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EC की SIR ड्राफ्ट लिस्ट पर बवाल: 65 लाख लोगों को क्यों हटाया? SC ने मांगा जवाब

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को निर्वाचन आयोग से बिहार में मतदाता सूची मसौदा से बाहर किए गए लगभग 65 लाख मतदाताओं का विवरण नौ अगस्त यानी शनिवार तक प्रस्तुत करने को कहा है। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने निर्वाचन आयोग के वकील से कहा कि वे हटाए गए 65 लाख मतदाताओं का विवरण प्रस्तुत करें और इसकी एक प्रति गैर सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) को भी दें। यह विवरण पहले ही राजनीतिक दलों के साथ साझा किया जा चुका है। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का निर्देश देने वाले निर्वाचन आयोग के 24 जून के आदेश को चुनौती देने वाले एनजीओ ने एक नया आवेदन दायर कर निर्वाचन आयोग को लगभग 65 लाख हटाए गए मतदाताओं के नाम प्रकाशित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। याचिका में ADR ने कहा था कि जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके विवरण में यह भी उल्लेख हो कि वे (मतदाता) मृत हैं, स्थायी रूप से पलायन कर गए हैं या किसी अन्य कारण से उनके नाम पर विचार नहीं किया गया है। प्रशांत भूषण से क्या बोला कोर्ट? हालांकि, पीठ ने ADR की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण से कहा कि नाम हटाने का कारण बाद में बताया जाएगा क्योंकि अभी यह केवल एक मसौदा सूची है। इस पर भूषण ने दलील दी कि कुछ राजनीतिक दलों को हटाए गए मतदाताओं की सूची दी गई है, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उक्त मतदाता मर चुका है या पलायन कर गया है। प्रभावित हर मतदाता से संपर्क करेंगे: SC पीठ ने निर्वाचन आयोग के वकील से कहा, ‘‘हम प्रभावित होने वाले हर मतदाता से संपर्क करेंगे और आवश्यक जानकारी प्राप्त करेंगे। आप (निर्वाचन आयोग) शनिवार तक जवाब दाखिल करें और मिस्टर भूषण को इसे देखने दें, फिर हम देखेंगे कि क्या खुलासा होता है और क्या नहीं।’’ भूषण ने आरोप लगाया कि गणना फॉर्म भरने वाले 75 प्रतिशत मतदाताओं ने 11 दस्तावेजों की सूची में उल्लिखित कोई भी सहायक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं दिए हैं और उनके नाम निर्वाचन आयोग के बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) की सिफारिश पर शामिल किए गए थे। पीठ ने कहा कि वह 12 अगस्त को निर्वाचन आयोग के 24 जून के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू कर रही है और एनजीओ उस दिन ये दावे कर सकता है। निर्वाचन आयोग को कानून के अनुसार कार्य करने वाला एक संवैधानिक प्राधिकारी बताते हुए शीर्ष अदालत ने 29 जुलाई को कहा था कि अगर बिहार में मतदाता सूची की एसआईआर में ‘‘बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए’’ हैं, तो वह तुरंत हस्तक्षेप करेगी। पीठ ने बिहार में निर्वाचन आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार करने के लिए समयसीमा तय की थी और कहा था कि इस मुद्दे पर सुनवाई 12 और 13 अगस्त को होगी।  

दो दिल, एक कहानी और एक सौतन! मोहब्बत में आई दरार की दर्दनाक दास्तां

नई दिल्ली  दिल्ली के मधु विहार इलाके से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 19 साल के युवक ने अपने ट्रांसजेंडर पार्टनर की निर्मम हत्या कर दी। हत्या के पीछे पैसों का लेनदेन और धोखे का शक बताया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोपी युवक और उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया है। प्यार के रिश्ते में आया पैसों का विवाद यह घटना रेहान और करण नाम के दो युवकों के बीच की है। रेहान (19) और करण (ट्रांसजेंडर) बीते चार महीनों से मधु विहार इलाके में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। उनका रिश्ता एक आम दोस्ती से बढ़कर था लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनके रिश्ते में पैसों को लेकर तकरार शुरू हो गई थी। रेहान बार-बार करण से पैसे ऐंठने लगा था जिससे करण ने उससे दूरी बनाना शुरू कर दी। रेहान को यह दूरी बर्दाश्त नहीं हुई और उसे लगा कि करण उसे धोखा दे रहा है।   झाड़ियों में मिला शव धोखे के शक में रेहान ने अपने 20 साल के दोस्त मोहम्मद सर्वर के साथ मिलकर करण की हत्या की साजिश रची। 3-4 अगस्त की रात रेहान और सर्वर बहाने से करण को टेल्को टी-पॉइंट पर ले गए। वहां दोनों ने मिलकर करण पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए और उसकी हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों मौके से फरार हो गए। पुलिस को किसी राहगीर ने सूचना दी कि झाड़ियों में एक युवक का शव पड़ा है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।   पुलिस ने 12 घंटे में सुलझाया मामला क्राइम ब्रांच ने कुछ ही घंटों में इस हत्याकांड का खुलासा कर दिया। पुलिस ने ट्रांसयमुना से लेकर गाजियाबाद तक कई जगहों पर छापेमारी की लेकिन आरोपी फरार थे। आखिरकार पुलिस को जानकारी मिली कि दोनों पूर्वी दिल्ली इलाके में आने वाले हैं। क्राइम ब्रांच की टीम ने बीती रात 12:45 बजे शकरपुर फ्लाईओवर के पास से दोनों आरोपियों रेहान और मोहम्मद सर्वर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।   

संसद में बिहार की मतदाता सूची पर नहीं हो रही चर्चा, विपक्ष नाराज़: खरगे का बयान

नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को कहा कि विपक्षी पार्टियां बिहार में चल रही 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) यानी मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा पर संसद में चर्चा की मांग कर रही हैं, लेकिन सरकार इस पर चर्चा के लिए तैयार नहीं है। खरगे ने चेतावनी दी कि अगर सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से इनकार करती है, तो इसे ऐसा माना जाएगा कि वह लोकतंत्र और संविधान को नहीं मानती। उन्होंने कहा, 'एसआईआर पर चर्चा बेहद जरूरी है ताकि हर भारतीय नागरिक के मतदान के अधिकारों की रक्षा की जा सके।' क्या है एसआईआर? विशेष गहन पुनरीक्षण एक प्रक्रिया है जिसमें चुनाव आयोग मतदाता सूची को दोबारा जांचेगा, ताकि उसमें किसी भी तरह की गलती, दोहराव या अपात्र नामों को हटाया जा सके और नए योग्य मतदाताओं को जोड़ा जा सके। विपक्ष की क्या है चिंता? विपक्षी दलों का कहना है कि बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है, और इससे कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं, जिससे उनके वोट देने का अधिकार छिन सकता है। इसी वजह से वे इस पर संसद में खुली बहस चाहते हैं। खरगे ने यह भी कहा कि, 'अगर सरकार वाकई में लोकतांत्रिक मूल्यों को मानती है, तो उसे एसआईआर पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए।' सरकार की चुप्पी पर खरगे का सवाल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अनुसार, केंद्र सरकार एसआईआर पर चर्चा से बच रही है, जिससे शक पैदा होता है कि वह जानबूझकर इस मुद्दे को नजरअंदाज कर रही है।

ऑपरेशन सिंदूर से झटका खाने के बाद मसूद अजहर की नई चाल, जैश को दोबारा खड़ा करने की मुहिम

नई दिल्ली कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सैन्य बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर के कुल 9 आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर उसे जमींदोज कर दिया था। इसमें कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर स्थित हेडक्वार्टर भी शामिल था। अब खबर है कि इस आतंकी संगठन का मुखिया मसूद अजहर ने उसे हेडक्वार्टर को फिर से खड़ा करने की मुहिम छेड़ी है और इसके लिए ऑनलाइन चंदा जुटा रहा है। एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जमात की ओर से पोस्ट कर यह दावा किया गया है कि पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित सुभान अल्लाह मस्जिद का फिर से पुनर्निर्माण किया जा रहा है। सुभान अल्लाह मस्जिद की जैश-ए-मोहम्मद का हेडक्वार्टर था। पोस्ट में कहा गया कि इसके लिए सब एक होकर काम करें, पैसे जमा करें। पोस्ट में यह भी कहा गया है कि किसने कितना चंदा दिया, इसका किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए। शहीद मस्जिदें फिर से मुस्कुराएंगी, मसूद का दावा मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जैश सरगना मसूद अजहर ने इस पोस्ट में कहा कि इस कैंपेन से जमीन के कई हिस्से जन्नत बन जाएंगे, शहीद मस्जिदें फिर से मुस्कुराएंगी और रौनक लौट आएगी। पोस्ट में ये भी कहा गया है कि जो दीवाने ‘जेहाद' की राह में तरस रहे हैं, उनके लिए भी अब नए रास्ते खुलेंगे। मसूद अजहर का भीख मांगने का यह कैम्पेन आज से ही शुरू हुआ है। 15 एकड़ क्षेत्र में फैला है आतंक का मरकज बता दें कि पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकियों द्वारा 26 पर्यटकों की धर्म पूछकर की गई हत्या के बाद भारतीय सेना ने 6 और 7 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च कर पाकिस्तान और PoK में नौ आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। 22 मिनट के इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के ठिकाने बर्बाद कर दिए थे। इसमें सबसे अहम सुभान अल्लाह मस्जिद था। पाकिस्तान पंजाब प्रांत के बहाबलपुर में स्थित यह मस्जिद जैश-ए-मोहम्मद का सबसे महत्वपूर्ण आतंकी केंद्र था, जो 15 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यह पुलवामा हमले जैसे आतंकी हमलों की योजना और प्रशिक्षण का गढ़ रहा है।  

पिता की जान बचाने पहुंचे पुलिसकर्मी को बेटों ने पीट-पीटकर मार डाला

तमिलनाडु दो बेटों और उनके पिता के बीच जारी हिंसक घरेलू विवाद को शांत कराने के चक्कर में तमिलनाडु में एक पुलिसकर्मी को अपनी ही जान गंवानी पड़ गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। फिलहाल, पुलिस तीन आरोपियों की तलाश कर रही है। वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने का ऐलान किया है। घटना तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले के उडुमलपेल के पास सोमवार रात की है। यहां कथित तौर पर शराब के नशे में दो युवकों और उनके पिता के बीच झगड़ा हो रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस सूत्रों और चश्मदीदों ने बताया कि रात में गश्त कर रहे एसएसआई शानमुगावेल इस मारपीट की जानकारी मिलने के बाद तुरंत मौके पर पहुंच गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना कुडिमंगलम की एक निजी संपत्ति में हुई है, जिसके मालिक स्थानीय AIADMK विधायक हैं। यहां काम करने वाले मूर्ति और उसके बेटे थंगापांडियन और मणिकंदन के बीच झगड़ा हो रहा था। खबर है कि इस दौरान दोनों बेटे अपने पिता के साथ मारपीट कर रहे थे। तब पुलिसकर्मी ने झगड़ा शांत कराने की कोशिश की और घायल पिता को अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की। इस दौरान छिपे हुए मणिकंदन ने थंगापांडियन के साथ बातचीत करते हुए कथित तौर पर एसएसआई पर हमला कर दिया। इसके बाद खबर है कि पिता और दूसरा बेटा भी मारपीट में शआमिल हो गए। इस दौरान तीनों पुलिसकर्मी के पीछे दौड़ पड़े और पीट-पीट कर मार डाला। अचानक हुए इस हमले में पुलिसकर्मी का ड्राइवर बचकर निकलने में सफल रहा। फिलहाल, तीनों आरोपी फरार हैं और पुलिस तलाश कर रही है। सीएम स्टालिन ने घटना पर शोक जताया है। फिलहाल, इस पर राज्य के प्रमुख विपक्षी दल AIADMK की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। खास बात है कि यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब राज्य में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। भारतीय जनता पार्टी नेता नारायण तिरुपति ने इस हमले पर हैरानी जताई। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को निजी दुश्मनी कहकर खत्म नहीं किया जा सकता।  

प्रशासनिक कार्यों को नई रफ्तार, PM मोदी ने किया कर्तव्य भवन-3 का शुभारंभ

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर नवनिर्मित कर्तव्य भवन का उद्घाटन किया। विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एक साथ लाकर कर्तव्य भवन में शिफ्ट किया जाएगा जिससे दक्षता, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। इसमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय/विभाग और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय होंगे। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों के लिए ऐसे कुल 10 भवनों का निर्माण होना है। इनमें से कर्तव्य भवन-3 बनकर तैयार हो गया है, इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। साथ ही वह शाम छह बजे कर्तव्य पथ पर एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे। परियोजना पूरी होने के बाद किराये के तौर पर खर्च होने वाले 1500 करोड़ रुपये की बचत होगी। कर्तव्य भवन में क्या है खास लगभग 1.5 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले इस अत्याधुनिक कार्यालय परिसर में दो बेसमेंट और सात मंजिलें (भूतल+6 मंजिल) हैं। वर्तमान में, कई प्रमुख मंत्रालय 1950 और 1970 के दशक के बीच निर्मित शास्त्री भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन और निर्माण भवन जैसी पुरानी इमारतों से काम करते हैं, जो 1950-70 के दशक में बनाई गई थीं।  भवन में सुरक्षित और आईटी-सक्षम कार्यस्थल, स्मार्ट एंट्री सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और कमांड सेंटर, सोलर पैनल, सौर वॉटर हीटर और ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन जैसी सुविधाएं हैं। यह पर्यावरण के अनुकूल निर्माण को भी बढ़ावा देता है, जिसमें अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग, ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली शामिल हैं। इमारत को ठंडा रखने और बाहरी ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए इसमें कांच की विशेष खिड़कियां लगाई गई हैं। 30 फीसदी कम ऊर्जा का खपत कर्तव्य भवन को 30 प्रतिशत कम ऊर्जा खपत के लिए तैयार किया गया है। ऊर्जा की बचत करने वाली एलईडी लाइटें, जरूरत न होने पर लाइटें बंद करने वाले सेंसर, बिजली बचाने वाली स्मार्ट लिफ्ट्स और बिजली के उपयोग को प्रबंधित करने की एक उन्नत प्रणाली लगाई गई है। जल्द ही अन्य भवन भी हो जाएंगे पूरी तरह तैयार शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मंगलवार को नवनिर्मित कर्तव्य भवन-3 के सभागार में पत्रकारों से चर्चा में बताया कि अगले महीने तक कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 भी बनकर तैयार जाएंगे। दोनों का काम लगभग अंतिम चरण में है। प्रस्तावित अन्य सात भवन भी अप्रैल 2027 तक बनकर तैयार हो जाएंगे। इस परियोजना पर करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मंत्रालयों के लिए बनाए जा रहे इन भवनों में तकनीक, सुरक्षा व पर्यावरण अनुकूलता का पूरा ख्याल रखा गया है। पूरे भवन की निगरानी के लिए एक कमांड सीसीटीवी सेंटर भी बनाया गया है,जहां से परिसर व अंदर के गलियारों पर पैनी नजर रखी जाएगी। खास बात यह है कि केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों के लिए नवनिर्मित इन नए भवनों को पहले कामन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) नाम दिया गया था। इन कर्तव्य भवनों को मेट्रो लाइन से जोड़ने के लिए इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन से एक नई लाइन बनाने का प्रस्ताव किया गया है। मौजूदा भवन हैं 75 साल पुराने मंत्री खट्टर ने एक सवाल के जवाब में बताया कि मंत्रालयों के नए और अत्याधुनिक भवनों को बनाने की जरूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि जो मौजूदा भवन हैं वह 1950 से 1970 के बीच बनाए गए थे। ये सभी पुराने हो गए है, इनका सालाना रखरखाव काफी महंगा हो गया था। गौरतलब है कि मौजूदा समय में केंद्र सरकार के पास करीब 55 मंत्रालय और 93 विभाग मौजूद है। ये अभी नार्थ और साउथ ब्लाक के साथ कृषि भवन, शास्त्री भवन, उद्योग व निर्माण भवन आदि शामिल है। नार्थ और साउथ ब्लाक होगा पूरा खाली कर्तव्य भवनों के तैयार होते ही नार्थ और साउथ ब्लाक में मौजूद सभी मंत्रालयों को वहां से स्थानांतरित कर दिया जाएगा। दोनों ही ब्लाक को खाली कराकर इनमें भारत संग्रहालय बनाया जाएगा। इस दौरान ढांचे के साथ किसी तरह का छेड़छाड़ किए बगैर इसमें महाभारत काल से लेकर देश के आज तक के इतिहास, कला व संस्कृति आदि को प्रदर्शित किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि सेंट्रल विस्टा परियोजना का यह काम दिसंबर 2031 तक पूरा कर लिया जाएगा। इनमें ही प्रधानमंत्री के लिए नए आवास व कार्यालय भी बनाए जा रहे है। इसके लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कर्तव्य भवन-3 : एक नजर में ⦁ कुल क्षेत्रफल- 1.50 लाख वर्ग मीटर ⦁ भूतल क्षेत्रफल- 40 हजार वर्ग मीटर ⦁ कुल तल- दो भूतल सहित कुल दस तल ⦁ पार्किंग क्षमता- 600 कारों की ⦁ बैठने की व्यवस्था- वर्क हाल और केबिन ⦁ कॉमन सुविधा- योगा, क्रेच,मेडिकल रूम, कैफे, मल्टीपरपज हॉल ⦁ 24 मुख्य कांफ्रेंस हाल, क्षमता- प्रत्येक में 45 व्यक्तियों के बैठने की ⦁ 26 छोटे कांफ्रेंस हाल, क्षमता-प्रत्येक में 25 व्यक्तियों के बैठने की ⦁ 67 मीटिंग रूम या वर्क हाल, प्रत्येक की क्षमता नौ लोगों की ⦁ लिफ्ट- 27, सेंट्रलाइज एयर कंडीशन, स्वचालित सीढियां- दो जल्द ही टूटेंगे कृषि, उद्योग, निर्माण और शास्त्री भवन सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत जल्द ही कृषि भवन, उद्योग भवन, शास्त्री भवन और निर्माण भवन टूटेंगे। इनमें मौजूद सभी मंत्रालयों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन दौरान कुछ मंत्रालय अगले दो साल के लिए किराए भवन में भी शिफ्ट हो रहे है। माना जा रहा है कि जैसे ही नए कर्तव्य भवनों का निर्माण होगा, वैसे-वैसे इन सभी मंत्रालयों और विभागों को इनमें शिफ्ट किया जाएगा।  

‘नोटिस निकाल देना’: CJI की टिप्पणी से हड़कंप, वरिष्ठ वकीलों की पैरवी पर लगी लगाम

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई ने बुधवार को कहा कि अगले सोमवार (11 अगस्त) से कोर्ट संख्या 1 में कोई भी वरिष्ठ वकील मौखिक रूप से मामलों का उल्लेख नहीं कर सकेंगे। सीजेआई गवई ने यह पाबंदी तब लगाई, जब वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी आज एक मामले का मौखिक उल्लेख करने के लिए उनकी अदालत में खड़े हुए थे। कोर्टरूम में सिंघवी के खड़ा होते और मामले का उल्लेख करने की मांग करते ही सीजेआई ने कहा कि जूनियर्स को भी मौका दिया जाना चाहिए। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश गवई ने कोर्ट मास्टर को इस संबंध में एक नोटिस जारी करने का भी निर्देश दिया। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस गवई ने कहा, "नोटिस निकाल देना… अब से किसी भी वरिष्ठ वकील को मामले का मौखिक उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सोमवार से किसी भी नामित वरिष्ठ वकील को मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जूनियर वकीलों को ऐसा करने का अवसर दिया जाना चाहिए।" अगले सोमवार से होगा नियम प्रभावी सीजेआई ने कहा कि वह इस नियम को अगले सोमवार से प्रभावी कर रहे हैं, ताकि सभी को तब तक इसकी सूचना मिल सके। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "वरिष्ठ अधिवक्ताओं से बहुत बड़ी मांग है कि किसी भी मामले का उल्लेख अब वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा नहीं किया जाए।" सिंघवी बोले- समान रूप से हो लागू दरअसल, जब सिंघवी कोर्ट नंबर 1 यानी सीजेआई की अदालत में किसी मामले का मौखिक उल्लेख करने के लिए उठे, तो सीजेआई गवई ने उनसे कहा, "एक बड़ी मांग है, हमें वरिष्ठ वकीलों द्वारा मौखिक उल्लेख करना बंद करना चाहिए।" इस पर सिंघवी ने कहा, "मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं, अगर इसे समान रूप से लागू किया जाता है।" इस पर CJI ने कहा, “हम इसे लागू करेंगे। किसी भी वरिष्ठ वकील को उल्लेख करने की अनुमति नहीं होगी। जूनियर को मौका देना चाहिए। सोमवार से, कोर्ट नंबर 1 में, किसी भी वरिष्ठ वकील को मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं होगी। कोई नामित वरिष्ठ वकील नहीं। सोमवार से हम इसका पालन करेंगे। ताकि किसी को अचरज न हो।” लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, उसी दौरान सिंघवी ने सुझाव दिया, "इसे सभी अदालतों में एक समान लागू किया जा सकता है।" इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह इसे केवल अपनी पीठ में ही लागू कर सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "कम से कम कोर्ट नंबर 1 में तो इसकी अनुमति नहीं होगी। जूनियर्स को अवसर मिलने चाहिए।"  

बेंजामिन नेतन्याहू के बेटे ने उठाया तख्तापलट का मुद्दा, ट्वीट से गरमाया माहौल

तेल अवीव इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बेटे ने एक ऐसा ट्वीट किया है, जिससे देश में हलचल मच गई है। इजरायली पीएम के बेटे ने याएर नेतन्याहू ने एक ट्वीट किया, जिसमें दावा किया गया कि सेना प्रमुख एयाल जामिर देश में तख्तापलट करने की योजना बना रहे थे। इसके अलावा उन्होंने कहा कि गाजा पर इजरायल के पूर्ण नियंत्रण का भी उन्होंने विरोध किया है। दरअसल जामिर ने कहा था कि गाजा पर पूरी तरह नियंत्रण करने का प्लान इजरायल डिफेंस फोर्सेज को फंसाने का एक जाल है। हिब्रू मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार नेतन्याहू जूनियर की पोस्ट पर विवाद छिड़ गया है। याएर नेतन्याहू के पास कोई सरकारी पद नहीं है। ऐसे में उनकी तरफ से सेना प्रमुख पर तख्तापलट की साजिश रचने का आरोप लगाने से गहरा विवाद हो गया है। उन्होंने कहा कि जामिर चाहते थे कि विद्रोह कर दिया जाए और इजरायल में सैन्य तख्तापलट हो जाए। वहीं सेना प्रमुख एयाल जामिर ने ऐसे आरोपों का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा कैसे आप कह सकते हैं। आपको इससे क्या मिलेगा? आप मेरे ऊपर हमले क्यों कर रहे हैं। आखिर जंग के बीच ऐसा करने का क्या मकसद है। अब इस मामले में बेंजामिन नेतन्याहू का भी जवाब आया है। उन्होंने सेना प्रमुख को संबोधित करते हुए कहा कि मीडिया में अपना पद छोड़ने की धमकी न दें। मैं हर बार आपकी ऐसी धमकी को स्वीकार नहीं कर सकता। यदि हम आपके प्लान को स्वीकार नहीं करेंगे तो आपको जाना होगा। मेरा बेटा 33 साल का है और वह अब बड़ा हो गया है। दरअसल खबरें आती रही हैं कि जामिर की इजरायली कैबिनेट के कई मंत्रियों से असहमति रही है। गाजा पर पूरी तरह कब्जा करने के प्लान का भी विरोध करते रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को भी कहा था कि यदि हमने गाजा पर फुल कंट्रोल की कोशिश की तो हमास की कैद में रखे गए 20 बंधकों को नुकसान होगा, जो फिलहाल जीवित हैं और रिहाई का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल मंगलवार को बेंजामिन नेतन्याहू कैबिनेट की मीटिंग थी। तीन घंटे चली इस मीटिंग में सेना की राय और कब्जे के प्लान पर चर्चा हुई। अब इसे लेकर वोटिंग कराने की तैयारी है। नेतन्याहू कब्जे के प्लान पर आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं। यह मांग इजरायल में लंबे समय से होती रही है। इस पर जामिर का कहना था कि आप गाजा में एक जाल बिछा रहे हैं। इससे बंधकों की जिंदगी पर खतरा होगा और सेना को भी इससे बड़ा नुकसान होने की आशंका है।  

पानी-पानी हुआ सिंधु डेल्टा: 80% जलाशय सूखे, 12 लाख विस्थापन की त्रासदी, कौन है जिम्मेदार?

कराची पड़ोसी देश पाकिस्तान इन दिनों एक कुदरती कहर की मार झेल रहा है। देश के दक्षिणी हिस्से में सिंधु डेल्टा उजड़ चुका है। हालात ये हैं कि वहां से लोगों का पलायन जारी है और बसे-बसाए करीब 40 गांव वीरान पड़ गए हैं और इसी के साथ सिन्धु डेल्टा में एक बसी बसाई सभ्यता उजड़ चुकी है। दरअसल, ये दर्दनाक कहानी है सिंध प्रांत के दक्षिणी छोर पर अरब सागर से सटे सिंधु डेल्टा में बसे उन गांवों की जहां के लोग परंपरागत रूप से खेतीबारी करने और मछली पकड़ने का काम करते थे लेकिन हाल के कुछ वर्षों में समुद्री जल ने वहां अतिक्रमण किया है और सबकुछ नष्ट कर दिया है। अब इन गांवों से करीब 12 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। उनमें से अधिकांश कराची में आकर बसे हैं। पिछले दिनों कराची पलायन करने वाले हबीबुल्लाह खट्टी खारो चान कस्बे के अपने पुश्तैनी गांव मीरबहार में अपनी मां की कब्र पर उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे थे, क्योंकि उनका गांव अब समंदर की आगोश में समाता जा रहा है। जहां उनकी मां की कब्र है, वहां अब समुद्री नमक का साम्राज्य है। जब वह अपनी मां की कब्र पर पहुंचे तो उनके पैरों पर नमक की मोटी चादर चढ़ चुकी थी। यह गांव सिंधु डेल्टा में उस जगह से करीब 15 किलोमीटर दूर है, जहां सिंधु नदी अरब सागर में मिलती है। डेल्टा से करीब 12 लाख लोग पलायन कर चुके हबीबुल्लाह के मुताबिक, खारो चान में 40 गांव हुआ करते थे लेकिन बढ़ते समुद्री जल के कारण अब अधिकांश लुप्त हो चुके हैं। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार उस कस्बे की आबादी 1981 में 26000 के करीब थी जो 2023 में घटकर 11,000 रह गई है। हबीबुल्लाह खट्टी अब अपने परिवार के साथ कराची में बसने जा रहे हैं। उनकी तरह इस डेल्टा से करीब 12 लाख लोगों ने पलायन किया है। थिंक टैंक जिन्ना इन्स्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो दशकों में सिंधु डेल्टा से करीब 12 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। पानी का बहाव 80 फीसदी कम गया यूएस-पाकिस्तान सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज़ इन वॉटर द्वारा 2018 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, सिंचाई नहरों, जलविद्युत बांधों और हिमनदों व बर्फ पिघलने पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण 1950 के दशक से अब तक सिंधु डेल्टा में पानी का बहाव 80 फीसदी कम हो चुका है। इस कारण से डेल्टा में समुद्री जल का विनाशकारी प्रवेश हुआ है और आसपास के गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1990 के बाद से डेल्टा के पानी की लवणता लगभग 70% बढ़ गई है, जिससे वहां फसलें उगाना अब असंभव हो गया है और झींगा मछली और केकड़े की प्रजाति नष्ट हो चुकी है। भारत ने भी सिंधु जल समझौता स्थगित किया तिब्बत से शुरू होकर, सिंधु नदी पूरे पाकिस्तान में बहने से पहले कश्मीर से होकर बहती है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया है। इसकी वजह से भी सिंदु में पानी का बहाव कम हो गया है। यह नदी और इसकी सहायक नदियाँ देश के लगभग 80% कृषि भूमि की सिंचाई करती हैं और लाखों लोगों की आजीविका का साधन हैं। सिंधु नदी द्वारा समुद्र में मिलने से पहले दोनों छोरे पर जमा किए गए समृद्ध तलछट से निर्मित यह डेल्टा कभी खेती, मछली पकड़ने, मैंग्रोव और वन्यजीवों के लिए आदर्श हुआ करता था।  

पाकिस्तानी खतरे को लेकर CDS की चेतावनी: सेना को 365 दिन सतर्क रहने के निर्देश

नई दिल्ली चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने एक बार फिर पाकिस्तान की ओर से होने वाले हमले के लेकर भारतीय सेना (Indian Army) को अलर्ट किया है। CDS अनिल चौहान ने कहा कि हमें 24×7 और 365 दिन चौंकन्ना रहने होंगे। सीडीएस ने यह भी कहा कि भारतीय सेना के पास अत्यधिक दूरी पर स्थित स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को भेदने की क्षमता होनी चाहिए। दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के ‘पूर्ण-आयामी प्रतिरोध सिद्धांत’ को चुनौती देने की जरूरत है। सीडीएस ने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवादी पाकिस्तान के किसी भी हिस्से में छिप नहीं सकते। वार्षिक ‘ट्राइडेंट’ व्याख्यान श्रृंखला के उद्घाटन सत्र में उन्होंने दोहराया कि सैन्य तैयारी अत्यंत उच्च स्तर की होनी चाहिए, चौबीसों घंटे और साल के 365 दिन तैयार रहने की जरूरत है। उन्होंने जवानों से कहा कि युद्ध और शांति के बीच बहुत कम अंतर है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि आज के समय में यह अंतर धुंधला हो रहा है और वे एक दूसरे में विलीन हो रहे हैं। सीडीएस ने कहा, ‘हमें अपरंपरागत और परमाणु क्षेत्रों के बीच पारंपरिक अभियानों के लिए अधिक स्थान बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी पाकिस्तान की धरती पर कहीं भी छिप नहीं सकते। जनरल अनिल चौहान ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय सेना के पास अत्यधिक दूरी पर स्थित स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को भेदने की क्षमता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली किसी भी हिंसात्मक कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा। चाहे वह राज्य के अंदर से किया जाए या राज्य के बाहर से किया जाए, और यह पहला मानदंड है, जो हमें समझना होगा। यह हम सभी के लिए नया मानदंड है। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि एक और सैन्य मानक यह है कि अब परमाणु नीति पर अधिक निर्भरता होगी, जो पारंपरिक सैन्य अभियानों की बुनियाद बन गई है। उन्होंने कहा कि एक और मानक यह होगा कि भारत को अपने विरोधियों के मुकाबले तकनीकी रूप से आगे रहना होगा।