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उत्तरकाशी में भारी त्रासदी: बादल फटने से पहाड़ी मलबा गिरा, कई घर जमींदोज

धराली उत्तराखंड में इस समय कुदरती आफत पीछा नहीं छोड़ रही है। आज उत्तरकाशी के धराली गांव में अचानक बादल फट गया। बादल फटते ही पहाड़ का मलबा सैलाब बनकर नीचे आ गया। लोगों में इस भयावह घटना को देखते ही चीख-पुकार मच गई। बादल फटने से खीर गंगा ऊफान पर आ गई। राली बाजार व आसपास के क्षेत्र के भारी नुकसान पहुंचा है। यहां कुछ लोगों के दबे होने की भी सूचना है। हर्षिल से आर्मी,पुलिस,एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई हैं। बादल फटते ही पहाड़ से आया सैलाब उत्तरकाशी के धराली गांव में दोपहर बादल फटने के बाद पहाड़ से ढेर सारा मलबा सैलाब बनकर नीचे आ गया। इसके चलते कई लोगों के दबे होने की आशंका भी है। वीडियो में देखने पर पता चलता है कि यह जलजला कितना भयावह था। लोगों ने यह दृश्य देखते चीख-पुकार मचाना शुरू कर दी। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसांई ने बताया रेस्क्यू टीम मौके के लिए रवाना हो गई है। लोग वीडियो बनाते वक्त चीख रहे थे। सीएम ने जताया घटना पर दुख उत्तरकाशी में हुए इस भयानक हादसे पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि धराली (उत्तरकाशी) क्षेत्र में बादल फटने से हुए भारी नुकसान का समाचार अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए SDRF,NDRF,जिला प्रशासन तथा अन्य संबंधित टीमें युद्ध स्तर पर जुटी हुई हैं। इस सम्बन्ध में लगातार वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क में हूं और स्थिति की गहन निगरानी की जा रही है। ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूं। उत्तराखंड पुलिस ने दी अपडेट उत्तराखंड पुलिस ने अपने एक्स हैंडल से बताया कि उत्तरकाशी,हर्षिल क्षेत्र में खीर गाड़ का जलस्तर बढने से धराली में नुकसान होने की सूचना पर पुलिस,SDRF,आर्मी आदि आपदा दल मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। उक्त घटना को देखते हुए सभी नदी से उचित दूरी बनाएं। पुलिस ने सचेत करते हुए स्वयं,बच्चों व मवेशियों को नदी से उचित दूरी पर ले जाने को कहा है।  

बंगाल में वोटर वेरिफिकेशन का नया चरण, चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया का आदेश जारी किया

नई दिल्ली बिहार के बाद अब बंगाल में भी चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू कर दी है. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस बारे में सूचित किया है और राज्य के निर्वाचन अधिकारियों से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है. बता दें कि बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम अपने अंतिम चरण में है. एसआईआर प्रक्रिया के तहत राज्य में 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी गई. इस प्रक्रिया के बाद बिहार में करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटेंगे. इनमें ज्यादातर वे मतदाता हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे. बाकी ऐसे वोटर हैं जो स्थायी रूप से किसी दूसरे राज्य में स्थानांतरित हो चुके हैं. कुछ ऐसे मतदाता भी हैं, जिनके नाम एक से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज था. हालांकि, विपक्ष चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का विरोध कर रहा है और इसे बीजेपी के इशारे पर वोटों की चोरी करार दे रहा है.  बिहार में विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) का पहला चरण पूरा बिहार में विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) का पहला चरण पूरा हो चुका है, लेकिन इस दौरान राजनीतिक दलों की ओर से एक भी आपत्ति दर्ज या सुझाव नहीं मिला है. दूसरी ओर आम वोटरों ने मतदाता सूची को दुरुस्त करने में सक्रियता दिखाई और 1,927 मामले निर्वाचन आयोग के समक्ष दाखिल किए. ये मामले योग्य मतदाताओं को सूची में शामिल करने और अयोग्य मतदाताओं को हटाने से संबंधित हैं. जबकि 10,977 आवेदन फॉर्म-6 के तहत नए वोटर जोड़ने, हटाने और अन्य घोषणा पत्र से जुड़े हैं. बिहार में आम वोटरों ने मतदाता सूची को साफ-सुथरा करने में निभाई भूमिका बिहार में, राजनीतिक दलों की निष्क्रियता के बीच आम वोटरों ने मतदाता सूची को साफ-सुथरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आयोग को प्राप्त 1,927 शिकायतें और 10,977 आवेदन इस बात का प्रमाण हैं कि आम लोग अपने मताधिकार को लेकर सजग हैं. ये आवेदन मुख्य रूप से नए मतदाताओं को जोड़ने, गलत नाम हटाने और मतदाता सूची में सुधार से संबंधित हैं. राजनीतिक दलों की इस चुप्पी ने कई सवाल खड़े किए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्षी दलों के करीब 60,000 बूथ लेवल एजेंट्स शायद अब तक मतदाता सूची में आपत्तिजनक नाम ढूंढ नहीं पाए हैं. वहीं, चुनाव आयोग ने सभी दलों और नागरिकों से अपील की है कि वे मतदाता सूची को और सटीक बनाने में सहयोग करें. आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची को अंतिम रूप देने से पहले सभी पक्षों को पर्याप्त वक्त दिया जाएगा.

आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान का चांद पर पहुंचने का सपना – क्या ये हकीकत बनेगा?

नई दिल्ली  आतंकवाद से जूझ रहा और IMF से कर्ज के भरोसे चल रहा पाकिस्तान अब चांद पर जाने के ख्वाब देख रहा है। खबर है कि पाकिस्तान ने साल 2035 तक चांद पर रोवर पहुंचाने की योजना बनाई है। खास बात है कि चांद पर लैंडिंग की उपलब्धि भारत दो साल पहले ही हासिल कर चुका है। जबकि, कहा जाता है कि पाकिस्तान ने भारत की तुलना में करीब 10 साल पहले ही अपना स्पेस प्रोग्राम शुरू कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के मंत्री एहसान इकबाल ने 2035 तक पाकिस्तान के रोवर को चांद पर भेजने की बात कही है। बीजिंग में चीनी अधिकारियों के साथ बैठक में इकबाल ने पाकिस्तान के स्पेस और न्यूक्लियर प्रोग्राम में कमियों को भरने में चीन पर काफी निर्भर होने के संकेत दिए हैं। खबर है कि पाकिस्तान के SUPARCO यानी स्पेश एंड अपर एटमॉस्पियर रिसर्च कमीशन को यह मिशन सौंपा गया है। खास बात है कि अब तक SUPARCO ने अपने दम पर और खासतौर से चीन की मदद के बगैर कोई भी अंतरिक्ष मिशन या सैटेलाइट लॉन्च नहीं किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन साल 2028 के Chang'e-8 मिशन के तहत चांद पर जाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें पाकिस्तान 35 किग्रा के रोवर देने वाला है। चीन इस मिशन के जरिए चांद के साउथ पोल की जानकारी जुटाना चाहता है। खास बात है कि भारत ने साल 2023 में चंद्रयान-3 के जरिए चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग कर कीर्तिमान स्थापित किया था। रिपोर्ट के अनुसार, SUPARCO पहले ही सरकारी फंडिंग में कमी के चलते काम ठीक से नहीं कर पा रही है। वहीं, यहां नेतृत्व से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। इसके अलावा पाकिस्तान सैटेलाइट लॉन्च के लिए काफी ज्यादा चीन पर निर्भर है। साथ ही पाकिस्तान में कुछ ही विश्वविद्यालय हैं, जहां अंतरिक्ष संबंधी शिक्षा दी जाती है।  

भाजपा सांसद थके–हारे 110 किमी कांवड़ यात्रा के बाद व्हीलचेयर से संसद पहुँचे, पैर खराब

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद मनोज तिवारी कांवड़ यात्रा संपन्न करके वापस आ गए हैं। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली सीट से तीसरी बार के सांसद मनोज तिवारी ने सुल्तागंज से गंगाजल भरकर बाबा वैद्यनाथ को जल चढ़ाया। नंगे पैर 110 किलोमीटर पैदल यात्रा की वजह से मनोज तिवारी के दोनों पैरों का बुरा हाल हो गया है। पैर में छालों की वजह से उन्हें व्हील चेयर पर बैठकर संसद जाना पड़ा। मनोज तिवारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मनोज तिवारी ने पिछले दिनों बताया था कि 30 साल बाद कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। भोजपुरी गानों के मशहूर गायक मनोज तिवारी पहले भी कई बार बाबा धाम कांवड़ लेकर जा चुके हैं। लेकिन राजनीति में सक्रियता के बाद वह समय नहीं निकाल पाते थे। इस बार उन्होंने बाबा को पैदल जाकर गंगाजल चढ़ाने का फैसला किया। सुल्तानगंज में गंगा स्नान के बाद वह पैदल बाबा धाम तक गए। इस दौरान वह भजन गाते रहे और बोल-बम करते हुए आगे बढ़ते रहे। 3 अगस्त को मनोज तिवारी ने दिल्ली वापस आकर अपनी तस्वीरें साझा कीं, जिसमें उनके पैरों में पट्टियां बंधी दिख रही हैं। सांसद ने लिखा, 'जय भोलेनाथ.. जय वैद्यनाथ। मैं अर्धरात्रि दिल्ली पहुंच गया था। 110 KM पैदल…नंगे पांव… कांवड़ संभाल के चल पड़ा.. जिस शक्ति ने चलाया, पहुंचाया, वो महादेव ही थे।' तिवारी ने कहा कि दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्चा जी ने फोन पर उनका हालचाल लिया। तिवारी ने कहा कि पैर में छाले पड़े हैं पर दिव्यता का अनुभव कर रहा हूं। पूर्व भाजपा अध्यक्ष संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए सोमवार को और मंगलवार को व्हीलचेयर से पहुंचे। सीढ़ियों तक व्हीलचेयर से लाए गए तिवारी बड़ी मुश्किल से सहारा लेकर चलते हुए दिखाई दिए। भाजपा और अन्य दलों के भी कई नेताओं ने तिवारी के पास आकर उनका हाल चाल लिया।  

30 मई 2019 से अब तक यानी 2258 दिन तक गृह मंत्रालय की कमान, अमित शाह ने नया रिकार्ड बनाया

नई दिल्ली  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नया रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया है। वह इस पद पर सबसे लंबे समय तक रहने वाले नेता बन गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। खास बात है कि उन्होंने यह उपलब्धि 5 अगस्त को हासिल की है। इसी दिन उन्होंने संसद में जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का ऐलान किया था। अमित शाह भारत के गृहमंत्री पद पर 2 हजार 258 दिनों से हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में 30 मई 2019 को यह पद पहली बार संभाला था। इसके बाद 2024 में NDA सरकार बनने के बाद भी वह इस पद पर काबिज हुए। इस पद पर आडवाणी के बाद कांग्रेस दिग्गज गोविंद वल्लभ पंत सबसे ज्यादा समय तक रहे हैं। एक ओर जहां आडवाणी ने 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक कुल 2 हजार 256 दिन गृहमंत्री के तौर पर सेवाएं दीं। वहीं, पंत 10 जनवरी 1955 से 7 मार्च 1961 तक इस पद पर रहे। यानी कुल 6 साल 56 दिन तक वह गृहमंत्री रहे। खास बात है कि शाह देश के पहले सहकारिता मंत्री भी हैं। इससे पहले वह गुजरात के गृहमंत्री भी रह चुके हैं। पीएम मोदी ने की तारीफ मंगलवार को प्रधानमंत्री ने NDA सांसदों के साथ बैठक में गृह मंत्री अमित शाह की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि वह अब सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले केंद्रीय गृह मंत्री बन गए हैं। पीएम ने भाषण में कहा कि पांच अगस्त एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि इसी दिन पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष अधिकार देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया था। उन्होंने कहा कि NDA सरकार ने संविधान का सही अर्थों में पालन किया है। खास बात है कि मंगलवार को भाजपा की अगुवाई वाली NDA सरकार ने जून 2024 में सरकार बनने के बाद से संसद के सत्रों के दौरान इस तरह की यह दूसरी बैठक की है।  

नापाक याराना फिर याद दिलाया गया! टैरिफ विवाद पर भारत की सैन्य प्रतिक्रिया ने अमेरिका को घेरा

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बोल और भारत पर लगाए गए टैरिफ के बाद दोनों देशों में जारी तनातनी के बीच भारतीय सेना ने अमेरिका को आईना दिखाया है और 54 साल पुराना वाकया याद दिलाया है। दरअसल, भारतीय सेना ने मंगलवार को 1971 में प्रकाशित एक अखबार की क्लिप शेयर कर अमेरिका पर तंज कसा है। इस क्लिप में दिखाया गया है कि अमेरिका कैसे दशकों से पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है। यह पोस्ट इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से भारत के तेल खरीदने पर भारतीय सामानों पर और अधिक टैरिफ लगाने की धमकी दी है। एक दिन पहले ट्रंप ने कहा था कि वह भारत से आने वाले सामानों पर टैरिफ में भारी बढ़ोतरी करेंगे क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदकर उसकी मदद कर रहा है लेकिन अमेरिका खुद भूल गया कि उसका अतीत कैसा रहा है। भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने क्या लिखा? इसी संदर्भ में ट्रंप सरकार को आईना दिखाते हुए भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने 5 अगस्त, 1971 को प्रकाशित अखबार की एक क्लिप साझा की है। उस क्लिप में तत्कालीन रक्षामंत्री विद्याचरण शुक्ला द्वारा राज्यसभा में दिए गए बयान का जिक्र है। तब शुक्ला ने नाटो शक्तियों द्वारा पाकिस्तानी सेना को संभावित हथियारों की सप्लाई को लेकर संसद में बयान दिया था। इसमें दिखाया गया है कि कैसे अमेरिका 1971 के युद्ध की तैयारी के लिए दशकों से पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई कर रहा था। सेना ने पोस्ट के साथ कैप्शन लिखा है, “आज का दिन, युद्ध की तैयारी का वह साल – 5 अगस्त, 1971।” तब के रक्षा मंत्री ने संसद में दिया था बयान शुक्ला ने तब राज्यसभा में दिए अपने बयान में बताया था कि कैसे बांग्लादेश में इस्लामाबाद के सशस्त्र आक्रमण की पृष्ठभूमि में पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति को लेकर नाटो और सोवियत संघ से संपर्क किया गया था। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि सोवियत संघ और फ्रांसीसी सरकार ने पाकिस्तान को हथियार देने से इनकार कर दिया था, लेकिन अमेरिका ने पाकिस्तान को अपना समर्थन जारी रखा था। इसमें यह भी कहा गया है कि तब अमेरिका और चीन दोनों ने पाकिस्तान को औने-पौने दामों पर हथियार बेचे थे। इससे यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान ने 1971 में भारत के साथ युद्ध दोनों देशों द्वारा उपलब्ध कराए गए हथियारों से लड़ा था। इसमें एक रिपोर्ट का हवाला भी दिया गया है कि अमेरिका से पाकिस्तान को 1954 के बाद से करीब दो अरब डॉलर के हथियारों की आपूर्ति की गई है। पाकिस्तान पर मेहरबान ट्रंप बता दें कि अमेरिका अभी भी पाकिस्तान पर मेहरबान और नरम है क्योंकि उस पर लगाए गए टैरिफ इसी बात का संकेत देते हैं। हाल ही में अमेरिका ने जो टैरिफ लगाए हैं, उनमें पाकिस्तान को बड़ी छूट दी गई है। ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान पर टैरिफ 29 प्रतिशत से घटकर 19 प्रतिशत कर दिया है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को चेतावनी देते हुए कहा कि वह रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर अमेरिकी शुल्क में खासी बढ़ोतरी करने जा रहे हैं। ट्रंप ने भारत पर भारी मात्रा में रूस से तेल खरीदने और उसे बड़े मुनाफे पर बेचने का आरोप लगाया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा, "भारत रूस से भारी मात्रा में तेल सिर्फ खरीद ही नहीं रहा है, बल्कि उस तेल के बड़े हिस्से को खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा भी कमा रहा है।" भारत पर बिदक रहे ट्रंप इसके साथ ही ट्रंप ने कहा, "उसे (भारत को) इस बात की कोई परवाह नहीं है कि यूक्रेन में रूस की युद्ध मशीन कितने लोगों की जान ले रही है। इसी वजह से मैं भारत से अमेरिका को दिए जाने वाले शुल्क को काफी बढ़ाने जा रहा हूं।" ट्रंप ने पिछले हफ्ते भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाने के साथ ही रूस से तेल एवं गैस खरीदने पर जुर्माना लगाने की भी घोषणा की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस से सैन्य उपकरण और कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत पर जुर्माना लगाने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में आई अधिसूचना में इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया था।  

बड़ी खबर: आयुष्मान योजना पर संकट, IMA ने दी 7 अगस्त से सेवाएं रोकने की धमकी

नई दिल्ली  बीजेपी सरकार के शासन वाले हरियाणा में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है, जो लाखों आयुष्मान कार्डधारकों के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन सकता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर 7 अगस्त तक निजी अस्पतालों का बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो वे आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज बंद कर देंगे। इस फैसले से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच संकट में पड़ सकती है। आइए जानते हैं इस गंभीर हालात के पीछे की असली वजहें और इसका प्रभाव। आयुष्मान भारत योजना पर संकट क्यों? हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना ने गरीबों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को गंभीर बीमारियों के इलाज में राहत दी है। योजना के तहत कार्डधारकों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है, जो सरकारी और निजी दोनों तरह के अस्पतालों में उपलब्ध है। लेकिन अब लगभग 500 करोड़ रुपये के बकाए के कारण निजी अस्पताल इस सेवा को जारी रखने में असमर्थता जता रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने स्पष्ट किया है कि अगर यह बकाया राशि जल्द न चुकाई गई, तो वे योजना के अंतर्गत इलाज देना बंद कर देंगे। मरीजों को हो सकता है बड़ा नुकसान हरियाणा में लगभग 650 निजी अस्पताल इस योजना के अंतर्गत सेवाएं प्रदान करते हैं और 5 लाख से अधिक कार्डधारक इससे लाभान्वित हैं। लेकिन बकाया भुगतान रोकने से अस्पतालों के हाथ-पांव फूल सकते हैं, जिससे कैंसर, हृदय रोग, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। IMA ने सरकार से आयुष्मान योजना के लिए बजट को मौजूदा 800 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये करने की मांग की है, ताकि भविष्य में बकाया भुगतान जैसी समस्या दोबारा न आए। दूसरी ओर हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री ने इस विवाद में हस्तक्षेप करते हुए आश्वासन दिया है कि सरकार जल्द से जल्द बकाया राशि का भुगतान करेगी और योजना को बिना बाधा के जारी रखा जाएगा।

EPF में गड़बड़ी से परेशान? ये है सरकारी समाधान पोर्टल और शिकायत दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली क्या आपकी सैलरी से कट रहा पीएफ अमाउंट पासबुक में दिखाई नहीं दे रहा? या फिर आप अपनी पिछली जॉब में कटा पीएफ का पैसा अपने अकाउंट में नहीं देख पा रहे? तो जान लें कि अब सिर्फ एक सरकारी पोर्ट्ल पर आपको पीएफ से जुड़ी हर समस्या का समाधान मिल जाएगा। आपको अपने पीएफ अकाउंट से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है। दरअसल सरकार ने इसके लिए पोर्टल लॉन्च किया है जहां आप पीएस खाते से जुड़ी किसी भी शिकायत को दर्ज करा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर रिमाइंडर भी भेज सकते हैं। चलिए इस पूरे तरीके को समझते हैं और जानते हैं कि आखिर कैसे आप अपने पीएफ अकाउंट से जुड़ी किसी भी समस्या को दूर कर सकते हैं। EPFiGMS क्या है? EPFiGMS का मतलब है Employees’ Provident Fund Grievance Management System। यह एक ऑनलाइन सरकारी पोर्टल है जिसे की PF से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए बनाया गया है। इस पोर्टल पर PF से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान आसानी से मिल सकता है। अब भले आपके PF ट्रांसफर में देरी हो, क्लेम अटका हो, अकाउंट में कोई गलत जानकारी दर्ज हो या ऑफिस से जवाब न मिल रहा हो, आप इस पोर्टल की मदद से कम से कम समय में अपनी समस्या का समाधान पा सकते हैं। इस पोर्टल की खासियत यह है कि आप इस पर शिकायत के साथ जरूरी डॉक्यूमेंट्स भी सबमिट कर सकते हैं और जल्द से जल्द अपनी शिकायत का निवारण पा सकते हैं। इसके अलावा अगर आपको अपनी शिकायत का जवाब मिलने में समय लगता है, तो आप रिमाइंडर भी भेज सकते हैं, ताकि आपकी समस्या पर तेजी से काम किया जा सके। कैसे करें शिकायत? PF से जुड़ी किसी भी समस्या की शिकायत करने के लिए आपको: स्टेप 1: सबसे पहले गूगल पर EPFiGMS सर्च करें। स्टेप 2: सबसे पहले लिंक पर क्लिक करें और वहां Register Grievance पर क्लिक करें। स्टेप 3: इसके बाद अपना स्टेटस चुनें जैसे कि PF Member। स्टेप 4: अगर आपकी शिकायत किसी क्लेम से जुड़ी है, तो क्लेम आईडी डाल कर क्लेम की डिटेल्स दें। या फिर आप Claim ID के दिए NO को सलेक्ट कर सकते हैं। स्टेप 5: अपना UAN नंबर दर्ज करें और कैपचा डालकर Get Details पर क्लिक करें। इसके बाद आपको अपने फोन नंबर और ईमेल आईडी पर एक OTP मिलेगा जिसे दर्ज करके आप आगे बढ़ सकते हैं। स्टेप 6: इसके बाद आपको अपनी बेसिक डिटेल्स दर्ज करनी होंगी जैसे कि पता। स्टेप 7: अब पीएफ नंबर चुनकर अपनी शिकायत डिटेल में बता दें। साथ में समस्या से जुड़े डॉक्युमेंट्स अटैच करना न भूलें। स्टेप 8: इसके बाद अपनी शिकायत को सबमिट कर दें। दो फीचर हैं कमाल इस पोर्ट्ल पर आपको दो ऐसे फीचर मिलते हैं जिनसे आपके काम बहुत तेजी से पूरे हो जाएंगे। दरअसल आप इस पोर्ट्ल पर एक बार शिकायत करने के बार हर 7 दिन में एक रिमाइंडर भेज सकते हैं ताकि आपकी समस्या का जल्द समाधान मिल सके। इसके अलावा आप अगर मिलने वाले समाधान से संतुष्ट न हों तो आप अपना फीडबैक भी इस पोर्टल पर सब्मिट कर सकते हैं। ध्यान रखने वाली बातें इस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते हुए दो बातों का खास तौर पर ध्यान रखें कि अपनी शिकायत से संबंधित सभी ओरिजनल डॉक्यूमेंट्स जरूर उपलब्ध कराएं। इससे आपकी समस्या का समाधान जल्द हो सकेगा। इसके अलावा शिकायत दर्ज करने के बाद मिलने वाले कंप्लेंट नंबर को ध्यान से रखें ताकि अपनी शिकायत का स्टेटस बाद में चेक कर सकें।

उत्तराखंड में प्राकृतिक कहर: धराली गांव में बादल फटा, कई घर सैलाब में बहे

 उत्तरकाशी उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बादल फटने से बड़ा हादसा हुआ है. गंगोत्री धाम और मुखवा के पास स्थित धराली गांव में मंगलवार को बादल फटने से एक नाला उफान पर आ गया. नाले का पानी बहुत तेज़ी से पहाड़ी से निचले इलाकों की तरफ बहकर आया, जिससे कई घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं. यह घटना बेहद गंभीर है और इसने स्थानीय लोगों को चिंता में डाल दिया है. नाले के पानी के साथ मलबा भी आया है, जिसमें कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. गंगोत्री धाम के पास है प्रभावित इलाका बादल फटने के बाद नाले में पानी के उफान से पूरे इलाके में दहशत फैल गई, अब इलाके में राहत और बचाव का काम चल रहा है. जिला आपदा प्रबंधन ने हादसे की पुष्टि की है और कहा कि हालात पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि मौके पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भेजा जा रहा है, साथ ही जिला प्रशासन भी रेस्क्यू में लगा हुआ है. हालात इतने विकट हैं कि सेना भी राहत और बचाव कार्य के लिए रवाना हुई है. भटवाड़ी से एसडीआरएफ की टीम भी धराली की ओर रवाना हो गई है. आज सुबह ही उत्तरकाशी जिले की बड़कोट तहसील क्षेत्र के बनाल पट्टी में भारी अतिवृष्टि हुई है. बादल फटते ही पहाड़ से आया सैलाब उत्तरकाशी के धराली गांव में दोपहर बादल फटने के बाद पहाड़ से ढेर सारा मलबा सैलाब बनकर नीचे आ गया। इसके चलते कई लोगों के दबे होने की आशंका भी है। वीडियो में देखने पर पता चलता है कि यह जलजला कितना भयावह था। लोगों ने यह दृश्य देखते चीख-पुकार मचाना शुरू कर दी। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसांई ने बताया रेस्क्यू टीम मौके के लिए रवाना हो गई है। लोग वीडियो बनाते वक्त चीख रहे थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गंगोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव धराली में खीर गंगा नदी में बादल फटने से तबाही आई है। यहां पर विनाशकारी बाढ़ की वजह से करीब 20 होटल और होमस्टे को नुकसान पहुंचा है। कई स्थानीय लोग और मजदूरों के दबे होने की आशंका भी है। गंगोत्री विधायक सुरेश सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया- धराली में खीर गाढ़ के ऊपर बादल फटने से पलय का मंजर है। सूचना पर तत्काल मुख्यमंत्री को सूचना दे दी गई है। जिलाधिकारी को सूचना के साथ ही सेना, पुलिस, एसडीआरएफ की टीम पहुंच गई है। यह बहुत बड़ी दुघटना है। मैं भी देहरादून से घटनास्थल के लिए निकल चुका हूं। भगवान से पाथना है कि इस आपदा की घड़ी से सबको सुरक्षित बचाएं। उत्तराखंड पुलिस ने दी अपडेट उत्तराखंड पुलिस ने अपने एक्स हैंडल से बताया कि उत्तरकाशी,हर्षिल क्षेत्र में खीर गाड़ का जलस्तर बढने से धराली में नुकसान होने की सूचना पर पुलिस,SDRF,आर्मी आदि आपदा दल मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। उक्त घटना को देखते हुए सभी नदी से उचित दूरी बनाएं। पुलिस ने सचेत करते हुए स्वयं,बच्चों व मवेशियों को नदी से उचित दूरी पर ले जाने को कहा है। प्रभावित गांव गंगोत्री धाम और गंगाजी के शीतकालीन प्रवास मुखवा के बहुत करीब है. इस इलाके में बादल फटने से लोग घबराए हुए हैं. प्रशासन की तरफ से सभी लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है और एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं ताकि कोई अनहोनी न हो. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश और बादल फटने की घटनाएं लगातार हो रही हैं. इन हादसों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है और घरों को काफी नुकसान पहुंचा है. UP के 17 जिलों में बाढ़, 300+ मकान ढहे, 16 मौतें UP-बिहार में मानसून की बारिश से बाढ़ जैसे हालात हैं। बिहार के मुंगेर, बक्सर, पूर्णिया, भोजपुर, पटना समेत कई जिलों में सैकड़ों गांव डूब गए हैं। बिहार के पूर्णिया में 38 साल बाद रिकॉर्ड बारिश हुई। यहां रविवार से सोमवार तक 270.6mm बारिश हुई। इससे पहले 1987 में 294.9mm बारिश हुई थी। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज, वाराणसी समेत 17 जिलों के 402 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक 343 मकान बारिश के चलते ढह चुके हैं। पिछले 24 घंटे में बाढ़-बारिश से जुड़े हादसों में 16 लोगों की मौत हो गई है। जौनपुर, चंदौली, सुल्तानपुर, कानपुर, पीलीभीत और सोनभद्र में 5 अगस्त, वाराणसी, हमीरपुर और लखीमपुर में 6 अगस्त तक, जबकि प्रयागराज और मिर्जापुर में 7 अगस्त तक स्कूलों में छुट्टी बढ़ा दी गई है। हिमाचल प्रदेश में तेज बारिश से 310 सड़कें बंद हैं। शिमला में सोमवार को बारिश के बाद 3 घरों पर लैंडस्लाइड हो गया। लोगों ने एक दिन पहले ही घर छोड़ा था। कल रात में तेज बारिश के बाद चंडीगढ़-मनाली फोरलेन भी बंद है। उत्तराखंड के हल्द्वानी में नदी में बहने से 3 लोगों की मौत हो गई। केरल में भारी बारिश का रेड अलर्ट मौसम विभाग ने मंगलवार को केरल में भारी बारिश का रेड अलर्ट और हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, पुडुचेरी में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इनके अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब समेत 19 राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने दुनिया को कहा अलविदा, दिल्ली के अस्पताल में हुआ निधन

नई दिल्ली पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन हो गया है। उनका लंबे समय दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज चल रहा है, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। वह जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय जैसे राज्यों में गवर्नर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत करने वाले सत्यपाल मलिक समाजवादी विचारधारा से निकले नेता थे। एक सांसद से लेकर गवर्नर तक का सफर तय करने वाले सत्यपाल मलिक आखिरी कुछ सालों में भाजपा से जुड़े थे और कई राज्यों में गवर्नर के तौर पर सेवाएं दीं। हालांकि बीते कुछ सालों से वह सरकार के खिलाफ मुखर थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया था। सत्यपाल मलिक के एक्स अकाउंट से भी उनकी मौत की जानकारी दी गई। इसी एक्स अकाउंट पर आखिरी बार उनके निजी सहायक ने 9 जुलाई को बताया था कि उनकी हालत गंभीर है। खुद को चौधरी चरण सिंह का शिष्य बताने वाले सत्यपाल मलिक किसान आंदोलन के समर्थन में मुखर हुए थे और सरकार की तीखी निंदा की थी। यही नहीं उन्होंने किसान आंदोलन के समर्थन में कई राज्यों में दौरे किए थे और सरकार से अपील की थी कि वह तीन विवादित बिलों को वापस ले ले। पीएम नरेंद्र मोदी पर सीधे हमला बोलने के कारण भी वह काफी चर्चा में थे। पांच साल में कुल 5 राज्यों के गवर्नर रहे थे सत्यपाल मलिक वह 2017 से 2022 के दौरान बिहार से लेकर जम्मू-कश्मीर और मेघालय तक कुल 5 राज्यों में गवर्नर रहे। 1970 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और 1974 में बागपत से विधानसभा का चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल से उतरे थे और जीत हासिल की थी। उन्हें जम्मू-कश्मीर में गवर्नर के कार्यकाल के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। उनके ही दौर में राज्य से आर्टिकल 370 हटा था और सूबे का पुनर्गठन करके लद्दाख को अलग एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। हालांकि इसी कार्यकाल को लेकर वह विवादों में भी रहे। खुद पर चार्जशीट दाखिल होने पर जताई थी हैरानी उन्होंने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर करप्शन का आरोप लगाया था और फिर इसी केस में उनके खिलाफ सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया था। इस चार्जशीट पर अस्पताल से ही सत्यपाल मलिक ने ऐतराज जताया था और कहा था कि आखिर यह क्या हो रहा है। जिस शख्स ने करप्शन का आरोप लगाया था, उसके ही खिलाफ जांच शुरू कर दी गई और अब चार्जशीट दाखिल की गई है। सत्यपाल मलिक ने लोकसभा चुनाव 2024 में भी सरकार का मुखर विरोध किया था और विपक्ष के समर्थन में वोट देने की अपील की थी।