News Aazad Bharat

फुट ओवरब्रिज नेटवर्क का विस्तार: इंदौर में नई सौगात, पुराने पुलों के रखरखाव की तैयारी

इंदौर  शहर में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम चार नए फुट ओवरब्रिज बनाने की तैयारी में है। लंबे समय से निगम द्वारा शहर में एक दर्जन फुट ओवरब्रिज बनाए जाने का दावा किया जा रहा था, लेकिन भूमि की अनुपलब्धता के चलते यह योजना अटकी रही। अब चार स्थानों पर फुट ओवरब्रिज निर्माण के लिए ठेकेदार फर्मों की तलाश की जा रही है, जबकि तीन पुराने फुट ओवरब्रिजों को 10 साल की अवधि के ठेके पर दिया जाएगा, जिससे उनका बेहतर रख-रखाव किया जा सके। ऑनलाइन टेंडर जारी, नए ओवरब्रिज बनेंगे डिजाइन-बिल्ट-ऑपरेट सिस्टम से नगर निगम के यातायात विभाग ने चार नए फुट ओवरब्रिजों के निर्माण के लिए ऑनलाइन टेंडर जारी किए हैं। ये सभी ओवरब्रिज डिजाइन, बिल्ट, ऑपरेट और ट्रांसफर सिस्टम के तहत बनाए जाएंगे। साथ ही तीन पुराने फुट ओवरब्रिजों को भी दस साल की अवधि के लिए ठेके पर दिया जाएगा, जिनकी लाइसेंस अवधि को आगे पांच साल तक बढ़ाया जा सकेगा। निगम ने पहले भी एक बार टेंडर जारी किए थे, लेकिन तब कोई भी ठेकेदार फर्म आगे नहीं आई थी। इस बार दूसरी बार प्रयास किया जा रहा है। कर्बला, एमवाय, दवा बाजार और जुपिटर हॉस्पिटल क्षेत्र में बनेंगे नए ब्रिज फुट ओवरब्रिज निर्माण की योजना के तहत निगम ने कर्बला से जीडीसी कॉलेज की ओर एक नया ओवरब्रिज बनवाने की योजना तैयार की है। वहीं एमवाय अस्पताल के सामने भी फुट ओवरब्रिज बनाया जाएगा, ताकि मरीजों के परिजन सड़क पार कर दवा दुकानों तक सुरक्षित पहुंच सकें। दवा बाजार क्षेत्र में भी एक फुट ओवरब्रिज की संभावना तलाशी जा रही है। इसके अलावा एक और नया फुट ओवरब्रिज विशेष जुपिटर हॉस्पिटल के सामने प्रस्तावित किया गया है, जहां आए दिन ट्रैफिक के कारण पैदल चलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। तीन पुराने ब्रिज रख-रखाव के लिए ठेके पर, उपयोगिता को लेकर सवाल बरकरार फिलहाल शहर में तीन पुराने फुट ओवरब्रिज मौजूद हैं, जिन्हें नगर निगम 10 साल के रख-रखाव के ठेके पर देगा। इनमें पहला फुट ओवरब्रिज छप्पन दुकान से अपोलो टॉवर की ओर है, दूसरा कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने बना हुआ है, जबकि तीसरा अपोलो टॉवर से छप्पन दुकान की दिशा में बना है। निगम के अनुसार, कर्बला से कलेक्ट्रेट रोड पर एक पुराना ओवरब्रिज पहले ही बना हुआ है, लेकिन यह अधिक उपयोगी नहीं साबित हुआ। इसी अनुभव को देखते हुए अब नए ब्रिजों की जगह और डिजाइन सोच-समझकर तय की जा रही है।  

भोपाल में नशे के नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा, गैंग से जुड़ा भूरी हिरासत में

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मादक पदार्थ तस्करों की कमर तोड़ने के लिए क्राइम ब्रांच लगातार कार्रवाई कर रही है। गुरुवार को क्राइम ब्रांच ने एक बदमाश अंशुल सिंह उर्फ भूरी को गिरफ्तार किया है। उस पर शहर के अलग-अलग थानों में करीब 18 अपराध दर्ज हैं, इनमें मारपीट, बलवा, आर्म्स एक्ट और मादक पदार्थ तस्करी आदि शामिल हैं। पुलिस को शातिर ड्रग्स तस्कर यासीन और शाहवर से पूछताछ के बाद उसके इनसे जुड़े होने की जानकारी मिली थी। वह नए शहर में संगठित अपराधों में शामिल रहा है। टीटी नगर थाने का हिस्ट्री शीटर होने के साथ ही पूर्व में भी शराब तस्करी के केस में गिरफ्तार किया जा चुका है। पैडलर के तौर पर सामने आया नाम अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त क्राइम ब्रांच शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि गोकुल धाम तुलसी नगर टीटी नगर निवासी 32 वर्षीय अंशुल सिंह उर्फ भूरी पुराना बदमाश है। ड्रग्स तस्कर यासीन से रिमांड के दौरान की गई पूछताछ में उसका नाम पैडलर के तौर पर सामने आया था। दोनों के बीच लेन-देन संबंधी चैट्स और ट्रांजेक्शन भी मिले हैं। आरोपित से लंबी पूछताछ के लिए गुरुवार को कोर्ट में पेश कर चार अगस्त तक की रिमांड पर लिया है। उससे गिरोह के संबंध में पूछताछ की जाएगी। उसकी गिरफ्तारी के बाद तस्करी के पूरे माड्यूल को समझा जाएगा। पुलिस को एक और आरोपी की तलाश यह किस तरह से बाहर के चार राज्यों से मादक पदार्थ लाते थे और उसे प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पहुंचा रहे थे, उनके इस खेल में और कौन-कौन शामिल है। पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अभी और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। अंशुल उर्फ भूरी से शुरुआती पूछताछ में यासीन और उसके चाचा के एक खास गुर्गे का नाम भी सामने आया है। वह शाहजहांनाबाद क्षेत्र के इस्लामी गेट इलाके में रहता है और क्रिकेट पर सट्टा खिलाता है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। उसे भी हिरासत में लेकर पूछताछ करने की तैयारी है। कांग्रेस-भाजपा से संबंध अंशुल सिंह उर्फ भूरी की मां रजनी राज सिंह पार्षद रह चुकी हैं। वह एक बार भाजपा और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुकी हैं। अंशुल अपनी मां की विरासत को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस से युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहा था। उसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का खास माना जाता है। उसे पूर्व मंत्री पीसी शर्मा के खास समर्थकों में गिना जाता है। उसकी गिरफ्तारी के बाद से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ उसके फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

नई ट्रेन सेवा की सौगात, रेल मंत्री ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर दी जानकारी

रायपुर, छत्तीसगढ़ को रेल सेवाओं के क्षेत्र में एक और बड़ी सौगात मिलने जा रही है। भारत सरकार के रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर सूचित किया है कि रायपुर-जबलपुर नई एक्सप्रेस ट्रेन को 3 अगस्त 2025 को हरी झंडी दिखाई जाएगी। रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि भारत सरकार छत्तीसगढ़ में रेलवे सेवाओं और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वर्तमान में राज्य में ₹44,657 करोड़ की लागत से विभिन्न रेलवे परियोजनाएं प्रगति पर हैं। वर्ष 2025 के बजट में छत्तीसगढ़ को रिकॉर्ड ₹6,925 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त किया जा रहा है, जिनमें से 5 स्टेशनों का हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में दो वंदे भारत ट्रेनों का संचालन भी पहले से जारी है, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल का उदाहरण हैं। रायपुर-जबलपुर एक्सप्रेस ट्रेन न केवल छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच आवागमन को आसान बनाएगी, बल्कि इससे व्यापार, पर्यटन और सामाजिक संपर्क को भी नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य में रेल नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है, जिससे जनता को सुविधाजनक और आधुनिक रेल सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

राजस्व में बंपर उछाल, GST कलेक्शन ₹1.96 लाख करोड़ के पार गया

नईदिल्ली   केंद्र सरकार ने जुलाई महीने के जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े जारी कर दिए हैं। बीते जुलाई में जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 1.96 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है। यह लगातार 7वां महीना है जब जीएसटी कलेक्शन 1.80 लाख करोड़ रुपये से जयादा है। हालांकि, यह वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के औसत 2.1 लाख करोड़ रुपये से कम है। यह ग्रोथ डोमेस्टिक ट्रांजैक्शन के साथ-साथ आयात से अधिक कलेक्शन के कारण हुई, जो स्थिर आर्थिक गतिविधि का संकेत है। हालांकि, डेवलपमेंट की गति पिछले महीनों की तुलना में धीमी रही। कुल ग्रॉस जीएसटी राजस्व में शामिल ग्रॉस कलेक्शन में सीजीएसटी ₹35470 करोड़ है। वहीं, एसजीएसटी की बात करें तो 44059 करोड़ रुपये है। इसके अलावा आईजीएसटी ₹1,03,536 करोड़ रहा। इसमें आयात पर एकत्रित ₹51626 करोड़ शामिल है। वहीं, उपकर की बात करें तो ₹12670 करोड़ (आयात पर एकत्रित ₹1086 करोड़ सहित) पर पहुंच गया। किस राज्य के कलेक्शन में कितना ग्रोथ जुलाई के दौरान मध्य प्रदेश के टैक्स कलेक्शन में 18% की वृद्धि देखी गई, जो बड़े राज्यों में सबसे आगे रहा। वहीं, बिहार के कलेक्शन में 16% की वृद्धि दर्ज की गई जबकि आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में क्रमशः 14% और 12% की वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी ओर, मणिपुर, मिजोरम और झारखंड में क्रमशः -36%, -21% और -3% की गिरावट दर्ज की गई। महाराष्ट्र 30,590 करोड़ रुपये से अधिक कलेक्शन के साथ सबसे बड़ा कंट्रीब्यूटर बना रहा। जून में जीएसटी कलेक्शन इससे पहले जून में जीएसटी कलेक्शन 6.2 प्रतिशत बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। बता दें कि जीएसटी कलेक्शन मई में 2.01 लाख करोड़ रुपये रहा था। वहीं, इस साल अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 2.37 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्चस्तर पर पहुंच गया था। GST के 8 साल पूरे पिछले महीने देश में GST लागू हुए 8 साल पूरे हो गए हैं। 1 जुलाई 2017 को देश में GST लागू किया गया था। इस दौरान टैक्स कलेक्शन के आंकड़ों ने नया रिकॉर्ड बनाया है। वित्त वर्ष 2024-25 में ग्रॉस GST कलेक्शन 22.08 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो 5 साल पहले 2020-21 में सिर्फ 11.37 लाख करोड़ था। यानी, 5 साल में टैक्स वसूली लगभग दोगुनी हो गई है। 2024-25 में हर महीने औसत GST कलेक्शन 1.84 लाख करोड़ रुपए रहा। ये 5 साल पहले 2020-21 में 95 हजार करोड़ रुपए था। टैक्सपेयर्स की संख्या भी दोगुनी से ज्यादा बढ़ी GST लागू होने के वक्त 2017 में रजिस्टर्ड टैक्सपेयर्स की संख्या 65 लाख थी, जो अब बढ़कर 1.51 करोड़ से ज्यादा हो गई है। इससे सरकार का टैक्स बेस भी मजबूत हुआ है। सरकार का कहना है कि GST लागू होने के बाद टैक्स कलेक्शन और टैक्स बेस दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इससे देश की फिस्कल पोजिशन मजबूत हुई है और टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी और आसान बना है। इतिहास में सबसे बड़ा टैक्स कलेक्शन अप्रैल 2025 में सरकार ने अप्रैल 2025 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) से 2.37 लाख करोड़ रुपए जुटाए थे। सालाना आधार पर इसमें 12.6% की बढ़ोतरी हुई थी। ये GST कलेक्शन का रिकॉर्ड है। इससे पहले हाईएस्ट जीएसटी कलेक्शन का रिकॉर्ड अप्रैल 2024 में बना था। तब सरकार ने 2.10 लाख करोड़ रुपए जुटाए थे। इकोनॉमी की हेल्थ दिखाता है GST कलेक्शन जीएसटी कलेक्शन इकोनॉमिक हेल्थ का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। हायर कलेक्शन मजबूत उपभोक्ता खर्च, औद्योगिक गतिविधि और प्रभावी कर अनुपालन का संकेत देते हैं। अप्रैल महीने में बिजनेसेज अक्सर मार्च से वर्ष के अंत के लेन-देन को क्लियर करते हैं, जिससे टैक्स फाइलिंग्स और कलेक्शन्स में वृद्धि होती है। KPMG के नेशनल हेड अभिषेक जैन ने कहा कि अब तक का हाईएस्ट GST कलेक्शन मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था को दर्शाता है। 2017 में लागू हुआ था GST सरकार ने 1 जुलाई 2017 को देशभर में GST लागू किया था। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के 17 करों और 13 उपकरों को हटा दिया गया था। GST के 7 साल पूरे होने पर वित्त मंत्रालय ने पिछले सात वर्षों के दौरान हासिल की गई उपलब्धियों को लेकर पोस्ट किया। GST एक इनडायरेक्ट टैक्स है। इसे कई तरह के इनडायरेक्ट टैक्स जैसे VAT, सर्विस टैक्स, परचेज टैक्स, एक्साइज ड्यूटी को रिप्लेस करने के लिए 2017 में लागू किया गया था। GST में 5, 12, 18 और 28% के चार स्लैब हैं। GST को चार हिस्सों में डिवाइड किया गया है:     CGST (केंद्रीय जीएसटी): केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किया जाता है।     SGST (राज्य जीएसटी): राज्य सरकारों द्वारा एकत्र किया जाता है।     IGST (एकीकृत जीएसटी): अंतरराज्यीय लेनदेन और आयात पर लागू, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विभाजित।     उपकर: स्पेसिफिक पर्पज के लिए फंड जुटाने के लिए स्पेसिफिक गुड्स (जैसे, लग्जरी आइटम्स, तंबाकू) पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त शुल्क।

रेल नेटवर्क विस्तार: भोपाल-इटारसी-बीना रूट पर चौथी लाइन के लिए सर्वे कार्य शुरू

भोपाल  रेलवे यातायात को सुगम, तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में भोपाल मंडल के अंतर्गत इटारसी-भोपाल-बीना खंड पर चौथी रेल लाइन परियोजना की शुरुआत कर दी गई है। इस परियोजना के पूरा होने से न केवल माल और यात्री परिवहन की क्षमता में इजाफा होगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन को भी नया आयाम मिलेगा। वर्तमान में इस खंड पर पहले से मौजूद तीन रेल लाइनों पर भारी यातायात का दबाव है, जिससे ट्रेनों की गति और समयबद्धता पर असर पड़ता है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि चौथी लाइन के निर्माण से यह दबाव कम होगा और मालगाड़ियों के निर्बाध संचालन के साथ-साथ यात्री ट्रेनों को भी समय पर और बेहतर ढंग से चलाया जा सकेगा। सर्वे और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी परियोजना के तहत इटारसी से भोपाल और फिर भोपाल से बीना तक सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। सर्वे के पूर्ण होते ही नियमानुसार आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। इसमें स्थानीय प्रशासन के सहयोग से भूमि स्वामियों को उचित मुआवजा दिए जाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। महत्वपूर्ण जिलों से होकर गुजरेगा रूट यह चौथी रेल लाइन मप्र के नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, भोपाल, विदिशा और सागर जैसे जिलों से होकर गुजरेगी। इन जिलों में रेलवे नेटवर्क के विस्तार से आवागमन की सुविधा बढ़ेगी और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। परियोजना से इन क्षेत्रों में आवागमन के समय में कमी आएगी और साथ ही माल परिवहन की लागत और समय में भी कमी आएगी। निर्माण, रखरखाव और संचालन से जुड़े कार्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। साथ ही, इस परियोजना के तहत माल गोदाम, लॉजिस्टिक्स हब जैसे रेलवे से जुड़े अन्य ढांचागत विकास से आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा। सर्वे कार्य किया जा रहा है     चौथी लाइन के निर्माण के लिए इटारसी से लेकर बीना खंड तक सर्वे का कार्य जारी है। सर्वे पूर्ण होने के बाद आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। – नवल अग्रवाल, पीआरओ, भोपाल मंडल बीना-इटारसी के बीच बिछेगी चौथी रेल लाइन रेलवे के अधिकारियों की मानें तो बीना से इटारसी के बीच चौथी रेल लाइन बिछाने के बाद सुपरफास्ट और एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें 160 से 220 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ेंगी। इतना ही नहीं ट्रैफिक का लोड भी कम होगा और ट्रैफिक क्लियर मिलने के कारण अभी जो गाड़ियां आउटर पर खड़ी करनी पड़ती हैं उन्हें भी खड़ा नहीं करना पड़ेगा जिसके कारण समय की काफी बचत होगी। बीना से इटारसी के बीच की दूरी 230 किमी. है जिसे पूरा करने में अधिकतर ट्रेनों को 4 से साढ़े 4 घंटे का वक्त लगता है। चौथी रेलवे लाइन की सर्वे रिपोर्ट रेलव बोर्ड को भेजने की जानकारी देते हुए रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि उम्मीद है कि 2025 में ही चौथी रेल लाइन का काम शुरू हो जाएगा और अगले 3 साल में चौथी रेल लाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। बीना-भोपाल-इटारसी रूट व्यस्ततम रूट है जिस पर रोजाना सैकड़ों ट्रेनें चलती हैं। 160 से 220 की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें भोपाल रेल मंडल के डीआरएम देवाशीष त्रिपाठी ने बताया कि "बीना से इटारसी के बीच तीसरी रेल लाइन का काम पूरा हो चुका है. नवंबर 2023 से इस पर ट्रेनें चल रही हैं. तीसरी लाइन के चालू होने से भोपाल मंडल को 10 से अधिक नई ट्रेनें मिली हैं. इन ट्रेनों में वंदे भारत, महामना, सिंगरौली-पुणे हमसफर और आरकेएमपी-एलटीटी एक्सप्रेस आदि शामिल हैं. इससे बाकी मंडलों को भी फायदा पहुंचा है. अब चौथी रेल लाइन बिछाने के बाद सुपरफास्ट और एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें 160 से 220 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ेंगी. ट्रैफिक क्लियर होने से अधिक देर तक आउटर में भी नहीं खड़े रहना पड़ेगा." वर्तमान में लगते हैं 4 से 5 घंटे बीना से इटारसी की दूरी 230 किलोमीटर है. इस दूरी को तय करने में निजामुद्दीन-जबलपुर सुपरफास्ट को 4 घंटे 20 मिनट लगते हैं. इसी प्रकार ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस और कुशीनगर बीना से इटारसी पहुंचने में करीब 4 घंटे का समय लेती है. 3 लाइनों में लोड के कारण ट्रेन को समय अधिक लगता है. लेकिन चौथी रेल लाइन बिछने के बाद लोड कम हो जाएगा और ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी. यानि नई रेल लाइन बिछने के बाद बीना से इटारसी के बीच यात्रा करने पर 2 से ढाई घंटे की बचत होगी. 3 साल में पूरा होगा चौथी रेल लाइन का काम डीआरएम देवाशीष त्रिपाठी ने बताया कि "चौथी लाइन बिछाने के लिए सर्वे की रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेज दी गई है. 2025 में ही इसका काम शुरू हो जाएगा. बीना से इटारसी के बीच चौथी रेल लाइन बनने के बाद ट्रेनों की रफ्तार 160 से 220 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ जाएगी. अगले 3 साल में चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी. इसका मतलब है कि बीना से इटारसी का सफर 2 से ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा." केंद्रीय बजट में मिले 14,745 करोड़ रुपये केंद्रीय रेलवे बजट में मध्य प्रदेश के लिए 14,745 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इससे मध्य प्रदेश में जहां ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, वहीं यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होगा. अभी बीना-भोपाल-इटारसी रूट मालगाड़ी और पैसेंजर ट्रेन के लिए काफी जरूरी है. यह व्यस्ततम रूट में गिना जाता है. वर्तमान में इस रूट से सैकड़ों एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती हैं. चौथी नई लाइन न केवल यात्रा के समय को कम करेगी बल्कि माल ढुलाई को भी आसान बनाएगी. इससे प्रमुख शहरों की आपस में कनेक्टिविटी बेहतर होगी.   

अमित शाह से मिले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा

  छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियानों व उपलब्धियों की दी जानकारी नई दिल्ली, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज संसद भवन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, माओवादी चुनौती से निपटने की रणनीति सहित विभिन्न विषयों पर केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह से चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय गृह मंत्री को माओवादी विरोधी अभियानों की उपलब्धि एवं भविष्य की कार्ययोजना से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में पिछले डेढ़ वर्षों में उल्लेखनीय सफलता मिली है। दिसंबर 2023 से अब तक 33 बड़ी मुठभेड़ों में शीर्ष माओवादी नेताओं सहित 445 माओवादी न्यूट्रलाइज़ किए गए हैं। वहीं, 1554 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं, एवं 1588 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने कहा राज्य सरकार की “समन्वित विकास और सुरक्षा” नीति के तहत माओवादी प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। इन प्रयासों से न केवल माओवादी प्रभाव कम हुआ है, बल्कि स्थानीय समुदायों में प्रशासन के प्रति भरोसा भी बढ़ा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ सरकार की माओवाद उन्मूलन हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने माओवादी उन्मूलन के लिए राज्य सरकार के प्रयासों को ऐतिहासिक बताया और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का वादा किया। बैठक में छत्तीसगढ़ के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले अमृत रजत महोत्सव 2025 की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि इस आयोजन को भव्य और यादगार बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता, और आर्थिक उपलब्धियों को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर के विकास और सुरक्षा में सहयोग और मार्गदर्शन पर शाह को धन्यवाद भी ज्ञापित किया।

कोई रोक नहीं: स्मार्ट मीटर पर सुप्रीम कोर्ट या MP हाईकोर्ट का आदेश नहीं आया, स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को लाभ

भोपाल स्मार्ट मीटर की स्थापना रोकने को लेकर सुप्रीम कोर्ट अथवा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा किसी भी प्रकार का निर्णय या आदेश नहीं दिया गया है। स्मार्ट मीटर एक देश व्यापी स्कीम है जिसके तहत समूचे देश में स्मार्ट मीटर लगाये जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में कतिपय प्रिंट तथा सोशल मीडिया में यह खबर फैलाई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट अथवा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं है। यह खबर असत्य, भ्रामक और निराधार है। सुप्रीम कोर्ट अथवा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा इस प्रकार का कोई भी फैसला नहीं दिया गया है। स्मार्ट मीटर के संबंध में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, भोपाल ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर निर्धारित प्लान के अनुसार लगाये जा रहे हैं और उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगवाने से मना नहीं कर सकते हैं। इसी प्रकार सोशल मीडिया में यह भ्रम भी फैलाया जा रहा है कि स्मार्ट मीटर तेज चल रहे है यह बात विभिन्न टेस्टिंग लैब में गलत साबित हो गई है। स्मार्ट मीटर में किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं है और स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं द्वारा उपभोग की जा रही बिजली के अनुसार ही तकनीकी रूप से वास्तविक और सटीक रीडिंग दर्ज कर रहे हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। अब तक साढ़े तीन लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगा दिए गए हैं और उपभोक्ता हित में स्मार्ट मीटर के सकारात्मक परिणाम भी मिल रहे हैं। कंपनी द्वारा गुना वृत्त में लगभग तीन माह पहले लगाए जा चुके स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं से जब बातचीत की तो उनके द्वारा फायदा होने की बात कही है। गुना शहर के उपभोक्ता विष्णु धाकड़ ने बताया कि उनके यहां दो महीने पहले स्मार्ट मीटर लगा था। शुरू में उन्हें डर था की कहीं स्मार्ट मीटर से बिल तो अधिक नहीं आएगा। लेकिन जैसे ही अगले महीने बिल आया तो देखा कि कहीं कोई ऐसी गड़बड़ी नहीं आई। इस महीने 80 रुपये बिल आया है, जिसे जमा भी कर दिया है। इसी तरह देवीदयाल ने बताया कि उनके यहां उनकी सहमति से स्मार्ट मीटर लगाया गया है। उन्होंने बताया कि इस महीने उनका बिल कम ही आया है। इसमें किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है।  कंपनी ने कहा कि ऐप के माध्मय से हम अपने घर के बिजली उपभोग को भी नियंत्रित करना सीख गए हैं, क्योंकि उपकरणों पर नियंत्रण करने से बिल में काफी कमी आई है। गुना के ही उपभोक्ता अक्षय कुमार ने बताया कि स्मार्ट मीटर से कहीं कोई गलत बिल नहीं आया, हमारा बिल 550 रुपये आया है। रीडिंग लेने में कोई गड़बड़ी नहीं है, बल्कि अब तो अपने आप दूरसंचार प्रणाली से रीडिंग हो रही है और निर्धारित तिथि को सही रीडिंग का बिल मोबाइल पर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तो बिल कम करना अपने हाथ में है। सोलर ऑवर में 20 प्रतिशत की छूट कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए जिसमें सार्वजनिक जल कार्य और स्ट्रीट लाइट और एलटी औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए ऑफ पीक/ सौर समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। यह छूट 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड/अनुबंध मांग वाले उपभोक्ताओं को मिल रही है। स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए यह सभी छूट अथवा प्रोत्साहन की गणना सरकारी सब्सिडी (यदि कोई हो) को छोड़कर की जा रही है। राजधानी भोपाल के एकतापुरी, अशोकागार्डन निवासी विजय शंकर को जारी जुलाई माह के बिल में 29 रुपये की छूट मिली है, जबकि उनकी कुल खपत 92 रीडिंग का बिल सिर्फ 86 रुपये आया है। इन्हें दिन के टैरिफ में 30 यूनिट पर 20 प्रतिशत की छूट मिली है। इसी कॉलोनी के रहवासी महेश चंद्र को जुलाई माह के बिल में 99 रुपये की छूट मिली है। इनके स्मार्ट मीटर में कुल खपत 277 रीडिंग में से 85 रीडिंग पर 20 प्रतिशत की छूट मिली है। इस तरह से स्मार्ट मीटर में ऑटोमेटिक सटीक रीडिंग होने से कोई गड़बड़ी भी नहीं हो रही है तथा उपभोक्ताओं को अनेक फायदे मिल रहे हैं।  उपभोक्ताओं को घरेलू स्मार्ट मीटर से मिलने वाले फायदे       विद्युत वितरण कंपनी ने बताया कि ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है, बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती, एप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं, ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं और ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव कम होता है।  

लाड़ली बहना योजना की 27वीं किस्त जल्द, इस बार 1500 रुपए मिलेंगे खातों में

भोपाल  अगस्त का महीना लाडली बहनों के लिए बहुत ही खास होने वाला है। मुख्‍यमंत्री लाडली बहना योजना की 27वीं किस्त के पैसों के साथ अगस्त में रक्षाबंधन के शगुन के तौर पर 250 रुपये ज्यादा मिलने वाले हैं। मतलब 1.27 करोड़ महिलाओं के खाते में अगले महीने अगस्त में 1500 रुपये आने वाले हैं। लेकिन 1500 रुपये खाते में कब आएंगे? क्या 9 अगस्त को रक्षाबंधन से पहले ही महिलाओं के अकाउंट में 1500 रुपये पहुंच जाएंगे?  प्रदेश की 1 करोड़ 27 लाख लाड़ली बहनों के लिए खुशखबरी है। आज शुक्रवार से अगस्त का महीना लग गया है और अब जल्द लाड़ली बहना योजना की 27वीं किस्त आने वाली है। खास बात ये है कि इस बार लाड़ली बहनों के खाते में 1250 के साथ 250 रूपए अतिरिक्त रूप भेजे जाएंगे यानि 1250 की जगह 1500 रुपए आएंगे। 9 अगस्त को रक्षाबंधन है उम्मीद है कि अगले हफ्ते में कभी भी मोहन सरकार द्वारा योजना की 26वीं किस्त जारी की जा सकती है।इसके साथ ही 30 लाख से अधिक बहनों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर रिफिलिंग के लिए भी राशि अंतरित की जाएगी। कब राशि बढ़कर होगी 3000 ? कब से शुरू होंगे पंजीयन?  मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में जौरा कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने लाड़ली बहना योजना की राशि 3000 करने और नए पंजीयन समेत कई प्रश्न पूछे थे।इस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि योजना में राशि को बढ़ाकर तीन हजार रुपये करने का वर्तमान में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।जून 2025 में ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई। नए पंजीयन का भी कोई प्रस्ताव नहीं है, इसलिए पंजीयन नहीं किया जा रहा है। 20 जुलाई 2023 से सरकार द्वारा प्रतिमाह की 10 तारीख को राशि अंतरण करने के निर्देश हैं, परन्तु सुविधानुसार यह तिथि आगे-पीछे होती रहती है। लाभार्थियों को प्रतिमाह नियमित रूप से राशि का भुगतान किया जा रहा है। हितग्राही की संख्या तथा भुगतान की गई कुल राशि समेत बाकी की जानकारी एकत्रित की जा रही है। वर्तमान में मिलते है लाड़ली बहना योजना के तहत हर माह 1250 रू     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।     लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से जुलाई 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 26 किश्तों का अंतरण किया गया है।प्रदेश की लाड़ली बहनों को अब तक 30 हजार करोड़ से अधिक का लाभ मिल चुका है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। लाड़ली बहना योजना के ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने 1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो। लाभार्थी सूची में ऐसे चेक करें अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

EC का पलटवार: ‘राहुल नहीं आते, अब कर्मचारी धमकी का निशाना’, विपक्ष के आरोपों पर सफाई

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. आयोग ने कहा कि जब राहुल गांधी को आपत्ति जताने के लिए बुलाया जाता है तो वह आते नहीं और अब आयोग के कर्मचारियों को धमकाने तक लगे हैं.  आयोग ने राहुल के बयानों को 'बेबुनियाद' और 'गैर-जिम्मेदाराना' करार देते हुए कहा कि वह ऐसे आरोपों को नजरअंदाज करता है. साथ ही आयोग ने अपने सभी चुनावी कर्मियों को ऐसी टिप्पणियों पर ध्यान न देने और निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से काम जारी रखने का निर्देश दिया है. चुनाव आयोग ने कहा कि राहुल गांधी को 12 जून 2025 को ईमेल भेजा, लेकिन वह पेश नहीं हुए. 12 जून 2025 को उन्हें पत्र भी भेजा गया, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं आया. राहुल गांधी ने अब तक किसी भी मुद्दे पर आयोग को कोई पत्र नहीं भेजा है. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब वह आधारहीन आरोप लगा रहे हैं और आयोग व उसके कर्मचारियों को धमकाने तक लगे हैं. चुनाव आयोग ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयानों को नजरअंदाज करता है और अपने सभी कर्मचारियों से अपील करता है कि वे निष्पक्षता व पारदर्शिता के साथ कार्य करते रहें. आयोग ने अपने कर्मियों से अपील की कि वे बिना किसी दबाव के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गरिमा को बनाए रखें. क्या बोले राहुल गांधी दरअसल, राहुल गांधी ने शुक्रवार को चुनाव आयोग पर वोट चारी आरोप लगाया और कहा कि हमारे पास इसके पुख्ता सबूत हैं. राहुल गांधी ने कहा कि इस वोट चोरी में चुनाव आयोग शामिल है और मैं ये हल्के में नहीं कह रहा हूं. मैं ये पुख्ता सबूत के साथ बोल रहा हूं. जैसे ही हमने ये रिलीज किया, वैसे ही पूरे देश को पता चल जाएगा कि इलेक्शन कमीशन वोट चोरी करा रहा है और किसके लिए कर रहा है? आयोग बीजेपी के लिए ऐसा कर रहा है. इस पर कोई सवाल नहीं उठा सकता. हमें MP और महाराष्ट्र चुनाव में हुआ शक: राहुल गांधी राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी को मध्य प्रदेश और लोकसभा चुनावों में वोट चोरी का शक था. महाराष्ट्र में ये शक और बढ़ गया, जहां उन्हें लगा कि राज्य स्तर पर बड़े पैमाने पर धांधली हुई उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में एक करोड़ नए वोटर जोड़े गए, लेकिन जब कांग्रेस ने वोटर लिस्ट और वीडियोग्राफी की मांग की तो आयोग ने कोई सहयोग नहीं किया. राहुल ने कहा, 'चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट नहीं दिखाई. हमने वीडियोग्राफी मांगी तो उन्होंने उसका कानून ही बदल दिया.' बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच तनातनी देखने को मिली हो. 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी राहुल ने आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया था, खासकर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की विश्वसनीयता और मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर. उस वक्त भी आयोग ने राहुल के बयानों को 'आधारहीन' बताते हुए खारिज कर दिया था. इसके अलावा कांग्रेस ने कई बार आयोग के कुछ अधिकारियों की नियुक्ति और उनके कार्यकाल पर सवाल उठाए हैं, जिसे आयोग ने राजनीति से प्रेरित बताया है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव राहत कार्यों की कर रहे हैं लगातार समीक्षा

अति-वृष्टि एवं बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी : मंत्री विजयवर्गीय 3 हजार 628 व्यक्तियों और 94 मवेशियों का रेस्क्यू किया गया मुख्यमंत्री डॉ. यादव राहत कार्यों की कर रहे हैं लगातार समीक्षा भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जानकारी दी है कि प्रदेश में अति-वृष्टि एवं बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रभावित क्षेत्रों में चलाये जा रहे राहत कार्यों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश में अभी तक औसत 703.33 मि.मी वर्षा हो चुकी है जो सामान्य से 60 प्रतिशत ज्यादा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बारिश बहुत ही कम समय में तेजी से हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश में अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में राहत बचाव कार्य संबंधी सभी जिला कलेक्टर्स, पुलिस अधिकारियों और राहत कार्य से जुड़े संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये। राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये गये है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव से जुड़े कार्यों में ढ़िलाई न बरती जाये। एनडीआरएफ क्विक रिस्पांस टीम आदि की तैनाती नगरीय विकास मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एन.डी.आर.एफ) की 5 टीमों में से भोपाल में 2, जबलपुर, ग्वालियर तथा धार में एक-एक टीम तैनात की गई है। इन टीमों के अलावा 3 टीमों को अशोकनगर, श्योपुर तथा ग्वालियर में तैनात किया गया है। एन.डी.आर.एफ द्वारा 2 रेस्क्यू ऑपरेशन में 22 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। राज्य आपदा आपातकालीन मोचन बल (एस.डी.इ.आर.एफ) को बाढ़ राहत एवं बचाव कार्य के लिये अत्याधुनिक बचाव उपकरण उपलब्ध कराये गये है। प्रदेश के 259 संवेदनशील क्षेत्रों में डिजास्टर रिस्पाँस सेंटर स्थापित किया गया है। इसी के साथ 111 क्विक रिस्पाँस टीम (क्यूआरटी) तैनात की गई है। प्रदेश के 11 जिलों में 3 हजार 300 आपदा मित्र वॉलंटियर्स को प्राथमिक सहायता के लिए प्रशिक्षित किया गया है। राज्य में 80 हजार 375 सिविल डिफेंस वालंटियर को प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षित किये गये वालंटियर्स की सेवाएँ राहत और बचाव कार्यों के लिये ली जा सकेंगी। एसडीईआरएफ द्वारा एक जून से 30 जुलाई 2025 तक 432 रेस्क्यू ऑपरेशन के अंतर्गत 3 हजार 628 व्यक्तियों और 94 मवेशियों का रेस्क्यू किया गया है। आपदा नियंत्रण कक्ष प्रदेश में राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष के माध्यम से अब तक SACHET पोर्टल के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को 75 रेड अलर्ट 3 घंटे पूर्व भेजे गये है। इसी के साथ प्रमुख नदियों के जलस्तर बढ़ने की जानकारी तथा प्रभावित होने वाले जिले तथा गांवों की सूची आपदा सुरक्षा में जुड़े प्रमुख अधिकारियों और एजेंसियों को निश्चित अंतराल पर नियमित रूप से दी जा रही है। प्रदेश में डिजास्टर वॉर्निंग एण्ड रिस्पाँस सिस्टम (डीडब्ल्यूआरएस) के माध्यम से अति-वृष्टि, बाढ़ एवं आकाशीय बिजली का पूर्वानुमान एवं चेतावनी प्रसारण की व्यवस्था की गई है। जिला स्तर पर घटना की सूचना तथा राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर समन्वय किया जा रहा हैं। मंत्रालय से निगरानी और समन्वय बाढ़ आपदा के दौरान निगरानी एवं समन्वय के लिये राज्य स्तर पर मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल में सिचुएशन रूम 24×7 कार्यरत है। एसडीईआरएफ मुख्यालय में स्थित राज्य कन्ट्रोल रूम में टोल फ्री नम्बर 1079 पर जन सामान्य द्वारा बाढ़ की स्थिति में 24×7 सहायता प्राप्त की जाने की व्यवस्था की गई है। प्रदेश के समस्त जिलों में डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर कमांड कंट्रोल एण्ड कोऑर्डिनेशन सेंटर (डीसीसीसी) स्थापित कर आपदा की स्थिति में 24×7 कार्यरत है। मुख्यमंत्री ने किया कंट्रोल रूम का निरीक्षण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 30 जुलाई को भोपाल के राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण कर स्वयं स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने बचाव दलों, पीड़ितों से चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिये। राज्य, जिला तथा तहसील स्तर पर बाढ़ पूर्व तैयारी तथा मानसून के दौरान आकाशीय बिजली से जन-सामान्य के बचाव, सर्पदंश से बचाव के लिये विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियां तय करते हुए एडवायजरी जारी की गई है। बाढ़ के दौरान "डूब की घटनाओं, पुलियों, रपटों पर दुर्घटना" के नियंत्रण तथा जन सामान्य के बचाव के लिये समस्त जिला प्राधिकरणों को निर्देश जारी किये जा चुके हैं। प्रदेश के सभी 55 जिलों में आपदा प्रतिक्रिया दलों के प्रशिक्षण, आपदा प्रबंधन अभ्यास तथा जनजागरूकता के लिए "आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण एवं क्षमता वृद्धि योजना" नियमित रूप से चल रही है। अब तक 28 करोड़ 49 लाख राहत राशि का वितरण प्रदेश में इस मॉनसून में अभी तक अतिवृष्टि और बाढ़ से लगभग 1632 पशु हानि हुई है। प्रदेश में हुई भारी बारिश से 128 मकानों के पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। लगभग 2 हजार 333 मकानों में आंशिक हानि भी हुई है। बाढ़ से प्रभावित पीड़ितों को अब तक जिला कलेक्टर्स द्वारा 28 करोड़ 49 लाख रूपये की राहत राशि वितरित की गई है। सभी जिला कलेक्टर्स द्वारा सुनिश्चित किया जा रहा है कि राशि जल्द से जल्द वितरित की जाये। प्रदेश में राहत मद में धनराशि की कोई कमी नहीं है। प्रदेश में 53 राहत कैम्प चलाये जा रहे है, जिनमें 3065 लोगों को रखा गया है। आरआरडीए की कुल 254 सड़के व पुल अतिवर्षा और बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें से 212 में अस्थायी सुधार कराया जा चुका है। लोक निर्माण विभाग की क्षतिग्रस्त दो सड़कों की मरम्मत की गयी है। बांधों की सतत निगरानी की जा रही है। बाढ़ से बचाव के लिये आवश्यकतानुसार सेना की मदद ली जा रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सहायता पहुंचाने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा भी पूरा सहयोग किया जा रहा है। प्रदेश में दवाईयों, खाद्य सामग्रियों की पूर्ति सुनिश्चित की गयी है। प्रदेश के सभी अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।