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उज्जैन में अचानक स्कूलों का टाइम टेबल बदलने के पीछे कलेक्टर की मंशा सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री को खुश करने की:आरिफ मसूद

उज्जैन  उज्जैन में सावन के महीने में सोमवार को स्कूलों की छुट्टी करने और रविवार को स्कूल लगाने के कलेक्टर के आदेश की कांग्रेस ने आलोचना की है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसे ‘मुख्यमंत्री को खुश करने’ के लिए उठाया गया कदम बताया है। उन्होंने कहा कि सावन के महीने में महाकाल की सवारी निकलने की परंपरा दशकों पुरानी है और हर समाज-धर्म के लोग इसका स्वागत करते हैं। ऐसे में अचानक स्कूलों का टाइम टेबल बदलने के पीछे कलेक्टर की मंशा सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री को खुश करने की है। बता दें कि उज्जैन में श्रावण मास के दौरान भगवान महाकाल की सवारी को देखते हुए स्कूलों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। कलेक्टर रौशन सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार 14 जुलाई से 11 अगस्त तक कक्षा पहली से 12वीं तक के सभी निजी और सरकारी स्कूल रविवार को संचालित होंगे और इसकी बजाय सोमवार को अवकाश रहेगा। उन्होंने कहा कि ये निर्णय महाकाल की सवारी के दौरान होने वाली भीड़ और कई मार्गों के बंद होने के मद्देनजर लिया गया है। उज्जैन में महाकाल की सवारी के दौरान सोमवार को स्कूलों की छुट्टी उज्जैन में सावन के महीने में काफी गहमागहमी रहती है। हर सोमवार को यहां महाकाल की सवारी निकलती है। इसी के साथ देश दुनिया से श्रद्धालु यहां महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं। अब स्थानीय प्रशासन ने ये निर्णय लिया है कि इस बार सावन महीने में हर सोमवार को स्कूलों की छुट्टी रहेगी और उसकी जगह रविवार को स्कूल संचालित होंगे। 11 जुलाई से शुरू होने वाले श्रावण मास में इस बार महाकाल मंदिर से कुल छह सवारिया निकलेंगी। पहली सवारी 14 जुलाई को होगी, इसके बाद दूसरी सवारी 21 जुलाई, तीसरी सवारी 28 जुलाई, चौथी सवारी 4 अगस्त और पांचवी सवारी 11 अगस्त को भादौ मास में निकाली जाएगी। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन पांच सोमवार को स्कूल बंद रहेंगे और रविवार को स्कूल खुलेंगे। 18 अगस्त को निकलने वाली राजसी सवारी के दिन स्थानीय अवकाश रहेगा..इसलिए उससे पहले रविवार को स्कूल नहीं लगेंगे। कलेक्टर के अनुसार यह निर्णय भगवान महाकाल की सवारी के दौरान सुचारू व्यवस्था और भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है। आरिफ मसूद ने कहा ‘मुख्यमंत्री को खुश करने की कोशिश’ कांग्रेस ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा है कि महाकाल की सवारी लंबे समय से निकलती आ रही है और इससे पहले कभी भी इस तरह की ज़रूरत महसूस नहीं हुई है। उन्होंने एएनआई के साथ बात करते हुए कहा कि ‘उज्जैन में महाकाल की सवारी बरसों से निकल रही है। परंपरागत रूप से लोग उसका स्वागत करते हैं..प्रत्येक वर्ग के लोग करते हैं। हर समाज हर धर्म का व्यक्ति उसका स्वागत करता है। अफसोस की बात है कि कलेक्टर ऐसा बेतुका आदेश निकालकर सिर्फ मुख्यमंत्री को खुश करना चाहते हैं, इसके अलावा कुछ भी नहीं है। ये परंपरागत जुलूस है और निकलता रहा है तो क्या आवश्यकता है कि एक दिन छुट्टी देकर एक दिन कैंसिल करो। संडे को स्कूल लगाओ। कल को दूसरे धर्म के लोग भी आवाज़ उठाएंगे फिर क्या करेंगे। संविधान से देश चलेगा। एक देश एक संविधान की बात करने वालों को सोचना चाहिए। ये जुलूस बरसों से निकल रहा है..आज से तो शुरु नहीं हुआ। क्या कलेक्टर महोदय बहुत विद्वान हैं ? इनसे पुराने कलेक्टर, पुरानी परंपराएं और संविधान क्या कोई नहीं जानता था ? ये ही जानते हैं बस ? ये आदेश सवारी के लिए या बच्चों की पढ़ाई के लिए नहीं बल्कि मुख्यमंत्री को खुश करने का आदेश है।’

मध्य प्रदेश में युवा कांग्रेस संगठन चुनाव 20 जून से 19 जुलाई तक चलेगा, दिव्यांग ड्राइवर, पूर्व मंत्री का बेटा भी रेस में

भोपाल  मध्यप्रदेश में युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव चल रहे हैं। 20 जून से शुरू हुई मेंबरशिप और वोटिंग प्रक्रिया 19 जुलाई को खत्म होगी। इस दौरान युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महासचिव से लेकर जिला अध्यक्ष और विधानसभा अध्यक्ष चुने जाएंगे। राज्य में पहली बार यूथ कांग्रेस के चुनाव ऑनलाइन मोड पर हो रहे हैं। मोबाइल एप से मेंबर बनाकर वोटिंग कराई जा रही है। सदस्यता के लिए 50 रुपए फीस तय की गई है। सोमवार तक 7 लाख 54 हजार सदस्य बनाए जा चुके हैं। 19 उम्मीदवार मैदान में, 5 महिलाएं प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए 19 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें सतना के दिव्यांग लोडिंग ऑटो ड्राइवर विनय पांडे भी शामिल हैं। अन्य प्रत्याशियों में यश घनघोरिया, देवेन्द्र सिंह दादू, अभिषेक परमार, जावेद पटेल, नीरज पटेल, प्रमोद सिंह, विश्वजीत सिंह चौहान, राजवीर कुडिया, प्रियेश चौकडे़, अब्दुल करीम कुरैशी, आशीष चौबे, शिवराज यादव, राजीव सिंह के नाम हैं। यूथ कांग्रेस की पांच महिला कार्यकर्ता भी प्रदेश अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रही हैं। इनके नाम योगिता सिंह, गीता कड़वे, शुभांगना राजे जामनिया, स्वीटी पाटिल और मोनिका मांडरे हैं। 19 उम्मीदवारों में से एसटी वर्ग से दो, ओबीसी के 4, एससी के 3 जबकि सामान्य वर्ग के 6 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व मंत्री घनघोरिया के बेटे को नाथ-सिंघार का समर्थन प्रदेश अध्यक्ष के चुनावी समीकरणों के हिसाब से इस रेस में पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया के बेटे यश घनघोरिया सबसे आगे चल रहे हैं। यश को पूर्व सीएम कमलनाथ और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का समर्थन मिल रहा है। वहीं, भोपाल के अभिषेक परमार, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के सहारे प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने की जुगत में हैं। हालांकि, दिग्विजय सिंह कह चुके हैं कि मेरा कोई उम्मीदवार नहीं है। जिला पंचायत सदस्य भी आजमा रहे किस्मत प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में देवास जिले के खातेगांव के रहने वाले राजवीर कुडिया भी मैदान में हैं। राजवीर देवास के जिला पंचायत सदस्य और युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष हैं। सीधी जिले के देवेन्द्र सिंह दादू भी प्रदेश अध्यक्ष के लिए उम्मीदवार हैं। एप और वेबसाइट के जरिए होगी वोटिंग यह चुनाव Youth Congress Election Authority (YCEA) के मोबाइल एप और वेबसाइट के माध्यम से हो रहे हैं। 18 से 35 साल के बीच की आयु के युवा ₹50 सदस्यता शुल्क का ऑनलाइन पेमेंट करके अपनी पसंद के उम्मीदवारों को वोट दे सकते हैं। सदस्य बनने और वोट डालने की प्रक्रिया YCEA एप या वेबसाइट पर मोबाइल नंबर से लॉगिन करें। ओटीपी डालने के बाद नाम, पता, फोटो, वोटर आईडी/आधार कार्ड अपलोड करें। इसके बाद डिजिटल आईडी जनरेट होगी। सदस्य बनने के बाद उसी पोर्टल/एप से वोट डालना होता है। एक बार ही वोट डालने का मौका मिलेगा, जो तुरंत सब्मिट हो जाता है।

भाजपा छोड़ जनसुराज में शामिल हुए यूट्यूबर मनीष कश्यप: पटना के बापू सभागार में प्रशांत किशोर ने दिलाई सदस्यता

पटना चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप ने प्रशांक किशोर की जन सुराज का दामन थाम लिया है। सोमवार उन्होने जन सुराज पार्टी की सदस्यता ली। इस दौरान प्रशांत किशोर ने स्वागत करते हुए कहा कि बिहार में व्यवस्था परिवर्तन की चाहत रखने वाले सभी लोगों को साथ आना चाहिए। जन सुराज ज्वाइन करने के मौके पर मनीष कश्यप ने कहा कि वो भाजपा में 13 महीने रहे। इस बार का चुनाव बिहार के भाग्य का चुनाव है। कश्यप ने दावा करते हुए कहा कि अगला 5 साल आपका होगा। बिहार की हकीकत आप सबको पता है। बिहार में कोई सुरक्षित नहीं है। बिहार को अगर सुरक्षित करना चाहते हैं तो जन सुराज की सरकार बनाए। इससे पहले मनीष कश्यप ने सोशल मीडिया पर प्रशांत किशोर, जन सुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह के साथ तस्वीरें शेयर की थी। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि 7 जूलाई को बापू सभागार। उन्होंने आगे लिखा, बुझी हुई आश जलाएंगे हम, घर-घर रोशनी पहुंचाएंगे हम, पलायन का दर्द मिटाएंगे हम, फिर से नया बिहार बनाएंगे हम। आपको बता दें बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में मनीष चनपटिया सीट से चुनाव मैदान में उतरे थे। हालांकि, तब वो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे। और तीसरे नंबर पर रहे थे। इस सीट से बीजेपी के उमाशंकर सिंह ने जीत दर्ज की थी। इस बार भी मनीष कश्यप के चनपटिया सीट से ही चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हो गई है। वहीं प्रशांत किशोर ऐलान कर चुके हैं कि जन सुराज बिहार की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी वैसे विवादों से मनीष कश्यप का पुराना नाता रहा है। हाल ही में पीएमसीएच में मनीष कश्यप की डॉक्टरों के साथ मारपीट का मामला छाया रहा था। इससे पहले सारण जिला प्रशासन ने 11 यूट्यूब चैनल पर FIR दर्ज की थी। जिन पर एकतरफा खबरें चलाने का आरोप है। इन चैनलों में मनीष कश्यप का नाम भी शामिल था। मनीष कश्यप पर कानूनी शिकंजा तब कसा था, जब तमिलनाडु में बिहार के लोगों के खिलाफ हिंसा को लेकर एक वीडियो सामने आया था। जिसमें आरोप लगाया गया था कि ये वीडियो मनीष ने फर्जी तरीके से अपने चैनल पर दिखाया है। जिसके बाद तमिलनाडु पुलिस ने गलत बताते हुए केस दर्ज किया था। तमिलनाडु सरकार ने मनीष कश्यप पर एनएसए के तहत भी कार्रवाई की थी। तमिलनाडु में उसके खिलाफ 6 मामले दर्ज हुए थे। 9 महीने बाद मनीष को जेल से रिहाई मिली थी।

सीएम फडणवीस का तंज: ठाकरे भाइयों की रैली में नहीं दिखा जोश, बल्कि शोक का माहौल था

मुंबई महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक बड़ी हलचल देखने को मिली। महाराष्ट्र में करीब दो दशक बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक मंच पर दिखे। दोनों ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला। इस संयुक्त रैली के बाद सीएम फडणवीस की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।  सीएम ने कहा कि संयुक्त रैली में उद्धव ठाकरे ने ‘‘रुदाली’’ जैसा भाषण दिया। जानकारी दें कि रुदाली वे महिलाएं होती हैं, जो शोक प्रकट करने के लिए आती हैं। इन महिलाओं को अंतिम संस्कार के दौरान सार्वजनिक रूप से शोक व्यक्त करने के लिए रखा जाता है।   'ये जीत की रैली नहीं, शोक का नजारा' महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस ने कहा कि भले की उद्धव ठाकरे इस रैली को जीत का जश्न करार दे रहे हों, लेकिन ये रैली शोक का नजारा रही। इसके साथ ही सीएम फडणवीस ने एमएनएस अध्यक्ष राज ठाकरे को दोनों ठाकरे चचेरे भाइयों को फिर से मिलाने का श्रेय देने के लिए धन्यवाद दिया। दरअसल, शनिवार को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने शनिवार को राज्य के स्कूलों में कक्षा 1 से तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को शामिल करने संबंधी सरकार द्वारा पहले जारी किए गए दो सरकारी आदेशों को वापस लेने का जश्न मनाने के लिए मुंबई में एक विजय रैली में सार्वजनिक मंच साझा किया। इस दौरान मंच से भाषण देते हुए राज ठाकरे ने मजाकिया अंदाज में फडणवीस को दोनों चचेरे भाइयों को एक साथ लाने का श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि ये बाल ठाकरे भी नहीं कर सके थे। सीएम फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर साधा निशाना ठाकरे ब्रदर्स की इस संयुक्त रैली के बाद सीएम फडणवीस की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने उद्धव ठाकरे पर तंज कसते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे मुझे आशीर्वाद दे रहे होंगे। मुझे बताया गया था कि यह एक 'विजय' रैली होनी थी, लेकिन यह एक 'रुदाली' भाषण निकला। फडणवीस ने कहा कि इस कार्यक्रम में मराठी के बारे में एक शब्द भी नहीं बोला गया और (उद्धव द्वारा दिया गया) भाषण इस बात पर केंद्रित था कि उनकी सरकार कैसे गिराई गई और वे कैसे सत्ता हासिल कर सकते हैं। आगे कहा कि यह रैली विजय उत्सव नहीं बल्कि 'रुदाली' दर्शन थी।  

‘जो बाला साहेब नहीं कर पाए वो आज हुआ…’, मुंबई में राज ठाकरे ने किया शक्ति प्रदर्शन

20 साल बाद एक मंच पर आए ठाकरे बंधु, राज बोले- महाराष्ट्र को तिरछी नजर से कोई नहीं देखेगा 'आप किसी पर हिंदी नहीं थोप सकते', मुंबई की रैली से गरजे राज ठाकरे  'जो बाला साहेब नहीं कर पाए वो आज हुआ…', मुंबई में राज ठाकरे ने किया शक्ति प्रदर्शन मुंबई से राज ठाकरे की हुंकार, बोले – महाराष्ट्र के लिए जो कर सकते हैं वो करेंगे    ठाकरे ब्रदर्स के एक मंच पर आने को लेकर संजय राउत बोले- यह पूरे महाराष्ट्र के लिए त्यौहार जैसा दिन मुंबई  महाराष्ट्र की सियासत में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. लंबे समय से जिस तस्वीर को लेकर कयासबाजी चल रही थी वो आज देखने को मिली जब उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एकसाथ एक मंच पर दिखे, वो भी परिवार के साथ में.   दोनों भाई वर्ली में मराठी विजय दिवस मनाने के नाम पर मंच साझा कर हैं, लेकिन सियासी पंडित इस बात का आकलन कर रहे हैं कि महाराष्ट्र की सियासत दोनों भाइयों की साथ आना क्या बड़ा बदलाव साबित होने वाला है? – दक्षिण में स्टालिन, कनमोझी, जयललिता, नारा लोकेश, आर रहमान, सूर्या, सभी ने अंग्रेजी में पढ़ाई की है? रहमान ने डायस छोड़ दिया जब एक वक्ता ने हिंदी में बोलना शुरू किया.बालासाहेब और मेरे पिता श्रीकांत ठाकरे ने अंग्रेजी में पढ़ाई की है, लेकिन वे मातृभाषा मराठी के प्रति बहुत संवेदनशील थे. बालासाहेब ठाकरे ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की, लेकिन उन्होंने मराठी भाषा से समझौता नहीं किया. किसी को भी मराठी को तिरछी नज़र से नहीं देखना चाहिए: राज ठाकरे – हमारे बच्चे इंग्लिश मीडियम जाते है तो हमारे मराठी पर सवाल उठते है , लालकृष्ण आडवाणी मिशनरी स्कूल में पढ़े है तो क्या उनके हिंदुत्व पर सवाल उठाए क्या? हम हिंदी थोपना बर्दाश्त नहीं करेंगे. वे बस मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना चाहते हैं, यही उनका एजेंडा है. लेकिन वे ऐसा करने की हिम्मत करते हैं.. तब उन्हें मराठी मानुस की ताकत समझ में आएगी.वे मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. अब वे यह मुद्दा उठा रहे हैं कि ठाकरे के बच्चे अंग्रेजी में पढ़े हैं. यह क्या बकवास है? कई भाजपा नेताओं ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की है.. लेकिन किसी को उनके हिंदुत्व पर संदेह है: राज ठाकरे -इस दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा,'ये त्रिभाषा सूत्र कहा से लेकर आए? छोटे-छोटे बच्चों से जबरदस्ती करोगे क्या? महाराष्ट्र को कोई तिरछी नजर से नहीं देखेगा. हिंदी अच्छी भाषा है, सारी भाषा अच्छी हैं. किसी की हिम्मत है तो मुंबई पर हाथ डालकर देख लें.' -राज ठाकरे ने कहा, "मैंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि मेरा महाराष्ट्र किसी भी राजनीति और लड़ाई से बड़ा है. आज 20 साल बाद मैं और उद्धव एक साथ आए हैं. जो बालासाहेब नहीं कर पाए, वो देवेंद्र फडणवीस ने कर दिखाया… हम दोनों को साथ लाने का काम…" -राज ठाकरे अपनी पत्नी शर्मिला और बेटे अमित, बेटी उर्वशी के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. साथ ही उद्धव अपनी पत्नी रश्मि और बेटे आदित्य, तेजस के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे हैं. -उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे वर्ली में ‘विजय सभा’ में आने से पहले शिवाजी पार्क में स्थित बाल ठाकरे के स्मारक ‘स्मृति स्थल’ पर जा सकते हैं. -रैली को लेकर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा, "… यह महाराष्ट्र में हम सभी के लिए एक त्यौहार की तरह है कि ठाकरे परिवार के दो प्रमुख नेता, जो अपनी राजनीतिक विचारधाराओं के कारण अलग हो गए थे, आखिरकार 20 साल बाद एक मंच साझा करने के लिए एक साथ आ रहे हैं. हमारी हमेशा से यह इच्छा रही है कि हमें उन लोगों से लड़ना चाहिए जो महाराष्ट्र के लोगों के खिलाफ हैं. आज एक साथ आकर उद्धव और राज ठाकरे निश्चित रूप से मराठी मानुष को दिशा देंगे."  -यह पुनर्मिलन सियासी भूचाल जैसा माना जा रहा है क्योंकि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) लंबे समय से अलग-अलग राह पर हैं. लेकिन केंद्र में लाए गए त्रिभाषा फार्मूले का ठाकरे बंधुओं ने मिलकर विरोध किया, जिसके चलते राज्य सरकार को प्रस्तावित नीति फिलहाल टालनी पड़ी. महाराष्ट्र में आज कई सालों बाद एक सियासी तस्वीर नजर आ रही है. शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे आज पूरे 19 साल के बाद एक स्टेज पर एक साथ नजर आ रहे हैं. मराठी भाषा के लिए दोनों भाई सारे गिले-शिकवे भुलाकर एक मंच पर साथ आ चुके हैं. दोनों भाई एक साथ विक्ट्री रैली में शामिल हुए. महाराष्ट्र में भाषा के छिड़े विवाद के बाद यह रैली निकाली जा रही है. दोनों भाइयों को मराठी भाषा से प्यार ने एक बार फिर एक स्टेज पर एक साथ आने का मौका दिया है. इससे पहले यह दोनों आखिरी बार साल 2005 में चुनाव के समय प्रचार करने के लिए एक मंच पर दिखे थे. इसी के बाद इसी साल राज ठाकरे ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. परिवार के साथ रैली में पहुंचे राज-उद्धव रैली में शामिल होने के लिए राज ठाकरे अपने घर शिवतीर्थ से एनएससीआई डोम में पहुंच गए हैं. राज ठाकरे के साथ उनके बेटे अमित और उनकी पत्नी शर्मिला भी पहुंची हैं. तो वही उद्धव ठाकरे भी रैली में पहुंच चुके हैं. उद्धव के साथ उनके बेटे आदित्य उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे भी साथ रहेंगे. कार्यक्रम खत्म होने के बाद दोनों भाई मुंबई के शिवाजी पार्क में स्थित बालासाहेब ठाकरे की समाधि स्थल पर जा सकते हैं. इसी के चलते आज विक्ट्री रैली निकाली जा रही है. इस रैली में कई नेता जुड़ेंगे. राज ठाकरे ने सरकार पर साधा निशाना सही में तो मोर्चा निकालना चाहिए था. मराठी आदमी कैसे एक साथ आता है, लेकिन सिर्फ मोर्चा की चर्चा हुई तो उससे सरकार बैकफुट पर आगई. किसी भी झगड़े से बड़ा महाराष्ट्र है. 20 साल बाद उद्धव और राज ठाकरे एक मंच पर साथ है. उन्होंने आगे कहा, बालासाहेब हमें एक नहीं कर पाए, लेकिन फडणवीस ने कर दिया. उन्होंने सवाल पूछा, हिंदी किसके लिए, छोटे-छोटे बच्चों के साथ जबरदस्ती करोगे? कोई दूसरा एजेंडा नहीं, सिर्फ मराठी एजेंडा है. उन्होंने आगे कहा, आप हिंदी किसी … Read more

प्रधानमंत्री मोदी ने शून्य-बैलेंस खातों ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की नींव रखी इसका फायदा सीधे गरीबों के खातों में पहुंचा :CM यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह पर तंज कसा। अपनी टिप्पणी में डॉ. यादव ने कहा कि शून्य-बैलेंस खाता (zero balance account) क्या होता है, देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ये भी नहीं जानते थे। बकौल डॉ. मोहन यादव, वह (मनमोहन सिंह) आरबीआई के गवर्नर और वित्त मंत्री भी रहे, बहुत बड़े अर्थशास्त्री थे, विदेश की डिग्री थी, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा कि बिना पैसे के भी जीरो बैलेंस में बैंक में खाता खोला जा सकता है, लेकिन नरेन्द्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने, उन्होंने यह बात सोची और जीरो बैलेंस में खाते खुलवाए। आगे कहा, उनके कार्यकाल में डीबीटी का शुभारंभ हुआ, जिससे शासन की कार्यशैली में व्यापक स्तर पर पारदर्शिता आई है। आज हितग्राहियों के खाते में डीबीटी के माध्यम से पूरा पैसा पहुंच रहा है।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मनमोहन सिंह कहते थे- गांवों में सड़क क्यों बनाएं, गांव के लोग तो बैलगाड़ी से चलते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू हुई। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना से देश की चारों दिशाओं को जोड़ गया। उन्होंने शिक्षित वर्ग की ओर संकेत करते हुए जोड़ा कि जिनके पास बड़ी-बड़ी डिग्रियां हैं, उन्हें समझना चाहिए कि जब जमीन बदलती है, तो किताबों से नजर हटाकर थोड़ा जमीन की हकीकत भी देख लेनी चाहिए। मुख्यमंत्री डा. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी कहते थे- केंद्र सरकार एक रुपये भेजती है तो आम आदमी तक केवल 15 पैसे पहुंचता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस व्यवस्था को नीति नहीं, बल्कि नीयत से ठीक किया। वर्ष 2013 से पहले इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया था। अब 25,000 रुपये सीधे मेधावी विद्यार्थियों के खातों में पहुंचे हैं।  

भाजपा एक मात्र ऐसा दल है, जो अपने देवतुल्य कार्यकर्ताओं की ताकत से चलता है: खंडेलवाल

सीहोर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक हेमंत खंडेलवाल एवं प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद आष्टा, जावर, डोडी, कोठरी और सीहोर में स्वागत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने स्वागत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीति में बहुत सारे दल होते हैं। कई दल परिवार चलाते हैं। कई दल जात, समाज बेश चलाते हैं। भाजपा एक मात्र ऐसा दल है, जो अपने देवतुल्य कार्यकर्ताओं की ताकत से चलता है। कार्यकर्ता चाह ले तो हर चुनाव के परिणाम सकारात्मक आते हैं। अगर कार्यकर्ता में थोड़ा सा भी निराशा का भाव हो तो परिणाम सकारात्मक नहीं आ पाते हैं। भाजपा के हम सब कार्यकर्ता एक परिवार की तरह हैं। प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता ही भाजपा की असली पूंजी है। सब कार्यकर्ता उत्साह से रहें, एक रहें, अनुशासन में रहें और अपनी क्षमता का उपयोग पार्टी को मजबूत करने में करें। मातृशक्ति का सम्मान करें। हम सब मिल कर कार्य करेंगे भाजपा एक पार्टी नहीं, एक परिवार है। मेरा पूरा प्रयास होगा कि पार्टी के हर कार्यकर्ता का सम्मान होगा, आदर होगा, सभी कार्यकर्ता मिलजुलकर कार्य करेंगे। हर कार्यकर्ता की बात सुनने, उनसे मिलने का प्रयास करूंगा। हम सब का कर्तव्य है कि पार्टी को और मजबूत बनाने की दिशा में हम सब मिल कर कार्य करें और एक नया इतिहास रचें। हमारी पार्टी आज भी बुलंदियों पर है, इसे हम सबको मिल कर और आगे ले जाना हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम दुनिया के सिरमौर बनने जा रहे हैं। हमारे प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश विकास की नई इबारत लिख रहा है। सरकार के कार्य, योजनाओं को जनता तक, घर घर पहुंचाना हम सब कार्यकर्ताओं का दायित्व है। मध्यप्रदेश को नई ऊंचाई पर ले जाकर विकसित बना रहे खंडेलवाल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कार्यकर्ता देश की अखंडता व आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए भाजपा को और मजबूत बनाएं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उद्योग व रोजगार की नई परंपरा विकसित कर मध्यप्रदेश को नई ऊंचाई पर ले जाकर विकसित बना रहे हैं। मैं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सत्ता और संगठन में संतुलन बनाकर डबल इंजन सरकार के जनहितैषी कार्यों से जनता को लाभ दिलाकर प्रदेश को विकास के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं के परिश्रम, प्रतिबद्धता से ही भाजपा को लंबे समय से जनता की सेवा करने का अवसर मिला। भाजपा संगठन कार्यकर्ताओं को क्षमता और योग्यता के आधार पर दायित्व सौंपता है। स्वागत सम्मान कार्यक्रम को जिला भाजपा अध्यक्ष नरेश मेवाडा, सीहोर विधायक सुदेश राय ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। जिला मीडिया प्राभारी सुशील संचेती ने बताया की प्रदेश भाजपा के नव निर्वाचित अध्यक्ष के सीहोर जिले में आगमन पर जावर जोड़, आष्टा में बाईपास पर, कोठरी मेन रोड पर एवं सीहोर में रेस्टहाउस पर आयोजित स्वागत सम्मान समारोह रखे गये थे। सीहोर जिले की सीमा में प्रवेश के बाद प्रदेश अध्यक्ष का जावर, डोडी, आष्टा कोठरी, सीहोर मंडलों में सभी मंडल अध्यक्षों ने मंच बना कर स्वागत, सम्मान कर स्मृति चिह्न भेंट किये। इस दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा, जिला भाजपा के प्रभारी बहादुरसिंह मुकाती, विधायक गोपालसिंह इंजीनियर,सुदेश राय उपस्थित रहे।  

भाजपा के नए अध्यक्ष की घोषणा अगले कुछ दिनों में, सूत्रों के मुताबिक तीन प्रमुख महिला नेताओं के नाम चर्चा में

नई दिल्ली  लोकसभा चुनाव 2024 के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर चल रही खींचतान के बीच सूत्रों के हवाले से खबर है कि भाजपा पहली बार किसी महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा ने हाल के वर्षों में महिला मतदाताओं को लुभाने में सफलता पाई है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में यह सफलता मिली है। आपको बता दें कि जेपी नड्डा का कार्यकाल जनवरी 2023 में समाप्त हो चुका था, लेकिन पार्टी ने उन्हें जून 2024 तक का विस्तार दिया था। अब नए अध्यक्ष की घोषणा अगले कुछ दिनों में हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक तीन प्रमुख महिला नेताओं के नाम चर्चा में हैं। निर्मला सीतारमण वर्तमान वित्त मंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पार्टी संगठन में गहरी पैठ और केंद्र सरकार में लंबे अनुभव के चलते सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। हाल ही में उन्होंने भाजपा मुख्यालय में जेपी नड्डा और महासचिव बीएल संतोष के साथ बैठक की थी। उनका दक्षिण भारत से आना भाजपा के दक्षिण विस्तार रणनीति के लिए भी फायदेमंद माना जा रहा है। डी. पुरंदेश्वरी आंध्र प्रदेश भाजपा की पूर्व अध्यक्ष डी पुरंदेश्वरी काफी अनुभवी और बहुभाषी नेता हैं। कई राजनीतिक दलों के साथ काम करने का अनुभव और पार्टी में व्यापक स्वीकार्यता है। उन्हें ऑपरेशन सिंदूर जैसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक अभियान का हिस्सा भी बनाया गया था। वनाथी श्रीनिवासन तमिलनाडु की कोयंबटूर दक्षिण सीट से विधायक और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी वनाथी श्रीनिवासन 1993 से भाजपा से जुड़ीं और संगठन में कई पदों पर रही हैं। 2022 में केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य बनीं और ऐसा करने वाली पहली तमिल महिला नेता। संघ का समर्थन सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी इस विचार को समर्थन दिया है कि भाजपा को अब एक महिला को शीर्ष नेतृत्व में लाना चाहिए। यह कदम 33% महिला आरक्षण विधेयक की भावना के अनुरूप भी होगा, जिसका प्रभाव अगले परिसीमन के बाद लोकसभा में दिखेगा।

अवध ओझा का आरोप: विरोधी के समर्थन में प्रधानमंत्री तक को झुकना पड़ा

नई दिल्ली मशहूर कोचिंग टीचर और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अवध ओझा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी हार को लेकर कहा है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके विरोधी (रविंद्र सिंह नेगी) के पैर छू लिए थे। ओझा ने कोचिंग क्लास में पटपड़गंज सीट पर हुए मुकाबले का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने इस दौरान बहुत मेहनत की। मशहूर शिक्षक ने कहा कि प्रधानमंत्री चाहते थे कि वह किसी तरह सदन में ना जाएं और इसके लिए उन्होंने नेगी के पैर छू लिए। अवध ओझा ने यह भी कहा कि यदि प्रधानमंत्री ने ऐसा नहीं किया होता तो वह जीत जाते। अवध ओझा ने कहा, 'मुझे हराने के लिए इस देश के प्रधानमंत्री को मेरे विरोधी का पैर छूना पड़ा था। देख लेना वीडियो। अगर वह पैर नहीं छूते ना तो मैं नहीं हारता। मुझे हराने के लिए… इस देश के प्रधानमंत्री को…।' ओझा ने कहा कि उन्होंने चुनाव में बहुत मेहनत की। सुबह, शाम, दिन-रात, क्या झुग्गी, क्या बाजार, क्या घर, क्या लोग हर आदमी से मिलता था। सिर्फ चार घंटे सोते थे। 2 से 6। अवध ओझा ने कहा कि लड़ने वाले का ही नाम होता है। उन्होंने कहा, 'मुझसे एक साहब ने कहा कि मास्टर साहब हार गए। मैंने कहा कि तुम्हारे पापा प्रधानी लड़े हैं। इतिहास में दो ही आदमी का नाम है, अकबर और महराणा प्रताप क्योंकि दोनों लड़ रहे थे।' आप नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नहीं चाहते थे कि वह जीतकर सदन पहुंचें क्योंकि वह वहां बवाल काटते। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम की इज्जत की दुहाई देकर भाजपा ने वोट मांगा और लोगों को मन बदल गया। उन्होंने कहा, 'मेरे विरोधी का तीन बार पैर छुआ प्रधानमंत्री ने कि यह आदमी सदन में नहीं जाना चाहिए। वहां पहुंच गया तो बहुत बवाल काटेगा। इतना चिल्लाएगा यह। मैं दूसरे दिन जब लोगों से मिला तो विश्वास हो गया कि इनका मन बदल गया कि प्रधानमंत्री की इज्जत का सवाल है। उनकी पार्टी के लोग घर-घर जाकर कहने लगे कि उन्होंने इज्जत दांव पर लगा दी।' उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि वह तभी जीत सकते थे जब अमेरिका का राष्ट्रपति उनका तीन बार पैर छू लेता और इतनी तैयारी उन्होंने कर नहीं रखी थी। उन्होंने नेगी को मजबूत उम्मीदवार बताया। क्यों छुआ था पीएम ने पैर दरअसल इस साल फरवरी में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा के दौरान मंच पर पटपड़गंज सीट से भाजपा के उम्मीदवार रविंद्र सिंह नेगी उर्फ रवि नेगी के पैर छू लिए थे। दरअसल, पहले नेगी ने पीएम के पैर छू लिए थे, जिसके बाद पीएम मोदी ने पलटकर उनके भी पैर छू लिए। पीएम पहले भी कई मौकों पर इस तरह दूसरों के पैर छूते देखे गए हैं। वह दूसरों को अपना चरणस्पर्श करने से रोकते हुए दिखते हैं। चुनाव में रवि नेगी ने अवध ओझा को 28 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया था।  

बिहार में वोटर लिस्ट संशोधन को लेकर सियासी घमासान मचा, पप्पू यादव ने उठाए सवाल

पटना बिहार में वोटर लिस्ट संशोधन को लेकर सियासी घमासान मचा है। पूर्णिया सांसद राजेश रंजन यानि पप्पू यादव ने बिहार चुनाव से पहले भारत निर्वाचन आयोग के इस अभियान पर सवाल उठाया है। साथ ही इंडी अलायंस से नाता तोड़ने का ऐलान कर चुके आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी आड़े हाथों लिया। मीडिया से बात करते हुए पूर्णिया सांसद ने कहा, “चुनाव आयोग आरएसएस का दफ्तर है, उसको रोकना चाहिए। जो संवैधानिक दायित्व के लिए खतरा बन जाए, उसके लिए जनता तैयार है। आज हम लोग तय करेंगे। कांग्रेस प्रभारी से भी इसे लेकर बातचीत हुई है।” चुनाव आयोग मुलाकात नहीं कर रही है वाले सवाल को लेकर उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग अलाद्दीन का चिराग है क्या? आर-पार की लड़ाई होगी। बिहार और बिहारी की अस्मिता के लिए जान भी देनी पड़ेगी तो देंगे।” अरविंद केजरीवाल के बिहार चुनाव अकेले लड़ने को लेकर उन्होंने कहा, “यह अच्छी बात है, चुनाव लड़ना सबका अधिकार है। वे बिहार आकर चुनाव लड़ें।” केजरीवाल को लेकर पप्पू यादव ने कहा कि ‘रस्सी जल गई पर ऐंठन नहीं गई।’ बिहार में महज कुछ ही महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। बिहार की विपक्षी पार्टियों ने इस कदम की तीखी आलोचना की। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे ‘लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश’ बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर लिखा है, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्वाचन आयोग को बिहार की समस्त मतदाता सूची को निरस्त कर केवल 25 दिन में 1987 से पूर्व के कागजी सबूतों के साथ नई मतदाता सूची बनाने का निर्देश दिया है। चुनावी हार की बौखलाहट में ये लोग अब बिहार और बिहारियों से मतदान का अधिकार छीनने का षड्यंत्र कर रहे हैं।” वहीं, कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल उठाया कि क्या 2003 के बाद से अब तक बिहार में चार-पांच चुनाव हो चुके हैं, क्या वे सब गलत हैं, अपूर्ण या अविश्वसनीय थे?