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बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुए सीएम मोहन यादव और उनकी धर्मपत्नी, किया आशीर्वाद ग्रहण

उज्जैन  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को उज्जैन में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे आध्यात्मिक, सामाजिक और विकासात्मक गतिविधियों में शामिल होंगे। सुबह वे श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्मारती के दर्शन करेंगे और भक्त निवास के समीप आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद वे कालिदास अकादमी में निषाद सम्मेलन को संबोधित करेंगे और नलवा में लाड़ली बहना योजना के तहत लाभार्थियों के खातों में राशि हस्तांतरित करेंगे। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्मारती और पूजा-अर्चना सावन मास के दूसरे दिन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी धर्मपत्नी के साथ श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्मारती के दर्शन किए। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों की समृद्धि और कल्याण के लिए प्रार्थना की। दर्शन के बाद उन्होंने गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिर समिति के पदाधिकारी, पुजारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस पवित्र अवसर पर उनके साथ उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा, "बाबा महाकाल की कृपा से मध्यप्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। मैं प्रार्थना करता हूँ कि हमारा प्रदेश आत्मनिर्भरता, रोजगार, शिक्षा और आध्यात्म के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़े।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि सावन मास बाबा महाकाल की कृपा प्राप्त करने का विशेष समय है और इस पवित्र माह में लिया गया संकल्प जनकल्याण के लिए फलदायी होता है। उज्जैन, जो महाकाल की नगरी के रूप में विख्यात है, से उन्होंने प्रदेश की भावनात्मक और आध्यात्मिक एकता का संदेश भी दिया। कालिदास अकादमी में निषादराज सम्मेलन शनिवार दोपहर करीब 1:30 बजे, मुख्यमंत्री कालिदास अकादमी में आयोजित राज्य स्तरीय निषादराज सम्मेलन में शामिल होंगे। इस अवसर पर वे कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का वर्चुअwatertight वर्चुअल भूमि-पूजन करेंगे, जिनमें शामिल हैं: 453 स्मार्ट फिश पार्लर: 22.65 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ये पार्लर मछुआरों के लिए आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करेंगे। अत्याधुनिक अंडर वॉटर टनल और एक्वा पार्क: 40 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह परियोजना पर्यटन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देगी। इंदिरा सागर जलाशय में मत्स्य उत्पादन: 91.80 करोड़ रुपये की लागत से 3060 केजेस के माध्यम से मत्स्य उत्पादन और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री 430 मोटरसाइकिल विद आइस बॉक्स के स्वीकृति पत्र, 100 यूनिट्स का वितरण, 396 केज के स्वीकृति पत्र, फीडमील हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र और उत्कृष्ट कार्य करने वाले मछुआरों व मत्स्य सहकारी समितियों को पुरस्कार वितरित करेंगे। वे मत्स्य महासंघ के मछुआरों को 9.63 करोड़ रुपये के डेफर्ड वेजेस का एकल क्लिक के माध्यम से हस्तांतरण करेंगे और रॉयल्टी चेक भी सौंपेंगे। लाड़ली बहना योजना की राशि हस्तांतरण दोपहर 2:30 बजे, मुख्यमंत्री नलवा में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदेशभर की लाड़ली बहनों के खातों में राशि हस्तांतरित करेंगे। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएँ भाग लेंगी। यह योजना मध्यप्रदेश की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके तहत नियमित रूप से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

किसानों को नहीं मिल रहा हक का पंप, 10 HP के बदले जबरन दिया जा रहा 7.5 HP

भिंड  प्रदेश भर में 10 हार्स पावर (एचपी) के सोलर पंप लगवाने के लिए पंजीयन कराने वाले 62 हजार किसान उलझन में हैं। दरअसल, 90 प्रतिशत अनुदान के साथ सोलर पंप के लिए अप्रैल में पोर्टल पर पंजीयन कराए गए थे। उसके बाद से ही किसानों को कंपनियों के माध्यम से पंप मिलने की प्रतीक्षा थी। हाल ही में ग्वालियर अंचल के भिंड दौरे पर आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के मंत्री राजेन्द्र शुक्ल की मौजूदगी में अपडेट पोर्टल की शुरुआत करते हुए किसानों को योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने की अपील की थी, परंतु अभी तक विभाग ने 10 एचपी कनेक्शन के लिए कंपनी ही अनुबंधित नहीं की है। ऐसे में जिन किसानों ने पंजीयन कराए हैं, उन पर कंपनियां 7.5 एचपी के कनेक्शन के लिए दबाव बना रही हैं। योजना के अनुसार प्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की सोलर पंप योजना के तहत 10 एचपी तक के सोलर पंप किसानों को दिए जाने हैं। इसकी लागत का 90 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। किसानों ने जमा किए हैं पांच हजार रुपये सरकार ने वादा तो कर दिया लेकिन टेंडर सिर्फ 7.5 एचपी तक के ही किए हैं, जबकि हजारों किसान 10 एचपी का कनेक्शन लेने के लिए पांच हजार रुपये विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन जमा करा चुके हैं। 10 एचपी का सोलर पंप लगाने पर करीब छह लाख रुपये का खर्च आता है। अनुदान मिलने के बाद किसान को महज 58 से 60 हजार रुपये ही खर्च करने होंगे। इस वजह से किसान कम पावर का कनेक्शन लेने को तैयार नहीं हैं। किसानों का कहना है कि कम क्षमता के सोलर पंप से खेतों में पर्याप्त सिंचाई नहीं हो पाती। उधर विभाग की मुश्किल यह है कि सरकार द्वारा टेंडर प्रक्रिया शुरू कर अभी तक कंपनी तय नहीं की गई है, इसलिए फिलहाल पोर्टल ही बंद रखा गया है। भिंड के पावई बिरगवा के रहने वाले हरेंद्र सिंह भदौरिया ने कहा कि "10 एचपी का सोलर पंप लगाए जाने के लिए पांच हजार रुपये जमा करके पंजीयन कराया था। एक माह से कंपनियां फोन लगाकर 10 एचपी के बजाय 7.5 एचपी का सोलर पंप लेने को कह रही हैं। उनका कहना है कि सरकार ने अभी 10 एचपी के लिए किसी कंपनी को टेंडर ही नहीं दिया है। सरकार ने 10 एचपी पर अनुदान देने की घोषणा की है तो 10 एचपी का ही पंप लगवाया जाए।" किसानों के साथ नहीं होगा धोखा नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि "किसानों के साथ किसी भी तरह का धोखा नहीं होने देंगे। जिन किसानों ने 10 एचपी के लिए आवेदन किया है, उन्हें 10 एचपी का ही पंप दिया जाएगा। सोलर पंप योजना के तहत फिलहाल प्रक्रिया चल रही है। अगर कोई व्यक्ति इस योजना के नाम पर गुमराह कर रहा है तो उसकी शिकायत दर्ज कराएं, जिससे संबंधित पर कार्रवाई हो सके।" 

मछली घर से नये एक्वा पार्क का सफर, मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज करेंगे एक्वा पार्क का भूमि-पूजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज भोपाल में बनने जा रहे अत्याधुनिक मछलीघर एक्वा पार्क का भूमि-पूजन करेंगे। भोपाल सहित पूरे प्रदेश से भोपाल आने वाले पर्यटकों के ज़हन में मछलीघर की एक खास जगह है। वो पुराना मछलीघर जहां स्कूल की पिकनिक होती थी, माँ-पापा के साथ सैर होती थी, और रंग-बिरंगी मछलियों को देखकर चौंकते, मुस्कराते और कभी-कभी डर भी जाते थे। नीली रोशनी में तैरती सुनहरी मछलियाँ मानो कैनवास पर बनी कोई पेंटिंग थीं। वक्त बीत गया और अब मछलीघर अतीत को साथ में समेटे हुए फिर से भोपाल में एक नई पहचान के साथ लौटने जा रहा है। देश के सबसे सुंदर और आधुनिक “एक्वा पार्क” में से एक भोपाल में आकार लेने जा रहा है। एक्वा पार्क में खास क्या है? केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 25 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, राज्य सरकार का इसमें 15 करोड़ रुपये का सहयोग से 40 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना होगी। एक्वा पार्क न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र होगा, बल्कि बच्चों के लिए रोमांच, शिक्षा, शोध और कौतूहल का नया केंद्र भी बनेगा। एक्वा पार्क में समुद्री और मीठे पानी की मछलियों की सैकड़ों प्रजातियां देखने को मिलेंगी। डिजिटल एक्वेरियम, वॉटर टनल, 3D इंटरेक्टिव जोन, बच्चों के लिए सी-लाइफ लर्निंग सेंटर, रिसर्च सेंटर (मछली पालन की पारंपरिक और नवीन तकनीक की डेमोंस्ट्रेशन यूनिट), मत्स्य सेवा केंद्र (मछली पालकों के प्रशिक्षण के लिए), आंत्रप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट और इनक्यूबेशन सेंटर, कैफेटेरिया (रंगीन मछलियों का प्रदर्शन और मछली से जुड़े गिफ्ट आइटम) एवं पर्यावरण शिक्षा और संरक्षण जैसे कार्यक्रम भी एक्वा पार्क में उपलब्ध होंगे। एक्वा पार्क के जरिए नई पीढ़ी सिर्फ मछलियाँ नहीं देखेगी बल्कि पानी और प्रकृति के प्रति संवेदनशील भी बन सकेगी। इस पार्क का निर्माण भदभदा स्थित मछलीघर में प्रस्तावित है। एक्वा पार्क इतिहास और भविष्य के बीच एक पुल बनने जा रहा है। राजधानी भोपाल के लिए यह केवल एक पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि स्मृतियों के गलियारे में सैर करने जैसा अनुभव होगा। पुराने मछलीघर में हाथों में गुब्बारा लेकर रंग-बिरंगी मछलियों को देखने वाले लोग अब अपने बच्चों का हाथ पकड़कर उसी जगह फिर लौटेंगे। लेकिन इस बार रोशनी और तकनीक से सजा हुआ एक भव्य “एक्वा पार्क” उनकी नई यादों की शुरुआत करेगा।  

बीएमएचआरसी की लैब को मिली बड़ी जिम्मेदारी, देश के 6 प्रतिष्ठित संस्थानों में शामिल

भोपाल  भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) को एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल हुई है। देशभर में चुनिंदा संस्थानों को शामिल कर बनाए गए इंडियन बायोडोसिमीट्री नेटवर्क (IN-BioDoS) में साबीएमएचआरसी की इटोजेनेटिक प्रयोगशाला को शामिल किया गया है। राजधानी के भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) को एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल हुई है। देशभर में चुनिंदा संस्थानों को शामिल कर बनाए गए इंडियन बायोडोसिमीट्री नेटवर्क (IN-BioDoS) में साबीएमएचआरसी की इटोजेनेटिक प्रयोगशाला को शामिल किया गया है। इसके तहत यह लैब अब रेडिएशन के कारण होने वाली आपदा की स्थिति में रेडिएशन के असर का वैज्ञानिक आकलन करेगी और गंभीर परिस्थितियों में इलाज करने के लिए सटीक जानकारी देगी। इस उपलब्धि के साथ बीएमएचआरसी मध्य भारत का पहला और इकलौता संस्थान बन गया है, जिसे इस अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय नेटवर्क में स्थान मिला है।  रेडिएशन से कैसे बचाएगा यह नेटवर्क? देश में परमाणु ऊर्जा, उद्योग और चिकित्सा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में रेडिएशन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। खासतौर पर चिकित्सा के क्षेत्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में रेडियोथेरेपी जैसी तकनीकों के माध्यम से रेडिएशन का व्यापक रूप से प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे में यदि कभी किसी जगह पर रेडिएशन का रिसाव हो जाए या किसी को अनजाने में ज़्यादा मात्रा में रेडिएशन लग जाए, तो डॉक्टरों को इलाज शुरू करने के लिए यह जानना जरूरी होता है कि मरीज को कितनी मात्रा में रेडिएशन से प्रभावित हुआ है। बायोडोसिमीट्री वह वैज्ञानिक तरीका है जिससे यह पता लगाया जाता है कि व्यक्ति के शरीर में रेडिएशन की कितनी मात्रा गई है। इस जानकारी से डॉक्टर सही समय पर सही इलाज शुरू कर पाते हैं।  बीएमएचआरसी की प्रयोगशाला का क्या होगा काम?  बीएमएचआरसी के अनुसंधान विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ रविंद्र एम समर्थ ने बताया कि हमारी साइटोजेनेटिक लैब अब रेडिएशन से प्रभावित व्यक्तियों के रक्त नमूनों की जांच कर यह बता सकेगी कि उन्हें कितना नुकसान हुआ है। इस तकनीक का उपयोग खासतौर पर आपातकालीन परिस्थितियों में किया जाएगा जैसे परमाणु संयंत्र में दुर्घटना, अस्पताल में उपकरण की गड़बड़ी या किसी प्रकार की रेडिएशन घटना। यह लैब अब देश की अन्य प्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर आम लोगों पर हुए रेडिएशन के असर का वैज्ञानिक आकलन करेगी और जांच व इलाज की दिशा तय करने में मदद करेगी।  देशभर में सिर्फ 6 संस्थानों का चयन  भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र BARC द्वारा शुरू किए गए इस नेटवर्क में देशभर से केवल 6 संस्थानों को चुना गया है। बीएमएचआरसी के अलावा इसमें चेन्नई, दिल्ली, लखनऊ, मंगलूरु और कलपक्कम की प्रयोगशालाएं शामिल हैं। यह सभी मिलकर देश में रेडिएशन से निपटने की वैज्ञानिक क्षमता को बढ़ाएंगी।  कैसे पता चलता है रेडिएशन ने कितना असर डाला  डॉ समर्थ ने बताया कि जब किसी व्यक्ति को अत्यधिक रेडिएशन का असर होता है, तो इसका सबसे बड़ा प्रभाव शरीर की कोशिकाओं में मौजूद क्रोमोज़ोम पर पड़ता है। रेडिएशन से क्रोमोज़ोम में टूट-फूट, असामान्य जुड़ाव या अतिरिक्त संरचनाएं बन सकती हैं, जो शरीर के लिए खतरनाक साबित होती हैं। बीएमएचआरसी की साइटोजेनेटिक लैब में मरीज के खून के नमूने लेकर विशेष जैविक तकनीकों जैसे डायसेंट्रिक क्रोमोज़ोम अस्से (DCA) और माइक्रोन्यूक्लियस अस्से के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि रेडिएशन से क्रोमोज़ोम में कितनी और किस प्रकार की क्षति हुई है। उदाहरण के लिए, डायसेंट्रिक क्रोमोज़ोम का बनना रेडिएशन के प्रभाव का पुख्ता संकेत होता है, और उनकी संख्या के आधार पर यह आकलन किया जाता है कि मरीज को कितना रेडिएशन डोज़ लगा है। इस वैज्ञानिक पद्धति से समय रहते सटीक इलाज संभव हो पाता है और रेडिएशन से होने वाले गंभीर प्रभावों को रोका जा सकता है।  यह हमारे लिए गर्व की बात  बीएमएचआरसी की निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा बै कि बीएमएचआरसी को इस राष्ट्रीय नेटवर्क में शामिल किया जाना हम सभी के लिए गर्व की बात है। यह संस्थान की वैज्ञानिक क्षमताओं और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान का प्रमाण है। भोपाल और मध्य भारत के लिए यह सुविधा अब रेडिएशन से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति में एक मजबूत सहारा बनेगी।"  

भोपाल में नामकरण को लेकर फिर गरमाई बहस, कोलार रोड को ‘राजा भोज मार्ग’ करने की मांग तेज

भोपाल  राजधानी भोपाल स्थित भोज मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति कमलाकर सिंह ने शहर के कोलार रोड को 'राजा भोज मार्ग' के रूप में चिह्नित करने वाले साइनबोर्डों को दोबारा लगाने की मांग उठाई है.  कमलाकर सिंह ने मध्य प्रदेश सरकार को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि साल 2008 में लिए गए निर्णय के अनुसार इस सड़क पर फिर से नामपट्ट और साइनबोर्ड लगाए जाएं. राजा भोज 1010 से 1055 में अपनी मृत्यु तक मालवा क्षेत्र के परमारकालीन राजा थे.  सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्यपाल को एक पत्र भेजकर कोलार रोड का नाम 'राजा भोज मार्ग' रखने का अनुरोध किया था, जिस पर सहमति हो गई थी.  उन्होंने आगे कहा कि चूंकि इस सड़क को छह लेन का बनाया गया था, इसलिए राजा भोज का नाम कहीं भी दिखाई नहीं देता, क्योंकि साइनबोर्ड या तो क्षतिग्रस्त हो गए थे या गलत जगह पर लगे थे. 

विगत 5 माह में एक करोड़ से अधिक हितग्राहियों का हुआ ई-केवायसी

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि भारत सरकार के निर्देशानुसार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सभी पात्र हितग्राहियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिये ई-केवायसी करवाई जा रही है। गत 5 माह में एक करोड़ से अधिक हितग्राहियों की ई-केवायसी कराई जा चुकी है और अब लगभग 20 लाख नवीन पात्र हितग्राहियों को पात्रता पर्ची दी जा सकेगी। इन नवीन हितग्राहियों को पात्रता पर्ची जारी करने के लिये विंडो ओपन किया जा रहा है। आयुक्त खाद्य श्री कर्मवीर शर्मा ने जानकारी दी है कि प्रदेश की लगभग 27 हजार उचित मूल्‍य दुकानों पर लगाई गई पीओएस मशीन से पात्र हितग्राहियों के ई-केवायसी करने की व्‍यवस्‍था के अतिरिक्‍त वृद्ध, बच्‍चों के तथा हितग्राही द्वारा घर बैठे ई-केवायसी करने की सुविधा भारत सरकार के मेरा ई-केवायसी एप से फेस एथेंटिकेशन द्वारा करने की सुविधा दी गई है। सभी हितग्राहियों को ई-केवायसी कराने के लिये प्रतिमाह 2 से 3 बार SMS किए गए। उचित मूल्‍य दुकानो पर इस संबंध में सूचना प्रदर्शित की गई। समाचार पत्रो में ई-केवायसी कराने के लिये समाचार प्रकाशित कराए गए। ई-केवायसी करने विशेष अभियान चलाया गया ई-केवायसी करने विशेष अभियान चलाया गया‍। अभियान के तहत ई-केवायसी से शेष हितग्राहियों की सूची स्‍थानीय निकाय, खाद्य विभाग एवं जिला प्रशासन को उपलब्‍ध कराई गई। ग्राम एवं मोहल्‍ले में कैम्‍प लगाए गए। दिव्‍यांग/वृद्ध की घर-घर जाकर ई-केवायसी की गई। कैम्‍प में उचित मूल्‍य दुकान के विक्रेता एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग/नगरीय निकाय के अमले को लगाया गया। हितग्राही के ग्राम में ही पीओएस मशीन के माध्‍यम से ई-केवायसी किए गए। वर्तमान में सम्मिलित हितग्राहियों में से मृत/अस्तित्‍वहीन/दोहरे/अपात्र पाए जाने वाले हितग्राहियों का चिन्‍हांकन किया गया। जिन पात्र हितग्राहियों के आधार डाटा अपग्रेड नहीं थे, उनको केम्‍प में भेजकर अपग्रेड कराया गया। अभियान की लगातार मॉनिटरिंग की गई। विभाग द्वारा ई-केवायसी के लिये किए गए इन प्रयासों के फलस्‍वरूप विगत 5 माह में 1 करोड़ से अधिक पात्र हितग्राहियों के ई-केवायसी कराए गए। अभी तक 90 प्रतिशत हितग्राहियों के ई-केवायसी किए जा चुके है। कुल पात्र हितग्राही 5 करोड़ 32 लाख हैं। खाद्य सुरक्षा अधिनियम अंतर्गत 29 श्रेणी के 20 लाख नवीन पात्र हितग्राहियों को जोड़ने हेतु कुशन प्राप्‍त हो सका है। ई-केवायसी होने पर SMART-PDS अंतर्गत पात्र परिवारों को राशन का वितरण करने में सुविधा होगी। 

स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुद्ध जल का उपयोग करने एवं जलजनित रोगों से सुरक्षा के लिए दी गई सलाह

भोपाल वर्षा ऋतु में होने वाली जलजनित बीमारियों के दृष्टिगत स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और दूषित जल से होने वाले रोगों से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियाँ अपनाएँ। स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुद्ध जल का उपयोग करने एवं जलजनित रोगों से सुरक्षा के लिए सलाह दी गई है। दूषित पानी के सेवन से उल्टी-दस्त, पेचिश, हैजा, पीलिया और टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियाँ होने की संभावना बढ़ जाती है। एडवाइजरी में कहा गया है कि रोगों से बचने के लिए सावधानियाँ और सुरक्षा उपाय अपनाकर स्वयं एवं परिवार को सुरक्षित करें। स्वास्थ्य विभाग एडवाइजरी में कहा है कि खानपान के लिए सदैव स्वच्छ एवं सुरक्षित उबला अथवा फिल्टर जल का ही प्रयोग करें। यदि पानी की शुद्धता संदिग्ध हो, तो उसे पहले उबालें, साफ कपड़े से छानें अथवा क्लोरीन की गोली डालें और कम से कम एक घंटे के बाद उसका सेवन करें। खाना बनाने, परोसने और खाने से पहले तथा शौच के बाद हाथों को साबुन और स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोना अत्यंत आवश्यक है। यह सरल आदत कई रोगों से बचाव में सहायक होती है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि सदैव ताजा पका हुआ भोजन एवं स्वच्छ खाद्य वस्तुओं का ही सेवन करें। अधिक समय पहले बना हुआ यात्री बासी भोजन न खाएं। भोजन एवं खाद्य सामग्री को पूरी तरह ढंककर रखें जिससे उन्हें मक्खियों, धूल अथवा अन्य गंदगी से दूषित होने से बचाया जा सके। बाजार में खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों, कटे हुए फलों और ठंडे पेयों का सेवन न करें ये अक्सर संक्रमण के वाहक होते हैं। फल एवं सब्जियाँ स्वच्छ पानी से धोने के बाद ही उपयोग में लाएं और उन्हें काटने के लिये स्वच्छ, ढंका हुआ चाकू प्रयोग करें। शौचालय को सदैव स्वच्छ रखें और घर एवं आस-पास के वातावरण की सफाई पर विशेष ध्यान दें।  

सीएम डॉ. यादव का ऐलान: आज 12 जुलाई को बहनों के खातों में डाले जाएंगे योजना के पैसे

भोपाल  मध्य प्रदेश की 1.27 करोड़ महिलाओं के लिए खुशखबरी है। लाडली बहना योजना की 26वीं किस्त की तारीख का ऐलान हो गया है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव आज 12 जुलाई को खाते में 1500 रुपये ट्रांसफर करेंगे। इसके अलावा रक्षा बंधन के शगुन के तौर पर 250 रुपये भी खाते में आएंगे। बुधवार को कैबिनेट ने इस तोहफे के तौर पर 250 रुपये की अतिरिक्त राशि को भी मंजूरी दे दी है। राज्य के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक से मंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश की 1.27 करोड़ महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा। मुख्‍यमंत्री उज्‍जैन से इस बार लाडली बहना योजना की 26वीं क‍िस्‍त ट्रांसफर करेंगे। लाडली बहना योजना जून 2023 में शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को सीधे वित्तीय सहायता देना है। शुरुआत में हर महीने 1,000 रुपये दिए जाते थे। रक्षा बंधन 2023 के दौरान इसे बढ़ाकर 1,250 रुपये कर दिया गया। इस नए बदलाव के साथ, राज्य महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सीएम यादव ने योजना की 25वीं किस्त के रूप में लाभार्थियों के बैंक खातों में 2,080 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। उन्होंने लाडली बहना योजना को एक परिवर्तनकारी पहल बताते हुए कहा था कि इस योजना के तहत शुरुआत से अब तक 28,000 करोड़ रुपये से ज्यादा ट्रांसफर किए जा चुके हैं। प‍िछले महीने मुख्‍यमंत्री ने लाडली बहना योजना की 25वीं क‍िस्‍त को 16 जून को ट्रांसफर क‍िया था। दिवाली से हर महीने 1500 रुपये मिलेंगे मुख्यमंत्री मोहन यादव घोषणा कर चुके हैं कि अक्टूबर से लाडली बहना योजना के तहत सभी लाभार्थी महिलाओं को 1500 रुपये दिए जाएंगे। यही नहीं इस राशि में हर साल बढ़ोतरी की जाएगी और 2028 से इसे बढ़ाकर 3000 रुपये हर महीने कर दिया जाएगा। हालांकि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब मध्य प्रदेश सरकार कर्ज में डूबी हुई है। लगातार तीसरे महीने लिया जाएगा कर्ज इस बीच मध्य प्रदेश सरकार लगातार तीसरे महीने कर्ज लेने जा रही है। मंगलवार को 4800 करोड़ रुपये का लोन लेने के लिए सरकार ने औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं। पिछले महीने भी सरकार ने 4500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। राज्य पर पहले से ही 4,21,032 करोड़ का कर्ज हो चुका है। अप्रैल से 10 से 15 तारीख के बीच भेजी जाती है योजना की किस्त आमतौर पर योजना की किस्त हर महीने की 10 तारीख तक जारी कर दी जाती थी, लेकिन अप्रैल 2025 से राशि वितरण की तारीख में बदलाव किया गया है।इस दौरान कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार ने फैसला किया था कि वह प्रतिमाह 15 तारीख के आसपास बहनों के खाते में राशि भेजेगी। यही कारण था कि अप्रैल में 16 तारीख को 23वीं किस्त, 15 मई को 24वीं किस्त और 16 जून को 25वीं किस्त जारी की गई थी।अब 12 जुलाई को मोहन सरकार योजना की अगली किस्त जारी करने जा रही है। दिवाली बाद बहनों को हर माह मिलेंगे 1500     दिवाली के बाद भाई दूज से योजना की राशि में 250 रु का इजाफा किया जाएगा और हर माह 1250 की जगह 1500 रुपए मिलेंगे।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रक्षाबंधन से पहले सभी पात्र बहनों को 250 रुपए की अतिरिक्त राशि शगुन के रूप में भेजी जाएगी।     दीपावली के बाद हम प्रदेश की सभी लाडली बहनों को हर माह 1500 रुपए महीना देंगे। अभी वर्तमान में योजना के तहत 1250 रूपये प्रति माह की राशि लाड़ली बहनों को दी जा रही है।योजना के तहत चरणबद्ध रूप से राशि बढ़ाकर तीन हजार रूपये प्रति माह तक की जायेगी। लाड़ली बहना योजना में मिलते है हर माह 1250     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।     लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से जून 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 25 किश्तों का अंतरण किया गया है।प्रदेश की लाड़ली बहनों को अब तक 30 हजार करोड़ से अधिक का लाभ मिल चुका है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। लाड़ली बहना योजना के ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने 1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैंजिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो।     लाभार्थी सूची में चेक करें नाम, पैसा मिलेगा या नहीं?

दुबई और स्पेन दौरे पर 13 जुलाई से रवाना होंगे सीएम यादव, विकास एजेंडे पर फोकस

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए एक बार फिर विदेश दौरे पर जा रहे हैं। उनके साथ एक प्रतिनिधिमंडल भी जाएगा। मुख्यमंत्री की यात्रा 13 से 19 जुलाई तक होगी। इस दौरान वे दुबई और स्पेन में कई विदेशी कंपनियों के सीईओ से वन टू वन चर्चा कर उन्हें मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करेंगे। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश का एक प्रतिनिधिमंडल 13 से 19 जुलाई के दौरान दुबई और स्पेन की यात्रा पर रहेगा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल व्यावसायिक बैठकों और विभिन्न कंपनियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग भी करेगा। मुख्यमंत्री के इस विदेश दौरे का उद्देश्य निवेश प्राप्त करना, प्रौद्योगिकी के पारस्परिक हस्तांतरण और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अपनी पहुंच बनाना है।  जिसमें सीएम कार्यालय के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई मुख्य होंगे। दो हिस्सों में यह यात्रा होगी। शुरु के 3 दिन वह दुबई में रहेंगे और अंतिम 3 दिन स्पेन में बिताएंगे। इस दौरान पूरा जोर मध्यप्रदेश में निवेश लाने पर रहेगा। (mp news) वन टू वन होगी चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोनों ही देशों के उ‌द्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे। वहां की सरकार के प्रतिनिधियों से भी निवेश पर संवाद होंगे। यही नहीं, मुख्यमंत्री व उनके साथ मौजूद अफसरों का दल मप्र के पुरातात्विक, वाइल्डलाइफ, धार्मिक व ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों समेत सभी प्रकार की खूबियों को दोनों देशों के सामने रखेंगे। अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के अलावा प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह, संस्कृति विभाग और पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला, औ‌द्योगिक विकास निगम के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला, सीएम कार्यालय में सचिव इलैया राजा टी और आयुक्त जनसंपर्क सुदाम पी खाड़े मुख्य होंगे। सूत्रों के मुताबिक इसके अलावा भी दल में कुछ अफसर शामिल हो सकते हैं। ये टीम अधिक से अधिक लोगों को प्रदेश में निवेश को प्रेरित करेगी। नवंबर में की थी यूके और जर्मनी की यात्रा मुख्यमंत्री नवंबर 2024 में यूके व जर्मनी की यात्रा कर चुके हैं, उसके बाद जनवरी 2025 में चार दिन के लिए जापान भी गए थे। तब उन्होंने तीनों देशों के साथ औ‌द्योगिक निवेश पर बातचीत की थी, इसका असर भोपाल के मानव संग्रहालय में 24 व 25 फरवरी को हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में देखने को भी मिला था। तब इन देशों के निवेशक शामिल हुए थे। इंदौर कॉन्क्लेव में निवेशकों से मिलेंगे सीएम इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निवेशकों से संवाद करेंगे।कॉन्क्लेव में देश के 1500 से अधिक निवेशकों, उ‌द्योगपतियों, कॉर्परिट प्रतिनिधियों की सहभागिता होगी। सीएम दोपहर 1.30 बजे कॉन्क्लेव स्थल पर पहुंचकर एक्जीबिशन का अवलोकन करेंगे, उसके बाद चार सत्रों में बैठक कर चर्चा करेंगे। पहली विदेश यात्रा में गए थे लंदन पहली विदेश यात्रा में मप्र को लंदन के 12 प्रमुख औ‌द्योगिक घरानों ने 59 हजार 350 करोड़ के निवेश प्रस्ताव दिए थे। इनमें रोजगार के अवसर भी शामिल हैं। जर्मनी : मुख्यमंत्री यहां 12 प्रमुख औ‌द्योगिक घरानों के प्रमुखों से मिले थे, वन-टू-वन बातचीत की थे। जिसमें 17 हजार 890 करोड़ के निवेश का भरोसा मिला था।

गौरवशाली विरासत खतरे में! जहांगीरिया स्कूल के बंद होने की कगार पर उठे सवाल

भोपाल  दीवारों में दरारें, सीलन से भीगी ईंटें और कक्षाएं जो अब खंडहरों जैसी नज़र आती हैं, ये किसी प्राकृतिक आपदा के बाद की तस्वीरें नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के हजारों सरकारी स्कूलों की हकीकत है. राज्य सरकार की ओर से स्कूली शिक्षा के लिए इस साल 3,000 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत इस राशि के प्रभाव से बिल्कुल अछूती दिखती है. जर्जर ढांचे, अधूरी मरम्मत और वादों के मलबे के बीच स्कूलों में पढ़ाई नहीं, बल्कि साहस की परीक्षा होती है. यहां बच्चे किताबों से कम और छत से ज़्यादा डरते हैं. भोपाल में ही विडंबना की कहानी शुरू होती है. शहर की ऐतिहासिक सदर मंज़िल, जो कभी जर्जर हालत में थी, आज एक आलीशान होटल में तब्दील हो चुकी है. इसे PPP मॉडल के तहत शानदार तरीके से रेनोवेट किया गया है. इतिहास की गरिमा बरकरार रखते हुए आधुनिकता की झलक दी गई है, लेकिन इस चमक से ठीक 800 मीटर दूर एक और इमारत है- जहांगीरिया स्कूल. ये स्कूल अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है. साल 1830 में बनी और 1901 से शिक्षा का केंद्र रही इस इमारत की दीवारों से आज पानी टपकता है, प्लास्टर झड़ चुका है और छत कभी भी गिर सकती है. ये वही स्कूल है जहां भारत के पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा पढ़े थे, जिनकी तस्वीर अब एक सीलन भरी दीवार पर लटकी है. कुछ महीने पहले एक कक्षा की छत का हिस्सा अचानक ढह गया. बाहर एक पोस्टर चिपका है- यह मंज़िल असुरक्षित है, लेकिन क्लास अब भी उसी मंज़िल में लगती है.  कई बार छत से गिर चुका है प्लास्टर  एक छात्रा ज़ीनत बताती है कि हर बार बारिश होती है, तो हमारी नज़र किताबों पर नहीं, छत पर जाती है. छत से प्लास्टर कई बार गिर चुका है. हमारे माता-पिता पूछते हैं कि कब मरम्मत होगी, लेकिन प्रिंसिपल हर बार यही कहती हैं बहुत जल्दी. और वो जल्दी कभी आती ही नहीं. स्कूल के पिछले हिस्से में एक कमरा पहले ही ढह चुका है. टीकमगढ़ में भी भरभराकर गिरी स्कूल की बिल्डिंग टीकमगढ़ में भी बारिश के बाद एक पुराना स्कूल भवन भरभराकर गिर पड़ा. गनीमत रही कि ये स्कूल पहले से बंद था और कोई बच्चा मौजूद नहीं था, लेकिन यह घटना इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश में ऐसे कई स्कूल हैं, जो अब केवल दुर्घटना के इंतज़ार में खड़े हैं.  भोपाल की तत्कालीन बेगम के आग्रह पर दान में दी थी इमारत भोपाल के जहांगीरिया स्कूल की कहानी तब और भावुक हो जाती है, वे उसी परिवार से हैं जिन्होंने ये इमारत राज्य को दान दी थी. शहनाज़ बताती हैं कि ये बिल्डिंग भोपाल की तत्कालीन बेगम के आग्रह पर दान में दी गई थी, ताकि बच्चे पढ़ सकें. लेकिन आज शहनाज़ की आंखों में आंसू हैं. उन्होंने कहा कि  हर साल बजट पास होता है, लेकिन कभी स्कूल तक नहीं पहुंचता. जब विरासत भवनों को होटल बनाया जा सकता है, तो इस स्कूल को क्यों नहीं बचाया जा सकता? सुल्तानिया स्कूल भी कमजोर ढांचे में तब्दील  भोपाल का सुल्तानिया स्कूल भी अब कमजोर ढांचे में तब्दील हो चुका है. 50 साल पुरानी इस इमारत में बारिश के दौरान छत टपकती है. दीवारें रिसती हैं और बिजली की तारें खुलकर लटकती हैं. स्कूल का निचला तल पूरी तरह बंद कर दिया गया है. हालांकि इसका कोई सरकारी आदेश नहीं आया, बल्कि ये निर्णय स्कूल प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए लिया है. पुरानी इलेक्ट्रिक फिटिंग बड़े हादसे को न्योता देती है.  हर पल रहता है खतरा प्रिंसिपल रूबीना अरशद ने ऐसी फाइलें दिखाईं जिनमें कई सालों की चिट्ठियां, निवेदन और रिमाइंडर दर्ज हैं. दो साल पहले PWD के इंजीनियर ने साफ शब्दों में कहा था कि ये भवन असुरक्षित है, इसे गिराकर दोबारा बनाया जाना चाहिए, लेकिन तब से फाइलें, दूसरी फाइलों में ही दबी हैं. महिला शिक्षक रशीदा और सुषमा हर दिन क्लास लेती हैं, इस डर के साथ कि कहीं आज कुछ टूट न जाए. क्या बोले स्कूली शिक्षा मंत्री?  स्कूली शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से सवाल किया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि हां, खामियां हैं. मंत्री राव उदय प्रताप ने ये भी कहा कि आजतक इसके पहले भी कई बार जर्जर स्कूल को लेकर कई रिपोर्ट कर चुका है, जिसके आधार पर उन्होंने कई बार संज्ञान भी लिया है. उन्होंने कहा कि मरम्मत के लिए वित्त विभाग को भेजा गया है, स्वीकृति का इंतज़ार है. कुछ बजट विभाग के पास है जिससे जल्द ही मरम्मत का काम शुरू होगा. बच्चों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट भी किया जाएगा और सरकार इसे लेकर चिंतित है. जल्द काम पूरा होगा.