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उत्तराखंड में मानसून का असर पूरे राज्य पर दिखने लगा, मूसलधार बारिश से हालात बिगड़े

देहरादून उत्तराखंड में मानसून का असर पूरे राज्य पर दिखने लगा है। पर्वतीय और मैदानी जिलों में लगातार हो रही बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित हो गया है। विशेष रूप से केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री मार्गों पर भूस्खलन से रास्ते बाधित हो गए हैं, जिससे चारधाम यात्रा भी प्रभावित हुई है।  रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम की ओर जाने वाला पैदल मार्ग गौरीकुंड से लगभग एक किलोमीटर आगे छोड़ी गधेरे पर बोल्डर, मलबा-पत्थर आने से पूरी तरह से बाधित हो गया है। यात्रियों की सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमें व लोक निर्माण विभाग के कार्मिक व मजदूर मौके पर हैं। फिलहाल यात्रियों के आवागमन को सोनप्रयाग से ही बंद कर दिया गया है। मैनुअल तरीके से मलबा-पत्थर हटाया जा रहा है। वहीं मनकटिया क्षेत्र व छोटी पार्किंग गौरीकुंड मार्ग पैदल आवाजाही के लिए सुचारु है।  जिला आपदा प्रबंध अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि यात्रियों को सचेत किया जा रहा है। जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग ने भी यात्रियों को मौसम के अनुसार यात्रा की सलाह दी है। उत्त्तरकाशी जिले में यमुनोत्री हाईवे एन एच 134 पर बनास के पास भारी भू-धसाव से सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद है। मलबा हटाने के साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था जुटाई जा रही है ताकि यात्रियों की आवाजाही हो सके।  गंगोत्री हाईवे एनएच 108 पर पापड़ गाड़ के पास भी भू-धसाव हुआ है, जिससे मार्ग पर वाहनों का आवागमन बंद हैं। सीमा सड़क संगठन व लोक निर्माण विभाग की टीमें सड़क सुधार कार्य में जुटी हुई हैं। इसके अलावा पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश से गंगा, यमुना, सरयू, गोमती समेत सभी नदियां खतरें के निशान के पास बह रही हैं। इससे हरिद्वार, ऋषिकेश समेत अन्य मैदानी जिलों में जलभराव की संभावनाओं को देखते हुए लोगों को सतर्क किया जा रहा है। राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण ने सभी जिलों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश की राजधानी देहरादून समेत अल्मोड़ा, बागेश्वर समेत अन्य जिलों में बारिश जारी है। बागेश्वर जिले में रात से लगातार बारिश से जिले में 14 आंतरिक मोटर मार्ग भूस्खलन से बंद हैं, जिन्हें खोलने के प्रयास किये जा रहे हैं। बारिश से सरयू और गोमती नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के सचिव विनोद सुमन ने बताया कि सभी जिले अलर्ट मोड में हैं और सभी जिलों से लगातार फीड बैक भी मिल रहा है।  

अमरनाथ यात्रा 2025: पहले ही दिन 12 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, 6411 का नया जत्था रवाना

श्रीनगर अमरनाथ यात्रा के लिए शुक्रवार को जम्मू से एक और जत्था भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना हुआ। इस जत्थे में 6411 तीर्थयात्री शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार सुबह भगवती नगर यात्रा निवास से 291 वाहनों के दो सुरक्षा काफिलों में कुल 6411 यात्री कश्मीर घाटी के लिए रवाना हुए। इनमें से 2789 यात्री बालटाल बेस कैंप की ओर जा रहे हैं, जबकि 3622 यात्री पहलगाम बेस कैंप जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि 38 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा के पहले दिन, गुरुवार को 12300 यात्रियों ने पवित्र गुफा में दर्शन किए। यात्रा के दौरान श्रद्धालु ‘बम बम भोले’ और ‘हर हर महादेव’ के जयकारों के साथ उत्साहपूर्वक तीर्थ कर रहे हैं। सुरक्षा के विषय पर तीर्थयात्रियों ने कहा, “उन्हें पाकिस्तान या उसके भाड़े के एजेंटों से कोई डर नहीं है। वो भगवान शिव के आह्वान पर यात्रा कर रहे हैं और उन्हीं की कृपा में सुरक्षित महसूस करते हैं।” इस साल की अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है, क्योंकि यह 22 अप्रैल के कायरतापूर्ण हमले के बाद हो रही है, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने पहलगाम में कथित तौर पर धर्म देखकर 26 पर्यटकों की हत्या की थी। फिलहाल यात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और स्थानीय पुलिस की मौजूदा ताकत को बढ़ाने के लिए सीएपीएफ की 180 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं। दोनों आधार शिविरों के रास्ते में सभी शिविर और जम्मू में भगवती नगर यात्री निवास से गुफा मंदिर तक का पूरा मार्ग सुरक्षाबलों की ओर से सुरक्षित है। तीर्थयात्री बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा तक दो रास्तों से पहुंचते हैं, जिसमें एक पारंपरिक पहलगाम मार्ग है और दूसरा छोटा, लेकिन कठिन बालटाल मार्ग है। पहलगाम रूट पर गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए चंदनवारी, शेषनाग और पंचतरणी से गुजरना पड़ता है, जिसमें कुल 46 किमी की दूरी तय करनी होती है। बालटाल मार्ग का उपयोग करने वालों को गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए 14 किमी की पैदल यात्रा करनी पड़ती है और यात्रा करने के बाद उसी दिन बेस कैंप वापस लौटना पड़ता है।  

वडोदरा स्कूल बम धमकी मामला: पुलिस ने शुरू की गहन जांच, बढ़ाई सुरक्षा

वडोदरा गुजरात के वडोदरा में एक और स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। इस बार हरनी इलाके में एयरफोर्स स्टेशन इलाके के पास स्थित सिग्नस स्कूल को निशाना बनाया गया है। शुक्रवार को एक अज्ञात व्यक्ति ने सिग्नस स्कूल में बम विस्फोट की धमकी दी। इससे वहां हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस भी तुरंत हरकत में आई और छात्रों को बाहर निकालते हुए स्कूल को खाली कराया गया। जानकारी के मुताबिक, अज्ञात व्यक्ति ने ईमेल के जरिए स्कूल में बम विस्फोट की धमकी दी थी। सूचना मिलने के बाद बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। स्कूल में सघन जांच और तलाशी अभियान शुरू किया गया। स्कूल में विस्फोट की धमकी मिलने के बाद टीचर, छात्रा और उनके अभिभावक भी दहशत में आ गए। अभिभावकों को घटना की जानकारी दी गई थी, जिसके बाद छात्रों को सुरक्षित घर भेज दिया गया। फिलहाल स्कूल में बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड टीमों की तलाशी के बाद कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। क्लासरूम के अलावा स्कूल परिसर के अन्य हिस्सों की गहन तलाशी ली गई। गुजरात के बड़े शहरों खासकर अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में पिछले कुछ समय से स्कूलों में बम विस्फोट की धमकियां मिल रही हैं। वडोदरा में 15 दिनों में ही तीसरे स्कूल को उड़ाने की धमकी दी गई है, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। पिछली बार वडोदरा स्थित नवरचना स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिली। यह धमकी स्कूल प्रशासन को ई-मेल के जरिए दी गई थी। लगातार दूसरे दिन धमकी भरा ई-मेल मिलने के बाद स्कूल प्रशासन और अभिभावक चिंतित रहे। हालांकि इस बार वडोदरा के इस नामी स्कूल को अज्ञात व्यक्ति ने बम से उड़ाने की धमकी दी है, जिसके बारे में पुलिस जानकारी जुटा रही है।  

पाकिस्तान: अल्पसंख्यक लड़कियों के जबरन विवाह और जबरन धर्मान्तरण, अपहरण, तस्करी, यूके की संसद में पाकिस्तान बेनकाब

लंदन  पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ धार्मिक उत्पीड़न का दौर जारी है। इस भयावह स्थिति को ब्रिटेन की संसद में आयोजित एक सत्र में उजागर किया गया। ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन फ्रीडम ऑफ रिलीजन ऑर बिलीफ की ओर से यह सेशन बुलाया गया था। इसमें सांसदों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान हिंदुओं, ईसाइयों, शियाओं और अहमदियों के खिलाफ अत्याचारों को व्यवस्थित और राज्य प्रायोजित बताया गया। सबूतों से पता चला कि ये घटनाएं अलग-थलग नहीं, बल्कि पाकिस्तानी राज्य और सैन्य तंत्र के समर्थन से सुनियोजित रणनीति का हिस्सा हैं। सिंध प्रांत में हिंदू और ईसाई समुदायों की नाबालिग लड़कियों का अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन हो रहा है। इस गंभीर समस्या पर सत्र में विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। अनुमान है कि हर साल 500 से 1,000 लड़कियों का अपहरण किया जाता है। ये अक्सर राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मौलवियों की ओर से संचालित धार्मिक स्थलों के जरिए तस्करी की जाती हैं। इसके अलावा, हिंदू मंदिरों और धर्मशालाओं पर हमले सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को मिटाने की कोशिश का हिस्सा हैं। साल 2023 में कश्मीर में एक मंदिर पर रॉकेट हमला इसका उदाहरण है। पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की मांग शिया और अहमदी समुदायों के खिलाफ जबरन गायब करने, सांप्रदायिक हिंसा और धार्मिक अधिकारों से वंचित करने की घटनाएं भी सामने आईं। सत्र में सिंध फ्रीडम मूवमेंट के अध्यक्ष सोहैल अबरो और दूसरे समुदायों के प्रतिनिधियों ने आवाज उठाई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की मांग की। इसके अलावा, ब्रिटिश सांसदों फ्लेर एंडरसन और डेविड स्मिथ ने विस्तृत आंकड़े और प्रत्यक्षदर्शी डिटेल पेश किए। सत्र के अंत में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन अत्याचारों की स्वतंत्र जांच, जबरन धर्म परिवर्तन और धार्मिक संस्थानों पर हमलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही, इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने की भी चर्चा हुई।

मॉनसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होगा राज्यसभा का 268वां सेशन, 21 अगस्त तक चलेगा

नई दिल्ली  मॉनसून सत्र 2025 के लिए राज्यसभा का 268वां सत्र सोमवार 21 जुलाई से शुरू होगा. आधिकारिक संसदीय बुलेटिन ने इस बात की पुष्टि की है. बता दें, सदस्यों को सम्मन विशेष रूप से सदस्य पोर्टल के माध्यम से जारी किए गए तथा सभी को मानसून सत्र के आगामी कार्यक्रम और कार्य दिवसों के बारे में सूचित किया गया. जानकारी के मुताबिक सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 21 अगस्त तक चलेगा, जिसमें सदन 12 अगस्त को स्थगित होगा तथा स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए 18 अगस्त को पुनः बैठक होगी. बैठकों का समय प्रत्येक कार्य दिवस पर प्रातः 11:00 बजे से अपराह्न 1:00 बजे तक तथा अपराह्न 2:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक निर्धारित किया गया है. राज्यसभा के मॉनसून सत्र 2025 में प्रमुख विधायी चर्चाएं और बहसें शामिल होने की उम्मीद है. संसद सदस्यों को सलाह दी गई कि वे सत्र के संबंध में अद्यतन जानकारी, परिपत्रों और अतिरिक्त निर्देशों के लिए नियमित रूप से सदस्य पोर्टल देखते रहें. इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक आयोजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इससे पहले संसद का मॉनसून सत्र21 जुलाई से लेकर 12 अगस्त तक प्रस्तावित था. वहीं, अब स्वतंत्रता दिवस के बाद भी सत्र जारी रहेगा. बता दें, स्वतंत्रता दिवस समारोह के कारण 13 और 14 अगस्त को संसद की बैठक नहीं होगी. आगामी मानसून सत्र 2025 ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला संसद सत्र होगा, जिसे भारत ने 7 मई को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में शुरू किया था, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी. संसद का बजट सत्र इस साल 31 जनवरी को शुरू हुआ था. बजट सत्र 2025 में वक्फ संशोधन विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए. सत्र के दूसरे हिस्से में दोनों सदनों की 17 बैठकें हुईं. पूरे बजट सत्र के दौरान कुल 26 बैठकें हुईं. वही, केंद्र की मोदी सरकार ने मॉनसून सत्र 2025 से पहले 19 जुलाई को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है. 

शरद पवार ने बताया- किसी की विचारधारा पसंद नहीं आने पर उसे नक्सली कहने का चलन बढ़ा

मुंबई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि अगर किसी का काम या विचारधारा पसंद नहीं आए तो उसे नक्सल करार देने का चलन बढ़ गया है। पवार ने शिवसेना की विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) मनीषा कायंदे की टिप्पणी पर यह बात कही। बता दें मनीषा कायंदे ने बुधवार को विधान परिषद में दावा किया था कि अर्बन नक्सलियों ने वारी वार्षिक तीर्थयात्रा में घुसपैठ की है और वे वारकरियों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। पवार ने कहा कि मुझे इस बारे में पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन जिन दो संगठनों के नाम मीडिया के जरिए सामने आए हैं, उनमें से एक है लोकायत। मैंने लोकायत का काम देखा है। पवार ने कहा कि इस संगठन का दृष्टिकोण आधुनिक है और पिछले कई सालों से रूढ़िवादिता के खिलाफ काम कर रहा है। वे नक्सली नहीं हैं। अगर किसी का काम या विचारधारा स्वीकार नहीं है तो उसे नक्सली करार देने का चलन बढ़ रहा है। एनसीपी प्रमुख पवार ने कहा कि पुणे में एल्गार परिषद और कोरेगांव भीमा में जाति हिंसा के बाद माओवादियों के साथ संबंध रखने के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। उन्होंने दावा किया कि यहां भी यही हो सकता है आज, राज्य सरकार उन विचारधाराओं के लिए लोगों को नक्सली करार दे रही है, जो उसे स्वीकार नहीं। पवार ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) द्वारा 5 जुलाई यानी शनिवार को आयोजित किए जा रहे कार्यक्रम में हिस्सा लेगी जिसमें तीन नीति के मुद्दे पर जीत का जश्न मनाया जाएगा।  

Iran के Oil की Shipping पड़ गई भारी, America ने लगाया Indian Citizen पर लगाया Ban

 वाशिंगटन अमेरिका ने ईरान से तेल और पेट्रोकेमिकल व्यापार में शामिल छह कंपनियों और कई जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें भारत और पाकिस्तान की एक-एक फर्म भी शामिल है। यह कार्रवाई अमेरिका की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यह जानकारी अमेरिकी विदेश मंत्रालय और ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने दी। पाकिस्तान के लाहौर में स्थित एलायंस एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड और नई दिल्ली में स्थित भारत की साई साबुरी कंसल्टिंग सर्विसेज पर ईरानी तेल व्यापार में उनकी कथित भूमिका के लिए प्रतिबंध लगाए गए हैं। OFAC के अनुसार, ये कंपनियां ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को गुप्त रूप से भेजने में शामिल एक नेटवर्क का हिस्सा थीं, जो अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करता है। प्रतिबंधों का कारण और असर ये प्रतिबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की "अधिकतम दबाव" नीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात को शून्य तक कम करना और उसके परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल विकास और क्षेत्रीय प्रभाव को सीमित करना है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने कहा, "हम ईरान के राजस्व स्रोतों को निशाना बनाना जारी रखेंगे और उसके ऐसे वित्तीय संसाधनों तक पहुंच को बाधित करेंगे, जो उसकी अस्थिर करने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं।" पाकिस्तान की एलायंस एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड पहले भी अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के लिए ब्लैकलिस्ट हो चुकी है। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ईरान और पनामा आधारित कंपनियों और उनके संचालित जहाजों को भी निशाना बनाया गया है। साई साबुरी कंसल्टिंग सर्विसेज पर दो एलपीजी टैंकरों, बैटेलूर और नील के कॉमर्शियल मैनेजर के रूप में काम करने का आरोप है, जो ईरानी तेल के परिवहन में शामिल थे। एक अरब डॉलर के तेल व्यापार पर लगा दिए नए प्रतिबंध  अमेरिका ने ईरान के करीब एक अरब डॉलर के तेल व्यापार पर एक बार फिर प्रतिबंध लगाए हैं। ईरान के तेल व्यापार को हिजबुल्लाह से मिलने वाली आर्थिक मदद पर प्रतिबंध लगाया है। अमेरिका ने ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों की जानकारी दी। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने बताया कि ईरान के साथ न्यूक्लियर डील पर बातचीत करने से पहले तेल व्यापार के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद को रोकने के लिए प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिका जानता है कि ईरान को तेल व्यापार करने के लिए हिजबुल्लाह पैसा देता है, लेकिन हिजबुल्ला ईरान से तेल लेकर उसे ईराक का तेल बताकर आगे सप्लाई करता है। हिजबुल्लाह की वित्तीय संस्था ऐसे कमाती मुनाफा ट्रेजरी सचिव ने बताया कि अमेरिका को हिजबुल्लाह के कंट्रोल वाली वित्तीय संस्था अल-क़र्द अल-हसन के बारे में पता चला है, जिसके अधिकारियों ने लाखों डॉलर के लेन-देन किया है, जिससे हिजबुल्लाह का फायदा हो रहा है। यह संस्था ईराक के बिजनेसमैन सलीम अहमद सईद की कंपनियां के मुनाफा कमा रही है। हिजबुल्लाह की यह संस्था सलीम की कंपनियों को फंडिंग करती है। सलीम की कंपनियां साल 2020 से ईरान से तेल खरीद रही है और उसे ईराक के तेल में मिलाकर अरबों डॉलर का मुनाफा कमा रहा है। ईरान से कच्चे तेल की इस खरीद फरोख्त का सीधा फायदा हिजबुल्लाह को हो रहा है, लेकिन अमेरिका ऐसा होने नहीं देगा। प्रतिबंधों से ईरान को होगा यह नुकसान ट्रेजरी सचिव ने कहा कि अमेरिका ईरान के रेवेन्यू सोर्स को टारगेट करता रहेगा, ताकि ईरान के रेवेन्यू में कटौती हो और देश में क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा मिले। ऑयल सपलाई करने वाले कई जहाज भी प्रतिबंधित किए हैं, जो सीक्रेट तरीके से ईरान के स्मगल ऑयल को तस्करों तक तेल पहुंचाते हैं। इसलिए अमेरिका ने 16 वित्तीय संस्थाओं और समुद्री जहाजों पर कार्रवाई की है, जो, अवैध तरीके से ईरान के तेल की तस्करी में शामिल थे। क्योंकि इन संस्थाओं को तेल बेचकर मिलने वाला पैसा आतंकवादी संगठनों हिजबुल्लाह, हमास और हूती विद्रोहियों को समर्थन में देता है। इसलिए तेल व्यापार पर प्रतिबंध लगाकर इस आय को रोकने की कोशिश की गई है। बता दें कि ईरान के तेल व्यापार पर अमेरिका प्रतिबंध लगाता रहा है और समय के साथ प्रतिबंध कड़े भी किए हैं। साल 2018 में ईरान जब परमाणु समझौते (JCPOA) से बाहर हुआ तो अमेरिका ने ईरान के तेल व्यापार पर प्रतिबंध लगाए। इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना, उस पर न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत करने के लिए दबाव डालना था। ईरान का 'शैडो फ्लीट' और तेल व्यापार अमेरिका का दावा है कि ईरान अपने तेल निर्यात को बनाए रखने के लिए "शैडो फ्लीट" या "डार्क फ्लीट" का उपयोग करता है, जो गुप्त रूप से तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को ट्रांसफर करता है। ये जहाज अक्सर बंदरगाहों की क्षेत्रीय सीमाओं के बाहर जहाज-से-जहाज ट्रांसफर के जरिए तेल की उत्पत्ति को छिपाते हैं। इस तरह का व्यापार मुख्य रूप से चीन जैसे देशों को टारगेट करता है, जो ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है। वैसे ये यह पहली बार नहीं है जब भारतीय कंपनियों पर ईरानी तेल व्यापार के लिए प्रतिबंध लगाए गए हैं। इस साल फरवरी में, चार अन्य भारतीय कंपनियों पर भी इसी तरह के आरोपों में प्रतिबंध लगाए गए थे। इसके अलावा, अक्टूबर 2024 में, भारत की गब्बारो शिप सर्विसेज और दिसंबर 2024 में दो अन्य भारतीय शिपिंग कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए थे। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से लागू हैं, लेकिन 2018 में ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान परमाणु समझौते से हटने के बाद इनमें और तेजी आई। इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को रोकना और क्षेत्रीय आतंकवादी समूहों को उसके समर्थन को कम करना है। हाल के महीनों में, इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमलों के बाद ये प्रतिबंध और सख्त हो गए हैं।

मोदी सरकार ने 3 भत्तों में किया 25% का बंपर इजाफा, केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा तोहफा

नई दिल्ली मोदी सरकार केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे सकती है। केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई 2025 से महंगाई भत्ते (DA) में 4 पर्सेंट की बढ़ोतरी का फायदा मिल सकता है। महंगाई के हालिया डेटा पर आधारित रिपोर्ट्स में यह बात कही गई है। इस बढ़ोतरी के बाद महंगाई भत्ता मौजूदा 55 पर्सेंट से बढ़कर 59 पर्सेंट पहुंच जाएगा। महंगाई भत्ते में यह बढ़ोतरी जुलाई से प्रभावी होगी, लेकिन इसकी आधिकारिक घोषणा अगस्त या सितंबर-अक्टूबर में फेस्टिव सीजन के करीब हो सकती है। CPI डेटा के आधार पर 59% पहुंच सकता है DA महंगाई भत्ते (DA) का कैलकुलेशन ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के आधार पर होता है। यह इंडेक्स मई 2025 में 0.5 पर्सेंट बढ़कर 144 पर पहुंच गया है। पिछले तीन महीने में इंडेक्स में बढ़ोतरी देखने को मिली है। मार्च 2025 में यह 143, अप्रैल में 143.5 और मई 2025 में अब यह 144 पर पहुंच गया है। अगर इंडेक्स में तेजी का रुझान बना रहता है और जून में यह 144.5 पर पहुंच जाता है तो ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) का 12 महीने का एवरेज करीब 144.17 पहुंचने की उम्मीद है। जब 7वें वेतन आयोग के फॉर्मूले का इस्तेमाल करते हुए इसे एडजस्ट किया जाता है तो डीए रेट 58.85 पर्सेंट पहुंच जाता है। ऐसे में सरकार जुलाई 2025 से महंगाई भत्ते को बढ़ाकर 59 पर्सेंट कर सकती है। कब होगा ऐलान? जून 2025 का CPI-IW डाटा जुलाई के आखिर या अगस्‍त महीने के शुरुआत में आएगा. इसी आधार पर केंद्रीय कैबिनेट महंगाई भत्ता तय किया जाएगा. यह बढ़ोतरी सितंबर-अक्‍टूबर में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा किया जा सकता है. फिर ये बढ़ा हुआ भत्ता जुलाई के महीने से जोड़कर दिया जाएगा. डीए में यह बढ़ोतरी तबतक होगी, जबतक 8वां वेतन आयोग लागू नहीं होता.  कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग?  पिछले वेतन आयोग के इतिहास पर नजर डालें तो किसी भी आयोग की सिफारिश लागू होने में 18 से 24 महीने का समय लगता है. ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि 8वां वेतन आयोग 2027 तक ही लागू हो सकता है. इसका मतलब है कि केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में इजाफे को लेकर कई और बढ़ोतरी मिल सकती है.  सितंबर या अक्टूबर में हो सकती है घोषणा महंगाई भत्ते (डीए) को एक साल में दो बार रिवाइज किया जाता है। यह रिवीजन आमतौर पर जनवरी और जुलाई में होता है। महंगाई भत्ता ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के 12 महीने के एवरेज के आधार पर तय होता है। महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी जुलाई से प्रभावी होगी, लेकिन आमतौर इसकी घोषणा बाद में की जाती है। पिछले सालों में सरकार ने ऐसे रिवीजन फेस्टिव पीरियड के करीब सितंबर या अक्टूबर में किए हैं। इस साल भी इसकी घोषणा दिवाली के करीब हो सकती है। सातवें वेतन आयोग के तहत यह महंगाई भत्ते में फाइनल बढ़ोतरी होगी, क्योंकि इसकी अवधि 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रही है। सरकार ने आठवें वेतन आयोग की घोषणा इस साल के शुरुआत में कर दी है, लेकिन इसमें आगे कोई प्रगति नहीं हुई है। सरकार को अभी नए कमीशन के चेयरमैन और मेंबर्स की नियुक्ति करनी है।

दिल्ली हाईकोर्ट में तीन, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दस, जबकि तेलंगाना हाईकोर्ट में चार न्यायाधीशों की नियुक्ति को हरी झंडी दी

नई दिल्ली   देश की न्यायपालिका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली, पंजाब-हरियाणा, तेलंगाना, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पटना समेत कई उच्च न्यायालयों में नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की है. इस प्रस्ताव के तहत, दिल्ली हाईकोर्ट में तीन, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दस, जबकि तेलंगाना हाईकोर्ट में चार न्यायाधीशों की नियुक्ति को हरी झंडी दी गई है. इसके अलावा राजस्थान, गुवाहाटी और अन्य हाईकोर्ट में भी नियुक्तियों को मंजूरी प्रदान की गई है. इन नियुक्तियों से न्यायिक व्यवस्था को तेजी मिलेगी और कई लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी. भारत के चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की बैठक 1 और 2 जुलाई को हुई, जिसमें देश के अलग-अलग हाई कोर्ट में नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी है. इस निर्णय के तहत दिल्ली हाईकोर्ट में तीन, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दस तथा तेलंगाना, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों के हाईकोर्ट में भी न्यायाधीशों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद पर नियुक्त करने की सिफारिश की है. दिल्ली हाईकोर्ट के जजों के रूप में शैल जैन, मधु जैन और विनोद कुमार के नामों को कॉलेजियम ने मंजूरी दी है. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के लिए 10 न्यायाधीश कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में 10 न्यायिक अधिकारियों की बतौर न्यायाधीश नियुक्ति को अपनी मंजूरी दे दी है. जिसमें विरिंदर अग्रवाल, मनदीप पन्नू, प्रमोद गोयल, शालिनी सिंह नागपाल, अमरिंदर सिंह ग्रेवाल, सुभाष मेहला, सूर्या प्रताप सिंह, रूपिंदरजीत चहल, आराधना साहनी और यशवीर सिंह राठौड़ के नाम शामिल हैं. कॉलेजियम ने तेलंगाना उच्च न्यायालय में न्यायाधीश पद के लिए चार वकीलों के नामों को स्वीकृति दी है. गौस मीरा मोहिउद्दीन, चलपति राव सुड्डाला, वाकीति रामकृष्ण रेड्डी और गादी प्रवीण कुमार इन वकीलों में शामिल होले वाले वाले नाम हैं. कॉलेजियम में शामिल न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने राजस्थान उच्च न्यायालय के लिए एक न्यायाधीश और एक वकील को जज के लिए मंजूरी दी है. वहीं, तुहिन कुमार गेडेला को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद पर नियुक्त किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश न्यायमूर्ति विश्वदीप भट्टाचार्य, जो कि वर्तमान में अतिरिक्त न्यायाधीश के पद पर हैं, इन्हें कॉलेजियम द्वारा मेघालय उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की गई है, अतिरिक्त न्यायाधीश के पद को स्थायी न्यायाधीश के पद में परिवर्तित किया गया है. दो न्यायिक अधिकारियों प्रांजल दास और संजीव कुमार शर्मा और दो वकीलों, अंजन मोनी कलिता और राजेश मजूमदार को गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए पांच वकीलों के नामों को मंजूरी दे दी गई है. इन पांच वकीलों में पुष्पेंद्र यादव, आनंद सिंह बहरावत, अजय कुमार निरंकारी, जय कुमार पिल्लई और हिमांशु जोशी का नाम मंजूर हुआ है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में पांच न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम ने मंजूरी दी है. जिसमें राजेश कुमार गुप्ता,आलोक अवस्थी,रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन भगवती प्रसाद शर्मा,प्रदीप मित्तल के नाम शामिल हैं. कॉलेजियम ने पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अजीत कुमार और प्रवीण कुमार को नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इन नियुक्तियों से न्यायिक व्यवस्था को गति मिलेगी. बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 2 जुलाई, 2025 को आयोजित अपनी बैठक में अधिवक्ता तुहिन कुमार गेडेला को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। एक अन्य निर्णय में कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति बिस्वदीप भट्टाचार्जी, अतिरिक्त जज को मेघालय हाईकोर्ट के स्थायी जज के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की। इसके अलावा दो न्यायिक अधिकारियों प्रांजल दास और संजीव कुमार शर्मा और दो अधिवक्ताओं, अंजन मोनी कलिता और राजेश मजूमदार को गुवाहाटी हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 1 जुलाई, 2025 को हुई अपनी बैठक में पांच अधिवक्ताओं को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। ये अधिवक्ता पुष्पेंद्र यादव, आनंद सिंह बहरावत, अजय कुमार निरंकारी, जय कुमार पिल्लई और हिमांशु जोशी हैं। इसके अलावा पांच न्यायिक अधिकारियों राजेश कुमार गुप्ता, आलोक अवस्थी, रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन, भगवती प्रसाद शर्मा और प्रदीप मित्तल को भी हाईकोर्ट के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।  

फिर पीएम मोदी ने त्रिनिदाद-टोबैगो की PM को दिया अयोध्या वाला खास गिफ्ट, स्वागत में खास डिनर, पत्ते पर खाना…

 पोर्ट ऑफ स्पेन  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय कैरिबियाई देश त्रिनिदाद एवं टोबैगो के दो दिवसीय दौरे पर हैं. यह उनकी पांच देशों की यात्रा का दूसरा चरण है. यहां राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन के पियार्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया. उन्हें यहां गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. त्रिनिदाद एवं टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर ने अपनी पूरी कैबिनेट के साथ एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत किया. इस दौरान उनकी कैबिनेट के 38 मंत्री और चार सांसद मौजूद थे. खुद पीएम कमला ने पारंपरिक भारतीय परिधान साड़ी पहनी थी. उनके साथ कई मंत्री और सांसद भी भारतीय परिधानों में नजर आए, जो दोनों देशों के सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है. पीएम मोदी के स्वागत समारोह में भारतीय संस्कृति की छठा बखूबी दिखाई दी. वहां के भारतीय समुदाय ने तिरंगा झंडा लहराकर और पारंपरिक लोकगीत गाकर पीएम मोदी का स्वागत किया. यह सांस्कृतिक प्रदर्शन दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक था. पोर्ट ऑफ स्पेन में भारतीय मूल के लोगों में पीएम मोदी के आगमन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया. लोगों ने हाथों में तिरंगे लेकर और पारंपरिक नृत्य पेश किए गए. पीएम मोदी ने भी इस गर्मजोशी का जवाब देते हुए भारतीय समुदाय का अभिनंदन किया. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने पोस्ट कर बताया कि पीए मोदी का पोर्ट ऑफ स्पेन में ऐतिहासिक स्वागत किया गया. प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर और त्रिनदाद एवं टोबैगो की पूरी कैबिनेट एयरपोर्ट पर पीएम मोदी के स्वागत के लिए मौजूद थी. 38 मंत्री और चार सांसदों ने पीएम मोदी का स्वागत किया, जो वैश्विक मंच पर पीएम मोदी के नेतृत्व के प्रति सम्मान को दर्शाता है. बता दें कि पीएम मोदी की त्रिनिदाद एवं टोबैगो की यह पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा है. 1999 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है. त्रिनिदाद और टोबैगो की 40 फीसदी से अधिक आबादी भारतीय मूल की है. यहां के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा स्पीकर भी भारतीय मूल के हैं.भी खास बनाता है. पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और महाकुंभ का जिक्र भी किया. उन्होंने कमला प्रसाद बिसेसर को राम मंदिर की रिप्लिका और सरयू नदी का पवित्र जल भी भेंट किया. पीएम मोदी ने त्रिनिदाद-टोबैगो की PM को दिया अयोध्या वाला खास गिफ्ट ग्लोबल साउथ के भारत के साथ संबंध मजबूत करने निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 देशों की यात्रा पर हैं। इस दौरान पीएम मोदी त्रिनिदाद एंड टोबैगो की यात्रा पर भी पहुंचे हैं। यहां भारत के प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत किया गया। पीएम मोदी के स्वागत में त्रिनिदाद एंड टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर ने रात्रिभोज का आयोजन किया। रात्रिभोज में प्रधानमंत्री मोदी को सोहारी पत्ते पर भोजन परोसा गया। दरअसल, त्रिनिदाद एंड टोबैगो के लोगों में सोहारी के पत्ते पर भोजन करने का बहुत अधिक महत्व है। खासकर भारतीय मूल के लोगों के लिए इस सांस्कृतिक परंपरा के तौर पर देखा जाता है। इस देश में त्यौहारों और विशेष कार्यक्रमों के दौरान अक्सर इस पत्ते पर भोजन परोसा जाता है। सोशल मीडिया पर खुद पोस्ट की तस्वीरें पीएम मोदी ने खुद रात्रिभोज की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने रात्रिभोज का आयोजन किया, जिसमें मैंने अयोध्या में राम मंदिर की प्रतिकृति (स्वरूप) और सरयू नदी के पवित्र जल के साथ-साथ प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ का जल भी भेंट किया। ये भारत और त्रिनिदाद और टोबैगो के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत होगा संबंध इससे पहले पीएम मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की छठी पीढ़ी को भी संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि यहां रह रहे भारतीय मूल के लोगों को ओसीआई कार्ड जारी करने के हमारे निर्णय से भारत के साथ उनका संबंध मजबूत होगा। इसके साथ ही भावी पीढ़ियों के लिए हमारी साझा विरासत सुरक्षित रहेगी।    प्रधानमंत्री मोदी और त्रिनिदाद का रिश्ता, 25 साल पहले विश्व हिंदू सम्मेलन को किया था संबोधित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शुक्रवार) को कैरिबियाई सागर में स्थित त्रिनिदाद और टोबैगो के दो दिवसीय दौरे पर हैं. यहां उन्होंने भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए कहा है कि इस देश में भारतीय समुदाय की यात्रा साहस और धैर्य की मिसाल है. जिस परिस्थिति में भारतीय लोग यहां आए वो मज़बूत आत्मा को भी तोड़ सकती है. लेकिन, उन्होंने संघर्ष को उम्मीद और हिम्मत से झेला.  नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री के तौर पर त्रिनिदाद और टोबैगो की यह पहली यात्रा है. लेकिन, उनका इस धरती से पुराना संबंध है. उन्होंने 25 साल पहले 1999 में बीजेपी के महासचिव के तौर पर राष्ट्र की यात्रा की थी. इस दौरान उन्होंने अगस्त 2000 में विश्व हिंदू सम्मेलन द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में भाग लिया था.  विश्व हिंदू सम्मेलन द्वारा इसका सम्मेलन का आयोजन राजधानी पोर्ट‑ऑफ‑स्पेन में किया गया था. इस सम्मेलन में दुनिया भर के प्रतिनिधि आए थे. इस सम्मेलन में त्रिनिदाद-टोबैगो के तत्कालीन प्रधानमंत्री बासदेव पांडे, तत्कालीन आरएसएस सरसंघचालक के. सुदर्शन और आरएसएस के वरिष्ठ नेता मौजूद थे. इस सम्मेलन का विषय 'हिंदू धर्म और समकालीन विश्व समस्याएं – विकासशील तकनीक और मनुष्य की चुनौतियां' थी. नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन में भाषण दिया था और ख़ुद को ग्लोबल हिंदू नेतृत्व वाला व्यक्तित्व के रुप में स्थापित किया. इसके बाद ही नवंबर 2000 में उन्हें बीजेपी के संगठन प्रभारी महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया था और अगले साल वह गुजरात के मुख्यमंत्री बने.  सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजे गए प्रधानमंत्री मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऑर्डर ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो’ से नवाजा गया है. यह त्रिनिदाद एंड टोबैगो का सबसे सर्वोच्च सम्मान है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यहां के भारतीय समुदाय ने यहां कि इकोनॉमिक, कल्चरल और स्पिरिचुअल प्रगति में अहम योगदान दिया है. त्रिनिदाद एंड टोबैगो और भारत के लोग एक ही परिवार के हैं. हमारी और इनकी मित्रता भूगोल या पीढ़ियों से कहीं आगे की चीज़ है. यहां के भारतीय प्रवासी राष्ट्रदूत हैं, जो भारत के संस्कृति, मूल्यों और विरासत को दुनियाभर में ले जा रहे हैं. त्रिनिदाद एंड टोबैगो के प्रधानमंत्री के साथ नरेंद्र मोदी की रात्रिभोज … Read more