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प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में बन रहे हैं गीता भवन, श्रीकृष्ण की लीला स्थलों को तीर्थ बना रहे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सबके दिलों में हमेशा बनें रहेंगे गोस्वामी तुलसीदास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के चरित्र में समाई है पूरी भारतीय संस्कृति प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में बन रहे हैं गीता भवन श्रीकृष्ण की लीला स्थलों को तीर्थ बना रहे हैं गुरू गोविंद देव गिरि महाराज को मिला पं. रामकिंकर राष्ट्रीय सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीराम संग्रहालय निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपए देने की घोषणा की मानस भवन में हुआ तुलसी जयंती एवं अलंकरण समारोह भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गोस्वामी तुलसीदास का 528वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस देश का पुरातन महाकाव्य है। आज हम सब जिन समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक परम्पराओं में पोषित और पल्लवित हो रहे हैं, उसकी नीव सदियों पहले गोस्वामी तुलसीदास ने रख दी थी। रामचरित मानस के जरिए देश को एक ऐसी काव्यधारा मिली है, जो जन-जन को धर्म, नीति, जीवन मूल्य और मर्यादा का मार्ग दिखाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोस्वामी तुलसीदास की अमर कृति रामचरित मानस को भारतीय साहित्य और संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि हमारी संस्कृति को समृद्ध बनाने में उनका योगदान अमिट और चिर-स्मरणीय रहेगा। वे भारतीयों के हृदय में सदैव जीवित रहेंगे। उनकी वाणी आज भी हमारे जीवन को दिशा देती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी से तुलसी साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने विरासत से विकास की संस्कृति को अपनाया है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के चरित्र में पूरी भारतीय संस्कृति समाई हुई है, इसलिए हम भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के बताए जीवन मार्ग पर चलने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में गीता भवन बनाने का निर्णय लिया है। सरकार प्रदेश में श्रीराम वनगमन पथ विकसित करने के अलावा मध्यप्रदेश में श्रीकृष्ण की लीला स्थलों को तीर्थ बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मानस भवन में तुलसी मानस प्रतिष्ठान के तत्वावधान में आयोजित तुलसी जयंती एवं अलंकरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरु गोविंद देव गिरि महाराज को पंडित रामकिंकर उपाध्याय राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत किया। अलंकरण के रूप में गुरु गोविंद देव गिरि महाराज को अंगवस्त्र, सम्मान पट्टिका एवं दोलाख रुपए सम्मान राशि दी गई। गोविंद देव महाराज प्रख्यात चिंतक हैं और अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि न्यास के न्यासी हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल में राम संग्रहालय बनाने के लिए तुलसी मानस प्रतिष्ठान को 5 करोड रुपए की विकास राशि देने की घोषणा की। कार्यक्रम में पंडित रामकिंकर उपाध्याय की शिष्या एवं मानस पुत्री सुमंदाकनी दीदी, तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्याध्यक्ष रघुनंदन शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, नगर निगम के अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, समाजसेवी रविन्द्र यति सहित बड़ी संख्या में तुलसी साहित्यप्रेमी एवं सुधिजन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रामायण हमारा राष्ट्रग्रंथ है। गोस्वामी तुलसीदास के संकल्प से ही आज घर-घर में रामायण पहुंची है। प्रदेश सरकार रामराज्य स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। वर्ष 2024 में 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में श्रीराम मंदिर में रामलला विराजमान हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राम मंदिर के लोकार्पण और भूमि-पूजन में शामिल हुए। पहलगाम में जब बहनों का सिंदूर उजाड़ा गया तो भारत सरकार की कार्रवाई में श्रीराम की दिव्य शक्ति दिखाई देती है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में 2020 में नई शिक्षा नीति लागू की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि श्रीराम और श्रीकृष्ण के चरित्र में ही पूरी भारतीय संस्कृति समाई है इसलिए उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को रामायण और गीता से जोड़ा। सरकार ने प्रदेश के हर नगरीय निकाय में सर्वसुविधायुक्त गीता भवन बनाने का निर्णय लिया है। जहां-जहां भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं हुई हैं, उन्हें हम तीर्थ के रूप में विकसित कर रहे हैं। प्रदेश सरकार राम वन गमन पथ के साथ श्रीकृष्ण पाथेय पर भी कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विरासत का संरक्षण करते हुए हम राजधानी भोपाल में राजाभोज और विक्रमादित्य द्वार के नाम से दो प्रवेश द्वारों का निर्माण करा रहे हैं। गुरु गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि भारत ने संपूर्ण विश्व को संस्कृति प्रदान की है। प्राचीन संस्कृति का पूरा दर्शन भगवान श्रीराम के जीवन में दिखाई देता है। हमारी परंपरा में 10 मूल्यों को धर्म कहा गया है। ये सभी मूल्य श्रीराम में नजर आते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विरासत के साथ विकास का संकल्प लिया है। विदेशी आक्रांताओं ने देश में सदियों तक शासन किया, लेकिन फिर भी हम अपनी संस्कृति के साथ खड़े हुए हैं। उनके द्वारा तोड़े गए श्रीराम मंदिर का पुनर्निमाण हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गीता भवन निर्माण, शासकीय विद्यालयों और कारागारों में गीता पढ़ाने की अनुमति प्रदान की है। यह अत्यंत प्रशंसनीय कार्य है। उन्होंने इस कार्य के लिए मध्यप्रदेश सरकार का अभिनंदन कर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार जताया। पंडित राम किंकर उपाध्याय की शिष्या सुमंदाकिनी दीदी ने कहा कि राज्य की वर्तमान सरकार सनातन संस्कृति को समृद्ध करने के लिए अथक प्रयास कर रही है। उज्जैन के महाकालेश्वर से लेकर ओरछा के रामराजा मंदिर को विकसित किया गया है। आज पाश्चात्य संस्कृति की आंधी में हमारा समाज वैदिक संस्कृति से कट गया है। आज संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता है। पंडित राम किंकर उपाध्याय ने राष्ट्र मंगल के लिए देशभर में रामकथाएं की। महाराज की विचारधारा से मानस भवन के मंच से लगभग 50 साल से श्रीराम कथा वाचन एवं प्रवचन चल रहा है। उन्होंने इस तरह के संस्कृति संरक्षण से जुड़े आयोजनों के लिए मध्यप्रदेश सरकार की मुक्तकंठ से सराहना की। प्रमुख सचिव, संस्कृति शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि पद्मभूषण से सम्मानित युगतुलसी रामकिंकर उपाध्याय राष्ट्रीय अलंकरण समारोह का यह दूसरा वर्ष है। उन्होंने राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत किए गए गुरु गोविंद देव गिरि महाराज के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इन्होंने मात्र 8 वर्ष की छोटी उम्र से ही रामायण, श्रीमद् भगवत् गीता और महाभारत की कथाएं करना आरंभ कर दिया था। तुलसी साहित्य की बड़ी प्रखरता … Read more

मछुआरों की सुरक्षा की दिशा में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मछुआरों की सुरक्षा और समृद्धि सरकार की प्राथमिकता है। उनकी सुरक्षा की दिशा में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कंट्रोल कमांड सेंटर और ट्रांजिट हाउस जैसी पहल की जा रही हैं। राज्य के बड़े जलाशयों में मछुआरों की सुरक्षा और मत्स्य बीज संचयन की निगरानी के लिये आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के तहत देश के सबसे बड़े जलाशयों में शामिल इंदिरा सागर में ड्रोन, जीपीएस और सीसीटीवी युक्त आधुनिक कमांड कंट्रोल रूम की स्थापना की जा रही है। आपात स्थिति में इस प्रणाली से मछुआरों को शीघ्र सहायता पहुंचाई जा सकेगी। ये पहल ब्रीडिंग ग्राउंड के चिन्हांकन के साथ मत्स्य आखेट पर निगरानी को और ज़्यादा आसान, सुलभ और प्रभावशाली बनाएगी। कमांड कंट्रोल रूम की मदद से मुख्यालय स्तर से ही 24X7 निगरानी संभव हो सकेगी। ड्रोन के माध्यम से जल क्षेत्र की लाइव मॉनिटरिंग और जीपीएस सिस्टम से नावों की ट्रैकिंग की जा सकेगी और आपात स्थिति में मछुआरों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। मछुआरों के लिए बनेंगे ट्रांजिट हाउस और फ़्लोटिंग प्लेटफ़ॉर्म मत्स्य महासंघ के जलाशयों में कार्यरत मछुआरों को कई बार 15 दिन से लेकर एक महीने तक खुले टापुओं या जलाशय के किनारों पर अपनी नावों में रात्रि विश्राम करना पड़ता है। वर्षा ऋतु में टापुओं का जलस्तर बढ़ जाता है, ऐसे में मछुआरों को जलीय जीव-जंतुओं से जान-माल की हानि की आशंका बनी रहती है। मछुआरों को इससे बचाने के लिए महासंघ ने गांधी सागर और इंदिरा सागर के टापुओं पर 5 ट्रांजिट हाउस और जल के मध्य 2 फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। मछुआरों के लिए इसमें आपातकालीन स्थिति में भोजन निर्माण, सोलर मोबाइल चार्जिंग और बायो टॉयलेट जैसी सुविधाएं मिलेंगी। राज्य सरकार की यह पहल मछुआरों की सुरक्षा और सुविधा को बेहतर बनाएगी, साथ ही जल आधारित संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन और मत्स्य उत्पादन की वृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आधुनिक तकनीक के समावेश से अब राज्य में मत्स्याखेट और मछलीपालन नए आयाम स्थापित करने की दिशा में अग्रसर हैं। भोपाल में बनेगा आधुनिक केवट प्रशिक्षण संस्थान राज्य में मॉडर्न एक्वाकल्चर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अहम पहल की जा रही है। केन्द्र सरकार की फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट फंड योजना के तहत भोपाल में 5 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक केवट प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की जा रही है। इस संस्थान में केज कल्चर, बायोफ्लॉक, रिसर्कुलेटरी एक्वा कल्चर सिस्टम, मछलियों की हाइजेनिक हैंडलिंग, फिश प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और वैल्यूएडिशन जैसे विषयों पर मछुआ समुदाय को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। मछुआरों को इससे वैश्विक मानकों के अनुरूप मछली पालन तकनीक की जानकारी और व्यावसायिक दक्षता प्राप्त होगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय महापरिषद की बैठक में दिए निर्देश

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार साइबर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर केंद्रित पाठ्यक्रम आरंभ किए जाएं साथ ही विश्वविद्यालय, मीडिया के क्षेत्र में एडवांस्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट के रूप में अपनी पहचान बनाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य शासन द्वारा संचालित जन कल्याणकारी योजनाओं के संप्रेषण और उनकी प्रभावशीलता के सर्वेक्षण संबंधी गतिविधियां भी विश्वविद्यालय में आरंभ करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में विश्वविद्यालय की महापरिषद की बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार, इंदौर सांसद श्री शंकर लालवानी, विश्वविद्यालय के कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी, सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े सहित महापरिषद के सदस्यगण उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय के रीवा और खंडवा परिसरों में रोजगार परक पाठ्यक्रम संचालित करने संबंधी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम आरंभ करने को स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृति के बाद एम.ए. (जर्नलिज्म एंड क्रिएटिव एंड राइटिंग), एम.ए. (मास कम्युनिकेशन), एम.ए.( एडवरटाइजिंग एंड पब्लिक रिलेशंस), एम.एससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) और एम.एसी.ए. के एक वर्षीय पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किए जाएंगे। बैठक में विश्वविद्यालय के पी.एचडी. अधिनियम को यू.जी.सी. पीएचडी अधिनियम 2022 के अनुसार अद्यतन कर इस आधार पर पी. एचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया आरंभ करने की स्वीकृति भी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा परिसर के सभागार का नाम लाल बलदेव सिंह सभागार रखने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। महापरिषद ने वित्त विभाग के 14 अगस्त 2023 के आदेश अनुसार चतुर्थ समयमान उच्चतर वेतन मान को विश्वविद्यालय में लागू करने के प्रस्ताव को स्वीकृत किया। विश्वविद्यालय में फेस डिटेक्शन मशीन के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था पर भी सहमति प्रदान की गई। विश्वविद्यालय के नवीन मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग में अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्रिंटिंग एवं पैकेजिंग विषय का व्यवसायिक प्रशिक्षण देने के लिए प्रिंटिंग प्रेस व लैब तथा पैकेजिंग लैब की स्थापना का प्रस्ताव भी स्वीकृत हुआ। बैठक में अन्य कार्यालयीन तथा प्रबंधकीय विषयों पर भी निर्णय लिए गए। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- सामाजिक समरसता से सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि समाज के सर्वांगीण विकास और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की सामाजिक समरसता की भावना के अनुसार सतत प्रयासरत है। उन्होंने कहा है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से प्रदेश के सामाजिक परिदृश्य में तेजी से सकारात्मक बदलाव आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि विकास की मुख्यधारा में हर वर्ग को साथ लेकर चलने से ही सामाजिक एकता मजबूत होती है। सामाजिक समरसता ही वह भावना है जो कठिन परिस्थितियों में भी परस्पर सहयोग और मदद के लिए प्रेरित करती है। सशक्त समाज से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में ग्वालियर में शनिवार को ‘समरसता कार्यक्रम’ का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर के जौरासी गांव में बनने वाले अंबेडकर धाम का भूमि-पूजन करेंगे। यह स्थल सामाजिक समरसता, न्याय और समानता के प्रतीक डॉ. अंबेडकर के विचारों का जीवंत केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री इस अवसर पर विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित करेंगे, सामाजिक समरसता की शपथ दिलाएंगे और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित करेंगे। कार्यक्रम में सामाजिक एकता पर विषय विशेषज्ञ अपने विचार व्यक्त करेंगे। इस अवसर पर सहभोज का आयोजन भी किया गया है। दृढ़ सामाजिक समरसता के लिए संकल्पित सरकार राज्य सरकार ने भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों और योगदान को सम्मान देते हुए सामाजिक समरसता को सशक्त करने के लिए शिक्षा, रोजगार, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक न्याय को केंद्र में रखकर कई योजनाएं शुरू की हैं। डॉ. अंबेडकर के जीवन, विचारों और योगदान को सम्मान देते हुए अनुसूचित जाति वर्ग के सशक्तिकरण के लिए राज्य शासन की कई प्रभावी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। योजनाओं का उद्देश्य सामाजिक समरसता, आर्थिक उन्नयन, शैक्षिक प्रगति और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण करना है। डॉ. अंबेडकर से जुड़े पांच प्रमुख स्थलों — महू (जन्मस्थली), दिल्ली (महापरिनिर्वाण स्थल), नागपुर (दीक्षाभूमि), मुंबई (चैत्यभूमि) और लंदन (शिक्षा स्थल) — को मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में शामिल किया गया है। महू स्थित डॉ. अंबेडकर की जन्मस्थली का समग्र विकास किया गया है, जिसमें स्मारक, संग्रहालय, पार्क, सभागार और स्वागत द्वार का निर्माण हुआ है। साथ इस “आस्था स्थल” और अंतरराष्ट्रीय शोध केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य चल रहा है।भोपाल स्थित डॉ. अंबेडकर स्मारक, पुस्तकालय और भवन का भी नवीनीकरण एवं विस्तार किया गया है। राज्य में वर्ष 2004 से संचालित डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना में अनुसूचित जाति वर्ग के बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण और ब्याज सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। हाल ही में डॉ. अंबेडकर कामधेनु योजना की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन और पशुपालकों को आर्थिक सहयोग प्रदान करना है। योजना के अंतर्गत 42 लाख तक के ऋण पर 33% तक की सब्सिडी दी जा रही है। डॉ. अंबेडकर उद्योग उदय योजना के माध्यम से एससी-एसटी उद्यमियों को एमएसएमई क्षेत्र में प्रोत्साहन और वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है। डॉ. भीमराव अंबेडकर मेधावी विद्यार्थी पुरस्कार योजना के अंतर्गत बोर्ड परीक्षाओं में श्रेष्ठ अंक प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति के छात्रों को 30 हजार रुपये तक का पुरस्कार दिया जाता है। डॉ. अंबेडकर छात्रवृत्ति योजना और अंबेडकर फेलोशिप के जरिए उच्च शिक्षा और अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीहोर और मुरैना में स्थापित डॉ. अंबेडकर तकनीकी शिक्षा संस्थानों में आवासीय प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है। सागर जिले में डॉ. अंबेडकर वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना अप्रैल माह में की गई है। भोपाल में प्रदेश के सबसे लंबे फ्लाई-ओवर का नामकरण डॉ. अंबेडकर के नाम पर किया गया है। जून 2025 में अंबेडकर गौशाला विकास योजना को मंजूरी दी गई, जिसके तहत 5 हजार से अधिक पशुओं वाली गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। डॉ. अंबेडकर सामाजिक समरसता अभियान के तहत प्रदेशभर में पंचायत स्तर तक जनसंवाद, रैलियाँ, नाटक, प्रतियोगिताएं और संविधान जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रदेश के कई बस स्टैंड, सड़कें, उद्यान, पुस्तकालय एवं महाविद्यालयों का नामकरण डॉ. अंबेडकर किया गया है। वर्ष 2016 में महू रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर अंबेडकर नगर स्टेशन किया गया। केन्द्र सरकार ने डॉ. अंबेडकर के विचारों, योगदान और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। इनका उद्देश्य सामाजिक न्याय, शिक्षा, सशक्तिकरण और समावेशी विकास को मजबूती देना है। डॉ. अंबेडकर को वर्ष 1990 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया, जो उनके ऐतिहासिक योगदान का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान था। डॉ. अंबेडकर की स्मृति से जुड़े बड़ोदरा स्थित संकल्प भूमि ‘बनयान ट्री कैंपस’ और सतारा (महाराष्ट्र) स्थित प्रताप राव भोंसले हाई स्कूल को राष्ट्रीय महत्व के स्मारक घोषित किया गया है। यहां उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई थी। सामाजिक न्याय मंत्रालय ने देश के कई विश्वविद्यालयों में डॉ. अंबेडकर सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की गई है, जिनका उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों को गुणवत्ता युक्त उच्च शिक्षा में सहायता प्रदान करना है।