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देश के लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करती रही है कांग्रेस-विश्वास सारंग

भोपाल, 13/08/2025। मध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि देश में लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी का शासन रहा और वह शुरू से देश के लोकतंत्र और निष्पक्ष संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करती रही है। वोट चोरी जैसे शब्द का प्रयोग करके राहुल गांधी देश के लोकतंत्र को अपमानित करने का काम कर रहे हैं, जो बिहार चुनाव में अपनी सुनिश्चित हार से जनता का ध्यान बंटाने तथा अपनी फेस सेविंग की कोशिश मात्र है।लोकतंत्र को बदनाम और उसका दुरुपयोग करती रही है कांग्रेसमध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि आजादी के बाद देश की जनता ने कांग्रेस को शासन करने का अधिकार दिया, लेकिन 1952 और उसके बाद जब-जब भी नेहरू परिवार और कांग्रेस की सरकारें देश में रही हैं, उन्होंने लोकतंत्र को बदनाम किया तथा उसका दुरुपयोग किया है। उन्होंने कहा कि 1952 में जब बाबा साहब अंबेडकर जी चुनाव लड़े थे, पं. नेहरू ने स्वयं उन्हें चुनाव हराने के लिए षडयंत्र रचा था। उनके चुनाव में 74433 वोटों को खारिज कराया गया था, जबकि अंबेडकर जी सिर्फ 14561 वोटों से चुनाव हारे थे। उसके बाद यह सिलसिला लगातार चलता रहा। 1952 के बाद 1957, आपातकाल और आपातकाल के बाद भी कांग्रेस ने हमेशा लोकतंत्र के दुरुपयोग का प्रयास किया। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी 90 से अधिक चुनाव हार चुकी है। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी की स्थिति पूरे देश में बदतर होती जा रही है और वह अपनी हार का ठीकरा कभी ईवीएम पर, तो कभी चुनाव आयोग पर फोड़ रहे हैं। अब यह सुनिश्चित हो गया कि बिहार के चुनाव में कांग्रेस और उसके सहयोगी बुरी तरह हारेंगे, तो मतदाता सूची पर प्रश्न चिन्ह लगाकर अपनी फेस सेविंग का काम कर रहे हैं।अपने गिरेबान में झांकें कांग्रेस और राहुल गांधीमध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मैं राहुल गांधी से यह कहना चाहता हूं कि सिर्फ गांधी सरनेम लगाने से काम नहीं चलेगा, उसके साथ नीयत भी नेक होना चाहिए। उन्हें यह विचार करना चाहिए कि देश के जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें बनी हैं, अगर निर्वाचन प्रक्रिया में कोई खराबी रही होती, तो क्या ये सरकारें बन पातीं? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता जो आरोप लगा रहे हैं, उसका खंडन तो स्वयं कांग्रेस की कर्नाटक सरकार के सहकारिता मंत्री राजन्ना ने कर दिया है। राहुल गांधी जिस वोट चोरी की बात करते हैं, उसका आरोप मंत्री राजन्ना ने अपनी ही सरकार पर लगाया है। मंत्री राजन्ना ने जब यह कहा कि हमारी सरकार ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की थी, तो उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। उन्हें सफाई देने का मौका तक नहीं दिया गया। इससे पता चलता है कि कांग्रेस का आंतिरक लोकतंत्र कितना बदहाल है।राहुल गांधी और कांग्रेस ने देश को बदनाम करने की सुपारी ली हैमध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मुझे लगता है कि राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता केवल और केवल देश को बदनाम करने की सुपारी लेकर और अर्बन नक्सलियों की तरह राजनीति कर रहे है। जिस तरह नक्सली बिना किसी जानकारी या तथ्य के व्यवस्था के खिलाफ असंतोष पैदा करने की कोशिश करते हैं, वही काम कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी कर रहे हैं। राहुल गांधी की झूठ, फरेब की राजनीति इन्हीं प्रयासों की कड़ी है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग और न्यायालय के सामने जाकर कभी कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है, केवल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाए जाते हैं। चुनाव आयोग ने कई बार कहा कि अगर आपको कोई आपत्ति है, तो आयोग में आकर बात कीजिए, लेकिन कांग्रेस के ये नेता जिनमें मध्यप्रदेश के भी कुछ नेता शामिल हैं, आयोग के पास नहीं गए। श्री सारंग ने कहा कि कांग्रेस के नेता संभवतः इस कहावत पर राजनीति कर रहे हैं कि ‘‘सौ बार झूठ बोलेंगे, तो वह सच हो जाएगा’’, लेकिन ऐसा होता नहीं है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है और उन्हें लगता है कि अगर नेहरू परिवार के नेतृत्व को बचाना है, तो झूठ-फरेब की राजनीति को आगे बढ़ाना होगा।जब-जब देश का सम्मान बढ़ा, तब-तब अपमान करती रही कांग्रेसमध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जब-जब दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ता है, तब-तब कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी देश की व्यवस्थाओं पर प्रश्न चिह्न लगाकर देश को बदनाम करने की कोशिश करते हैं। जब हमारी सेनाओं ने आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की, तो राहुल गांधी उस पर प्रश्न चिह्न लगाते हैं। जब एयर स्ट्राइक होती है, तो राहुल गांधी पाकिस्तान और चीन की भाषा बोलते हैं। अभी जब ऑपरेशन सिंदूर हुआ, तब भी कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेता देश के सम्मान को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। 15 अगस्त आ रहा है और पूरे देश का वातावरण तिरंगामय हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि तिरंगे के मान और सम्मान के लिए देश का हर व्यक्ति खड़ा है, ऐसे में देश के संविधान तथा संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर कांग्रेस और विपक्ष के नेता देश को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी नकारातमक विचाराधारा और कार्यपद्धति के कारण कांग्रेस लगातार नीचे जा रही है।भाजपा और श्री नरेन्द्र मोदी में ही अपना भविष्य देख रहा देशमध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह से हताश और निराश है। जनता में उसकी साख पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। देश की जनता ने यह मान लिया है कि उसका भविष्य भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ ही है। ऐसे में कांग्रेस को ‘नाच न आवे आंगन टेढ़ा’ की कहावत पर न चलते हुए अपनी नीति, नीयत और नेता को ठीक करना चाहिए। जब तक नीति ठीक नहीं होगी, नीयत साफ नहीं होगी और नेतृत्व सक्षम नहीं होगा, वह जनता के बीच अपनी पैठ नहीं बना सकती। केवल दूसरों को गाली देना कांग्रेस की मानसिकता बन गयी है। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी से निवेदन करता हूं कि देश में झूठ, फरेब और भ्रम की राजनीति बंद करे

महापौर का बयान: अनवर कादरी को पार्षद पद से हटाने की सिफारिश, परिषद में जाएगा प्रस्ताव

इंदौर  लव जिहाद के लिए फंडिंग के आरोपी पार्षद अनवर कादरी को हटाने का प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि अनवर कादरी को हटाने का प्रस्ताव एमआईसी में पारित करेंगे और उस प्रस्ताव को परिषद में रखने का निर्णय लिया है। जल्द अगली परिषद में हम दो-तिहाई बहुमत और जिन मुद्दों पर उनको हटाना जरूरी है उन पर चर्चा करेंगे। पार्षद अनवर कादरी को भी सुनवाई का मौका देंगे। पार्षदी समाप्त करने का प्रस्ताव अगली परिषद में लेकर आने का भी एमआईसी में शिकायत के आधार पर निर्णय लिया गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि अनवर कादरी जैसे पार्षद ने न केवल अपनी पार्षदी का, बल्कि इस निगम और शहर का मान कम करने का काम किया है। डिविजनल कमिश्नर को भी लिखा लेटर महापौर ने बताया कि कई प्रकरणों के कारण, कब्जों के कारण, लव जिहाद की फंडिंग करने के आरोपों के कारण फरार चल रहा है। इस पार्षद का पार्षद बने रहना न तो शहर हित में है न ही निगम हित में। हमने एक लेटर डिविजनल कमिश्नर को लिखा था कि वह धारा 19 के प्रावधान के तहत तत्काल कार्र‌वाई करें। वो अपनी कार्रवाई कर रहे होंगे। मैं मानता हूं कि वो कार्रवाई करेंगे, नहीं करेंगे तो इंदौर की जनता और हमारे पार्षद उनसे सवाल जरूर करेंगे, लेकिन जो काम हमारी सीमा में है हम वो करेंगे। जानलेवा हमले पर 14 साल पहले काटी एक साल की सजा 2011 में कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी, उसके भाई और एक अन्य आरोपी को जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने एक-एक साल के कारावास की सजा सुनाई थी। यह हमला 6 मई 2009 को इंदौर के आजादनगर चौराहे के पास अनवर हुसैन पर किया गया था। अनवर हुसैन आरोपियों पर चल रहे एक अन्य मामले में गवाह था। पुलिस ने कादरी समेत कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से पिस्तौल, कट्टा, तलवार और चाकू बरामद किए गए थे। उज्जैन में डकैती का केस, इसी से मिला डकैत नाम अनवर कादरी पर 1996 में उज्जैन के महाकाल थाने में डकैती का केस दर्ज किया गया था। इसके बाद उसे अनवर डकैत के नाम से पहचाना जाने लगा। अनवर ने इंदौर में भी मारपीट, घर में घुसकर धमकाने जैसी कई घटनाओं को अंजाम दिया। अनवर कांग्रेस से तीन बार पार्षद रह चुका है। उसकी पत्नी दो बार पार्षद रही है। प्रमोद टंडन के शहर कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए अनवर को शहर कांग्रेस का महामंत्री भी नियुक्त किया गया था। उसने एक बार निर्दलीय चुनाव भी लड़ा था। ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, जेल जाना पड़ा 28 अप्रैल 2025 को अनवर ने इंदौर के वार्ड 58 स्थित बड़वाली चौकी पर पहलगाम हमले के विरोध में पाकिस्तान और आतंकवाद का पुतला दहन किया था। कार्यक्रम के दौरान जैसे ही कादरी ने 'पाकिस्तान' शब्द बोला, वहां मौजूद उसके कुछ समर्थकों ने 'जिंदाबाद' के नारे लगा दिए। इस मौके पर बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल थे। घटना के वीडियो को लेकर बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इस पर अनवर कादरी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

बीजेपी फिलहाल नहीं करेगी अध्यक्ष का खुलासा, क्या VP चुनाव बना देरी की वजह?

नई दिल्ली नए बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव की चर्चा लंबे समय से चल रही है। वहीं पार्टी का संविधान कहता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी हो सकता है जब कम से कम 50 फीसदी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संगठन के चुनाव पूरे हो जाते हैं। बीच में ही उपराष्ट्रपति रहे जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद पार्टी का पूरा फोकस अब शिफ्ट हो गया है। रिपोर्ट्स की मानें तो राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही अब बीजेपी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करेगी। कब है उपराष्ट्रपति का चुनाव? पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मॉनसून सेशन शुरू होते ही अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि स्वास्थ्य कारणों से वह पदमुक्त होना चाहते हैं। वहीं चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव का ऐलान भी कर दिया है। 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होंगे और इसी दिन शाम तक परिणाम भी घोषित कर दिया जाएगा। यह भी तय माना जा रहा है कि विपक्ष इंडिया गठबंधन का कोई साझा उम्मीदवार उतार सकता है। 21 अगस्त नामांकन दाखिल करने का आखिरी तारीख है। ऐसे में विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों के पास उम्मीदवार घोषित करने के लिए पर्याप्त समय है। नंबरगेम की बात करें तो लोकसभा और राज्यसभा में कुल 782 सांसद हैं। एनडीए के पास लोकसभा में 293 तो इंडिया गठबंधन के पास 232 सांसद हैं। वहीं राज्यसभा में एनडीए के पास 133 और इंडिया गठबंधन के पास 107 सांसद हैं। ऐसे में सदन में एनडीए का पलड़ा भारी है। बीजेपी चीफ के चुनाव में देरी के पीछे कारण मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद ही खत्म हो रहा था हालांकि उनकी सफलताओं को देखते हुए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया। अब माना जा रहा है कि बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऐलान के लिए उपराष्ट्रपति चुनाव पूरे होने का इंतजार कर रही है। बिहार चुनाव से पहले बीजेपी को राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान कर देना है। फिलहाल बीजेपी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए फ्लोर मैनेजमेंट में लगी हुई है। इस बार के चुनाव में लोकसभा में एनडीए के बहुमत का आंकड़ा कम हो गया था और राज्यसभा में । ऐसे में यह फाइट आसान नहीं माना जा सकती। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य, राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य और लोकसभा के 543 सदस्य शामिल होते हैं। राज्यसभा में पांच और लोकसभा में एक सीट रिक्त है, जिससे निर्वाचक मंडल की प्रभावी संख्या 782 है और जीतने वाले उम्मीदवार को 391 मतों की आवश्यकता होगी, बशर्ते सभी पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करें। लोकसभा की 543 सीट में से एक सीट, पश्चिम बंगाल में बशीरहाट रिक्त है, जबकि 245 सदस्यीय राज्यसभा में पांच सीट खाली हैं। राज्यसभा में पांच खाली सीट में से चार जम्मू-कश्मीर से और एक पंजाब से है। लोकसभा में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को 542 सदस्यों में से 293 का समर्थन प्राप्त है। सत्तारूढ़ गठबंधन को राज्यसभा (प्रभावी सदस्य संख्या 240) में 129 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, बशर्ते कि मनोनीत सदस्य राजग उम्मीदवार के समर्थन में मतदान करें। सत्तारूढ़ गठबंधन को कुल 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।

60 लाख नए सदस्य जोड़े, भाजपा नेताओं को मिला सम्मान, सीएम हाउस बना मेगा इवेंट का गवाह

रायपुर भारतीय जनता पार्टी में छत्तीसगढ़ से 60 लाख नए सदस्यों को जोड़ने पर भाजपा रायपुर में विशेष कार्यक्रम करने जा रही है। इस अभियान में सक्रिय रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं का CM साय सम्मान करेंगे। यह समारोह नवा रायपुर स्थित CM हाउस में होगा। इतनी बड़ी संख्या में नए सदस्य जुड़ने पर पार्टी इसे जश्न की तरह मनाएगी। पार्टी के आला नेताओं ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। सम्मान पाने वालों की लिस्ट में सांसद, विधायक, पार्षद, जिला संयोजक और कार्यकर्ता शामिल हैं। अब पढ़े किस विधायक ने सदस्य बनाने में किया टॉप, किस जिलों से कितने सदस्यों का सम्मान होगा। बीजेपी ने नवंबर में इसे अपने सोशल मीडिया पेज में शेयर किया था। बीजेपी ने नवंबर में इसे अपने सोशल मीडिया पेज में शेयर किया था। सबसे पहले पढ़े सदस्यता अभियान कब शुरू हुआ छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने 3 सितंबर 2024 को सदस्यता अभियान की शुरुआत की थी। अध्यक्ष ने सीएम विष्णुदेव साय को पहली सदस्यता दिलाई थी। सीएम के बाद प्रदेश स्तर पर अभियान चला। कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों ने मिलकर 60 लाख नए सदस्यों को जोड़ा। इस अभियान को लेकर किरण सिंहदेव ने भाजपा के सभी नगर अध्यक्षों, जिलाध्यक्षों और सदस्यता अभियान प्रभारियों को निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों में स्पष्ट था, कि पार्टी का सदस्य बनाते वक्त पूरी सावधानी बरतें। सदस्यता अभियान के दौरान बीजेपी नेताओं ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों और मंडलों में बैठक लेकर केंद्र प्रभारी, बूथ प्रभारी और मंडल स्तर के पदाधिकारियों की लिस्ट जारी की थी। सदस्य बनाने में टॉप-3 में आए ये MLA संगठन के पदाधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, संगठन में नए सदस्य जोड़ने पर बीजेपी विधायक रिकेश सेन, भावना बोहरा और अजय चंद्राकर टॉप 3 श्रेणी में आए है। वहीं रायपुर शहर से 12 नेता हैं, जिन्होंने 3 हजार से अधिक सदस्य बनाए हैं। इनमें विधायक पुरंदर मिश्रा, राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, सहित अन्य लोग शामिल हैं। कार्यकर्ताओं के तप को हम सबका प्रणाम- किरण सिंह देव किरण सिंहदेव ने किया कार्यकर्ताओं का अभिनंदन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव सिंह ने कहा कि, प्रदेशभर के सभी कार्यकर्ताओं ने निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा सदस्य बनाकर भाजपा के सांगठनिक आधार को दृढ़ करके कमाल कर दिखाया है। सदस्यता अभियान के लक्ष्य को आसानी से निर्धारित समय में हासिल करने के लिए सभी कार्यकर्ताओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि 60 लाख के लक्ष्य से भी अधिक सदस्य बनाने वाले सभी कार्यकर्ताओं का सम्मान समारोह कार्यकर्ताओं की ऊर्जा और उत्साह को कई गुना बढ़ाएगा। इस तरह बीजेपी ने बनाए सदस्य भारतीय जनता पार्टी ने सदस्यता अभियान को सफल बनाने के लिए 2 सितंबर से ऑनलाइन माध्यम से काम शुरू कर दिया था। अभियान के तहत नए सदस्यों को जोड़ने के लिए मिस्ड कॉल, नमो एप, वेबसाइट और क्यूआर कोड स्कैन जैसे डिजिटल तरीकों का सहारा लिया गया। पार्टी के नियमों के मुताबिक, बीजेपी की सदस्यता की अवधि 5 साल होती है। इस अवधि के बाद सदस्यता समाप्त हो जाती है, और व्यक्ति को दोबारा सदस्यता लेनी होती है। इसी प्रक्रिया के तहत पार्टी हर पांच सालों में सदस्यता अभियान चलाकर पुराने सदस्यों का नवीनीकरण और नए सदस्यों को जोड़ने का कार्य करती है। इन जिलों में भी अलग-अलग नेताओं को दी गई थी जिम्मेदारी     सुकमा में ओजस्वी मंडावी, अरुण सिंह भदौरिया और हूंगाराम मरकाम, जी. वेंकट और सुखलाल पुजारी।     दंतेवाड़ा में श्रीनिवास राव मद्दी, विजय तिवारी, कुमार सिंह भदौरिया।     नारायणपुर में दिनेश कश्यप, बृजमोहन देवांगन और गौतम गोलछा।     कोंडागांव में महेश कश्यप, प्रवीण सिंह बदेशा और मनोज जैन, महावीर सिंह राठौर, निरंजन सिन्हा और सुमित्रा मारकोले।     बालोद में भोजराज नाग, प्रीतम साहू और यशवंत जैन।     बलौदाबाजार में पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, प्रदेश उपाध्यक्ष लक्ष्मी वर्मा और श्याम बाई साहू।     महासमुंद में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, पूनम चंद्राकर और डॉ विमल चोपड़ा को जिम्मेदारी दी गई है।     जांजगीर-चांपा में विधायक धरमलाल कौशिक, कमला देवी पाटले, सौरभ सिंह और अंबेश जांगड़े।     सक्ती में प्रदेश उपाध्यक्ष शिवरतन शर्मा, मेघाराम साहू और जगन्नाथ पाणिग्रही।     मुंगेली में सांसद कमलेश जांगड़े और विधायक पुन्नूलाल मोहले।     कोरबा में कृषि मंत्री रामविचार नेताम और ननकीराम कंवर।     सारंगढ़-बिलाईगढ़ में मंत्री टंकराम वर्मा और निर्मल सिन्हा।     जशपुर में राधेश्याम राठिया और रणविजय सिंह जूदेव।     बलरामपुर में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और उद्धेश्वरी पैकरा।     सूरजपुर में सांसद चिंतामणि महाराज और रामसेवक पैकरा।     ​​​​​​कोरिया में विधायक रेणुका सिंह और भैयालाल राजवाड़े।     मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और चंपादेवी पावले।     खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, प्रदेश महामंत्री रामजी भारती, कोमल जंघेल और विक्रांत सिंह।     मोहला-मानपुर- अंबागढ़ चौकी में प्रदेश उपाध्यक्ष मधुसूदन यादव, प्रदेश महामंत्री भरतलाल वर्मा और संजीव शाह     राजनांदगांव में विधायक अमर अग्रवाल, खूबचंद पारख और अशोक शर्मा।     बेमेतरा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे, विधायक ईश्वर साहू, लाभचंद बाफना, विधायक दीपेश साहू और प्रदेश मंत्री अवधेश चंदेल को को जिम्मेदारी दी गई है।

‘2020 में जेटली ने धमकाया?’ राहुल गांधी के बयान पर उठा सवाल, BJP ने याद दिलाई मौत की तारीख

 नई दिल्ली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया बयान ने एक बार फिर सियासी भूचाल ला दिया है. शनिवार को कांग्रेस के वार्षिक लीगल कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को लेकर ऐसा दावा कर दिया, जिसे भाजपा ने 'फेक न्यूज' करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि जब अरुण जेटली का निधन 2019 में हो गया तो वह राहुल गांधी से मिलने 2020 में कैसे आ गए? लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के इस दावे पर कि दिवंगत पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था, डीडीसीए प्रमुख रोहन जेटली ने शनिवार को कांग्रेस नेता को याद दिलाया कि उनके पिता का निधन इन कानूनों के लागू होने से पहले ही हो गया था। उन्होंने कहा, "मैं उन्हें याद दिला दूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था। कृषि कानून 2020 में लागू हुए थे।" एक्स पर एक पोस्ट में, रोहन जेटली ने लिखा, "राहुल गांधी अब दावा कर रहे हैं कि मेरे दिवंगत पिता अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था। मैं उन्हें याद दिला दूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था। कृषि कानून 2020 में लागू हुए थे। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरे पिता के स्वभाव में किसी को भी विरोधी विचार के लिए धमकाना नहीं था। वह एक कट्टर लोकतांत्रिक व्यक्ति थे और हमेशा आम सहमति बनाने में विश्वास रखते थे।" उन्होंने आगे लिखा, "अगर ऐसी कोई स्थिति आती, जैसा कि राजनीति में अक्सर होता है, तो वह सभी के लिए पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने के लिए स्वतंत्र और खुली चर्चा का आह्वान करते। वह ऐसे ही थे और आज भी उनकी यही विरासत है। मैं राहुल गांधी से कहता हूं वे उन लोगों के बारे में बोलते समय सचेत रहें जो हमारे साथ नहीं हैं। उन्होंने मनोहर पर्रिकर जी के साथ भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की, उनके अंतिम दिनों का राजनीतिकरण किया, जो भी उतना ही घटिया था। दिवंगत आत्मा को शांति मिले।'' इससे पहले दिन में, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि एनडीए सरकार ने दिवंगत केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पहले लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ने की कोशिश करने पर उन्हें धमकाने के लिए भेजा था। राहुल गांधी ने कहा, "मुझे याद है कि जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था, तो अरुण जेटली को मुझे धमकाने के लिए भेजा गया था। उन्होंने मुझसे कहा था, 'अगर आप सरकार का विरोध करते रहेंगे और कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ते रहेंगे, तो हमें आपके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।' मैंने उनकी तरफ देखा और कहा, ''मुझे नहीं लगता कि आपको पता है कि आप किससे बात कर रहे हैं।'' दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कार्यक्रम के दौरान कहा, "मुझे याद है जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था, वो (अरुण जेटली) अब नहीं हैं, इसलिए मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए लेकिन फिर भी कहूंगा, अरुण जेटली जी को मुझे मिलने और धमकी देने के लिए भेजा गया था." राहुल ने कहा कि जेटली जी ने मुझसे कहा, "अगर तुम इस रास्ते पर चलते रहे, सरकार का विरोध करते रहे और कृषि कानूनों पर हमसे लड़ते रहे, तो हमें तुम्हारे खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ेगी. मैंने जवाब दिया कि मुझे नहीं लगता कि आपको अंदाजा है कि आप किससे बात कर रहे हैं. हम कांग्रेस वाले हैं, डरते नहीं हैं, झुकते नहीं हैं. हमें तो अंग्रेज नहीं झुका पाए." भाजपा का पलटवार: फर्जी बयानों से दूर रहें राहुल राहुल गांधी के इस बयान पर सबसे तीखा जवाब आया बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय की ओर से. उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, 'Fake News Alert!' उन्होंने आगे लिखा, "राहुल गांधी दावा कर रहे हैं कि अरुण जेटली ने उन्हें 2020 में लाए गए कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था. लेकिन तथ्य यह है कि अरुण जेटली का निधन 24 अगस्त 2019 को हो गया था, जबकि कृषि कानूनों का मसौदा पहली बार 3 जून 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया गया था और ये कानून सितंबर 2020 में पास हुए." अमित मालवीय ने आगे कहा, "ऐसे में यह दावा सरासर झूठा और भ्रामक है कि जेटली जी ने उन्हें किसी बात के लिए संपर्क किया. यह साफ है कि राहुल गांधी एक बार फिर टाइमलाइन को तोड़-मरोड़ कर अपनी राजनीतिक कहानी गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं." पिता की आत्मा को शांति से रहने दें: रोहन जेटली अरुण जेटली के बेटे और दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष रोहन जेटली ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी पर तीखा पलटवार किया. उन्होंने एक्स पर लिखा, "राहुल गांधी अब यह दावा कर रहे हैं कि मेरे दिवंगत पिता अरुण जेटली ने कृषि कानूनों को लेकर उन्हें धमकी दी थी. मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था, जबकि कृषि कानून 2020 में लाए गए थे. और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरे पिता कभी किसी को किसी विचार के विरोध के लिए धमकाने वाले नहीं थे. वह एक सच्चे लोकतांत्रिक व्यक्ति थे जो हमेशा संवाद और सहमति में विश्वास रखते थे." उन्होंने आगे कहा, "मैं राहुल गांधी से आग्रह करता हूं कि जो अब हमारे बीच नहीं हैं, उनके बारे में बोलते समय थोड़ी संवेदनशीलता दिखाएं. उन्होंने मनोहर पर्रिकर जी के अंतिम दिनों को भी राजनीति से जोड़कर अपमानजनक हरकत की थी." हर बात में झूठ, कांग्रेस कब सुधरेगी: अनुराग ठाकुर बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा, "राहुल गांधी की हर बात झूठ है. हर साल झूठ बोलते हैं, वो सुधर नहीं सकते. रोज एक नया झूठ. कांग्रेस कब तक झूठ की राजनीति करेगी? अरुण जेटली बड़े नेता थे. उनका निधन 2019 में हुआ और कृषि कानून 2020 में संसद में आया. कितने झूठ बोलेंगे राहुल गांधी? जब जेटली जी 2019 में ही गुजर गए, तो वो उनसे 2020 में मिलने कैसे आ सकते हैं? राहुल गांधी को अरुण जेटली के परिवार … Read more

भाजपा ने लहराया परचम, एमपी के छह निकाय क्षेत्रों में मिली जीत

भोपाल मध्य प्रदेश में नौ नगरीय निकायों में हुए पार्षदों के उपचुनाव के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। नौ स्थानों पर हुए चुनाव में भाजपा छह और कांग्रेस तीन स्थानों पर जीती है। इन उपचुनाव के लिए सात जुलाई को मतदान हुआ था। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव अभिषेक सिंह ने बताया है कि नौ नगरीय निकायों में एक-एक पार्षद के उप निर्वाचन के परिणाम घोषित किए गए। घोषित परिणामों में छह पार्षद भारतीय जनता पार्टी और तीन पार्षद इंडियन नेशनल कांग्रेस के हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव ने जानकारी दी है कि भोपाल जिले के नगरीय निकाय बैरसिया के वार्ड सात में भारतीय जनता पार्टी की शाइस्ता सुल्तान, नगरीय निकाय सिवनी के वार्ड 11 में भारतीय जनता पार्टी की निधि, इंदौर जिले के नगरीय निकाय सांवेर के वार्ड 7 में कांग्रेस की हसीना और नगरीय निकाय गौतमपुरा के वार्ड 15 में भारतीय जनता पार्टी के शंकरलाल, मंडला जिले के नगरीय निकाय बिछिया के वार्ड 13 में कांग्रेस की राजकुमारी धुर्वे, शहडोल जिले के नगरीय निकाय खांड के वार्ड 8 में कांग्रेस के शशिधर त्रिपाठी, छिंदवाड़ा जिले के नगरीय निकाय न्यूटन चिखली के वार्ड 4 में भारतीय जनता पार्टी की निकिता बरखे और खरगोन जिले के नगरीय निकाय भीकनगांव के वार्ड 5 में भारतीय जनता पार्टी की कमलेश कौशल को विजेता घोषित किया गया है। पन्ना जिले के नगरीय निकाय ककरहटी के वार्ड 13 में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी हीरालाल आदिवासी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। दरअसल, राज्य के नौ नगरीय निकायों में सात जुलाई को एक-एक पार्षद के उप निर्वाचन के लिए मतदान संपन्न हुआ था। कुल 69.68 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया था। इसमें 73.01 प्रतिशत पुरुष और 66.36 प्रतिशत महिला मतदाता हैं। निर्वाचन परिणामों की घोषणा गुरुवार को हुई।

भाजपा के नए अध्यक्ष की घोषणा अगले कुछ दिनों में, सूत्रों के मुताबिक तीन प्रमुख महिला नेताओं के नाम चर्चा में

नई दिल्ली  लोकसभा चुनाव 2024 के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर चल रही खींचतान के बीच सूत्रों के हवाले से खबर है कि भाजपा पहली बार किसी महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा ने हाल के वर्षों में महिला मतदाताओं को लुभाने में सफलता पाई है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में यह सफलता मिली है। आपको बता दें कि जेपी नड्डा का कार्यकाल जनवरी 2023 में समाप्त हो चुका था, लेकिन पार्टी ने उन्हें जून 2024 तक का विस्तार दिया था। अब नए अध्यक्ष की घोषणा अगले कुछ दिनों में हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक तीन प्रमुख महिला नेताओं के नाम चर्चा में हैं। निर्मला सीतारमण वर्तमान वित्त मंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पार्टी संगठन में गहरी पैठ और केंद्र सरकार में लंबे अनुभव के चलते सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। हाल ही में उन्होंने भाजपा मुख्यालय में जेपी नड्डा और महासचिव बीएल संतोष के साथ बैठक की थी। उनका दक्षिण भारत से आना भाजपा के दक्षिण विस्तार रणनीति के लिए भी फायदेमंद माना जा रहा है। डी. पुरंदेश्वरी आंध्र प्रदेश भाजपा की पूर्व अध्यक्ष डी पुरंदेश्वरी काफी अनुभवी और बहुभाषी नेता हैं। कई राजनीतिक दलों के साथ काम करने का अनुभव और पार्टी में व्यापक स्वीकार्यता है। उन्हें ऑपरेशन सिंदूर जैसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक अभियान का हिस्सा भी बनाया गया था। वनाथी श्रीनिवासन तमिलनाडु की कोयंबटूर दक्षिण सीट से विधायक और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी वनाथी श्रीनिवासन 1993 से भाजपा से जुड़ीं और संगठन में कई पदों पर रही हैं। 2022 में केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य बनीं और ऐसा करने वाली पहली तमिल महिला नेता। संघ का समर्थन सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी इस विचार को समर्थन दिया है कि भाजपा को अब एक महिला को शीर्ष नेतृत्व में लाना चाहिए। यह कदम 33% महिला आरक्षण विधेयक की भावना के अनुरूप भी होगा, जिसका प्रभाव अगले परिसीमन के बाद लोकसभा में दिखेगा।

महाराष्ट्र में कांग्रेस को बड़ा झटका, राहुल गांधी के करीबी नेता कुणाल पाटिल ने छोड़ी पार्टी

मुंबई  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की महाराष्ट्र इकाई के नए अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कार्यभार संभालते ही विपक्षी कांग्रेस को बड़ा झटका दे दिया. रवींद्र चव्हाण की मौजूदगी में महाराष्ट्र कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कुणाल पाटिल ने हाथ का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया. कुणाल का कांग्रेस छोड़ना उत्तर महाराष्ट्र और धुले में ग्रैंड ओल्ड पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. कुणाल पाटिल की गिनती लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबियों में होती थी. कुणाल पाटिल धुले ग्रामीण विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं. हफ्तेभर पहले कुणाल पाटिल की रवींद्र चव्हाण के साथ सीक्रेट मीटिंग की खबर आई थी. तब ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि कुणाल सीएम देवेंद्र फडणवीस और रवींद्र चव्हाण की मौजूदगी में बीजेपी का दामन थाम सकते हैं. हालांकि, तब कुणाल पाटिल ने बीजेपी में जाने की अटकलों को खारिज कर दिया था. मुलाकात की बात स्वीकार करते हुए कुणाल पाटिल ने कहा था कि वह अपने निजी काम के सिलसिले में रवींद्र चव्हाण से मिले थे. अब कुणाल बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी पर तंज करते हुए कहा कि कांग्रेस का जनता से जुड़ाव कम हो गया है. धुले में कुणाल पाटिल का मजबूत प्रभाव कुणाल पाटिल का धुले के साथ ही उत्तर महाराष्ट्र के आसपास के जिलों में भी मजबूत प्रभाव माना जाता है. उनकी पहचान सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में है और युवा वर्ग के बीच उनका अपना आधार है. कुणाल का पार्टी छोड़ना, बीजेपी में शामिल होना विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद अब निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है. गौरतलब है कि महाराष्ट्र में स्थानीय निकायों के चुनाव करीब हैं और बीजेपी ने अब दूसरे दलों के मजबूत नेताओं को अपने पाले में लाने की कोशिशें भी तेज कर दी हैं. रवींद्र चव्हाण के महाराष्ट्र बीजेपी की कमान संभालने के बाद दूसरे दलों से नेताओं के बीजेपी में आने का सिलसिला और तेज होने के आसार हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी रवींद्र चव्हाण पहली फडणवीस कैबिनेट में मंत्री थे. वह एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली एनडीए सरकार में भी मंत्री थे. ठाणे जिले के डोंबिवली से आने वाले चार बार के विधायक रवींद्र चव्हाण की इमेज मुश्किल मसलों के त्वरित समाधान निकालने वाले नेता की है.  

अध्यक्ष की रेस में सबसे प्रबल दावेदार के रूप में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम था, फिर ऐसा क्या हुआ …….

  भोपाल  एमपी में बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है। हेमंत खंडेलवाल के नाम की घोषणा हो गई है। 18 साल बाद कोई विधायक एमपी में बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बना है। हेमंत खंडेलवाल के पिता भी सांसद रहे हैं। इस रेस में कई लोगों के नाम आगे चल रहे थे। सबसे प्रबल दावेदार के रूप में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम था। माना जा रहा था कि नरोत्तम मिश्रा को इस बार पार्टी कोई बड़ी जिम्मेदारी देगी। चेहरे से चमक गायब दरअसल, नरोत्तम मिश्रा चुनाव हारने के बाद लोकसभा चुनाव के दौरान काफी एक्टिव रहे थे। उन्होंने हजारों की संख्या में कांग्रेस नेताओं को बीजेपी की सदस्यता दिलवाई थी। साथ ही केंद्रीय नेतृत्व के नेताओं से लगातार मुलाकातें भी चल रही थी। इसकी वजह से रेस में उनका नाम था कि पार्टी के वे वरिष्ठ नेता हैं। मंगलवार को नामांकन के साथ ही नरोत्तम मिश्रा रेस से बाहर हो गए। बुधवार को पार्टी ऑफिस जब वह पहुंचे तो उनका चेहरा उतरा हुआ था। दिल के अरमा आंसुओं में बह गए अब नरोत्तम मिश्रा पर यह गाना बिल्कुल फिट बैठ रहा है कि दिल के अरमा आंसुओं में बह गए। बीजेपी ऑफिस में नरोत्तम मिश्रा पहुंचे तो उनका चेहरा उतरा हुआ था। साथ ही बॉडी लैंग्वेज यह बताने को काफी था कि यह मौका हाथ से निकलने का उनके मन में मसोस है। उतरे मन से वह पार्टी ऑफिस में पहुंचे थे। मंच पर बैठे नरोत्तम मिश्रा के मन में बेचैनी दिख रही थी। कभी भी उनके चेहरे पर चमक नहीं दिखी। गौरतलब है कि नरोत्तम मिश्रा एमपी में बीजेपी के कद्दावर नेता रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व के साथ भी अच्छे संबंध हैं लेकिन विधानसभा चुनाव हारने के बाद वह पद की उम्मीद में बैठे हैं। अब प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में अब अटकलें हैं कि आगे चलकर उन्हें किसी महत्वपूर्ण बोर्ड और निगम में उन्हें एडजस्ट किया जा सकता है।

उत्तराखंड बीजेपी के महेंद्र भट्ट बने लगातार दूसरी बार बने प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी

देहरादून भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर महेंद्र भट्ट का लगातार दूसरी बार चुना जाना गया है। प्रदेश अध्यक्ष पद पर नामांकन की प्रक्रिया में केवल भट्ट का ही नामांकन हुआ था। राष्ट्रीय परिषद सदस्य के लिए पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह समेत आठ वरिष्ठ नेताओं का चुना गया है। आज मंगलवार को प्रांतीय परिषद की बैठक में केंद्रीय चुनाव अधिकारी हर्ष मल्होत्रा भट्ट के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के निर्वाचित होने का औपचारिक ऐलान किया। सोमवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद सदस्य के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में महेंद्र भट्ट ने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन पत्र प्रदेश चुनाव अधिकारी खजान दास को सौंपा। इस पूरी संगठन चुनाव प्रक्रिया के दौरान सह चुनाव अधिकारी पुष्कर काला, मीरा रतूड़ी, राकेश गिरी के साथ सरकार में दायित्वधारी ज्योति गैरोला, सुभाष बड़थ्वाल, कुलदीप कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश कोली,प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान समेत बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता मौजूद रहे। इन नेताओं ने भट्ट के नाम का किया प्रस्ताव नामांकन प्रक्रिया संपन्न होने के बाद चुनाव अधिकारी खजान दास ने कहा कि पांच सेटों में दाखिल उनके नामांकन पत्र पर 10 अलग-अलग प्रस्तावकों ने हस्ताक्षर किए थे। जिसमें सभी सेटों के मुख्य प्रस्तावक मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी एवं गढ़वाल लोकसभा सांसद अनिल बलूनी, नैनीताल सांसद अजय भट्ट व अल्मोड़ा सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा शामिल हुए। अन्य प्रस्तावक के रूप में प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार, पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कल्पना सैनी, टिहरी लोकसभा सांसद महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं विधायक बिशन सिंह चुफाल, विधायक विनोद चमोली, उमेश शर्मा काऊ, विनोद कंडारी, राम सिंह कैड़ा, महंत दिलीप सिंह रावत व बृजभूषण गैरोला प्रमुख थे। राष्ट्रीय परिषद के लिए ये नेता चुने गए राष्ट्रीय परिषद सदस्य के लिए कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा, पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत, अजय भट्ट, माला राज्य लक्ष्मी शाह व कल्पना सैनी ने नामांकन किया था। इन सभी नेताओं का राष्ट्रीय परिषद के लिए चुना गया। महेंद्र भट्ट के अध्यक्ष बनने के बाद हमें सभी चुनाव में विजय मिली। संगठन का विस्तार हुआ। सामान्य कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक की यात्रा में उनका लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। उन्होंने सबको साथ लेकर संगठन को गति देने में बड़ा योगदान दिया है। सभी वरिष्ठ नेताओं ने आज उनके नामांकन का प्रस्ताव किया था। लगातार दूसरी बार वह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चुने गए हैं।  – पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री आज भाजपा का संगठन पर्व चल रहा है। भाजपा देश की अकेली ऐसी पार्टी है जहां सबसे निचली इकाई से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाती है। चुनाव में प्रत्येक सक्रिय व आम कार्यकर्ता भाग ले सकता है। प्रदेश अध्यक्ष व राष्ट्रीय परिषद सदस्य पद के लिए आज घोषणा कर दी गई है। -अनिल बलूनी, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी भाजपा व गढ़वाल सांसद लगातार दूसरी बार अध्यक्ष बनने का भट्ट बनाया रिकार्ड मंगलवार को औपचारिक घोषणा के साथ ही महेंद्र भट्ट उत्तराखंड भाजपा के लगातार दूसरी बार अध्यक्ष बनने का रिकॉर्ड बनाया। उनसे पहले किसी भी अध्यक्ष को दूसरी बार संगठन की बागडोर संभालने का अवसर नहीं मिला। भट्ट भाजपा के 10वें प्रदेश अध्यक्ष बने हैं।