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LoP की भूमिका पर प्रियंका गांधी का बयान, बोलीं– सरकार से सवाल देशविरोध नहीं

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने अपने भाई और नेता विपक्ष का बचाव करते हुए दो टूक कहा है कि कौन सच्चा भारतीय है? यह सुप्रीम कोर्ट तय नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल पूछना राहुल गांधी की ड्यूटी है क्योंकि वह लोकसभा में नेता विपक्ष हैं। प्रियंका गांधी का यह बयान सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद आई है, जिसमें अदालत ने कहा था कि कोई भी सच्चा भारतीय ऐसी बातें नहीं कर सकता। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा, “माननीय न्यायाधीशों के प्रति पूरा सम्मान रखते हुए मैं ये कहना चाहती हूं कि वो यह तय नहीं कर सकते कि सच्चा भारतीय कौन है? सरकार से सवाल पूछना विपक्ष के नेता का कर्तव्य है। मेरा भाई कभी भी सेना के खिलाफ नहीं बोलेगा, वह उनके प्रति उच्च सम्मान रखता है। इसका गलत मतलब निकाला गया है।” क्या थी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी? बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान भारतीय सेना के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर उनकी आलोचना करते हुए कहा था, ‘‘अगर आप सच्चे भारतीय हैं, तो ऐसी बात नहीं कहेंगे।’’ हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस मामले में लखनऊ की एक अदालत में गांधी के खिलाफ जारी कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा, ‘‘आप विपक्ष के नेता हैं। आप संसद में बातें क्यों नहीं कहते हैं, आप सोशल मीडिया पर क्यों कहते हैं?’’ पीठ ने पूछा था, ‘‘आपको कैसे पता चला कि 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन चीनियों ने कब्जा कर ली है? क्या आप वहां थे? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय जानकारी है?’’ पीठ ने पूछा, ‘‘बिना किसी सबूत के आप ये बयान क्यों दे रहे हैं? अगर आप सच्चे भारतीय हैं, तो आप ऐसी बात नहीं कहेंगे।’’ विपक्ष के नेता मुद्दे नहीं उठा सकते, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि अगर विपक्ष के नेता मुद्दे नहीं उठा सकते, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी। उन्होंने दलील देते हुए कहा, ‘‘अगर वह प्रेस में छपी ये बातें नहीं कह सकते, तो वह विपक्ष के नेता नहीं हो सकते।’’ पीठ की ‘‘सच्चे भारतीय’’ टिप्पणी पर सिंघवी ने कहा, ‘‘यह भी संभव है कि एक सच्चा भारतीय कहे कि हमारे 20 भारतीय सैनिकों को पीटा गया और मार डाला गया। यह भी चिंता का विषय है।’’ इस पर शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘जब सीमा पार संघर्ष होता है, तो क्या दोनों पक्षों में हताहत होना असामान्य बात है?’’ सिंघवी ने कहा कि गांधी केवल उचित खुलासे और सूचना के दमन पर चिंता जताने की बात कर रहे थे। इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि विपक्ष के एक जिम्मेदार नेता होने के नाते गांधी को ऐसा नहीं कहना चाहिए था क्योंकि ऐसे सवाल उठाने के लिए एक उचित मंच मौजूद है। सिंघवी ने इस बात से सहमति जताई कि गांधी इस मामले में बेहतर तरीके से टिप्पणी कर सकते थे। उन्होंने कहा कि यह शिकायत याचिकाकर्ता को परेशान करने के प्रयास के अलावा और कुछ नहीं है।

उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की तलाश जारी, रणनीति और गठजोड़ में उलझा समीकरण

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने जैसे ही उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए तारीखों की घोषणा की है, वैसे ही विपक्षी INDIA अलायंस की चिंता बढ़ गई है। विपक्षी खेमे के लिए इस पद पर उम्मीदवार के लिए चेहरे की तलाश भी कठिन चुनौती बन गई है क्योंकि विपक्षी दलों को पता है कि संसद के दोनों सदनों में संख्या बल के आधार पर उनकी स्थिति बहुत कमजोर है। बावजूद इसके विपक्ष उपराष्ट्रपति चुनाव में एक मजबूत और वैचारिक चेहरे को उम्मीदवार के रूप में उतारने की कोशिश कर सकता है, ताकि वह देश को राजनीतिक संदेश दे सके कि वह सत्तारूढ़ भाजपा और उसके उम्मीदवार से दो-दो हाथ करने को तैयार है और उसकी विचारधारा से मुकाबला करने के लिए एकजुट खड़ा है। चूंकि संसद के दोनों सदनों के सदस्य ही उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं और वहां विपक्षी सांसदों की संख्या कम है। इसलिए इंडिया अलायंस उपराष्ट्रपति चुनाव का इस्तेमाल पिछड़े और अल्पसंख्यकों, किसानों, बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज सहित हाशिए पर पड़े वर्गों को लामबंद करने और उनके बीच स्पष्ट संदेश देने की कोशिश करेगा। इसीलिए विपक्ष एक ऐसे वैचारिक चेहरे को साझा उम्मीदवार के तौर पर तलाश कर रहा है, जो उसके इस राजनीतिक संदेश को फैला सके। 7 अगस्त को राहुल गांधी ने बुलाई बैठक बता दें कि इंडिया अलायंस की गुरुवार (7 अगस्त) को एक अहम बैठक होने वाली है, जिसमें बिहार विधानसभा चुनाव और राज्य की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का मुद्दा उठने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में उपराष्ट्रपति चुनाव के संभावित उम्मीदवार पर भी चर्चा होने की संभावना है। राहुल दे सकते हैं प्रजेंटेशन TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में नेता विपक्ष राहुल गांधी मतदाता सूचियों पर कांग्रेस की तरफ से की गई एक रिसर्च पर प्रजेंटेशन दे सकते हैं। दो दिन पहले ही उन्होंने उस रिसर्च के बारे में कहा था कि उनके हाथ एटम बम लगा है। राहुल ने कहा है कि इससे बिना किसी संदेह के यह साबित होता है कि भाजपा की मदद के लिए मतादाता सूची के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। दरअसल, जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति पद का चुनाव होना है। पिछले महीने जस्टिस शेखर यादव और जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पर नोटिस को स्वीकार करने के अपने फैसले पर सरकार के साथ कथित टकराव के बाद धनखड़ ने 21 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति का चुनाव समय से पहले हो गया है।

फारूक अब्दुल्ला का विवादित दावा: ‘जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद खत्म नहीं हो सकता’

श्रीनगर   जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने प्रदेश में आतंकवाद को लेकर विवादास्पद बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान में जब तक हालात नहीं सुधरेंगे, तब तक कश्मीर में आतंकवाद कभी भी खत्म नहीं होने वाला है.  मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं दावा करता हूं कि यहां मिलिटेंसी कभी खत्म नहीं होगी, जब तक हमारे पड़ोसी देश और वहां के हालात बेहतर नहीं होते. मिलिटेंसी यहां तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक पाकिस्तान की स्थिति सुधर नहीं जाती.' वहीं, दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर में पांच अगस्त को लेकर सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई है. पांच अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर के अनुच्छेद 370 के तहत दी गई विशेष स्थिति को रद्द कर दिया गया था. इस साल अब तक इतने आतंकवादी मारे गए इस साल की शुरुआत से अब तक सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर में 59 आतंकियों को मार गिराया है. इनमें 31 आतंकी पाकिस्तान और 28 स्थानी आतंकी थे. ये आंकड़े गृह मंत्रालय और मीडिया के खबरों के अनुसार हैं.  पहलगाम हमले के बाद आतंकियों की खैर नहीं 22 अप्रैल को पाकिस्तानी आतंकियों ने पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी. इस आतंकी हमले के बाद से सुरक्षाबल आतंकियों पर जबरदस्त प्रहार कर रहे हैं. 22 अप्रैल के बाद 6 अलग-अलग मुठभेड़ों में 21 आतंकवादी मारे गए.  फारूक अब्दुल्ला ने पहलगाम हमले पर क्या-क्या कहा था? पहलगाम हमले के बाद 24-25 अप्रैल को फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि इस तरह के आतंकवादी हमले इंसानियत के ख़िलाफ़ हैं. उन्होंने आतंक के ख़िलाफ़ स्थानीय लोगों से एकजुटता दिखाने की अपील की थी. 1 से 3 मई के बीच, उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान इस हमले के लिए सुरक्षा और खुफिया तंत्र की चूक को मुख्य वजह बताया था. उन्होंने सिंधू जल समझौते को स्थगित करने के फैसले पर भारत सरकार से इस मुद्दे पर दोबारा विचार करने की बात कही थी.  27 मई को ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि जंग कोई समस्या का हल नहीं है, जंग से केवल बर्बादी आती है.

राहुल गांधी के निवास पर विपक्ष की महाबैठक, 7 अगस्त को INDIA गठबंधन के दिग्गज होंगे शामिल

नई दिल्ली विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ब्लॉक की अगली बैठक 7 अगस्त को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आवास पर होगी। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक डिनर के दौरान होगी और इसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बता दें कि, विपक्षी इंडिया गठबंधन की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब विपक्ष केंद्र सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर गंभीर आरोप लगा रहा है। 7 अगस्त की डिनर मीटिंग में आने वाले दिनों की राजनीतिक रणनीति और संभावित आंदोलन की रूपरेखा भी बन सकती है। बता दें कि, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि 2024 के लोकसभा चुनावों में करीब 70-80 सीटों पर धांधली हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बहुत मामूली बहुमत से जीते हैं और यदि 15 सीटें भी सही तरीके से हुई होतीं, तो वो प्रधानमंत्री नहीं बन पाते। इसके साथ ही, बैठक में कई मुद्दे उठाए जा सकते हैं। जिसमें बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया, महाराष्ट्र में फर्जी वोटर जोड़ने का आरोप, ऑपरेशन सिंदूर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से संभावित टैरिफ धमकी शामिल है। बता दें कि, इससे पहले इंडिया गठबंधन की पिछली बैठक 19 जुलाई को वर्चुअल हुई थी, जिसमें 24 से ज्यादा दलों के नेता शामिल हुए थे। संसद के मानसून सत्र की रणनीति बनाने को लेकर यह बैठक वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से हुई थी।  

शरद पवार के विधायक का विवादित बयान: ‘देश की बरबादी का कारण सनातन धर्म’

मुंबई  मालेगांव ब्लास्ट मामले में प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित सहित सात आरोपियों को बरी किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया है। एनसीपी (SC) विधायक जितेंद्र अव्हाड़ ने सनातन धर्म को लेकर ही विवादित बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि सनातन की विचारधारा ही विकृत है और इसने पूरे देश को बर्बाद कर दिया है। पत्रकारों से बात करते हुए अव्हाड़ ने कहा, कभी किसी धर्म को सनातन धर्म नहीं कहा गया। हम सब हिंदू धर्म को मानते हैं। यह वही तथाकथित सनातन धर्म है जिसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी खारिज कर दिया था। सनातन धर्म ने हमारे छत्रपति शिवाजी महाराज को भी बदनाम किया था। इसी सनातन धर्म वाले लोगों ने ज्योतिराव फुले को मारने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा, उन लोगों ने सावित्रीबाई फुले पर गोबर फेंक दिया। सनातन धर्म वालों ने ही साहू महाराज को मारने की साजिश रची। यहां तक कि इन लोगों ने डॉ. आंबेडकर को स्कूल में पानी नहीं पीने दिया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा से ही मनुस्मृति का जन्म हुआ है। इसलिए किसी को सनातनी विचारधारा को विकृत कहने से परहेज नहीं करना चाहिए। वहीं बीजेपी ने सनातन आतंकवाद और भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों पर कांग्रेस को घेरा है। उन्होंने कहा, कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा था कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। तब वह तुष्टीकरण में लगे थे। अब वही भगवा आतंकवाद और हिंदू आतंकवाद पर बयान दे रहे हैं। बता दें कि गुरुवार को एक विशेष अदालत ने मालेगांव ब्लास्ट के सभी आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी पुख्ता सबूत उपलब्ध नहीं करवा पाई है। इसके अलावा एजेंसी की कार्यप्रणाली भी ही नहीं थी। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को मालेगांव ब्लास्ट के पीड़ितों को मदद देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए। इस मामले में कुल सात आरोपी थे जिनमें साध्वी प्रज्ञा, मेजर रिटायर्ड रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी और समीर कुलकर्णी का नाम था। इस मामले में कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के 323 और आरोपी पक्ष के 8 गवाहो की भी सुनवाई की। 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक वाहन में बम ब्लास्ट होने के बाद कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं 95 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

मणिशंकर अय्यर का विवादित बयान: ‘PAK पर यकीन नहीं’, BJP ने बताया शर्मनाक

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाकर मणिशंकर अय्यर ने विवाद खड़ा कर दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ था, इसका कोई सबूत नहीं है। इतना ही नहीं अय्यर ने कहा कि भारत ने जिन 33 देशों में अपने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को भेजा था, उन्होंने ने भी इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार नहीं माना। आईएएनएस से बात करते हुए मणिशंकर अय्यर ने ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार का साथ देने वाले कांग्रेसी शशि थरूर पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "थरूर और उनकी टीम ने जिन 33 देशों का दौरा किया था, उनमें से किसी ने भी पहलगाम आतंकी हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। न ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने और न ही अमेरिका ने पाकिस्तान को इसके लिए दोषी माना। हम ही दुनिया भर में कहते घूम रहे हैं कि इसके पीछे पाकिस्तान था लेकिन हमारी बात पर किसी को भी यकीन नहीं है।" कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा, "हम अभी तक ऐसा कोई भी सबूत पेश नहीं कर पाए हैं, जिससे यह साबित हो जाए कि यह हमला पाकिस्तानी एजेंसी की दिमाग की उपज था या उन्होंने ही इसे अंजाम दिया।" मणिशंकर अय्यर के इस बयान के बाद भाजपा भी भड़क गई है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने अय्यर पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "शायद कांग्रेस पार्टी को यह नहीं पता कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के निगरानी पैनल ने इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की एक शाखा, टीआरएफ की भूमिका पर चिंता जताई है। शायद कांग्रेस को यह नहीं पता कि आतंकवाद का जन्म पाकिस्तान में हुआ था, चाहे वह लश्कर हो या जैश, जिनके शिविर हमने ऑपरेशन सिंदूर में नष्ट कर दिए थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस पाकिस्तान का बचाव कर रही है और हमारे सशस्त्र बलों का अपमान कर रही है।" भाजपा के एक और प्रवक्ता सीआर केसवन ने कहा, “कांग्रेस पार्टी और उसके नेता पाकिस्तान के सबसे बड़े समर्थक बने हुए हैं और भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक दुष्प्रचार में ही अपना असली मकसद तलाशते हैं। यह वाकई शर्मनाक है।”

‘विपक्ष की हार तय’, उपराष्ट्रपति पद को लेकर थरूर ने दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली  भारत के अगले उपराष्ट्रपति का चुनाव 9 सितंबर 2025 को होगा। यह घोषणा निर्वाचन आयोग (EC) ने गुरुवार को की गई। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि निर्वाचन मंडल का गठन पूरा हो चुका है। इस बीच कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की हार को पहले ही तय मानते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल के द्वारा जिसे उम्मीदवार बनाया जाएगा वही उपराष्ट्रपति बनेगा। शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने कहा, “कोई अंदाजा नहीं है कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा। लेकिन ये तय है कि जो भी होगा वो सत्तारूढ़ पार्टी का नामित व्यक्ति होगा। चूंकि यह चुनाव केवल लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मिलकर करते हैं, इसलिए हम पहले से ही जानते हैं कि बहुमत किसके पास है।” थरूर ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति चुनाव की तुलना में उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्य विधानसभाएं हिस्सा नहीं लेतीं, इसलिए परिणाम लगभग तय है। जगदीप धनखड़ ने दिया था इस्तीफा भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में पदभार संभाला था। उन्होंने21 जुलाई 2025 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे का कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बताया गया है। उनका कार्यकाल आधिकारिक रूप से अगस्त 2027 तक होना था, लेकिन उन्होंने करीब दो साल पहले ही पद छोड़ दिया। उपराष्ट्रपति का चुनाव संविधान के अनुच्छेद 66 के तहत होता है। लोकसभा और राज्यसभा के सांसद इस चुनाव में वोट करते हैं। मतदान गुप्त बैलेट प्रणाली के जरिए होता है। इसका संचालन निर्वाचन आयोग करता है। निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही मतदाता सूची की अंतिम प्रति सार्वजनिक की जाएगी, जिसे आयोग के कार्यालय से खरीदा जा सकेगा। 2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए को बहुमत मिला था और राज्यसभा में भी उसका वर्चस्व है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि एनडीए का उम्मीदवार आसानी से उपराष्ट्रपति चुना जाएगा। हालांकि अभी तक किसी भी दल ने आधिकारिक रूप से अपने उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है, लेकिन भाजपा सूत्रों के अनुसार नामों पर मंथन जारी है और अगस्त के मध्य तक उम्मीदवार की घोषणा की जा सकती है।

8000 करोड़ की योजना लॉन्च, ममता बनर्जी का नया बूथ फोकस मिशन शुरू

कलकत्ता  विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने बड़ा दाव खेला है. सरकार ने एक अभूतपूर्व 8000 करोड़ रुपये की लागत वाले जनसंपर्क कार्यक्रम ‘आमादेर पारा, आमादेर समाधान’ (हमारा मोहल्ला, हमारा समाधान) शुरू किया. इस पहल का उद्देश्य पूरे राज्य में स्थानीय समस्याओं जैसे स्ट्रीट लैंप लगाने, सड़कों की स्थिति सुधारने और जलापूर्ति सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों का समाधान करना है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 22 जुलाई को इस योजना की घोषणा करते हुए इसे देश में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम बताया था. इस कार्यक्रम की निगरानी के लिए मुख्य सचिव मनोज पंत के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स गठित की गई है और जिला स्तर पर भी टास्क फोर्स का गठन किया गया है. कई जिलों में शनिवार से ही कैंप शुरू हो गए हैं. ममता बनर्जी ने कहा कि हम प्रत्येक बूथ के लिए 10 लाख रुपये आवंटित कर रहे हैं. कुल मिलाकर राज्य सरकार इस कार्यक्रम पर 8000 करोड़ रुपये खर्च करेगी. यह अभियान दो अगस्त से शुरू हो रहा है. दो महीने तक चलेगा कार्यक्रम सरकार के एक बयान के अनुसार यह कार्यक्रम दो महीने तक चलेगा, जिसके बाद 30 दिनों तक प्रशासनिक मूल्यांकन होगा. लोगों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान तीन महीने की अवधि में किया जाएगा. कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में प्रत्येक दो बूथों के लिए एक कैंप आयोजित किया जा रहा है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि हमने देखा है कि स्थानीय स्तर पर छोटी-छोटी समस्याएं जैसे पानी का नल लगाना, बिजली का खंभा स्थापित करना या क्षेत्र में उचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण हैं. हालांकि, स्थानीय निकाय और जनप्रतिनिधि इन मुद्दों पर काम करते हैं, यह समावेशी पहल एक छत के नीचे सभी समस्याओं को हल करने का अवसर प्रदान करती है. आमादेर पारा, आमादेर समाधान आत्मनिर्भर बंगाल के दृष्टिकोण पर आधारित है. सरकारी अधिकारी प्रत्येक मोहल्ले में मौजूद रहकर शिकायतें सुनेंगे, मांगों को दर्ज करेंगे और प्रक्रिया की देखरेख करेंगे. यह प्रक्रिया लगभग दो महीने तक चलेगी. सरकार ने एक विज्ञापन में कहा कि आप apas.wb.gov.in पर शेड्यूल, स्थिति और प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं. आप तय करें कि आपके बूथ का बजट कैसे खर्च होगा. इस पहल को भारत के इतिहास में अभूतपूर्व बताया जा रहा है जो नीति निर्माण में जनता को केंद्र में रखने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने इसे ‘दुआरे सरकार 2.0’ करार देते हुए कहा कि यह 2021 के चुनावों से पहले शुरू किए गए ‘दुआरे सरकार’ कार्यक्रम की तरह ही प्रभावी हो सकता है. 80,000 बूथों को कवर करने वाला यह अभियान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में छोटे-छोटे मुद्दों जैसे टूटी सड़कों, पानी की कमी और खराब स्ट्रीट लाइट्स को हल करने पर केंद्रित है.

बीजेपी फिलहाल नहीं करेगी अध्यक्ष का खुलासा, क्या VP चुनाव बना देरी की वजह?

नई दिल्ली नए बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव की चर्चा लंबे समय से चल रही है। वहीं पार्टी का संविधान कहता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी हो सकता है जब कम से कम 50 फीसदी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संगठन के चुनाव पूरे हो जाते हैं। बीच में ही उपराष्ट्रपति रहे जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद पार्टी का पूरा फोकस अब शिफ्ट हो गया है। रिपोर्ट्स की मानें तो राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही अब बीजेपी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करेगी। कब है उपराष्ट्रपति का चुनाव? पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मॉनसून सेशन शुरू होते ही अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि स्वास्थ्य कारणों से वह पदमुक्त होना चाहते हैं। वहीं चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव का ऐलान भी कर दिया है। 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होंगे और इसी दिन शाम तक परिणाम भी घोषित कर दिया जाएगा। यह भी तय माना जा रहा है कि विपक्ष इंडिया गठबंधन का कोई साझा उम्मीदवार उतार सकता है। 21 अगस्त नामांकन दाखिल करने का आखिरी तारीख है। ऐसे में विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों के पास उम्मीदवार घोषित करने के लिए पर्याप्त समय है। नंबरगेम की बात करें तो लोकसभा और राज्यसभा में कुल 782 सांसद हैं। एनडीए के पास लोकसभा में 293 तो इंडिया गठबंधन के पास 232 सांसद हैं। वहीं राज्यसभा में एनडीए के पास 133 और इंडिया गठबंधन के पास 107 सांसद हैं। ऐसे में सदन में एनडीए का पलड़ा भारी है। बीजेपी चीफ के चुनाव में देरी के पीछे कारण मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद ही खत्म हो रहा था हालांकि उनकी सफलताओं को देखते हुए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया। अब माना जा रहा है कि बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऐलान के लिए उपराष्ट्रपति चुनाव पूरे होने का इंतजार कर रही है। बिहार चुनाव से पहले बीजेपी को राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान कर देना है। फिलहाल बीजेपी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए फ्लोर मैनेजमेंट में लगी हुई है। इस बार के चुनाव में लोकसभा में एनडीए के बहुमत का आंकड़ा कम हो गया था और राज्यसभा में । ऐसे में यह फाइट आसान नहीं माना जा सकती। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य, राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य और लोकसभा के 543 सदस्य शामिल होते हैं। राज्यसभा में पांच और लोकसभा में एक सीट रिक्त है, जिससे निर्वाचक मंडल की प्रभावी संख्या 782 है और जीतने वाले उम्मीदवार को 391 मतों की आवश्यकता होगी, बशर्ते सभी पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करें। लोकसभा की 543 सीट में से एक सीट, पश्चिम बंगाल में बशीरहाट रिक्त है, जबकि 245 सदस्यीय राज्यसभा में पांच सीट खाली हैं। राज्यसभा में पांच खाली सीट में से चार जम्मू-कश्मीर से और एक पंजाब से है। लोकसभा में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को 542 सदस्यों में से 293 का समर्थन प्राप्त है। सत्तारूढ़ गठबंधन को राज्यसभा (प्रभावी सदस्य संख्या 240) में 129 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, बशर्ते कि मनोनीत सदस्य राजग उम्मीदवार के समर्थन में मतदान करें। सत्तारूढ़ गठबंधन को कुल 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।

राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर सीधा निशाना, 2024 में धांधली का लगाया आरोप, EC को बताया मरा हुआ

नई दिल्ली राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर एक बार फिर जोरदार जुबानी हमला बोला है. राजधानी दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के 'एनुअल लीगल कॉन्क्लेव' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश में चुनाव आयोग का अस्तित्व नहीं रह गया है. उन्होंने कहा कि मैं हाल के इलेक्शन सिस्टम के बारे में बोल रहा हूं. मुझे हमेशा से शक था कि इसमें कुछ गड़बड़ है, 2014 से ही. मुझे गुजरात विधानसभा चुनाव में भी शक था. किसी एक पार्टी की लैंड स्लाइड विक्ट्री का ट्रेंड शक पैदा करता है. लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी को राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात (लोकसभा चुनावों में) में एक भी सीट नहीं मिलती, ये मेरे लिए आश्चर्य की बात थी. जब भी हम बोलते थे तो लोग कहते थे, सबूत कहां है? फिर, महाराष्ट्र में कुछ हुआ. लोकसभा चुनाव में हम जीत गए और फिर चार महीने बाद, हम न सिर्फ हारे, बल्कि पूरी तरह से खत्म हो गए. तीन मजबूत पार्टियां अचानक गायब हो गईं.' देश में अब चुनाव आयोग है ही नहीं राहुल गांधी ने कहा, 'हमने चुनावी धांधलियों की गंभीरता से जांच शुरू की. हमें महाराष्ट्र में यह पता चला, लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच एक करोड़ नए मतदाता सामने आते हैं. इनमें से ज्यादातर वोट भाजपा को जाते हैं… अब मैं बिना किसी संदेह के कहता हूं कि हमारे पास सबूत हैं. हमारे पास ऐसे सबूत हैं जो बताते हैं कि चुनाव आयोग है ही नहीं.' कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव आयोग मतदाता सूची की डिजिटल प्रति उपलब्ध नहीं कराता. इन दस्तावेजों को स्कैन नहीं किया जा सकता. चुनाव आयोग ऐसी प्रतियां क्यों उपलब्ध कराएगा जिन्हें स्कैन नहीं किया जा सकता? उन्होंने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि एक लोकसभा क्षेत्र में हमने मतदाता सूची की जांच की और पाया कि 6.5 लाख मतदाताओं में से 1.5 लाख मतदाता फर्जी थे. लोकसभा चुनावों में हुई थी धांधली राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों में धांधली का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, 'हम इसे साबित करने जा रहे हैं, हमारे पास अब डेटा है. लोकसभा चुनाव में धांधली हो सकती है और धांधली हुई भी थी. भारत में चुनाव आयोग मर चुका है. इसे साबित करने के लिए हमारे पास दस्तावेज हैं. अगर उन्हें 15-20 सीटें कम मिलतीं, तो वह (पीएम मोदी) प्रधानमंत्री नहीं बनते.' रिटायर चुनाव अधिकरियों को भी नहीं छोड़ेंगे: राहुल एक दिन पहले संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि मैं बड़ी गंभीरता के साथ कह रहा हूं कि चुनाव आयोग वोटों की चोरी कर रहा है और वह ऐसा बीजेपी के लिए कर रहा है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग में बैठकर जो भी लोग ये काम कर रहे हैं, वे देश के खिलाफ काम कर रहें हैं. ऊपर से लेकर नीचे तक कोई भी हो हम उसको छोड़ेंगे नहीं. ये राजद्रोह है. उन्होंने चुनाव आयोग के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था, 'आप कहीं भी हो, रिटायर हो या कुछ भी हो, हम आपको ढूंढ निकालेंगे.' वोटर लिस्ट में फर्जीवाड़े का दावा राहुल गांधी ने एक लोकसभा सीट का उदाहरण देते हुए कहा, "हमने एक सीट की वोटर लिस्ट की जांच की। उसमें 6.5 लाख वोटर थे, जिनमें से 1.5 लाख फर्जी निकले।" उनका दावा है कि यह कोई अपवाद नहीं, बल्कि सुनियोजित योजना के तहत किया गया फर्जीवाड़ा है। कांग्रेस नेता ने पार्टी के विधि विभाग द्वारा विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान यह टिप्पणी की। "अगर 15-20 सीटें कम होतीं, मोदी प्रधानमंत्री नहीं बन पाते" राहुल गांधी ने आगे कहा कि बीजेपी की बहुमत सरकार इसी गड़बड़ी के कारण बनी है। उन्होंने कहा, "अगर बीजेपी को 15-20 सीटें कम मिलतीं, तो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनते।" राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, "भारत में चुनाव आयोग अब मर चुका है।" उन्होंने आरोप लगाया कि अब यह संस्था स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही। "शक 2014 से था, अब सबूत मिल गए" राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें 2014 से ही चुनाव प्रणाली पर शक था, और गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान यह शक और गहराया। उन्होंने कहा, “राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में कांग्रेस को एक भी सीट न मिलना, हैरान करने वाला था। जब भी हम बोले, लोग कहते थे सबूत कहां हैं?” महाराष्ट्र बना टर्निंग पॉइंट राहुल गांधी ने दावा किया कि महाराष्ट्र में उन्हें पहली बार ठोस सुराग मिले। उन्होंने कहा, "लोकसभा में हमने जीत हासिल की, लेकिन चार महीने बाद विधानसभा में हमारी बुरी हार हुई। जब हमने जांच की तो पाया कि लोकसभा और विधानसभा के बीच 1 करोड़ नए वोटर जुड़ गए, जिनमें से अधिकतर वोट बीजेपी को गए। अब मेरे पास कोई शक नहीं कि ये चुनाव गड़बड़ी से प्रभावित था।" राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अब इन तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर पूरे देश के सामने यह सच्चाई उजागर करेगी। उन्होंने कहा कि वे इसे कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर उठाएंगे। हम ऐसी धमकियों पर ध्यान नहीं देते: चुनाव आयोग चुनाव आयोग ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मतदाता सूची में फर्जीवाड़ा और चुनावों में धांधली के विस्फोटक आरोपों का तीखा खंडन करते हुए उनके दावों को निराधार और गैरजिम्मेदाराना बताया था. आयोग ने कहा कि जब हम राहुल गांधी को अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए बुलाते हैं तो वह नहीं आते और अब हमारे कर्मचारियों को धमकाने लगे हैं. कांग्रेस नेता के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग ने कहा, 'हम हर दिन लगाए जा रहे ऐसे निराधार आरोपों को नजरअंदाज करते हैं और हर दिन दी जा रही धमकियों के बावजूद, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम कर रहे हैं. हमने अपने सभी चुनाव अधिकारियों से ऐसे गैरजिम्मेदाराना बयानों पर ध्यान नहीं देने के लिए कहा है.'