 30 साल में सबसे ज्यादा है। पिछले छह साल में ग्लोबल रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी दोगुनी हो चुकी है। चीन, तुर्की, भारत और पोलैंड समेत दुनिया के कई देशों के सेंट्रल बैंक तेजी से अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। चीन के केंद्रीय बैंक ने मई में लगातार सातवें महीने सोने की खरीदारी की। इतना ही नहीं, चीन अपने नागरिकों को भी सोने की होल्डिंग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। साल की दूसरी तिमाही में ग्लोबल रिजर्व में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी 10 परसेंटेज पॉइंट घटकर 44 फीसदी रह गई है जो 1993 के बाद सबसे कम है। रुपये की मजबूती से इन क्षेत्रों को झटका आईटी सेक्टर: रुपये की मजबूती से इस सेक्टर पर प्रतिकूल असर आएगा। कंपनियों को मिलने वाले काम पर आय कम होगी जिससे उनको नुकसान होगा। दवा निर्यात: रुपया मजबूत होने से इस सेक्टर का निर्यात भी घटेगा। हालांकि, भारत बड़ी मात्रा में दवा और उसका कच्चा माल आायत करता है जिसमें उसे थोड़ी राहत मिलगी। कपड़ा क्षेत्र को घाटा: रुपया मजबूत होता है तो इस सेक्टर को निर्यात में काफी नुकसान होता है। टेक्सटाइल निर्यात में भारत वैश्विक रैकिंग में फिलहाल दूसरे स्थान पर मौजूद है। अगर रुपया मजबूत हुआ तो इस सेक्टर को भी काफी नुकसान होगा। पढ़ाई महंगी होगी: रुपया मजबूत होने से विदेशी में पढ़ाई करना महंगा हो जाएगा। साथ ही विदेश यात्रा भी महंगी हो जाएगी।