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भारत ने ट्रंप की टैरिफ धमकी का मुंहतोड़ जवाब दिया, अमेरिका और ईयू के डबल स्टैंडर्ड को उजागर किया

नई दिल्ली पिछले कुछ हफ्तों से वैश्विक कूटनीति और व्यापार के मंच पर एक नया तूफान खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूस से तेल और हथियार खरीदने के लिए 25% टैरिफ और अतिरिक्त पेनल्टी की धमकी दी है। उनका दावा है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुनाफे के लिए बेच रहा है, जिससे रूस को यूक्रेन युद्ध में आर्थिक मदद मिल रही है। लेकिन यह कहानी उतनी सीधी नहीं है, जितनी दिखाई देती है। भारत में पूर्व अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी का एक बयान फिर से वायरल हो रहा है जिससे इस कहानी में अमेरिका का पाखंड साफ दिख रहा है। गार्सेटी ने पिछले साल कहा था कि अमेरिका खुद चाहता था कि भारत रूस से तेल खरीदे ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रहे। तो फिर अब यह पलटवार और धमकियां क्यों? क्या यह अमेरिका का पाखंड है या ट्रंप का कूटनीतिक दोगलापन? आइए, इस मुद्दे को विस्तार से समझते हैं। अमेरिका का दोहरा चेहरा 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए। इसके परिणामस्वरूप, रूस ने अपने तेल को रियायती दरों पर बेचना शुरू किया। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80% से ज्यादा आयात करता है, उसने इस अवसर का लाभ उठाया। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर करने में भी योगदान दिया। उस समय अमेरिका ने भारत के इस कदम को न केवल स्वीकार किया, बल्कि इसे प्रोत्साहित भी किया। भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने स्पष्ट कहा था कि भारत का रूस से तेल खरीदना वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता के लिए जरूरी है। पिछले साल 2024 में 'कॉन्फ्रेंस ऑन डायवर्सिटी इन इंटरनेशनल अफेयर्स' में बोलते हुए गार्सेटी ने कहा, "भारत ने रूसी तेल इसलिए खरीदा क्योंकि हम चाहते थे कि कोई रूसी तेल को मूल्य सीमा (प्राइस कैप) पर खरीदे। यह कोई उल्लंघन नहीं था, बल्कि यह नीति का हिस्सा था, क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि तेल की कीमतें बढ़ें, और भारत ने इसे पूरा किया।" लेकिन अब वही अमेरिका भारत पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगा रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "भारत न केवल रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर मुनाफा कमा रहा है। उन्हें यूक्रेन में रूसी युद्ध मशीन के कारण होने वाली मानवीय त्रासदी की कोई परवाह नहीं।" यह बयान न केवल भारत की ऊर्जा नीति को गलत ठहराता है, बल्कि यह भी भूल जाता है कि भारत का यह कदम अमेरिका की सहमति से ही उठाया गया था। भारत की ऊर्जा नीति और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, और रूस उसका सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है। 2022 के बाद से भारत की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 35-40% रूस से आता है। यह सस्ता तेल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हुआ है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत के पास रूस के अलावा भी तेल आपूर्ति के विकल्प हैं, जैसे सऊदी अरब, इराक, यूएई और ब्राजील। लेकिन रूस से सस्ता तेल खरीदना भारत के राष्ट्रीय हित में है, क्योंकि इससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और महंगाई पर अंकुश लगता है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत की ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हित और वैश्विक बाजार की मजबूरियों पर आधारित है। अमेरिका और यूरोपीय देशों की आलोचना अनुचित है, खासकर तब जब ये देश स्वयं रूस से व्यापार कर रहे हैं।" भारत ने आंकड़ों के साथ दिखाया कि 2024 में यूरोपीय संघ और रूस के बीच 67.5 अरब यूरो का व्यापार हुआ, जो भारत-रूस व्यापार से कहीं ज्यादा है। यह सवाल उठता है कि जब यूरोप और अमेरिका खुद रूस से व्यापार कर रहे हैं, तो भारत को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? ट्रंप का दोगलापन: भारत बनाम चीन ट्रंप की धमकियों में एक और विरोधाभास साफ दिखता है। वह भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए टैरिफ और पेनल्टी की धमकी दे रहे हैं, लेकिन चीन के मामले में उनकी आवाज अपेक्षाकृत नरम है। चीन रूस के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, जो रूस के कुल तेल निर्यात का 47% खरीदता है। फिर भी, ट्रंप ने चीन के खिलाफ उतनी सख्ती नहीं दिखाई, जितनी भारत के खिलाफ। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। अमेरिका के लिए चीन एक बड़ा व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी है और ट्रंप शायद चीन के साथ व्यापार युद्ध को और तीव्र नहीं करना चाहते। दूसरी ओर, भारत को एक आसान निशाना माना जा रहा है, क्योंकि भारत-अमेरिका संबंधों में मित्रता का तत्व मजबूत है। अपने मुनाफे के लिए भारत पर निशाना अमेरिका ने यूक्रेन के साथ हाल ही में एक रेयर अर्थ मिनरल्स डील की है, जिसके तहत वह यूक्रेन के विशाल खनिज संसाधनों, जैसे लिथियम, टाइटेनियम और रेयर अर्थ तत्वों, का दोहन करना चाहता है। यह डील अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये खनिज हाई-टेक उद्योगों, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए आवश्यक हैं। अमेरिका का मानना है कि यूक्रेन-रूस युद्ध के चलते इन संसाधनों का खनन मुश्किल हो रहा है, इसलिए वह युद्ध को जल्द खत्म करने की दिशा में कदम उठा रहा है। इस डील के जरिए अमेरिका न केवल अपनी खनिज आपूर्ति को सुरक्षित करना चाहता है, बल्कि चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों पर निर्भरता को भी कम करना चाहता है, जो इन खनिजों का सबसे बड़ा उत्पादक है। हालांकि, जब अमेरिका रूस को सीधे तौर पर प्रभावित करने में असमर्थ रहा, तो उसने रणनीति बदलकर रूस के करीबी सहयोगियों, जैसे भारत, को निशाना बनाना शुरू किया। टैरिफ का भारत पर असर ट्रंप की धमकी अगर हकीकत बनती है, तो भारत को कई मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारत हर साल अमेरिका को 83 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात करता है, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और आईटी सेवाएं … Read more

NDA ने ऑपरेशन सिंदूर-महादेव को बताया अहम कदम, पीएम मोदी को किया गया सम्मानित

नईदिल्ली  भाजपा नीत राजग संसदीय दल (NDA Parliamentary Party Meeting) की बैठक संसद भवन में शुरू हो गई है. इस बैठक का आयोजन संसद भवन के ऑडिटोरियम में हो रहा है. पीएम मोदी जब इस बैठक में शामिल होने पहुंचे तो एनडीए सांसदों ने 'हर हर महादेव' और 'भारत माता की जय' के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया. ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए पीएम मोदी को एनडीए सांसदों द्वारा सम्मानित किया गया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने माला पहनाकर पीएम मोदी का स्वागत किया. एनडीए संसदीय दल की बैठक में ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव की सफलता पर प्रस्ताव पारित हुआ. एनडीए की महिला सांसद अग्रिम पंक्ति में बैठीं. पहलगाम आतंकवादी हमले के पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई. नए सांसदों का प्रधानमंत्री से परिचय कराया गया. एनडीए संसदीय दल की बैठक से जुड़े अपडेट पढ़ें… – एनडीए संसदीय दल की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया अमेरिका द्वारा पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) घोषित करना, तथा पहलगाम हमले की निंदा करते हुए ब्रिक्स समिट में जॉइंट डिक्लेरेशन जारी होना, पाकिस्तान द्वारा अपनी धरती पर फैलाए जा रहे आतंकवाद के खिलाफ भारत के कूटनीतिक रुख की जीत को दर्शाता है.  – प्रस्ताव में कहा गया कि एनडीए संसदीय दल इस कठिन समय में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रदर्शित असाधारण नेतृत्व की सराहना करता है. उनके अटूट संकल्प, दूरदर्शी और दृढ़ नेतृत्व ने न केवल राष्ट्र को उद्देश्यपूर्ण दिशा दी है, बल्कि सभी भारतीयों के हृदय में एकता और गौरव की नई भावना भी जगाई है. – एनडीए संसदीय दल की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया, 'हमारे सशस्त्र बलों के अद्वितीय साहस और अटूट प्रतिबद्धता को एनडीए संसदीय दल सलाम करता है, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया. उनका साहस हमारे राष्ट्र की रक्षा के प्रति उनके अटूट समर्पण को दर्शाता है. हम पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.' राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों की यह बैठक काफी समय के बाद हो रही है और संसद के चालू सत्र में चल रहे गतिरोध के बीच पहली बैठक है. पीएम मोदी के अपने संबोधन में तिरंगा यात्रा और विपक्ष के खिलाफ रणनीति पर भी चर्चा कर सकते हैं. एनडीए की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 7 अगस्त से शुरू हो रही है. भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को अपने उम्मीदवार की घोषणा 21 अगस्त तक करनी होगी, जो नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है और संसद का मानसून सत्र भी इसी दिन समाप्त हो रहा है. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद शामिल हैं, और इसकी वर्तमान संख्या 782 है. यदि विपक्ष अपना उम्मीदवार घोषित करता है, तो 9 सितंबर को चुनाव होना तय है. यह बैठक संसद के एक ऐसे सत्र (मानसून सेशन) के मध्य में हो रही है, जिसमें पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर दो दिवसीय चर्चा के अलावा अब तक कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका है. विपक्ष चुनाव आयोग द्वारा बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है.

5 अगस्त से पहले कश्मीर में सियासी सरगर्मी, बड़ा फैसला आने की अटकलें

नई दिल्ली क्या जम्मू-कश्मीर को 6 साल बाद एक बार फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने वाला है? 5 अगस्त से पहले कुछ बड़ा होने की चर्चाओं के बीच ऐसे कयास लग रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी और फिर होम मिनिस्टर अमित शाह ने रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। इसके अलावा मंगलवार सुबह ही एनडीए के संसदीय दल की भी मीटिंग होने वाली है। इन घटनाक्रमों के चलते ही चर्चा तेज है कि क्या 5 अगस्त को फिर से मोदी सरकार बड़ा फैसला लेगी। इससे पहले राम मंदिर का शिलान्यास और फिर जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने एवं राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का फैसला भी 5 अगस्त की तारीख को ही हुआ था। तब साल 2019 था। तब से ही मांग उठती रही है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाए। इसके जवाब में पीएम मोदी और होम मिनिस्टर अमित शाह लगातार कहते रहे हैं कि सही समय पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा। सरकार ने कभी राज्य का दर्जा देने से इनकार नहीं किया है, बस सही समय की बात कही है। ऐसे में सवाल है कि क्या वह सही समय अब आ गया है। कुछ बड़ा होने के कयास लग ही रहे हैं और सबसे ज्यादा चर्चा जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की ही है। फारूक अब्दुल्ला के बयान से भी ऐसे कयास तेज हैं। उन्होंने सोमवार को कहा कि सरकार बताए कि आखिर जम्मू-कश्मीर को कब पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा। उन्होंने आर्टिकल 370 हटाने की छठी बरसी से एक दिन पहले यह मांग दोहराई है। उन्होंने इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर की राज्यसभा सीटों पर भी चुनाव कराने की मांग की है। अब्दुल्ला ने कहा, 'वो राज्य का दर्जा कब वापस करने जा रहे हैं? उन्होंने कहा था कि चुनाव होने और सरकार बनने के बाद दर्जा लौटा दिया जाएगा। अब उस वादे का क्या हुआ? अब उनका कहना है कि विधानसभा की दो खाली सीटों पर चुनाव कराएंगे, लेकिन राज्यसभा की 4 सीटों पर चुनाव कब होंगे? आखिर वे सदन में लोगों की आवाज उठाने के अधिकार को क्यों रोक रहे हैं।' क्‍यों चर्चा है जम्‍मू और कश्‍मीर को पूर्ण राज्‍य का दर्जा देने की? जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की चर्चा 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35A के निरस्त होने के बाद से चल रही है. जब से जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा हटाकर दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया. तब से लगातार पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग स्थानीय नेताओं, दलों द्वारा की जा रही है. गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में संसद में वादा किया था कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा. उसके बाद भारत सरकार भी कई बार बोल चुकी है कि वह समय आने पर पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने भी 2023 में राज्य का दर्जा बहाली का आदेश दिया था.    दरअसल केंद्र शासित प्रदेश के रूप में, जम्मू-कश्मीर की सरकार के पास सीमित शक्तियां हैं. पुलिस, कानून-व्यवस्था, और अखिल भारतीय सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण मामलों में उपराज्यपाल और केंद्र सरकार का नियंत्रण है. नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), और कांग्रेस जैसे दल लगातार पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग करते रहे हैं. NC के नेता उमर अब्दुल्ला ने इसे अपनी सरकार का प्रमुख एजेंडा बनाकर 2024 में हुए विधानसभा चुनावों में 42 सीटें जीत ली. पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन जरूरी है, जिसके लिए लोकसभा और राज्यसभा की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अंतिम स्वीकृति चाहिए होगी. उनकी मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी होने पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा. रविवार को राष्ट्रपति की पीएम और गृहमंत्री से अलग अलग मुलाकात से यह कयास लगाया जा रहा है कि कहीं ये मुलाकात जम्मू कश्मीर के लिए तो नहीं है. बहुत संभावना है कि कल अनुच्छेद 370 के रद्द होने के छठें साल पर सरकार जम्मू कश्मीर की जनता को राज्य दर्जे की बहाली का ऐलान करे.  जम्‍मू और कश्‍मीर को अलग अलग राज्‍य बनाने की अफवाह भी जम्मू क्षेत्र हिंदू बहुल होने और कश्मीर घाटी के मुस्लिम बहुल होने के चलते अक्सर इस बात पर चर्चा होती रही है कि क्या दोनों को अलग राज्य का दर्जा देना संभव है.जम्मू के लोग यह शिकायत करते रहे हैं कि कश्मीरी नेतृत्व ने उनके क्षेत्र के विकास को नजरअंदाज किया और उन्हें सत्ता में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया. इस संदर्भ में, जम्मू को अलग राज्य बनाने की मांग को कुछ लोग क्षेत्रीय सशक्तिकरण के रूप में देखते हैं.  जो लोग जम्मू को अलग राज्य का दर्जा देने के पक्ष में हैं, उनका तर्क है कि इससे क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं और पहचान को बेहतर संबोधित किया जा सकेगा. जम्मू हिंदुओं को एक सम्मानजनक पहचान और विकास के अवसर देगा, जो कश्मीर के साथ एकजुटता में संभव नहीं है. कश्मीरी मूल की पत्रकार  @AartiTikoo एक्स पर लिखती हैं कि…  जम्मू और कश्मीर में इन दिनों यह अफ़वाह ज़ोरों पर है कि केंद्र सरकार अनुच्छेद 370 के हटाए जाने की छठी वर्षगांठ, यानी कल, इस केंद्र शासित प्रदेश को फिर से राज्य का दर्जा दे सकती है. और जो बात इससे भी ज़्यादा चौंकाने वाली है — वह यह कि अफ़वाहों के बाज़ार में कहा जा रहा है कि कश्मीर और जम्मू को अलग करके दो स्वतंत्र राज्य बना दिया जाएगा. अगर इनमें से कोई भी बात सही निकली, तो यह बेहद विनाशकारी कदम होगा. यह मूलतः डिक्सन प्लान को अमल में लाने जैसा होगा — यानी जम्मू-कश्मीर का धार्मिक आधार पर विभाजन, जिससे मुस्लिम बहुल क्षेत्र को अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान के हवाले कर दिया जाएगा. भारत की सीमाओं से लगे किसी भी मुस्लिम बहुल क्षेत्र को पाकिस्तान की सेना और उसके जिहादी आतंकियों से अप्रभावित रखना संभव नहीं है. अगर यह तर्क दिया जाए कि हिंदू बहुल जम्मू, अपनी जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक शक्ति से वंचित रहा है, और मुस्लिम बहुल कश्मीरी नेतृत्व ने उसके साथ भेदभाव किया है — तो यह साफ़ … Read more

Vande Bharat Sleeper जल्द ट्रैक पर! जानिए कब से शुरू होगी पहली सेवा

 नईदिल्ली  देश में इस समय 50 से ज्यादा Vande Bharat ट्रेनें चल रही हैं, और अब जल्दी ही इसका स्लीपर वर्जन भी लोगों को मिलने वाला है। इसके अलावा भारत की पहली बुलेट ट्रेन पर भी तेजी से काम चल रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेल मंत्री Ashwini Vaishnav ने बताया है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को अगले महीने यानी सितंबर में लॉन्च किया जा सकता है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यह ट्रेन बहुत जल्द शुरू की जाएगी। रेल मंत्री ने हाल ही में राज्यसभा में जानकारी दी थी कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का पहला मॉडल तैयार हो गया है। लंबी यात्रा में आरामदायक यह ट्रेन नई तकनीक से बनी है और इसे बहुत आरामदायक बनाया गया है, ताकि लोग लंबी दूरी की यात्रा में थकान महसूस न करें। यह ट्रेन राजधानी एक्सप्रेस, तेजस एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से भी बेहतर और तेज मानी जा रही है। इसका सफर समय पर और बिना रुकावट के होगा। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाई गई है जो रातभर का या लंबा सफर करते हैं। इसमें आरामदायक सीटें और आधुनिक सुविधाएं होंगी, जिससे यात्री को अच्छा अनुभव मिलेगा।

डिफेंस डील में नया मोड़: भारत ने टेका भरोसा कोरियन KF-21 फाइटर जेट पर?

नई दिल्ली दक्षिण कोरिया का KF-21 Boramae मेटियोर मिसाइल के साथ एक शक्तिशाली जेट बनकर उभर रहा है. भारत इसके लिए रुचि दिखाकर सही दिशा में कदम बढ़ा रहा है, खासकर जब चीन और पाकिस्तान जैसे खतरे बढ़ रहे हैं. यह जेट न सिर्फ हवा में ताकत देगा, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता को भी बढ़ाएगा. हालांकि, डील को फाइनल करने में समय और बातचीत लगेगी, लेकिन यह भविष्य की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम हो सकता है. KF-21 Boramae क्या है? KF-21 Boramae दक्षिण कोरिया का एक नया मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीस ने बनाया है. इसे पहली बार 2021 में दुनिया के सामने पेश किया गया था. अभी इसके ट्रायल चल रहे हैं. इसे 2026 में दक्षिण कोरिया की वायुसेना में शामिल करने की योजना है. यह जेट हल्का और स्टील्थ फीचर्स वाला है, यानी यह दुश्मन की रडार से बच सकता है. इसका मकसद पुराने जेट्स को बदलना और हवा में ताकत बढ़ाना है. KF-21 की खूबियां यह जेट कई लाजवाब खूबियों से लैस है…     गति और दूरी: 2200 किमी/घंटा की रफ्तार से 1000 किमी तक उड़ सकता है.     आकार: 55.5 फीट लंबा, 15.5 फीट ऊंचा और टेकऑफ वजन 25,600 किलोग्राम.     पायलट: इसे 1 या 2 पायलट चला सकते हैं- 1 लड़ाई के लिए, 2 ट्रेनिंग के लिए.     तोप: 20 मिमी की वल्कन तोप, जो एक मिनट में 480 गोलियां दाग सकती है.     हथियार: 10 जगहें (हार्ड प्वाइंट्स) हैं, जहां 5 एयर-टू-एयर (मेटियोर, साइडविंडर) और 5 एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें, एंटी-शिप मिसाइलें या बम लगाए जा सकते हैं. भारत क्यों दिलचस्पी ले रहा है? भारत की वायुसेना को नए जेट्स की सख्त जरूरत है, क्योंकि पुराने MiG-21 और जगुआर अब पुराने पड़ गए हैं. MRFA डील के तहत भारत 100 से ज्यादा नए जेट्स लेना चाहता है. अमेरिकी F-35 और रूसी Su-57 जेट्स महंगे हैं. इन पर निर्भरता बढ़ रही है. वहीं, KF-21 सस्ता (लगभग 87-110 मिलियन डॉलर प्रति जेट) और आधुनिक है.     मेक इन इंडिया: भारत इसे अपने यहां बनाना चाहता है, जिसमें अपनी तकनीक (जैसे रडार) जोड़ सकता है.     चीन का खतरा: भारत-चीन सीमा विवाद को देखते हुए यह जेट रणनीति में मददगार होगा.     कम खर्च: यह राफेल या F-35 से सस्ता है, जो भारत के बजट के लिए अच्छा है. क्या दिक्कतें हो सकती हैं?     ट्रायल: KF-21 अभी टेस्टिंग में है. 2026 तक तैयार नहीं होगा.     तकनीक: दक्षिण कोरिया को भारत के साथ तकनीक शेयर करनी होगी.     दुश्मन की नाराजगी: चीन और उत्तर कोरिया इस डील को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मान सकते हैं.  

दो दिन बाद आ सकती है बड़ी खुशखबरी, रेपो रेट घटाने पर विचार कर सकता है RBI

मुंबई  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो चुकी है. इस अहम बैठक की अध्यक्षता आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा कर रहे हैं. पिछली तीन बैठकों में रिजर्व बैंक पहले ही रेपो रेट में कुल 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर चुका है, जिससे फिलहाल रेपो रेट 5.50 प्रतिशत पर है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार भी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करेगा या उन्हें स्थिर रखेगा. बैठक के नतीजे 6 अगस्त को घोषित किए जाएंगे. रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की संभावना अर्थशास्त्रियों के अनुसार, केंद्रीय बैंक के पास नीतिगत ब्याज दर में कम से कम 25 आधार अंकों की कटौती का मजबूत कारण है. अमेरिका के टैरिफ के चलते भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है और इससे समग्र आर्थिक गतिविधियों में मंदी आ सकती है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक हालिया रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और अपेक्षाकृत कम मुद्रास्फीति को देखते हुए आरबीआई अगस्त की बैठक में 25 बीपीएस की कटौती कर सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कदम त्योहारी सीजन से पहले ऋण प्रवाह को तेज कर सकता है और अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे सकता है. अब तक हो चुकी है तीन बार कटौती, क्या फिर घटेगा ब्याज? RBI ने पहले ही लगातार तीन बार रेपो रेट में कटौती की है, जिससे कुल 100 बेसिस प्वाइंट यानी 1% की कमी हो चुकी है. फिलहाल रेपो रेट 5.50% पर है. यही वो दर है जिस पर बैंक RBI से कर्ज लेते हैं. इसी के आधार पर लोन और EMI पर ब्याज तय होता है. कुछ जानकारों का मानना है कि RBI अब रुक सकता है और इस बार रेपो रेट को स्थिर रख सकता है. उनका कहना है कि जून में महंगाई दर यानी रिटेल इंफ्लेशन 2.1% रही, जो काफी कम है. ऐसे में RBI पहले की गई कटौतियों का असर देखने के लिए कुछ समय ले सकता है. कुछ एक्सपर्ट्स को है और कटौती की उम्मीद हालांकि कई जानकार ये भी कह रहे हैं कि मौजूदा हालात में RBI एक और 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25% की कटौती कर सकता है. ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर का कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ और ग्लोबल अनिश्चितता से GDP ग्रोथ पर असर पड़ सकता है. ऐसे में RBI एक आखिरी कटौती कर सकता है ताकि ग्रोथ को सपोर्ट मिले. Crisil के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी का भी यही मानना है कि ग्रोथ पर खतरा फिलहाल महंगाई से बड़ा है, इसलिए RBI 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है. SBI की रिपोर्ट में भी  रेपो रेट घटने की उम्मीद SBI की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर RBI अब कटौती करता है, तो इसका फायदा सीधे फेस्टिव सीजन में मिलेगा. बैंक का मानना है कि पहले ही त्योहारों का सीजन आ रहा है और अगर रेपो रेट घटती है, तो क्रेडिट ग्रोथ यानी लोन की डिमांड बढ़ सकती है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि RBI को देर नहीं करनी चाहिए, वरना सही समय निकल सकता है. CareEdge Ratings का कहना है कि RBI पहले ही रेपो रेट में कटौती कर चुका है और अब कुछ समय तक उसका असर देखने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जब तक ग्रोथ में कोई बड़ी गिरावट न दिखे, तब तक और कटौती नहीं होगी. Bank of Baroda के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस का कहना है कि जून की महंगाई दर या अमेरिका की टैरिफ नीति से अब पॉलिसी पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा. RBI पहले ही इस डेटा को ध्यान में रख चुका है. इसलिए फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन टोन यानी बयान में सतर्कता रहेगी. महंगाई पर काबू, तेल की कीमत और टैरिफ से चिंता रिजर्व बैंक को सरकार ने 4% महंगाई का टारगेट दिया है जिसमें 2% ऊपर-नीचे की छूट है. जून में महंगाई 2.1% रही है जो इस दायरे में बहुत कम है. लेकिन कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ अभी भी चिंता का कारण हैं. EMI घटेगी या नहीं? RBI की MPC मीटिंग काफी अहम है. कुछ एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि एक और छोटी कटौती होगी, जिससे होम लोन सस्ता हो सकता है. वहीं कुछ जानकारों का मानना है कि फिलहाल RBI इंतजार करेगा. अब देखना यह है कि 6 अगस्त को RBI कौन सा रास्ता अपनाता है . अगर आप भी होम लोन लेने की सोच रहे हैं या पहले से EMI भर रहे हैं, तो RBI की इस मीटिंग पर नजर जरूर रखें. समय पर नीतिगत कदम की जरूरत रिपोर्ट के अनुसार, इतिहास गवाह है कि जब भी त्योहारी सीजन जल्दी आता है और उससे पहले ब्याज दरों में कटौती होती है, तो क्रेडिट ग्रोथ (ऋण वृद्धि) में तेज़ उछाल देखने को मिला है. रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि केंद्रीय बैंक को सही समय पर कदम उठाना चाहिए, ताकि नीतिगत खिड़की का लाभ उठाया जा सके. मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान में बदलाव संभव CareEdge Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही तक खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत से नीचे जा सकती है. इसके चलते आरबीआई इस वित्तीय वर्ष के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को नीचे कर सकता है. जीडीपी अनुमान बरकरार, बाहरी दबावों पर नजर CareEdge ने कहा है कि वे वित्त वर्ष 2026 के लिए 6.4 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर के पूर्वानुमान पर कायम हैं, लेकिन अमेरिका और अन्य देशों से आने वाले बाहरी दबावों की बारीकी से निगरानी की आवश्यकता है.

ट्रंप की जुबान फिर फिसली! 27 वर्षीय सेक्रेटरी पर टिप्पणी से मचा सियासी बवाल

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट की तारीफ करते हुए ऐसे शब्द कहे जिन पर अब देश-विदेश में बहस छिड़ गई है। न्यूजमैक्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने लेविट को “अब तक की सबसे बेहतरीन प्रेस सचिव” बताया, लेकिन तारीफ के दौरान उनके शब्दों ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। ट्रंप ने कहा, “वो एक स्टार बन चुकी हैं। वो चेहरा, वो दिमाग, वो होंठ… जिस तरह वो हिलते हैं, जैसे मशीन गन हो। वो वाकई एक शानदार इंसान हैं।” कौन हैं कौरोलिन 27 वर्षीय कैरोलिन लेविट ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की पहली प्रेस सचिव हैं और अब तक कुल मिलाकर उनकी पांचवीं प्रेस सचिव हैं। एक दिन पहले वाइट हाउस प्रेस ब्रीफिंग में लेविट ने ट्रंप के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की तारीफ करते हुए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कि ट्रंप ने पिछले छह महीनों में लगभग “हर महीने एक शांति समझौता या संघर्षविराम” कराया है। लेकिन ट्रंप की व्यक्तिगत शैली में की गई यह प्रशंसा कई लोगों को अजीब और असहज लगी। सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणियों को “अप्रोफेशनल”, “क्रिंजी” और “परेशान करने वाली” बताया गया। सोशल मीडिया पर कमेंट एक यूज़र ने लिखा, “अगर किसी आम ऑफिस में कोई पुरुष किसी महिला सहयोगी के लिए ऐसी बात कहे, तो उसे फौरन नौकरी से निकाल दिया जाए और कंपनी पर केस कर दिया जाए।” कई यूज़र्स ने मीडिया की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। कहा, “क्या कोई मेनस्ट्रीम मीडिया इन बेतुकी और अजीब बातों पर ट्रंप या वाइट हाउस से सवाल पूछेगा? शायद नहीं।” इस बयान ने ट्रंप की पहले से ही विवादों में घिरी छवि को और बिगाड़ दिया है, खासकर महिलाओं के साथ उनके बर्ताव को लेकर लोग पहले भी सवाल उठाते रहे हैं।

जेब में वोटर स्लिप, ID भी मौजूद! ऑपरेशन महादेव में मारे गए आतंकियों की पाकिस्तान से पुष्टि

श्रीनगर  पिछले महीने 28 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के दाचीगाम में महादेव की पहाड़ियों में जंगलों के बीच 'ऑपरेशन महादेव' के दौरान मारे गए तीनों आतंकी पाकिस्तानी नागरिक थे। इस बात की पुष्टि उनके पास से बरामद सरकारी पहचान पत्र और बायोमेट्रिक डेटा से हुई है। ये तीनों आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे और तीनों ही पहलगाम में हुई आतंकी हमले में शामिल थे। सुरक्षा बलों द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं। प्राप्त साक्ष्यों के मुताबिक, ये आतंकवादी पहलगाम में हमले को अंजाम देने के बाद से ही दाचीगाम-हरवान वन क्षेत्र में छिपे हुए थे। सुरक्षा बलों द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के मुताबिक, पहलगाम में पर्यटकों पर की गई गोलीबारी में कोई भी स्थानीय कश्मीरी शामिल नहीं था। बता दें कि 28 जुलाई को ऑपरेशन महादेव में तीन आतंकवादी – सुलेमान शाह उर्फ फैजल जट्ट, अबू हमजा उर्फ 'अफगान' और यासिर उर्फ 'जिब्रान' को सुरक्षा बलों ने ढेर कर दिया था।साक्ष्यों के विश्लेषण से पता चला है कि A++ लश्कर कमांडर सुलेमान शाह, पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड और मुख्य शूटर था, जबकि हमजा और यासिर ए-ग्रेड लश्कर कमांडर थे। गोलीबारी के दौरान हमजा दूसरा बंदूकधारी था, जबकि यासिर तीसरा बंदूकधारी था जिसके पास हमले के दौरान बाकी दोनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। मतदाता पहचान पत्र और स्मार्ट आईडी चिप से खुलासा रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आतंकियों के शवों से मतदाता पहचान पत्र और स्मार्ट आईडी चिप सहित पाकिस्तानी सरकारी दस्तावेज भी बरामद किए गए, जिससे उनके पड़ोसी देश से संबंध होने की पुष्टि होती है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट से पता चलता है कि सुलेमान शाह और अबू हमजा की जेबों से पाकिस्तान चुनाव आयोग द्वारा जारी दो मतदाता पर्चियाँ मिलीं। पर्चियों पर मतदाता क्रमांक क्रमशः लाहौर (एनए-125) और गुजरांवाला (एनए-79) की मतदाता सूचियों से मेल खाते हैं। सैटेलाइट फोन से एक मेमोरी कार्ड भी बरामद सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के क्षतिग्रस्त सैटेलाइट फोन से एक मेमोरी कार्ड भी बरामद किया है, जिसमें तीनों व्यक्तियों के NADRA (राष्ट्रीय डेटाबेस और पंजीकरण प्राधिकरण) बायोमेट्रिक रिकॉर्ड थे। इन रिकॉर्डों में उनके फिंगरप्रिंट, चेहरे के नमूने और वंशावली की जानकारी है, जो उनकी पाकिस्तानी नागरिकता और चांगा मंगा (कसूर ज़िला) और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में रावलकोट के पास कोइयाँ गाँव में उनके पते की पुष्टि करती है।

मुंबई में पक्षियों को दाना खिलाना अपराध! 51 कबूतरखाने बंद, 100 लोग चालान के शिकंजे में

मुंबई महाराष्ट्र सरकार के निर्देश और बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने दादर कबूतरखाना में कबूतरों को दाना डालने पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया है. बीएमसी ने 2 अगस्त को दादर कबूतरखाना के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इसे प्लास्टिक की बड़ी तिरपालों से ढक दिया. यह प्रतिबंध गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के कारण लागू किया गया है, क्योंकि कबूतरों की बीट (मल) से सांस संबंधी बीमारियां और संक्रमण होने की संभावना होती है, विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों में. बीएमसी ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को लागू करते हुए दादर कबूतरखाना में बने अवैध ढांचों को ध्वस्त कर दिया और कबूतरों को खिलाने के लिए रखे गए अनाज को जब्त कर लिया गया. कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध लागू होने के बाद से बीएमसी ने दादर कबूतरखाना में 100 से अधिक लोगों पर जुर्माना लगाया है. बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बीएमसी को प्रतिबंध का उल्लंघन कर कबूतरों को दाना डालने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और आपराधिक शिकायत दर्ज करने का अधिकार दिया है, जिसमें किसी व्यक्ति द्वारा बार-बार आदेश का उल्लंघन पर संभावित गिरफ्तारी भी शामिल है. बीएमसी को इस कार्रवाई में मुंबई पुलिस का भी सहयोग मिला है और उन जगहों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जहां लोग कबूतरों को दाना डालते हैं. कबूतरों को दाना डालने के पीछे सांस्कृतिक और धार्मिक आधारों का हवाला देकर स्थानीय लोग बीएमसी के एक्शन का विरोध कर रहे हैं. हालांकि, बीएमसी का कहना है कि वह हाई कोर्ट के आदेश पर जन स्वास्थ्य और स्वच्छता को प्राथमिकता दे रही है.  दादर निवासी नीलेश त्रेवाडिया ने कहा कि बीएमसी को इस तरह के प्रतिबंध के परिणामों पर भी ध्यान देना चाहिए. यह प्रतिबंध दादर सहित मुंबई के सभी प्रमुख कबूतरखानों पर लागू है और हाई कोर्ट ने बीएमसी से इसे सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई हो रही है. मुंबई में 51 कबूतरखाने हैं, जिनमें दादर कबूतरखाना जैसे प्रतिष्ठित स्थल भी शामिल हैं. मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उत्पन्न स्थिति को ध्यान में रखते हुए, महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने मुंबई के म्युनिसिपल कमिश्नर को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि पक्षी प्रेमियों, जैन साधुओं और नागरिकों द्वारा व्यक्त की गई भावनाओं को ध्यान में रखा जाए. बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हुए उन्होंने बीएमसी से कोई बीच का रास्ता निकालने का आग्रह किया है. मुंबई में पिजन फीडिंग की सदियों पुरानी प्रथा मुंबई में लोगों द्वारा कबूतरों को दाना डालना सदियों से चली आ रही एक प्रथा है, जो कई बार विवादों का कारण भी बना है. भारतीय संस्कृति में कबूतरों को दाना डालना पुण्य का कार्य माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि इससे पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है. कहा जाता है कि कबूतरों को भोजन कराने से मृत पूर्वजों की आत्मा को तृप्ति मिलती है और पितृ-पीड़ा से मुक्ति मिलती है. विशेष रूप से अमावस्या के दिन कबूतरों को दाना डालना शुभ माना जाता है. कुछ संस्कृतियों में यह भी मान्यता है कि कबूतरों को सांसारिकता और आध्यात्म के बीच संदेशवाहक के रूप में देखा जाता है, उन्हें भोजन कराने से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है और ईश्वर के साथ बेहतर संबंध बनता है. जैन धर्म में, कबूतरों को दाना डालना जीव दया या जीवों के प्रति करुणा का एक रूप है, जो जैन परंपरा के प्रमुख सिद्धांतों में से एक है. जैन मंदिर और ट्रस्ट कबूतरखाना संचालित करते हैं. जैन धर्म के अनुयायी इन स्थानों पर नियमित रूप से कबूतरों को दाना डालने जाते हैं. दादर कबूतरखाना को भी एक जैन मंदिर द्वारा स्थापित किया गया था. मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने का इतिहास मुंबई में गुजराती और जैन व्यापारियों की बड़ी संख्या के कारण शहरभर में कबूतरखाने मिल जाते हैं. इस कारण मुंबई में कड़ी संख्या में कबूतर देखे जा सकते हैं. एडवर्ड हैमिल्टन ऐटकेन ने 1909 में अपनी किताब 'द कॉमन बर्ड्स ऑफ बॉम्बे' में शहर में कबूतरों की बड़ी आबादी के कारणों पर विस्तार से बताते हुए लिखा, 'वे दो चीजों से बंबई की ओर आकर्षित होते हैं: उनके रहने के लिए यहां इमारतों की कोई कमी नहीं है और हिंदू अनाज व्यापारियों की उदारता के कारण उन्हें भोजन की कमी नहीं होती.' बॉम्बे नगरपालिका ने 1944 में दादर स्थित जैन मंदिर को एक पत्र लिखकर पक्षियों के भोजन के लिए एक ट्रैफिक आइलैंड के निर्माण की अनुमति दी. यह पत्र जैन मंदिर द्वारा भेजे गए उस पत्र के जवाब में जारी किया गया था जिसमें मंदिर के पास झुंड में रहने वाले और कारों से कुचले जाने के खतरे में रहने वाले कबूतरों की सुरक्षा के लिए एक बाड़ा बनाने की अनुमति मांगी गई थी. ट्रैफिक आइलैंड सड़क पर एक उठा हुआ या चिह्नित क्षेत्र होता है जिसका उपयोग यातायात को नियंत्रित करने, पैदल यात्रियों को सुरक्षित स्थान प्रदान करने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए किया जाता है. ऐसे स्ट्रक्चर चौराहों पर या सड़कों के बीच में बनाए जाते हैं, ताकि वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित किया जा सके और पैदल चलने वालों को सड़क पार करने के लिए सुरक्षित स्थान मिल सके.  मुंबई में कबूतरों की बीट से स्वास्थ्य जोखिम तत्कालीन बॉम्बे में कबूतरों को दाना डालना व्यापक रूप से स्वीकार्य था. लेकिन 90 के दशक के मध्य में इस पर चिंताएं उभरने लगीं, जब मेडिकल स्टडीज में कबूतरों की बीट को सांस संबंधी बीमारियों से जोड़ा गया. इसके बाद, मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने से संबंधित शिकायतें बढ़ने लगीं, नागरिकों ने कबूतरों की अधिक संख्या के कारण श्वसन संबंधी समस्याओं की शिकायत की. 2013 में, 30 जून को ग्रांट रोड पर कबूतरखाना के पास एक कबूतर के अचानक सामने आने से बीएमसी के एक इंजीनियर की मोटरसाइकिल से गिरकर मौत हो गई थी. घटना के बाद स्थानीय पार्षद ने दाना बेचने वालों को सड़क से हटा दिया. दो दिन बाद, तत्कालीन बीएमसी लॉ कमिटी के चेयरमैन मकरंद नार्वेकर ने कबूतरखानों को कम भीड़-भाड़ वाले इलाकों में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा. हालांकि, इस प्रस्ताव … Read more

शहबाज शरीफ भड़के: इजरायली मंत्री ने अल अक्सा मस्जिद में की पूजा, कहा– बर्दाश्त नहीं करेंगे

 यरूशलम  इजरायल के दक्षिणपंथी नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गिविर (Itamar Ben Gvir) ने  यरूशलम की अल-अक्सा मस्जिद में पूजा की. अल-अक्सा मंदिर में उनका पूजा करना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को नागवार गुजरा और उन्होंने खुलकर अपना गुस्सा जाहिर किया.  बेन गिविर के अल-अक्सा मस्जिद के दौरे से तनाव बढ़ गया है. उनके इस दौरे के मुस्लिम जगत के लिए उकसावे वाला बताया जा रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गिविर के अल-अक्सा मस्जिद में पूजा करने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हम इजरायली मंत्रियों द्वारा हाल ही में अल-अक्सा मस्जिद में घुसने की निंदा करते हैं.  शहबाज शरीफ ने कहा कि इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में से एक का अपमान ना केवल दुनियाभर के एक अरब से अधिक मुसलमानों की धार्मिक आस्था का घोर अपमान है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवता की सामूहिक अंतरात्मा पर भी सीधा हमला है. इस तरह के योजनाबद्ध उकसावे और क्षेत्र को हड़पने की गैरजिम्मेदाराना मांगें शांति की संभावनाओं को गंभीर रूप से खतरे में डाल रही हैं. इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इजरायल की ये निंदनीय और शर्मनाक कार्रवाइयां न केवल फिलिस्तीन बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव को जानबूझकर भड़का रही हैं, जिससे यह क्षेत्र और अधिक अस्थिरता और संघर्ष की ओर धकेला जा रहा है. पाकिस्तान एक बार फिर जोर देकर अपील करता है कि तत्काल युद्धविराम लागू किया जाए, आक्रामकता की सभी कार्रवाइयां रोकी जाएं और एक विश्वसनीय शांति प्रक्रिया को बहाल किया जाए, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के संबंधित प्रस्तावों के अनुरूप हो. बता दें कि अल-अक्सा मस्जिद को यहूदी टेंपल माउंट कहते हैं और इसे अपना पवित्र स्थल मानते हैं. अल-अक्सा मस्जिद में लंबे समय से नमाज पढ़ी जाती हैं. यहां यहूदी पूजा नहीं करते बल्कि तय समय पर ही यहूदी यहां प्रवेश कर सकते हैं. वहीं, इस्लाम में अल-अक्सा मस्जिद मक्का और मदीना के बाद तीसरा सबसे पवित्र स्थल है. मुसलमान, यहूदी और ईसाई धर्मों के अल-अक्सा को लेकर किए जाने वाले दावों को लेकर यह परिसर अशांत बना हुआ है. बता दें कि गिविर 2021 में भी अल-अक्सा मस्जिद गए थे. उस समय भी उनके इस दौरे का विरोध हुआ था.