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अपने ब्यूटी रूटीन में जरूर शामिल करें ये ऑइल

इन दिनों ऑइल ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सबसे पॉप्युलर इंग्रेडिएंट बना हुआ है। फेशियल मॉइस्चराइजर से लेकर हेयर ट्रीटमेंट तक ऑइल ही पसंद किया जा रहा है। लेकिन कई लोग डरते हैं की कहीं ऑइल यूज करने से, खासकर गर्मी या बारिश में गरीजी और ग्रूपी स्किन ना हो जाए। नोट करें कि किसी भी क्रीम बेस्ड प्रोडक्ट को यूज करने से ऑइल बेस्ड प्रोडक्ट ज्यादा फायदेमंद होता है। ये वजन में भी बेहद लाईट होता है। खासकर प्लांट बेस्ड ऑइल आपके स्किन टेक्स्चर के लिए बेहद स्मूद और सूदिंग होते हैं। ये नैचरल ग्लो भी देते हैं। मेकअप रिमूवर के तौर पर ऑइल से बेहतर कुछ नहीं होता। आजकल तो मार्केट में ऑइल बेस्ड शैम्पू भी मिलने लगे हैं जो बालों को ज्यादा ड्राय नहीं होने देते। इसके अतिरिक्तआ कई तरह से ब्यूटी ऑइल यूज किए जा सकते हैं…. अपने डेली फेस मॉइस्चराइजर की जगह ऑइल यूज करें। ये चेहरे की ड्राइनेस दूर करने के साथ ही मॉइस्चर को बनाए रखता है। इसके अलावा आप इसे मसाज ऑइल की तरह भी यूज कर सकते हैं। लेमन यूकेलिप्टस या पिंक ग्रेप फ्रूट वाले ऑइल यूज करें। एक्स्ट्रा रिलैक्सेशन के लिए इसे टेन्स मसल पर ज्यादा यूज करें। इन दिनों ऑलिव ऑइल के साथ लाईट वेट फार्मूला वाले फेशियल क्लेंजर मिलते हैं। ये आपके पोर्स भी बंद नहीं करते और मेकअप भी (वॉटरप्रूफ भी) आसानी से पूरी तरह से साफ करते हैं। इसे पूरे चेहरे पर लगाएं। अच्छे से मसाज करके पानी से धो लें। लाईट वेट बॉडी ऑइल्स यूज करें। आर्गन, सोयाबीन और मोरिंगा ऑइल के ब्लेंड वाला बॉडी ऑइल यूज करें। इसमें वॉयलेट, सैंडलवुड और वैनिला एक्सट्रैक्ट भी होता है। ऑइल बेस्ड एसपीएफ स्प्रे यूज किए जा सकते हैं जो बेहतरीन सनस्क्रीन साबित होते हैं। ये आपकी स्किन और बाल को यूवी डैमेज से बचाते हैं। साथ ही ड्राय स्किन पूरी तरह मॉइस्चराइज रखते हैं। क्लैरिन्स का सनस्क्रीन स्प्रे इन दिनों पसंद किया जा रहा है। फेस-क्लेंजिंग ऑइल की ही तरह ऑइल बेस्ड शैम्पू भी मिलते हैं। ये बालों की गंदगी साफ करने के अलावा बाल सॉफ्ट बनाए रखते हैं, इन्हें वॉल्यूम देते हैं और मॉइस्चर भी बनाए रखते हैं। अद्भुत नतीजे के लिए एक टी-स्पून शैम्पू को थोड़े से पानी में मिक्स करके झाग बनाकर शैम्पू करें। डैम्प और ड्राय हेयर के लिए थोड़ा-सा नॉन-स्टिकी हेयर ऑइल ऑइल मसाज करें। इससे बाल डी-फ्रिज होते हैं, डीटैंगल होते हैं और स्प्लिट एंड्स से बचते हैं। यूवी रेज और हीट डैमेज से भी बचाव हो जाता है। इस तरह के लिप-ऑइल बेहद खूबसूरत लगते हैं. नैचरल ग्लोइंग लिप्स और लव-एट-फर्स्ट-स्वाइप के लिए ये ऑइल जरूर यूज करें। लाईट वेट ऑइल-बेस्ड कंसिस्टेंसी के कारण ये लगाने में बेहद आसान भी होते हैं।  

डायबिटीज से कमजोर हो जाती है प्रतिरक्षा शक्ति

डायबिटीज से शरीर पर कई अन्य दुष्प्रभाव होने की बात सामने आती रही है। एक ताजा शोध में पाया गया कि डायबिटीज पीड़ितों की प्रतिरक्षा शक्ति भी कमजोर हो जाती है, जिस कारण उन्हें संक्रमणों से लड़ने में परेशानी आती है। शोध के अनुसार, खून में शुगर की बढ़ी हुई मात्रा कुछ ऐसे अणुओं को प्रोत्साहित कर देती है जो संक्रमण से लड़ने की शरीर की प्राकृतिक क्रिया में बाधा उत्पन्न करते हैं। क्लीवलैंड के केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रमुख शोधकर्ता जेना किसलर ने कहा, इस शोध के परिणाम अनियंत्रित डायबिटीज वाले मरीजों के लिए अधिक कारगर दवा बनाने में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस शोध से शुगर के स्तर को कम करने और नियंत्रित रखने की जरूरत को बल मिला है। ज्यादा डायबिटीज की स्थिति में ग्लूकोज के टूटने से डाईकार्बोनिल अणु बनते हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए हानिकारक हैं। डायबिटीज से प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे कमजोर होती है: उच्च रक्त शर्करा: रक्त में अतिरिक्त शर्करा, जिसे हाइपरग्लेसेमिया भी कहा जाता है, प्रतिरक्षा कोशिकाओं के कार्य को बाधित करता है, जिससे संक्रमण से लड़ना मुश्किल हो जाता है. सूजन: मधुमेह से पुरानी सूजन हो सकती है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती है और संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाती है. घाव भरने में देरी: उच्च रक्त शर्करा के कारण, रक्त गाढ़ा हो जाता है, जिससे श्वेत रक्त कोशिकाएं (जो संक्रमण से लड़ती हैं) घाव वाली जगह तक पहुंचने और संक्रमण से लड़ने में अधिक समय लेती हैं. न्यूरोपैथी: मधुमेह से तंत्रिका क्षति (न्यूरोपैथी) हो सकती है, जो संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकती है, खासकर पैरों और त्वचा में. कमजोर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया: मधुमेह से पीड़ित लोगों में, प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया कमजोर हो सकती है, जिससे वे संक्रमणों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं. निष्कर्ष: डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मधुमेह रोगियों को अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने के लिए उचित आहार, व्यायाम और दवाओं का पालन करना चाहिए.  

इन तरीकों को अपनाकर बचा सकते हैं ई-मनी

भारत सरकार और रिजर्व बैंक अगले दो वर्षों के भीतर देश में ई-भुगतान (इलेक्ट्रॉ निक पेमेंट) प्रणाली को बढ़ाना चाहते हैं। ई-भुगतान यानी बिना नगदी के होने वाले लेनदेन। इन तरीकों में कार्ड, इंटरनेट अथवा मोबाइल से रकम का भुगतान किया जाता है। हालांकि इस तरीके में भी धोखाधड़ी तथा हैकिंग का खतरा बना रहता है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे तरीकों को, जिनसे ई-ट्रांसेक्शरन के दौरान सुरक्षा बनी रहे। सार्वजनिक कम्यूीान टर्स का इस्तेगमाल न करें ऑनलाइन बैंकिंग लेनदेन के लिए सार्वजनिक कम्यूरटर्स का प्रयोग न करें। अगर ऐसा करना भी पड़े तो यथा संभव अपने कंप्यूटर पर पहुंचने के साथ ही पासवर्ड को बदल दें। बैंकिंग जानकारी चाहने वाले ईमेल्स से बचें यदि आपके कोई ऐसा ईमेल्स। प्राप्त हों, जिनमें आपके बैंक खाते से संबंधित जानकारी मांगी जाए, तो उन्हेंभ डिलीट कर दें या फिर नजरअंदाज करें। यह धोखाधड़ी के तरीकों में से एक है। इससे आपका कम्यूहता टर भी हैक हो सकता है। ईमेल की लिंक्स पर क्लिक करते समय रहें सावधान अंजान अथवा संदेहास्पाद प्रकार के ईमेल्स को खोलने से बचें। यदि खोलें भी तो, उसमें दिए गए किसी लिंक पर क्लिक न करें। यदि आपको किसी वेबसाइट पर जाना है तो मैनुअल तरीके से उसका एड्रेड टाइप करिए। कई बार धोखेबाज, नकली वेबसाइट बनाकर उसका लिंक भेज देते हैं। कंप्यूटर का एंटी वायरस अपडेट रखें अपने कंप्यूटर के एंटी-वायरस को हमेशा अपडेट रखें। अच्छी कंपनी का एंटी वायरस इस्तेमाल करें। मजबूत पासवर्ड बनाएं बैंक खातों के लिए पासवर्ड बनाते समय सतर्क रहें। पासवर्ड बनाते समय लोअर केस, अपर केस, अंकों तथा स्पे शल कैरेक्टिर्स का इस्तेपमाल करें। पासवर्ड के रूप में जन्मेतिथि, वर्षगांठ, परिजनो के नाम या ऐसा कुछ भी न बनाएं जिसके बारे में आसानी से पता लगाया जा सके। हमेशा एचटीटीपीएस का ध्यासन रखें यदि आप बैंकिंग अथवा भुगतान वेबसाइट्स का उपयोग करते हैं तो हमेशा ध्यान रखें कि उसके एड्रेस के पहले एचटीटीपीएस जरूर लिखा हो। सामान्य एचटीटीपी का अर्थ होता है कि यह वेबसाइट सुरक्षित नहीं है। मोबाइल कनेक्शून को चेक करते रहें इस बात का हमेशा ध्याचन रखें कि आपका मोबाइल फोन कनेक्शिन ज्या दा दिनों तक बंद न रहे। यदि आपका मोबाइल काम नहीं कर रहा है तो संभव है कि उसके सिम की क्लो निंग कर ली गई हो। या फिर किसी धोखेबाज ने आपके नाम से नई सिम जारी करवा ली हो।  

तकनीक के साथ बढ़ा अपराध: साइबर क्राइम के केस चार गुना बढ़े, महाराष्ट्र-यूपी सबसे ज्यादा प्रभावित

नई दिल्ली डिजिटल इंडिया के युग में साइबर अपराधों में तेजी से वृद्धि हो रही है. गृह मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि साइबर अपराधों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है. पिछले चार वर्षों में ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल गिरफ्तारी, सेक्सटॉर्शन और साइबर हमलों के मामलों में 401 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है. वर्ष 2021 में लगभग 4.5 लाख साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए थे. साल 2024 तक साइबर क्राइम के मामलों की संख्या 22 लाख से अधिक हो गई, जो कि पिछले आंकड़ों की तुलना में चार गुना से ज्यादा है. यह वृद्धि यहीं नहीं रुकी, क्योंकि 2025 के पहले छह महीनों में ही 30 जून तक 12 लाख से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो 2021 और 2022 के वार्षिक आंकड़ों को भी पार कर चुके हैं. इस संदर्भ में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित राज्यों के रूप में सामने आए हैं. इस वर्ष महाराष्ट्र में अब तक 1.6 लाख साइबर अपराध के मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि उत्तर प्रदेश 1.4 लाख मामलों के साथ दूसरे और कर्नाटक 1 लाख मामलों के साथ तीसरे स्थान पर है. पिछले तीन वर्षों से ये तीनों राज्य साइबर क्राइम के मामले में सबसे अधिक प्रभावित रहे हैं. इसके अलावा, पिछले चार वर्षों में गुजरात, ओडिशा और कर्नाटक में साइबर अपराध में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिसमें गुजरात में 824 फीसदी, ओडिशा में 783 फीसदी और कर्नाटक में 763 फीसदी का इजाफा हुआ है. बच्चों पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा साइबर अपराध के मामले में बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2018 से 2022 के बीच तीन हजार से अधिक चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले दर्ज किए गए हैं. इसके अलावा, 18 साल से कम उम्र के बच्चों के खिलाफ स्टॉकिंग के 500 मामले भी सामने आए हैं. इन अपराधों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जहां 2021 में बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, वहीं 2022 में यह आंकड़ा 32.5 प्रतिशत तक पहुंच गया. शेयर हो रही थी चाइल्ड पोर्नोग्राफी सोशल मीडिया, चैट रूम और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े अपराधों में वृद्धि देखी गई है. पिछले वर्ष, इंडिया टुडे की OSINT टीम ने ऐसे टेलीग्राम चैनलों का खुलासा किया, जो चाइल्ड पोर्नोग्राफी का बड़े पैमाने पर वितरण कर रहे थे. इस खुलासे के बाद, टेलीग्राम को इन अकाउंट्स को हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा. भारत में हर मिनट 761 साइबर अटैक देश का सुरक्षा ढांचा लगातार साइबर हमलों का शिकार हो रहा है. डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (DSCI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत में हर मिनट औसतन 761 साइबर हमले करने के प्रयास हुए. इनमें सबसे अधिक हमले स्वास्थ्य, आतिथ्य और बैंकिंग क्षेत्रों पर देखे गए हैं. पहलगाम हमले के बाद साइबर अटैक साल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत में साइबर हमलों की संख्या में भारी वृद्धि हुई. इस अवधि में 15 लाख से अधिक साइबर हमले दर्ज किए गए, जिनमें मुख्य रूप से देश के रक्षा, बिजली, दूरसंचार, वित्त और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया गया. जांच एजेंसियों के अनुसार, ये हमले पाकिस्तान और उसके सहयोगी हैकिंग समूहों द्वारा सुनियोजित तरीके से किए गए थे. ये है डिजिटल क्राइम का नया चेहरा भारत अब साइबर अपराध के एक अत्यंत गंभीर चरण में प्रवेश कर चुका है, जैसा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है. धोखाधड़ी और यौन शोषण जैसे अपराध आम जनता को प्रभावित कर रहे हैं, जबकि विदेशी हैकिंग नेटवर्क देश की रणनीतिक सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं.

स्वास्थ्य के नाम पर ज़हर! मिलावटी हरी सब्जियों से तिल-तिल कर मर रहा है शरीर

भोपाल  स्वस्थ समझकर खा रहे हरी सब्जियों में छुपा हो सकता है कीटनाशकों का जहर! जानिए कैसे ये सब्जियां बन रही हैं बीमारियों की जड़ और क्या है इससे बचने का सही तरीका. सर्दियों में जैसे ही पालक, मेथी, बथुआ और सरसों की बहार बाजार में आती है, लोग इन्हें विटामिन और आयरन से भरपूर सुपरफूड मानकर थालियों में सजाना शुरू कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये सब्जियां जिन खेतों से आती हैं, वहां क्या छिड़का जा रहा है? रसायनों से भरी सब्जियां, स्वाद से पहले ज़हर किसानों द्वारा तेजी से उत्पादन बढ़ाने और फसल को कीटों से बचाने के लिए सिस्टमिक कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है. ये रसायन सीधे पौधे की जड़ों और पत्तियों में समा जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इनका असर सब्जियों से हटाने के लिए 7–10 दिन का समय देना चाहिए, लेकिन अधिकतर किसान इस निर्देश को नजरअंदाज करते हैं. धीमा जहर: स्वास्थ्य पर घातक असर डॉक्टर मनीष खेडेकर के अनुसार, लंबे समय तक ऐसे कीटनाशक खा लेने से शरीर पर गहरा असर होता है. ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी बीमारियां पहले आती हैं और बाद में कैंसर, किडनी व लिवर डैमेज जैसे घातक परिणाम सामने आते हैं बच्चों और बुजुर्गों पर असर और भी तेज़ होता है क्या करें? ये हैं सेफ्टी के उपाय सब्जियों को धोएं, भिगोएं और फिर पकाएं जहां संभव हो, जैविक खेती से आई सब्जियां खरीदें खुद छोटे पैमाने पर किचन गार्डन या ऑर्गेनिक फार्मिंग अपनाएं बाजार से आने वाली हरी पत्तेदार सब्जियों को नमक या सिरके के पानी में भिगोना असरदार हो सकता है प्राकृतिक खेती ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प नीम का अर्क, गोमूत्र, जीवामृत, राख जैसे पुराने संसाधन न सिर्फ फसल को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि मानव शरीर के लिए भी पूरी तरह सेहतमंद होते हैं. सरकारें भी अब प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने लगी हैं, लेकिन जब तक ग्राहक खुद जागरूक नहीं होंगे, बदलाव धीमा ही रहेगा.

ऐंड्रॉयड यूजर्स के लिए 10 काम के ट्रिक्स

ऐंड्रॉयड एक ओपन प्लैटफॉर्म है, इसलिए इसमें कस्टमाइजेशन का काफी स्कोप रहता है। अपने फोन को पर्सनलाइज करने के अलावा भी कुछ ऐसे खास ट्रिक्स हैं जिनसे अपने फोन को आप साफ सुथरा रखकर उसकी बैटरी लाइफ का मैक्सिमम फायदा उठा सकते हैं। ये 10 ट्रिक्स हर ऐंड्रॉयड यूजर को मालूम होनी चाहिए। गूगल नाउ सेटअप करना गूगल नाउ को अपने पर्सनल असिस्टेंट की तरह समझें। गूगल ऐप खोलें, गेट गूगल नाउ पर टैप करें और अपने प्रेफरेंस भर दें। अब आप गूगल नाउ को अपने फेवरिट स्टॉक्स, स्पोर्ट्स टीम्स और दूसरी चीजें बताकर उनसे संबंधित नोटिफिकेशन्स पा सकते हैं। आप गूगलल मैप्स के लिए गूगल नाउ को यह भी बता सकते हैं कि आप किस वाहन से सफर करना पसंद करते हैं, मसलन कार, बस, मेट्रो इत्यादि। लॉन्चर और लॉक स्क्रीन रिप्लेसमेंट्स का इस्तेमाल करें एक ही तरह का वेदर विजेट देखते-देखते परेशान हो गए हैं? आपको बता दें कि आप गूगल प्ले स्टोर से ऐसे फ्री ऐप्स डाउनलोड कर सकते हैं जिनसे आप अपने ऐंड्रॉयड फोन का पूरा इंटरफेस बदल सकते हैं। पावर सेंविग मोड सेटिंग्स मेन्यू पर जाएंग और पावर सेविंग मोड को ऑन कर लें। इससे बैटरी काफी हद तक बचती है। कुछ फोन्स में हाई लेवल, बैटरी सेविंग मोड भी होता है। उदाहरण के लिए, सैमसंग गैलक्सी ै6 के अल्ट्रा पावर सेविंग मोड से आप कॉल और मेसेज कर सकते हैं, इंटरनेट ब्राउज कर सकते हैं। सभी ऐंड्रॉयड फोन्स में बैटरी-सेवर हो, यह जरूरी नहीं। लेकिन अधिकतर में होता है। एक एक्स्ट्रा बैटरी रखें गौर कीजिएगा अकसर फोन्स की बैटरी गलत टाइम पर बंद हो जाती है। वहीं जाकर जहां चार्ज करने की सुविधा हो ही न। कई ऐंड्रॉयड फोन्स की बैटरी रिमूवेबल होती है। ऐसे में आप एक अलग बैटरी खरीदकर मुश्किल वक्त के लिए रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर बैटरी रिप्लेस कर सकते हैं। अब तो खैर पावर बैंक्स भी ऐसी मुश्किल घड़ी से आपको उबार सकते हैं। गूगल क्रोम साइन इन करें अगर आप अपने फोन में मौजूद गूगल क्रोम ब्राउजर पर अपने गूगल अकाउंट में साइन-इन कर लेते हैं तो आपके बुकमार्क्स और प्रेफरेंस खुद-ब-खुद सेव होने लगेंगे। ऐप्स को फोल्डर्स में ऑर्गनाइज कर लें आप अपने ऐप्स को अलग-अलग कैटिगरी मे रखने के लिए फोल्डर्स क्रिएट कर सकते हैं। इससे बिखराव कम होता है और जल्दबाजी में ढूंढने पर ऐप जल्दी मिल जाता है। फोल्डर क्रिएट करने के लिए एक ऐप को प्रेस कर होल्ड करें और उसे खींचकर ऊपर बाईं तरफ क्रिएट फोल्डर ऑप्शन पर ले जाएं। कुछ फोन्स में आप आईओएस की तरह एक ऐप पर दूसरे ऐप को ड्रैग कर ड्रॉप कर सकते हैं। फोल्डर खुद-ब-खुद बन जाएगा। थर्ड पार्टी कीबोर्ड यूज करें कई बार स्वाइप करना टाइप करने से आसान लगता है। जरूरी नहीं कि आप सिर्फ गूगल के कीबोर्ड का ही इस्तेमाल करें, कई सारे कीबोर्ड ऐप्स हैं जिन्हें गूगल प्ले स्टोर से चुना जा सकता है। मसलन, स्वायप के जरिये आप टाइप करने की जगह लेटर्स को स्वाइप कर लिख सकते हैं। क्रोम में बैंडविड्थ मैनेजमेंट अजस्ट करें आप क्रोम में रिड्यूस डेटा यूजेज ऑप्शन ऑन कर सकते हैं जिससे बेकार का वाइटस्पेस हटाकर क्रोम छोटे फॉर्मैट में तस्वीरें ट्रांसलेट कर देता है। इससे ब्राउजिंग के वक्त काफी डेटा बचता है। डेटा सेफ रखने के लिए गूगल ऑथेंटिकेटर गूगल ऑथेंटिकेटर आपको आपके गूगल अकाउंट के लिए टू-स्टेप वेरिफिकेशन सिक्यॉरिटी देताहै। ताकि, जब भी आप लॉग इन करें, आपको ऐप द्वारा जेनरेट किया हुआ एक कोड आपके पासवर्ड के साथ नजर आए। इससे अजनबी आपके अकाउंट में लॉग इन नहीं कर सकेंगे। डिफॉल्ट ऐप्स बदलें सेटिंग्स में नेविगेट कर ऑल पर जाएं और क्लियर डिफॉल्ट्स को प्रेस करें। सभी डिफॉल्ट सेटिंग्स और ऐप्स हट जाएंगे। इसके बाद आप अपने फेवरिट ऐप्स को अपनी सहूलियत के हिसाब से सेटअप कर सकते हैं।  

बचत के साथ खरीदारी में ही है समझदारी

शॉपिंग करने का क्रेज है, तो थोड़ा प्लान करके चलने से इसका मजा और भी बढ़ जाएगा। आखिर इस तरह कुछ बचत होगी और आपकी पसंद का सामान भी आएगा। जानते हैं इसी से जुड़े कुछ टिप्स… अगर आपको शॉपिंग करने का क्रेज है, तो आपका मन सेल सीजन में और भी उतावला हो जाता होगा। लेकिन शॉपिंग पर जाने से पहले उन बातों का जरूर ध्यान रखें, जिनसे सेविंग भी हो जाए और खरीदारी भी बढ़िया हो। सेल का इंतजार करें अगर आपको एक साथ ज्यादा चीजें खरीदने की आदत है, तो बेहतर होगा कि सेल सीजन का वेट करें। जब तक सेल ना लगे, तब तक मॉल में शॉपिंग करना बिल्कुल अवॉयड करें। यहां आपको ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। शॉपिंग का अलग अकाउंट जब भी आपको पे चेक मिले, तो इसे दो अकाउंट्स में डिवाइड करें। एक को अपने बिल्स और जरूरतों के लिए रखें और दूसरे को शॉपिंग के लिए। दूसरे अकाउंट से शॉपिंग वाला दिन आने तक कोई ट्रांजैक्शन ना करें। फिजूल शॉपिंग से बचें ऐसा कुछ भी नहीं खरीदें, जिसकी जरूरत आपको तुरंत न हो। कभी तो इसकी जरूरत होगी वाली सोच रखेंगे, तो फालतू की शॉपिंग ज्यादा होगी। इस पैसे को बचाएं और अपनी जरूरत की चीजों पर खर्च करें। खर्चों का हिसाब-किताब अपने खर्चों का ट्रैक रखना बेहद जरूरी है। बेहतर है कि अपनी डिजिटल डायरी या मोबाइल फोन में नोट बनाकर आप रोजाना होने वाले खर्च का ध्यान रखें। हर महीने के अंत में चेक करें कि कहां सेविंग हो सकती थी। अगर हो सके, तो महीने की बजाय हफ्ते का हिसाब रखें। सेविंग कर दें शुरू आमतौर पर सेल जनवरी और अगस्त के आसपास लगती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए एक-दो महीने पहले ही सेविंग्स करना शुरू कर दें। मॉनसून में भी बड़ी-बड़ी सेल लगा करती हैं। ऐसे में आप सेल शुरू होने से एक महीने पहले ही सेविंग शुरू कर दें। एक बार करेंगे, तो आपको खुद ही इसमें मजा आने लगेगा। तो मॉनसून सेल एन्जॉय करने की तैयारी अभी से शुरू कर दें!  

दमे की बीमारी में एलर्जी से बचना जरुरी

महानगरों में बढ़ते प्रदूषण ने स्वच्छ हवा, पानी, रोशनी और हरियाली को किताबी बातें बना दिया है। प्रदूषण के कारण ही सांस की बीमारी एक आम समस्या बन चुकी है। बड़ी संख्या में पेड़-पौधों के कटाव से वातावरण दूषित होता है। सांसों की एलर्जी अर्थात दमा भी इसी दूषित वातावरण की ही देन है। आज न केवल बड़े बल्कि छोटे-छोटे बच्चे और नवजात शिशु भी सांस की घुटन से राहत पाने के लिए अपने साथ नेबुलाइजर रखने को विवश हैं। दमा के बारे में अलग-अलग डॉक्टर अलग-अलग राय रखते हैं। कुछ डॉक्टरों के अनुसार यह श्वास का स्नायुविक रोग रेसपीरेटरी न्यूरोसिस है तो कुछ कहते हैं कि यह रोग रक्त में एलर्जी और टॉक्सिन्स उत्पन्न हो जाने से होता है। जो वायु हम ग्रहण करते हैं वह नाक, गला, फैंरिक्स और वायुनली से होते हुए श्वासनली के द्वारा फेफड़ों में पहुंचती है और जब हम सांस छोड़ते हैं तो इसी प्रकार वायु शरीर से बाहर निकल जाती है। वायु का यह स्वतंत्र ग्रहण और निष्कासन ही हमारी श्वसन क्रिया का आधार है। दमा को एलर्जी का ही एक प्रकार माना जाता है। कोई भी ऐसा पदार्थ जो शरीर के लिए हानिकारक हो, एलर्जी कहलाता है। जब यह पदार्थ हमारे शरीर में प्रवेश करता है तो शरीर इसका विरोध करता है। जब एलर्जीकारक हमारी श्वसन नली में प्रवेश करता है तो फेफड़ों के बचाव के लिए हमारी श्वसन व्यवस्था उसे बीच में ही रोकने का प्रयास करती है, इससे सांस लेने में कष्ट होता है। जो एलर्जी पहले से ही सिस्टम में प्रवेश कर चुकी होती है उससे बलगम और खांसी होती है और गले में सूजन आ जाती है और उसी से श्वास नली में रुकावट आ जाती है और सांस लेने में कठिनाई होती है। इस स्थिति के बार-बार उत्पन्न होने की दशा में इसे दमा की संज्ञा दी जाती है। दमा कोई बीमारी नहीं अपितु एक एलर्जी तथा वंशानुगत रोग है। सांस लेने में तकलीफ होना, दम घुटना, श्वास लेते समय सीटी जैसी आवाज होना, अक्सर छाती का दबाव या भारीपन महसूस होना, खांसते समय पसीना आना, चेहरे पर पीलापन, हाथ-पैर ठंडे रहना व्यायाम आदि करने से सांस फूल जाना, आदि कुछ ऐसे लक्षण हैं जिसके द्वारा दमा की पहचान संभव है। लगातार या बार-बार खांसी हो या दो सप्ताह से भी अधिक समय से खांसी ठीक न हो रही हो तो भी तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना उचित होता है अन्यथा आगे चलकर आपको दमे का सामना करना पड़ सकता है। दमे का दौरा अचानक और वह भी प्रायः मध्यरात्रि के बाद ही होता है। रक्त के प्लाज्मा कोर्टिसोल लेवल में प्रतिकूल परिवर्तन आने से फेफड़ों की नलिकाओं में ऐंठन पैदा हो जाती है और रोगी को दमे का दौरा पड़ जाता है। दौरे के समय रोगी को लेटने में कठिनाई होती है इसलिए वह बैठकर ही अपना समय व्यतीत करता है। दमा के उपचार के लिए ज्यादातर इन्हेलर दवाएं दी जाती हैं। दवा देने की अन्य विधियां भी हैं जैसे पंप के पाउडर सूंघने देना और सोल्यूशन नेबुलाइजर में दवा का धुआं बनाकर उस धुएं को इनहेल करने देना। इसके अतिरिक्त गोलियों व इंजेक्शन के रूप में भी दवा दी जाती है। दवाइयों के अतिरिक्त कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर भी दमे को सुरक्षित व प्रभावशाली ढंग से नियंत्रण में रखा जा सकता है। जिन्हें धूल से एलर्जी है उनके लिए आवश्यक है कि वे इससे बचें इसके लिए घर के वातावरण को साफ-सुथरा रखें। घरों में मोटे पर्दे, गलीचे आदि न लगाएं। ऐसे में सफाई के लिए झाडू के स्थान पर वैक्यूम क्लीनर का प्रयोग करें क्योंकि यह धूल के महीन से महीन कण खींच लेता है। फर्श की सफाई गीले कपड़े से करें। पालतू जानवर न पालें और तेज सुंगध से बचें आदि। विभिन्न रोगियों में एलर्जीकारक तत्व अलग अलग होते हैं। जो विभिन्न क्रियाओं से उनके भीतर प्रवेश कर सकते हैं जैसे धारा के पास रहना, आटा छानना गेहूं साफ करना आदि। इनसे भी दमे का दौरा पड़ सकता है। इसी प्रकार फूड एलर्जी का ध्यान रखना जरूरी है। खट्टी चीजें, तले हुए पदार्थ व दही न लें। जिन खाद्य पदार्थों में रंग का प्रयोग किया गया हो उनसे बचें। किसी भी दवा का लंबे समय तक सेवन करते रहना भी नुकसानदायक हो सकता है। विभिन्न रोगियों पर किए परीक्षणों से डॉक्टरों ने यह निष्कर्ष भी निकाला है कि कई बार क्रोध, चिन्ता, डर, उत्तेजना या अधिक मेहनत करने के कारण हुई थकावट भी इस रोग को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में आवश्यक है कि ऐसी स्थिति से बचा जाए। प्राकृतिक चिकित्सा के पक्षधरों का मानना है कि दोषपूर्ण खान-पान रहन-सहन, बढ़ती भौतिक सुख-सुविधाएं और घटता हुआ शारीरिक श्रम और व्यायाम से जी चुराने की प्रवृत्ति ही दमे के लिए उत्तरदायी है। जलनेति, सुत्रनेति और कुंजल आदि क्रियाओं का दमे के उपचार में महत्वपूर्ण स्थान है। जलनेति और सूत्रनेति करने से नासामार्ग के अवरोध दूर हो जाते हैं और रोगी को सांस लेने में सुविधा होती है। ऊपरी श्वसन मार्ग को साफ करने के लिए ये क्रियाएं बहुत उपयोग होती हैं। ये क्रियाएं श्वसन मार्ग के संक्रमण को न्यूनतम करने का प्रयास करती हैं। दूसरी क्रिया कुंजल है। इस क्रिया द्वारा सभी अनपचे खाद्य पदार्थों को रोगी के शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। प्रायः इस क्रिया के बाद अम्लीय गंध लिए हरा-पीला सा म्यूक्स जैसा स्राव निकलता है। इस क्रिया से भी रोगी को आराम मिलता है। इनके अतिरिक्त गहरी सांस लेना और प्राणायाम ऐसी क्रियाएं हैं जो दमा के रोगियों के लिए बहुत लाभकारी होती हैं। दमा के रोगियों को अपने आहार तथा सांस में कठिनाई का रिकार्ड रखना चाहिए। एक या दो मास इस तरह का रिकार्ड रखने पर रोगी की यह ज्ञात हो जाता है कि कौन सी चीजें खाने पर उसकी तकलीफ बढ़ती है। इससे रोगी के आहार से आसानी से एलर्जीकारक चीजों को निकाला जा सकता है। दमा के रोगी को तरोताजा अहसास व शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम जैसे जॉगिंग, स्वीमिंग तथा योगासन आदि करने चाहिए। तैरने से श्वसन क्षमता में वृद्धि होती है। खुली हवा में घूमना-फिरना भी लाभकारी है इससे ताजी हवा फेफड़ों में पहुंचती है। हालांकि … Read more

कम बजट में फ्रेंडली Dreame रोबोट वैक्यूम क्लीनर, घर में खुद लगाएगा झाड़ू और पोंछा

Dreame Technology ने भारत में न्यू Robot Vacuume Cleaner लॉन्च कर दिया है, जिसका नाम Dreame F10 है. इस रोबोट को खासतौर से भारतीय घरों के लिए तैयार किया गया है. कंपनी का दावा है कि यह घर को बड़े ही शानदार तरीके क्लीन कर सकता है, जिसके लिए इसमें पावरफुल सक्शन, स्मार्ट मैपिंग और मोपिंग का फीचर मिलता है. इसमें इंटेलीजेंट नेविगेशन फीचर भी प्रोवाइड कराया है.   Dreame F10 की कीमत 21,999 रुपये है और यह Amazon India पर उपलब्ध होगा. Amazon Prime Day ऑफर के तहत इसको डिस्काउंट के साथ खरीदा जा सकता है, जिसकी कीमत 19,999 रुपये हो जाएगी. Amazon Prime Day Sale 12 से 14 जुलाई 2025 तक चलेगी.   Dreame F10 Robot Vacuum Cleaner के फीचर  Dreame F10 Robot Vacuum Cleaner को ब्रांड ने 2 इन-1 मोड में लॉन्च किया है. इसमें वैक्यूम और मोप का फीचर मिलता है, जिसे सिंपल शब्दों में झाड़ू और पोंछा के रूप में समझ सकते हैं. यह डिवाइस 570ml के डस्टबिन के साथ आता है, जो डस्ट, बाल आदि को कलेक्ट करता है. इसके अंदर 235ml का वॉटर टैंक भी मिलेगा.  Dreame F10 Robot Vacuum Cleaner के अंदर कंपनी का Vormax Standard सिस्टम दिया है और यह 13,000Pa सक्शन के साथ आता है. इसमें इंटेलीजेंट कारपेट बूस्ट फंक्शन दिया गया है, जो कारपेट के मुताबिक अपने सक्शन को एडजेस्ट करता है.  Dreame F10 घरों में 20mm तक की क्लाइंबिंग कर सकता है   Dreame F10 रोबो वैक्यूम क्लीन घरों में 20mm तक की क्लाइंबिंग कर सकता है. आमतौर पर लिविंग रूम और बालकनी के फ्लोरिंग में थोड़ा अंतर होता है, जिसकी वजह से कई रोबोट वैक्यूम क्लीनर उसपर चढ़ नहीं पाते हैं लेकिन Dreame F10 के साथ ये प्रोब्लम नहीं होगी.  Dreame F10 Robot Vacuum Cleaner में है खास टेक्नोलॉजी  Dreame F10 के साथ Smart Pathfinder Technology का यूज किया गया है, जो घर की क्लीनिंग के लिए बेहतर तरीके से मैपिंग करता है. साथ ही यह खुद को ऑब्स्टेकल और सीढ़ियों पर गिरने से बचाता है. मल्टीमैपिंग का भी फीचर दिया गया है  कस्टमाइज क्लीनिंग के लिए आप खुद की पर्सनालाइज मैपिंग कर सकते हैं. इसके अंदर आपको मल्टी फ्लोर मैपिंग, No-Mob Zones और वर्चुअल बाउंड्रीज का फीचर मिलता है. यह Alexa, Google Assistant और Siri के सपोर्ट के साथ आता है.  Dreame F10 में है इतनी बड़ी बैटरी  रोबोट वैक्यूम क्लीन के अंदर 5200mAh की बैटरी दी गई है. सिंगल चार्ज में जो 300 मिनट्स तक का क्लीनिंग टाइम प्रोवाइड कराता है. बैटरी लो होने पर यह रोबो वैक्यूम ऑटोमैटिक डॉक पर वापस आ जाता है.  पिक और ड्रॉप की सर्विस  Dreame F10 की आफ्टर सेल्स सर्विस की बात करें तो कंपनी ने 1 साल की वारंटी का ऐलान कर चुका है. इसके साथ कस्टमर हेल्पलाइन नंबर भी दिया है. साथ ही कंपनी ने 165 शहरों में सर्विसिंग और रिपेयरिंग के लिए पिक और ड्रॉप की सर्विस प्रोवाइड कराई है, जहां प्रोडक्ट खराब होने की कंडिशन में कंपनी का कर्मचारी कस्टमर के घर पहुंचेगा और प्रोडक्ट को कलेक्ट करेगा. फिर प्रोडक्ट ठीक होने के बाद कंपनी का कर्मचारी या पार्टनर उसे घर पर वापस कर जाएगा. 

बहुत ज्यादा टेंशन होने पर ऐसे करें मन शांत

रोजाना के बिजी शेड्यूल की वजह से ज्यादा तर लोग खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते। भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत से लोग तनावग्रस्त हैं। तनाव की वजह से मन अशांत रहता है और बड़े फैसले लेना मुश्किल होता है। टेंशन के बीच मन को शांत रखना सरल काम नहीं है, लेकिन नामुमकिन भी नहीं है। छोटे-छोटे तरीकों को अपनाकर आप टेंशन में भी मन को शांत रख सकते हैं। जानें, मन शांत करने के 5 तरीके- गहरी सांस लेना अपनी नाक से गहरी सांस लें और फिर कुछ सेकंड के लिए रोककर रखें बाद में अपने मुंह से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। ऐसा करते समय अपनी सांस की अनुभूति पर ध्यान केंद्रित करें। माइंडफुलनेस प्रेक्टिस आएगी काम अपने आस-पास के माहौल और शरीर की संवेदनाओं पर ध्यान दें। आप 5-4-3-2-1 तकनीक को आजमा सकते हैं। इसके लिए 5 ऐसी चीजें पहचानें जिन्हें आप देख सकते हैं, 4 ऐसी चीजें जिन्हें आप छू सकते हैं, 3 ऐसी चीजें जिन्हें आप सुन सकते हैं, 2 ऐसी चीजें जिन्हें आप सूंघ सकते हैं और 1 ऐसी चीज जिसे आप चख सकते हैं। टहलने से मिलेगी मदद टेंशन के बीच मन को शांत रखने का सबसे अच्छा तरीका है कुछ मिनटों के लिए बाहर निकलें और वॉक करें। इस दौरान अपने आस-पास के वातावरण पर ध्यान केंद्रित करें। शांत करने वाले म्यूजिक को सुनें बहुत ज्यादा टेंशन के बीच ऐसा करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन अगर आप गलत फैसले लेने से बचना चाहते हैं तो मन शांत करने के लिए शांत करने वाले म्यूजिक को सुनें। म्यूजिक हृदय गति और ब्लडप्रेशर को कम करने में मदद कर सकता है। च्युइंग गम आएगी काम बहुत से लोग इसे खाना पसंद नहीं करते हैं लेकिन स्ट्रेस के बीच मन शांत करने में ये आपकी मदद कर सकती है। जब भी आपको तनाव महसूस हो तो च्युइंग गम चबाना शुरू कर दें। दरअसल च्युइंग गम चबाने से तनाव से जुड़े हार्मोन कोर्टिसोल के लेवल को कम करने में मदद मिलती है , जिससे यह तनाव को जल्दी से मैनेज करने में मदद करता है। डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। किसी चिकित्सीय स्थिति के बारे में किसी भी सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लें।