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आसिम मुनीर का ढोंग- पाकिस्तान का दोगलापन, कारगिल युद्ध में मारे गए जिस जवान का शव लेने से किया था इनकार

लाहौर  पाकिस्तान का दोहरा चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ है। दरअसल, बात शनिवार की है, जब मुल्क के सेना प्रमुख आसिम मुनीर समेत कई बड़े अधिकारियों ने कैप्टन करनाल शेर खान शहीद को श्रद्धांजलि दी। खबरें हैं कि यह वही कैप्टन खान हैं, जिनका शव पाकिस्तान ने स्वीकार तक करने से इनकार कर दिया था। पाकिस्तानी सेना के प्रमुख कैप्टन खान को करगिल युद्ध के दौरान दिए गए योगदान को याद कर रहे थे। मुनीर समेत बड़े सैन्य अधिकारियों ने 26 वें शहीद दिवस पर कैप्टन खान को याद किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जब द्रास सब सेक्टर में टाइगर हिल में कैप्टन खान का शव मिला था, तो पाकिस्तान ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। खास बात है कि भारतीय दूतावास की एक पुरानी विज्ञप्ति से पता चला है कि पाकिस्तान ने करगिल की हिमाकत में मुल्क के नियमित सैनिकों के शामिल होने से इनकार किया था। इसके तहत ही पाकिस्तान ने भारत की तरफ से जानकारी दिए जाने के बाद भी खान को पहचानने से मना कर दिया था। रिपोर्ट में वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास की तरफ से 15 जुलाई 1999 में जारी की गई विज्ञप्ति के हवाले से यह बात कही गई है। खबर है कि भारत ने 12 जुलाई को पाकिस्तान से संपर्क किया था और कहा था कि वह पाकिस्तान सेना को शव सौंपना चाहते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दूतावास ने बयान दिया था, 'यह साफ है कि पाकिस्तान इन शवों की पहचान के बारे में जानता है, लेकिन वह इसे स्वीकार नहीं करना चाहता है। क्यों कि इससे उनकी सेना के करगिल में शामिल होने का पर्दाफाश हो जाएगा। ऐसा करने से वो अपने सैनिकों को परिवारों के प्रति और हर जगह सशस्त्र बलों की परंपराओं का अपमान कर रहे हैं।' कब माना पाकिस्तान खबर है कि 13 जुलाई को ICRC यानी इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रॉस ने भारत से संपर्क किया और कहा कि पाकिस्तान ने उनसे भारत से बातचीत करने का अनुरोध किया है, ताकि दो अधिकारियों के शव उन्हें सौंपे जा सकें। तब दूतावास ने बयान जारी किया था, 'पाकिस्तान के पास जानकारी होने के बाद भी उनकी तरफ से किए गए अनुरोध में दो अधिकारियों के नाम और पहचान नहीं बताए गए हैं। इसका कारण स्पष्ट है। पाकिस्तानी अधिकारियों को एहसास हो गया है कि अगर वो इन दो अधिकारियों की पहचान मान लेते हैं, तो उनका झूठ पकड़ा जाएगा कि पाकिस्तानी सेना करगिल में शामिल नहीं थी।' भारतीय सेना के अफसर की इंसानियत को सलाम  पाकिस्तान की सेना ने आज कैप्टन कर्नल शेर खान को उनकी 26वीं शहादत के मौके पर श्रद्धांजलि दी है। कैप्टन कर्नल शेर खान, पाकिस्तानी सेना के वही जवान हैं, जिनकी बहादुरी के कायल भारत के अधिकारी हो गये थे और पाकिस्तानी सेना से उन्हें सम्मानित करने की सिफारिश की थी। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर, संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष, वायु सेना प्रमुख, नौसेना प्रमुख और पाकिस्तान के सशस्त्र बल कैप्टन कर्नल शेर खान शहीद को उनकी 26वीं शहादत के मौके पर श्रद्धांजलि दी है। भारतीय अधिकारी की सिफारिश पर उन्हें पाकिस्तानी सेना का सर्वोच्च सम्मान निशान-ए-हैदर दिया गया था। पाकिस्तानी सेना के कैप्टन कर्नल शेर खान की वीरता को उस समय सम्मान मिला, जब भारतीय सेना के ब्रिगेडियर एम. पी. एस. बजवा ने खुद एक सिफारिश-पत्र उनके शव के साथ उनके कपड़ों की जेब में रखकर लौटाया था, ताकि पाकिस्तान सरकार को उनकी वीरता का पता चल सके कारगिल युद्ध में हार के बाद पाकिस्तान ने अपने मरे हुए सैनिकों को कारगिल की ही पहाड़ी पर छोड़ दिया था। युद्ध में मारे गये कैप्टन खान को भी शुरू में उनके देश ने छोड़ दिया था। क्योंकि पाकिस्तान शुरू में ये मानने के लिए तैयार नहीं था कि कारगिल में पाकिस्तानी सैनिक लड़ रहे हैं। लेकिन फिर पाकिस्तान ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान सेना के जवान ही कारगिल में लड़ रहे हैं, तो उसके बाद कर्नल शेर खान को निशान-ए-हैदर दिया गया। ब्रिगेडियर एम.पी.एस. बाजवा, जो उस वक्त 192 माउंटेन ब्रिगेड की कमान संभाल रहे थे, उन्होंने ही कर्नल शेर खान को सम्मानित करने की सिफारिश की थी। कारगिल युद्ध में टाइगर हिल की लड़ाई दिप्रिंट की एक रिपोर्ट में बात करते हुए ब्रिगेडियर बाजवा ने कहा था कि "उनकी ब्रिगेड को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण टाइगर हिल पर कब्जा करने का काम सौंपा गया था। उन्होंने यह जिम्मेदारी 18 ग्रेनेडियर्स को सौंपी, जो पहले टोलोलिंग की लड़ाई में शामिल थी और जिसमें लगभग 60 लोग हताहत हुए थे और 8वीं बटालियन सिख रेजिमेंट, जो पहले से ही टाइगर हिल के आस-पास के मजबूत बेस में थी, वो पहले की झड़पों में लगभग 25 लोग खो चुकी थी।" उन्होंने कहा कि "मैंने 18 ग्रेनेडियर्स को उनकी घातक प्लाटून और दक्षिण-पश्चिम और पूर्व की अन्य कंपनियों के साथ टाइगर हिल टॉप पर कब्ज़ा करने का काम सौंपा था। मैंने 8 सिख के कमांडिंग ऑफिसर को चेतावनी दी थी कि वे टाइगर हिल टॉप पर किसी भी तरह के जवाबी हमले को रोकने के लिए दक्षिण-पश्चिमी रिज लाइन पर दो अधिकारियों के साथ लगभग 50 कर्मियों को तैनात रखें।" 4 जुलाई 1999 को 18 ग्रेनेडियर्स के कैप्टन बलवान सिंह के नेतृत्व में घातक प्लाटून टाइगर हिल टॉप पर कब्जा करने में कामयाब रही, लेकिन लड़ाई उसके बाद भी जारी थी और 18 ग्रेनेडियर्स के अन्य सैनिकों को प्लाटून का समर्थन करने के लिए भेजा गया था। ब्रिगेडियर बाजवा ने कहा कि "इस बीच, दक्षिण-पश्चिमी रिज लाइन से संभावित जवाबी हमले की आशंका के चलते, मैंने 8 सिख रेजिमंट को, जिसमें 52 सैनिक थे, उन्हें कब्जा करने का आदेश दिया।" कर्नल शेर खान के लिए सम्मान की सिफारिश इस दौरान कैप्टन शेर खान, जिनकी पोस्टिंग कारगिल के टाइगर हिल और बटलिक सेक्टर के बीच थी, उन्होंने अपने आखिरी दम तक अदम्य साहस और नेतृत्व का परिचय दिया। जब भारतीय सेना ने उनकी चौकी पर कब्जा किया, तो पता चला कि वे आखिरी सांस तक अपने साथियों के साथ मोर्चे पर डटे रहे। इस वीरता ने ब्रिगेडियर बजवा के मन एक दुश्मन सैनिक के लिए सम्मान पैदा कर दिया और उन्होंने अपने 'दुश्मन' की बहादुरी को … Read more

NIA को मिली बड़ी सफलता, खालिस्तानी आतंकी हैप्पी पासिया लाया जा रहा भारत

नई दिल्ली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक बड़ी कामयाबी मिली है. खालिस्तानी आतंकी हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी पासिया को अमेरिका के सैक्रामेंटो में गिरफ्तार कर लिया गया है. उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था. सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय एजेंसियां जल्द ही उसे भारत लाने की प्रक्रिया पूरी कर रही हैं. हैप्पी पासिया को 17 अप्रैल को अमेरिका में एफबीआई और इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की संयुक्त कार्रवाई में हिरासत में लिया गया था. वह अब दिल्ली हवाई अड्डे के रास्ते भारत लाया जा रहा है. हैप्पी पासिया पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के साथ मिलकर पंजाब में कई आतंकी वारदातों को अंजाम देने का आरोप है. पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार खुफिया जानकारी साझा कर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी थी. एनआईए ने चंडीगढ़ में सितंबर 2024 में हुए ग्रेनेड हमले के सिलसिले में उस पर 5 लाख रुपये का इनाम रखा था. यह हमला एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी के घर पर किया गया था. हैप्पी पासिया की आतंकी गतिविधियों का सिलसिला लंबा है. वह 2023 से 2025 के बीच पंजाब में 16 से अधिक आतंकी घटनाओं में शामिल रहा, जिनमें 14 ग्रेनेड हमले, एक IED विस्फोट और एक रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) हमला शामिल है. इनमें से कई हमले पुलिस स्टेशनों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक हस्तियों के घरों को निशाना बनाकर किए गए. कुछ प्रमुख घटनाएं 27 नवंबर, 2024: गुरबख्श नगर की बंद पुलिस चौकी पर ग्रेनेड हमला. 2 दिसंबर, 2024: SBS नगर के काठगढ़ थाने पर ग्रेनेड विस्फोट, जिसमें तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया गया. 4 दिसंबर, 2024: मजीठा थाने पर ग्रेनेड हमला, जिसे पुलिस ने टायर फटने की घटना बताने की कोशिश की. पूर्व विधायक बिक्रम मजीठिया ने इसे आतंकी हमला करार दिया. 13 दिसंबर, 2024: अलीवाल बटाला थाने पर ग्रेनेड विस्फोट, जिसकी जिम्मेदारी हैप्पी पासिया ने ली. 17 दिसंबर, 2024: इस्लामाबाद थाने पर ग्रेनेड हमला. शुरू में पुलिस ने इसे नकारा, लेकिन DGP पंजाब ने इसे आतंकी घटना माना. 16 जनवरी, 2025: जैंतीपुर गांव में शराब कारोबारी अमनदीप जैंतीपुरिया के घर पर ग्रेनेड हमला. 19 जनवरी, 2025: गुमटाला चौकी पर विस्फोट, जिसकी जिम्मेदारी BKI ने ली. 3 फरवरी, 2025: फतेहगढ़ चूड़ियां रोड पर बंद पुलिस चौकी पर लो-इंटेंसिटी विस्फोट. 14 फरवरी, 2025: डेरा बाबा नानक में पुलिसकर्मी के घर पर लो-इंटेंसिटी धमाका. 15 मार्च, 2025: ठाकुरद्वारा मंदिर पर हमला, जिसमें आरोपी गुरसिदक सिंह मुठभेड़ में मारा गया. अमृतसर का रहने वाला पासिया हैप्पी पासिया अमृतसर के पासिया गांव का रहने वाला है. उसने शुरू में जग्गू भगवानपुरिया गैंग के साथ काम किया और बाद में पाकिस्तान स्थित BKI आतंकी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा के साथ जुड़ गया. दोनों ने मिलकर पंजाब में आतंक और उगाही का नेटवर्क खड़ा किया, जिसमें शराब ठेकेदारों, कारोबारियों और हिंदू नेताओं को निशाना बनाया गया. सूत्रों के अनुसार हैप्पी पासिया ISI के शीर्ष अधिकारियों के संपर्क में था और खालिस्तानी समूहों से उसे पूरा समर्थन मिल रहा था. वह 2018 में दुबई गया, 2019 में भारत लौटा, फिर 2020 में यूके और 2021 में मेक्सिको के रास्ते अवैध रूप से अमेरिका पहुंचा. उसने बर्नर फोन और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल कर अपनी गतिविधियों को छिपाया. NIA ने उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत चार्जशीट दाखिल की है.हैप्पी पासिया की गिरफ्तारी को पंजाब पुलिस ने ISI समर्थित आतंकी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता बताया है. अब भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण प्रक्रिया तेजी से चल रही है. यह कदम भारत-अमेरिका आतंकवाद विरोधी सहयोग को और मजबूत करता है.

हूती ‘अपने कर्मों की भारी कीमत चुकाते रहेंगे, ‘यमन का अंजाम भी तेहरान जैसा ही होगा: नेतन्याहू

यरुशलम इजरायल ने यमन में हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले तीन प्रमुख बंदरगाहों- हुदैदाह, रस ईसा और सैफ- पर हवाई हमले किए हैं. इन हमलों से पहले इजरायली सेना ने इन क्षेत्रों के नागरिकों को तत्काल निकासी के आदेश जारी किए थे और हवाई हमलों की चेतावनी दी थी. इजरायल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने सोशल मीडिया पर हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि निशाना बनाए गए ठिकानों में एक पावर स्टेशन और 'गैलेक्सी लीडर' नामक एक कमर्शियल शिप भी शामिल है. दो साल पहले इस जहाज को हूती विद्रोहियों ने अपने कब्जे में ले लिया था. इजरायल की मानें तो इसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाजों की निगरानी के लिए किया जा रहा था. 'अपने कर्मों की कीमत चुकाते रहेंगे हूती' हूती-नियंत्रित यमन की मीडिया ने पुष्टि की है कि हवाई हमले हुदैदाह बंदरगाह पर हुए, लेकिन क्षति या हताहतों की कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है. इस्राइल काट्ज ने बताया कि यह कार्रवाई 'ऑपरेशन ब्लैक फ्लैग' का हिस्सा है और चेतावनी दी कि हूती 'अपने कर्मों की भारी कीमत चुकाते रहेंगे.' उन्होंने एक्स पर कहा, 'यमन का अंजाम भी तेहरान जैसा ही होगा. जो भी इजरायल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, उसे जवाब मिलेगा. जो इजरायल पर हाथ उठाएगा, उसका हाथ काट दिया जाएगा.' 'इजरायली नागरिकों पर हमलों के जवाब में की कार्रवाई'   इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान समर्थित हूती विद्रोही गाजा के फिलिस्तीनियों के समर्थन में इजरायल पर लगातार मिसाइल हमले कर रहे हैं और लाल सागर में कमर्शियल जहाजों को निशाना बना रहे हैं. इजरायली वायु सेना ने बयान में कहा कि यह ताजा हवाई हमला 'हूतियों की ओर से इजरायल और उसके नागरिकों पर बार-बार किए गए हमलों' की प्रतिक्रिया में किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि हमलों में वे बंदरगाह टारगेट किए गए हैं जिनका इस्तेमाल 'ईरानी शासन से हथियारों की सप्लाई और आतंकवादी साजिशों को अंजाम देने' के लिए किया जा रहा था. जहाज गैलेक्सी लीडर को हूतियों से मुक्‍त कराएगा इजरायल इजरायल ने यमन के हूती नियंत्रित क्षेत्रों में तीन बंदरगाहों और एक बिजली संयंत्र पर हमले किए हैं। इजरायली रक्षा मंत्री ने बताया है कि उनकी आर्मी ने कार्गो जहाज गैलेक्सी लीडर को भी टारगेट किया है। हूतियों ने 2023 में लाल सागर में गैलेक्सी लीडर नाम के जहाज को उस वक्त हाईजैक कर लिया था, जब वह भारत की ओर आ रहा था। इजरायल का कहना है कि गैलेक्सी लीडर पर हूतियों ने रडार सिस्टम लगा रखा है और इसका इस्तेमाल समुद्री जहाजों की निगरानी के लिए हो रहा है। हालांकि इजरायल ने ये साफ नहीं किया है कि हमलों में जहाज को कितना नुकसान हुआ है या वह इसे छुड़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अक्टूबर, 2023 में गाजा में इजरायल के हमलों के खिलाफ हूतियों ने लाल सागर में हमले शुरू किए थे। हूतियों ने नवंबर, 2023 में तुर्की के कोरफेज से भारत के पिपावाव की ओर आ रहे गैलेक्सी लीडर पर हमला करते हुए इसे अपने नियंत्रण में ले लिया था। इसके बाद हूती इस जहाज को यमन के तट पर ले गए थे। बीते 20 महीने ये यह जहाज हूतियों के नियंत्रण में है। ब्रिटिश कंपनी का है जहाज बहामास के झंडे वाला कार्गो जहाज गैलेक्सी लीडर सीधे इजरायलियों के स्वामित्व या संचालन में नहीं था। यह इजरायली नागरिक रामी उंगर की हिस्सादारी वाली ब्रिटिश कंपनी से एक जापानी कंपनी को पट्टे पर दिया गया था। यह जहाज यूके-पंजीकृत कंपनी रेकार कैरियर्स के स्वामित्व में था। इस कंपनी में इजरायली नागरिकों की हिस्सेदारी के चलते इसे निशाना बनाया गया। गैलेक्सी लीडर पर जिस दिन हमला किया गया, वह तुर्की के बंदरगाह से निकलकर भारत की ओर चला था। जहाज पर यूक्रेनियन, बुल्गारियाई, फिलिपिनो और मैक्सिकन सहित विभिन्न राष्ट्रीयताओं के 25 चालक दल के सदस्य सवार थे। इस जहाज पर कोई भी इजरायली नागरिक नहीं था लेकिन हूतियों ने सभी क्रू सदस्यों को बंधक बना लिया था। 14 महीने बाद हुई क्रू की रिहाई हूतियों ने जहाज को अगवा करने के करीब 14 महीने बाद इसी साल जनवरी में चालक दल को रिहा किया था। यह रिहाई गाजा में इस साल के शुरू में हुए युद्धविराम समझौते के समर्थन में की गई थी। गाजा में इस साल के शुरू में हुए सीजफायर के बाद हूतियों ने क्रू को छोड़ दिया था लेकिन जहाज को अपने कब्जे में रखा है। इजरायल ने ये भी कहा है कि यमन में हालिया हमले तब शुरू किए गए, जब रविवार को लाइबेरिया के झंडे वाला एक जहाज लाल सागर में हमले का शिकार हुआ। हमले के बाद इसमें आग लग गई, जिससे चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा। हूतियों ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है लेकिन इजरायल ने यमन में हमले किए हैं।

भारत रत्न से सम्मानित होंगे तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा, चीन को फिर लगेगी मिर्ची

 नई दिल्ली  तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा इन दिनों लगातार चर्चा में हैं। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में 90वां जन्मदिन मनाते हुए दलाई लामा ने अपने उत्तराधिकारी पर बड़ा एलान कर दिया, जिसके बाद चीन की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आना स्वाभाविक था। वहीं, अब दलाई लामा को देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न देने की तैयारी हो रही है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सांसदों के ऑल पार्टी फोरम ने दलाई लामा को भारत रत्न देने का सुझाव दिया है। यही नहीं, 80 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। इसे जल्द ही प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के पास भेजा जा सकता है। सांसद फोरम ने CTA से की मुलाकात तिब्बत पर बनी सर्वदलीय भारतीय संसदीय मंच (All Party Indian Parliamentary Forum on Tibet) ने संयोजक भर्तृहरि महताब की अगवाई में कई बार केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) से मुलाकात की है। वहीं, राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार भी इस पहले में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सुजीत कुमार ने इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत के दौरान कहा-     80 सांसदों ने एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अभी 20 अन्य सांसदों के साइन करवाना बाकी है। 100 सांसदों के हस्ताक्षर होने के बाद इस प्रस्ताव को जमा किया जाएगा। चीन को दिया करारा जवाब दलाई लामा के उत्तराधिकारी पर चीन की टिप्पणी का जवाब देते हुए सुजीत कुमार ने कहा कि चीन को दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनने का कोई अधिकार नहीं है। फोरम ने तिब्बत का मुद्दा अलग-अलग मंचों पर उठाने का फैसला किया है। संसद में भी इसपर बात की जाएगी। उत्तराधिकारी पर चीन की बढ़ी चिंता बता दें कि 2 जुलाई को दलाई लामा ने अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करते हुए यह अधिकार गादेन फोडरंग ट्र्स्ट को सौंपा है, जिसकी स्थापना खुद दलाई लामा ने की थी। मगर, चीन ने उनके इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। चीन का कहना है कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनना उनका आंतरिक मामला है और यह फैसला चीन की सरकार करेगी। अखबार से बातचीत में फोरम के पूर्व संयोजक और राज्यसभा सांसद सुजित कुमार ने कहा कि समूह दलाई लामा के लिए भारत रत्न की मांग कर रहा है। उन्होंने जानकारी दी, 'इसकी मांग कर रहे मेमोरेंडम पर 80 से ज्यादा सांसदों से हस्ताक्षर मिल गए हैं और जैसे ही 100 सांसदों के दस्तखत मिल जाएंगे, तो इसे जमा कर दिया जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा है कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनने में चीन की कोई भूमिका नहीं है। साथ ही फोरम ने संसद समेत कई मंचों पर तिब्बत से जुड़े मुद्दे उठाने का फैसला किया है। खास बात है कि इस फोरम के 6 सांसद दिसंबर 2021 में हुई निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में शामिल हुए थे। खबर है कि तब चीनी दूतावास ने सांसदों को पत्र लिखा था, जिसमें तिब्बती ताकतों को समर्थन देने से बचने की बात कही गई थी। कौन चुनेगा उत्तराधिकारी तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने बुधवार को कहा था कि दलाई लामा संस्था जारी रहेगी और केवल ‘गादेन फोडरंग ट्रस्ट’ को ही उनके उत्तराधिकारी को मान्यता देने का अधिकार होगा। अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने गुरुवार को कहा कि अगले दलाई लामा पर फैसला सिर्फ स्थापित संस्था और दलाई लामा लेंगे। उन्होंने कहा कि इस फैसले में कोई और शामिल नहीं होगा। चीन को लगी मिर्ची चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने रीजीजू की टिप्पणियों को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए यहां प्रेस वार्ता में कहा कि भारत को 14वें दलाई लामा की चीन विरोधी अलगाववादी प्रकृति के प्रति स्पष्ट होना चाहिए और 'शिजांग' (तिब्बत) से संबंधित मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए। चीन तिब्बत का उल्लेख 'शिजांग' के नाम से करता है। माओ ने कहा कि भारत को अपने शब्दों और कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए, शिजांग से संबंधित मुद्दों पर चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना बंद करना चाहिए और चीन-भारत संबंधों के सुधार और विकास को प्रभावित करने वाले मुद्दों से बचना चाहिए। माओ ने चीन के इस रुख को दोहराया कि दलाई लामा और तिब्बती बौद्ध धर्म के दूसरे सबसे बड़े धर्म गुरु 'पंचेन लामा' के उत्तराधिकारी के लिए घरेलू प्रक्रिया, ‘स्वर्ण कलश’ से निकाले गए भाग्य पत्र और केंद्र सरकार की मंजूरी के अनुरूप कठोर धार्मिक अनुष्ठानों और ऐतिहासिक परंपराओं के अनुसार होना चाहिए।  

18 जुलाई को पीएम कर सकते हैं किसान सम्मान निधि का पैसा ट्रासंफर, बिहार के 76 लाख किसानों का इंतजार खत्म

पटना पीएम किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त का इंतजार करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। 18 जुलाई को पीएम किसान सम्मान निधि का 20वीं किस्त किसानों के खाते में आ सकता है। पीएम नरेंद्र मोदी का 18 जुलाई को बिहार दौरा प्रस्तावित है। हालांकि इसकी अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन, बीजेपी के सूत्रों का कहना है पीएम 18 जुलाई को बिहार आयेंगे। 18 जुलाई को पीएम कर सकते हैं पैसा ट्रासंफर पीएम मोतिहारी से इस दफा किसान सम्मान निधि का 20वीं किस्त ट्रांसफर कर सकते हैं। पीएम मोदी इससे पहले भागलपुर से 24 फरवरी, 2025 को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 19वीं किस्त ट्रांसफर किया था। इसी प्रकार पिछले महीने जून में पीएम मोदी बिहार के सीवान से ही पीएम आवास योजना के लाभार्थियों का पैसा ट्रांसफर किया था। इसको लेकर यह उम्मीद किया जा रहा है कि पीएम मोतिहारी से पीएम किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त ट्रांसफर कर सकते हैं।   पीएम मोदी का बिहार दौरा प्रधानमंत्री मोदी अभी विदेश दौरे पर हैं। 9 जुलाई को वो भारत आ रहे हैं। पीएम का बिहार के मोतिहारी में 18 जुलाई को कार्यक्रम प्रस्तावित है। कहा जा रहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी इस दिन बिहार को कई बड़ी सौगात दे सकते हैं। पीएम एक साथ कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। 19वीं किस्त भी बिहार से हुई थी ट्रांसफर पीएम किसान निधि का पैसा प्रधानमंत्री मोदी खुद ही ट्रांसफर करते हैं। इसलिए यह संभावना व्यक्त किया जा रहा है कि पीएम मोतिहारी दौरा के समय किसानों के लिए गुड न्यूज लेकर आए। इससे पहले पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 19वीं किस्त 24 फरवरी, 2025 को भागलपुर से करीब 9.8 करोड़ किसानों के खाते में ट्रांसफर किया था। जबकि पीएम किसान की 18वीं किस्त 5 अक्टूबर, 2024 को पीएम मोदी ने महाराष्ट्र से ट्रांसफर किया था। इसी प्रकार पीएम मोदी ने किसान सम्मान योजना की 17वीं किस्त पीएम मोदी ने वाराणसी से, 16वीं किस्त महाराष्ट्र के यवतमाल से और 15वीं किस्त झारखंड के खूंटी से ट्रांसफर किया था। बिहार में कितने किसान पात्र हैं बिहार में 76 लाख 12 हजार 642 किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि योजना से जुड़ा पैसा आयेगा। लेकिन, जिन किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्रेशन और ई-केवाईसी नहीं कराया है, उन्हें तगड़ा झटका लग सकता है। केंद्र सरकार बार-बार इसे करने के लिए कह रही है। जो लोग पीएम किसान सम्मान निधि के लिए आपने ई-केवाईसी नहीं कराया है वे तत्काल करा लें। इसके साथ ही अपना फार्म भी रजिस्ट्रेशन करा लें। जो ऐसा नहीं करायेंगे उनका पैसा रूक जायेगा। उनको इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। कब-कब मिलते हैं पैसा प्रत्येक साल पहली किस्त 1 अप्रैल से 31 जुलाई, दूसरी किस्त 1 अगस्त से 30 नवंबर और तीसरी किस्त 1 दिसंबर से 31 मार्च के बीच किसानों के बैंक खातों में केंद्र सरकार द्वारा डाल दी जाती है। पैसा नहीं आए तो ऐसे करें चेक     https://pmkisan.gov.in/) अपना रजिस्ट्रेशन स्टेटस चेक करें।     हेल्पलाइन: 011-23381092, 155261 (Toll-free)     गड़बड़ी की शिकायत: pmkisan-ict@gov.in पर ईमेल करें।

आज ईरान-इजरायल जंग के बाद पहली बार ट्रंप से मिलेंगे नेतन्याहू, ईरान के मुद्दे पर भी होगी बात

वाशिंगटन   इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू आज अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात करेंगे. इस अहम बैठक में गाज़ा में युद्धविराम की कोशिशों और ईरान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये मुलाकात ट्रंप की मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने की कोशिशों का हिस्सा है. रॉयटर्स के मुताबिक सीनियर सलाहकार और सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ (CSIS) की मिडिल ईस्ट डायरेक्टर मोना याकूबियन ने बताया कि डोनाल्ड ट्रंप गाज़ा में सीजफायर को प्राथमिकता दे रहे हैं और ये मुद्दा दोनों नेताओं की मीटिंग में सबसे ऊपर रहेगा. उन्होंने कहा कि ट्रंप कई दिनों से इस दिशा में संकेत दे रहे हैं. इधर, हमास ने भी अमेरिका द्वारा प्रस्तावित सीजफायर प्लान पर सकारात्मक रुख दिखाया है और बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही है. इस योजना में बंधकों की रिहाई और संघर्ष समाप्त करने को लेकर बातचीत का प्रस्ताव है. ईरान के मुद्दे पर भी होगी बात ट्रंप ने यह भी कहा कि वह नेतन्याहू के साथ ईरान पर भी चर्चा करेंगे. मोना याकूबियन के अनुसार ट्रंप और नेतन्याहू दोनों ईरान को लेकर एक जैसे विचार रखते हैं और पहले भी मिलकर सैन्य कार्रवाई कर चुके हैं. ऐसे में यह संभावना है कि दोनों नेता मिलकर आगे की रणनीति पर एकजुट रुख अपनाएंगे. इन नेताओं से करेंगे मुलाकात इस दौरे में नेतन्याहू अमेरिका के अन्य शीर्ष अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे, जिनमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ट्रंप के पश्चिम एशिया दूत स्टीव विटकॉफ और वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक शामिल हैं. क्यों अहम है नेतन्याहू की यात्रा? मोना याकूबियन ने कहा कि नेतन्याहू की यह यात्रा न केवल ईरान में की गई सैन्य कार्रवाई की सफलता को दिखाएगी, बल्कि गाज़ा में संभावित युद्धविराम की दिशा में भी एक कदम मानी जाएगी. यह ट्रंप के लिए भी अहम है, क्योंकि इससे वे अमेरिका में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ खुद को 'शांति स्थापित करने वाले नेता' के रूप में पेश कर पाएंगे. वे लंबे समय से मिडिल ईस्ट में बड़े राजनयिक समझौते कराने की कोशिश कर रहे हैं. इस मुलाकात को लेकर अब पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं, जिसमें दोनों नेता क्षेत्रीय शांति और रणनीतिक साझेदारी पर नई राह तय कर सकते हैं. 

राफेल पर चीन की झूठी कहानी, ऑपरेशन सिंदूर में फ्रांस ने किया सच उजागर

पेरिस ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान ने भारत के राफेल समेत छह विमानों को गिराए जाने का दावा किया, जिसे भारतीय सेना ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद कई देशों में राफेल विमानों को लेकर सवाल खड़े होने लगे। अब फ्रांस की ओर से पूरा सच सामने आ गया है। दरअसल, फ्रांस के सैन्य और खुफिया अधिकारियों ने खुलासा किया है कि चीन ने बिक्री को कमजोर करने और फ्रांसीसी प्रमुख लड़ाकू विमान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए अपने दूतावासों का इस्तेमाल किया। चीनी विदेशी दूतावासों में रक्षा अताशे राफेल की बिक्री को कमजोर करने के अभियान का नेतृत्व कर रहे थे, जिसका उद्देश्य देशों को फ्रांसीसी लड़ाकू विमान न खरीदने और इसके बजाय चीनी निर्मित जेट विमानों को चुनने के लिए राजी करना था। यह जानकारी न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने फ्रांसीसी खुफिया सेवा के निष्कर्षों का हवाला देते हुए दी है। फ्रांस अब अपने राफेल फाइटर जेट के खिलाफ अफवाह फैलाए जाने के अभियान से लड़ रहा है। राफेल जेट और अन्य भारी हथियारों की बिक्री फ्रांस के रक्षा उद्योग के लिए बड़ा कारोबार लाती है, जिससे सरकार को भारत और एशिया के अन्य देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों में मदद मिलती है। वहीं, चीन खुद को प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। फ्रांसीसी अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा है कि मई में लड़ाई के दौरान पाकिस्तान द्वारा तीन राफेल सहित पांच भारतीय विमानों को मार गिराने का दावा करने के बाद अन्य देशों ने राफेल के प्रदर्शन पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। राफेल के बारे में पाकिस्तान के दावे की भारत द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। एयर मार्शल एके भारती ने ऑपरेशन सिंदूर पर एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान राफेल जेट विमानों के मार गिराए जाने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि नुकसान किसी भी युद्ध परिदृश्य का हिस्सा है। इसके अलावा, दावों की पुष्टि या खंडन किए बिना भारतीय नौसेना के अधिकारी कैप्टन शिव कुमार ने पिछले महीने कहा था कि भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान के शुरुआती दिन शुरुआती प्रतिबंधों के कारण कुछ लड़ाकू विमान खो दिए थे। हालांकि, वह इस दावे से सहमत नहीं थे कि देश ने पांच लड़ाकू विमान खो दिए। राफेल जेट बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने हाल ही में पाकिस्तान के दावे को खारिज करते हुए इसे गलत बताया। फ्रांसीसी पत्रिका चैलेंजेस से बात करते हुए उन्होंने इस्लामाबाद के इस दावे का खंडन किया कि मई में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिवसीय संघर्ष के दौरान तीन राफेल जेट विमानों को मार गिराया गया था। 'राफेल को निशाना नहीं बनाया गया' फ्रांसीसी अधिकारियों ने कहा है कि वे पाकिस्तान और चीन द्वारा राफेल को बदनाम करने और ऑनलाइन गलत सूचना फैलाने के कथित संगठित अभियान का विरोध कर रहे हैं। फ्रांस ने कहा कि इस अभियान में कथित रूप से राफेल मलबे के छेड़छाड़ किए गए दृश्य, एआई-जनरेटेड सामग्री और 1,000 से अधिक नव निर्मित सोशल मीडिया अकाउंट शामिल थे, ताकि चीनी प्रौद्योगिकी के श्रेष्ठ होने की बात फैलाई जा सके। फ्रांसीसी खुफिया सेवा ने कहा कि चीनी दूतावास के रक्षा अधिकारियों ने अन्य देशों के समकक्षों और सुरक्षा अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में भी इसी तरह की बातें दोहराईं। खुफिया जानकारी के अनुसार, चीनी अधिकारियों ने कथित तौर पर उन देशों पर अपनी लॉबिंग केंद्रित की, जिन्होंने राफेल का ऑर्डर दिया है और जो देश फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों के संभावित ग्राहक हैं।  

ब्रिक्स शिखर बैठक के लिए ब्राजील पहुंचे पीएम मोदी, स्वागत में दिखी खास तैयारी

रियो डी जेनेरियो ब्राजील में 6-7 जुलाई को ब्रिक्स सम्मेलन हो रहा है। 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पीएम नरेंद्र मोदी भी रियो डी जेनेरियो पहुंच गए हैं। यहां पर ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। बता दें कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक शासन में सुधार, शांति और सुरक्षा, बहुपक्षवाद को मजबूत करने, एआई के उपयोग, जलवायु कार्रवाई, वैश्विक स्वास्थ्य और आर्थिक और वित्तीय मामलों सहित प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।   पीएम मोदी पहुंचे ब्राजील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय 8 दिनों की पांच देशों की आधिकारिक दौरे पर हैं। पीएम शनिवार को अर्जेंटीना की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करने के बाद पांच देशों की अपनी यात्रा के चौथे चरण में आज दिन में ब्राजील पहुंचे। बता दें कि पीएम मोदी की ब्राजील की चौथी यात्रा है और दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के बाद उनका ब्रासीलिया का राजकीय दौरा करने का कार्यक्रम है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी इस शिखर सम्मेलन के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं। हालांकि, इसको लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। चीन के राष्ट्रपति नहीं लेंगे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा ब्राजील में हो रहे इस शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति और चीन के राष्ट्रपति हिस्सा नहीं लेंगे। चीनी राष्ट्रपति बनने के बाद ये पहला मौका है, जब शी चिनफिंग इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। उनके स्थान पर चीन के पीएम ली क्यांग सम्मेलन में भाग लेंगे। बता दें कि ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। मिस्त्र, इथोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई को शामिल करके इस समूह का विस्तार किया गया है।

प्रदेश में बारिश और मलबा आने से ऋषिकेश-यमुनोत्री-राष्ट्रीय राजमार्ग सहित 67 सड़के बंद

उत्तरकाशी यमुनोत्री हाईवे पर ओजरी के समीप एनएच विभाग की ओर से करीब 24 मीटर लंबे स्पान के बैली ब्रिज का निर्माण कर रहा है। मौसम का साथ मिलने पर विभाग ने काम में तेजी लाई। इसके साथ ही स्यानाचट्टी में सिंचाई विभाग की ओर से यमुना नदी में बनी झील के मुहाने से मलबा हटाने का कार्य जारी है। बीते 28 जून को यमुनोत्री हाईवे का हिस्सा ओजरी में बह गया था। प्रदेश में बारिश के बाद मलबा आने से सड़कों का बंद होने का सिलसिला जारी है। राज्य में ऋषिकेश-यमुनोत्री-राष्ट्रीय राजमार्ग सहित 67 सड़के बंद हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के मुताबिक रुद्रप्रयाग जिले में चार ग्रामीण सड़कें, उत्तरकाशी में एक एनएच सहित 11 ग्रामीण सड़कें, नैनीताल में दो, चमोली में एक राज्य मार्ग सहित 21 ग्रामीण सड़कें, पिथौरागढ़ में छह ग्रामीण, अल्मोड़ा में एक राजमार्ग और एक ग्रामीण, बागेश्वर जिले में 11 ग्रामीण, पौड़ी गढ़वाल में तीन ग्रामीण, देहरादून में दो ग्रामीण और टिहरी जिले में तीन ग्रामीण सड़के मलबा आने से बंद हैं।  राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के मुताबिक बंद सड़कों को खोलने का प्रयास किया जा रहा है। उत्तराखंड में आज से फिर मानसून रफ्तार पकड़ेगा। मौसम विज्ञान केंद्र ने छह जुलाई को रुद्रप्रयाग, टिहरी, बागेश्वर और देहरादून में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। उधर, मलबा आने से सड़कों के बंद होने का सिलसिला जारी है। यमुनोत्री हाईवे समेत प्रदेश में 67 सड़कें बंद हैं। मौसम विभाग ने अन्य जिलों में भी तेज बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।  

भारत बनेगा वैश्विक आपूर्ति नेटवर्क का मजबूत हिस्सा, सरकार का बड़ा लक्ष्य – पीयूष गोयल

नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता दुनिया के कुछ सबसे उन्नत क्षेत्रों को सशक्त बना रही है। साथ ही कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को आपूर्ति श्रृंखलाओं में वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय भागीदार बनाना है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारत में विभिन्न ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) के माध्यम से पहले से ही बहुत सारे डिजाइन और इनोवेशन हो रहे हैं, "हमारा लक्ष्य अब न केवल डिजाइन और इनोवेशन करना है, बल्कि यहां पेटेंट और उत्पादन करना भी है, जिससे भारत आपूर्ति श्रृंखलाओं में वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय भागीदार बन सके।" उन्होंने देवनहल्ली में कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (केआईएडीबी) एयरोस्पेस विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) का दौरा किया और देश में फ्रांसीसी प्रमुख सफ्रान एयरक्राफ्ट इंजन और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की ज्वाइंट इनिशिएटिव की सराहना की। गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "एसईजेड में संचालित कई इकाइयों की लीडरशीप के साथ भी बातचीत की और नीति निर्माण प्रक्रिया को मजबूत करने में मदद करने के लिए उनकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया और सुझाव लिए।" पिछले महीने, पेरिस एयर शो के 55वें संस्करण में, विमान इंजन के डिजाइन, विकास और उत्पादन में दुनिया की अग्रणी फ्रांसीसी इंजन निर्माता कंपनी सफ्रान एयरक्राफ्ट इंजन ने एलईएपी इंजन के रेटेटिंग पार्ट्स के उत्पादन के लिए भारत की अग्रणी एयरोस्पेस और रक्षा कंपनी एचएएल के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता सरकार की "मेक इन इंडिया" नीति का भी समर्थन करता है। एचएएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. डीके सुनील ने कहा, "हमें सफ्रान के साथ इस दीर्घकालिक साझेदारी का विस्तार करने और एलईएपी कार्यक्रम के लिए इनकोनेल भागों के लिए फोर्जिंग प्रक्रियाओं में अपनी औद्योगिक विशेषज्ञता विकसित करने पर वास्तव में गर्व है।" फ्रांसीसी कंपनी सफ्रान एयरक्राफ्ट इंजन भारत में अपनी क्षमताओं और उपस्थिति को बढ़ा रहा है। कंपनी पहले से ही हैदराबाद, बेंगलुरु और गोवा में पांच प्रोडक्शन साइट्स का संचालन करती है।