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MP में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को नया जीवन! इन शहरों में सबसे पहले चलेंगी सरकारी बसें

भोपाल  मध्य प्रदेश में सरकारी बस सेवा शुरू करने के लिए सरकार ने कदम बढ़ा दिए। प्रदेश के अंदर और दूसरे राज्यों तक सरकारी बसों को दौड़ाने के लिए सरकार ने कंपनियों के गठन का अहम चरण पूरा कर लिया। मप्र यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड नाम से राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी बनाई है। इसकी 7 सहायक कंपनियों का भी पुनर्गठन किया। ये वे कंपनियां हैं, जो अभी भोपाल, इंदौर, उज्जैन (Ujjain), जबलपुर, सागर, रीवा और ग्वालियर में सिटी बस कंपनी के तौर पर काम कर रही है। इनके शेयर होल्डिंग में बदलाव किया गया है। सबसे पहले इंदौर और उज्जैन संभाग में शुरू होगी सरकारी लोक परिवहन सेवा सरकारी लोक परिवहन सेवा सबसे पहले इंदौर (Indore)-उज्जैन संभाग में शुरू होगी। यहां रूट के निर्धारण व ट्रैफिक दबाव संबंधी सर्वे लगभग अंतिम दौर (Survey Complete) में है। वहीं, जबलपुर-सागर संभाग में भी सर्वे शुरू हो गया है। अगले चरण में भोपाल, नर्मदापुरम, रीवा, शहडोल, ग्वालियर, चंबल संभाग में मार्ग निर्धारण सर्वे होंगे। बता दें, अप्रेल में सीएम ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना को मंजूरी दी थी। सीएम अध्यक्ष, परिवहन मंत्री और सीएस उपाध्यक्ष प्रदेशस्तरीय होल्डिंग कंपनी के अध्यक्ष मुख्यमंत्री, उपाध्यक्ष परिवहन मंत्री और मुख्य सचिव होेंगे। कंपनियों में आइएएस स्तर के अफसर सीईओ होंगे। ये कंपनियां परिवहन विभाग के अधीन होंगी। हर जिले में दफ्तर होंगे। मॉडर्न बस स्टैंड, क्विक रिस्पांस पोर्टल, कैशलैस किराया सिस्टम होगा।

केन्द्रीय मंत्री शिवराज ने जाना बाढ़ पीड़ितों का हाल, मूंग खरीदी केंद्र पर मारी अचानक दस्तक

रायसेन  केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान  दिन अपने संसदीय क्षेत्र रायसेन पहुंचे। उन्होंने जिले के सिलवानी तहसील में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण किया गया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ से फसलों, मकानों आदि को हुई क्षति का जायजा लिया। साथ ही पीड़ितों से मिलकर उनका दुख-दर्द साझा किया। केन्द्रीय मंत्री चौहान ने बाढ़ प्रभावितों से कहा कि यह दुख, तकलीफ की घड़ी है। माताएं-बहनें, किसान आंखों में आंसू मत लाना, मुसीबत की इस घड़ी से सरकार बाहर निकालेगी। केन्द्र और प्रदेश सरकार बाढ़ प्रभावितों के साथ है उनकी हर संभव मदद करेगी। उन्होंने कहा कि वह किसान हैं और किसानों के दर्द को भली-भांति जानते हैं। किसानों की सेवा भगवान की पूजा चौहान ने कहा कि किसानों की सेवा उनके लिए भगवान की पूजा है। बाढ़ से हुई क्षति का सर्वे कर आंकलन किया जाएगा और सर्वे पूरा होने पर सूची पंचायत में लगाई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सर्वे कार्य ईमानदारी से किया जाए। साथ ही राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। केन्द्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि क्षेत्र में खाद की शिकायत प्राप्त होने पर अकेले सिलवानी के लिए 600 मीट्रिक टन खाद का आवंटन कराया है। इससे जरूरत हो वहां किसानों को सरलता से खाद मिले। साथ ही पूरे रायसेन जिले के लिए 2500 मीट्रिक टन खाद का आवंटन कराया गया है। जिले में कहीं भी नकली खाद बेची जाती है तो दोषियों को जेल भेजा जाएगा। मूंग खरीदी में किसानों को ना हो परेशानी शिवराज सिंह ने कहा कि भारत सरकार समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदी की जा रही है। उपार्जन केन्द्रों पर केवल किसानों की मूंग ही खरीदी जाए। कुछ जगह सर्वेयर की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, इसकी जांच कराई जाएगी। मूंग उपार्जन कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ निर्धारित मापदण्ड के अनुरूप कराया जाए। इस दौरान पूर्व केबीनेट मंत्री रामपाल सिंह, स्थानीय जनप्रतिनिधि, राकेश शर्मा और अधिकारी भी उपस्थित रहे। बम्होरी में मूंग उपार्जन केन्द्र का किया निरीक्षण केन्द्रीय मंत्री चौहान ने बम्होरी में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी केन्द्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने यहां मूंग विक्रय हेतु आए किसानों से संवाद कर व्यवस्थाओं तथा उपार्जन कार्य की जानकारी ली। केन्द्रीय मंत्री ने केन्द्र प्रभारी और अधिकारियों को हिदायत देते हुए कहा कि मूंग उपार्जन कार्य पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता से हो। किसानों को मूंग विक्रय के लिए अधिक इंतजार ना करना पड़े। मूंग उपार्जन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता मिलने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बागेश्वर सरकार पर टिप्पणी कर घिरे प्रोफेसर, धार्मिक भावनाएं आहत करने पर FIR

छतरपुर  बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर महिला तस्कर कहने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रविकांत के खिलाफ छतरपुर के बमीठा थाना में FIR दर्ज की गई है।   सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व ट्विटर) पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रविकांत के खिलाफ छतरपुर जिले के बमीठा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला तब शुरू हुआ जब पुलिस ने छतरपुर में एक एम्बुलेंस को रोका, जिसमें कुछ महिलाएं सवार थीं। पूछताछ में सामने आया कि ये महिलाएं अपनी असली पहचान छिपाकर बागेश्वर धाम में रह रही थीं और उन पर अनैतिक गतिविधियों में शामिल होने का संदेह जताया गया। इस घटना से जुड़े वीडियो को प्रोफेसर रविकांत ने सोशल मीडिया पर साझा करते हुए एक विवादास्पद पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, "नॉन बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित छोटा भाई धीरेन्द्र शास्त्री धर्म की आड़ में महिला तस्करी कर रहा है!" इस टिप्पणी में उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को "महिला तस्कर" कहा, जिससे विवाद खड़ा हो गया। प्रोफेसर की इस पोस्ट के विरोध में बागेश्वर धाम सेवा समिति के सदस्य धीरेंद्र कुमार गौर ने बमीठा थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया है कि प्रोफेसर रविकांत की टिप्पणी से हिंदू धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और धार्मिक सौहार्द बिगड़ा है। इसी आधार पर उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 353(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सोशल मीडिया पोस्ट को साक्ष्य के रूप में संकलित किया जा रहा है।  विदेश यात्रा से लौटे बागेश्वर महाराज  बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर बागेश्वर सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपनी 20 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय यात्रा से लौटकर आज सुबह बागेश्वर धाम पहुंचे। उनकी इस धार्मिक यात्रा में लंदन, ओमान और दुबई में कथा और आशीर्वचन कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। बागेश्वर धाम प्रशासन के अनुसार, बागेश्वर महाराज 4 अगस्त से 11 अगस्त तक धाम परिसर में दिव्य दरबार का आयोजन करेंगे, जिसमें बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होंगे। बागेश्वर महाराज ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' और अन्य माध्यमों से एक वीडियो साझा कर इस दिव्य दरबार की जानकारी पहले ही अपने अनुयायियों को दी थी। दिव्य दरबार के दौरान श्रद्धालुओं को आशीर्वचन, समाधान और परामर्श प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। धाम प्रशासन ने आयोजन की तैयारियां तेज कर दी हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। आयोजकों का अनुमान है कि प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बागेश्वर धाम पहुंच सकते हैं।  

एमपी में मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार, 76% बारिश पूरी – इंदौर सबसे पीछे, ग्वालियर आगे

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक बार फिर से बारिश का दौर शुरू हो गया है। राज्य के उत्तरी हिस्से के ग्वालियर-छतरपुर समेत आठ जिलों में सोमवार को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में रविवार को बारिश भी हुई। हालांकि राज्य में बारिश का मजबूत तंत्र नहीं दिखाई दे रहा है, जिसके चलते बीते कुछ दिनों से राज्य में हल्की-फुल्की बारिश देखने को मिली। मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से के ऊपर से एक ट्रफ और साइक्लोनिक सकुर्लेशन की एक्टिविटी जारी है। इसका असर राज्य में भी देखने को मिल रहा है। इस वजह से सोमवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग द्वारा कल जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाओं के चलने की भी आशंका जताई गई है। बीते दिनों की बात करें को गुना, नर्मदापुरम, छतरपुर, रीवा, टीकमगढ़ , सागर, सतना, सीधी, उमरिया समेत कई जिलों में बारिश हुई थी। इससे पहले की बात करें तो बीते सप्ताह तो राज्य में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। ऐसी स्थिति वाले इलाकों में राज्य का पूर्वी हिस्सा- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर शामिल था, जहां मॉनसून झमझमाकर बरसा था। इसके चलते लोगों को कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा था। बीते दिन सबसे ज्यादा तापमान इन हिस्सों में दर्ज किया गया। ग्वालियर में 27 डिग्री, दतिया में 26.4, पृथ्वीपुर में 26.3, मुरैना में 26.2, श्योपुर में 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं अगर कम तापमान वाले इलाकों की बात करें तो, नरसिंहपुर में 19, खरगौन में 20, राजगढ़ में 20.6 और खंडवा में 21 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है। मध्यप्रदेश में कोटे की 76% बारिश मध्यप्रदेश के 9 जिले-ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और मुरैना में बारिश का कोटा पूरा हो गया है। सबसे ज्यादा पानी गुना में 45.8 इंच गिरा है। भोपाल, जबलपुर की तस्वीर भी बेहतर है, लेकिन इंदौर फिसड्‌डी है। प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 28.4 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 19 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 9.4 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मानसून सीजन (1 जून) से जोड़े तो दो महीने बीत चुके हैं। इस दौरान प्रदेश में सामान्य की 76 प्रतिशत बारिश हो गई है। मानसून को अभी करीब दो महीने बचे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि अगस्त में ही बारिश का कोटा फुल हो जाएगा। बता दें कि मौसम विभाग ने अबकी बार सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। ग्वालियर, चंबल-सागर सबसे बेहतर एमपी में जब से मानसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हो रही है। यहां बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। इसके अलावा ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। इस वजह से 9 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर गया। इनमें ग्वालियर-चंबल संभाग के 8 में से 6 जिलों में कोटा पूरा हो चुका है। 3 जिले सागर और भोपाल संभाग के है। दूसरी ओर, इंदौर और उज्जैन संभाग में सिस्टम की एक्टिविटी कम देखने को मिलीं।  पिछले सप्ताह बने थे बाढ़ के हालात पिछले सप्ताह प्रदेश में बाढ़ के हालात बने। खासकर पूर्वी हिस्से यानी- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। रायसेन में बेतवा ने विकराल रूप लिया। खेत-मंदिर और पुल डूब गए। दो दिन से बारिश थमी रही, लेकिन नर्मदा नदी उफान पर है। वहीं, डैम ओवरफ्लो है। इनके गेट खोले गए। एमपी में अब तक 28 इंच से ज्यादा बारिश मध्यप्रदेश के ग्वालियर, राजगढ़, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मुरैना और श्योपुर में बारिश का कोटा पूरा हो गया है। यहां सामान्य से 50% तक ज्यादा पानी गिर चुका है। गुना, टीकमगढ़-निवाड़ी में सबसे ज्यादा बारिश हुई है, जबकि इंदौर में सबसे कम पानी गिरा है। उज्जैन संभाग की तस्वीर भी ठीक नहीं है। वहीं, भोपाल और जबलपुर में सीजन की आधी बारिश हुई है। प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 28.4 इंच बारिश हो चुकी है, जबकि 19 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 9.4 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मानसून सीजन (1 जून) से जोड़े को दो महीने बीत चुके हैं। इस दौरान प्रदेश में सामान्य की 76 प्रतिशत बारिश हो गई है। गुना में सबसे ज्यादा 42 इंच पानी गिरा इस बार सबसे ज्यादा पानी गुना में गिरा है। यहां 45.8 इंच बारिश हो चुकी है। मंडला में 44 इंच, टीकमगढ़ में करीब 44 इंच निवाड़ी में 43 इंच और अशोकनगर में 42 इंच के करीब बारिश हो चुकी है। इन जिलों की अच्छी-बुरी स्थिति विदिशा, जबलपुर, नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडौरी, सागर, पन्ना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, नर्मदापुरम और उमरिया में 30 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इंदौर में सबसे कम 11 इंच, बुरहानपुर में 11.1 इंच, बड़वानी में 11.5 इंच, खरगोन में 11.8 इंच ओर खंडवा में 12.8 इंच पानी ही गिरा है। ऐसे समझें बारिश का गणित… 40 इंच से ज्यादा बारिश वाले जिले     मंडला, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और रायसेन। 30 इंच से ज्यादा बारिश वाले जिले     ग्वालियर, विदिशा, जबलपुर, नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडौरी, सागर, पन्ना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, नर्मदापुरम और उमरिया। 20 से 30 इंच तक बारिश वाले जिले     भोपाल, सीहोर, झाबुआ, अलीराजपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, दतिया, दमोह, शाजापुर, नीमच, भिंड, मुरैना, रीवा, सतना, मैहर, मऊगंज, हरदा, बैतूल, शहडोल और अनूपपुर। 10 से 19 इंच बारिश वाले जिले     इंदौर, धार, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, देवास, शाजापुर, मंदसौर, आगर-मालवा।

रेल नेटवर्क का मेगा प्रोजेक्ट: इटारसी से नागपुर के बीच 37 स्टेशन और 415 पुल के साथ नई लाइन

इटारसी रेल मंत्रालय ने देश के सबसे व्यस्त रेल गलियारों में से एक इटारसी से नागपुर के बीच चौथी रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी दी है। यह परियोजना 297 किलोमीटर लंबी होगी और इसकी अनुमानित लागत 5,451 करोड़ बताई गई है। यह रेल मार्ग दिल्लीचेन्नई हाई डेंसिटी नेटवर्क का हिस्सा होगा और नागपुर में मुंबई-हावड़ा हाई डेंसिटी नेटवर्क से भी जुड़ेगा। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य रेलवे की क्षमता बढ़ाना, यात्री और मालगाड़ियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना तथा देश की लॉजिस्टिक संरचना को और मजबूत बनाना है। किन क्षेत्रों को होगा लाभ इस परियोजना से मुख्य रूप से 2 राज्यों को सीधा लाभ मिलेगा। इनमें महाराष्ट्र का नागपुर जिला, मध्य प्रदेश का नर्मदापुरम (होशंगाबाद), बैतूल और पांढुरना शामिल है। उल्लेखनीय है कि ये सभी इलाके औद्योगिक और कृषि दोनों दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं। रेल लाइन का विस्तार इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास को रफ्तार देगा। वर्तमान रेल परिचालन चुनौतियों का समाधान इटारसी-नागपुर चौथी रेल लाइन परियोजना न केवल रेलवे की वर्तमान चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करती है बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर एक मजबूत और टिकाऊ आधार भी तैयार करती है। इससे यात्री सुविधा, औद्योगिक विकास, धार्मिक पर्यटन और आर्थिक समृद्धि को एक साथ बढ़ावा मिलेगा। परियोजना की ये हैं मुख्य विशेषताएं -कुल 297 किमी की दूरी और 339 किमी ट्रैक लंबाई। -37 स्टेशन, 36 बड़े और 415 छोटे पुल, 2 रोड ओवरब्रिज (आरओबी), 74 रोड अंडरब्रिज (आरयूबी), 4 सुरंगें और 2 रेल ओवरब्रिज। -इस मार्ग से हर साल 1 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की सुविधा मिलेगी। -इसके माध्यम से लगभग 1,206 करोड़ रुपए की लॉजिस्टिक लागत की बचत होगी।

डिजिटल MP की ओर कदम: DL और रजिस्ट्रेशन कार्ड अब मिलेंगे नई टेक्नोलॉजी के साथ

भोपाल  मध्यप्रदेश परिवहन विभाग से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। दिसंबर महीने से विभाग के द्वारा वाहनों के लिए कॉन्टैक्ट-लेस डिजिटल रजिस्ट्रेशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनेंगे। आरसी और लाइसेंस को आप सीधा अपने स्मार्टफोन से इसका पूरा डेटा देख सकेंगे। वर्तमान में आरसी कार्ड को रीड करने के लिए पीओएस या दूसरी मशीनों की जरूरत पड़ती है। दिसंबर से मिलेंगे डिजिटली डीएल और रजिस्ट्रेशन साल 2024 के सितंबर महीने में ही स्मार्ट कार्ड बनाकर देने वाली कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन कार्ड को पीडीएफ में भेजा जा रहा था। अब लोगों को दिसंबर से नई तकनीक वाले डिजिटल स्मार्ट कार्ड बनाकर दिए जाएंगे। 200 रुपए से कम होगी फीस कॉन्टैक्ट-लेस कार्ड बनवाने के लिए 200 रुपए से कम फीस ली जाएगी। अगर किसी व्यक्ति के पास पुराना कार्ड है और वह नया कार्ड बनवाना चाहते हैं तो उन्हें आरटीओ ऑफिस में जाकर आवेदन करना होगा। कॉन्टैक्ट-लेस कार्ड से क्या होगा फायदा कॉन्टैक्ट-लेस कार्ड होने के कारण इसे स्मार्टफोन से रीड किया जा सकेगा। जिसके जरिए फर्जीवाड़ा नहीं हो सकेगा। कार्ड डिस्पैच होने के बाद इसकी ट्रैकिंग की जा सकेगी। जिसकी जानकारी मैसेज के जरिए प्राप्त होगी। लाइसेंस प्रिंट होने के बाद सीधा आवेदक के घर पहुंचेगा। 

मॉनसूनी त्रासदी से बेहाल MP: जनहानि बढ़ी, राहत शिविरों में गुज़र रहा है लोगों का जीवन

भोपाल मध्य प्रदेश में भारी बारिश का दौर फिलहाल थमा हुआ है लेकिन बीते करीब 40 दिनों से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हुई तेज़ बारिश के डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं. प्रदेश सरकार ने बताया है कि मॉनसून के इस सीज़न में अबतक 252 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 432 पशु भी बारिश के मौसम में मारे जा चुके हैं जबकि 3600 से ज्यादा लोगों को अब तक रेस्क्यू किया जा चुका है. दरअसल, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बीते दिनों प्रदेश में हुई अतिवृष्टि और बाढ़ की वजह से बने हालातों और राहत एवं बचाव के संबंध में जिला कलेक्टरों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक की थी, जिसमें मुख्यमंत्री को बताया गया कि प्रदेश के अतिवृष्टि वाले जिलों में अब तक 3628 नागरिकों को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया गया है. फिलहाल 53 राहत शिविरों में 3065 प्रभावित लोगों को रखकर उन्हें सभी प्रकार की जरूरी मदद जैसे खाना-पीना, दवाइयां, कपड़े आदि मुहैया कराए जा रहे हैं. अब तक 28.49 करोड़ रुपए राहत राशि वितरित बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अफसरों को निर्देश दिए कि अतिवृष्टि या बाढ़ प्रभावितों को कोई भी कठिनाई न आने पाये और जल्द ही सर्वे पूरा कर पीड़ितों को उनके नुकसान की समुचित भरपाई की जाए. बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि अतिवृष्टि वाले जिलों के कलेक्टर द्वारा अब तक 28.49 करोड़ रुपए राहत राशि वितरित की जा चुकी है. शासन द्वारा लगभग 3600 करोड़ रुपए की व्यवस्था राहत मदद में की गई है. सीएम मोहन यादव ने बताया कि भारी बारिश को देखते हुए NDRF की टीमों को भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और धार में तैनात किया गया है जबकि SDRF को प्रदेश भर में संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया. 252 लोगों की हुई मौत प्रदेश सरकार के मुताबिक, मॉनसून के सीजन में अबतक 252 लोगों की मौत हुई है. इनमें से भारी बारिश से 47, नदी-नाले में दुर्घटनावश डूबने से 132, आकाशीय बिजली से 60 और दीवार/मकान/पेड़ गिरने से 13 लोगों की मृत्यु दर्ज हुई है. इसके अलावा साथ ही 432 पशु हानि और 1200 मुर्गियां की मृत्यु हुई है. प्रदेश में तैनात बचाव और राहत दलों द्वारा 432 रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए गए हैं, जिसमें 3628 नागरिकों और 94 मवेशियों को जीवित बचाया गया है. इसके अलावा बारिश से 128 मकानों को पूर्ण और 2333 मकानों को आंशिक क्षति हुई है. सामान्य से 59 फीसदी ज्यादा बारिश एमपी सरकार के मुताबिक, अब तक प्रदेश में 711.3 MM वर्षा हो चुकी है, जो सामान्य से 59 प्रतिशत अधिक है. प्रदेश के कुल 40 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है. इस अतिवृष्टि के कारण प्रदेश के प्रभावित लगभग 254 ग्रामीण सड़कों क्षतिग्रस्त हुई हैं. 

श्रावण समापन पर महाकाल के दरबार में आस्था का सागर, भस्म आरती में जुटे हजारों भक्त

उज्जैन श्रावण मास का अंतिम सोमवार… और श्री महाकालेश्वर की अलौकिक भस्म आरती। आज उज्जैन की प्राचीन नगरी फिर से हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठी । सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जब महाकाल की भस्म आरती प्रारंभ हुई, तो मंदिर प्रांगण में एक अद्भुत, दिव्य वातावरण बन गया। हजारों श्रद्धालु, दूर-दराज से आए भक्त, होठों पर भोले का नाम, आँखों में भक्ति का नूर और दिल में एक ही कामना आज महाकाल की भस्म आरती का साक्षात् दर्शन हो जाए।आज श्रावण माह का चौथा और अंतिम सोमवार है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में अब तक (अंतिम सोमवार) करीब 1 लाख श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके हैं। सोमवार तड़के ढाई बजे भस्म आरती के दौरान कपाट खोले गए। भगवान महाकाल को जल अर्पित कर भस्म रमाई गई। भस्म आरती के दौरान चलायमान दर्शन व्यवस्था में बिना परमिशन वाले भक्तों ने भी भस्म आरती में चलित दर्शन दर्शन किए। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। पंडित महेश पुजारी ने बताया कि श्रावण माह तपस्या का माह रहता है। महाकाल मंदिर में भगवान की दिनचर्या रोजाना की तरह रही। सुबह भगवान को भांग चंदन अर्पित किया गया। श्रावण माह में महाकाल मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्त जल अर्पित कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेकर उन्हें प्रसन्न करते हैं। शाम 4 बजे महाकाल भक्तों का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे। पालकी में श्री महाकालेश्वर श्री चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में, गजराज पर श्री मनमहेश रूप, गरुड रथ पर श्री शिव तांडव प्रतिमा, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश जी स्वरूप में दर्शन देंगे। मंदिर के सभा मंडप में भगवान की पालकी का पूजन होगा। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान को सलामी दी जाएगी। सवारी के साथ घुड़सवार पुलिस दल, सशस्त्र पुलिस बल, होमगार्ड के जवान, भजन मंडली, झांझ मंडली के सदस्य व पुलिस बैंड भी शामिल रहेंगे। इससे पहले श्रावण माह के पहले सोमवार पर 2.5 लाख, दूसरे पर 3 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे। तीसरे सोमवार को 4 लाख लोग पहुंचे थे। महाकाल की आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा की जागृति है। जब भस्म से श्री महाकाल का श्रृंगार होता है, तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे प्रकृति स्वयं शिव में लीन हो रही हो। भक्तों की भीड़ इतनी अधिक रही कि मंदिर प्रबंधन को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी। ऑनलाइन दर्शन की सुविधा के साथ, मंदिर के विभिन्न हिस्सों में LED स्क्रीन पर भी आरती का सीधा प्रसारण किया गया। श्रद्धालुओं की भावनाएं बिहार से आए एक बुजुर्ग श्रद्धालु ने कहा — “20 सालों से ये आरती लाइव देख रहा था, लेकिन आज जीवन सफल हो गया जब साक्षात महाकाल को भस्म में लिपटे देखा।”  

अब हेलमेट पहनिए और इंदौर के दफ्तरों में पाइए सम्मान, नियम तोड़ने वालों को एंट्री नहीं

इंदौर हेलमेट नहीं पहनने वाले दोपहिया वाहन चालकों की सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने नो हेलमेट-नो पेट्रोल का आदेश एक अगस्त से लागू किया है। अब इसकी अगली कड़ी में शासकीय कार्यालयों में भी दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट अनिवार्य किया जा रहा है। कलेक्टर आशीष सिंह ने शुक्रवार को सभी विभाग प्रमुखों को पत्र जारी कर अपने कार्यालयों में आने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों और अन्य दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट अनिवार्य करने के लिए निर्देशित किया था। इसके बाद जिले के शासकीय कार्यालयों में भी हेलमेट अनिवार्य किया गया है। आज से शासकीय कार्यालयों में इसको प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है। दोपहिया वाहनों से आने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा। वहीं कार्यालय आने वाले आवेदकों को भी हेलमेट पहनने के लिए समझाइश दी जाएगी। दिखने लगा असर… जिले में शुक्रवार से लागू हुए नो हेलमेट-नो पेट्रोल के आदेश का प्रभावी रूप से पालन किया जा रहा है। रविवार को भी पंपों से दोपहिया वाहन चालकों को बगैर हेलमेट के पेट्रोल नहीं दिया गया। वाहन चालकों के लिए कुछ पंपों पर हेलमेट भी बिक्री के लिए रख दिए गए हैं। साथ ही शहर के फुटपाथों पर भी अब हेलमेट की दुकानें खुल गई हैं। सख्ती का असर अब दिखने लगा है और पंपों पर लोग हेलमेट पहनकर ही पेट्रोल भरवाने आने लगे हैं। प्रशासन और खाद्य विभाग की टीम पंपों की मानिटरिंग भी कर रही है। प्रशासनिक कार्यालय और सभी तहसील कार्यालयों में हेलमेट अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा आइडीए, नगर निगम, डीएवीवी और स्कूल शिक्षा विभाग ने भी हेलमेट पहनना अनिवार्य किया है। विभाग प्रमुखों को किया निर्देशित     सड़क दुर्घटनाओं के दौरान दोपहिया वाहन चालक सुरक्षित रहें, इसके लिए हेलमेट पहनना जरूरी है। पंपों पर पेट्रोल भरवाने के दौरान हेलमेट अनिवार्य किया गया है। वहीं शासकीय कार्यालयों में भी हेलमेट पहनने का नियम लागू करने के लिए सभी विभाग प्रमुखों को निर्देशित किया गया है। – आशीष सिंह, कलेक्टर कर्मचारियों को दिए निर्देश, जनता से अपील     हमने निगम के सभी कर्मचारियों के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं कि यदि वह दोपहिया वाहन से मुख्यालय, जोन कार्यालय पर आ रहे हैं, तो हेलमेट पहनकर आएं। इसके अलावा हमने निगम कार्यालयों में आने वाले कर्मचारियों से भी अपील की है कि वह अपने दोपहिया वाहन पर हेलमेट पहनकर ही कार्यालय आएं। – शिवम वर्मा, निगमायुक्त आवेदकों को भी जागरूक करेंगे     दुर्घटनाओं के दौरान सुरक्षा के लिए हेलमेट बहुत जरूरी है, इसलिए दोपहिया वाहन चलाने के दौरान सभी को हेलमेट पहनना चाहिए। बगैर हेलमेट के लोगों को वाहन नहीं चलाना चाहिए। कार्यालय में इसके लिए निर्देशित किया है और आवेदकों को भी इसके लिए जागरूक किया जाएगा।– आरपी अहिरवार, सीईओ आईडीए परिसर में हेलमेट लगाकर ही आएं     एमजीएम मेडिकल सहित सभी अस्पतालों में दोपहिया वाहन से आने वाले डाक्टर, विद्यार्थी और अन्य स्टाफ को निर्देशित कर दिया है कि वह हेलमेट लगाकर ही परिसर में आएं। साथ ही यह अपील भी की गई है कि शराब पीकर वाहन नहीं चलाना है। – डॉ. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दिए निर्देश: हिनौती गौधाम का निर्माण कार्य शीघ्र करें पूरा

हिनौती गौधाम में निर्माणाधीन कार्य शीघ्र करें पूर्ण : उप मुख्यमंत्री शुक्ल हिनौती गौधाम के निर्माण कार्य में तेजी लाएं: उप मुख्यमंत्री शुक्ल का निर्देश उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दिए निर्देश: हिनौती गौधाम का निर्माण कार्य शीघ्र करें पूरा गौसेवा के कार्यों में न हो देरी, हिनौती गौधाम जल्द हो पूर्ण – उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के हिनौती गौधाम में निर्माणाधीन कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने वृक्षारोपण कार्य को आगामी 15 दिवस में पूरा कराने की बात कही। नवीन सर्किट हाउस रीवा में उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने हिनौती गौधाम में भूसा शेड, गौवंश शेड और प्रशासनिक भवन के निर्माण कार्य की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने निर्देशित किया कि प्रशासनिक भवन का कार्य अगस्त माह में पूर्ण कर लिया जाए साथ ही हिनौती गौधाम में फेंसिंग का शेष कार्य शीघ्र पूर्ण कराया जाए। उन्होंने गौधाम में 5 हजार पौधों के रोपण का कार्य आगामी 15 दिन में पूरा करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि इनकी सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। आयुक्त नगर निगम रीवा डॉ. सौरभ सोनवड़े, डीएफओ लोकेश निरापुरे सहित जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।