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छत्तीसगढ़ में सात हजार करोड़ की सड़क परियोजनाओं को जल्द मिलेगी वित्तीय स्वीकृति

मुख्यमंत्री साय की पहल से खुला विकास का रास्ता,  चार नए पुलों का भूमि पूजन जल्द छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से हुई मुलाकात छत्तीसगढ़ में सात हजार करोड़ की सड़क परियोजनाओं को जल्द मिलेगी वित्तीय स्वीकृति रायपुर  छत्तीसगढ़ की अधोसंरचना को रफ्तार देने के लिए आज एक अहम क़दम उठाया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी से मुलाक़ात की, जिसमें राज्य की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंज़ूरी मिली। बैठक में केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 7000 करोड़ से ऊपर के नियोजित कार्यों की वित्तीय स्वीकृति को शीघ्र करने हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया। इसके साथ ही केंद्रीय सड़क निधि (CRF) के तहत 600 करोड़ रुपये की मंज़ूरी दी गई। इसके ज़रिए छत्तीसगढ़ में कई सड़कों के निर्माण और उन्नयन का रास्ता साफ़ होगा। रायपुर शहर की भीड़भाड़ को कम करने के लिए चार बड़े ब्रिज बनाए जाएंगे, जिनका भूमि पूजन शीघ्र ही होगा। वहीं, राजधानी रायपुर से अन्य ज़िलों तक की सड़कें दो लेन से चार लेन में बदली जाएंगी, जिससे आवागमन तेज़ और सुरक्षित हो जाएगा। बैठक में यह भी तय हुआ कि राज्य की सड़क योजनाएं की प्लानिंग में अब केंद्र के ‘गति शक्ति पोर्टल’ का उपयोग किया जाएगा, ताकि जल्द मंजूरी मिल सके। श्री गडकरी ने रायपुर-आरंग-बिलासपुर-दर्री के बीच करीब 95 किमी लंबी छह लेन सड़क के लिए डीपीआर जल्दी बनाने के लिए आदेशित किया, जो औद्योगिक, कृषि और शैक्षिक क्षेत्रों को जोड़ेगी। साथ ही, समृद्धि एक्सप्रेसवे का विस्तार रायपुर तक भी किया जाएगा। इसके अलावा कुछ ज़रूरी योजनाओं को आज मंजूरी भी मिल गई। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130 ए में उन्नयन कार्य, राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 में रेजिंग का कार्य एवं राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 में मजबूतीकरण के कुल 115.95 करोड़ के कार्यों की स्वीकृति मिली है। इनमें बिलासपुर शहर के भीतर 15 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण शामिल है, जिससे शहर में ट्रैफिक आसान होगा। कटनी-गुमला मार्ग के हिस्से में 11 किलोमीटर सड़क बनेगी जो गांवों को जोड़ने में मदद करेगी। वहीं, केशकाल के 4 किलोमीटर हिस्से की सड़क को मज़बूत किया जाएगा, जिससे पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़कें केवल यात्रा का साधन नहीं हैं, बल्कि विकास, रोज़गार और सामाजिक बदलाव का रास्ता हैं। अँजोर विजन 2047’ के तहत छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव, हर नागरिक तक बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन पहुंचे। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉक्टर कमलप्रीत सिंह भी उपस्थित थे।

यातायात सुधार की मिसाल बने भोपाल: न्यायमूर्ति सप्रे की पहल

हेलमेट, सीट बेल्ट सहित यातायात नियमों के पालन को बनाएं आदत नियम उल्लंघन और नशे में वाहन चलाने पर हो सख्त कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति अध्यक्ष के साथ जिला सड़क सुरक्षा समिति की हुई बैठक भोपाल सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री अभय मनोहर सप्रे ने कहा है कि भोपाल में सड़क सुरक्षा और यातायात सुधार के क्षेत्र में संगठित प्रयासों के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम सहित सभी संबंधित विभागों को गंभीरता, लगन और समर्पण भाव से कार्य करना होगा। उन्होंने समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर आगामी 3 माह में सकारात्मक बदलाव सुनिश्चित करने की अपेक्षा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा संबंधी समिति भोपाल को इस दिशा में हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मृत्यु की संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। न्यायमूर्ति श्री सप्रे की अध्यक्षता में शुक्रवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय भोपाल में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक हुई। बैठक में कलेक्टर श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह, पुलिस आयुक्त श्री हरिनारायणचारी मिश्र, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री पंकज श्रीवास्तव, नगर निगम आयुक्त श्री हरेन्द्र नारायण, सीईओ स्मार्ट सिटी श्रीमती अंजू अरुण कुमार, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती ईला तिवारी एवं एडीएम श्री अंकुर मेश्राम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि हेलमेट पहनने की आदत को बढ़ावा दिया जाए, सीट बेल्ट उपयोग के प्रति जागरूकता लाई जाए, शराब पीकर वाहन चलाने वालों एवं नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोक परिवहन को बढ़ावा दिया जाए ताकि सड़कों पर छोटे वाहनों का दबाव कम हो सके। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस विभाग सहित सभी शासकीय कर्मचारी वाहन चलाते समय अनिवार्य रूप से सीट बेल्ट/हेलमेट का उपयोग करें। स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाए। उन्होंने मीडिया से जन-जागरूकता अभियान को गति देने में सहयोग का भी आग्रह किया। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने भोपाल जिले के अंतर्गत विगत 5 वर्षों में हुई सड़क दुर्घटनाओं, ब्लैक स्पॉट चिन्हांकन एवं उनके सुधार कार्यों, चालानी कार्रवाई, जन-जागरूकता अभियानों और अन्य नवाचारों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का जीवन अमूल्य है और किसी की गलती से निर्दोष की जान न जाए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने निर्देश दिए कि वाहनों की फिटनेस की नियमित जांच की जाए, ड्राइविंग टेस्ट में सख्ती बरती जाए, बीमा और लाइसेंस की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाए तथा ओवरलोडिंग पर रोक के लिए विशेष कार्रवाई की जाए। सड़कों पर मानक गति सीमा का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों के लिए राहवीर योजना और कैशलेस ट्रीटमेंट योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। श्री सप्र ने कहा कि प्रशासन एवं पुलिस बड़ी संस्थाओं से अपील करे कि वे अपने कर्मचारियों के लिए परिवहन सुविधाएं, जैसे बसें आदि, उपलब्ध कराएं जिससे सड़कों से वाहनो का अत्यधिक दबाब कम हो। उन्होंने जिले के नागरिकों से भी आग्रह किया कि बच्चों को बचपन से ही सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए। कलेक्टर श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि भोपाल जिले में सड़क सुरक्षा और यातायात सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें नवाचार और जन-जागरूकता अभियान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बैठक में दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। पुलिस आयुक्त श्री हरिनारायणचारी मिश्र ने कहा कि पुलिस विभाग सड़क सुरक्षा को लेकर और अधिक सक्रियता से कार्य करेगा तथा जागरूकता अभियान को गति देकर उसे प्रभावी बनाया जाएगा।  

201 देशों में 120 ईसाई बहुल, मात्र दो हिंदू बहुल देश – आंकड़े बता रहे धार्मिक संतुलन की कहानी

नई दिल्ली भारत में कई नेता अकसर बदलती हुई आबादी का मसला उठाते रहे हैं। हाल ही में तमिलनाडु के गवर्नर और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने भी यह मसला उठाया था। हिमंत बिस्वा सरमा का तो कहना है कि 2041 तक असम में हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे। इसके अलावा राज्यपाल एन. रवि ने भी असम, पश्चिम बंगाल, यूपी और बिहार के कुछ सीमांत इलाकों को लेकर चिंता जाहिर की। लेकिन दुनिया भर में ऐसी चर्चाएं और चिंताएं अकसर जाहिर की जाती रही है। अब प्यू रिसर्च के एक सर्वे में आया है कि 2010 से 2020 की अवधि में दुनिया में ईसाई बहुल देशों की संख्या में कमी आई है। ईसाई बहुल देशों की संख्या दुनिया में 2010 में 124 थी, जो 2020 में घटकर 120 पर आ गई है। इसकी वजह यह है कि कई देशों में ईसाई आबादी का अनुपात कम हुआ है। जनसंख्या वृद्धि दर में कमी और अपने धर्म को छोड़कर नास्तिक बनना या किसी और मजहब को स्वीकार करना इसकी अहम वजह है। जिन देशों में ईसाई आबादी अब बहुसंख्यक नहीं रही है, वहां कमी का कारण यह है कि बड़ी संख्या में लोगों ने धर्म को छोड़ दिया। ये लोग खुद को अब किसी भी धर्म से नहीं जोड़ते हैं। ये खुद को नास्तिक, अज्ञेयवादी अथवा अनीश्वरवादी मानते हैं। कुल मिलाकर ईसाई देशों की संख्या में 10 सालों के अंतराल में ही बड़ी कमी आ गई और 4 देश नक्शे से घट गए। कुल 5 फीसदी देश दुनिया के ऐसे हैं, जहां बहुसंख्यक आबादी किसी भी धर्म को ना मानने वालों की है। अब बात करते हैं कि आखिर वे कौन से देश हैं, जहां की अब बहुसंख्यक आबादी ईसाई नहीं रही। इन देशों में यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और उरुग्वे जैसे बड़े देश हैं। अब यूके में ईसाई आबादी 49 फीसदी ही बची है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में 47 फीसदी, फ्रांस में 46 और उरुग्वे में 44 फीसदी ही ईसाई जनसंख्या बची है। उरुग्वे में किसी भी धर्म को ना मानने वालों की संख्या 52 फीसदी हो गई है। एक और तथ्य यह है कि नीदरलैंड में भी बहुमत (54 फीसदी) अब किसी मजहब को न मानने वालों का है। इसके अलावा न्यूजीलैंड में यह नंबर 51 पर्सेंट है। हिंदुओं का दुनिया में क्या हाल, बहुमत वाले सिर्फ 2 देश दुनिया के 201 मान्यता प्राप्त देशों में अब 120 ही ईसाई बहुल बचे हैं। इसके अलावा सिर्फ दो देश ही हिंदू बहुल हैं। इन देशों में एक भारत है और दूसरा नेपाल। दिलचस्प फैक्ट है कि 95 फीसदी हिंदू आबादी अकेले भारत में ही बसती है। इसके अलावा बाकी 5 फीसदी जनसंख्या पूरी दुनिया में बिखरी हुई है। यही नहीं दुनिया की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 15 फीसदी है। कुल मिलाकर दुनिया के 60 फीसदी देश अब भी ईसाई बहुल है। हालांकि आने वाले दशकों में इस स्थिति में और बदलाव हो सकता है। कुछ और देश ईसाई बहुल होने का तमगा खो सकते हैं।

सफाई में नंबर 1 इंदौर की नई पहल: ऑन डिमांड कचरा उठाने के लिए लॉन्च होगा मोबाइल ऐप

इंदौर सफाई के मामले में इंदौर एक बार फिर नंबर बन रहा है। वहीं अब इंदौर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के बाद एक और सुविधा मिलने जा रही है। इस सुविधा के तहत लोग अपने मोबाइल में एक एप्लीकेशन के जरिए कचरा गाड़ी बुलवाकर कचरा दे सकेंगे। यह सुविधा घर और संस्थानों सभी के लिए उपलब्ध रहेगी। दरअसल, इस खास ऐप के जरिए लोगों को साफ-सफाई का ऑप्शन दिया जाएगा। इंदौर में शुरू होने वाले इस खास ऐप को 5 अगस्त को लॉन्च किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक जो ऐप लॉन्च किया जाएगा, वह एंड्रॉयड और आईओएस दोनों ही एप्लीकेशन पर काम करेगा। इस ऐप का मकसद सफाई के मामले में इंदौर को और आगे ले जाना है। अब इंदौर में डोर टू डोर ही नहीं ऑन डिमांड भी कचरा किया जाएगा कलेक्ट, फूड डिलीवरी की तरह ही होगा काम कैसे काम करेगा यह ऐप? दरअसल, लॉन्च किया जाने वाला यह ऐप एकदम फूड डिलीवरी ऐप की तरह ही काम करेगा। जिस प्रकार से हम किसी फूड डिलीवरी ऐप पर जाकर फूड आइटम सेलेक्ट करते हैं और अपना एड्रेस डालकर ऑर्डर करते हैं, वैसे ही इस ऐप में भी सफाई के कुछ ऑप्शंस को सेलेक्ट करना होगा और अपने घर व संस्थान का एड्रेस देना होगा। इसके बाद गाड़ियां घर आएंगी और आपका कचरा कलेक्ट करेंगी। दरअसल, यह कचरा रोज़ाना के अलावा इकट्ठा होने वाला एक्स्ट्रा कचरा होगा। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि इसका चार्ज कितना होगा, लेकिन जल्द ही यह तय किया जा सकता है। यह चार्ज नगर निगम द्वारा लिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि 5 अगस्त को इस ऐप को लॉन्च किया जा सकता है। ये एप्लिकेशन एंड्राइड और आईओएस दोनों के लिए रहेगी। फूड डिलीवरी ऐप की तरह करेगी काम जिस प्रकार आप फूड डिलीवरी ऐप का इस्तेमाल करते हैं। वैसे ही ये ऐप भी काम करेगी। फूड डिलीवरी ऐप पर जिस प्रकार फूड को सिलेक्ट करते हैं उसके बाद ऑर्डर देते हैं। ऑर्डर होने के बाद फूड आपके घर या संस्थान तक पहुंचाया जाता है। उसी प्रकार इस ऐप के माध्यम से आप अपने घर या संस्थान से निकलने वाले कचरे (रोजाना के अलावा) कलेक्शन के लिए गाड़ियां बुला सकते हैं। बड़े संस्थान और बड़े इवेंट के लिए साफ-सफाई का भी ऑप्शन मिलेगा। हालांकि, इसके लिए नगर निगम द्वारा चार्ज लिया जाएगा, लेकिन कितना चार्ज लिया जाएगा ये फिलहाल तय नहीं हुआ हैं। ऐप को दिया ‘क्विक साफ' नाम स्वच्छ भारत मिशन द्वारा तैयार की गई इस ऐप को 'क्विक साफ' (Quick Saaf) नाम दिया है। इंदौर में लोगों के घरों में डोर-टू-डोर कचरा गाड़ी रोजाना आती हैं, जिसमें लोग गिला और सूखा कचरा अलग-अलग डालते हैं। 5 अगस्त को लॉन्च की जा सकती है ऐप 5 अगस्त को नगर निगम परिषद के कार्यकाल के तीन साल पूरे हो रहे हैं। महापौर भार्गव ने बताया कि 5 अगस्त को कार्यकाल पूरे हो रहे हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव से इस विषय में चर्चा की जाएगी। अगर अनुमति मिलती है तो इस ऐप को 5 अगस्त को ही लॉन्च कर दिया जाएगा। इस ऐप की फिलहाल दरें तय नहीं हुई है। दरें एमआईसी में अप्रूवल के लिए आई है। जल्द ही दरें भी अप्रूव हो जाएगी। मगर इस ऐप का इस्तेमाल से लोग अपने घरों और संस्थानों में निकलने वाले एक्स्ट्रा कचरे को देने के लिए गाड़ी बुक कर सकते हैं। बुकिंग पर गाड़ी आपके घर आएगी और घर या संस्थान से कचरा कलेक्ट कर ले जाएगी। बड़े इवेंट या बड़े संस्थानों में साफ-सफाई के लिए भी आप इस माध्यम से टीम को बुला सकते हैं। नवाचार और इनोवेशन से इंदौर नंबर वन महापौर पुष्यमित्र भार्गव से दैनिक भास्कर ने इसे लेकर खास चर्चा की। उन्होंने बताया कि इंदौर नगर निगम अपने नवाचार और इनोवेशन के कारण लगातार देश में नंबर वन हैं। गीले कचरे से बायो सीएनजी बन रही है, सूखे को रिसाइकिलिंग कर रहे हैं, हरे कचरे से प्लेट्स बनाने का काम इंदौर नगर निगम में शुरू हो गया है, लेकिन इस कचरा प्रबंधन को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने लिए अब इंदौर नगर निगम ऑन डिमांड कचरा कलेक्शन भी शुरू करने जा रहा है। क्विक साफ (Quick Saaf) नाम से ऐप हमारा बनकर तैयार हो गया है, जिसकी शुरुआत जल्द होने वाली है। फूड डिलीवरी ऐप पर जैसे खाने की डिलीवरी होती है। उसी तरह डोर-टू-डोर कचरा गाड़ी के अलावा जो कचरा है वह यदि कोई देना चाहता है तो ऐप के माध्यम से घर बुलाकर दे सकता है। वैसे ही किसी बडे़ आयोजन की साफ-सफाई करना है तो ऐप के माध्यम से रिक्वेस्ट भेज सकता है। टीम वहां जाकर साफ-सफाई भी कर देगी। कई नवाचार लाइन में हैं। रोड स्वीपिंग के हो, मिक्स्ड वेस्ट के या प्लास्टिक से फ्यूल बनाना हो। इन्हें हम तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। क्या है इस ऐप का नाम? बता दें कि इंदौर में डोर टू डोर कलेक्शन किया जाता है, यानी गाड़ियां लोगों के घर जाती हैं और वहां से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग इकट्ठा करती हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि जब महीने या हफ्ते में घर की सफाई की जाती है तो एक्स्ट्रा कचरा निकलता है। ऐसे में इस कचरे को डालना भी बड़ी समस्या बन सकता है। लेकिन इंदौर नगर निगम सफाई के मामले में बेहद ही सक्रिय है। अब एक्स्ट्रा कचरे के लिए लोग गाड़ी बुक कर सकेंगे। बुकिंग करने पर यह गाड़ी आपके घर आएगी और घर से यह कचरा कलेक्ट कर लेगी। यह बड़े इवेंट और संस्थाओं के लिए भी सफाई का अच्छा माध्यम बनेगी। बता दें कि इंदौर में शुरू होने वाले ऐप को क्विक साफ नाम से तैयार किया गया है।

स्वास्थ्य के नाम पर ज़हर! मिलावटी हरी सब्जियों से तिल-तिल कर मर रहा है शरीर

भोपाल  स्वस्थ समझकर खा रहे हरी सब्जियों में छुपा हो सकता है कीटनाशकों का जहर! जानिए कैसे ये सब्जियां बन रही हैं बीमारियों की जड़ और क्या है इससे बचने का सही तरीका. सर्दियों में जैसे ही पालक, मेथी, बथुआ और सरसों की बहार बाजार में आती है, लोग इन्हें विटामिन और आयरन से भरपूर सुपरफूड मानकर थालियों में सजाना शुरू कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये सब्जियां जिन खेतों से आती हैं, वहां क्या छिड़का जा रहा है? रसायनों से भरी सब्जियां, स्वाद से पहले ज़हर किसानों द्वारा तेजी से उत्पादन बढ़ाने और फसल को कीटों से बचाने के लिए सिस्टमिक कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है. ये रसायन सीधे पौधे की जड़ों और पत्तियों में समा जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इनका असर सब्जियों से हटाने के लिए 7–10 दिन का समय देना चाहिए, लेकिन अधिकतर किसान इस निर्देश को नजरअंदाज करते हैं. धीमा जहर: स्वास्थ्य पर घातक असर डॉक्टर मनीष खेडेकर के अनुसार, लंबे समय तक ऐसे कीटनाशक खा लेने से शरीर पर गहरा असर होता है. ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी बीमारियां पहले आती हैं और बाद में कैंसर, किडनी व लिवर डैमेज जैसे घातक परिणाम सामने आते हैं बच्चों और बुजुर्गों पर असर और भी तेज़ होता है क्या करें? ये हैं सेफ्टी के उपाय सब्जियों को धोएं, भिगोएं और फिर पकाएं जहां संभव हो, जैविक खेती से आई सब्जियां खरीदें खुद छोटे पैमाने पर किचन गार्डन या ऑर्गेनिक फार्मिंग अपनाएं बाजार से आने वाली हरी पत्तेदार सब्जियों को नमक या सिरके के पानी में भिगोना असरदार हो सकता है प्राकृतिक खेती ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प नीम का अर्क, गोमूत्र, जीवामृत, राख जैसे पुराने संसाधन न सिर्फ फसल को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि मानव शरीर के लिए भी पूरी तरह सेहतमंद होते हैं. सरकारें भी अब प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने लगी हैं, लेकिन जब तक ग्राहक खुद जागरूक नहीं होंगे, बदलाव धीमा ही रहेगा.

डिजिटल इंडिया को मिलेगी नई उड़ान: Google बनाएगा एशिया का सबसे बड़ा डेटा सेंटर

हैदराबाद  सरकारी सूत्रों ने बताया कि गूगल, दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में 1 गीगावाट का डेटा सेंटर और उसका विद्युत बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए 6 अरब डॉलर का निवेश करेगा। यह अल्फाबेट इकाई का भारत में इस तरह का पहला निवेश होगा। मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले आंध्र प्रदेश सरकार के दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि बंदरगाह शहर विशाखापत्तनम में बनने वाले इस डेटा सेंटर में 2 बिलियन डॉलर का नवीकरणीय ऊर्जा निवेश शामिल है, जिसका उपयोग इस सुविधा को संचालित करने के लिए किया जाएगा। सर्च दिग्गज का डेटा सेंटर क्षमता और निवेश के लिहाज से एशिया में सबसे बड़ा होगा और यह सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड सहित पूरे क्षेत्र में इसके डेटा सेंटर पोर्टफोलियो के अरबों डॉलर के विस्तार का हिस्सा है। अप्रैल में, अल्फाबेट ने कहा था कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ आक्रमण से उत्पन्न आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद, इस साल डेटा सेंटर क्षमता निर्माण पर लगभग 75 अरब डॉलर खर्च करने के लिए प्रतिबद्ध है। अल्फाबेट ने रायटर्स के टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया। आंध्र प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश, जो सरकार और व्यापारिक नेताओं के साथ निवेश पर चर्चा करने के लिए सिंगापुर में हैं, ने गूगल निवेश पर कोई टिप्पणी नहीं की। हैदराबाद में गूगल का सुरक्षा इंजीनियरिंग केंद्र खुला उन्होंने सिफ़ी टेक्नोलॉजीज़ द्वारा राज्य में बनाए जाने वाले 550 मेगावाट के डेटा सेंटर का ज़िक्र करते हुए कहा, "हमने सिफ़ी जैसी कुछ घोषणाएँ की हैं, जो सार्वजनिक हैं।" उन्होंने आगे कहा, "कुछ घोषणाएँ ऐसी हैं जो अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं। अक्टूबर में हम ये घोषणाएँ करेंगे।" राज्य का विभाजनोत्तर निवेश अभियान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सहयोगी द्वारा संचालित राज्य आंध्र प्रदेश को 2014 में दो भागों में विभाजित कर दिया गया, जिससे इसकी पूर्व राजधानी हैदराबाद और राजस्व का एक प्रमुख स्रोत नव निर्मित तेलंगाना राज्य के हाथों में चला गया। आंध्र प्रदेश तब से उच्च ऋण और सामाजिक व्यय के वित्तीय दबाव को कम करने के लिए निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। लोकेश ने कहा कि आंध्र प्रदेश पहले ही 1.6 गीगावाट की कुल क्षमता वाले डेटा केंद्रों में निवेश को अंतिम रूप देने में सक्षम हो गया है, उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 6 गीगावाट के डेटा केंद्र बनाने का है, जो वर्तमान में लगभग शून्य है। उन्हें उम्मीद है कि पहले से तय 1.6 गीगावाट के शुरुआती डेटा सेंटर अगले 24 महीनों में चालू हो जाएँगे। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी एनारॉक के अनुसार, यह पूरे देश में वर्तमान में संचालित 1.4 गीगावाट से ज़्यादा होगा। लोकेश ने कहा, "हम विशाखापत्तनम में तीन केबल लैंडिंग स्टेशन लगाने पर भी काम कर रहे हैं। हम पर्याप्त केबल नेटवर्क बनाना चाहते हैं, जो मुंबई की मौजूदा क्षमता से दोगुना होगा।" केबल लैंडिंग स्टेशन – जो आमतौर पर डेटा केंद्रों के नजदीक स्थित होते हैं, जिन्हें वैश्विक नेटवर्कों के लिए तीव्र और विश्वसनीय कनेक्शन की आवश्यकता होती है – का उपयोग उन उपकरणों को संग्रहीत करने के लिए किया जाता है जो समुद्र के नीचे स्थित केबलों से डेटा प्राप्त करते हैं और उन्हें रिले करते हैं। लोकेश ने यह भी कहा कि राज्य डेटा केंद्रों की स्थिरता संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा अवसंरचना के निर्माण पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें अगले पाँच वर्षों में बिजली-प्रधान उद्योग से 10 गीगावाट तक की बिजली उत्पादन क्षमता की आवश्यकता होने का अनुमान है। उन्होंने कहा, "अधिकांश ऊर्जा वास्तव में हरित ऊर्जा होगी, और यही वह अद्वितीय मूल्य प्रस्ताव है जिसे हम प्रस्तुत कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि कुछ अतिरिक्त क्षमता कोयले से संचालित होगी, क्योंकि डेटा केंद्रों को पूरे दिन विश्वसनीय, उच्च मात्रा वाली बिजली की आवश्यकता होती है।  

भोपाल-इंदौर में नई व्यवस्था: बिना हेलमेट वालों को नहीं मिलेगा पेट्रोल, प्रशासन ने कसी कमर

भोपाल / इंदौर मध्य प्रदेश के दो शहर भोपाल और इंदौर में सड़क सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है. अब आज 1 अगस्त 2025 से शहर के किसी भी पेट्रोल पंप पर बिना हेलमेट पहने दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं मिलेगा. यह सख्त निर्देश दोनों शहरों के कलेक्टर ने जारी किए हैं. प्रशासन का मानना है कि इस कदम से सड़क हादसों में कमी लाई जा सकेगी और लोगों में ट्रैफिक नियमों को लेकर जागरूकता बढ़ेगी. इस आदेश को लागू करने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया. बैठक में इंदौर की मौजूदा यातायात व्यवस्था और सड़क दुर्घटनाओं को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. इसके बाद जिला प्रशासन ने यह ठोस कदम उठाने का ऐलान किया. कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि यह आदेश दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है औरआज  1 अगस्त से इसे सख्ती से लागू किया जाएगा. आदेश से पहले 30 और 31 जुलाई को शहर भर में जनजागरूकता अभियान चलाया गया , ताकि लोगों को समय रहते जानकारी मिल सके और वे नियमों का पालन करें. नियम नहीं माना तो पेट्रोल पंप के खिलाफ होगी कार्रवाई प्रशासन ने पेट्रोल पंप संचालकों को भी निर्देशित किया है कि वे बिना हेलमेट आए किसी भी व्यक्ति को पेट्रोल न दें. अगर कोई पेट्रोल पंप इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस आदेश के लागू होने से शहर में हेलमेट पहनने की आदत को मजबूती मिलेगी और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा. मप्र मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा-129 मप्र मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा-129 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि प्रत्येक दो पहिया वाहन चालक और सवारी को आईएसआई मार्क हेलमेट(Helmet Petrol Rule 2025) पहनना जरूरी है। यह प्रतिबंध 01 अगस्त 2025 से लागू होकर 29 सितंबर 2025 तक प्रभावशील रहेगा। इसके उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्ति, संस्था या संचालक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। किस कानून के तहत आया आदेश?  यह नियम मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 129, आपदा प्रबंधन अधिनियम और नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2023 की धारा 163 के तहत लागू किया गया है। इसके तहत दोनों शहरों के पेट्रोल पंप संचालकों को आदेशित किया गया है कि वे बिना हेलमेट आए ग्राहक को ईंधन न दें। आदेश का उल्लंघन करने पर पंप संचालकों पर कानूनी कार्रवाई होगी, हालांकि उपभोक्ता पर क्या सज़ा होगी, इसका अभी स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। कहां, कैसे और किसको मिलेगी हेलमेट न पहनने की छूट? यदि किसी व्यक्ति के पास मेडिकल इमरजेंसी या आकस्मिक परिस्थिति है, तो उसे इस नियम से अस्थायी रूप से छूट दी जाएगी। लेकिन अन्य सभी मामलों में यह नियम सख्ती से लागू होगा। इमरजेंसी में मिले सकेगी छूट     प्रतिबंध मेडिकल संबंधी मामलों व आकस्मिक स्थिति में लागू नहीं होगा। यह प्रतिबंध अन्य किसी नियम/आदेश के प्रतिबंध के अतिरिक्त होंगे।     यह आदेश 1 अगस्त 25 से लागू होगा। 29 सितंबर 25 तक की अवधि में प्रभावशील रहेगा।     इसका उल्लंघन करने वाले व्यक्ति, संस्था और संचालक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता-23 की धारा 223 के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकेगी। बिना हेलमेट आने वालों पर क्या कार्रवाई? पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन बिना हेलमेट के पेट्रोल देने पर पंप संचालक पर तो कार्रवाई करेगी, लेकिन जो पेट्रोल ले रहा है, उस पर क्या कार्रवाई होगी? सड़क पर पुलिस बिना हेलमेट वाले वाहन चालकों को नहीं पकड़ पा रही है। इस पर भी सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए। सड़क सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और रिटायर्ड न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने मंगलवार को इंदौर में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक ली थी। इस दौरान उन्होंने कुछ जरूरी निर्देश दिए थे।     सरकारी कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाए।     अगले 6 महीनों में सुधार के लिए रणनीति तैयार की जाए ताकि सकारात्मक बदलाव और नतीजे देखने को मिलें। न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा था कि इंदौर में लोगों को हेलमेट पहनने की आदत डालनी चाहिए। सीट बेल्ट के इस्तेमाल को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए। शराब पीकर वाहन चलाने वालों और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। लोक परिवहन के साधन बढ़ाए जाएं ताकि सड़कों पर छोटे निजी वाहनों की भीड़ कम हो। पुलिस, सरकारी कर्मचारी और विद्यार्थी जब भी वाहन चलाएं, तो हेलमेट पहनना अनिवार्य हो। सरकारी दफ्तरों में बिना हेलमेट एंट्री नहीं  इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी कलेक्टर को पत्र लिखकर सरकारी कार्यालयों में हेलमेट अनिवार्य करने की सिफारिश की थी। अब बिना हेलमेट किसी सरकारी दफ्तर में प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की सिफारिशों पर अमल  सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष रिटायर्ड जज अभय मनोहर सप्रे ने इंदौर समीक्षा बैठक में हेलमेट अनिवार्यता, शराब पीकर वाहन चलाने पर सज़ा, और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्रोत्साहन जैसे बिंदुओं पर सख्त अमल की मांग की थी। यही दिशा-निर्देश अब जमीन पर उतारे जा रहे हैं। कब से लागू होगा हेलमेट पहनने का आदेश? क्या मिलेगा दंड? यह आदेश 1 अगस्त से 29 सितंबर 2025 तक लागू रहेगा। नियम का उल्लंघन करने पर IPC की धारा 223 के तहत चालान या अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आदेश में स्पष्ट नहीं प्रशासन का निर्णय ठीक है, लेकिन आदेश में स्पष्ट नहीं है कि पेट्रोल पंप(Helmet Petrol Rule 2025) पर यदि कोई बिना हेलमेट के पेट्रोल भरवाता है तो इसमें पेट्रोल पंप संचालक को दोषी नहीं माना जाएगा। पंप संचालक को इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पंप संचालक पर इसकी अनिवार्यता नहीं होना चाहिए।-अजय सिंह, अध्यक्ष, मप्र पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन

केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2024 के स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कारों की घोषणा की, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

भोपाल  केन्द्र सरकार द्वारा शनिवार वर्ष 2024 के स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इन सम्मानों में स्वच्छता लीग सम्मान, राष्ट्रपति सम्मान, देश और राज्यों की विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले निकायों को सम्मानित किया जाएगा। इसके लिये 17 जुलाई को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक गरिमामय आयोजन होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू करेंगी। मध्यप्रदेश के आठ शहर होंगे सम्मानित हर वर्ष की तरह मध्यप्रदेश ने इस वर्ष भी अपनी विजय पताका फहराई है। प्रदेश के आठ शहरों को इस राष्ट्रीय आयोजन में सम्मानित किया जाएगा। इसमें सुपर लीग श्रेणी में इंदौर, उज्जैन और बुधनी हैं। इस श्रेणी में सिर्फ वे शहर शामिल किए जाते हैं, जिन्होंने पिछले तीन सालों में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया हो और उत्तरोत्तर प्रगति की संभावनाएं सृजित की हों। राष्ट्रपति सम्मान इसी प्रकार राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त करने वाले शहरों में भोपाल, देवास और शाहगंज शामिल हैं। इसके अलावा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी द्वारा प्रदेश के जबलपुर और ग्वालियर को उनके उल्लेखनीय प्रयासों के लिये सम्मानित किया जाएगा। कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग और ओडीएफ/ वॉटर प्लस के परिणाम भी उसी दिन जारी किए जाएंगे। प्रदेश से इस आयोजन में विभागीय मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी के साथ विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधियों की बड़ी टीम इस आयोजन में शिरकत करेगी।  

मोदी के नेतृत्व की तारीफ में शिवराज का बयान– ऐसा विजन दुर्लभ होता है

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के युवाओं को बड़ी सौगात दी। देश के 47 शहरों में आयोजित हुए रोजगार मेले में 51 हजार से भी ज्यादा युवक-युवतियों को नियुक्ति पत्र बांटे गए। पीएम मोदी ने वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए युवाओं को संबोधित भी किया। रोजगार मेले पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम मोदी का विजन भारत के लिए वरदान है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण का महायज्ञ पीएम मोदी के नेतृत्व में चल रहा है। सभी क्षेत्रों में व्यापक काम हो रहा है। पीएम मोदी का कार्यकाल स्वर्णिम काल है जिसमें 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आ चुके हैं। रोजगार की दिशा में 10 लाख से ज्यादा युवाओं को रोजगार दिया गया है। 51 हजार से अधिक युवाओं को रेलवे सहित अन्य विभागों में नौकरी प्रदान की गई है। युवाओं के चयन में पूरी तरह से पारदर्शिता रखी गई है। बिना पर्ची खर्ची के योग्यता के आधार पर नियुक्ति पत्र दिए गए। यह युवा विकसित भारत के संकल्प में पीएम मोदी के साथ कंधा से कंधा मिलाकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 'रोजगार मेला' के अंतर्गत केंद्र सरकार के विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों में चयनित देशभर के 51,000 से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति-पत्र वितरित किए। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 'विकसित भारत' का महायज्ञ चल रहा है। 'रोजगार मेला' से युवाओं के सपनों को नई उड़ान मिली है और देश का हर युवा नई उम्मीद तथा नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में मैंने भोपाल में आयोजित रोजगार मेला कार्यक्रम में सम्मिलित होकर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति-पत्र सौंपे और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ युवाओं की प्रतिभा का सम्मान मोदी सरकार की पहचान है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारा यही प्रयास है कि देश का हर युवा सशक्त हो, सम्मान के साथ रोजगार पाए और विकसित भारत के निर्माण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे। उन्होंने कहा कि आज आपको नियुक्ति पत्र मिले हैं। यह केवल नौकरी या आजीविका नहीं है, यह राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के महायज्ञ में आहुति देने के लिए आपको चुना गया है। एक बड़ा काम आपको मिला है। शासकीय सेवा केवल करियर नहीं है। शासकीय सेवा का मतलब है-जो काम आपको मिला है, उसे प्रमाणिकता और ईमानदारी के साथ जनता और देश के लिए करना। नियुक्ति पत्र पाने के बाद एक व्यक्ति ने कहा कि मैं गाजियाबाद से आया हूं और मुझे रेलवे में तकनीशियन के पद पर नौकरी मिल गई है। मैं पीएम मोदी का आभार जताना चाहता हूं कि यह नियुक्ति पत्र इतने बड़े कार्यक्रम में मिला है। यहां पर दूसरे लोगों से मिलकर काफी अच्छा लगा है।

बहनों ने सावन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बांधी राखी, बड़ी राखी भी भेंट की

हर बहन को बनाकर देंगे पक्का मकान बहनों के कल्याण के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे समाज के सभी वर्गों के समग्र विकास के लिए प्राण-प्रण से आगे बढ़ रही है राज्य सरकार 30 लाख बहनों को उज्ज्वला योजना की सब्सिडी के रूप में मिले 46.34 करोड़ रुपए उज्जैन जिले की ग्राम पंचायत नलवा में हुआ राज्य-स्तरीय कार्यक्रम भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राखी भाई-बहन के परस्पर स्नेह का बंधन है। यह अनंतकाल से चला आ रहा अटूट बंधन है। राखी आई है, तो भाई का बहन को शगुन देना लाजिमी है। राखी 9 अगस्त को है। इसलिए राखी से पहले हमारी सरकार सभी लाड़ली बहनों को 250 रुपए की अतिरिक्त राशि शगुन के रूप में देगी।  अगस्त माह में प्रत्येक लाड़ली बहन को 1500 रुपए मिलेंगे। हम यही नहीं रुकेंगे, बल्कि प्रदेश की हर लाड़ली बहन को पक्का मकान भी बनाकर देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को उज्जैन जिले की ग्राम पंचायत नलवा में लाड़ली बहनों को आर्थिक सहायता राशि सहित अन्य योजनाओं के तहत बहनों को सहायता राशि वितरण के राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की 1.27 करोड़ लाडली बहनों को 26वीं किश्त के रूप में 1543.16 करोड़ रुपए की सहायता राशि उनके बैंक खातों में अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 30 लाख से अधिक बहनों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर रिफिलिंग के लिए 46.34 करोड़ रुपए सब्सिडी राशि तथा 56.74 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों को 340 करोड़ रुपए की पेंशन राशि भी उनके बैंक खातों में अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की सभी बहनें हमारा मान हैं, अभिमान हैं। इनके मान-सम्मान और कल्याण के लिए हम कोई कसर नहीं रखेंगे। दीपावली के बाद आने वाली भाईदूज तक राज्य सरकार सभी लाड़ली बहनों को 1250 रुपए से बढ़ाकर हर माह 1500 रूपए सहायता राशि देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार का संकल्प दोहराते हुए कहा कि लाड़ली बहनों को दी जा रही यह सहायता राशि धीरे-धीरे बढ़ाकर 3000 रूपये प्रतिमाह कर दी जाएगी। इस अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना, प्रधानमंत्री मातृवंदन योजना एवं प्रधानमंत्री उज्जवला योजना में हितग्राहियों को मंच से हितलाभ भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलन एवं कन्या-पूजन के साथ राज्यस्तरीय राशि अंतरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। साथ ही लाड़ली बहनों का पुष्पवर्षा के साथ अभिवादन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित माता-बहनों ने पवित्र श्रावण मास में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को राखी बांधी। बहनों की ओर से मुख्यमंत्री को एक विशाल राखी भी भेंट की गई। चार करोड़ से अधिक पक्के मकानों की रजिस्ट्री हो रही है बहनों के नाम पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश में नारी सशक्तिकरण का अभियान जारी है। बहनों के कल्याण के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार सभी दायित्वों का बखूबी निर्वहन कर रही है। बहनों के मान-सम्मान और उनके सिंदूर की रक्षा करना और उन्हें आर्थिक रूप से समृद्ध बनाना सरकार की प्राथमिकता मे है। हम देश की आधी आबादी को उनका पूरा हक दिलाने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। देश की सभी बहनों को पक्के घर की सौगात मिले, इसके लिए पीएम आवास योजना के तहत निर्मित 4 करोड़ से अधिक पक्के मकानों की रजिस्ट्री बहनों के नाम से ही की जा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में बहनें मायके और ससुराल दोनों को धन्य करती हैं। बहनें देश का सौभाग्य हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की 1.27 करोड़ लाड़ली बहनों को रक्षाबंधन के त्यौहार से पहले 1543 करोड़ राशि दी गई है। राखी से पहले बहनों को 250 रुपए का शगुन अलग से भेजा जाएगा। दीपावली के बाद भाईदूज भी अलग होगी, बहनों को हर माह 1500 रुपए प्रतिमाह सहायता राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बहनें अपने पैसों को सहेजना अच्छी तरह से जानती हैं। बहनों के हाथ में पैसा रहे, तो परिवार और बच्चों को बेहतर जीवन मिलता है। बहनों के जतन से ही घर में खुशियां आती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज प्रदेश की 30 लाख बहनों को उज्ज्वला गैस योजना की सब्सिडी के रूप में 46.34 करोड़ रुपए भेजे गए हैं। इसी क्रम में अलग-अलग 6 सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत 56.74 लाख से अधिक हितग्राहियों को कुल 340 करोड़ रुपए की पेंशन राशि भी दी गई है।  अब मजरे-टोलों तक भी बनवाएंगे सड़कें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अब तक 5 लाख किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ गांव-कस्बों तक ही नहीं, अब हम प्रदेश के सभी मजरे-टोलों तक भी पक्की सड़कें बनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने पहली बार गांव-गांव को पक्की सड़क से जोड़ने का अभियान शुरू किया था। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में किसानों के लिए सम्मान निधि शुरू की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार सामाजिक सरोकारों के प्रति बेहद संवेदनशील है। गरीब और जरूरतमंदों को आवश्यकता पड़ने पर बेहतर इलाज के लिए एयर एम्बुलेंस और हेली-सेवा की भी हमने शुरुआत की है। इससे गंभीर मरीज को समय पर इलाज मिलने से उसके प्राण बचाने में सुविधा हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब तक लोग सड़क पर पड़े किसी दुर्घटनाग्रस्त गंभीर व्यक्ति को हॉस्पिटल पहुंचाने में हिचकते थे। सरकार ने इसी दिशा में कदम उठाया और राहवीर योजना की शुरूआत की है। उन्होंने कहा कि किसी की जान बचाना सबसे बड़ा पुण्य है। यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल किसी व्यक्ति को एक घंटे के भीतर हास्पिटल में भर्ती कराता है, तो ऐसी परोपकारी सहायता करने वाले व्यक्ति को राज्य सरकार पुरस्कार के रूप में 25 हजार रुपए दे रही है। किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पंप मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए संकल्पित है। हमारी सरकार 'हर खेत को पानी, हर हाथ को काम' की भावना से काम कर रही है। प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के तहत प्रदेश के सभी किसानों को भारी … Read more