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निवेश बढ़ाने की दिशा में कदम, मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे प्रमुख सेक्टरों के निवेशकों से मुलाकात

मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव-इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे रियल एस्टेट, होटल इंडस्ट्री एवं टूरिज्म सेक्टर के निवेशकों से संवाद CM डॉ. यादव रियल एस्टेट, होटल और टूरिज्म सेक्टर के निवेशकों से करेंगे संवाद निवेश बढ़ाने की दिशा में कदम, मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे प्रमुख सेक्टरों के निवेशकों से मुलाकात रियल एस्टेट व टूरिज्म सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा, CM डॉ. यादव करेंगे निवेशकों से सीधा संवाद शहरी विकास के ब्लू प्रिंट पर होगा मंथन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 जुलाई को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर, इंदौर में "मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव” में होटल इंडस्ट्री, पर्यटन, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों के निवेशकों से संवाद करेंगे। इस उच्चस्तरीय आयोजन में देशभर के संबंधित सेक्टर्स के निवेशकों, उ‌द्योगपतियों, कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। कॉन्क्लेव में देशभर से 1500 से अधिक उद्‌द्योगपति, रियल एस्टेट, होटल इंडस्ट्री और टूरिज्म सेक्टर से जुड़े प्रतिनिधि, निवेशक आदि शामिल होंगे। आयोजन के दौरान एक भव्य प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। आयोजन में क्रेडाई, होटल इंडस्ट्री, टूरिज्म, नगर निगम, आईडीए, स्मार्ट सिटी, मैट्रो, हुडको, एलआईसी, हाउसिंग बोर्ड आदि की व्यापक भागीदारी रहेगी। प्रदर्शनी में इनसे संबंधित योजनाएं व प्रोजेक्ट्स प्रदर्शित किए जाएंगे। यह कॉन्क्लेव प्रदेश में शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आयोजन से इंदौर और मध्यप्रदेश को निवेश का नया आयाम मिलेगा। निवेश और विकास के प्रमुख क्षेत्र प्रदेश में विकास और निवेश शहरी परिवहन (मेट्रो, ई-बस, मल्टीमॉडल हब), किफायती आवास, स्लम पुनर्विकास, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, जलापूर्ति, सीवेज नेटवर्क, झील संरक्षण, डिजिटलीकरण, ई-गवर्नेंस, भवन स्वीकृति प्रणाली और स्वच्छ ऊर्जा, हरित भवन, रिन्यूएबल इनफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। निवेशक इन क्षेत्रों में निवेश कर भविष्य में होने वाले लाभ के सहभागी हो सकते हैं। हाउसिंग सेक्टर में बेहतर निवेश की संभावना प्रदेश में हाउसिंग सेक्टर में निवेश की अच्छी संभावना है। अफोर्डेबल हाउसिंग में 8 लाख 32 हजार से अधिक किफायती आवास तैयार किये जा चुके है। प्रदेश में 10 लाख नए आवास तैयार किये जा रहे है। इनमें 50 हजार करोड़ रूपये का निवेश होगा। रियल इस्टेट की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये प्रदेश में मानव संसाधन की गुणवत्तापूर्ण वर्क फोर्स उपलब्ध है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 6 हजार किलोमीटर सड़क, 80 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में पाईपलाइन वॉटर सप्लाई कवरेज की सुविधा और शत् प्रतिशत शहरी क्षेत्र सीवरेज सिस्टम उपलब्ध है। नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय निकायों में 23 सेवाएं ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराई गई है। नगरीय निकायों में सेन्ट्रलाईज पोर्टल के माध्यम से मंजूरी दी जा रही है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी 17 हजार 230 योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पर्यावरण के लिये 2 हजार 800 करोड़ और वॉटर फ्रंट से संबंधित डेव्हलपमेंट में 2 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में सुगम परिवहन व्यवस्था के विस्तार के लिये 21 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाएं संचालित हैं। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पेट्रोलियम ईंधन के कार्बन फुट-फ्रंट रोकने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के बड़े शहरों में 552 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी-2025 लागू की गई है।    

18 लाख एमएसएमई इकाइयों में 56 हजार करोड़ का निवेश, 94 लाख से अधिक लोगों को मिला रोजगार

विशेष समाचार मुख्यमंत्री के युवाओं को रोजगार संपन्न बनाने की घोषणा पर अमल एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहित कर उपलब्ध कराई जा रही है सहायता : मंत्री  काश्यप 18 लाख एमएसएमई इकाइयों में 56 हजार करोड़ का निवेश, 94 लाख से अधिक लोगों को मिला रोजगार भोपाल  सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप ने बताया कि प्रदेश में रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिये राज्य शासन द्वारा निरंतर प्रभावी पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के उद्योग और रोजगार वर्ष की घोषणा के अनुरूप विभाग लगातार एमएसएमई की स्थापना और रोजगार सृजन के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है। केंद्र और राज्य की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से युवाओं, महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को ऋण, अनुदान और तकनीकी सहायता प्रदान कर उन्हें स्वावलंबी बनाया जा रहा है। मंत्री श्री काश्यप ने बताया कि प्रदेश में 18 लाख पंजीकृत एमएसएमई इकाइयों द्वारा 56 हजार करोड़ रूपये से अधिक निवेश कर 94 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दिया गया है। इसी तरह 5,342 स्टार्टअप, 72 इनक्यूबेटर और 2,542 महिला स्टार्टअप्स के माध्यम से 54 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। वर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत 10,352 युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया। मंत्री श्री काश्यप ने बताया कि रोजगार सृजन के इस सबसे सशक्त माध्यम को और प्रभावी बनाया गया है। एमएसएमई विकास नीति 2025, स्टार्टअप नीति 2025 और औद्योगिक भूमि आवंटन नियम 2025 के माध्यम से प्राथमिकता क्षेत्रों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। स्टार्टअप नीति का लक्ष्य 10 हजार डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान करना है। हाल ही में रतलाम में संपन्न हुई रीजनल इंडस्ट्री, स्किल एण्ड एम्प्लॉयमेंट कॉन्क्लेव इसका उदाहरण है, जहां वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश में अभी तक लाभान्वित हुए 2.37 लाख से अधिक लोगों को जिन्हें लगभग 2400 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण बैंकों/वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से मिला है, उनकी उपलब्धि को प्रदर्शित किया गया। साथ ही विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के तहत प्रदेश के 4 लाख से अधिक हितग्राहियों को 3861 करोड़ रूपये से अधिक का ऋण वितरित किया गया है। इसी तरह 880 एमएसएमई औद्योगिक इकाइयों को 269 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई गई है। इन प्रयासों की अनेक सफल कहानियां भी नवउद्यमियों को प्रेरित कर रही है। राइस मिल के मालिक बने रवि को 53 लाख सब्सिडी पन्ना जिले के गांव गिरवारा निवासी रवि पाठक ने अर्चना राइस मिल नाम से अपना व्यवसाय आरंभ किया। इससे धान प्रसंस्करण के क्षेत्र में उन्हें विशिष्ट पहचान मिली है। रवि ने यह व्यवसाय एमएसएमई प्रोत्साहन योजना की सहायता से प्रारंभ किया। इसमें उन्होंने 133.83 लाख रूपये का निवेश किया, योजना के तहत उन्हें 53.53 लाख रूपये की सहायता मिली। इस योजना के लाभ से रवि का व्यवसाय बहुत अच्छा चल रहा है। 7 जरूरतमंद को रोजगार से जोड़ा इस व्यवसाय के शुरू होने से न सिर्फ रवि ने प्रगति की है बल्कि उन्होंने सात अन्य जरूरतमंद लोगों को रोजगार से जोड़ा है। रवि बताते हैं कि हमारी इकाई में गुणवत्ता का खास खयाल रखा जाता है जिससे कि ग्राहकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इस पहल से वे आत्मनिर्भर हुए हैं साथ ही गांव के युवाओं को प्रेरणा भी मिली है। अब रवि गांव के अन्य लोगों को योजना की जानकारी दे रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर वे युवाओं को व्यवसाय प्रारंभ कराने में मदद भी कर रहे हैं। उद्यम क्रांति – 50 लाख का टर्नओवर धार जिले के धानमंडी निवासी राकेश गहलोत ने पेंट और हार्डवेयर शॉप प्रारंभ की और आज वे अपने परिवार को आर्थिक संबल प्रदान कर रहे हैं। राकेश ने बताया कि शॉप शुरू करने के लिए उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र से एमसएसएमई विभाग की मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना का लाभ लिया। इसमें उन्हें 25 लाख रूपये का ऋण स्वीकृत हुआ जिससे उन्हें रोजागार स्थापित करने में सहयेाग मिला। धीरे-धीरे व्यवसाय ने गति पकड़ ली। अब उनके व्यवसाय से लगभग 50 लाख रूपये प्रतिवर्ष टर्नओवर मिल रहा है। श्री राकेश बताते हैं, एक समय था जब मैं बहुत हताश हो चुका था। अपने साथियों को जीवन में आगे बढ़ते देख में भी चाहता था कि मेरा भी अच्छा रोजगार स्थापित हो जाए। परिवार की जरूरतें पूरी करना, बच्चों की पढ़ाई और उनके शौक पूरे करना चाहता था। मेरा एक ही उद्देश्य था कि सभी प्रकार की आर्थिक परेशानियों से परिवार को मुक्त करना। इसके बाद मैंने शासन की योजना की सहायता लेकर समस्याओं का समाधान किया। आज श्री गहलोत अपने क्षेत्र में 'आईकान' बन गए हैं। 

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ एकजुट होंगे सत्ता और विपक्ष? मॉनसून सत्र में सरकार लयेगी महाभियोग प्रस्ताव

 नई दिल्ली घर में नकदी बरामद होने के आरोप में फंसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने को लेकर सरकार प्रस्ताव ला सकती है. जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए सरकार संसद के मॉनसून सत्र में प्रस्ताव ला सकती है. लोकसभा में प्रस्ताव के लिए कम से कम सौ सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी है. विपक्षी दलों ने सरकार को समर्थन का भरोसा दिया है. प्रस्ताव पर सांसदों के हस्ताक्षर कराे शुरू कर दिए हैं. विपक्ष के सांसद भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेंगे. प्रस्ताव आने के बाद जांच समिति गठित की जाएगी.  बता दें कि इस साल मार्च में जस्टिस वर्मा के घर से 15 करोड़ नकदी बरामद हुई थी. सुप्रीम कोर्ट की इंटरनल इन्क्वायरी कमेटी ने उन्हें दोषी माना था. जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा देने से मना कर दिया है. संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से 12 अगस्त तक चलेगा. इस दौरान जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए महाभियोग का प्रस्ताव लाया जा सकता है. अगर महाभियोग प्रस्ताव पास होता है तो संसद के नए भवन में महाभियोग की यह पहली कार्यवाही होगी. जस्टिस वर्मा के खिलाफ एकजुट होंगे सत्ता और विपक्ष? सत्तापक्ष संसद के आगामी मॉनसून सत्र में इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ कैश बरामदगी मामले में महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है। इसको लेकर कांग्रेस ने भी सोमवार को अपनी आंतरिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने लोकसभा में कांग्रेस के सदन नेताओं को निर्देश दिया है कि वे उन सांसदों की पहचान करें जो इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेंगे। नियमों के अनुसार, लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं, जबकि राज्यसभा में यह संख्या 50 है। प्रस्ताव को लोकसभा अध्यक्ष की जांच के बाद जजेज (इंक्वायरी) एक्ट के तहत समिति के पास भेजा जाता है। एक साथ आ सकते हैं सत्तापक्ष और विपक्ष इकॉनोमिक टाइम्स ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से लिखा कि एआईसीसी संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस संबंध में कांग्रेस के सदन नेताओं को पत्र भेजा है। यह पत्र ऐसे समय में भेजा गया है जब सत्तापक्ष बीजेपी और विपक्ष दोनों के सांसदों को प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के लिए आगे लाने की योजना बना रहा है। उधर, विपक्ष का एक धड़ा राज्यसभा में पहले से लंबित महाभियोग प्रस्ताव पर भी तेजी से कार्रवाई की मांग कर रहा है, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव के खिलाफ कथित रूप से दिए गए 'नफरती भाषण' को लेकर दायर किया गया था। माना जा रहा है कि कांग्रेस इस मुद्दे को लोकसभा में भी उठाने की तैयारी में है। सूत्रों का यह भी कहना है कि हाल ही में कुछ कांग्रेस नेताओं ने न्यायमूर्ति वर्मा से अनुरोध किया था कि वे महाभियोग प्रस्ताव लाने से पहले खुद ही इस्तीफा दे दें। हालांकि, अभी तक न्यायपालिका की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संसद के आगामी मॉनसून सत्र में यह मुद्दा विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का कारण बन सकता है। धनखड़ ने न्यायाधीश के आवास से नकदी मिलने के मामले की आपराधिक जांच शुरू करने की उम्मीद जतायी इससे पहले सभापति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नई दिल्ली में एक न्यायाधीश के आधिकारिक आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने के मामले की आपराधिक जांच शुरू की जाएगी। धनखड़ ने इस घटना की तुलना शेक्सपीयर के नाटक जूलियस सीजर के एक संदर्भ ‘‘इडस ऑफ मार्च’’ से की, जिसे आने वाले संकट का प्रतीक माना जाता है। रोमन कलैंडर में इडस का अर्थ होता है, किसी महीने की बीच की तारीख। मार्च, मई, जुलाई और अक्टूबर में इडस 15 तारीख को पड़ता है। उपराष्ट्रपति ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि अब मुद्दा यह है कि यदि नकदी बरामद हुई थी तो शासन व्यवस्था को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी और पहली प्रक्रिया यह होनी चाहिए थी कि इससे आपराधिक कृत्य के रूप में निपटा जाता, दोषी लोगों का पता लगाया जाता और उन्हें कठघरे में खड़ा किया जाता।  महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में कांग्रेस, सांसदों को दिए खास निर्देश कांग्रेस पार्टी, जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही। पार्टी ने अपने सांसदों से इस नोटिस पर हस्ताक्षर करने को कहा है। साथ ही, कांग्रेस राज्यसभा के सभापति से जस्टिस यादव के मामले में भी आगे बढ़ने का आग्रह कर रही है। यह सब तब हो रहा है जब बीजेपी और अन्य विपक्षी दल मिलकर जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व ने लोकसभा में पार्टी के फ्लोर मैनेजरों को उन सांसदों की लिस्ट बनाने की सलाह दी है जो जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर करेंगे। जस्टिस शेखर यादव को लेकर भी की बड़ी डिमांड सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दल राज्यसभा में जस्टिस शेखर कुमार यादव के खिलाफ लंबित नोटिस पर भी जल्द कार्रवाई की मांग कर सकता है। जस्टिस यादव पर कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण देने का आरोप है। पार्टी लोकसभा में भी ऐसे नोटिस की मांग कर सकती है। कांग्रेस का प्लान क्या है कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि AICC महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल का यह निर्देश ऐसे समय पर आया है जब बीजेपी और विपक्षी दल मिलकर जस्टिस वर्मा के खिलाफ नोटिस लाने की तैयारी कर रहे हैं। नियमों के अनुसार, लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए (राज्यसभा में 50)। इसके बाद स्पीकर इसकी जांच करेंगे और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के अनुसार एक समिति द्वारा जांच की जाएगी। जस्टिस वर्मा की बढ़ेंगी मुश्किलें कुछ समय पहले, कुछ कांग्रेस नेताओं ने जस्टिस वर्मा से महाभियोग प्रस्ताव पेश होने से पहले इस्तीफा देने का आग्रह किया था। विपक्ष का एक वर्ग राज्यसभा के सभापति से जस्टिस यादव के खिलाफ लंबित महाभियोग प्रस्ताव पर भी आगे बढ़ने की मांग कर रहा है। महाभियोग प्रक्रिया के लिए क्या हैं नियम महाभियोग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए हाईकोर्ट या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को उनके पद से हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया … Read more

गुरु पूर्णिमा पर 50 हजार श्रद्धालुओं की संभावित भीड़, कुबेरेश्वर धाम के लिए बदले गए रूट

सीहोर   सीहोर में कुबेरेश्वर महादेव मंदिर पर गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया जा रहा है। गुरु पूर्णिमा के दिन 10 जुलाई को यहां 50 हजार से भी ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। अभी यहां शिवमहापुराण कथा चल रही है। चौथे दिन मंगलवार को करीब 25 हजार श्रद्धालु ने शिवमहापुराण की कथा का आनंद उठाया। गुरु पूर्णिमा के दिन भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशासन और पुलिस की तरफ से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। कथा स्थल पर पुलिस कंट्रोल रूम बनाया। बनाया गया प्लान ए और प्लान बी ट्रैफिक इंचार्ज ब्रजमोहन धाकड़ ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के दिन के लिए पुलिस ने दो प्लान बनाए हैं। हैवी वाहन भोपाल-इंदौर से डायवर्ट किए जाएंगे। यह सभी ब्यावरा होकर निकलेंगे। अब लोकल के लिए प्लान ए, यदि भीड़ कम रही तो हाइवे चालू रहेगा। प्लान बी, यदि भीड़ ज्यादा हुई तो भोपाल से आने वाले वाहन रिसोर्ट चौराहे से होकर इछावर रोड भाऊखेड़ी होते हुए अमलाहा निकलेगा। इंदौर की तरफ से आने वाले वाहन भी इसी रूट से निकलेंगे। पुलिस ने यह भी व्यवस्था रखी है कि ट्रैफिक ज्यादा नहीं हुआ तो हाइवे को वन-वे भी किया जा सकता है। 10 एकड़ क्षेत्र में ठहरने, कथा और भोजन की व्यवस्था महोत्सव के लिए 10 एकड़ क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने, कथा श्रवण और भोजन के लिए वाटरप्रूफ पंडाल बनाए गए हैं, जो धूप और बारिश से बचाव करेंगे। विट्ठलेश सेवा समिति के व्यवस्थापक समीर शुक्ला, पंडित विनय मिश्रा और मनोज दीक्षित निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे हैं। हजारों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जानकारी के अनुसार, कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में शनिवार से शुरू हो रहे छह दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। मंदिर परिसर में भव्य पंडालों का निर्माण किया गया है। लाइव प्रसारण होगा, श्रद्धालु गुरु दीक्षा लेंगे कथावाचक पंडित मिश्रा के मार्गदर्शन में होने वाले इस आयोजन का प्रसारण भी किया जाएगा, जिससे करोड़ों श्रद्धालु गुरु महिमा और ईश्वरीय आस्था के बारे में जान सकेंगे। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु गुरु दीक्षा भी प्राप्त करेंगे। केवल सनातन धर्म, बाकी सब मजहब शिवमहापुराण कथा के दौरान  कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि सनातन धर्म हमें एक नैतिक और आध्यात्मिक जीवन जीने का मार्ग दिखाता है, जो न केवल व्यक्तिगत कल्याण के लिए, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए भी आवश्यक है। सनातन धर्म से लगाव होना चाहिए। पूरे विश्व में धर्म है तो केवल सनातन धर्म है, बाकी सब मजहब है। उन्होंने कहा कि शिव महापुराण कथा कहती है कि लगाव और विश्वास हमारे जीवन को सार्थक करता है। आपका लगाव किससे है और आपका विश्वास किस पर है, यह आप सुनिश्चित करते है। अगर आपका विश्वास भगवान शिव पर अटूट है तो आपकी संपूर्ण मनोकामनाएं पूर्ण होगी। हमें हमारे धर्म से लगाव होना चाहिए। सनातन धर्म के अनुसार, जीवन का उद्देश्य आत्मा और परमात्मा को समझना है। यह धर्म, परिवार और समाज के सभी चार पहलुओं को व्यक्ति के आध्यात्मिक पथ के महत्वपूर्ण भागों के रूप में मान्यता देता है। कथा के दौरान करीब 18 किलोमीटर दंडवत कर आने वाले श्रद्धालुओं का मंच पर बुलाकर सम्मान किया गया।

मां नर्मदा परिक्रमा पथ पर पौधरोपण का कार्य की निगरानी ड्रोन-सैटेलाइट इमेज से की जाएगी

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल, प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरे देश में चलाए जा रहे एक पेड़ मां के नाम 2.0 अभियान को प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मिशन के रूप में चला रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रकृति, पर्यावरण और जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रदेश के 16 जिलों में मां नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्‍थलों की भूमि पर पौधरोपण करेगी। इसके लिए मनरेगा परिषद ने तैयारी भी शुरू कर दी है। प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पौधरोपण के संबंध में निर्देश भी जारी किए हैं।  233 स्‍थानों की लगभग 1000 एकड़ भूमि पर किया जाएगा पौधरोपण मां नर्मदा परिक्रमा पथ पर स्थित आश्रय स्‍थलों के लगभग 233 स्‍थानों की लगभग 1000 एकड़ भूमि पर 43 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से लगभग 7.50 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा। पौधरोपण का कार्य 15 जुलाई से शुरू होगा जो 15 अगस्त तक चलेगा। इसके लिए बकायदा अभियान चलाया जाएगा।  इन जिलों में मां नर्मदा आश्रय स्थलों पर होगा पौधरोपण मां नर्मदा आश्रय स्थलों पर जिन जिलों में पौधरोपण किया जाएगा, उनमें अनूपपुर, डिंडोरी, मण्‍डला, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, बड़वानी, अलीराजपुर, धार, नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, हरदा, देवास, खंडवा एवं खरगोन शामिल हैं।  ड्रोन-सैटेलाइट इमेज से की जाएगी निगरानी  मां नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्थलों की भूमि पर पौधरोपण का कार्य सही ढ़ग से हो रहा है या नहीं। पौधे कहा पर लगे है या नहीं। मनरेगा परिषद द्वारा इसकी ड्रोन-सैटेलाइट इमेज से बकायदा निगरानी भी की जाएगी। आश्रय स्थलों पर भूमि की उपलब्धता के अनुसार दो श्रेणियों में पौधरोपण का कार्य किया जाएगा। प्रदेश में 136 ऐसे स्थान हैं जहां पर 2 एकड़ से अधिक भूमि है। यहां पर 2.15 लाख पौधे लगाए जाएंगे। इसी तरह से 97 ऐसे स्थान हैं जहां पर 1 एकड़ से अधिक और 2 एकड़ से कम भूमि है। यहां पर 5.50 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा।  पौधरोपण की खासियत:  -पौधरोपण के आश्रय स्थलों का चयन सिपरी सॉफ्टवेयर से किया जाएगा। साथ ही यदि सिपरी सॉफ्टवेयर पौधरोपण के लिए जगह को उपयुक्‍त नहीं बताता है तो उस स्थान पर पौधरोपण नहीं किया जाएगा। इसके अलावा सॉफ्टवेयर से यह भी देखा जाएगा कि जिस जगह पर पौधरोपण किया जा रहा है उस जगह पर पानी का स्‍थायी स्रोत हो।  ऐसे स्‍थल जहां पर 2 एकड़ या अधिक भूमि उपलब्‍ध है, वहां पर सामान्य पद्धति से पौधरोपण का कार्य किया जाएगा।  2 एकड़ से कम एवं 1 एकड से अधिक भूमि उपलब्‍ध है वहां मियावाकी पद्धति से पौधरोपण किया जाएगा। जहां पौधरोपण किया जाना है, वहां पौधों की सुरक्षा के लिए तार फेंसिंग की जाएगी। 14 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा गड्ढे की खुदाई, तार की फेंसिंग का कार्य  मां नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्‍थलों की भूमि पर पौधरोपण का कार्य शुरू होने से पहले गड्‌ढे की खुदाई, तार की फेंसिंग, सिपरी सॉफ्टवेयर द्वारा प्रस्तावित भूमि का स्थल निरीक्षण, भौतिक सत्यापन, तकनीकी व प्रशासकीय स्वीकृति जैसे कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। इसके बाद 15 जुलाई से पौधरोपण का कार्य शुरू होगा।

धामी की कैबिनेट का बड़ा निर्णय—जियो थर्मल ऊर्जा नीति पास, सरकारी योजनाओं का पुनरावलोकन

देहरादून  उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की अहम बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में कुल छह महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े फैसले शामिल हैं। बैठक में सबसे अहम निर्णय राज्य की जियो थर्मल ऊर्जा नीति को लेकर लिया गया, जिसे अब कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। यह नीति प्रदेश में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास को बढ़ावा देगी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। पुष्कर सिंह धामी सरकार ने इसके अलावा राज्य में पुलों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) के गठन को भी मंजूरी दी गई है। इससे प्रदेश में निर्माणाधीन और प्रस्तावित पुलों के निर्माण कार्यों की निगरानी और प्रबंधन में तेजी आएगी। बैठक में प्रशासनिक ढांचे में भी सुधार को लेकर अहम निर्णय लिए गए। कैबिनेट बैठक के महत्वपूर्ण प्रस्ताव: सतर्कता विभाग के संशोधित ढांचे को मिली मंजूरी 20 और पद बढ़ाए जाने पर मिली मंजूरी जीएसटी विभाग के ढांचे में किया गया संशोधन प्रदेश में मौजूद पुलों को अपग्रेड करने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट को मिली मंजूरी दो विभागों में बढ़े पद प्रदेश सरकार ने विभागीय कामकाज को बेहतर बनाने के लिए दो प्रमुख विभागों में पदों की संख्या में वृद्धि का निर्णय लिया है। धामी सरकार ने सतर्कता विभाग में 20 नए पद सृजित किए गए हैं, जिससे विभाग में पदों की संख्या 132 से बढ़कर 156 हो गई है। वहीं, जीएसटी (GST) विभाग में भी पदों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। इससे कर संग्रहण और निगरानी की प्रक्रिया और मजबूत की जा सके। खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और विकास को ध्यान में रखते हुए, नए खनिजों के लिए जिला और राज्य स्तर पर खनन न्यास (Mining Trust) के गठन को भी कैबिनेट की हरी झंडी मिली है। पेंशन योजना में अहम बदलाव धामी सरकार ने बुजुर्गों के लिए पेंशन योजना में अहम बदलाव किए हैं। कैबिनेट ने वृद्धावस्था पेंशन योजना में भी अहम संशोधन को मंजूरी दे दी है। अब अगर लाभार्थी का पुत्र 18 वर्ष का हो जाता है तो भी पेंशन बंद नहीं होगी। इससे प्रदेश के हजारों पेंशनधारी वृद्धजनों को राहत मिलेगी।  

Slum free होगी एमपी की राजधानी, तोड़े जाएंगे 6 हजार से ज्यादा मकान-दुकान, 24 हजार ईडब्ल्यूएस फ्लैट तैयार किए जाएंगे

भोपाल  राजधानी भोपाल जल्द ही मध्यप्रदेश का स्लम फ्री शहर बनने जा रहा है। यहां अरेरा हिल्स पर झुग्गीवासियों के लिए वल्लभ नगर क्षेत्र में 45 मीटर ऊंचाई की बहुमंजिला इमारतें बनेंगी। 24 हजार ईडब्ल्यूएस फ्लैट तैयार किए जाएंगे। हालांकि इस प्लान पर फिलहाल एयरपोर्ट अथॉरिटी की एनओसी नहीं मिल पाई है। सुरक्षा की दृष्टि से इनकी ऊंचाई 30 मीटर करने को कहा गया है। इस सप्ताह कलेक्टर संबंधितों से बैठक कर मामला निराकृत करेंगे। तय प्लान में यहां ठीक वैसे बहुमंजिला आवासीय टॉवर तय हैं जो, स्मार्ट सिटी में तोड़े गए सरकारी मकानों के बदले में होटल पलाश के सामने बनाए गए हैं। वल्लभ भवन और आसपास के पूरे क्षेत्र के स्लम एरिया के लिए यहीं जगह तय की जाएगी। इसलिए आपत्ति में प्रोजेक्ट अरेरा हिल्स पहले ही शहर के ऊंचाई वाले क्षेत्र में शामिल है। इस पर 45 मीटर से ऊंची बिल्डिंग एयरलाइंस के लिए कहीं बाधा न उत्पन्न कर दें, इसलिए ऊंचाई घटाने का कहा जा रहा है। इससे पहले हमीदिया अस्पताल की नई बिल्डिंग की ऊंचाई पर भी सवाल उठे थे, जिसका चर्चा के बाद निराकरण किया गया। अभी अहमदाबाद में हुए हवाई हादसे के बाद एनओसी में सभी स्थितियों का आंकलन किया जा रहा है। ऐसा स्लम रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम ● 9 क्लस्टर में शहर के स्लम क्षेत्र को बांटा गया ● 6534 झुग्गियों को पहले चरण में हटाएंगे ● 650 एकड़ का क्षेत्र दबा रखा है झुग्गियों ने ● 05 लाख की आबादी स्लम क्षेत्र में रहती है इस समय ● 4000 करोड़ रुपए की जमीन निजी एजेंसियों से विकसित कराई जाएगी 120 से अधिक भवन यहां करीब 18 एकड़ क्षेत्रफल में 120 से अधिक बहुमंजिला टॉवर बनाए जाएंगे। इस काम में कम से कम चार साल का समय लगेगा। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने इसके प्लान पर निगम अफसरों से चर्चा की है। अगले एक माह में एजेंसी तय करने के साथ ही जमीनी काम शुरू करने का कहा है। झुग्गी मुक्त होगा शहर झुग्गी मुक्त शहर की दिशा में काम किया जा रहा है। एयरपोर्ट अथॉरिटी से भी चर्चा की जा रही है। सभी एजेंसियों से चर्चा की जा रही है। निगम जल्द ही जमीनी काम शुरू करेगा। -कौशलेंद्र विक्रमसिंह, कलेक्टर

अमित शाह बोले – रिटायरमेंट के बाद अध्यात्म और प्राकृतिक जीवन को दूंगा प्राथमिकता

नई दिल्ली  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बुधवार को कहा कि सार्वजनिक जीवन से रिटायर होने के बाद, मैं खुद को पूरी तरह से वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती के लिए समर्पित करने की योजना बना रहे हैं. अमित शाह ने गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सहकारी समितियों से जुड़ी महिलाओं के साथ 'सहकार-संवाद' में बोलते हुए ये बातें कहीं. अमित शाह ने कहा, "मैंने फैसला किया है कि रिटायरमेंट के बाद, मैं अपनी बची जिंदगी वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती को समर्पित करूंगा. रासायनिक उर्वरकों से उगाया गया गेहूं अक्सर कई स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बनता है. प्राकृतिक खेती न केवल शरीर को रोगमुक्त बनाने में मदद करती है, बल्कि एग्रीकल्चरल प्रोडक्टिविटी भी बढ़ाती है." 'जब मैं देश का गृह मंत्री बना…' केंद्रीय गृह मंत्री ने एक मंत्री के रूप में अपने सफ़र के बारे में भी बात की और कहा कि सहकारिता मंत्रालय उनके लिए कितना ख़ास है. अमित शाह ने कहा, "जब मैं देश का गृह मंत्री बना, तो सबने मुझसे कहा कि मुझे बहुत अहम विभाग दिया गया है, लेकिन जिस दिन मुझे सहकारिता मंत्री बनाया गया, मुझे लगा कि मुझे गृह मंत्रालय से भी बड़ा विभाग मिला है, जो देश के किसानों, गरीबों, गांवों और पशुओं के लिए काम करता है." 'सहकार-संवाद' कार्यक्रम के दौरान, अमित शाह ने स्वर्गीय त्रिभुवन काका के नाम पर त्रिभुवन सहकारिता विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी. उन्होंने भारत के सहकारिता आंदोलन की सच्ची नींव रखने का श्रेय त्रिभुवन काका को दिया. केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, "ऐसा इसलिए मुमकिन हुआ है क्योंकि मैं देश भर में जहां भी मैं जाता हूं, देखता हूं कि कैसे छोटे परिवारों की महिलाओं ने अपने बच्चों को एजुकेट किया है और उनकी जिंदगी में बदलाव लाया है."  अमित शाह ने आगे कहा, "आज, जहां भी सहकारी समितियां स्थापित हैं, वहां लोग ₹1 करोड़ तक कमा रहे हैं, यह सब त्रिभुवन काका के दूरदर्शी विचारों की वजह से ही मुमकि हुआ है. फिर भी, उन्होंने कभी भी अपना नाम बनाने के लिए कुछ नहीं किया."

पेसा एक्ट जनजातीय पहचान और स्वशासन की गारंटी देता है: मंत्री श्री पटेल

पेसा एक्ट जनजातीय समाज की स्वतंत्रता और संस्कृति की ढाल है: मंत्री पटेल मंत्री पटेल बोले– पेसा एक्ट आदिवासी जीवन मूल्यों और अधिकारों की सुरक्षा का कानून है पेसा एक्ट जनजातीय पहचान और स्वशासन की गारंटी देता है: मंत्री श्री पटेल नवनियुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत एवं विकासखंड  अधिकारियों के प्रशिक्षण का समापन पेसा कानून के क्रियान्वयन पर हुई विशेष कार्यशाला भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नवनियुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत एवं विकासखंड अधिकारियों की पहली पोस्टिंग प्रदेश के जनजातीय विकासखंड में की जा रही है। इन विकासखंडों में पेसा मोबलाइजर्स के साथ कार्य कर नवनियुक्त अधिकारियों को जमीनी स्तर पर पेसा कानून के क्रियान्वयन की जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि पेसा कानून के क्रियान्वयन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ ही जनजाति कार्य विभाग की बड़ी भूमिका है। उन्होंने पेसा कानून को जनजातीय समाज की स्वतंत्रता और जीवन मूल्यों की रक्षा का माध्यम बताया। मंत्री पटेल मंगलवार को मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान (वाल्मी) भोपाल में नवनियुक्त जनपद सीईओ एवं बीडीओ के प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं पेसा कानून पर कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों को प्रमाण पत्र प्रदान किये और स्मृति दर्पण पुस्तिका का भी विमोचन भी किया। मंत्री पटेल ने कहा कि शासकीय सेवा को व्यक्तिगत लाभ न मानते हुए समाज और संस्था की प्रतिष्ठा का माध्यम बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी सेवा जनजातीय क्षेत्र में होने पर स्वस्थ मन से, निष्काम भाव से जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के लिए, उनके जीवन दर्शन के लिए, उनको दबावों से मुक्त कराने के लिए कार्य करें। मंत्री पटेल ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने के लिए प्रदेश के विभिन्न पंचायत में 1400 से अधिक नवीन ग्राम पंचायत भवन स्वीकृत कराए गए है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज को मज़बूत करना केवल इमारतें बनाना ही नहीं, बल्कि संसाधनों और सही माहौल की उपलब्धता से संभव है। उन्होंने कहा कि पौधारोपण का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं उनका संरक्षण करना भी आवश्यक है। अब फेंसिंग और पानी की व्यवस्था के बिना पौधारोपण नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक संसाधनों जैसे जल स्रोत, भूमि को पुनर्जीवित करने के प्रयास करना चाहिए। मंत्री पटेल ने कहा कि ग्रामीण विकास में पात्र व्यक्ति को सबसे पहले लाभ मिलना न्याय की सच्ची परिभाषा है। सभी पात्र हितग्रहियों को शासन की योजनाओं के लाभ पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए अधिकारियों को जनजातीय विकासखंड में भेजने से उन्हें अधिक जमीनी अनुभव मिलेगा। पेसा एक्ट के अंतर्गत ग्राम सभाओं की सक्रियता और वास्तविक बैठकें सुनिश्चित करने पर बल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गौण खनिज अधिकारों की रक्षा की ज़िम्मेदारी अब जनपद सीईओ की होगी। उन्होंने कहा कि प्रकृति का सम्मान आवश्यक है- नदी, पहाड़ और वृक्ष जीवनदायिनी संगम हैं। जनजातीय समाज की प्रकृति के प्रति आस्था और उनकी जीवन शैली से सीखना चाहिए। मंत्री पटेल ने “जल गंगा संवर्धन अभियान” और “एक बगिया माँ के नाम” अभियान के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश में जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कई कार्य किए गए। मंत्री पटेल ने कहा कि अभियान के तहत उन्होंने 80 से अधिक छोटी नदियों के उद्गम स्थलों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि जल स्रोतों के संरक्षण के साथ ही पौधों के संरक्षण के लिए “एक बगिया मां के नाम” अभियान की शुरुआत 15 जुलाई से की जा रही है। इस अभियान के तहत एक एकड़ ज़मीन पर बगिया लगाने के लिए ₹3 लाख की सहायता दी जाएगी – पहले साल ₹2 लाख, फिर क्रमशः ₹52,000 और ₹48,000 की किश्तों में दी जाती है। स्व सहायता समूह की महिलाओं को निजी भूमि पर बागवानी के लिए विशेष आर्थिक सहायता दी जाएगी। मंत्री पटेल ने कहा कि मनरेगा योजना के तहत किए जा रहे कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए सिपरी सॉफ्टवेयर का उपयोग शुरू हो चुका है, जिससे योजनाएं वैज्ञानिक आधार पर बनेगी और चलेंगी। उन्होंने कहा कि कई योजनाओं की असफलता का कारण साइट सिलेक्शन की गलतियां हैं, जिसे नवीन तकनीक का समावेश कर ठीक किया जा सकता है। इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, डायरेक्टर वाल्मी श्रीमती सरिता बाला, उप सचिव ह्रदयेश श्रीवास्तव सहित जनजातीय विकासखंडों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के नवनियुक्त सीईओ एवं बीडीओ, 20 जिलों के जिला पेसा समन्वयक तथा जनजातीय विकासखंडों के समन्वयक उपस्थित थे।  

चूरू: जगुआर फाइटर जेट क्रैश में दोनों पायलट शहीद, जांच के आदेश जारी

चूरू राजस्थान के चूरू ज़िले में इंडियन एयरफोर्स का जगुआर ट्रेनर विमान ट्रेनिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में विमान में सवार दोनों पायलटों की मौत हो गई. इस घटना को लेकर भारतीय वायुसेना ने गहरा दुख जताया है. साथ ही हादसे की वजह का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (आंतरिक जांच) के आदेश दे दिए गए हैं. ये जांच इस बात की विस्तृत समीक्षा करेगी कि विमान दुर्घटनाग्रस्त कैसे हुआ. भारतीय वायुसेना ने X पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि वह इस कठिन समय में शोकाकुल परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है. वायुसेना ने कहा कि हम बहादुर पायलटों की शहादत को सलाम करते हैं और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं. जोरदार धमाके के बाद उठी आग की लपटें प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, प्लेन का मलबा एक खेत में मिला है, साथ ही मानव अंग भी बुरी तरह क्षत-विक्षत अवस्था में मिले हैं. हादसे के तुरंत बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोगों ने बताया कि एक जोरदार धमाका सुनाई दिया, इसके बाद धुआं और आग की लपटें उठती देखीं. ग्रामीणों ने खेतों में लगी आग को बुझाने की कोशिश भी की. दोपहर 1:25 बजे हुआ हादसा स्थानीय पुलिस अधिकारी कमलेश ने बताया कि विमान दोपहर करीब 1:25 बजे गिरा. हादसे के बाद जिला कलेक्टर अभिषेक सुराणा, पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं. साथ ही सेना की राहत और जांच टीम के भी जल्द ही घटनास्थल पर पहुंचने की उम्मीद है. वहीं, भारतीय वायुसेना ने कहा कि हादसे के वक्त विमान ट्रेनिंग पर था.  भारतीय वायुसेना ने दी ये जानकारी भारतीय वायुसेना ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक यह दुर्घटना उस समय हुई जब लड़ाकू विमान प्रशिक्षण उड़ान पर था। इस दुर्घटना में दोनों पायलटों को गंभीर चोटें आईं। किसी भी नागरिक संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। वायुसेना इस दुखद घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करती है और इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ी है। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए एक कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की गई है। हादसे के बाद कैसा था मंजर राजस्थान में वायुसेना के कई अड्डे हैं, जिनमें जोधपुर और बीकानेर में प्रमुख प्रतिष्ठान हैं। घटना के तुरंत बाद इलाके में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने बताया कि आसमान से तेज़ आवाज़ सुनाई दी, जिसके बाद खेतों से आग और धुआं उठता दिखाई दिया। स्थानीय निवासियों ने यह भी बताया कि दुर्घटना के कारण आस-पास के खेतों में आग लग गई, जिसे उन्होंने खुद बुझाने की कोशिश की। पुलिस अधिकारी ने कही ये बात जिला कलेक्टर अभिषेक सुराना और पुलिस दल घटनास्थल पर पहुंचे। सेना का एक बचाव दल भी घटनास्थल पर पहुंच गया है। दुर्घटना के सही कारण का अभी पता नहीं चल पाया है। सेना अपनी प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद आधिकारिक बयान जारी करेगी। स्थानीय पुलिस अधिकारी राजलदेसर कमलेश ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि विमान दोपहर करीब 1.25 बजे भनोदा गांव के एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। उन्होंने बताया कि दुर्घटनास्थल के पास मानव शरीर के अंग मिले हैं। प्लेन क्रैश होने के बाद क्या होता है     बता दें कि किसी भी प्लेन क्रैश के बाद सबसे पहले इमरजेंसी सर्विस को एक्टिव कर दिया जाता है।           उस एरिया को पुलिस सील कर देती है और किसी को भी उस जगह पर जाने की इजाजत नहीं होती है। कोई भी घटनास्थल तक नहीं जा सकता है।            इसके बाद एजेंसियां विमान हादसे की जांच करती हैं और मलबे का निरीक्षण करती हैं।            इसके बाद फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर जैसे उपकरणों की खोज की जाती है, जिससे कि यह पता लगाने की कोशिश की जा सके कि विमान क्यों क्रैश हुआ था। क्रैश हुए विमान के मलबे का क्या होता है ?      विमान हादसे के बाद उसका मलबा दूर तक जाकर गिरता है।            अहमदाबाद में हुए विमान हादसे में प्लेन क्रैश होकर बिल्डिंग पर जा गिरा था और उसका आधा हिस्सा बिल्डिंग पर था और बाकी का हिस्सा जमीन पर गिरा था।           मलबे में से ब्लैकबॉक्स खोजने की कोशिश की जाती है।           सबसे पहले तो मलबे का इस्तेमाल जांच में किया जाता है, लेकिन उसके बाद उसे ऐसे ही नहीं छोड़ दिया जाता है।            जो भी एजेंसियां उस विमान दुर्घटना की जांच करती हैं, वे मलबे में जो पुर्जे काम के होते हैं, उनको खोलकर अलग कर लेती हैं।           इसके बाद लैब में उनकी जांच की जाती है, जिससे कि यह देखा जा सके कि वे दोबारा इस्तेमाल में लाए जा सकते हैं या नहीं।           जो भी काम का मलबा नहीं होता है, उसको नीलाम कर दिया जाता है।   5 महीने में तीसरा हादसा बता दें कि पिछले 5 महीने में तीसरी बार जगुआर प्लेन दुर्घटना का शिकार हुआ है. इससे पहले 7 मार्च को अंबाला में और 2 अप्रैल को गुजरात के जामनगर में जगुआर ट्रेनर विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. अंबाला में पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा था, लेकिन जामनगर हादसे में एक पायलट की मौत हो गई थी. सीएम भजनलाल ने जताया दुख राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी हादसे पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि चूरू जिले के रतनगढ़ क्षेत्र में भारतीय वायुसेना के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का दुखद समाचार प्राप्त हुआ. घटना के तुरंत बाद से प्रशासन अलर्ट मोड पर है और राहत-बचाव कार्य के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं. ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुख सहन करने की शक्ति दें.