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मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर इंटरैक्टिव सेशन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से लुधियाना में प्रमुख उद्योगपतियों ने की वन-टू-वन चर्चा टेक्सटाइल, फार्मा, स्टील, एथेनॉल और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेश की जताई रुचि भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लुधियाना प्रवास के दौरान पंजाब के प्रमुख उद्योगपतियों से वन-टू-वन बैठक कर उन्हें मध्यप्रदेश की निवेश समर्थक नीतियों से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया कि मध्यप्रदेश सरकार जहाँ भी संभावनाएं दिख रही हैं, वहाँ नीतिगत बदलाव करने के लिए पूरी तत्परता से काम करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में श्रमिकों और उद्योगों दोनों के हितों का समान ध्यान रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री से चर्चा करने वाले उद्योगपतियों में टेक्सटाइल सेक्टर से नाहर ग्रुप के सीएमडी श्री दिनेश ओसवाल, एसईएल ग्रुप के सीएफओ श्री नवनीत गुप्ता और बॉन ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधि श्री मंजीत सिंह शामिल रहे। स्टील क्षेत्र से टीके स्टील समूह के एमडी श्री लोकेश जैन ने प्रदेश में संभावित निवेश अवसरों पर चर्चा की। फार्मास्यूटिकल्स, एथेनॉल एवं रसायन क्षेत्र से आईओएल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स के एमडी श्री वरिन्दर गुप्ता और एमआरएम मेध्या ग्रीनटेक के डायरेक्टर श्री पुनीत अग्रवाल ने निवेश प्रस्ताव रखे। खाद्य प्रसंस्करण और चाय उद्योग से जुड़े भगवती लैक्टो वेजिटेरियन एक्सपोर्ट्स के एमडी श्री सुशील मित्तल और केजी एक्सपोर्ट टीम के सदस्य श्री हरीश दुआ ने मध्यप्रदेश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, कृषि उत्पाद उपलब्धता और फूड पार्क्स पर चर्चा की। इंजीनियरिंग सेक्टर से हीरो साइकिल के एमडी श्री एस.के. राय और हाईलैंड एथेनॉल के एमडी श्री अमित कुमार मोदी ने निवेश के लिए औद्योगिक क्षेत्रों की जानकारी ली। इसके अतिरिक्त, बेक्टर्स फूड्स के एमडी श्री अनूप बेक्टर और ए.वी. कोटस्पिन इंडस्ट्री के डायरेक्टर श्री दीपक गर्ग ने मुख्यमंत्री से विस्तार से चर्चा कर प्रदेश की नीतियों की सराहना की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के हित में सैकड़ों करोड़ रु. के सेटलमेंट क्लियर किये हैं। यह निर्णय प्रदेश सरकार की श्रमिकों के प्रति संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि यदि किसी नीति में निवेशकों को सुविधा देने के लिए संशोधन की आवश्यकता होगी, तो सरकार कैबिनेट स्तर पर भी बदलाव करने के लिए तत्पर है। लुधियाना में हुआ यह संवाद न केवल निवेश प्रस्तावों की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश निवेशकों का भरोसेमंद और व्यवहारिक गंतव्य बनकर उभर रहा है।  

लुधियाना इंटरैक्टिव सेशन में मिले 15,606 करोड़ के निवेश प्रस्ताव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

20 हजार से अधिक रोजगार का होगा सृजन लुधियाना और पंजाब के निवेशकों को मध्यप्रदेश में किया आमंत्रित मध्यप्रदेश में निवेश करें और विकसित भारत के निर्माण में बने भागीदार पंजाब और मध्यप्रदेश मिलकर करेंगे देश का विकास श्रमिकों के हित में मध्यप्रदेश सरकार ने बड़े स्तर पर लंबित सेटलमेंट किये क्लियर निवेशकों को राज्य की औद्योगिक नीतियों से कराया अवगत इंटरैक्टिव सेशन और संवाद-सत्र में 400 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल वन-टू-वन चर्चा में 15 से अधिक उद्योगपतियों से किया संवाद निवेशकों ने म.प्र. के विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई निवेश के प्रति रूचि   भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश का आर्थिक तंत्र मजबूत हुआ है। देश में औद्योगीकरण बढ़ा है, अब हम विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं। लुधियाना भारत का मैन्चेस्टर है। यहां के उद्योगपतियों ने बड़ी मेहनत से अपनी पहचान बनाई है। लुधियाना में निर्मित ए-वन और हीरो साइकिल्स देश-दुनिया में मशहूर हैं। पंजाब के निवेशक देश की आर्थिक समृद्धि में योगदान देने वाले प्रमुख ध्वजवाहक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज लुधियाना में हुये इंटरैक्टिव सेशन, वन-टू-वन चर्चा और संवाद सत्रों में यहां के उद्योगपतियों से 15 हजार 606 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुये हैं, जिससे 20 हजार से अधिक रोजगार का सृजन होगा। हमने लुधियाना और पंजाब के उद्योपतियोंत को मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने के लिये आमंत्रित किया। साथ ही उन्हें मध्यप्रदेश में उपलब्ध संसाधनों के साथ राज्य की औद्योगिक नीतियों से भी अवगत कराया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को पंजाब की उद्योग नगरी लुधियाना में मध्यप्रदेश में निहित निवेश की संभावनाओं के संबंध में निवेशकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का एकमात्र प्रदेश है, जहां पन्ना जिले में हीरा तो शहडोल में आयरन डिपाजिस्ट्स है। बीते दिनों सिंगरौली जिले में सोने की खदानें भी मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी निवेशकों को मध्यप्रदेश की रत्नगर्भा भूमि में निवेश करने के लिए आत्मीयता से आमंत्रित करते हुए कहा कि यहां व्यापार की असीम संभावनाएं हैं। आइये और मध्यप्रदेश में अपना दूसरा घर बनाईये। उन्होंने कहा कि निवेशक मध्यप्रदेश में जितने चाहें, उतने उद्योग-धंधे लगाएं, सरकार पलक-पावड़े बिछाकर आपका स्वागत करेगी, आपकी हर संभव मदद करेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योग-धंधे लगाने के लिए जरूरत के मुताबिक भूमि, बिजली, पानी, कुशल कार्यशक्ति सब उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और पंजाब दोनों भाइयों की तरह हैं। अनाज के उत्पादन में पंजाब बड़ा और मध्यप्रदेश छोटा भाई है। ‍अब दोनों भाई मिलकर देश और मध्यप्रदेश का विकास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश प्रगति पथ पर है। पंजाब वीरों की धरती है, इसकी अलग ही पहचान है। यह गुरु परंपरा की अद्भुत धरती है। मध्यप्रदेश के इंदौर की पहचान स्वच्छता में है, तो लुधियाना की पहचान उद्योगों से है। हम उद्योगपतियों को मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने के लिए आमंत्रित करने आए हैं। आप खुले दिल से और बिना किसी हिचक के निवेश करें, सरकार जितनी हो सकेगी, आपकी उतनी मदद करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत बदलते दौर में सिरमौर बन रहा है। उद्योगों से कई परिवारों का उदर-पोषण होता है और गरीबों के जीवन में आमदनी का उजाला आता है। यह एक पवित्र कार्य है। उद्योगपति अपने परिवार का पोषण करते हुए दूसरों का भी घर रौशन करते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब अमर शहीद भगत सिंह की धरती है, जिन्होंने सर्वोच्च बलिदान देकर देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप लोग यहां भी काम करते रहें और अपने कारोबार का विस्तार करते हुए एक-दो फैक्ट्री मध्यप्रदेश में भी लगाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी उद्योग अनुकूल नीतियों को दुनिया के सामने रखा। हमने उद्योगपतियों को कई सौगातें दी हैं। टेक्सटाईल्स सेक्टर के इंडस्ट्रियल वर्कर्स की सैलरी में मध्यप्रदेश सरकार 5 हजार रुपए की अतिरिक्त मदद देगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में स्कूली बच्चों को साइकिलें बांटी जा रही हैं। साइकिलें मुख्यत: पंजाब में ही बनती हैं। यही साइकल मध्यप्रदेश में भी बन सकती हैं। उद्योगपति मध्यप्रदेश में साइकल बनाने की फैक्ट्री लगाएं। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में सोने की चिड़िया की पहचान रखता था। वर्ष 1947 में देश आजाद हुआ, तब भारत दुनिया की 15वीं अर्थ-व्यवस्था हुआ करता था। इजरायल और जापान जैसे देश कहां से कहां पहुंच गए। वर्ष 2014 में भारत 11वें स्थान पर था और आज बदलते दौर में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थ-व्यवस्था बन गया है और अब तीसरी अर्थ-व्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने कोयम्बटूर, सूरत और अब लुधियाना में रोड-शो कर निवेशकों के साथ संवाद किया है। राज्य में संभाग स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव भी आयोजित की गईं। इसी साल फरवरी में भोपाल में हुई जीआईएस के माध्यम से मध्यप्रदेश को 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले थे। राज्य में इंडस्ट्री के विभिन्न सेक्टर्स के विकास के लिए अलग-अलग विषयों पर समिट आयोजित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश विभिन्न खनिज संपदाओं से संपन्न क्षेत्र है। यहां निवेश करना नि:संदेह फायदे का सौदा है। श्रमिकों के हित में बड़े स्तर पर सेटलमेंट किये क्लियर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल ही में प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के हित में सैकड़ों करोड़ रुपये के सेटलमेंट क्लियर किये हैं। यह निर्णय प्रदेश सरकार की श्रमिकों के प्रति संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि यदि किसी नीति में निवेशकों को सुविधा देने के लिए संशोधन की आवश्यकता होगी तो सरकार कैबिनेट स्तर पर भी बदलाव करने के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की लुधियाना में प्रमुख उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लुधियाना प्रवास के दौरान पंजाब के प्रमुख उद्योगपतियों से वन-टू-वन बैठक कर उन्हें मध्यप्रदेश की निवेश समर्थक नीतियों से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया कि मध्यप्रदेश सरकार जहाँ भी संभावनाएं दिख रही हैं, वहाँ नीतिगत बदलाव करने के लिए पूरी तत्परता से काम करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में … Read more

ग्वालियर के सुशील शर्मा को मिलेगा ‘ शौर्य चक्र’ , मुंबई टेरर अटैक में बचाई थी सैंकड़ों पैसेंजर्स की जान!

ग्वालियर  मुंबई 26/11 आतंकी हमले के दौरान सैंकड़ों यात्रियों के रक्षक बने एसीटीआई सुशील शर्मा को 17 सालों तक चले लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब एक शहीद का दर्जा मिलेगा. सुशील शर्मा को शहीद का दर्जा देने से इनकार करने के बाद परिवार ने संघर्ष किया और अब 17 सालों बाद अब उन्हें गैलेंट्री अवॉर्ड से नवाजा जाएगा.  ग्वालियर के सुशील कुमार शर्मा जो 26/11 मुंबई आतंकी हमले में शहीद हो गए थे, उन्हें अब शौर्य चक्र मिल सकता है। केंद्रीय प्रशासनिक अभिकरण (कैट) ने रेलवे बोर्ड को आदेश दिया है कि सुशील कुमार शर्मा का नाम गृह मंत्रालय को भेजा जाए। कैट ने यह भी कहा है कि रेलवे सुशील के परिवार को 5 लाख रुपये दे और इस प्रक्रिया को 6 महीने में पूरा करे। इस प्रक्रिया को एक्शन में आने में 17 साल लग गए। बात 26 नवंबर 2008 को मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस की है। यहां पर पाकिस्तान से आए आतंकियों ने हमला किया था। सुशील कुमार शर्मा उस समय ड्यूटी के बाद कंट्रोल ऑफिस जा रहे थे। तभी वहां फायरिंग शुरू हो गई। रेलवे की रिपोर्ट के अनुसार, ऑफिस के लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन सुशील लोगों की जान बचाने में लग गए। इस दौरान उन्हें दो गोलियां लगीं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। कैट ने माना कि सुशील ने लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान दे दी। यह एक असाधारण वीरता का काम है। शौर्य चक्र के लिए मांगा नाम कैट ने रेलवे बोर्ड को निर्देश दिया है कि असिस्टेंट चीफ टिकटिंग इंस्पेक्टर सुशील कुमार शर्मा के नाम की सिफारिश शौर्य चक्र पुरस्कार के लिए करें। साथ ही गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजें। कैट ने गृह मंत्रालय से यह भी कहा है कि वे इस मामले पर गंभीरता से विचार करें। अगर जरूरत हो तो विशेष स्वीकृति लें, ताकि देश की सेवा में शहीद हुए कर्मचारी को उचित सम्मान मिल सके। परिवार को आर्थिक सहायता कैट ने सुशील के परिवार को पांच लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि देने का भी आदेश दिया है। साथ ही, यह भी कहा है कि पूरी प्रक्रिया को 180 दिनों के अंदर पूरा किया जाए। सुशील शर्मा पटेल नगर के रहने वाले थे। रेलवे ने अपनी रिपोर्ट में सुशील शर्मा की बहादुरी की तारीफ तो की, लेकिन समय पर उनका नाम वीरता पुरस्कार के लिए नहीं भेजा। 2010 में उनकी पत्नी रागिनी शर्मा और अन्य परिजनों ने कैट में अर्जी दी। 16 नवंबर 2010 को कैट ने रेलवे को नाम भेजने और उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया। लेकिन रेलवे ने इस आदेश का पालन नहीं किया। रेलवे का कहना 2011 में अवमानना याचिका पर रेलवे ने जवाब दिया कि उनका नाम निरस्त कर दिया गया है। इसके बाद 2012 में परिजन फिर से कैट गए। 21 जून 2025 को कैट ने पाया कि रेलवे ने 2011 में नाम भेजा था। लेकिन एक बदले हुए आदेश में कहा गया कि उनकी मृत्यु आतंकियों से लड़ते हुए नहीं हुई थी। कैट ने बहादुरी का किया सम्मान कैट के अनुसार, सुशील शर्मा ने जो किया वह बहुत ही बहादुरी का काम था। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाई। इसलिए उन्हें शौर्य चक्र मिलना चाहिए। कैट ने रेलवे बोर्ड और गृह मंत्रालय को इस मामले में तेजी से कार्रवाई करने का आदेश दिया है। ताकि सुशील शर्मा को मरणोपरांत यह सम्मान मिल सके। आतंकी कसाब ने मुंबई 26/11 आतंकी हमले में सैकड़ों की ले ली थी जान उल्लेखनीय है मुंबई आतंकी हमलों की तारीख याद करते आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं. उस दिन के खौफनाक मंजर को  मुंबई सहित पूरा देश कभी नहीं भुला पाएगा. समुद्र के रास्ते पाकिस्तान से मुंबई आए आतंकी कसाब ने अपने 10 आतंकियों के साथ  मुंबई में होटल ताज और सीएसीट रेलवे स्टेशन समते कई स्थानों पर हमले किए थे, सैकड़ों लोगों की जान गई थी. आतंकी हमले में होटल ताज़ और सीएसटी स्टेशन का मुख्य निशाना बनाया गया 26/11 आतंकी हमले में आतंकियों ने होटल ताज़ और सीएसटी सहित कई मुख्य निशाना बनाया था. इस हमले में अनेक सैंकड़ों की जान गई थी, उनमें ग्वालियर के सुशील कुमार शर्मा भी थे. घटना के समय सुशील शर्मा मुंबई सीएसटी रेलवे स्टेशन पर बतौर सहायक मुख्य टिकट निरीक्षक (डिप्टी सीटीआई) की ड्यूटी कर रहे थे. सुशील शर्मा, उस समय भी अडिग खड़े रहे जब आतंकी हमले के दौरान सीएसटी स्टेशन पर अफरा तफरी का माहौल था. चारों ओर गोलियां बरस रही थी, लेकिन सुशील ने पैसेंजर्स की जान बचाने के लिए कंट्रोल रूम से बाहर आए और सैकड़ों यात्रियों की जान बचाने में कामयाब हुए थे. आतंकियों की दो गोली ने ले ली थी मुख्य टिकट निरीक्षक सुशील शर्मा की जान विषम परिस्थितियों में अपने जान की परवाह नहीं करते हुए निर्दोषों की जान बचाकर वीरता का प्रदर्शन करने वाले बहादुर अफसर सुशील शर्मा को उनकी शहादत के लिए इनाम नहीं मिला था, क्योंकि वे वदीर्धारी नहीं, बल्कि रेलवे अधिकारी थे. परिजनों ने सरकार से सुशील की वीरता के लिए शहीद का दर्जा देने की मांग की, लेकिन तब उनकी बात नहीं सुनी गई.   कैट ने आदेश में शहीद मानते हुए सुशील को गेलेंट्री अवार्ड देने के दिए निर्देश सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन ट्रिब्यूनल (कैट) में सुशील शर्मा को शहीद का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर पहुंचे परिजनों को लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ी और अब घटना के 17 साल बाद कैट ने भारत सरकार को दिए अपने आदेश में सुशील को शहीद मानते हुए उन्हें गेलेंट्री अवार्ड में देने के निर्देश दिए है. मुख्य टिकट निरीक्षक रहे सुशील शर्मा आतंकी हमले के समय कार्यालय से निकलकर कंट्रोल रूम पंहुचे और प्लेटफार्म पर आने वाली कई ट्रेन को स्टेशन से बाहर ही रोकने का एनाउंसमेंट किया, जिससे सैकड़ों पैसेंजर की जान बच गई, लेकिन वो आंतिकियों की गोली का शिकार बन गए. सुशील शर्मा के परिजनों ने साल 2010 में खटखटाया था कैट का दरवाजा मुंबई आतंकी हमले में आंतकियों को गोली खाकर मिसाल बने सुशील शर्मा को शहादत के दो वर्ष की समय-सीमा पूरा होने के बाद जब शहीद का दर्जा नहीं मिला तो ग्वालियर के सिटी सेंटर पटेल नगर स्थित … Read more

गुजरात की राजधानी गांधीनगर पहुचे आष्टा विधायक, बापू को किया प्रणाम

आष्टा  आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर निजी कार्य हेतु गुजरात दौरे के दौरान आज गुजरात की राजधानी गांधीनगर पहुचे । गांधीनगर में साबरमती नदी के किनारे स्तिथ पूज्य बापू महात्मा गांधी के निवास जिसे अब साबरमती आश्रम कहा जाता है वहा पहुचे । विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने साबरमती आश्रम में चरखा चलाया,आश्रम में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर सूत की माला पहना कर बापू को नमन किया । साबरमती आश्रम भारत के गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर के समीप साबरमती नदी के किनारे स्थित है। सत्याग्रह आश्रम की स्थापना सन् 1915 में अहमदाबाद के कोचरब नामक स्थान में महात्मा गांधी द्वारा हुई थी। सन् 1917 में यह आश्रम साबरमती नदी के किनारे वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित हुआ और तब से साबरमती आश्रम कहलाने लगा। गुजरात के गांधीनगर में साबरमती नदी के किनारे स्तिथ साबरमती आश्रम भारत की स्वतंत्रता के आंदोलनों के मुख्य केंद्रों में से एक केंद्र था । साबरमती आश्रम से ही सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत हुई थी,इस ही आश्रम से गांधी जी ने 241 मील लंबी दांडी यात्रा शुरू की थी । साबरमती आश्रम पहुचे विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने सभी कक्षो को देखा, जानकारी ली एवं अतिथि विजिट बुक में अपना मत अंकित किया । यहा के बाद विधायक गांधीनगर में स्तिथ सुप्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर पहुचे,इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाने वाली नक्काशी ओर अलंकरणों से सुसज्जित है, जिसे देखा एवं विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने इस्कॉन मंदिर में  भगवान कृष्ण जी के के दर्शन किये एवं गौशाला में गौमाता की सेवा कर उनका पूजन किया ।

मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा जल गंगा संवर्धन अभियान में विभाग द्वारा उल्लेखनीय कार्य किया गया

भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान में विभाग द्वारा उल्लेखनीय कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत खेत तालाब, अमृत सरोवर, रीचार्ज पिट लक्ष्य से अधिक बनाये गये। अभियान में किये गये कार्यों के परिणाम आगामी वर्षों में परिलक्षित होंगे। मंत्री पटेल ने कहा कि बड़ी नदियों के अस्तित्व को बचाने के लिये छोटी नदियों के उद्गम स्रोतों का संरक्षण आवश्यक है। मंत्री पटेल सोमवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद कार्यकारणी की 7वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। मंत्री पटेल ने जल गंगा संवर्धन अभियान में श्रेष्ठ कार्य करने के लिये विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन कार्य हमें सतत् जारी रखना है। भविष्य में पौधरोपण एवं उनके संरक्षण के लिये कार्ययोजना बनाकर कार्य किया जाये। मंत्री पटेल ने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों से पौधरोपण एवं संरक्षण के लिये “मां की बगिया” योजना 15 अगस्त से लागू की जा रही है। यह योजना ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन में महत्वपूर्ण कारक बनेगी। 15 जुलाई से 15 अगस्त तक चिन्हित शासकीय भूमि पर एवं 15 अगस्त से 15 सितंबर पर निजी भूमि पर सघन पौधरोपण किया जायेगा। उन्होंने “जल गंगा संवर्धन” अभियान में सिपरी सॉफ्टवेयर जैसी तकनीकों का उपयोग करने की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हमारे यह प्रयास निश्चित ही आने वाली पीढ़ियों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे। मंत्री पटेल ने कहा कि संविदा अधिकारियों-कर्मचारियों की नवीन सेवा शर्तों में आकस्मिक मृत्यु/दुर्घटना के समय सहायता राशि प्रदान करने के प्रावधानों का समावेश करें। इस संबंध में सामान्य प्रशासन एवं वित्त विभाग के नियमों का पालन किया जाए। आयुक्त मनरेगा, अविप्रसाद ने मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी कार्यकारणी परिषद की 6वीं बैठक का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। बैठक में मनरेगा की भौतिक और वित्तीय प्रगति संविदा कर्मचारियों/अधिकारियों की नवीन सेवा शर्तों, ग्राम रोजगार सहायकों की सेवा शर्तों, विषय विशेषज्ञों की सेवाएं लेने, यंग प्रोफेशनल्स को संबद्ध करने, मनरेगा में ड्रोन तकनीक का उपयोग करने, भारत सरकार को भेजे गये प्रस्ताव आदि बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री पटेल ने कहा कि गौशालाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये स्वैच्छिक संस्थाओं (एनजीओ) स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जाये। उन्होंने कहा कि विभिन्न योजनाओं के तहत बनने वाली सड़कों की मरम्मत करने के लिये समय-सीमा तय की जाये। उन्होंने कहा कि “जल गंगा संवर्धन” अभियान के अंतर्गत किये गर्ये कार्यों का प्रभाव आंकलन 3 वर्ष उपरांत कराया जाये। इसके लिये बेस डेटा एवं एजेंसी अभी से तय की जाये। उन्होंने कहा कि सिपरी सॉफ्टवेयर के उपयोग के संबंध में अन्य विभागों, संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थाओं को सिपरी का एक्सेस उपलब्ध कराने के लिये विस्तृत नीति शीघ्र तय की जाये। मंत्री पटेल ने मनरेगा योजना अंतर्गत पदस्थ अमले के लिये विभिन्न प्रकार का बीमा लाभ, वित्तीय एवं प्रशासकीय अधिकारों का प्रत्यायोजन, जीआरएस के रिक्त पदों की पूर्ति, संविदा अधिकारी-कर्मचारी और जीआरएस की विदेश यात्रा संबंधित प्रकरणों आदि विषयों की समीक्षा की। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह, प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, संचालक पंचायती राज छोटे सिंह, मुख्य कार्यपालन अधिकारी एसआरएलएम श्रीमत हर्शिता सिंह, मुख्य कार्यपालन अधिकारी आरआरडीए दीपक आर्य सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों का करियर मार्गदर्शन यूनिसेफ के सहयोग से दिया जायेगा

सांदीपनि विद्यालयों में यूनिसेफ के सहयोग से चलेगा कॅरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम नोडल शिक्षक की मदद से सभी विद्यार्थियों के करियर डायरी और फोल्डर होंगे तैयार प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों का करियर मार्गदर्शन यूनिसेफ के सहयोग से दिया जायेगा भोपाल प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों का करियर मार्गदर्शन यूनिसेफ के सहयोग से दिया जायेगा। कॅरियर रिफ्रेशर प्रशिक्षण के द्वारा प्रत्येक विद्यालय के एक नोडल शिक्षक को संसाधनों को उपयोग करने के लिये सक्षम बनाया जा रहा है। नोडल शिक्षक के माध्यम से ही विद्यालय में कॅरियर मार्गदर्शन प्रदान करने वाली गतिविधियां संचालित की जायेंगी। कॅरियर मार्गदर्शन के संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त लोक शिक्षण कार्यालय ने प्रदेश के समस्त सांदीपनि विद्यालय के प्राचार्यों को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश जारी किये हैं। विद्यालय स्तर पर गतिविधियों का संचालन नोडल शिक्षक एवं कक्षा शिक्षक की सहायता से सभी विद्यार्थियों से कॅरियर इनफॉर्मेशन डायरी और कॅरियर फोल्डर तैयार कराया जायेगा, जिसमें हर माह की कॅरियर संबंधी जानकारी संधारित कराई जायेगी। कॅरियर गतिविधियों का संचालन राज्य स्तर से जारी कॅरियर कैलेंडर के अनुसार विद्यालयों में नियमित रूप से संचालित कराया जायेगा। निर्देश में यह भी कहा गया है कि विद्यालय समय सारणी में विद्यार्थियों के कॅरियर मार्गदर्शन के लिये कम से कम 2 पीरियड प्रति माह आवंटित किये जायें। विद्यालय में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार कॅरियर नोडल शिक्षक एवं सहयोगी शिक्षकों के माध्यम से कॅरियर मार्गदर्शन सत्रों की योजना बनाकर सुव्यवस्थित संचालन करवाया जाये। कॅरियर गाइडेंस में प्रशिक्षित नोडल शिक्षक के माध्यम से विद्यालय के कक्षा 9 से 12 तक अध्यापन कराने वाले अन्य 2 शिक्षकों को भी शाला स्तर पर प्रशिक्षित करके उनका सहयोग लिया जाये। प्रार्थना सभा में मिलेगी विस्तृत जानकारी विद्यालय में प्रार्थना सभा में कॅरियर गाइडेंस के तहत किसी एक डोमेन से संबंधित एक या दो कॅरियर कार्ड की संक्षिप्त जानकारी सप्ताह में किन्हीं 3 दिनों में साझा की जा सकती है। इस प्रक्रिया से विद्यार्थी कॅरियर के प्रति रूचि लेकर स्वयं कार्ड पढ़कर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेगा। निर्देश में कहा गया है कि प्रत्येक सांदीपनि विद्यालय में एक कॅरियर कार्नर बनाया जाये जिसमें कॅरियर संबंधी सामग्री, कॅरियर कार्ड, पोस्टर, ब्रोशर और विद्यार्थी द्वारा बनाई गई सामग्री प्रदर्शित की जाये। कॅरियर मेला का आयोजन सांदीपनि विद्यालय के प्राचार्यों से इस शैक्षणिक सत्र में जनवरी माह में कॅरियर मेला आयोजन की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने के लिये कहा गया है। विद्यालय स्तर पर मॉनिटरिंग के लिये प्राचार्यों से कहा गया है कि कॅरियर मार्गदर्शन से संबंधित विमर्श पोर्टल की मॉनिटरिंग फार्म को नोडल शिक्षक की सहायता से भरवाया जाये। प्राचार्य द्वारा कम से कम 2 कॅरियर मार्गदर्शन कक्षाओं का अवलोकन करके संबंधित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को उचित मार्गदर्शन दिया जाये। राज्य स्तर की गतिविधियां राज्य स्तर कॅरियर मार्गदर्शन के लिये आवश्यक संसाधन जिनमें 501 करियर कार्डस् हिन्दी एवं अंग्रेजी में, पोस्टर, ब्रोशर और 7 एजुकेशनल वीडियो को विमर्श पोर्टल पर अपलोड कराया जा रहा है। प्रत्येक माह में नोडल शिक्षकों के साथ एक घंटे की ऑनलाइन समीक्षा की जायेगी। इस वर्ष अक्टूबर एवं दिसंबर में कॅरियर  संबंधित विषयों पर वेबिनार के आयोजन का भी किया जाना प्रस्तावित है।  

मंत्री पटेल ने राजीव गांधी जल संग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन की साधारण सभा की बैठक

जल, भूमि संरक्षण के लिये ठोस प्रयास आवश्यक : मंत्री पटेल हमें जल, भूमि संरक्षण के लिये अभी से ठोस प्रयास करने होंगे: मंत्री पटेल मंत्री पटेल ने राजीव गांधी जल संग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन की साधारण सभा की बैठक भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा है कि हमें जल, भूमि संरक्षण के लिये अभी से ठोस प्रयास करने होंगे। जल स्रोतों के रिचार्जिंग सिस्टम को बढ़ाना होगा। फसलों का चक्रीकरण और पौधरोपण में वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना होगा। मंत्री पटेल सोमवार को राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन की साधारण सभा की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बैठक में चिंता करते हुए कहा कि बढ़ती जनसंख्या के कारण जल स्रोतों के रिचार्जिंग सिस्टम धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं। नदियों के उद्गम स्थलों का संरक्षण नहीं करने के कारण उनके स्रोत सूखते जा रहे हैं। मरूस्थलीकरण की प्रक्रिया तेजी से बढ़ रही है। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह, प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव पीएचई पी. नरहरि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री पटेल ने कहा कि “राजीव गांधी जल संग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन” के अंतर्गत विभिन्न विभागों से मिशन के परिणामों की जानकारी प्राप्त की जाए। उन्होंने कहा कि मिशन के तहत सभी परियोजनाओं का थीमेटिव विश्लेषण किया जाये। मंत्री पटेल ने कहा कि वॉटर शेड परियोजनाओं के बेहतर परिणामों के लिये एनजीओ को संबद्ध करने की नीति तैयार की जाये। उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना” की प्रगति का आंकलन जमीनी स्तर पर करें। मंत्री पटेल ने कहा कि वॉटर शेड परियोजनाओं के अंतर्गत क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन का कार्य अच्छा करने वाले जिलों का स्वयं भ्रमण करेंगे। इस अवसर पर चंदेला-बुंदेला तालाबों का जीर्णोद्धार कार्यशाला प्रतिवेदन की पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। मिशन संचालक अवि प्रसाद ने बैठक में साधारण सभा के समक्ष विभिन्न एजेंडा प्रस्तुत किये। उन्होंने पीएमकेएसवाय 2.0 की प्रगति, वॉटर शेड परियोजनाओं का सोशल ऑडिट, परियोजना के प्रभावों का विश्लेषण, मिशन के संस्थागत सुदृढ़ीकरण, जीआईएस एवं एआई सुविधा विकसित करने आदि विषयों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिशन के तहत वॉटर शेड परियोजनाओं के निरीक्षण के लिये एरिया ऑफिसर मोबाइल ऐप का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने वॉटर शेड वर्क मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर की जानकारी भी दी।  

नेक्स्ट होराइजन : बिल्डिंग सिटीज़ ऑफ टुमारो थीम पर होगा कॉन्क्लेव

मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव 11 जुलाई को इंदौर में इंदौर के ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा नेक्स्ट होराइजन : बिल्डिंग सिटीज़ ऑफ टुमारो थीम पर होगा कॉन्क्लेव इंदौर प्रदेश में रीयल एस्टेट की गतिविधियों के विस्तार के लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा 11 जुलाई को इंदौर के ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में "मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव" का आयोजन किया जा रहा है। "नेक्स्ट होराइजन: बिल्डिंग सिटीज़ ऑफ टुमारो" थीम पर आधारित यह कॉन्क्लेव राज्य के शहरी विकास और निवेश के लिये नए क्षितिज खोलने का माध्यम बनेगा। 'उद्योग एवं रोजगार वर्ष 2025' के अंतर्गत इस आयोजन का उद्देश्य प्रदेश की नगरीय अधोसंरचना को भविष्योन्मुखी बनाना, सतत विकास को गति देना और व्यापक निवेश आकर्षित करना है। मध्यप्रदेश में निवेश इसलिये मध्यप्रदेश देश के केन्द्र में रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के कारण महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसलिये यहां से आसानी से देश भर से लॉजिस्टिक संपर्क किया जा सकता है। प्रदेश में तेज गति से होता शहरीकरण, विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे शहरों में सशक्त इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है। राज्य में सस्ती भूमि और श्रम, सरल प्रशासनिक प्रक्रियाएं हैं और उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियाँ लागू की गई हैं। मध्यप्रदेश में केन्द सरकार की प्रधानमंत्री गति-शक्ति, अमृत 2.0 और स्मार्ट-सिटी जैसी योजनाओं से प्रदेश में समावेशी विकास हो रहा है। निवेश और विकास के प्रमुख क्षेत्र प्रदेश में विकास और निवेश शहरी परिवहन (मेट्रो, ई-बस, मल्टीमॉडल हब), किफायती आवास, स्लम पुनर्विकास, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, जलापूर्ति, सीवेज नेटवर्क, झील संरक्षण, डिजिटलीकरण, ई-गवर्नेंस, भवन स्वीकृति प्रणाली और स्वच्छ ऊर्जा, हरित भवन, रिन्यूएबल इनफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। निवेशक इन क्षेत्रों में निवेश कर भविष्य में होने वाले लाभ के सहभागी हो सकते हैं।  प्रमुख आगामी अधोसंरचना विकास परियोजनाएँ मध्यप्रदेश के भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल परियोजना, स्मार्ट सिटी के तहत इंटिग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स, इंडस्ट्रियल टॉउनशिप्स, न्यू टॉउन डेवलपमेंट प्लान, नगरीय निकायों में आधुनिक वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट्स और स्ट्रीट वेंडिंग जोन, शहरी स्वास्थ्य केन्द्रों का सुदृढ़ीकरण जैसी परियोजनाएं चल रही हैं और कुछ भविष्य के लिए प्रस्तावित हैं। निवेश को साकार करने हेतु सुदृढ़ इको-सिस्टम मध्यप्रदेश उद्योग विकास निगम उद्योगों को वन-स्टॉप सुविधा उपलब्ध करा रहा है। ई-नगर पालिका पोर्टल पर भी संबंधित सेवाएं रियल-टाइम ऑनलाइन उपलब्ध हैं। निवेश प्रोत्साहन के दृष्टिकोण से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है। निवेशकों के लिए स्पेशल पॉलिसी इंसेंटिव्स भी प्रारंभ किये गये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में देश के अलावा विदेश के निवेशकों से भी सघन सम्पर्क स्थापित किये गये हैं। उक्त के दृष्टिगत अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय डेवलपर्स के साथ करार होने की बड़ी संभावनाएं भी हैं। मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव राज्य को नगरीय पुनर्निर्माण और वैश्विक निवेश के पथ पर अग्रसर करेगा। यह आयोजन न केवल भौतिक अवसंरचना बल्कि डिजिटल, सामाजिक और आर्थिक विकास का भी सशक्त मंच बनेगा। प्रदेश सरकार इस अवसर को नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ने के एक निर्णायक कदम के रूप में देख रही है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लुधियाना में उद्योगपतियों से भेंट कर निवेश के लिये दिया आमंत्रण

मध्यप्रदेश की गतिशीलता-शांति और संसाधनों का लाभ उठाएँ निवेशक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जहां संभावना दिखती है, वहां नियम बदलने से नहीं हिचकिचाएंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लुधियाना में उद्योगपतियों से भेंट कर निवेश के लिये दिया आमंत्रण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को लुधियाना स्थित वर्धमान औद्योगिक परिसर में पंजाब के प्रमुख उद्योगपतियों से भेंट की और उन्हें मध्यप्रदेश की समावेशी, उदार और निवेश-अनुकूल नीतियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार  न केवल उद्योग लगाने और निवेश बढ़ाने के लिए तैयार है, बल्कि यदि किसी सेक्टर में संभावना दिखती है, तो वहां आवश्यकतानुसार नियमों में परिवर्तन भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में गारमेंट और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए विशेष अवसर उपलब्ध हैं और राज्य सरकार इस दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि इंदौर की हुकुमचंद मिल को पुनर्जीवित करने की दिशा में कार्य हो रहा है और मजदूरों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सौ करोड़ रु. से अधिक के सेटलमेंट क्लियर किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों और श्रमिकों के साथ सरकार की प्रतिबद्धता हर स्तर पर बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि ग्वालियर की जेसी मिल और उज्जैन की हीरा मिल के मामले में भी राज्य सरकार ने सह्रदयता से निर्णय किये है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार उद्योगपतियों के हित में निर्णय लेने के लिए कैबिनेट स्तर पर नीतियों में बदलाव को भी तैयार है। उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया कि वे मध्यप्रदेश में आकर संभावनाओं को देखें और राज्य की गतिशीलता, शांति और संसाधनों का लाभ उठाएं। उन्होंने बताया कि राज्य में टेक्सटॉइल, एग्री बेस्ड इंडस्ट्री, इंजीनियरिंग गुड्स, स्टील प्रोसेसिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और आईटी जैसे सेक्टरों में व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से यह भी कहा कि मध्यप्रदेश केवल निवेश के लिए नहीं, बल्कि एक जनकल्याणकारी राज्य के रूप में भी तेजी से पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि गरीब तबके के लिए एयर एंबुलेंस सेवा और राहगीर सेवा योजना जैसी अभिनव योजना क्रियान्वित की जा रही हैं। इन योजनाओं की उद्योगपतियों ने सराहना करते हुए कहा कि इस स्तर की सोच और संवेदनशीलता शायद ही किसी अन्य राज्य में दिखती हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से वर्धमान ग्रुप के एमडी नीरज जैन, राल्सन इंडिया लिमिटेड के चेयरमेन संजीव पहवा, कंगारू इंडस्ट्रीज के एमडी अंबरीश जैन, टीके स्टील रोलिंग मिल्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी लोकेश जैन, रजनीश इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक राहुल आहूजा, फार्मपार्ट्स कंपनी के उपाध्यक्ष जे.एस. भोगल, सीआईसीयू के अध्यक्ष उपकार सिंह आहूजा, कमल (सरजवन होजरी) के प्रतिनिधि सुदर्शन जैन और अरुण जैन सहित विभिन्न सेक्टर के उद्योगपतियों ने मुलाकात की। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश में बिजली दरें प्रतिस्पर्धी हैं और नियम संबंधी प्रक्रियाओं को सरल और निवेशक-अनुकूल बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में सोलर और पॉवर सेक्टर में भी बड़े प्रोजेक्ट आ रहे हैं। केंद्र सरकार के स्तर पर कोई पर्यावरणीय क्लियरेंस लंबित है, तो मध्यप्रदेश सरकार अपने स्तर पर उसे शीघ्र दिलाने का भी प्रयास करेगी। उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की नीति स्पष्टता, निर्णय क्षमता और कार्य के प्रति तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि देश के सबसे भरोसेमंद और निवेश के योग्य राज्यों में मध्यप्रदेश शामिल हो गया है। 

देर नहीं, अब एक सॉफ्टवेयर से संचालित होंगी सरकारी और निजी एंबुलेंस सेवाएं

ग्वालियर मध्य प्रदेश सरकार ने राहवीर योजना के तहत एक महत्वपूर्ण पहल की है, जिसके अंतर्गत राज्य की सभी सरकारी और निजी एंबुलेंस को एक ही सॉफ्टवेयर के माध्यम से संचालित किया जाएगा। यह कदम प्रदेश को एंबुलेंस सेवाओं के एकीकृत प्रबंधन में एक नया आयाम प्रदान करेगा। मध्य प्रदेश संभवतः ऐसा करने वाला पहला राज्य होगा, जहां सभी एंबुलेंस एक ही प्लेटफार्म पर संचालित होंगी। राहवीर योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचाने वाले को 25 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।   लोकेशन के आधार पर सबसे नजदीकी एंबुलेंस को बुलाएगा वर्तमान में, प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग, एमपीआरडीसी, एनएचएआइ और निजी एंबुलेंस सेवाएं संचालित हैं, लेकिन अब परिवहन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित कर रहे हैं, जो सड़क दुर्घटना की लोकेशन के आधार पर सबसे नजदीकी एंबुलेंस को बुलाएगा। इस योजना के तहत डायल-100 सेवा को एंबुलेंस सेवा के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे घायल व्यक्तियों को शीघ्र सहायता मिल सकेगी। एंबुलेंस सेवाओं की भूमिका की समीक्षा प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के पास लगभग एक हजार एंबुलेंस हैं, जिनमें 300 जननी एक्सप्रेस भी शामिल हैं। इन सभी एंबुलेंस को भी इस नए सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा, ताकि घायल व्यक्तियों को गोल्डन टाइम में अस्पताल पहुंचाया जा सके। राहवीर योजना के लागू होने के बाद एंबुलेंस सेवाओं की भूमिका की समीक्षा की गई है। वर्तमान में, स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न एजेंसियों के बीच एंबुलेंस सेवाओं का संचालन एकीकृत नहीं है। जैसे कि हाइवे पर एंबुलेंस की सहायता के लिए एनएचएआइ का नंबर और 108 सेवा अलग है। कॉल भी इसी सॉफ्टवेयर पर होगी दर्ज अब राहवीर योजना के तहत घायलों के गोल्डन टाइम को बचाने के लिए एक ही कॉल पर सबसे नजदीकी एंबुलेंस भेजी जाएगी। डायल-100 सेवा के अंतर्गत आपातकालीन कॉल करने पर सूचना दी जाती है, और अब यह कॉल भी इसी सॉफ्टवेयर पर दर्ज होगी। जब सड़क दुर्घटना की सूचना मिलेगी, तो सबसे नजदीकी एंबुलेंस तुरंत भेजी जाएगी। देर से एंबुलेंस पहुंचने के घटेंगे मामले इस नए सॉफ्टवेयर का पूरा नियंत्रण भोपाल से होगा, जिससे एंबुलेंस के देर से पहुंचने की घटनाओं में कमी आएगी। अक्सर देखा गया है कि एंबुलेंस देर से पहुंचने के कारण घायल की जान पर संकट आ जाता है। अब एंबुलेंस की शीघ्रता से उपलब्धता से पीड़ित का प्राथमिक इलाज भी तुरंत शुरू हो सकेगा। स्वास्थ्य और परिवहन विभाग मिलकर सॉफ्टवेयर तैयार करा रहे हैं, जिसमें सभी एंबुलेंस सरकारी और निजी को एक ही जगह जोड़ा जा रहा है। यह डायल-100 से जुड़ेगा और कॉल पहुंचने पर सबसे नजदीकी एंबुलेंस जाएगी। प्रदेश ऐसा करने वाला संभवतः पहला राज्य होगा। राहवीर योजना के दृष्टिगत यह कवायद की जा रही है। किरण कुमार, उपायुक्त, परिवहन विभाग, मध्य प्रदेश