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सीएम डॉ. यादव का ऐलान: आज 12 जुलाई को बहनों के खातों में डाले जाएंगे योजना के पैसे

भोपाल  मध्य प्रदेश की 1.27 करोड़ महिलाओं के लिए खुशखबरी है। लाडली बहना योजना की 26वीं किस्त की तारीख का ऐलान हो गया है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव आज 12 जुलाई को खाते में 1500 रुपये ट्रांसफर करेंगे। इसके अलावा रक्षा बंधन के शगुन के तौर पर 250 रुपये भी खाते में आएंगे। बुधवार को कैबिनेट ने इस तोहफे के तौर पर 250 रुपये की अतिरिक्त राशि को भी मंजूरी दे दी है। राज्य के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक से मंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश की 1.27 करोड़ महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा। मुख्‍यमंत्री उज्‍जैन से इस बार लाडली बहना योजना की 26वीं क‍िस्‍त ट्रांसफर करेंगे। लाडली बहना योजना जून 2023 में शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को सीधे वित्तीय सहायता देना है। शुरुआत में हर महीने 1,000 रुपये दिए जाते थे। रक्षा बंधन 2023 के दौरान इसे बढ़ाकर 1,250 रुपये कर दिया गया। इस नए बदलाव के साथ, राज्य महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सीएम यादव ने योजना की 25वीं किस्त के रूप में लाभार्थियों के बैंक खातों में 2,080 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। उन्होंने लाडली बहना योजना को एक परिवर्तनकारी पहल बताते हुए कहा था कि इस योजना के तहत शुरुआत से अब तक 28,000 करोड़ रुपये से ज्यादा ट्रांसफर किए जा चुके हैं। प‍िछले महीने मुख्‍यमंत्री ने लाडली बहना योजना की 25वीं क‍िस्‍त को 16 जून को ट्रांसफर क‍िया था। दिवाली से हर महीने 1500 रुपये मिलेंगे मुख्यमंत्री मोहन यादव घोषणा कर चुके हैं कि अक्टूबर से लाडली बहना योजना के तहत सभी लाभार्थी महिलाओं को 1500 रुपये दिए जाएंगे। यही नहीं इस राशि में हर साल बढ़ोतरी की जाएगी और 2028 से इसे बढ़ाकर 3000 रुपये हर महीने कर दिया जाएगा। हालांकि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब मध्य प्रदेश सरकार कर्ज में डूबी हुई है। लगातार तीसरे महीने लिया जाएगा कर्ज इस बीच मध्य प्रदेश सरकार लगातार तीसरे महीने कर्ज लेने जा रही है। मंगलवार को 4800 करोड़ रुपये का लोन लेने के लिए सरकार ने औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं। पिछले महीने भी सरकार ने 4500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। राज्य पर पहले से ही 4,21,032 करोड़ का कर्ज हो चुका है। अप्रैल से 10 से 15 तारीख के बीच भेजी जाती है योजना की किस्त आमतौर पर योजना की किस्त हर महीने की 10 तारीख तक जारी कर दी जाती थी, लेकिन अप्रैल 2025 से राशि वितरण की तारीख में बदलाव किया गया है।इस दौरान कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार ने फैसला किया था कि वह प्रतिमाह 15 तारीख के आसपास बहनों के खाते में राशि भेजेगी। यही कारण था कि अप्रैल में 16 तारीख को 23वीं किस्त, 15 मई को 24वीं किस्त और 16 जून को 25वीं किस्त जारी की गई थी।अब 12 जुलाई को मोहन सरकार योजना की अगली किस्त जारी करने जा रही है। दिवाली बाद बहनों को हर माह मिलेंगे 1500     दिवाली के बाद भाई दूज से योजना की राशि में 250 रु का इजाफा किया जाएगा और हर माह 1250 की जगह 1500 रुपए मिलेंगे।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रक्षाबंधन से पहले सभी पात्र बहनों को 250 रुपए की अतिरिक्त राशि शगुन के रूप में भेजी जाएगी।     दीपावली के बाद हम प्रदेश की सभी लाडली बहनों को हर माह 1500 रुपए महीना देंगे। अभी वर्तमान में योजना के तहत 1250 रूपये प्रति माह की राशि लाड़ली बहनों को दी जा रही है।योजना के तहत चरणबद्ध रूप से राशि बढ़ाकर तीन हजार रूपये प्रति माह तक की जायेगी। लाड़ली बहना योजना में मिलते है हर माह 1250     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।     लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से जून 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 25 किश्तों का अंतरण किया गया है।प्रदेश की लाड़ली बहनों को अब तक 30 हजार करोड़ से अधिक का लाभ मिल चुका है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। लाड़ली बहना योजना के ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने 1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैंजिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो।     लाभार्थी सूची में चेक करें नाम, पैसा मिलेगा या नहीं?

दुबई और स्पेन दौरे पर 13 जुलाई से रवाना होंगे सीएम यादव, विकास एजेंडे पर फोकस

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए एक बार फिर विदेश दौरे पर जा रहे हैं। उनके साथ एक प्रतिनिधिमंडल भी जाएगा। मुख्यमंत्री की यात्रा 13 से 19 जुलाई तक होगी। इस दौरान वे दुबई और स्पेन में कई विदेशी कंपनियों के सीईओ से वन टू वन चर्चा कर उन्हें मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करेंगे। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश का एक प्रतिनिधिमंडल 13 से 19 जुलाई के दौरान दुबई और स्पेन की यात्रा पर रहेगा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल व्यावसायिक बैठकों और विभिन्न कंपनियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग भी करेगा। मुख्यमंत्री के इस विदेश दौरे का उद्देश्य निवेश प्राप्त करना, प्रौद्योगिकी के पारस्परिक हस्तांतरण और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अपनी पहुंच बनाना है।  जिसमें सीएम कार्यालय के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई मुख्य होंगे। दो हिस्सों में यह यात्रा होगी। शुरु के 3 दिन वह दुबई में रहेंगे और अंतिम 3 दिन स्पेन में बिताएंगे। इस दौरान पूरा जोर मध्यप्रदेश में निवेश लाने पर रहेगा। (mp news) वन टू वन होगी चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोनों ही देशों के उ‌द्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे। वहां की सरकार के प्रतिनिधियों से भी निवेश पर संवाद होंगे। यही नहीं, मुख्यमंत्री व उनके साथ मौजूद अफसरों का दल मप्र के पुरातात्विक, वाइल्डलाइफ, धार्मिक व ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों समेत सभी प्रकार की खूबियों को दोनों देशों के सामने रखेंगे। अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के अलावा प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह, संस्कृति विभाग और पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला, औ‌द्योगिक विकास निगम के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला, सीएम कार्यालय में सचिव इलैया राजा टी और आयुक्त जनसंपर्क सुदाम पी खाड़े मुख्य होंगे। सूत्रों के मुताबिक इसके अलावा भी दल में कुछ अफसर शामिल हो सकते हैं। ये टीम अधिक से अधिक लोगों को प्रदेश में निवेश को प्रेरित करेगी। नवंबर में की थी यूके और जर्मनी की यात्रा मुख्यमंत्री नवंबर 2024 में यूके व जर्मनी की यात्रा कर चुके हैं, उसके बाद जनवरी 2025 में चार दिन के लिए जापान भी गए थे। तब उन्होंने तीनों देशों के साथ औ‌द्योगिक निवेश पर बातचीत की थी, इसका असर भोपाल के मानव संग्रहालय में 24 व 25 फरवरी को हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में देखने को भी मिला था। तब इन देशों के निवेशक शामिल हुए थे। इंदौर कॉन्क्लेव में निवेशकों से मिलेंगे सीएम इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निवेशकों से संवाद करेंगे।कॉन्क्लेव में देश के 1500 से अधिक निवेशकों, उ‌द्योगपतियों, कॉर्परिट प्रतिनिधियों की सहभागिता होगी। सीएम दोपहर 1.30 बजे कॉन्क्लेव स्थल पर पहुंचकर एक्जीबिशन का अवलोकन करेंगे, उसके बाद चार सत्रों में बैठक कर चर्चा करेंगे। पहली विदेश यात्रा में गए थे लंदन पहली विदेश यात्रा में मप्र को लंदन के 12 प्रमुख औ‌द्योगिक घरानों ने 59 हजार 350 करोड़ के निवेश प्रस्ताव दिए थे। इनमें रोजगार के अवसर भी शामिल हैं। जर्मनी : मुख्यमंत्री यहां 12 प्रमुख औ‌द्योगिक घरानों के प्रमुखों से मिले थे, वन-टू-वन बातचीत की थे। जिसमें 17 हजार 890 करोड़ के निवेश का भरोसा मिला था।

गौरवशाली विरासत खतरे में! जहांगीरिया स्कूल के बंद होने की कगार पर उठे सवाल

भोपाल  दीवारों में दरारें, सीलन से भीगी ईंटें और कक्षाएं जो अब खंडहरों जैसी नज़र आती हैं, ये किसी प्राकृतिक आपदा के बाद की तस्वीरें नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के हजारों सरकारी स्कूलों की हकीकत है. राज्य सरकार की ओर से स्कूली शिक्षा के लिए इस साल 3,000 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत इस राशि के प्रभाव से बिल्कुल अछूती दिखती है. जर्जर ढांचे, अधूरी मरम्मत और वादों के मलबे के बीच स्कूलों में पढ़ाई नहीं, बल्कि साहस की परीक्षा होती है. यहां बच्चे किताबों से कम और छत से ज़्यादा डरते हैं. भोपाल में ही विडंबना की कहानी शुरू होती है. शहर की ऐतिहासिक सदर मंज़िल, जो कभी जर्जर हालत में थी, आज एक आलीशान होटल में तब्दील हो चुकी है. इसे PPP मॉडल के तहत शानदार तरीके से रेनोवेट किया गया है. इतिहास की गरिमा बरकरार रखते हुए आधुनिकता की झलक दी गई है, लेकिन इस चमक से ठीक 800 मीटर दूर एक और इमारत है- जहांगीरिया स्कूल. ये स्कूल अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है. साल 1830 में बनी और 1901 से शिक्षा का केंद्र रही इस इमारत की दीवारों से आज पानी टपकता है, प्लास्टर झड़ चुका है और छत कभी भी गिर सकती है. ये वही स्कूल है जहां भारत के पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा पढ़े थे, जिनकी तस्वीर अब एक सीलन भरी दीवार पर लटकी है. कुछ महीने पहले एक कक्षा की छत का हिस्सा अचानक ढह गया. बाहर एक पोस्टर चिपका है- यह मंज़िल असुरक्षित है, लेकिन क्लास अब भी उसी मंज़िल में लगती है.  कई बार छत से गिर चुका है प्लास्टर  एक छात्रा ज़ीनत बताती है कि हर बार बारिश होती है, तो हमारी नज़र किताबों पर नहीं, छत पर जाती है. छत से प्लास्टर कई बार गिर चुका है. हमारे माता-पिता पूछते हैं कि कब मरम्मत होगी, लेकिन प्रिंसिपल हर बार यही कहती हैं बहुत जल्दी. और वो जल्दी कभी आती ही नहीं. स्कूल के पिछले हिस्से में एक कमरा पहले ही ढह चुका है. टीकमगढ़ में भी भरभराकर गिरी स्कूल की बिल्डिंग टीकमगढ़ में भी बारिश के बाद एक पुराना स्कूल भवन भरभराकर गिर पड़ा. गनीमत रही कि ये स्कूल पहले से बंद था और कोई बच्चा मौजूद नहीं था, लेकिन यह घटना इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश में ऐसे कई स्कूल हैं, जो अब केवल दुर्घटना के इंतज़ार में खड़े हैं.  भोपाल की तत्कालीन बेगम के आग्रह पर दान में दी थी इमारत भोपाल के जहांगीरिया स्कूल की कहानी तब और भावुक हो जाती है, वे उसी परिवार से हैं जिन्होंने ये इमारत राज्य को दान दी थी. शहनाज़ बताती हैं कि ये बिल्डिंग भोपाल की तत्कालीन बेगम के आग्रह पर दान में दी गई थी, ताकि बच्चे पढ़ सकें. लेकिन आज शहनाज़ की आंखों में आंसू हैं. उन्होंने कहा कि  हर साल बजट पास होता है, लेकिन कभी स्कूल तक नहीं पहुंचता. जब विरासत भवनों को होटल बनाया जा सकता है, तो इस स्कूल को क्यों नहीं बचाया जा सकता? सुल्तानिया स्कूल भी कमजोर ढांचे में तब्दील  भोपाल का सुल्तानिया स्कूल भी अब कमजोर ढांचे में तब्दील हो चुका है. 50 साल पुरानी इस इमारत में बारिश के दौरान छत टपकती है. दीवारें रिसती हैं और बिजली की तारें खुलकर लटकती हैं. स्कूल का निचला तल पूरी तरह बंद कर दिया गया है. हालांकि इसका कोई सरकारी आदेश नहीं आया, बल्कि ये निर्णय स्कूल प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए लिया है. पुरानी इलेक्ट्रिक फिटिंग बड़े हादसे को न्योता देती है.  हर पल रहता है खतरा प्रिंसिपल रूबीना अरशद ने ऐसी फाइलें दिखाईं जिनमें कई सालों की चिट्ठियां, निवेदन और रिमाइंडर दर्ज हैं. दो साल पहले PWD के इंजीनियर ने साफ शब्दों में कहा था कि ये भवन असुरक्षित है, इसे गिराकर दोबारा बनाया जाना चाहिए, लेकिन तब से फाइलें, दूसरी फाइलों में ही दबी हैं. महिला शिक्षक रशीदा और सुषमा हर दिन क्लास लेती हैं, इस डर के साथ कि कहीं आज कुछ टूट न जाए. क्या बोले स्कूली शिक्षा मंत्री?  स्कूली शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से सवाल किया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि हां, खामियां हैं. मंत्री राव उदय प्रताप ने ये भी कहा कि आजतक इसके पहले भी कई बार जर्जर स्कूल को लेकर कई रिपोर्ट कर चुका है, जिसके आधार पर उन्होंने कई बार संज्ञान भी लिया है. उन्होंने कहा कि मरम्मत के लिए वित्त विभाग को भेजा गया है, स्वीकृति का इंतज़ार है. कुछ बजट विभाग के पास है जिससे जल्द ही मरम्मत का काम शुरू होगा. बच्चों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट भी किया जाएगा और सरकार इसे लेकर चिंतित है. जल्द काम पूरा होगा.  

भारतीय सेना को मिलेगी नई ताकत, देश में बनेगा ब्राजील का मल्टीरोल मिलिट्री एयरक्राफ्ट C-390

नई दिल्ली ब्राजील की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) और भारत की महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स ने C-390 मिलेनियम मध्यम परिवहन विमान (Medium Transport Aircraft) के लिए साझेदारी की है. इसके अलावा, दोनों देश हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली (Airborne Warning and Control System – AWACS) के विकास में भी सहयोग कर रहे हैं. एम्ब्रेयर ने नई दिल्ली में अपनी एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी भी स्थापित की है, जो भारत में रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगी. साथ ही, ब्राजील भारत के स्वदेशी रक्षा सिस्टम जैसे आकाश मिसाइल और गरुड़ तोप प्रणाली में भी रुचि दिखा रहा है. आइए, इस साझेदारी और C-390 मिलेनियम विमान की विशेषताओं और भारत के लिए इसके फायदों को समझते हैं. भारत-ब्राजील रक्षा साझेदारी: एक नई शुरुआत भारत और ब्राजील, दोनों ही BRICS देश, रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में एक-दूसरे के पूरक हैं. भारत स्वदेशी रक्षा तकनीकों जैसे आकाश सतह-से-हवा मिसाइल (Surface-to-Air Missile) और गरुड़ तोप प्रणाली के लिए जाना जाता है, जबकि ब्राजील की एम्ब्रेयर कंपनी C-390 मिलेनियम जैसे आधुनिक परिवहन विमानों और अन्य एयरोस्पेस तकनीकों में माहिर है. दोनों देशों के बीच सहयोग की शुरुआत कई साल पहले तब हुई, जब भारत ने एम्ब्रेयर के ERJ-145 प्लेटफॉर्म पर आधारित 'नेत्रा' AWACS विमान विकसित किया. यह विमान भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए खुफिया जानकारी और निगरानी मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.  2024 में एम्ब्रेयर और महिंद्रा ने नई दिल्ली में ब्राजील दूतावास में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना के मध्यम परिवहन विमान (MTA) प्रोजेक्ट के लिए C-390 मिलेनियम को भारत में बनाना है. यह साझेदारी न केवल भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में C-390 विमानों का एक उत्पादन केंद्र (हब) बनाने की संभावना भी तलाशेगी. इसके अलावा, एम्ब्रेयर ने मई 2025 में नई दिल्ली के एयरोसिटी में अपनी सहायक कंपनी शुरू की, जो रक्षा, वाणिज्यिक उड्डयन और शहरी हवाई गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग बढ़ाएगी. ब्राजील ने भारत के आकाश मिसाइल सिस्टम में भी रुचि दिखाई है, जो 4 से 25 किलोमीटर की रेंज में हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमान और ड्रोन को मार गिराने में सक्षम है. यह सिस्टम पूरी तरह स्वचालित है. 82% स्वदेशी है, जिसे 2026-27 तक 93% स्वदेशी करने की योजना है. ब्राजील गरुड़ तोप प्रणाली और तटीय निगरानी प्रणाली (Coastal Surveillance System) में भी रुचि रखता है. दोनों देश स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के रखरखाव और संयुक्त अनुसंधान व विकास (R&D) में भी सहयोग करना चाहते हैं. एम्ब्रेयर C-390 मिलेनियम: विशेषताएं C-390 मिलेनियम एक आधुनिक, दो इंजन वाला, जेट-संचालित मध्यम परिवहन विमान है, जिसे ब्राजील की एम्ब्रेयर कंपनी ने डिजाइन किया है. यह विमान 2019 से ब्राजीलियाई वायुसेना में सेवा दे रहा है. 2023 में पुर्तगाल की वायुसेना में भी शामिल हुआ. यह विमान अपनी बहुमुखी प्रतिभा, विश्वसनीयता और कम परिचालन लागत के लिए जाना जाता है. नीचे इसकी प्रमुख विशेषताएं दी गई हैं…      पेलोड क्षमता: C-390 अधिकतम 26 टन कार्गो ले जा सकता है, जो इसे अन्य मध्यम आकार के सैन्य परिवहन विमानों (जैसे लॉकहीड मार्टिन C-130J, जो 20.2 टन ले जा सकता है) से बेहतर बनाता है.       यह दो M113 बख्तरबंद वाहन, एक बॉक्सर बख्तरबंद वाहन, एक सिकोरस्की H-60 हेलिकॉप्टर या 80 सैनिकों या 66 पैराट्रूपर्स को उनके पूर्ण गियर के साथ ले जा सकता है.  गति और रेंज     अधिकतम गति: 870 किमी/घंटा (470 नॉट या मैक 0.8).     रेंज: 26 टन पेलोड के साथ 1,852 किमी (1,080 नॉटिकल मील).     यह तेज गति और लंबी रेंज इसे त्वरित प्रतिक्रिया मिशनों के लिए आदर्श बनाती है.     इंजन: दो IAE V2500-E5 टर्बोफैन इंजन, जो इसे शक्तिशाली और ईंधन-कुशल बनाते हैं. मिशन की बहुमुखी प्रतिभा कार्गो और सैनिकों का परिवहन, हवा से हवा में ईंधन भरना (एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग), मेडिकल निकासी, खोज और बचाव, हवाई अग्निशमन और मानवीय मिशन.  यह कच्ची या अस्थायी हवाई पट्टियों (जैसे मिट्टी, बजरी) पर भी उतर और उड़ान भर सकता है.   नई ISR (Intelligence, Surveillance, Reconnaissance) वैरिएंट, जिसे C-390 IVR कहा जाता है, समुद्री निगरानी और आपदा प्रबंधन के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसमें सिंथेटिक अपर्चर रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और उन्नत संचार प्रणालियां शामिल हैं. परिचालन विश्वसनीयता 11,500 उड़ान घंटों के साथ 80% परिचालन उपलब्धता और 99% से अधिक मिशन पूरा करने की दर. 2023 में ब्राजीलियाई वायुसेना द्वारा पूर्ण परिचालन क्षमता (FOC) प्राप्त. NATO मानकों के अनुरूप. तीन घंटे से कम समय में विभिन्न मिशनों के लिए पुन: कॉन्फ़िगर किया जा सकता है. गहन देखभाल इकाई (ICU) किट, जो मानवीय मिशनों में चिकित्सा सहायता प्रदान कर सकता है.  भारत के लिए C-390 मिलेनियम के फायदे पुराने विमानों को बदलना  भारतीय वायुसेना के पास अभी एंटोनोव An-32 जैसे पुराने परिवहन विमान हैं. C-390 इनकी जगह ले सकता है और IAF की परिवहन क्षमता को बढ़ा सकता है. यह उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों (जैसे लद्दाख) और त्वरित तैनाती के लिए उपयुक्त है. मेक इन इंडिया को बढ़ावा एम्ब्रेयर और महिंद्रा भारत में C-390 के लिए एक अंतिम असेंबली लाइन (Final Assembly Line) स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. इससे भारत में उच्च-मूल्य विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय रोजगार सृजित होंगे.    यह साझेदारी भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में C-390 का क्षेत्रीय हब बना सकती है, जिससे इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों को निर्यात किया जा सकता है. तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) के साथ, भारत की रक्षा उद्योग की क्षमता बढ़ेगी. लागत: C-390 की प्रति यूनिट लागत $140-160 मिलियन अनुमानित है, जो लॉकहीड मार्टिन C-130J ($130-167 मिलियन) से थोड़ी कम है. इसकी कम परिचालन लागत और उच्च विश्वसनीयता भारत के लिए लंबे समय के लिए आर्थिक फायदा कराएगी.  नई तकनीकों का विकास    भारत की भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) एम्ब्रेयर के साथ रडार, एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के लिए सहयोग कर सकती है. इससे भारत की रक्षा तकनीक में सुधार होगा. C-390 IVR जैसे ISR वैरिएंट भारत की समुद्री निगरानी और आपदा प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ा सकते हैं.  रणनीतिक लाभ C-390 की हवा से हवा में ईंधन भरने की क्षमता भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की रेंज और मिशन अवधि को बढ़ा सकती है. यह विमान मानवीय मिशनों (जैसे COVID-19 के दौरान आपूर्ति पहुंचाना) और अंतरराष्ट्रीय सहायता मिशनों में … Read more

तीसरे देश की भूमिका से इनकार ने बढ़ाया तनाव, सेनाध्यक्ष मुनीर ने दी तीखी प्रतिक्रिया

इस्लामाबाद भारत के खिलाफ चीन और तुर्की की मदद के बाद भी बुरी तरह हाल झेलने वाले पाकिस्तान के आर्मी चीफ बौखला गये हैं। भारत के खिलाफ चीन और तुर्की के हथियार बुरी तरह से नाकाम रहे थे, जिससे चीन की पूरी दुनिया में कलई खुल गई है। वहीं तुर्की की ड्रोन इंडस्ट्री भी, जिसने पिछले कुछ सालों से भ्रम पैदा किया था, उसकी भी पोल खुल गई है। जिसके बाद अब पाकिस्तान आर्मी चीफ, चीन और तुर्की को बचाने में लगे हैं। इसीलिए उन्होंने कहा है कि 'भारत के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान की किसी ने मदद नहीं की थी।' जबकि पूरी दुनिया जान गई है कि किस तरह से चीन और तुर्की लगातार पाकिस्तान की मदद कर रहे थे। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने रावलपिंडी में दावा करते हुए कहा है कि ' भारत औप पाकिस्तान के बीच का संघर्ष पूरी तरह से द्विपक्षीय था।' यानि उन्होंने किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को नकारा है, जबकि भारतीय सेना ने सबूत देकर कहे हैं कि किस तरह से चीन, पाकिस्तान की लगातार लाइव मदद कर रहा था। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल रावलपिंडी में पूरी तरह से बौखलाए थे और अनाप शनाप आरोप लगा रहे थे। अपनी हार छिपाने और पाकिस्तान की जनता को बर्गलाने के लिए असीम मुनीर ने अपनी हताशा छिपाते हुए कहा कि "भारत की यह रणनीति ब्लॉक पॉलिटिक्स के जरिये पश्चिमी देशों की सहानुभूति लेने और खुद को क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता साबित करने की नाकाम कोशिश है।" आपको बता दें कि मई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया था और पीओके और पाकिस्तान स्थिति 9 आतंकवादी शिविरों पर सटीक हमले किए थे, जिनमें दर्जनों आतंकवादी मारे गये थे और इसके बाद भारत और पाकिस्तान की सेना के बीच करीब 4 दिनों तक संघर्ष चला था। ये 1971 के बाद पहली बार था जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान के अंदर हमला किया था। भारत ने लाहौर के रडार सिस्टम को युद्ध के पहले ही दिन तबाह कर दिया था, जिससे पाकिस्तान सेना असहाय हो गई थी। पाकिस्तानी सेना ने 'तीसरे पक्ष' की भूमिका को नकारा पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR के मुताबिक सम्मेलन में भारत पर पाकिस्तान में होने वाले आतंकवादी हमलों का आरोप लगाया गया है और मारे गये जवानों के लिए फातेहा पढ़ा गया। रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में फैसला लिया गया है कि "भारत के एजेंटों और आतंकवादी प्रॉक्सी नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।" फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने कहा कि "पहलगाम के बाद की बौखलाहट" में भारत अब नए-नए प्रॉक्सी इस्तेमाल कर रहा है, जिनमें 'फितना अल खवारिज' और 'फितना अल हिंदुस्तान' जैसी शक्तियां शामिल हैं। आपको बता दें कि मई महीने में चले भारत और पाकिस्तान संघर्ष के दौरान भारत ने पाकिस्तान के करीब 11 एयरबेस पर सटीक हमले किए थे। जिनमें रावलपिंडी स्थिति नूर खान एयरबेस था। नूर खान एयरबेस पर भारतीय वायुसेना ने ब्रह्मोस मिसाइल दागी थी, जिसे इंटरसेप्ट करने में पाकिस्तान नाकाम रहा था। आपको बता दें कि तमाम रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि चीन ने पाकिस्तान को भारत के खिलाफ युद्ध के दौरान भारतीय सैन्य ठिकानों को लेकर लाइव फीड पाकिस्तान को दी थी। इसके अलावा भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पहले तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन भेजे थे, जिसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया था। हालांकि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के तमाम तुर्की ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। जिससे तुर्की के बायरकतार टीबी-2 ड्रोन का भ्रम भी टूट गया।

देश के विकास में सरकार के लिये गये निर्णयों में सीएससी का गठन सबसे अग्रणीय निर्णय रहा: मंत्री सारंग

भोपाल सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि कॉमन सर्विस सेंटर जहां एक ओर लोगों को सुविधाएं उपलब्ध करवा रहा है, वहीं इसके माध्यम से युवाओं को रोजगार के साधन भी उपलब्ध हो रहे है। देश के विकास में सरकार के लिये गये निर्णयों में सीएससी का गठन सबसे अग्रणीय निर्णय रहा। आज भारत देश डिजिटल ट्रांजेक्शन के मामले में नम्बर एक पर है। मंत्री श्री सारंग ने यह बात सीएससी दिवस के उपलक्ष्य में आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित कार्यशाला में कहीं। इस अवसर पर सीएससी के राज्य प्रमुख श्री अतुलित राय भी उपस्थित थे। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास और कल्याण के कार्य किये जा रहे है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पारदर्शिता के साथ योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है, इसमें बीएलई की महत्वपूर्ण भूमिका है। हर व्यक्ति में ईमानदारी और कर्त्तव्य बोध है, इसे जगाने की जरूरत है। सीएससी के माध्यम से लोगों तक सुविधाएं पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। बीएलई प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लोगों और सरकार का काम कर रहे। उनके व्यवहार, आचरण और कार्य पद्धति से व्यवस्था परिलक्षित होती है। बीएलई द्वारा लोगों के किये गये कार्य से उसे पैसों के साथ दुआएं भी मिलती हैं। मंत्री श्री सारंग ने सुझाव दिया कि सीएससी में सुझाव और शिकायत की भी व्यवस्था हो और वर्ष में सीएससी में परफॉर्मेंस और उनके व्यवहार के आधार पर अवार्ड दिया जाए। उन्होंने कहा कि जिन बीएलई का व्यवहार अच्छा रहे उन्हें सम्मानित करें, जिससे दूसरे लोग भी प्रेरित हों। उन्होंने बीएलई से कहा कि सीएससी में सफाई व्यवस्था उसका उन्नयन और नवाचार करने से आपकी साख बढ़ेगी और विकसित भारत की परिकल्पना पूर्ण होगी। कार्यशाला में सीएससी पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। उज्जैन, अशोकनगर, डिण्डोरी, दमोह, पन्ना, छिंदवाड़ा के एक-एक बीएलई, छतरपुर, सिवनी, देवास के दो-दो कुल 12 बीएलई उत्कृष्ट कार्य के लिये सम्मानित किये गये।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आश्वासन– कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा में नहीं होगी कमी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में सभी कावड़ यात्रियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के साथ अनुकूल व्यवस्थाएँ भी सुनिश्चित की जा रही है। इस संबंध में निर्देश जारी किये जा चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को उज्जैन त्रिवेणी शनिमंदिर से कावड़ यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने कावड़ यात्रियों का पुष्प-वर्षा कर स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कावड़ का पूजन कर कावड़ उठाई और अग्नि अखाड़ा के महामंडलेश्वर संत श्री उत्तम स्वामी के साथ पैदल चलकर कावड़ यात्रा का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सभी त्यौहार उत्साह के साथ मनाने की परम्परा राज्य सरकार ने शुरू की है। ईश्वर और संतजन के आशीर्वाद से उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ तेजी से की जा रही है। हम इस सोच के साथ सभी तैयारियां कर रहे है कि वर्ष-2028 के बाद यदि प्रतिवर्ष सिंहस्थ जैसे आयोजन हों तो किसी प्रकार की समस्या न आये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत उज्जैन में संतों के लिये आश्रम और अन्य व्यवस्थाओं को जुटाने के लिये "सिंहस्थ धार्मिक सिटी" का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में उज्जैन आने वाले श्रृद्धालुओं के लिये सुविधाजनक व्यवस्था सुनिश्चित होंगी। मुख्यमंत्री ने बताया जल का महत्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कावड़ यात्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में कई संस्कृतियाँ हैं, दुनिया में तो 194 देश है लेकिन कोई देश अपने कोई भी शुभ काम प्रारंभ करने के लिए जल के माध्यम से कोई संकल्प नहीं लेता है। भारतीय संस्कृति जल ही जीवन की संस्कृति और जीवन जीने की पद्धति रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ईश्वर की कृपा से हम हजारों सालों से जल के गुणों से परिचित हैं। कावड़ यात्रा मे विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, श्री सतीश मालवीय, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, श्री संजय अग्रवाल, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती, श्री तपन भौमिक और संतों सहित बड़ी संख्या में श्रृद्धालु उपस्थित थे।

सीएम साय की अध्यक्षता में कैबिनेट, हुआ 12 अहम फैसले

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए – 1-    मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य पुलिस सेवा संवर्ग के उचित प्रबंधन हेतु अर्हकारी सेवा अवधि पूर्ण कर चुके वर्ष 2005, 2006, 2007, 2008 तथा 2009 बैच के अधिकारियों को वरिष्ठ प्रवर श्रेणी वेतनमान प्रदान किये जाने हेतु 30 सांख्येतर पद निर्मित कर वरिष्ठ प्रवर श्रेणी वेतनमान प्रदान करने का निर्णय लिया गया। 2-    मंत्रिपरिषद द्वारा जनजातीय समूहों एवं अन्य वंचित वर्गों के गरीब युवा, महिलाओं एवं तृतीय लिंग के लोगों के संस्थागत विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए छत्तीसगढ़ शासन एवं पैन आईआईटी एलुमनी रीच फॉर इंडिया फाउंडेशन (PanIIT) के मध्य एक गैर-लाभकारी संयुक्त उद्यम कंपनी के गठन को मंजूरी प्रदान की गई। इस ज्वाइंट वेंचर कंपनी के माध्यम से अनुसूचित जनजाति एवं अन्य वंचित समुदायों के गरीब युवाओं, महिलाओं एवं तृतीय लिंग के लोगों को संस्थागत व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं ग्रामीण उद्यमिता के माध्यम से सशक्त एवं विकसित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन एवं पैन आईआईटी का ज्वाइंट वेंचर वंचित समुदायों के विकास के लिए आदिवासी उपयोजना, अनुसूचित जाति उपयोजना आदि के अप्रयुक्त फंड का अभिसरण कर आजीविका एवं सामाजिक आर्थिक बदलाव के लिए कार्य करेगा। कौशल विकास कार्यक्रमों के प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण का कार्य पैन आईआईटी द्वारा किया जाएगा। प्रशिक्षित युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कौशल के साथ फॉरेन लैग्वेज सिखाने का कार्य किया जाएगा। पैन आईआईटी द्वारा प्रशिक्षण देने के लिए जिला प्रशासन एवं विभागों द्वारा आवश्यक शासकीय भवनों का पहचान किया जाएगा एवं उसे ज्वाइंट वेेन्चर कंपनी को हस्तांतरित किया जाएगा। पैनआईआईटी, आईआईटी के पूर्व छात्रों द्वारा बनाई गई सोसायटी है जो राज्य सरकारों के साथ गैर लाभकारी संयुक्त उपक्रम बनाकर, राष्ट्रनिर्माण मिशन, व्यवसायिक, आजीविका शिक्षा व्यवस्था एवं ग्रामीण उद्यमिता के माध्यम से वंचित समुदायों के आय में सुधार लाने का कार्य करती है। 3-    मंत्रिपरिषद द्वारा पुराने वाहनों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम तथा वायु प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए छत्तीसगढ़ मोटरयान कराधान अधिनियम-1991 में संशोधन विधेयक के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। 4-    मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ मोटरयान नियम-1994 के नियम, 55 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। जिसके तहत वाहन स्वामी अपने पुराने वाहन के फैंसी या च्वाइस नंबर को नए या किसी अन्य राज्य से लाए गए उसी श्रेणी के वाहन में उपयोग कर सकेंगे, इसके लिए आवश्यक शुल्क का भुगतान करना होगा। यदि पुराना नंबर सामान्य नंबर था तो छत्तीसगढ़ मोटरयान नियम 1994 के नियम 55(2)(ग) के अनुसार आवश्यक शुल्क भरने के बाद इसका उपयोग संभव होगा। यह सुविधा केवल नए वाहन के पंजीयन या अन्य राज्य से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर आए वाहनों पर लागू होगी, पहले से राज्य में पंजीकृत वाहनों पर नहीं। शासकीय वाहनों के लिए भी यह सुविधा मिलेगी, इसके लिए उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होगा। 5-    छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। 6-    मंत्रिपरिषद ने राज्य के युवाओं को स्टार्टअप और नवाचार के जरिए सशक्त बनाने के लिए छात्र स्टार्ट-अप और नवाचार नीति लागू करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस नीति का उद्देश्य छात्र-केंद्रित नवाचार और इन्क्यूबेशन सिस्टम बनाना, साथ ही बौद्धिक संपदा जागरूकता बढ़ाना है। जनजातीय क्षेत्रों में नवाचार केंद्र स्थापित करना और कृषि, हरित ऊर्जा, स्वास्थ्य व विनिर्माण जैसे क्षेत्रों पर खास ध्यान देना भी इस नीति के प्रमुख उद्देश्य हैं। इस नीति का लक्ष्य है राज्य के 100 तकनीकी संस्थानों के 50 हजार छात्रों तक पहुंच बनाना, 500 प्रोटोटाइप्स का समर्थन करना, 500 बौद्धिक संपदा अधिकार फाइल करना और 150 स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेट करना। इससे युवाओं को नई सोच और तकनीक विकसित करने में मदद मिलेगी। 7-    छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) विधेयक, 2025 के प्रारूप पर अनुमोदन किया गया। 8-    मंत्रिपरिषद द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की तर्ज पर छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र (State Capital Region) के विकास के लिए संबंधित प्राधिकरण की स्थापना हेतु विधेयक के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। रायपुर, दुर्ग-भिलाई और नया रायपुर अटल नगर में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण को देखते हुए इस क्षेत्र के सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध विकास के लिए यह प्राधिकरण कार्य करेगा। यह प्राधिकरण राजधानी क्षेत्र के लिए योजना बनाना, निवेश को बढ़ावा देना, विभिन्न सरकारी और निजी संगठनों के बीच समन्वय तथा शहर के विस्तार को सही ढंग से नियंत्रित करने का काम करेगा। 2031 तक इस क्षेत्र में लगभग 50 लाख लोग रहने की संभावना है, इसलिए भूमि का प्रभावी उपयोग और पर्यावरण की रक्षा करते हुए शहरी विकास सुनिश्चित करना जरूरी है। इस तरह राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों को बेहतर, सतत और सुव्यवस्थित बनाने में मदद करेगा। 9-    छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। इससे अंतर्राज्यीय लेनदेन में इनपुट सेवा वितरक के नियम और अधिक प्रभावी तथा केंद्र सरकार के वित्त अधिनियम, 2025 के संशोधनों के अनुरूप यह होगा। 10-    मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के छोटे और मध्यम व्यापारियों को प्रोत्साहित करने तथा न्यायालयों में लंबित कर संबंधी मामलों को शीघ्र निपटाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए छत्तीसगढ़ बकाया कर, ब्याज एवं शास्ति के निपटान (संशोधन) विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया है। 11-    मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। इससे नक्शा बंटवारे और अभिलेखों के अद्यतनीकरण में सहूलियत होगी अवैध प्लाटिंग पर रोक लगेगी, जियो-रेफरेंस मैप से भविष्य में कानूनी विवाद कम होंगे। नामांतरण की प्रक्रिया आसान होगी। भूमि धारक की मृत्यु पर संयुक्त खाताधारकों और वारिसों को नामांतरण में सहूलियत होगी। भवन या भूखंड का हस्तांतरण भूमि के अनुपात में हो सकेगा। औद्योगिक नीति, आवास योजना और नगरीय विकास की प्रक्रियाएं सरल होंगी। 12-    मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय अधिनियम, 2004 में संशोधन विधेयक के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

मुख्यमंत्री ने शहरी विकास के लिये 12 हजार 360 करोड़ रुपये की दी सौगातें

15 हजार से अधिक रोजगार के नये अवसर होंगे सृजित प्रदेश के सभी शहरों में आयोजित करेंगे ग्रोथ कॉन्क्लेव रियल एस्टेट आज देश का सबसे अधिक प्रोग्रेसिव सेक्टर गिफ्ट सिटी के जैसे मध्यप्रदेश में भी 10 सिटी बनाएंगे सौर ऊर्जा, ग्रीन फील्ड हाईवे, टाउनशिप और स्मार्ट सिटी परियोजना को देंगे बढ़ावा प्रदेश में 10 लाख नए आवास तैयार किये जायेंगे शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा इकोनॉमिक टाइम्स अर्बन ग्रोथ 2025 पुस्तिका का हुआ विमोचन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि रियल एस्टेट आज देश का सबसे अधिक प्रोगेसिव सेक्टर है और यह सेक्टर देश के नवनिर्माण में बड़ा सहयोग दे रहा है। रियल एस्टेट के विकास में ही देश का विकास अंतर्निहित है। हम इस सेक्टर को प्रोत्साहन देने के लिए प्रदेश के सभी बड़े शहरों में इसी तरह की ग्रोथ कॉन्क्लेव करके और सबको घर मुहैया कराकर नागरिकों के जीवन में खुशहाली लायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर देश की जीडीपी में अब 8.5 प्रतिशत तक योगदान दे रहा है, जो कभी मात्र 3 प्रतिशत हुआ करता था। उन्होंने गुजरात की ‘गिफ्ट सिटी’ का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी ही 10 स्मार्ट सिटीज़ मध्यप्रदेश में विकसित की जाएंगी। उन्होंने घोषणा की है कि प्रदेश में 10 लाख नए आवास तैयार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अलग-अलग सेक्टरों के लिए विशेष ग्रोथ कॉन्क्लेव आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति और नई दिशा मिलेगी। प्रदेश के समग्र शहरी विकास और रियल एस्टेट सेक्टर को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को इंदौर स्थित ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में ‘मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025’ को संबोधित कर रहे थे। इस आयोजन में उद्योग, होटल, रियल एस्टेट, एजुकेशन, रिन्यूअल एनर्जी, आईटी आदि क्षेत्रों में लगभग 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इससे प्रदेश में 15 हजार से अधिक रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे और शहरी एवं औद्योगिक विकास को नई ऊचाईयां प्राप्त होंगी। कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के विकास के लिये 12 हजार 360 करोड़ रुपये की सौगातें भी दी। उन्होंने मुख्य रूप से जल प्रदाय, सीवरेज, स्वच्छता और अधोसंरचना निर्माण के लिये 5 हजार 454 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत 65 हजार से अधिक हितग्राहियों को 2 हजार 799 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान भी वितरित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा, ग्रीन फील्ड हाईवे, टाउनशिप और स्मार्ट सिटी परियोजना को बढ़ावा दिया जायेगा। कॉन्क्लेव में प्राप्त निवेश प्रस्ताव कॉन्क्लेव में सर्वाधिक 12 हजार 473 करोड़ रुपये का निवेश औद्योगिक क्षेत्र में प्राप्त हुआ है। इसी तरह होटल क्षेत्र में 3 हजार 344 करोड़ रूपये, रियल एस्टेट क्षेत्र में 1812.14 करोड़ रुपये, एजुकेशन क्षेत्र में 72.45 करोड़ रूपये, रिन्यूअल एनर्जी क्षेत्र में 500 करोड़ रूपये तथा आईटी क्षेत्र में 100 करोड़ रूपये के निवेश के प्रस्ताव मिले हैं। इंदौर और भोपाल विकास प्राधिकरण के अन्तर्गत 12 निवेशकों से 2 हजार 784 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। नगरीय निकायों को अधोसंरचना विकास के लिये एक हजार 320 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नेक्स्ट होराइजन : बिल्डिंग सिटीज ऑफ टुमारो कॉन्क्लेव से मध्यप्रदेश के शहरों को नई उड़ान मिलेगी। उन्होंने कहा कि सुलभ, स्विफ्ट और सुरक्षित परिवहन, किसी भी आधुनिक शहर की रीढ़ होते हैं। भविष्य की ट्रांसपोर्टेशन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है। जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहरों में मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब विकसित किए जा रहे हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर शहरों में प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत 582 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहरों के सर्वांगीण विकास के लिये दी सौगातें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में प्रदेश के शहरों के सर्वांगीण विकास के लिये 12 हजार 500 करोड़ रुपये की सौगातें प्रदान की। मुख्य रूप से इंदौर शहर के लिए अमृत 2.0 अंतर्गत जलप्रदाय एवं सीवरेज योजना हेतु 2,382.03 करोड़ रुपये की सौगात दी गई। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत उपयोगित जलप्रदाय प्रबंधन और अधोसंरचना विकास हेतु 257 परियोजनाओं के लिए 3,562.27 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0 अंतर्गत 45,503 हितग्राहियों का गृह प्रवेश करवाया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 अंतर्गत 19,541 हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। कुल 65,044 हितग्राहियों को 2,799.26 करोड़ रूपये की राशि अंतरण की गई। शहरी विकास को गति देने के लिये हुए महत्वपूर्ण एमओयू शहरी प्रशासन के विविध घटकों को टेक्नॉलॉजी के माध्यम से इंटीग्रेट करके अधिक कार्यकुशल बनाने के लिए मध्यप्रदेश शासन और भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N) के बीच महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है। नगरीय विकास विभाग के अन्तर्गत मध्यप्रदेश शहरी विकास कंपनी और हाउसिंग और शहरी विकास निगम लिमिटेड (हुड़को) के मध्य समझौता निष्पादन हुआ। मध्यप्रदेश शासन और IIM इंदौर के बीच सिंहस्थ 2028 की कार्ययोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए एमओयू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से की रूबरू चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में प्रमुख निवेशकों से चर्चा की और निवेश की संभावनाओं पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श किया। डॉ. यादव ने मुख्य रूप से हुडको के अध्यक्ष श्री संजय कुलश्रेष्ठ , पटेल इंफ्रा के श्री अरविंद विदुलभाई पटेल, आईटीसी के श्री आशीष पाल, एमकेसी इंफ्रा के श्री केतन पटेल, ओमेक्स ग्रुप के श्री मोहित गोयल, मेडुला सॉफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के श्री शांतनु शर्मा, राठी स्टील लिमिटेड के श्री ध्रुव राठी, मध्यप्रदेश होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के श्री सुमित सूरी, टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की सुश्री प्रीति पटेल, डापलमायर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रफुल्ल चौधरी, साई ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड के श्री रितेश दास से रु-ब-रु होकर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ ही मेट्रो से लेकर मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट, झील संरक्षण से लेकर स्मार्ट कमाण्ड सेंटर तक हर क्षेत्र में तेज गति और व्यापक पैमाने पर कार्य शुरू किये गये हैं यह एक शुरूआत है। इसे आगे भी सबके सहयोग से तेज गति … Read more

कल के शहरों का निर्माण थीम पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में "मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025" अन्तर्गत कल के शहरों का निर्माण थीम पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में विकास के लिए संचालित विभिन्न प्रोजेक्ट्स के माध्यम से विकसित सुदृढ़ अधोसंरचना, नवाचारों, निवेश प्रोत्साहन नीतियों एवं योजनाओं से संबंधित प्रकल्प प्रदर्शित किए गए। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर सराहना की। इंदौर विकास के मॉडल की झलक प्रदर्शनी में इंदौर विकास प्राधिकरण की अधोसंरचना विकास के लिए अपनाए गए मॉडल जिसमें पीपीपी मोड पर आधारित बहुउद्देशीय स्पोर्ट्स पार्क के निर्माण, एयरपोर्ट के पास कन्वेंशन सेंटर, इंदौर में स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने के लिए निर्माणाधीन स्टार्टअप पार्क को प्रकाशित किया गया। प्रदर्शनी में सारे प्रोजेक्ट्स की जानकारी को डिजिटली उपलब्ध कराने के लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डिजिटल व्यवस्था देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। कल के शहरों में मेट्रो रेल की भूमिका "कल के शहरों" के निर्माण में मेट्रो रेल की भूमिका को दर्शाने वाली प्रदर्शनी में इंदौर मेट्रो रेल परियोजना (येलो लाइन), भोपाल मेट्रो रेल परियोजना (ऑरेंज और ब्लू लाइन), रोलिंग स्टॉक (ट्रेन) देशी तकनीक से निर्मित आधुनिक मेट्रो ट्रेनें, सूचनात्मक पैनल को प्रदर्शित किया गया जिसके माध्यम से कल के शहरों में आवागमन के सशक्त साधन को दिखाया गया है। टेक्नोलॉजी आधारित प्रकल्प टेक्नोलॉजी आधारित विकास की पांच परिवर्तनकारी नीतियाँ आईटीईएस एवं ईएसडीएम निवेश प्रोत्साहन नीति 2023, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीति 2025, ड्रोन प्रोत्साहन एवं उपयोग नीति 2025, एवीजीसी-एक्सआर (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी) नीति 2025, सेमीकंडक्टर नीति 2025 का प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम इंदौर द्वारा एक विशेष प्रदर्शनी भी प्रस्तुत की गई जिसमें राज्य के प्रमुख अधोसंरचना परियोजना के गतिशील औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र, तेजी से विकसित होती आईटी अवसंरचना, और समावेशी शहरी विकास को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में विशेष रूप से इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर, आईटी पार्क-3, इंदौर, आईटी पार्क-4, सुपर कॉरिडोर, इंदौर कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास, रेडीमेड गारमेंट कॉम्प्लेक्स में प्लग एंड प्ले सुविधा को प्रदर्शित किया गया। हरित विकास नवाचार प्रदेश में हरित विकास को बढ़ावा देने वाली विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के नवाचारों को भी प्रदर्शनी में शामिल किया गया। मध्य भारत में पॉलीकार्बोनेट शीट जो पूर्णतः हरित उत्पाद है के माध्यम से घरों में प्राकृतिक रोशनी आसानी से उपलब्ध होगी। शहरी क्षेत्रों में पार्किंग की समस्या के निराकरण के लिए रोबोटिक पार्किंग सिस्टम बनाए जाने के संबंध में मॉडल, इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कचरा संग्रहण एवं कचरा निस्तारण के लिए ईवी का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन कार्यों में लगे प्रदेश के उद्योगपतियों की सराहना की। प्रदर्शनी में हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, भोपाल विकास प्राधिकरण, उज्जैन विकास प्राधिकरण, अमृत हरित अभियान आदि प्रदर्शनियों का प्रदर्शन किया गया जो प्रदेश के गतिशील औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र एवं नवाचारों का प्रोत्साहन, तेजी से विकसित होती आईटी अवसंरचना, शहरी सुदृढ़ अधोसंरचना एवं समावेशी शहरी विकास शामिल है। प्रदर्शनी में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट सहित अनेक जनप्रतिनिधि, निवेशक आदि उपस्थित थे।