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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मध्यप्रदेश आने का निमंत्रण

मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री से पार्लियामेंट हाउस में मुलाकात भोपाल 19 अगस्त- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पार्लियामेंट हाउस दिल्ली में सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुलाकात कर मध्यप्रदेश आने का निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में हाल ही में होने वाले किसान सम्मेलन और भोपाल मेट्रो ट्रेन का शुभारंभ करने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिवादन किया। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगीकरण का वातावरण चल रहा है। इस दिशा में स्वदेशी का अभियान भी पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत बनाने की कड़ी में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा लक्ष्य है कि स्वदेशी अभियान के तहत गुणवत्तायुक्त उत्पाद बनाए जाए। इसके लिए हम सबको अधिक काम करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पिछले सवा साल से औद्योगीकरण का प्रदेश में बड़ा अभियान चलाया जा रहा है, जिसके फलस्वरुप 30 लाख करोड़ से अधिक के एमओयू किए जा चुके हैं। इसमें 21 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में इसी क्रम से राज्य सरकार काम करती रहेगी और निरंतर विकास की राह पर अग्रसर होती रहेगी।

दिल्‍ली-NCR को मोदी ने दिया ₹11000 करोड़ का तोहफाघंटों का सफर होगा मिनटों में पूरा

दिल्ली 18 अगस्त – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 17 अगस्‍त को दिल्‍ली में अमूमन 11000 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना का उद्घाटन किया. इससे लाखों लोगों को ट्रैफिक जाम की समस्‍या से राहत मिलेगी NCR में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग 11,000 करोड़ रुपए की संयुक्त लागत वाली दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग की परियोजनाओं का उद्घाटन किया. दिल्ली के रोहिणी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 15 अगस्त को लाल किले से मैंने देश के विकास और आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास पर विश्वास से बात की. आज का भारत क्या सोच रहा है, उसके सपने और संकल्प क्या हैं, यह सब कुछ आज पूरी दुनिया अनुभव कर रही है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया जब भारत को देखती और परखती है, तब उसकी पहली नजर हमारी राजधानी पर पड़ती है. इसलिए दिल्ली को विकास की नई उचाईयो पर ले जाना है और विकास का ऐसा मॉडल बनाना है, जहां यह सबको महसूस हो कि यह विकसित होते भारत की राजधानी है.द्वारका एक्सप्रेसवे का 10.1 किलोमीटर लंबा दिल्ली खंड लगभग 5,360 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया गया है. यह खंड यशोभूमि, डीएमआरसी ब्लू लाइन और ऑरेंज लाइन तक होगा, आगामी बिजवासन रेलवे स्टेशन और द्वारका क्लस्टर बस डिपो को मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी से जोड़ेगा. अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (यूईआर-II) के अलीपुर से दिचांव कलां खंड के साथ-साथ बहादुरगढ़ और सोनीपत के लिए नए संपर्क मार्गों की लागत लगभग 5,580 करोड़ रुपए है. इससे दिल्ली के अंदर और आउटर रिंग रोड तथा मुकरबा चौक, धौला कुआं और एनएच-09 जैसे व्यस्त स्थानों पर यातायात सुगम हो जाएगा.

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का तोहफा: 20 मिनट में फरीदाबाद से नोएडा, बिना जाम के सफर

नई दिल्ली दिल्ली और फरीदाबाद से नोएडा की यात्रा करते समय अक्सर यातायात जाम का सामना करना पड़ता है, क्योंकि यह मार्ग ट्रैफिक के लिए जाना जाता है. लेकिन अब इस समस्या से जल्द ही राहत मिलने वाली है, क्योंकि एक महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य जारी है. इस एक्सप्रेसवे के पूरा होने पर, 31 किलोमीटर तक आपको ट्रैफिक जाम की चिंता नहीं करनी पड़ेगी. रिपोर्टों के अनुसार, यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे 31 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें 6 लेन होंगी. इसका निर्माण फरीदाबाद सेक्टर-65 से शुरू होकर जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक किया जा रहा है. यह एक्सप्रेसवे पश्चिम में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के डीएनडी-केएमपी स्पर से प्रारंभ होगा और पूर्व में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तथा यमुना एक्सप्रेसवे को पार करते हुए नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल पर समाप्त होगा. इस परियोजना का कार्य नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा किया जा रहा है. कितना काम हो चुका पूरा? इस एक्सप्रेसवे के हरियाणा खंड का निर्माण कार्य अपेक्षाकृत धीमी गति से चल रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश में इसका कार्य तेजी से प्रगति कर रहा है. रिपोर्टों के अनुसार, जेवर एक्सप्रेसवे का कार्य शुरू हुए दो वर्ष हो चुके हैं, और इसे पूरा करने की निर्धारित तिथि 21 जून 2025 थी, जो अब बीत चुकी है. अभी भी इस एक्सप्रेसवे का काफी काम बाकी है, और कुछ समय के लिए कार्य को रोकना भी पड़ा था. हरियाणा सेक्शन में कई स्थानों पर कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है, और अब 2026 के अंत तक इस एक्सप्रेसवे के पूर्ण होने की संभावना जताई जा रही है. 15 से 20 मिनट में पहुंचेंगे नोएडा इस परियोजना की कुल लागत लगभग 2,400 करोड़ रुपए से अधिक होने का अनुमान है. इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से नोएडा और फरीदाबाद के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी. वर्तमान में, फरीदाबाद से जेवर एयरपोर्ट पहुंचने में दो घंटे से अधिक का समय लगता है, जबकि इस नए मार्ग के खुलने के बाद यह यात्रा केवल 15 से 20 मिनट में पूरी हो सकेगी. इस एक्सप्रेसवे के बनने से इन दोनों शहरों के बीच यात्रा करने वाले वाहन चालकों को काफी सुविधा मिलेगी. इन इलाकों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे फरीदाबाद और नोएडा एयरपोर्ट के बीच बन रहा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे इन दोनों शहरों के कई क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा. यह एक्सप्रेसवे गौतमबुद्ध नगर के वल्लभनगर, अम्पुर और झुप्पा गांवों से होते हुए हरियाणा के बहपुर, कलां, मोहना और नरहावली गांवों तक पहुंचेगा. इसके अतिरिक्त, यह कुंडली गाजियाबाद पलवल (KGP), यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई हाईवे और कुंडली, मानेसर, पलवल (KMP) हाईवे से भी जुड़ाव स्थापित करेगा.

सत्येंद्र जैन को राहत के बाद AAP का BJP पर हमला, सौरभ बोले- ‘अब दोषियों पर हो केस’

नई दिल्ली सीबीआई कोर्ट ने सोमवार को आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री सत्येंद्र जैन को एक मामले में क्लीन चिट दी. इसके बाद, मंगलवार को आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर तीखा हमला किया. दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सत्येंद्र जैन को अभी आधा न्याय मिला है, और पूरा न्याय तब मिलेगा जब उन पर झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि सत्येंद्र जैन पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता, साथ ही एलजी और सीबीआई के अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. ‘AAP को बदनाम करने के लिए की थी झूठी शिकायत’ सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि विजेंद्र गुप्ता पहले झूठी शिकायतें दर्ज कराते हैं, जिन्हें एलजी द्वारा सीबीआई को भेजा जाता है. इन शिकायतों में कोई ठोस आधार नहीं होता, फिर भी सत्येंद्र जैन के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए जाते हैं. इसके बाद, बिना किसी सबूत के, सीबीआई जांच शुरू करती है, जिससे सत्येंद्र जैन और उनके परिवार के साथ आम आदमी पार्टी को लगातार परेशान किया जाता है. क्या इस प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? अदालत द्वारा इस मामले को बंद करने से यह स्पष्ट हो गया है कि विजेंद्र गुप्ता ने केवल सत्येंद्र जैन और “आप” को बदनाम करने के उद्देश्य से झूठी शिकायत की थी. ‘कुछ भी नहीं है शिकायत में’ सौरभ भारद्वाज ने कहा कि उनके अनुसार, कानून में जहां भी अन्याय होता है, उसकी भरपाई का प्रावधान होना चाहिए. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने एक झूठी शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद, बीजेपी द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल ने उस शिकायत को सीबीआई को जांच के लिए भेज दिया, जबकि शिकायत में कोई ठोस तथ्य नहीं थे. इसके बावजूद, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री सत्येंद्र जैन का नाम शिकायत में शामिल किया गया. ‘सत्येंद्र जैन के परिवार का हुआ उत्पीड़न ‘ सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एलजी साहब उस शिकायत को जांच के लिए आगे बढ़ाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप सत्येंद्र जैन के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज किया जाता है. इसके बाद, उनके घर पर सीबीआई द्वारा छापेमारी की जाती है और उनकी बदनामी की जाती है. इस प्रक्रिया में सत्येंद्र जैन के परिवार और बच्चों का उत्पीड़न होता है. हम यह जानना चाहते हैं कि क्या इस सामाजिक नुकसान की भरपाई के लिए कानून में कोई प्रावधान मौजूद है. क्या अब विजेंद्र गुप्ता और एलजी साहब के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? क्या उन सीबीआई अधिकारियों पर भी मुकदमा नहीं चलाना चाहिए, जिन्होंने बिना किसी ठोस आधार के सत्येंद्र जैन के खिलाफ मामला दर्ज किया? सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सीबीआई यह कह सकती थी कि बिना किसी नाम के मुकदमा दर्ज किया जाएगा, जिसके बाद वह अपनी जांच शुरू करती. लेकिन जब भ्रष्टाचार के कोई ठोस सबूत नहीं हैं, तो यह कैसे संभव है कि कोई यह दावा करे कि सत्येंद्र जैन ने भ्रष्टाचार किया है और सीबीआई को इसकी जांच करनी चाहिए. सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह स्पष्ट है कि बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता ने सत्येंद्र जैन को बदनाम करने के उद्देश्य से यह शिकायत की थी. उनका मानना है कि एलजी, विजेंद्र गुप्ता और सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. यदि इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो यह कानून का अपवाद होगा.

कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स की जीत: दिल्ली हाईकोर्ट का सातवां वेतनमान लागू करने का आदेश

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है. कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम के कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स को सातवें वेतनमान के अनुसार वेतन देने का आदेश दिया है. इस निर्णय का लाभ एमसीडी के लगभग ढाई हजार कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स को मिलेगा. जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि समान कार्य करने वाले व्यक्तियों को समान वेतन मिलना चाहिए. यह निर्णय समान कार्य के लिए समान वेतन के संवैधानिक सिद्धांत पर आधारित है. बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय जगजीत सिंह बनाम पंजाब राज्य का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ही कार्य करने वाले दो कर्मचारियों को भिन्न-भिन्न वेतन देना मानव गरिमा के खिलाफ है. बेंच ने यह प्रश्न उठाया कि जब निगम के स्कूल में नियमित और कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स समान कार्य कर रहे हैं, तो उनके वेतन में भिन्नता क्यों होनी चाहिए. यह स्पष्ट है कि वे समान वेतन पाने के हकदार हैं. कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स इसके हकदार यह मामला प्रारंभ में शहनाज परवीन और अन्य द्वारा दिल्ली नगर निगम के खिलाफ केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में दायर किया गया था. कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स ने वकील अनुज अग्रवाल के माध्यम से यह मांग की थी कि उन्हें सातवें वेतन आयोग के अनुसार न्यूनतम वेतनमान दिया जाए. कैट ने इस मांग को स्वीकार कर लिया, लेकिन एमसीडी ने इसके आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी. हाईकोर्ट ने एमसीडी की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि समान कार्य के लिए समान वेतन का प्रश्न है, और अनुबंध पर कार्यरत शिक्षक इसके हकदार हैं. ‘ब्याज सहित भुगतान करना होगा’ कैट ने 21 मई को दिए गए आदेश में स्पष्ट किया था कि शिक्षकों को एक जनवरी 2016 से नियमित शिक्षकों के समान वेतन दिया जाना चाहिए. इसके साथ ही, महंगाई भत्ता और अन्य लाभ भी प्रदान किए जाने की आवश्यकता है. यदि तीन महीने के भीतर यह भुगतान नहीं किया जाता है, तो एमसीडी को इस पर ब्याज का भुगतान भी करना होगा. हाईकोर्ट ने भी इस आदेश को बनाए रखा है.

लाल किला बना सुरक्षा अलर्ट का केंद्र, चूक पर 7 पुलिसकर्मी नपे

नई दिल्ली स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा से जुड़ी दिल्ली से बड़ी खबर आई है। दिल्ली के लाल किले की सुरक्षा में तैनात एक हेड कांस्टेबल समेत 7 पुलिसकर्मियों को लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि लाल किले में स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित होने वाला कार्यक्रम को लेकर हर रोज पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मॉक ड्रिल करती है। शनिवार को भी एक ड्रिल की गई। इसमें दिल्ली पुलिस स्पेशल स्टाफ की एक टीम सिविल ड्रेस में डमी बम के साथ लाल किला परिसर में दाखिल हुई। लेकिन लाल किले की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी बम का पता नहीं लगा सके जिसके बाद सुरक्षा में तैनात सभी 7 पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया गया। तत्काल प्रभाव से पुलिसकर्मी सस्पेंड स्पेशल सेल की एक टीम शनिवार को सादे कपड़ों में डमी बम के साथ लाल किले परिसर में दाखिल हुई। उस समय, सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी बम का पता नहीं लगा सके। इसलिए उन पर एक्शन हुआ है। लाल किले की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक का मामला होने से सात पुलिसकर्मी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। साथ ही बाकी जवानों को डीसीपी राजा बांठिया ने सख्त हिदायत दी।  तत्काल प्रभाव से संबंधित सभी पुलिसकर्मी लाइन हाजिर इस चूक के बाद तत्काल प्रभाव से संबंधित सभी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है. डीसीपी का कहना है कि ये सुरक्षा में नहीं है, इस तरह हम अपनी तैयारी को और पुख्ता कर रहे हैं. वहीं, सोमवार को लाल किले में घुसपैठ कर रहे पांच बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया, जिनको बांग्लादेशी दूतावास को सौंपकर डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. पूछताछ में फिलहाल कोई संदिग्ध गतिविधि सामने नहीं आई है. सभी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. 15 अगस्त को लेकर लाल किले की सुरक्षा अभूतपूर्व -डीसीपी राजा बांठिया डीसीपी राजा बांठिया का कहना है कि 15 अगस्त को लेकर लाल किले की सुरक्षा अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दी गई है. रात-दिन पुलिस व अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात हैं. किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति की आवाजाही सख्ती से प्रतिबंधित है. खासकर आईआईटी गेट, नेटा गेट, लोहे वाले गेट समेत सभी प्रमुख एंट्री पॉइंट्स पर ट्रिपल लेयर सुरक्षा व्यवस्था की गई है. उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा घेरा और सतर्कता आने वाले दिनों में और बढ़ाई जाएगी. उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, जिससे त्योहार शांतिपूर्ण व सुरक्षित तरीके से मनाया जा सके. लाल किला में जबरन घुसने की कोशिश कर रहे थे 6 बांग्लादेशी वहीं लाल किले की सुरक्षा से जुड़ी एक और खबर सामने आई है। दिल्ली पुलिस ने लाल किला परिसर में जबरन घुसने के आरोप में 6 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनकी उम्र करीब 20-25 साल बताई जा रही है। ये सभी अवैध बांग्लादेशी हैं जो दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में मजदूरी करते हैं। आरोपियों के पास से बांग्लादेशी दस्तावेज मिले  पुलिस को इनके पास से बांग्लादेशी दस्तावेज मिले हैं। फिलहाल पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इनका लाल किले में घुसने का मकसद क्या था।

सांसद बना लुटेरों का निशाना: दिल्ली में मॉर्निंग वॉक के दौरान चेन स्नैचिंग

नई दिल्ली दिल्ली के उच्च सुरक्षा वाले चाणक्यपुरी क्षेत्र में एक गंभीर घटना घटित हुई है, जिसमें सांसद सुध की कीमती चेन लूट ली गई. सांसद सुधा जो तमिलनाडु भवन में निवास करती हैं, आज सुबह अपनी सुबह की सैर पर निकली थीं, तभी यह घटना हुई. घटना के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए मामला दर्ज किया और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस संवेदनशील क्षेत्र में हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है. आर. सुधा, जो तमिलनाडु के मयिलादुथुराई लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं, ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर एक घटना की जानकारी दी है. पत्र में उन्होंने बताया कि चाणक्यपुरी क्षेत्र में पोलैंड दूतावास के निकट आज सुबह उनकी सोने की चेन छीन ली गई, जिसके दौरान उन्हें चोटें भी आईं. आर. सुधा ने गृह मंत्री से अनुरोध किया है कि वे अधिकारियों को निर्देश दें कि अपराधी का पता लगाकर उसे गिरफ्तार किया जाए. सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के माध्यम से दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर बीजेपी सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि दिल्ली में चेन और मोबाइल स्नैचिंग की घटनाएं इतनी सामान्य हो गई हैं कि लोग अब FIR दर्ज कराने की भी जहमत नहीं उठाते, क्योंकि उन्हें पता है कि यह प्रक्रिया समय की बर्बादी है. सौरभ भारद्वाज ने अपने एक्स हैंडल पर जानकारी दी कि दिल्ली में एक महिला सांसद के साथ सुबह 6 बजे चेन स्नैचिंग की घटना हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, बाइक पर सवार बदमाशों ने उनकी सोने की चेन खींचकर मौके से फरार हो गए. सौरभ भारद्वाज ने यह भी कहा कि दिल्ली के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि पुलिस में FIR दर्ज कराने का कोई फायदा नहीं है, यह केवल समय की बर्बादी साबित होती है. नेता ने कहा कि इस स्थिति के लिए केवल पुलिस को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. दिल्ली पुलिस में हजारों पद खाली हैं, और सरकार नई भर्तियों में रुचि नहीं दिखा रही है. जो पुलिसकर्मी हैं, वे VIP सुरक्षा और आम आदमी पार्टी के सदस्यों को फंसाने में व्यस्त हैं. पुलिस का राजनीतिकरण हो चुका है, और उनका मूल्यांकन कार्य के बजाय राजनीतिक गतिविधियों के आधार पर किया जाता है, जिसके अनुसार उन्हें पदस्थापित किया जाता है. सौरभ भारद्वाज ने यह भी बताया कि दिल्ली की महिलाएं अब सुबह की सैर पर चेन पहनकर नहीं निकलतीं, क्योंकि वे मानती हैं कि सुरक्षित रहने के लिए चेन को घर पर ही रखना बेहतर है. चूंकि ये नेता तमिलनाडु से हैं, इसलिए उन्हें दिल्ली की पुलिस व्यवस्था की वास्तविकता का सही अंदाजा नहीं है.

दिल्ली में बढ़ा अपराध: कांग्रेस सांसद की सुबह-सुबह चेन लूटी, FIR दर्ज

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में अब नेता भी सुरक्षित नहीं दिख रहे। कांग्रेस सांसद सुधा रामकृष्णन की आज सुबह दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में चेन छीन ली गई। सांसद तमिलनाडु भवन में रहती हैं। दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। ये घटना तब हुई जब सुधा रामकृष्णन सोमवार सुबह मॉर्निंग वॉक पर गई थीं। इस दौरान बदमाश आए और उनकी चेन छीन फरार हो गए। तमिलनाडु के मयिलादुथुराई से सांसद रामकृष्णन ने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब वह अपनी साथी सांसद डीएमके की रजती के साथ चाणक्यपुरी के पोलिश दूतावास के पास टहल रही थीं। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना के बाद उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भी लिखा है। उन्होंने इसमें बताया कि स्कूटर पर सवार एक शख्स ने उनकी चेन छीन ली। उसने हेलमेत से अपना चेहरा छिपाया हुआ था। उन्होंने बताया कि घटना सुबह लगभग 6 बजकर 15 मिनट के आसपास की है। बदमाश विपरीत दिशा से उनके पास आया और सोने की चेन छीनकर फरार हो गया। गर्दन पर चोट, कपड़े भी फट गए उन्होंने बताया कि बदमाश काफी धीमे-धीमे उनकी तरफ आ रहा था, इसलिए वह अंदाजा भी नहीं लगा पाईं कि वो कुछ ऐसा करने वाला है। इस घटना में उनकी गर्दन पर चोट आई है और उनका चूड़ीदार भी फट गया।

शिकोहपुर लैंड डील केस में वाड्रा पर बढ़े दबाव, ED का दावा— ‘क्राइमिंग से हुई संपत्ति की खरीद’

नई दिल्ली दिल्ली की एक अदालत ने रॉबर्ट वाड्रा को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने वाड्रा का ये नोटिस शिकोहापुर जमीन मामले को लेकर दिया है. ईडी ने इस मामले कोर्ट को बताया था कि रॉबर्ट वाड्रा की स्काईलाइड कंपनी ने उच्च अधिकारियों के दबाव में व्यावसायिक आवास विकास के लिए लाइसेंस हासिल किया.  ईडी ने कोर्ट के सामने तर्क दिया कि लाइसेंस की फाइलों को जल्दबाजी में संसाधित किया गया और वित्तीय क्षमता की जांच नहीं की गई. लाइसेंस अनुचित प्रभाव और पूर्व-आवश्यकताओं को दरकिनार करके प्राप्त किया गया. ED ने वाणिज्यिक लाइसेंस जारी करने के लिए ज़िम्मेदार सरकारी अधिकारियों के बयान भी पेश किए.कंपनी ने चार स्तर पर पैसे लिए.  रॉबर्ट वाड्रा पर ED के गंभीर आरोप राउज एवेन्यू कोर्ट में जांच एजेंसी ED ने आरोप लगाते हुए कहा था कि इस मामले में जांच एजेंसी के पास रॉबर्ट वाड्रा को लेकर अहम सबूत हैं और यह मनी लॉन्ड्रिंग का एक मजबूत उदाहरण है, जहां अपराध की आय से अचल संपत्तियां खरीदी गईं. सबूत स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि अपराध की आय को प्राप्त किया गया, परत-दर-परत छुपाया गया और उसका फायदा उठाया गया. कोर्ट में वकील ने दलील देते हुए कहा कि यह अदालत इस मामले की सुनवाई करने के लिए सक्षम है क्योंकि अपराध की कुछ गतिविधियां दिल्ली में भी हुई थीं. यह मामला वर्ष 2008 में के गुरुग्राम स्थित शिकोहपुर गांव में जमीन खरीद से जुड़ा है, जिसे राॅबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने खरीदा था। ईडी ने 17 जुलाई 2025 को दाखिल अपनी शिकायत में वाड्रा, उनकी कंपनी स्काइलाइट हास्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, सत्यानंद याजी, केवल सिंह वीरक समेत 11 व्यक्तियों और संस्थाओं को आरोपित बनाया है। प्रारंभिक प्राथमिकी गुरुग्राम पुलिस ने दर्ज की थी, जिसमें जमीन की धोखाधड़ी से खरीद और अवैध लाइसेंस प्राप्त करने का आरोप है। ईडी ने 37.64 करोड़ रुपये की 43 अचल संपत्तियों को 16 जुलाई को अस्थायी रूप से जब्त किया था। 2008 की जमीन डील पर मनी लॉन्ड्रिंग केस ED ने 17 जुलाई 2025 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है. इस चार्जशीट में कुल 11 लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है, जिसमें रॉबर्ट वाड्रा, उनकी कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, उनके सहयोगी सत्यानंद याजी, केवल सिंह विरक और उनकी कंपनी ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल हैं. मामला गुरुग्राम के सेक्टर 83, गांव शिकोहपुर की 3.53 एकड़ ज़मीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ा है, जो साल 2008 में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ने खरीदी थी. आरोप है कि इस डील में झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ और पर्सनल इनफ्लुएंस से कमर्शियल लाइसेंस भी लिया गया. 28 अगस्त को अगली सुनवाई तय इस मामले में पहले ही FIR नंबर 288, दिनांक 01.09.2018 को गुरुग्राम पुलिस ने दर्ज की थी. अब ED ने जांच के बाद 16 जुलाई 2025 को 43 प्रॉपर्टीज (37.64 करोड़ रुपये की) अटैच की हैं और फिर चार्जशीट फाइल की गई है. फिलहाल, राउज एवेन्यू कोर्ट अब 28 अगस्त को इस मामले में सुनवाई करेगा. ED ने कोर्ट में कहा कि जांच में पता चला है कि वाड्रा की कंपनी को 42.62 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है, जो दिल्ली में स्तरीकृत थे, जिसके कारण इस न्यायालय का अधिकार क्षेत्र समाप्त हो गया. आपको बता दें कि इस इस मामले की सुनवाई 31 जुलाई को राउज़ एवेन्यू कोर्ट में संक्षिप्त रूप से हुई. मामले की सुनवाई के दौरान, ईडी ने एक बड़ा दावा किया है कि स्काईलाइट ने शीर्ष स्तर के दबाव का उपयोग करके वाणिज्यिक आवासीय विकास के लिए लाइसेंस प्राप्त किया.   

शहर को मिलेगा राहत? आवारा कुत्तों पर लगाम के लिए दिल्ली सरकार का तीन-स्तरीय प्लान

नई दिल्ली दिल्ली में आवारा कुत्तों और मवेशियों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं. हाल ही में एक 6 वर्षीय बच्ची की कुत्ते के काटने से मृत्यु ने इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ा दिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस समस्या के समाधान के लिए कानूनी संशोधनों सहित विभिन्न उपायों पर चर्चा की गई. बैठक में यह सुझाव दिया गया कि यदि अदालत से अनुमति मिलती है, तो इन कुत्तों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है. दिल्ली सरकार ने इस मुद्दे के समाधान के लिए एक व्यापक योजना बनाई है, जिसमें आवारा कुत्तों को माइक्रोचिप लगाने और उनके लिए आश्रय केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है. इस पहल को भारतीय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा तैयार की जाने वाली नई नीति का समर्थन प्राप्त होगा, और दिल्ली सरकार इस योजना के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करेगी. हालांकि, मौजूदा पशु जन्म नियंत्रण नियम 2023 में आवश्यक प्रावधानों की कमी के कारण इसमें संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही है. कानून में बदलाव की तैयारी और बैठक के प्रमुख बिंदु दिल्ली सरकार ने Animal Birth Control (ABC) Rules, 2023 में संशोधन पर विचार करना शुरू कर दिया है. वर्तमान में ये नियम केवल नसबंदी की अनुमति देते हैं, लेकिन आवारा कुत्तों को अन्यत्र स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं देते. सरकार गंभीर मामलों में इन कुत्तों को दूसरी जगह भेजने के लिए अदालत का रुख करने की योजना बना रही है. इस संदर्भ में एक बैठक में बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के उपायों पर भी चर्चा की गई. अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार है जब अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है. क्यों बनी यह स्थिति? सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता हाल ही में रोहिणी के पूठ कलां क्षेत्र में एक बच्ची की रेबीज से हुई मृत्यु ने समाज में गहरा आक्रोश उत्पन्न किया है. इस घटना के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में प्रतिदिन हो रहे सैकड़ों कुत्ते के काटने के मामलों पर चिंता व्यक्त की. कोर्ट ने यह भी कहा कि ये घटनाएं नागरिकों पर न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक रूप से भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं, और विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा अधिक है. अब आगे क्या? सरकार वर्तमान में अंतिम निर्णय से पूर्व कानूनी सलाह और न्यायालय के रुख का इंतजार कर रही है. हालांकि, इस मुद्दे पर हो रही गतिविधियों से यह स्पष्ट होता है कि दिल्ली सरकार और न्यायपालिका दोनों ही इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए सहमत हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिलोकेशन की अनुमति मिलती है, तो यह पूरे देश के लिए एक उदाहरण स्थापित कर सकती है.