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AI आंगनबाड़ी की शुरुआत: टेक्नोलॉजी और सुविधा में प्राइवेट स्कूलों को दे रही टक्कर

नई दिल्ली भारत के ग्रामीण इलाकों में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की एंट्री हो चुकी है। बचपन से ही बच्चे AI का इस्तेमाल और महत्व समझें, इसके लिए AI की एंट्री आंगनबाड़ी के जरिए हुई है। महाराष्ट्र के नागपूर जिले की हिंगना तहसील के वडधामना गांव में AI पावर्ड आंगनबाड़ी केंद्र की शुरुआत की गई है। यह नागपूर से करीब 18 किलोमीटर दूर है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस आंगनबाड़ी केंद्र का उद्घाटन किया था। इसमें ऐसी-ऐसी सुविधाएं हैं जो प्राइवेट स्कूलों भी टक्कर दे सकती हैं। AI आंगनबाड़ी में ये सुविधाएं इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस AI आंगनबाड़ी को नागपुर जिला परिषद की 'मिशन बाल भरारी' पहल के तहत शुरू किया गया है। यहां के बच्चे पहले बाकी आंगनबाड़ियों की तरह ही स्लेट और चॉक से पढ़ा करते थे, लेकिन अब डिजिटल क्लासरूम आ चुका है। यहां पर वर्चुअल रियलिटी हेडसेट, AI से लैस स्मार्टबोर्ड, टैबलेट और इंटरैक्टिव डिवाइस से बच्चे पढ़ेंगे, उनकी क्रिएटिविटी भी बढ़ेगी। पहले यहां पर बच्चों की संख्या 10 के आसपास होती थी, लेकिन अब बच्चे डबल हो गए हैं, संख्या 25 तक भी पहुंच गई है। बच्चों की परफॉर्मेंस डिजिटल डिवाइसेज में रिकॉर्ड होगी बच्चों के लिए ये बिल्कुल नया एक्सपीरियंस है। स्मार्ट क्लासरूम में बैठकर पढ़ना उन्हें बोर नहीं करता है। हर क्लास में स्लो और फास्ट लर्नर्स होते हैं, उनके हिसाब से ही यहां पर लेसन पढ़ाए जा थे हैं। यहां पर बच्चे ड्रॉइंग भी स्मार्ट डिवाइस पर करते हैं। उनका परफॉर्मेंस भी डिजिटल डिवाइसेज में रिकॉर्ड होता है। इससे बच्चों की इमेजिनेशन बढ़ेगी, वे क्रिएटिव होंगे और पढ़ाई में उनका मन लगने लगेगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग मिली वडधामना गांव की इस आंगनबाड़ी में Wi-Fi और CCTV कैमरा भी लगे हैं। यहां पर लगे डिवाइसेज की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कैमरा लगे हैं और Wi-Fi इसलिए लगा है, ताकि डिवाइस इंटरनेट से कनेक्टेड रहें। आंगनबाड़ी में काम रहे कार्यकर्ताओं को खास तरह की ट्रेनिंग दी गई है, ताकि वे स्मार्ट डिवाइस और AI टूल्स का इस्तेमाल कर सकें। बच्चों की हेल्थ भी ट्रैक करेगा AI यहां AI और स्मार्ट डिवाइसेज की मदद से केवल पढ़ाई ही नहीं हो रही, बल्कि बच्चों के पोषण और विकास को भी मॉनिटर किया जा रहा है। सरकार के 'पोषण ट्रैकर' प्लेटफॉर्म को जोड़ा गया है, इससे बच्चों के खाने और फिजिकल हेल्थ का रियल टाइम डेटा मिल सकेगा। नतीजतन, बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। यहां पर शिक्षा और स्वास्थ्य, दोनों के लिए AI मददगार होगा।

बांके बिहारी प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: फंड जेब में क्यों चाहिए?

नई दिल्ली वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर और उसके रखरखाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। शीर्ष न्यायालय ने मंदिर के प्रबंधन और उसके आस-पास के क्षेत्र के विकास पर निगरानी के लिए सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का संकेत दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी प्रबंधन कमेटी से तीखे सवाल भी पूछे और सख्त टिप्पणी कीा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भगवान सबके हैं, आप क्यों चाहते हैं सारा फंड आपकी पॉकेट में जाए? सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि 15 मई को उत्तर प्रदेश सरकार को कॉरिडोर बनाने के लिए मंदिर के फंड के इस्तेमाल करने की दी गई अनुमति के आदेश को वापस लिया जा सकता है। सुनवाई मंगलवार, 5 अगस्त की सुबह 10:30 तक के लिए स्थगित कर दी गई है। मंदिर मैनेजमेंट कमेटी ने मंदिर के प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार के अध्यादेश का विरोध करते हुए याचिका दाखिल की है। कमेटी ने 15 मई को आए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी विरोध किया है जिसमें राज्य सरकार को बांके बिहारी कॉरिडोर बनाने के लिए मंदिर के फंड के इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी। जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने मंदिर कमेटी से तीखे सवाल किए। कोर्ट ने कहा, ‘मंदिर निजी हो सकता है, लेकिन देवता सबके हैं. वहां लाखों श्रद्धालु आते हैं. मंदिर का फंड श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़े विकास में क्यों नहीं इस्तेमाल हो सकता? आप क्यों चाहते हैं कि सारा फंड आपके पॉकेट में ही जाए?’ सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के कानून को हाई कोर्ट में चुनौती देनी चाहिए। 15 मई का आदेश वापस ले सकता है सुप्रीम कोर्ट? लगभग 50 मिनट चली सुनवाई के बाद जजों ने इस बात का संकेत दिया कि 15 मई के आदेश को वापस लिया जा सकता है। फिलहाल मंदिर के प्रबंधन के लिए रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जा सकती है। इसमें जिलाधिकारी को भी रखा जाएगा। क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की भी उसके आस-पास के विकास में मदद ली जाएगी। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए। इसके लिए उचित सुविधाओं का विकास जरूरी है। 15 मई के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? कोर्ट के सख्त सवालों के जवाब में दीवान ने कहा, ‘असल बात यह है कि हमें सुने बिना ऐसा आदेश सुप्रीम कोर्ट से कैसे आया? मामला कुछ और था, उसमें अचानक आदेश आ गया कि मंदिर का फंड कॉरिडोर बनाने के लिए लिया जाए। इससे सहमति जताते हुए कहा कि किसी जगह का विकास सरकार की जिम्मेदारी है। अगर उसे भूमि अधिग्रहण करना या तो वह ऐसा अपने पैसों से कर सकती है। मंदिर में धार्मिक गतिविधियों और मैनेजमेंट को लेकर दो गुटों में विवाद याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि बांके बिहारी मंदिर एक निजी मंदिर है। उसमें धार्मिक गतिविधियों और मैनेजमेंट को लेकर 2 गुटों में विवाद था। राज्य सरकार ने बिना अधिकार उसमें दखल दिया. वह मामले को सुप्रीम कोर्ट ले आई और कॉरिडोर के लिए मंदिर के फंड के इस्तेमाल का आदेश ले लिया। इसके बाद जल्दी-जल्दी एक अध्यादेश भी जारी कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि मंदिर की स्थापना करने वाले और सदियों से उसे संभाल रहे गोस्वामी प्रबंधन से बाहर हो गए।

सिम्बेक्स अभ्यास ने बनाया रिकॉर्ड, SCS में भारत-सिंगापुर की रणनीतिक साझेदारी मजबूत

नई दिल्ली  भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य नौसेना (RSN) ने 28 जुलाई से एक अगस्त तक वार्षिक सिंगापुर-भारत समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास (सिमबेक्स) किया। रक्षा मंत्रालय ने यहां बताया कि अभ्यास के तहत इस वर्ष पहले आरएसएस सिंगापुर-चांगी नौसैनिक अड्डे पर तटीय चरण और उसके बाद दक्षिण चीन सागर (SCS) के दक्षिणी छोर पर समुद्री चरण का आयोजन किया गया। उसने बताया कि समुद्री चरण में दोनों नौसेनाओं के पोत और सिंगापुर गणराज्य वायु सेना (RSAF) के विमान शामिल हुए। आरएसएन ने ‘फोर्मिडेबल' (दुर्जेय) श्रेणी के फ्रिगेट ‘RSS सुप्रीम' और ‘विक्ट्री' (विजयी) श्रेणी के मिसाइल युद्धपोत ‘आरएसएस विजिलेंस' (MV मेंटर) को तैनात किया। भारतीय नौसेना ने शिवालिक श्रेणी के फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा के साथ अभ्यास में भाग लिया। आरएसएएफ के एक एस70बी नौसैनिक हेलीकॉप्टर, दो फोकर-50 समुद्री गश्ती विमान और दो एफ-15एसजी लड़ाकू विमान भी इस अभ्यास में शामिल हुए। सिम्बेक्स 2025 का सफल आयोजन भारतीय नौसेना और आरएसएन के बीच स्थायी साझेदारी को रेखांकित करता है। आरएसएस के कमांडिंग ऑफिसर सुप्रीम लेफ्टिनेंट कर्नल आरोन कोह ने कहा, ‘‘सिम्बेक्स सिंगापुर गणराज्य की नौसेना और भारतीय नौसेना के बीच दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों का प्रमाण है। यह अभ्यास अभियानगत दक्षताओं को निखारने, आपसी समझ बढ़ाने और लोगों के बीच स्थायी संबंध बनाने की दिशा में नौसैन्य कर्मियों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान मंच के रूप में वर्षों से कार्य करता रहा है।'' सिम्बेक्स का पहली बार 1994 में आयोजन किया गया था। इस साल यह इस अभ्यास का 32वां संस्करण था। यह आरएसएन के सबसे लंबे समय से जारी द्विपक्षीय समुद्री अभ्यासों में से एक है और भारत द्वारा किसी अन्य देश के साथ किया जाने वाला सबसे लंबा निरंतर द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है।    

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में आई रफ्तार, मुंबई-अहमदाबाद यात्रा होगी महज 2 घंटे की

मुंबई  देश में पहली बुलेट ट्रेन (Bullet Train In India) चलाने की तैयारियां जोरों पर हैं और इससे जुड़े तमाम काम तेजी से पूरे किए जा रहे हैं. मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली इस पहली बुलेट ट्रेन (Mumbai Ahmedabad Bullet Train) को लेकर अब एक बड़ा अपडेट सामने आया है. जी हां, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने रविवार को कहा कि, 'भारत की पहली बुलेट ट्रेन सेवा बहुत जल्द शुरू होगी और इससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय करीब दो घंटेरह जाएगा.'  जल्द शुरू होने वाली है बुलेट ट्रेन केंद्रीय रेलवे मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने रविवार को गुजरात के भावनगर टर्मिनस से अयोध्या एक्सप्रेस, रीवा-पुणे एक्सप्रेस और जबलपुर-रायपुर एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई और इस कार्यक्रम के दौरान संबोधित करते हुए Bullet Train को लेकर ये बड़ा अपडेट दिया है. उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन से मुंबई से अहमदाबाद के बीच की दूरी महज 2 घंटे और 7 मिनट में पूरी होगी. इस बीच इसकी शुरुआत को लेकर टाइमलाइन के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत जल्दी चालू होने वाली है और इसे लेकर तेजी के साथ काम चल रहा है. बता दें कि रेलवे मिनिस्ट्री (Ministry Of Railway) की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर लगातार Bullet Train Project को लेकर युद्धस्तर पर जारी काम के बारे में अपडेट शेयर किया जाता रहता है. बीते दिनों ही एक पोस्ट में रेलवे की ओर से बताया गया था कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR Corridor) पर एक बड़े निरंतर सुरंग खंड का काम सफलता पूर्वक पूरा कर लिया गया है, जो उस 21 किलोमीटर की सुरंग का एक हिस्सा है, जिससे होकर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन गुजरेगी.  अमृत भारत में  Vande Bharat के फीचर कार्यक्रम के दौरान रेल मंत्री ने कहा कि अमृत भारत ट्रेन (Amrit Bharat Train) नई चालू हुई है और अभी करीब 8 गाड़ियां ऐसी चलाई जा चुकी हैं. उन्होंने कहा कि अमृत भारत गाड़ी में वंदे भारत जैसे फीचर हैं, लेकिन ये एकदम कम किराये की गाड़ी, एकदम कम टिकट वाली ट्रेन है. उनके मुताबिक, पोरबंदर-राजकोट नई डेली ट्रेन जल्दी चालू होगी. राणावाव स्टेशन पर नई कोच मेंटिनेंस फैसिलिटी, सरदिया-वासजालिया नई लाइन, फिर भद्रकाली गेट, पोरबंदर शहर में नया फ्लाईओवर, भावनगर में 2 नए गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल और एक नया पोर्ट बनने वाला है.  वंदे भारत स्लीपर भी जल्द  इसके साथ ही अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे का सेफ्टी पर बहुत फोकस है, साफ-सफाई पर विशेष ध्यान है. उन्होंने कहा कि Indian Railway का हर तरीके से विकास हो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का ऐसा प्रयास है. इसके साथ ही एक और बड़ा अपडेट जारी करते हुए उन्होंने बताया कि बहुत जल्द ही वंदे भारत स्लीपर (Vande Bharat Sleeper Train) भी आने वाली है.  11 साल में रेलवे में बड़ा परिवर्तन रेल मंत्री ने पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय रेलवे में हुए बदलावों के बारे में बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का रेलवे के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव है. उनका ध्यान हमेशा इस बात पर रहता है कि रेलवे को कैसे विकसित करें, कैसे नई टेक्नोलॉजी लाएं और इसका कैसे विस्तार करें. अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, बीते 11 वर्षों में रेलवे में बहुत नए काम चालू किए गए हैं और बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है. फिलहाल, 1300 स्टेशनों का नवनिर्माण किया जा रहा है, जो आज की तारीख में दुनिया में स्टेशन के नवनिर्माण का सबसे बड़ा काम है. इसके अलावा 11 वर्षों में 34000 किमी नए रेलवे ट्रैक बनाए गए हैं, डेली करीब 12 किमी नए ट्रैक बनते हैं, जोकि इतिहास में कभी नहीं हुआ.

SPG की विशेष टीम में शामिल हुईं अदासो कपेसा, अब संभालेंगी देश के पीएम की सुरक्षा

नई दिल्ली हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही है, जिसमें उनके सुरक्षा घेरे में पहली बार एक महिला अफसर को देखा गया है। यह महिला अफसर हैं अदासो कपेसा (Adaso Kapesa), जो अब स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) की उस टीम का हिस्सा हैं, जो देश के प्रधानमंत्री की सबसे करीबी सुरक्षा करती है। मणिपुर के एक छोटे से गांव से निकलकर एसपीजी जैसी प्रतिष्ठित इकाई में जगह बनाना, उनके अदम्य साहस और कड़ी मेहनत का प्रतीक है। आइए जानते हैं उनके बारें में विस्तार से। मणिपुर के छोटे गांव से शुरू हुआ सफर अदासो कपेसा मणिपुर के सेनापति ज़िले के कैबी गांव की रहने वाली हैं। एक सामान्य पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी आंखों से ओझल नहीं होने दिया। परिवार और समाज के सहयोग से उन्होंने अपने सफर की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने सपनों को आकार दिया। इससे पहले पिथौरागढ़ में थी तैनात एसपीजी में शामिल होने से पहले अदासो कपेसा सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 55वीं बटालियन में पिथौरागढ़ में इंस्पेक्टर (जनरल ड्यूटी) के पद पर कार्यरत थीं। वहाँ भी उन्होंने अपने कार्य से उच्च स्तर की प्रतिबद्धता और अनुशासन का परिचय दिया, जिससे उनकी पहचान एक सशक्त महिला अधिकारी के रूप में बनी। कैसे हुआ एसपीजी में सिलेक्शन  एसपीजी यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप में चयन भारत के सबसे कठिन चयन प्रोसेस में से एक है। अदासो को डेप्युटेशन पर एसपीजी में भेजा गया, जहाँ उन्होंने अत्यंत कठोर कमांडो प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के दौरान उनका प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि उन्हें प्रधानमंत्री की सुरक्षा टीम में नियुक्त किया गया—एक ऐतिहासिक उपलब्धि। महिलाओं के लिए प्रेरणा अदासो कपेसा अब प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात होने वाली पहली महिला अफसर बन गई हैं। यह उपलब्धि केवल मणिपुर या उनके गांव की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की बेटियों के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि लगन, साहस और मेहनत से किसी भी ऊँचाई को छूना संभव है।  

US में नई सॉलिसिटर जनरल मथुरा श्रीधरन को बिंदी लगाने पर ट्रोल किया गया, भारतीय समुदाय ने किया समर्थन

वाशिंगटन अमेरिका में बढ़ता गन कल्चर पहले ही चिंता का विषय बना हुआ है और अब वहां नफरती सोच भी पनप रही है. भारतीय मूल की महिला मथुरा श्रीधरन को अमेरिका में सिर्फ इस वजह से ट्रोल किया जा रहा है कि बिंदी लगाती हैं और उन्हें ओहियो स्टेट का सॉलिसिटर जनरल चुना गया है. ओहियो के अटॉर्नी जनरल डेव योस्ट ने बीती 31 जुलाई को श्रीधरन की नियुक्ति की थी.  ओहियो की सॉलिसिटर जनरल चुनी गईं इसके बाद से मथुरा श्रीधरन के खिलाफ नस्लवादी और अपमानजनक टिप्पणियों की बाढ़ सी आ गई है. ट्रोल सवाल कर रहे हैं कि यह पद किसी अमेरिकी को क्यों नहीं मिला. ओहियो के अटॉर्नी योस्ट ने कहा कि मथुरा श्रीधरन 12वीं सॉलिसिटर जनरल के लिए उनकी पसंद हैं. एक्स पर उनकी नियुक्ति का ऐलान करते हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा कि वह बहुत प्रतिभाशाली हैं और बेतहर ढंग से राज्य की सेवा करेंगी. डेव योस्ट ने लिखा, 'मथुरा बहुत प्रतिभाशाली हैं. उन्होंने पिछले साल SCOTUS में अपनी बहस जीती थी. जिन दोनों SGs (फ्लावर्स और गेसर) के अधीन उन्होंने काम किया था, उन्होंने उनकी सिफ़ारिश की थी. जब मैंने उन्हें पहली बार नियुक्त किया था, तब मैंने उनसे कहा था कि मुझे उनसे बहस करने की ज़रूरत है. उन्हें प्रमोट करने को लेकर उत्साहित हूं. वह ओहायो की अच्छी सेवा करेंगी.' बिंदी लगाने को लेकर ट्रोलिंग  रिपोर्ट के मुताबिक सॉलिसिटर जनरल के पद पर पहुंचने के बावजूद भी श्रीधरन को भारतीय होने और बिंदी लगाने के कारण नस्लवादी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा. एक रिप्लाई में ट्रोल ने लिखा, 'आप किसी ऐसे व्यक्ति को क्यों चुनेंगे जो अमेरिकी नहीं है, इतने अहम रोल के लिए?' कुछ लोग उनके बिंदी के लाल रंग पर भी सवाल उठा रहे हैं तो कुछ ट्रोल उनकी योग्यता को लेकर भी बयानबाजी कर रहे हैं. इस ट्रोलिंग के बाद ओहायो के अटॉर्नी जनरल डेव योस्ट ने ट्रोल्स को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने साफ किया है कि कुछ लोगों को गलतफहमी है कि मथुरा अमेरिकी नहीं हैं, लेकिन वह पूरी तरह से अमेरिकी नागरिक हैं. उनकी शादी भी एक अमेरिकी नागरिक से हुई है. योस्ट ने आगे लिखा, 'अगर उनका नाम या रंग से आपको दिक्कत है, तो समस्या उनसे या उनकी नियुक्ति से नहीं बल्कि आपके सोच में है.  कौन हैं मथुरा श्रीधरन? मथुरा श्रीधरन एक भारतीय मूल के अमेरिकी वकील हैं जो वर्तमान में ओहियो के अटॉर्नी जनरल कार्यालय में डिप्टी सॉलिसिटर जनरल के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें राज्य के अटॉर्नी जनरल डेव योस्ट ने 12वें सॉलिसिटर जनरल के रूप में प्रमोट किया है. इससे पहले, श्रीधरन दो साल से राज्य के अटॉर्नी जनरल कार्यालय में ओहियो के दसवें कमांडमेंट सेंटर की डायरेक्टर के रूप में भी काम कर चुकी हैं. फेडरल सोसायटी की वेबसाइट के मुताबिक ओहियो सॉलिसिटर कार्यालय में शामिल होने से पहले, श्रीधरन ने सेकंड सर्किट के लिए अमेरिकी अपील न्यायालय के जज स्टीवन जे मेनाशी और न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के लिए अमेरिकी जिला न्यायालय के जज डेबोरा ए बैट्स के लिए क्लर्क के तौर पर काम किया था. श्रीधरन ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान में साइंस ग्रेजुएट किया है और प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से स्नातक की उपाधि हासिल की और 2008 में इकोनॉमिक्स का भी पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने एमआईटी से इन्हीं विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री भी हासिल की. साल 2015 में, श्रीधरन ने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ में कानून की पढ़ाई की और 2018 में ग्रेजुएशन की है.

पर्यटकों और स्थानीयों को राहत: जम्मू-कश्मीर में बनेंगी दो नई फोरलेन सड़कें

जम्मू जम्मू-कश्मीर के लोगों और पर्यटकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने राज्य में दो नई फोरलेन सड़कों को मंजूरी दे दी है। इन सड़कों के बन जाने से ना सिर्फ सफर आसान और तेज़ होगा, बल्कि पर्यटन और सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। सांबा से उधमपुर तक फोरलेन सड़क पहली परियोजना सांबा से उधमपुर तक 43 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क बनाने की है। इस पर करीब 7418 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस सड़क के बनने से पठानकोट से उधमपुर का सफर आधा हो जाएगा। फिलहाल इस रास्ते में 4-5 घंटे लगते हैं, लेकिन नई सड़क से यह दूरी महज 2 घंटे में तय की जा सकेगी। इससे श्रीनगर की ओर जाने वालों को जम्मू की ओर घूमकर जाने की जरूरत नहीं होगी, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। यह सड़क भारतमाला परियोजना के तहत बनाई जा रही है। कठुआ से डोडा तक फोरलेन सड़क दूसरी बड़ी परियोजना कठुआ से डोडा तक फोरलेन सड़क बनाने की है। यह सड़क कठुआ-बसोहली-बनी-भद्रवाह होते हुए डोडा पहुंचेगी। कुल खर्च लगभग 28,679 करोड़ रुपये आएगा। यह सड़क लखनपुर से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से जुड़ेगी। अभी यह सड़क राज्य हाईवे के तौर पर काम कर रही है, लेकिन फोरलेन बनने से इसकी हालत और सुविधा बेहतर होगी। भद्रवाह से चंबा तक डबललेन सड़क इसके अलावा, भद्रवाह से हिमाचल प्रदेश के चंबा तक 130 किलोमीटर लंबी डबललेन सड़क भी बनाई जाएगी। इस प्रोजेक्ट की लागत 6913 करोड़ रुपये है और इसे एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) बनाएगा। काम जल्द होगा शुरू एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, इन सभी सड़कों की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) बन चुकी है और बजट को मंजूरी भी मिल चुकी है। प्रदेश सरकार ने निर्माण में कोई आपत्ति नहीं जताई है, जिससे जल्द ही इन परियोजनाओं पर काम शुरू होने की उम्मीद है। इन सड़कों के बन जाने से जम्मू-कश्मीर में लोगों का सफर तेज़, सुरक्षित और आरामदायक होगा। साथ ही, सेना और सुरक्षा बलों की मूवमेंट भी आसान होगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

शिबू सोरेन के निधन से राजनीतिक जगत में शोक, पीएम मोदी बोले- अपूरणीय क्षति

 नई दिल्ली झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के अध्यक्ष शिबू सोरेन का आज यानी सोमवार को निधन हो गया है। उनके निधन से पूरे राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। शिबू सोरेन के निधन से झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश भर में शोक की लहर है। अलग-अलग पार्टियों के नेता उनके निधन पर दुख जता रहे हैं। शिबू सोरेन जी एक जमीनी नेता थे शिबू सोरेन के निधन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। पीएम ने 'एक्स' पर अपने शोक संदेश में लिखा, ''श्री शिबू सोरेन जी एक जमीनी नेता थे, जिन्होंने जनता के प्रति अटूट समर्पण के साथ सार्वजनिक जीवन में अपनी जगह बनाई। वे विशेष रूप से आदिवासी समुदायों, गरीबों और वंचितों को सशक्त बनाने के लिए उत्साही थे। उनके निधन से दुख हुआ। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और उनको चाहने वालों के साथ हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी से बात की और संवेदना व्यक्त की। ओम शांति।'' गौरतलब है कि बीते काफी दिनों तक शिबू सोरेन सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती रहे। उनकी हालत काफी गंभीर थी और वह वेंटिलेटर पर थे। 81 वर्षीय शिबू सोरेन लंबे समय से किडनी, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। वे एक साल से डायलिसिस पर थे और पहले भी उनकी बायपास सर्जरी हो चुकी थी। वहीं, पिता के निधन से सीएम हेमंत भी टूट चुके हैं। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा,''आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सबको छोड़कर चले गए…मैं आज 'शून्य' हो गया हूं।''  

पाकिस्तान की घोषणा से बढ़ा तनाव: ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अब क्या रुख लेगा अमेरिका?

लाहौर  जिस मकसद को हासिल करने के लिए अमेरिका ने ईरान के नतांज, फोर्डो और इस्फहान न्यूक्लियर साइट पर बी-2 बॉम्बर से विनाशक बम गिराए, जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए इजरायल ने ईरान पर हमला किया. पाकिस्तान ने इस मकसद के खिलाफ खुल्लम खुल्ला बयान दिया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि उनका देश ईरान के न्यूक्लियर ड्रीम को सपोर्ट करता है. बता दें कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन पाकिस्तान के दौरे पर हैं.  पाकिस्तान पहुंचे राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का गर्मजोशी से स्वागत किया गया. उनके स्वागत के लिए पीएम शहबाज शरीफ और डिप्टी पीएम इशाक डार एयरपोर्ट पहुंचे. इस दौरे में दोनों देशों ने आर्थिक,सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने का वादा किया.  पाकिस्तान और ईरान ने द्विपक्षीय व्यापार को 3 गुना से ज्यादा करने पर सहमति जताई है. पाकिस्तान और ईरान के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार 3 अरब डॉलर का है. अब इसे दोनों देशों ने 10 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने 12 समझौतों और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए.  ईरान के न्यूक्लियर ड्रीम को पाकिस्तान का समर्थन लेकिन पाकिस्तान द्वारा ईरान के परमाणु शक्ति बनने के सपने को समर्थन देना इस दौरे की अहम बात रही. यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब ईरान और इजरायल/अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है, खासकर जून 2025 में इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हवाई हमलों के बाद.  पाकिस्तान की यह घोषणा न केवल क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करती है, बल्कि यह अमेरिका के साथ उसके रिश्तों पर भी सवाल उठाती है. गौरतलब है कि ट्रंप की नीतियों में अभी पाकिस्तान फोकस में है. ट्रंप ने टैरिफ में पाकिस्तान को अच्छी खासी रियायत दी है और पाकिस्तान पर 19 फीसदी टैरिफ ही लगाया है.  ट्रंप ने पाकिस्तान में तेल निकालने का जुमला भी फेंका है. ट्रंप की इन घोषणाओं से पाकिस्तानी नेतृत्व ऊपरी तौर पर गदगद है. लेकिन ईरान के परमाणु सपने का समर्थन कर पाकिस्तान ने डबल गेम का पासा फेंका है.  पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि ईरान को परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग का अधिकार है. ईरान का यही मुद्दा हाल में इजरायल के साथ टकराव की वजह रही थी.  शरीफ ने कहा, "पाकिस्तान शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा प्राप्ति के ईरान के उद्देश्यों के साथ खड़ा है." उन्होंने ईरान के खिलाफ हाल के इजरायली हमलों की निंदा की और अपने मुल्क की रक्षा के लिए तेहरान की सराहना की.  ईरान के परमाणु कार्यक्रम के ऐतिहासिक विरोधी रहे हैं अमेरिका-इजरायल गौरतलब है कि इजरायल और अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ऐतिहासिक रूप से सख्त और विरोधी रहे हैं. दोनों देश ईरान के परमाणु हथियार विकसित करने की संभावना को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं। अमेरिका ने 2015 के JCPOA (ईरान परमाणु समझौता) के तहत ईरान की परमाणु गतिविधियों पर निगरानी और प्रतिबंध लगाए, लेकिन 2018 में ट्रम्प प्रशासन ने इसे रद्द कर कड़े प्रतिबंध लागू किए.  इजरायल तो ईरान को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है. दोनों देश IAEA की सख्त निगरानी और ईरान पर दबाव बनाए रखने के पक्षधर हैं.  अमेरिका और इजरायल ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को, भले ही वह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हो, संदेह की दृष्टि से देखते हैं. दोनों देशों का मानना है कि ईरान का दावा "शांतिपूर्ण" होने का एक आवरण हो सकता है, जिसके पीछे सैन्य परमाणु हथियार विकसित करने की मंशा छिपी हो सकती है.  ट्रंप को क्या सफाई देंगे आसिम मुनीर? अब सवाल यह है कि ट्रंप के साथ खाना खाने वाले पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर शहबाज शरीफ के इस कदम पर क्या कहेंगे? मुनीर यह जोर दे सकते हैं कि पाकिस्तान केवल ईरान के शांतिपूर्ण न्यूक्लियर प्रोग्राम का समर्थन करता है, जैसा कि शहबाज शरीफ ने कहा है. यह रुख अमेरिका को यह संदेश देगा कि पाकिस्तान का समर्थन सैन्य न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं के लिए नहीं है, बल्कि केवल नागरिक उपयोग के लिए है.  गौरतलब है कि ईरान-इजरायल जंग के दौरान एक पूर्व ईरानी जनरल ने यह कहकर सनसनी मचा दी थी कि पाकिस्तान ने हमें आश्वासन दिया है कि यदि इजरायल ईरान पर परमाणु बम का इस्तेमाल करता है, तो वे भी इजरायल पर परमाणु बम से हमला करेंगे. हालांकि पाकिस्तान ने इसकी पुष्टि नहीं की थी.  इस स्थिति में पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व यह कह सकता है कि पाकिस्तान ने ईरान के साथ कोई नया सैन्य सहयोग शुरू नहीं किया है और उसका ये बयान भू-राजनीतिक जरूरतों के अनुरूप है. 

गाजा पर हमले पर ट्रंप ने तोड़ी चुप्पी, कहा- नरसंहार नहीं, असली क्रूरता 7 अक्टूबर को हुई

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में इजरायल के हमलों का बचाव किया है। उनका कहना है कि गाजा में इजरायल के हमले नरसंहार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि 7 अक्तूबर को इजरायल में बहुत बुरा हुआ था। हमास के आतंकियों ने वहां तबाही मचा दी थी और उसी के नतीजे में गाजा में जंग हो रही है। इस तरह उन्होंने गाजा में जारी इजरायल के हमलों का बचाव किया। दरअसल डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से पूछा था कि क्या आप भी मानते हैं कि गाजा में जो हो रहा है, वह नरसंहार है। इस पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मैं ऐसा नहीं मानता। वे जंग में हैं। उन्होंने एक बात यह भी कही कि अमेरिका की ओर से फिलिस्तीन के लोगों को भुखे नहीं मरने दिया जाएगा। हम उन्हें राशन मुहैया करेंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'हम चाहते हैं कि लोगों को खाना मिले। इजरायल वहां सहायता मुहैया कराए। हम नहीं चाहते कि वहां कोई भुखमरी से मर जाए।' इस तरह डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल का बचाव किया है तो वहीं सहायता भी मुहैया कराने की बात कही है। गौरतलब है कि यूरोपीय देश फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी की ओर से इजरायल से अपील की गई है कि वह सीजफायर कर दे। यही नहीं फिलिस्तीन को मान्यता देने की बात भी इन देशों ने कही है। इस बीच फिलिस्तीन में 92 लोग फिर से एक ही दिन में मारे गए हैं। इन लोगों की मौत रविवार को हुई, जिनमें से 56 लोग तो सहायता का इंतजार कर रहे थे। दरअसल गाजा में हालात ऐसे हैं कि भुखमरी से मौतों का भी डर है। गाजा पट्टी में राशन तक की किल्लत है और दवाओं के लिए भी लोग परेशान हैं। अरब मीडिया के अनुसार इन मौतों में 6 लोग ऐसे हैं, जिनकी भूख के चलते मौत हुई है। अरब न्यूज के अनुसार गाजा में अब तक 175 लोग खाने की कमी से मर गए हैं। इनमें 93 मासूम बच्चे शामिल हैं। बता दें कि गाजा में भुखमरी के हालात के बाद भी हमास सीजफायर के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। उसने अब तक हथियार डालने के संकेत भी नहीं दिए हैं।