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जुलाई में लाडली बहना योजना के 1500 रुपये आएगे खाते में, 250 रुपये रक्षाबंधन पर देंगे

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार लाडली बहनों (MP Ladli Behan Yojana) को दीपावली से हर महीने 1500 रुपये देने जा रही है. फिलहाल उन्हें 1250 रुपये महीने मिलते हैं. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ये ऐलान किया है. हालांकि विपक्ष का मनना है कि इस खर्च से पहले से ही लाखों करोड़ के कर्ज में डूबी सरकार का वित्तीय प्रबंधन और गड़बड़ हो जाएगा. दीवाली से लाडली बहनों को मिलेंगे 1500 रुपये मध्य प्रदेश के सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि 3000 रुपये देने का ऐलान बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में किया था. हमने कहा है डंके की चोट पर कहा है और इसे पूरा करेंगे. यह योजना पहले 1000 रुपए प्रति माह से शुरू हुई थी. फिर हमने इसे 1250 रुपए किया, 250 रुपये रक्षाबंधन पर देंगे, दीवाली से 1500 चालू कर देंगे. बहुत सी लाभार्थियों को लेकर यह भी संशय है कि जुलाई में आने वाली लाडली बहना योजना की 26वीं किस्त में कितना पैसा खाते में आएगा? क्या 25वीं किस्त की तरह इस बार भी 1250 रुपये ही खाते में आएंगे? क्या 250 रुपये के शगुन के लिए महिलाओं को अगस्त तक का इंतजार करना होगा? चलिए आप ज्यादा परेशान न हों, हम आपके लिए इन सवालों के जवाब लेकर आए हैं। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक लाभार्थियों को जुलाई में ही गुड न्यूज मिल जाएगी। इस वजह से जुलाई में आएंगे 1500 रुपये लाडली बहना योजना की 26वीं किस्त में महिलाओं को 1250 नहीं बल्कि 1500 रुपये मिलेंगे। मतलब जुलाई में ही रक्षा बंधन का शगुन मिल जाएगा। दरअसल यह पैसा जुलाई में इसलिए आ रहा है क्योंकि रक्षा बंधन 9 अगस्त को है। जबकि लाडली बहना योजना का पैसा खाते में 10 से 15 तारीख के बीच में ही ट्रांसफर किया जाता है। ऐसे में अगर अतिरिक्त 250 रुपये का भुगतान अगस्त में करने की योजना बनाई जाती तो लाडली बहनों को यह लाभ रक्षा बंधन के बाद ही मिल पाता। इसलिए सरकार ने यह एक्स्ट्रा पैसा जुलाई में ही देने का फैसला कर लिया है। अक्टूबर से हर महीने मिलेंगे 1500 रुपये मध्य प्रदेश की महिलाओं को महज दो महीने ही 1250 रुपये की किस्त से संतोष करना पड़ेगा। इसके बाद उन्हें हर महीने 1500 रुपये मिलने शुरू हो जाएंगे। सीएम ने ऐलान किया है कि दिवाली से महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जाएंगे। इसका मतलब हुआ कि जुलाई में 1500 रुपये मिलने के बाद सिर्फ अगस्त और सितंबर में ही 1250 रुपये मिलेंगे। अक्टूबर से हर महीने 1500 रुपये मिलने शुरू हो जाएंगे। मुख्यमंत्री के मुताबिक हर साल पैसा बढ़ाकर 2028 तक लाभार्थी महिलाओं को 3000 रुपये हर महीने मिलने शुरू हो जाएंगे। कब शुरू होंगे नए रजिस्ट्रेशन हालांकि लाडली बहना योजना के नए रजिस्ट्रेशन को लेकर अभी तक सरकार की ओर से कोई अपडेट नहीं दी जा रही है। 2023 के बाद से ही नए रजिस्ट्रेशन बंद पड़े हैं। ऐसे में लाखों महिलाएं लिस्ट में अपना नाम नहीं जुड़वा पा रही हैं। अभी जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक फिलहाल सरकार की नए रजिस्ट्रेशन खोलने की योजना नहीं है। लाडली बहनों को दिवाली पर तोहफा     अब हर महीने मिलेंगे1500 रुपये     राज्य पर पड़ेगा 310 करोड़ मासिक भार     सालाना खर्च 22 हजार करोड़ के पार     योजना की शुरुआत 1000 से हुई थी     2023 में बढ़कर हुई 1250 रुपये     अब दिवाली से मिलेंगे1500 रुपये     योजना में 1.27 करोड़ लाभार्थी     कर्ज़ में डूबी सरकार पर सवाल     राज्य पर कुल कर्ज़ 4.31 लाख करोड़ रुपये     5 साल में कर्ज़ 115% बढ़ा      संकल्प पत्र में 3000 रुपये प्रति माह का वादा पूरा होगा  3,000 रुपये देने का वादा मध्यप्रदेश सरकार दीपावली से लाडली बहनों को 1250 रुपये की जगह 1500 रुपये महीना देगी. इस बढ़ोतरी से राज्य पर हर महीने करीब 310 करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा, जिससे सालाना खर्च 22,000 करोड़ के पार पहुंच जाएगा. ये योजना 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू की गई थी और इसे बीजेपी की सत्ता वापसी का सबसे बड़ा चुनावी दांव माना गया. योजना की शुरुआत 1,000 प्रति माह से हुई थी, जिसे बाद में अक्टूबर 2023 में 1,250 कर दिया गया था. अब इसे दिवाली से 1,500 रुपये करने की घोषणा हुई है. सरकार का वादा है इस राशि को धीरे-धीरे बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह तक पहुंचाया जाएगा.     योजना की शुरूआत में 1.29 करोड़ महिलाओं को योजना का लाभ मिला     अक्तूबर 2023 में संख्या 1.31 करोड़ तक पहुंच गई     अब ये संख्या 1.27 करोड़ है, सरकार ने खुद विधानसभा में माना है कि योजना में फिलहाल नए नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं,  हालांकि उम्र और दूसरी शर्तों के आधार पर नाम कट रहे हैं 5 साल में बढ़ा 115 फीसदी कर्ज मध्यप्रदेश सरकार का बजट 4 लाख 21 हजार करोड़ रुपए है. सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक 9500 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है. कुल कर्ज की राशि बढ़कर लगभग 4 लाख 31 हजार 740 करोड़ रुपए हो गई है. पांच साल पहले राज्य पर करीब 2 लाख करोड़ का कर्ज था यानी 5 साल में राज्य का कर्ज लगभग 115 फीसदी बढ़ चुका है.

चार्जिंग अधोसंरचना के लिये केन्द्र सरकार से मिलेगी 100 प्रतिशत राशि

प्रदेश के शहरी मार्गों पर 582 इलेक्ट्रिक बस चलाने की योजना ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत 6 शहरों  में 582 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिये प्रस्ताव तैयार  चार्जिंग अधोसंरचना के लिये केन्द्र सरकार से मिलेगी 100 प्रतिशत राशि भोपाल  प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन को बढ़ावा देने के लिये मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 तैयार की गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिये राज्य सरकार द्वारा परिवहन कर में छूट और अनुदान दिये जाने की भी व्यवस्था की गई है। प्रदेश के बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन सेवा के अंतर्गत इलेक्ट्रिक बस सेवा को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्तमान में इंदौर में शहरी मार्गों पर 80 इलेक्ट्रिक बसों को संचालन किया जा रहा है। फेम योजना के अंतर्गत 40 और अमृत योजना 1.0 में 40 बसें संचालित हो रही हैं। 582 इलेक्ट्रिक बसों के चलाने का प्रस्ताव ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत 6 शहरों  में 582 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिये प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया था, जिसे केन्द्रीय शहरी मंत्रालय नई दिल्ली से स्वीकृति मिल गयी है। इंदौर में 150, भोपाल में 100, ग्वालियर में 100, जबलपुर में 100, सागर में 32 एवं उज्जैन में 100 इलेक्ट्रिक बसों को चलाने का प्रस्ताव है। प्रदेश के 6 शहरों में बस संचालन के लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा निविदा जारी कर बस संचालकों का चयन किया जा चुका है। पीएम ई-बस सेवा के अंतर्गत बस डिपो अधोसंरचना निर्माण के लिये भी प्रस्ताव तैयार किया गया है, इसमें 60 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार द्वारा और शेष 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा प्रदाय की जायेगी। इलेक्ट्रिक बसों के चार्जिंग अधोसंरचना निर्माण के लिये केन्द्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत राशि प्रदान की जायेगी। नगरीय निकायों द्वारा बस डिपो एवं चार्जिंग स्टेशन निर्माण के लिये प्राक्कलन तैयार कर राज्य स्तरीय संचालन समिति से अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया है। अनुमोदन के बाद प्रस्ताव केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय को भेजा गया है। भोपाल एवं जबलपुर शहर द्वारा बस डिपो अधोसंरचना निर्माण के लिये निविदा जारी की जा चुकी है। प्रदेश के शहरों में लाइट इलेक्ट्रिक व्हीकल के संचालन को बढ़ावा देने के लिये भोपाल, इंदौर एवं जबलपुर शहर में 34 चार्जिंग स्टेशन पर 190 चार्जिंग पाइंट लगाये गये हैं।    

मोहन सरकार का एक जगह सभी ऑफिस की योजना, अरेरा हिल्स को सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर डेवलप किया जाएगा

भोपाल  करीब 43 साल पहले 9.56 करोड़ रुपए खर्च कर बनाए गए सतपुड़ा और विंध्याचल भवन को तोड़कर अरेरा हिल्स क्षेत्र को दिल्ली के सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर डेवलप किया जाएगा। री-डेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट के तहत यह जिम्मेदारी मप्र हाउसिंग बोर्ड को सौंपी गई है। करीब 4 महीने में बोर्ड ने इसका कंप्रेहेंसिव प्लान तैयार कर लिया है। हालांकि, इस प्लान पर अंतिम मुहर आज  बुधवार को वल्लभ भवन में होने वाली मुख्य सचिव की बैठक में लगेगी। फिलहाल बोर्ड का प्लान है कि वल्लभ भवन के इर्द-गिर्द अलग-अलग खंडों में कई भवन बनाए जाएंगे और इन्हीं में भोपाल के सभी एचओडी स्तर के दफ्तर संचालित किए जाएंगे। इससे पहले सतपुड़ा-विंध्याचल भवन को तोड़कर दोगुने क्षेत्र में बनाने की योजना भोपाल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (बीडीसी) ने बनाई थी। जिसे मुख्यमंत्री ने नामंजूर कर दिया था। 43 साल पहले… 9.56 करोड़ खर्च कर बनाए गए थे सतपुड़ा-विंध्याचल भवन     नगरीय विकास एवं आवास विभाग के एसीएस संजय शुक्ला ने बताया कि सतपुड़ा- विंध्याचल भवनों को तोड़कर वहां नए भवनों के निर्माण का एक समग्र (कंप्रेहेंसिव) प्लान मप्र हाउसिंग बोर्ड ने तैयार किया है। प्रस्तावित योजना पर अंतिम निर्णय आगामी बैठक के बाद लिया जाएगा।     मेट्रो का रूट भी: इस क्षेत्र को दो तरफ से ऑरेंज और ब्लू मेट्रो का रूट भी मिलेगा।     वल्लभ भवन और इसके आसपास 8 ऐसी झुग्गी बस्तियां हैं, जिनमें 32 हजार लोग रहते हैं। इनमें पत्रकार कॉलोनी के पास मालवीय नगर, ओम नगर-2,3, भीम नगर, वल्लभ नगर-1,2, राजीव नगर व अर्जुन नगर शामिल हैं। यहां 9197 हाउस होल्ड हैं।

CM डॉ. यादव की मौजूदगी में विजन@2047 के लक्ष्यों हेतु हुआ अहम समझौता

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में प्रदेश के योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग और आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था के व्यक्तित्व विकास केंद्र के बीच मंत्रालय में एमओयू का आदान-प्रदान हुआ। इस साझेदारी के अंतर्गत दोनों संस्थान जल संरक्षण, सतत् कृषि और ग्रामीण आजीविका सृजन, ग्राम विकास, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, गौधन संवर्धन, नशामुक्ति, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग करेंगे। यह समझौता सतत् विकास लक्ष्यों की दिशा में राज्य सरकार की पहलों को सशक्त्‍करने, पीपीपी मॉडल (सार्वजनिक निजी भागीदारी) को बढ़ावा देने, नीतिगत निर्णयों में सहयोग, योजनाओं के प्रभावी मूल्यांकन और व्यापक सर्वेक्षण के माध्यम से प्रदेश की दीर्घकालिक विकास योजना विजन@2047 के लक्ष्यों को पूर्ण करने में सहायक होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में हुए समझौता पत्र के आदान-प्रदान के अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी श्री संजय शुक्ला, म.प्र. राज्य नीति आयोग के श्री ऋषि गर्ग, आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के श्री रोहन जैन, श्री अजित भास्कर तथा अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे। पद्म विभूषण श्री श्री रविशंकर जी द्वारा स्थापित आर्ट ऑफ लिविंग संस्था समग्र विकास सहित क्षमता विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। आर्ट ऑफ लिविंग के विभिन्न कार्यक्रम में पुलिसकर्मियों, वैज्ञानिकों, सशस्त्र बलों, पंचायती राज प्रतिनिधियों, युवाओं, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों हेतु विशेष रूप से बनाए गए हैं। संस्था जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, कौशल विकास, ग्रामीण विकास, वनीकरण, नशामुक्ति, जेल सुधार, सीमावर्ती गाँव विकास जैसे क्षेत्रों में भी कार्य कर रही है। साथ ही आर्ट ऑफ लिविंग की विभिन्न राज्य सरकारों, केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों के साथ सक्रिय भागीदारी है। भारत सरकार (DoPT) 'कर्मयोगी भारत' के साथ संस्था का समझौता सरकारी अधिकारियों के लिए क्षमता विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन हेतु भी प्रभावी है।  

प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर सेवारत 50 से अधिक गाइड्स हुए सम्मिलित

भोपाल मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा आयोजित गाइड प्रशिक्षण कार्यशाला का मंगलवार को समापन हुआ। इस दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन सुबह हैरिटेज वॉक का आयोजन किया गया। इस वॉक में प्रदेश भर से आए गाइड्स ने धरोहरों से भोपाल के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त की। राजधानी की समृद्ध विरासत से परिचय कराने के उद्देश्य से यह वॉक प्रातः 7 बजे कमला पार्क से शुरू होकर गौहर महल, इकबाल मैदान और सदर मंजिल तक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश भर के 50 से अधिक गाइड्स सम्मिलित हुए। मिरांडा हाउस-भोपाल की इतिहासविद् मिस अरुणिका माथुर ने प्रतिभागियों को शहर की ऐतिहासिक धरोहर, स्थापत्य कला और गौरवशाली अतीत से परिचित कराया। इस अनूठे अनुभव ने गाइड्स को न केवल पर्यटन स्थलों की ऐतिहासिक जानकारी दी बल्कि यह भी सिखाया कि कैसे इन स्थलों को पर्यटकों के समक्ष प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है। हैरीटेज वॉक के बाद विशेषज्ञों द्वारा गाइड नीति, दिशा-निर्देश एवं लाभ, तकनीक व पर्यटन विपणन, पर्यटन की नवीनतम प्रवृत्तियां, आपातकालीन स्थितियों में गाइड की भूमिका व शिकायत प्रबंधन आदि विषय पर महत्वपूर्ण प्रशिक्षण दिया।   उल्लेखनीय है कि प्रदेश में कार्यरत लाइसेंसधारी राज्य स्तरीय एवं स्थानीय गाइड्स के प्रशिक्षण, कार्यकुशलता में वृद्धि एवं व्यवहारिक दक्षता को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा दो दिवसीय आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राज्य पुरातत्व संग्रहालय एवं अभिलेखागार भोपाल, मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम, IITTM ग्वालियर एवं विषय विशेषज्ञों के सहयोग से किया गया। इस दौरान विषय विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों में पर्यटन स्थलों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, प्रस्तुतिकरण कौशल, नई तकनीक, पर्यटकों के साथ संवाद शैली तथा पर्यटन संबंधी विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी दी।

कलेक्टर नेहा ने मारव्या पत्रकारों के बिना अनुमति कलेक्ट्रेट में प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया था, अब लिया यू-टर्न

डिंडौरी कलेक्टर नेहा मारव्या ने सोमवार की देर रात एक आदेश जारी किया जिसमें पत्रकारों के बिना अनुमति कलेक्ट्रेट में प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया था। यह आदेश इंटरनेट मीडिया में प्रसारित हो गया और पत्रकारों समेत तमाम लोग विरोध करने लगे। कांग्रेस ने तो इसे अघोषित आपातकाल बता दिया। इसके बाद कलेक्टर को 12 घंटे के अंदर ही यू टर्न तो लेना पड़ा। लेकिन जो संशोधित आदेश जारी हुआ है, उस पर भी राजनीतिक दल के पदाधिकारी सवाल उठा रहे हैं।   आदेश के बाद भारी विरोध का शुरू हुआ कलेक्टर द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत कलेक्ट्रेट परिसर में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है। आदेश में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि परिसर में चार या उससे अधिक व्यक्तियों का एक साथ प्रवेश नहीं हो पाएगा। एक साथ एकत्रित होने, सभा, धरना, घेराव, नारेबाजी करने के साथ पत्रकारों द्वारा आगंतुक से साक्षात्कार भी नहीं लिया जा सकेगा। बिना अनुमति पत्रकारों का कार्यालय में प्रवेश के साथ साक्षात्कार भी प्रतिबंधित रहेगा। इस आदेश के बाद भारी विरोध का शुरू हुआ।   कांग्रेसी विधायक ने इसे आपात कालीन स्थिति बताई डिंडौरी से कांग्रेसी विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने इसे आपातकालीन स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि यह तुगलकी फरमान है। इससे प्रदेश सरकार की मंशा जाहिर होती है। इस आदेश को लेकर लोगों ने इंटरनेट मीडिया में जमकर भड़ास निकाली। कलेक्टर को तुरंत बैकफुट में आना पड़ा और उन्होंने मंगलवार की सुबह 10 बजे से पहले ही दूसरा संशोधित आदेश जारी कर दिया। लेकिन पत्रकार संगठनों में अभी भी नाराजगी देखी जा रही है। वीडियो इंटरनेट मीडिया में वायरल हुआ बताया गया कि डिप्टी कलेक्टर वैद्यनाथ वासनिक द्वारा पिछले मंगलवार को जन सुनवाई के दौरान आदिवासी महिलाओं के साथ अभद्रता की गई थी। उसका वीडियो इंटरनेट मीडिया में वायरल हुआ। इससे प्रशासन की जमकर फजीहत हुई थी। इसी के चलते इस तरह का आदेश कलेक्टर ने जारी किया। इस आदेश को लेकर जिला प्रशासन ने भोपाल स्तर से निर्देश मिलने की बात जारी करना बताया, लेकिन जिले में विरोध का क्रम जारी है। इंडियन नेशनल कांग्रेस सहित कांग्रेस के बड़े नेताओं ने भी संबंधित आदेश को बहु प्रसारित कर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ईको पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा 5 दिवसीय खानसामा एवं आतिथ्य सत्कार प्रशिक्षण संपन्न

भोपाल  मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा 5 दिवसीय खानसामा एवं आतिथ्य सत्कार प्रशिक्षण कार्यक्रम होटल प्रबंधन संस्थान भोपाल में सम्पन्न हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम में ईको पर्यटन गंतव्य स्थलों पर कार्यरत समिति के सदस्यों ने भाग लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कठौतिया, समरधा, सतधारा, मगरपाठ, बोदाखो, कुकरू, चारखेड़ा, रानेहफाल, खिवनी और उमरियाखेड़ा ईको पर्यटन स्थलों से आये कुल 22 समिति सदस्यों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक ईको पर्यटन विकास बोर्ड डॉ. श्रीमती समिता राजौरा ने बताया कि आईएचएम के अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को लाइव खाना बनाकर सिखाया गया एवं आतिथ्य सत्कार के बारे में भी जानकारी दी गयी। साफ-सफाई, हाउस क्लीनिंग, सर्विंग और एटीकेट्स के बारे में भी बताया गया। प्रशिक्षण के बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी ईको पर्यटन विकास बोर्ड डॉ. श्रीमती राजौरा, प्राचार्य आईएचएम भोपाल डॉ. रोहित सरीन द्वारा समस्त प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किये गये।  

प्रबंध संचालक ने भोपाल शहर की विद्युत व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर दिए जरूरी निर्देश

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने भोपाल शहर अंतर्गत विद्युत संबंधी प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने मंगलवार को राजधानी भोपाल के साकेत नगर तथा बरखेड़ा पठानी क्षेत्रों में निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने उपभोक्ता हितों में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली तथा रखरखाव कार्य को समय पर करने के निर्देश दिए। प्रबंध संचालक श्री सिंघल ने विद्युत हानि कम करने तथा बारिश के दौरान होने वाले विद्युत व्यवधान को लेकर अधिकारियों से चर्चा की तथा उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने उपभोक्ताओं की सुविधा को देखते हुए फ्यूज ऑफ कॉल (विद्युत अवरोध को दूर करना) समय पर अटेण्ड करने के निर्देश दिए हैं। प्रबंध संचालक ने कहा है कि कंपनी के समस्त मैदानी अधिकारी अथवा कार्मिक अपने मोबाईल फोन को 24 घंटे चालू रखें और उपभोक्ताओं के आने वाले फोन अटेंड करें। बिजली उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो। प्रबंध संचालक ने कॉल सेन्टर 1912, व्हाट्सएप चैटबोट तथा स्थानीय वाट्सएप ग्रुप एवं अन्य माध्यम से प्राप्त होने वाली विद्युत संबंधी शिकायतों का तत्काल समाधान करना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। साथ ही उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के फायदे बताते हुए उनकी शंकाओं का समाधान करने के भी  निर्देश दिए।  

आयुक्त जनसम्पर्क ने संचालनालय में किया पौध-रोपण

भोपाल  आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े ने मंगलवार को जनसम्पर्क संचालनालय परिसर में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधरोपण किया। उन्होंने अशोक और गुलमोहर का पौधा लगाया। इस अवसर पर जनसम्पर्क के स्टाफ ने आयुक्त जनसम्पर्क को उनके जन्मदिवस के अवसर पर बधाई दी। इस दौरान अपर संचालक श्री जी.एस. वाधवा, अपर संचालक श्री संजय जैन एवं विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।  

मंत्री राकेश सिंह की अगुवाई में ऐतिहासिक पौधरोपण महाअभियान का शुभारंभ किया

लोक निर्माण विभाग ने एक दिन में लगाए 2 लाख से अधिक पौधे पौधारोपण स्थल की जियोमैपिंग कर सैटेलाइट से की जायेगी मॉनिटरिंग पौधों के विकास की निगरानी का अभिनव प्रयोग भोपाल  हरित मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने मंत्री श्री राकेश सिंह की अगुवाई में ऐतिहासिक पौधरोपण महाअभियान का शुभारंभ किया। इस एक दिन में विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में 2 लाख से अधिक पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक कीर्तिमान स्थापित किया है, जो सतत विकास और हरियाली के प्रति विभाग की सशक्त प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भोपाल में आयोजित मुख्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा की “पौधरोपण सिर्फ औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य देने का हमारा दृढ़ संकल्प है।” उन्होंने कहा कि प्रारंभ में जहाँ 1 लाख पौधों का लक्ष्य रखा गया था, वहीं विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों की प्रतिबद्धता, समर्पण और उत्साह के चलते यह संख्या बढ़कर 2 लाख से अधिक पौधों तक पहुँच गई। यह केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि हरित मध्यप्रदेश की दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक उपलब्धि है जो सामूहिक प्रयासों की शक्ति को दर्शाती है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि इस पौधारोपण को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ा गया है। प्रत्येक पौधे की सैटेलाइट मॉनिटरिंग की योजना बनाई गई है, जिसमें अहमदाबाद स्थित भास्कराचार्य संस्थान का सहयोग प्राप्त हो रहा है। इसके माध्यम से पौधों की वृद्धि और संरक्षण की डिजिटल निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी। यह वृक्षारोपण सड़क किनारे, विभागीय भवन परिसरों, तालाबों एवं सार्वजनिक स्थलों पर किया गया है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में हरियाली को बढ़ावा मिलेगा। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘हरित भारत’ के संकल्प और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पर्यावरण-अनुकूल विकास के विजन ने मध्यप्रदेश में वृक्षारोपण और प्रकृति संरक्षण को एक जनआंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है, ऐसे समय में यह पहल प्रेरक उदाहरण बनेगी। उन्होंने आमजन, विभागीय अधिकारियों, अभियंताओं और उनके परिवारों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि लोक निर्माण विभाग अब केवल भौतिक संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण, हरित तकनीकों के उपयोग और पारिस्थितिकी संतुलन को अपनी कार्यशैली में प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि “लोक निर्माण से लोक कल्याण” केवल एक नारा नहीं है, बल्कि विभाग की मूल कार्यनीति है, जिसमें अब पर्यावरणीय संतुलन को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि विकास की तेज़ रफ्तार के साथ प्रकृति का संरक्षण अब प्रत्येक अभियंता और अधिकारी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसी दृष्टिकोण से विभाग ने ‘लोक कल्याण सरोवर’ योजना की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत सड़क निर्माण में उपयोग हुई मिट्टी का युक्तियुक्त उपयोग करते हुए स्थायी जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इन सरोवरों को विज्ञानसम्मत ढंग से डिज़ाइन किया गया है तथा उनका सौंदर्यीकरण, वृक्षारोपण, सूचना पटल और जियो-टैगिंग की जा रही है। इस योजना के तहत 500 लोक कल्याण सरोवर बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि विभाग ने सड़क किनारे रिचार्ज बोर निर्माण की पहल भी शुरू की है, जिससे वर्षा जल को भूगर्भ तक पहुँचाकर ग्राउंडवाटर रिचार्ज किया जा सकेगा।वर्तमान और निर्माणाधीन फ्लाईओवर और आरओबी में वर्षा जल संचयन के लिए आवश्यक निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि आने वाले वर्षों में इस अभियान को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा तथा हर परियोजना में प्रकृति का समावेश सुनिश्चित किया जाएगा। विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में शिक्षाविद एवं सलाहकार समिति सदस्य श्री विक्रांत सिंह तोमर, सलाहकार समिति सदस्य श्री अजय के जैन सहित प्रमुख अभियंता शामिल थे। प्रदेशभर से लोक निर्माण विभाग के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।