News Aazad Bharat

रेलवे जनसंपर्क विभाग की मांगो एवं उनकी केडर की कठिनाइयां, चुनोतियाँ रेल मंत्री तक पहुँचाई जाएगी – ओम बिरला

कोटा  भारतीय रेलवे के इतिहास में पहली बार जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा अखिल भारतीय रेलवे जनसंपर्क सेमिनार का भव्य आयोजन शनिवार को कोटा के मेनाल रेलवे ऑफिसर्स क्लब में किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी  ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज की और भारतीय रेलवे जनसंपर्क कैडर की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री बिरला जी के आगमन पर पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत से हुआ। तत्पश्चात, मंडल रेल प्रबंधक, कोटा श्री अनिल कालरा सहित विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन किया गया।  मंडल रेल प्रबंधक श्री कालरा द्वारा मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए रेलवे के जनसंपर्क विभाग द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों की सराहना की गई। इसके बाद जनसंपर्क विभाग के परिचय पर एक संक्षिप्त वीडियो प्रदर्शित किया गया, जिससे जनसंपर्क कर्मियों की बहुआयामी भूमिका का परिचय उपस्थित जनसमूह को मिला। वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी श्री कमल जोशी द्वारा जनसंपर्क  कैडर का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया गया, जिसमें विभाग की वर्तमान कार्यप्रणाली, दायित्व, एवं संरचनात्मक चुनौतियों को रेखांकित किया गया। माननीय श्री ओम बिरला जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “रेलवे का जनसंपर्क विभाग सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु है। इसकी मजबूती से रेलवे की छवि और पारदर्शिता में वृद्धि होती है।” उन्होंने विभाग के हितों की रक्षा और समस्याओं के समाधान हेतु सकारात्मक आश्वासन भी प्रदान किया। इसके पश्चात मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न भेंट किया गया तथा कार्यक्रम का औपचारिक समापन धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। इसके उपरांत सेमिनार सत्र आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से आए वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी, जनसंपर्क अधिकारी एवं प्रचार निरीक्षकों ने अपने विचार, अनुभव एवं कैडर से संबंधित व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। यह विचार-विमर्श सत्र जनसंपर्क विभाग की कार्यक्षमता, कैडर पुनर्गठन, और भविष्य की दिशा तय करने में मील का पत्थर सिद्ध हुआ। कार्यक्रम में मंडल रेल प्रबंधक, कोटा श्री अनिल कालरा, अपर मंडल रेल प्रबंधक श्री ललित कुमार धुरंधर, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन, मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री किशोर पटेल,नेता प्रतिपक्ष श्री लव शर्मा सहित रेलवे के विभिन्न संवर्गों के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों और प्रिंट,इलेक्ट्रॉनिक,सोशल मीडिया से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इस आयोजन ने न केवल विभागीय एकजुटता को दर्शाया बल्कि जनसंपर्क कैडर की समस्याओं को नीति-निर्माताओं के समक्ष प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने का अवसर भी प्रदान किया।  भारतीय रेलवे जनसंपर्क कर्मी कल्याण समिति

बारिश बनी मुसीबत: नागौर में नेशनल हाईवे तीसरी बार बंद, स्कूलों में ऐहतियातन छुट्टी

जयपुर मानसून की टर्फ लाइन उत्तर की तरफ शिफ्ट होने से राजस्थान में भारी बारिश झेल रहे जिलों में अगले कुछ दिनों तक राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं उत्तरी क्षेत्रों में अब भारी बारिश का प्रभाव देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को गंगानगर और हनुमानगढ़ में जोरदार बारिश रिकॉर्ड की गई। हनुमानगढ़ के गोलूवाला में 6 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। सर्वाधिक वर्षा तारानगर (चूरू) में 185 मिलीमीटर दर्ज की गई। पूर्वानुमान है कि आगामी 5-6 दिन मानसून टर्फ लाइन के सामान्य से उत्तर की ओर शिफ्ट होने से राज्य के उत्तरी व उत्तर-पूर्वी भागों में बारिश की गतिविधियां जारी रहेगी, वहीं दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी भागों में भारी बारिश की गतिविधियों में कमी रहने की संभावना है। राजस्थान में लगातार हो रही बारिश ने लोगों के जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारी बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नागौर में बीते 12 दिनों में तीसरी बार नेशनल हाईवे बंद करना पड़ा है। 11 जिलों के स्कूलों में छुट्टी आईएमडी ने आज प्रदेश के 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रशासन ने एहतियात के तौर पर 12 जिलों में स्कूलों  में अवकाश घोषित कर दिया है। इसमें झालावाड़, बारां, टोंक, डीग, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, कोटा और कोटपूतली-बहरोड़ शामिल हैं। इसके अलावा कोटा में शनिवार को क्लास एक से 12वीं तक के स्कूलों में बच्चों की छुट्टी रहेगी, जबकि स्टाफ यथावत कार्य करेंगे। कलेक्टर पीयूष समारिया ने शुक्रवार को इसके आदेश जारी किए, जो सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों पर लागू होंगे।

नई जिम्मेदारी: अरुण चतुर्वेदी राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नियुक्त, ठकराल को सचिव पद

जयपुर राजस्थान में राज्य वित्त आयोग के पद पर पूर्व बीजेपी अध्यक्ष तथा वसुंधरा सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहे अरुण चतुर्वेदी को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है। चतुर्वेदी के साथ एक पूर्व ब्यूरोक्रेट नरेश ठकराल को भी राजनीतिक नियुक्ति मिली है। वित्त विभाग में लंबे समय तक रह चुके ठकराल को राज्य वित्त आयोग में सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। इस संबंध में वित्त विभाग ने देर रात अधिसूचना जारी कर दी। राज्य वित्त आयोग का कार्यकाल एक अप्रैल 2025 से अगले डेढ़ वर्ष के लिए किया गया है। इस अवधि में यह राज्य की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा। हालांकि डेढ़ वर्ष बाद भी सरकार आयोग का कार्यकाल बढ़ा सकती है। हर सरकार में आयोग के कार्यकाल की समय सीमा बढ़ाई जाती रही है। ये होंगे आयोग के काम राज्य वित्त आयोग मुख्य रूप से पंचायतों के लिए ग्रांट निर्धारित करता है। इसकी सिफारिशों के आधार पर ही सरकार पंचायतों को ग्रांट जारी करती है। इसके अलावा इसके अलावा पंचायतों में वित्तीय संसाधनों को विकसित करने के लिए टोल, शुल्क और टैक्स की दरें निर्धारित करने की सिफारिश भी कर सकता है। शहरी निकायों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने का काम भी राज्य वित्त आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके अलावा 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर स्थानीय निकायों को दी जाने वाली सहायता राशि का समायोजन भी राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही किया जाता है। भजनलाल सरकार में यह पहली राजनीतिक नियुक्ति नहीं है, इससे पहले आरपीएससी, किसान आयोग, सैनिक कल्याण बोर्ड सहित कई अन्य बोर्ड और आयोगों में नियुक्तियां हुई हैं लेकिन अब तक किसी भी राजनीतिक नियुक्ति वाले पदाधिकारी को मंत्री का दर्जा नहीं दिया गया है। जबकि इससे पहले की सरकारों में राजनीतिक नियुक्तियों के साथ नियुक्त होने वाले पदाधिकारियों को मंत्री का दर्जा दिए जाने के आदेश भी जारी किए जाते थे। क्या कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलेगा? राज्य वित्त आयोग एक संवैधनिक संस्था है, यहां पर नियुक्ति होने वाले अध्यक्ष को लगभग हर सरकर में मंत्री का दर्जा दिया जाता रहा है। इससे पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पूर्व मंत्री प्रद्युम्न सिंह को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाकर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था। इसके साथ ही बीजेपी नेता अशोक लाहोटी को राज्य वित्त आयोग में सदस्य नियुक्त किया गया था। हालांकि मौजूदा सरकार ने चतुर्वेदी को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है लेकिन उनके दर्जे को लेकर अभी कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

अजमेर में प्रशासन का बड़ा कदम, 250 अवैध दुकानों पर चलेगा बुलडोजर, सुरक्षा के लिए भारी फोर्स मौजूद

अजमेर  अजमेर के तारागढ़ पहाड़ियों पर वन विभाग की जमीन पर बने अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है. शनिवार को वन विभाग ने तारागढ़ क्षेत्र में लगभग 250 अवैध निर्माणों को चिन्हित किया है, जिनमें करीब 200 केबिननुमा दुकानें शामिल हैं. इन निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए वन विभाग की टीम ने भारी पुलिस बल के साथ कार्रवाई शुरू कर दी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन क्षेत्र में शांतिपूर्ण रूप से अतिक्रमण हटाया जा रहा है. ध्वस्तीकरण की ये कार्रवाई सेक्टर बनाकर की जा रही है. हर सेक्टर में मजिस्ट्रेट कार्रवाई की निगरानी कर रहे हैं. वहां वन विभाग के भी अधिकारी मौजूद है. बताया जा रहा है कि अब तक प्रशासन ने 40% के आसपास अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया है. प्रशासन का कहना है कि तारागढ़ क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर सालों से अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही थीं. इन्हीं शिकायत के आधार पर प्रशासन ने पहले 300 से अधिक अवैध निर्माणों को चिन्हित किया था, जिनमें से कुछ अतिक्रमणकारियों ने हाईकोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया है. हालांकि, जिन निर्माणों पर कोई कानूनी स्थगन नहीं है, उन्हें ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. प्रशासन ने बताया कि हाईकोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त करने वाले अतिक्रमण को अलग से चिन्हित किया गया है. जारी है अभियान अजमेर की पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा ने बताया कि ये अभियान वन विभाग की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए चलाया जा रहा है. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, विभिन्न थानों के थानाधिकारी और विशेष कार्य बल (STF) की टीमें शामिल हैं. प्रशासन ने इस दौरान मीडिया की एंट्री पर भी पाबंदी लगा दी है, ताकि कार्रवाई में किसी तरह की बाधा न आए.

चोरी का सुनियोजित खेल: खरीदारी की आड़ में ज्वेलरी उड़ाने वाली तीन महिलाएं पकड़ी गईं

जोधपुर जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट की देवनगर थाना पुलिस ने मसूरिया इलाके में स्थित एक ज्वेलरी की दुकान से सोने के आभूषण चोरी के मामले में पुलिस ने मोगिया गैंग की तीन शातिर महिलाओं को कोटा से गिरफ्तार किया है। मामले में देवनगर थाना क्षेत्र के व्यापारी भावेश सोनी ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसकी दुकान पर तीन महिलाएं खरीददारी के बहाने आई थीं। जब वह एक अन्य ग्राहक को ज्वेलरी दिखा रहा था, तब उन महिलाओं ने गुपचुप तरीके से ड्रावर से सोने के आभूषणों से भरा डिब्बा चोरी कर लिया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और 25 किलोमीटर के दायरे में करीब 400 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी सहायता और डाटा एनालिसिस के आधार पर चोरी की वारदात का पर्दाफाश किया गया। गिरफ्तार महिलाओं की पहचान मौसम बाई, कृष्णा और सीमा के रूप में हुई है। ये तीनों महिलाएं कोटा शहर की रहने वाली हैं और मोगिया गैंग से जुड़ी हुई हैं। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये महिलाएं साधारण वेशभूषा पहनकर तीन-चार के समूह में शहरों और कस्बों में ज्वेलरी की दुकानों की रेकी करती हैं। वे अकेले दुकानदार की दुकान में ग्राहक बनकर प्रवेश करती हैं और जैसे ही दुकानदार किसी अन्य ग्राहक में व्यस्त होता है, चुपचाप चोरी की वारदात को अंजाम देती हैं और अक्सर हजार- पांच सौ रुपये का कोई छोटा आभूषण खरीददकर संदेह से बचकर निकल जाती हैं। इसके बाद यह गैंग वेशभूषा बदलकर अगली दुकान की ओर रवाना हो जाती है। पूछताछ में सामने आया है कि इस गैंग ने इसी तरीके से प्रदेशभर में कई चोरियों को अंजाम दिया है।  

जयपुर हेरिटेज ज़ोन में खतरनाक इमारतों की पहचान शुरू, प्रशासन ने दिए नोटिस

जयपुर राजधानी जयपुर के परकोटे में पुरानी जर्जर इमारतों को चिन्हित कर उनके भवन मालिकों को नोटिस देने की कार्रवाई की जा रही है। पिछले दिनों झालावाड़ में स्कूल भवन की छत गिरने से बच्चों की मौत के बाद अब सरकार ने एहतियातन पुरानी जर्जर इमारतों को सील कर उन्हें ढहाने के लिए कहा है। स्थानीय निकाय विभाग ने सभी शहरी निकायों को इसके लिए आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा है। अब तक प्रदेश में 2 हजार से ज्यादा ऐसी इमारतों को सील कर उन्हें गिराने की कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम हैरिटेज जयपुर क्षेत्र में कुल 126 जर्जर भवन चिन्हित किए गए हैं। इनमें हवा महल आमेर जोन में 29, किशनपोल जोन में 65, आदर्श नगर जोन में 18 व सिविल लाइन जोन में 14 जर्जर भवनों की पहचान की गई है। खासतौर पर परकोटे में बनी पुरानी हवेलियों के गिरने का खतरा सबसे ज्यादा है। सैकड़ों साल पहले बनाई गई ये हवेलियां अब गिरने की कगार पर आ चुकी हैं। चिन्हित जर्जर भवनों और इमारतों को सभी जोन उपायुक्त की ओर से नोटिस दिए जा चुके हैं। नोटिस में भवन मालिक को आमजन की सुरक्षा को देखते हुए जल्द भवन की मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं। जोन उपायुक्त के निर्देशन में मरम्मत कार्य की जिओ टैगिंग फोटो और वीडियो उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जर्जर भवनों की मॉनिटरिंग के लिए हैरिटेज निगम आयुक्त डॉ. निधि पटेल ने एक टीम का भी गठन किया है। टीम अतिरिक्त आयुक्त सुरेंद्र यादव की अध्यक्षता में बनाई गई है, जो जर्जर भवनों की मॉनिटरिंग करेगी और आयुक्त को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

खतरनाक इमारतों पर बड़ी कार्रवाई: 2699 भवन होंगे सील और ध्वस्त

जयपुर प्रदेश में झालवाड़ में स्कूल बिल्डिंग गिरने हुई बच्चों की मौतों के बाद अब स्वायत्त शासन विभाग ने प्रदेश भर में जर्जर इमारतों को चिन्हित करने का काम शुरू कर उन्हें ध्वस्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग के सचिव रवि जैन ने इसे लेकर गुरुवार को सभी 224 निकायों के प्रमुखों की बैठक ली।  इस बैठक में प्रदेश में 2699 भवनों के जर्जर होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद उन्होंने इन भवनों को सील कर इन्हें ध्वस्त करने की कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए हैं। रवि जैन ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश अनुसार प्रदेश के 224 नगरीय निकायों में अब तक कुल 2 हजार 699 जर्जर भवनों की पहचान की जा चुकी है, जिन्हें नियमानुसार सील करके ध्वस्त करने की कार्रवाई की जा रही है। जैन ने सख्त निर्देश दिए कि सभी आयुक्त और अधिशासी अधिकारी अपने क्षेत्रों में जाकर नियमित रूप से निरीक्षण कर जर्जर भवनों के सामने स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाएं, जिससे आम जनता को चेतावनी मिल सके और किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। बारिश में विद्युतजनित हादसों को लेकर भी बैठक में चर्चा की गई। जैन ने विद्युत तंत्र की सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए विद्युत डिस्कॉम के अभियंताओं के साथ समन्वय कर सड़क किनारे ढीले तारों को तुरन्त ठीक करने के आदेश दिए। इसके साथ ही बिजली के खम्भों, डीपी, केबल बॉक्स और स्वीच बॉक्स के पास फैले हुए लूज तारों को हटाने, स्वीच बॉक्स के टूटे ढक्कनों की तुरंत मरम्मत करने के निर्देश दिए। वहीं आकस्मिक अग्निकांड या करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अग्निशमन वाहन, तकनीकी उपकरण और स्टाफ को हमेशा तैयार रखने के निर्देश दिए। बैठक में हरियालो राजस्थान के तहत करवाए जा रहे पौधारोपण के कार्यों की भी समीक्षा की गई, जिसमें अधिकारियों को अपने-अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप पौधारोपण करने के निर्देश दिए गए।

लसाड़िया में बाइक चोर गिरोह पकड़ा गया, मास्टर माइंड निकला स्कूली उम्र का बालक

सलूंबर सलूंबर जिले की लसाड़िया पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए बाइक चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। लसाड़िया थाना क्षेत्र में लगातार हो रही बाइक चोरी की वारदातों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर इस गिरोह का खुलासा किया। थानाधिकारी हर्षराज सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने गिरोह से जुड़े तीन शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा चोरी की बाइक खरीदने वाले दो अन्य व्यक्तियों को भी पुलिस ने पकड़ा है। वहीं गिरोह का मास्टर माइंड एक बाल अपचारी निकला, जो पहले भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रह चुका है। पुलिस ने मुख्य सरगना समेत दो बाल अपचारियों को डिटेन किया है। पूछताछ और छापेमारी के बाद पुलिस ने एक चोरी की बाइक, एक बाइक के विभिन्न पार्ट्स और दो प्रयुक्त बाइक जब्त की हैं, जो अलग-अलग घटनाओं में चोरी की गई थीं। इस गिरोह का नेटवर्क क्षेत्र के कई हिस्सों में फैला हुआ था और ये चोरी की गई बाइकों को सस्ते दामों में बेचते थे। एसपी राजेश यादव के निर्देश पर यह पूरी कार्रवाई हुई। एसपी यादव ने बताया कि क्षेत्र में बाइक चोरी की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया गया था, जिसमें लसाड़िया पुलिस ने कई कार्रवाइयां की हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से आमजन ने राहत की सांस ली है। वहीं गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी है।

अहमदाबाद-जयपुर समेत कई शहरों में ED की रेड, साइबर फ्रॉड में करोड़ों की बरामदगी

जयपुर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मुंबई शाखा ने एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अहमदाबाद, जयपुर, जबलपुर और पुणे स्थित कई ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी एक जाली लोन स्कीम से जुड़े चल रहे मामले की जांच के सिलसिले में की गई है, जिसके जरिए अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था। ईडी ने इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में नकदी और बहुमूल्य धातुएं जब्त की हैं। ईडी के अधिकारियों ने इस अभियान के दौरान 7 किलोग्राम सोना, 62 किलोग्राम चांदी, 1.18 करोड़ रुपए नकद और 9.2 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज बरामद किए। इसके साथ ही, फर्जी कॉल सेंटर के संचालन से जुड़े कई अहम डिजिटल सबूत भी जब्त किए गए हैं, जिनसे इस पूरे रैकेट की कार्यप्रणाली का पता चलेगा। जांच एजेंसी ने इस मामले में मुख्य आरोपी फर्म 'मैग्नाटेल बीपीएस कंसल्टेंट्स एंड एलएलपी' के दो पार्टनर्स संजय मोरे और अजीत सोनी को जयपुर से गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर भारत से संचालित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी गिरोह को चलाने का आरोप है। माना जा रहा है कि यह गिरोह अमेरिकी नागरिकों को कम ब्याज पर फर्जी लोन देने का झांसा देकर उनसे प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों के नाम पर पैसे ऐंठता था। ईडी की यह कार्रवाई भारत में स्थित कॉल सेंटरों के जरिए होने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के बाद इस रैकेट से जुड़े और भी लोगों के नाम सामने आने की उम्मीद है। ईडी के सूत्रों ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है और बरामद की गई संपत्तियों की कीमत अभी बढ़ सकती है।

कोचिंग इंडस्ट्री पर उपराष्ट्रपति की कड़ी टिप्पणी, कहा– अब ये ‘पोचिंग सेंटर’ बन चुके हैं

कोटा भारत के उपराष्ट्रपति, जगदीप धनखड़ ने आज कहा, “कोचिंग सेंटर अब ‘पोचिंग सेंटर’ बन चुके हैं। ये सुदृढ़ सांचों में प्रतिभा को जकड़ने वाले काले छिद्र बन गए हैं। कोचिंग सेंटर अनियंत्रित रूप से फैल रहे हैं, जो हमारे युवाओं के लिए, जो कि हमारे भविष्य हैं—एक गंभीर संकट बनता जा रहा है। हमें इस चिंताजनक बुराई से निपटना ही होगा। हम अपनी शिक्षा को इस तरह कलंकित और दूषित नहीं होने दे सकते।” धनखड़ ने आगे कहा, “अब देश किसी सैन्य आक्रमण से नहीं, बल्कि विदेशी डिजिटल बुनियादी ढांचे पर निर्भरता से कमजोर और पराधीन होंगे। सेनाएं अब एल्गोरिद्म में बदल गई हैं। संप्रभुता की रक्षा का संघर्ष अब तकनीकी स्तर पर लड़ा जाएगा।” उपराष्ट्रपति ने तकनीकी नेतृत्व को नई राष्ट्रभक्ति का आधार बताते हुए कहा, “हम एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं—एक नए राष्ट्रवाद के युग में। तकनीकी नेतृत्व अब देशभक्ति की नई सीमा रेखा है। हमें तकनीकी नेतृत्व में वैश्विक अगुवा बनना होगा।” धनखड़ ने रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात-निर्भरता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “यदि हम रक्षा के क्षेत्र में बाहर से तकनीकी उपकरण प्राप्त करते हैं, तो वह देश हमें ठहराव की स्थिति में ला सकता है।” डिजिटल युग में बदलती वैश्विक शक्ति संरचनाओं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “21वीं सदी का युद्धक्षेत्र अब भूमि या समुद्र नहीं है। पारंपरिक युद्ध अब अतीत की बात हो गई है। आज हमारी शक्ति और प्रभाव ‘कोड, क्लाउड और साइबर’ से तय होते हैं।” भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), कोटा, राजस्थान के चौथे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए श्री धनखड़ ने कहा, “हम गुरुकुल की बात कैसे न करें? हमारे संविधान की 22 दृश्य-प्रतिमाओं में एक गुरुकुल की छवि भी है। हम सदैव ज्ञानदान में विश्वास रखते आए हैं। कोचिंग सेंटर को अपने ढांचे का उपयोग कौशल केंद्रों में परिवर्तित करने के लिए करना चाहिए। मैं नागरिक समाज और जनप्रतिनिधियों से आग्रह करता हूं कि इस समस्या की गंभीरता को समझें और शिक्षा में पुनर्संयम लाने हेतु एकजुट हों। हमें कौशल आधारित कोचिंग की आवश्यकता है।” धनखड़ ने अंकों की होड़ के दुष्परिणामों पर चेताते हुए कहा, “पूर्णांक और मानकीकरण के प्रति जुनून ने जिज्ञासा को खत्म कर दिया है, जो कि मानव बुद्धिमत्ता का एक स्वाभाविक अंग है। सीटें सीमित हैं लेकिन कोचिंग सेंटर हर जगह फैले हुए हैं। वे वर्षों तक छात्रों के मन को एक ही ढर्रे में ढालते हैं, जिससे उनकी सोचने की शक्ति अवरुद्ध हो जाती है। इससे कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।” छात्रों को अंकों से ऊपर सोचने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा, “आपकी मार्कशीट और अंक आपको परिभाषित नहीं करेंगे। प्रतिस्पर्धी दुनिया में प्रवेश करते समय, आपका ज्ञान और सोचने की क्षमता ही आपको परिभाषित करेगी।” डिजिटल क्षेत्र की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “एक स्मार्ट ऐप जो ग्रामीण भारत में काम नहीं करता, वह पर्याप्त स्मार्ट नहीं है। एक एआई मॉडल जो क्षेत्रीय भाषाओं को नहीं समझता, वह अधूरा है। एक डिजिटल उपकरण जो दिव्यांगों को शामिल नहीं करता, वह अन्यायपूर्ण है।” युवाओं से स्थानीय समाधान को वैश्विक स्तर तक ले जाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “भारत के युवाओं को टेक्नोलॉजी की दुनिया के सजग संरक्षक बनना चाहिए। हमें भारत के लिए भारतीय प्रणालियां बनानी होंगी और उन्हें वैश्विक बनाना होगा।” डिजिटल आत्मनिर्भरता में भारत को अग्रणी बनाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “हमें अपनी डिजिटल नियति के निर्माता बनना होगा और अन्य देशों की नियति को भी प्रभावित करना होगा। हमारे कोडर, डेटा वैज्ञानिक, ब्लॉकचेन इनोवेटर और एआई इंजीनियर आज के राष्ट्र निर्माता हैं। भारत, जो कभी वैश्विक अग्रणी था, अब केवल उधार की तकनीक का उपयोगकर्ता बनकर नहीं रह सकता। पहले हमें तकनीक के लिए वर्षों प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। अब यह समय सप्ताहों में सिमट गया है। हमें तकनीक का निर्यातक बनना चाहिए।” धनखड़ ने शिक्षा को फैक्टरी की तरह संचालित करने की प्रवृत्ति का विरोध करते हुए कहा, “हमें इस असेंबली-लाइन संस्कृति को समाप्त करना होगा क्योंकि यह हमारी शिक्षा के लिए अत्यंत खतरनाक है। कोचिंग सेंटर राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के विपरीत हैं। यह विकास और प्रगति में बाधाएं उत्पन्न करता है।” उन्होंने कोचिंग सेंटरों द्वारा विज्ञापनों पर भारी खर्च की आलोचना करते हुए कहा, “अखबारों में विज्ञापनों और होर्डिंग्स पर भारी पैसा बहाया जाता है। यह पैसा उन छात्रों से आता है जो या तो कर्ज लेकर या बड़ी कठिनाई से अपनी पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। यह धन का उपयुक्त उपयोग नहीं है। ये विज्ञापन भले ही आकर्षक लगें, पर हमारी सभ्यतागत आत्मा के लिए आँखों की किरकिरी बन गए हैं।” अपने उद्बोधन का समापन करते हुए उपराष्ट्रपति ने रटंत शिक्षा की संस्कृति की तीव्र आलोचना की: “हम आज रट्टा मारने की संस्कृति के संकट से जूझ रहे हैं, जिसने जीवंत मस्तिष्कों को केवल अस्थायी जानकारी के यंत्रवत भंडारों में बदल दिया है। इसमें न तो कोई आत्मसात है, न कोई समझ। यह रचनात्मक विचारकों की बजाय बौद्धिक ‘ज़ॉम्बी’ तैयार कर रहा है। रट्टा ज्ञान नहीं देता, केवल स्मृति देता है। यह डिग्रियों को गहराई के बिना जोड़ता है।” इस अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े, संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) ए.के. भट्ट, निदेशक प्रो. एन.पी. पाढ़ी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।