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रिटायरमेंट की तैयारी कर रहे हैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग? राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज

बीजिंग: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 साल से अधिक समय से चीन में अपनी सत्ता बरकरार रखे हुए हैं। लेकिन अब जिस तरह का घटनाक्रम सामने आ रहा है उससे कुछ अलग ही संकेत मिल रहे हैं। पहले तो उनके गायब होने की खबरें आईं। अब वे अपने शासनकाल में पहली बार सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख संगठनों को अधिकार सौंपना शुरू कर रहे हैं। शी के इस कदम से अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे व्यवस्थित सत्ता हस्तांतरण के लिए आधार तैयार कर रहे हैं या संभावित रिटायरमेंट की तैयारी के तहत अपनी भूमिका को कम कर रहे हैं।  कम को लेकर नए नियमों की समीक्षा  शी के सत्ता हस्तांतरण के बारे में अटकलें तब तेज हुईं जब सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने हाल ही में बताया कि सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के शक्तिशाली 24-सदस्यीय राजनीतिक ब्यूरो ने 30 जून को अपनी बैठक में पार्टी के संस्थानों के काम को लेकर नए नियमों की समीक्षा की। शी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि ये नियम सीपीसी केंद्रीय समिति की निर्णय लेने वाली, विचार-विमर्श करने वाली और समन्वयकारी संस्थाओं की स्थापना, जिम्मेदारियों और संचालन को और अधिक मानकीकृत करेंगे।  शिन्हुआ की खबर में कहा गया है कि ऐसी संस्थाओं को अपने प्रमुख कार्यों के संबंध में नेतृत्व और समन्वय को लेकर अधिक प्रभावी प्रयोग करने चाहिए और प्रमुख कार्यों की योजना बनाने, चर्चा करने और देखरेख करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर चीन में रहने वाले एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा कि पार्टी के इन निकायों के लिए निर्धारित किए गए नियम शी के रिटायरमेंट की तैयारी का संकेत हो सकते हैं।  कुछ शक्तियां दूसरों को सौंप सकते हैं जिनपिंग हांगकांग के न्यूज पेपर ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ ने रविवार को विश्लेषक के हवाले से कहा," सत्ता परिवर्तन के लिहाज से यह महत्वपूर्ण समय है, लिहाजा हो सकता है कि निकायों को विनियमित करने के लिए ये नए नियम बनाए गए हैं।” हालांकि, दूसरे विशेषज्ञों का कहना है कि सीपीसी के संस्थापक माओत्से तुंग के बाद सबसे शक्तिशाली नेता माने जाने वाले शी खुद कुछ बड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कुछ शक्तियां दूसरों को सौंप सकते हैं।  ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा नहीं लिया ‘यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो’ में चीनी अभिजात्य राजनीति और वित्त मामलों के विशेषज्ञ विक्टर शिह ने कहा कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि शी जिनपिंग शायद दिन-प्रतिदिन के विवरणों पर कम ध्यान देते हैं, जिसके लिए एक निगरानी तंत्र की आवश्यकता है।” शी ने रविवार से रियो डी जेनेरियो में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी भाग नहीं लिया। राष्ट्रपति बनने के बाद यह पहला मौका है जब वे उभरती अर्थव्यवस्थाओं के शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लेंगे। शिखर सम्मेलन में चीन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रधानमंत्री ली कियांग कर रहे हैं।  अमेरिका के साथ टैरिफ युद्ध के बीच उठाया कदम शी ने सत्ता सौंपने का कदम ऐसे समय उठाया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ युद्ध शुरू कर दिया है, चीन का अमेरिका को होने वाला 440 अरब डॉलर का निर्यात बाधित हो रहा है। इसके अलावा चीनी अर्थव्यवस्था भी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। अर्थव्यवस्था में निरंतर सुस्ती के कारण विकास में गिरावट आ रही है। इसके अलावा आर्थिक विकास का मुख्य आधार आवास बाजार कमजोर हो रहा है।  शी जिनपिंग का अब तक का कार्यकाल कैसा रहा? साल 2012 में सीपीसी के महासचिव बनकर सत्ता संभालने के बाद से शी सत्ता के केंद्रों यानी पार्टी, राष्ट्रपति पद और केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के अध्यक्ष के रूप में शक्तिशाली सेना पर अपनी पकड़ को तेजी से मजबूत किया है। इससे पहले शी उपराष्ट्रपति थे। सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए उन्होंने चीन का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाया जिसमें दस लाख से अधिक अधिकारियों को दंडित किया गया और दर्जनों शीर्ष जनरलों को पदों से हटा दिया गया। इस दौरान शी को पार्टी का "मुख्य नेता" घोषित किया गया जबकि इससे पहले यह पद केवल पार्टी के संस्थापक माओत्से तुंग को ही दिया गया था। बाद में, किसी राष्ट्रपति के पांच-पांच साल के दो कार्यकाल के प्रमुख नियम को विधायिका ने संशोधित किया, जिससे 2022 में पार्टी के महासचिव के रूप में और अगले वर्ष देश के राष्ट्रपति के रूप में उनके अभूतपूर्व तीसरे पांच-वर्षीय कार्यकाल के लिए चुने जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ। शी के सभी पूर्ववर्ती दो पांच साल के कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्त हो गए, जबकि वह बिना किसी कार्यकाल सीमा के सत्ता में बने रहे और उन्हें आजीवन राष्ट्रपति का तमगा मिला। विश्लेषकों का कहना है कि सत्ता में बने रहने या सत्ता में भागीदारी करने की उनकी योजना 2027 में होने वाली सीपीसी की अगली पंचवर्षीय कांग्रेस से पहले या उसके दौरान आने की उम्मीद है, तब तक उनका तीसरा कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।

लाड़ली बहनों के खाते में रक्षाबंधन से पहले दो बार आएंगे पैसे, जानिए बड़ा अपडेट

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार की सबसे लोकप्रिय लाडली बहना योजना (Ladli Behna Yojana 26 Installment) की 26वीं किस्त का एमपी की करोड़ों महिलाएं बेसब्री से इंतजार कर रही हैं. बता दें कि इस बार महिलाओं को डबल खुशखबरी मिलने वाली है. जुलाई में न सिर्फ महिलाओं को शगुन के तौर पर अतिरिक्त पैसे मिलेंगे, बल्कि इस बार लाडली बहना योजना की सहायता राशि बढ़ाकर बहनों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी. दो बार जारी की जाएगी लाड़ली बहना की राशि एमपी की बहनों को जुलाई में दो किस्तें  (Ladli Behna Yojana july 26th Installment)जारी की जाएंगी. वो कैसे? दरअसल, अगस्त में रक्षाबंधन के त्यौहार को देखते हुए मोहन सरकार जुलाई महीने में ही शगुन के तौर पर 250 रुपये की राशि जारी करने जा रही है. यानी महिलाओं को न सिर्फ 1250 रुपये मिलेंगे बल्कि 250 रुपये की अतिरिक्त राशि भी जारी की जाएगी. ऐसे में इस बार महिलाओं के खातों में कुल 1500 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे. बता दें कि करीब 1.27 करोड़ महिलाओं को 250 रुपये की राशि अलग से दी जाएगी. कब जारी की जाएगी लाड़ली बहना की 26वीं किस्त मिली जानकारी के मुताबिक, जुलाई के लिए लाडली बहना की 26वीं किस्त 10-15 जुलाई के बीच कभी भी जारी हो सकती है. हालांकि, एमपी सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है. अब आप भी सोच रहे होंगे कि रक्षाबंधन की किस्त जुलाई में ही क्यों जारी की जा रही है? दरअसल, रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त को पड़ रहा है, इसलिए योजना की किस्त आमतौर पर 10-15 तारीख के बीच ट्रांसफर की जाती है. इस दौरान महिलाओं को रक्षाबंधन से पहले या त्योहार के दिन अतिरिक्त राशि का लाभ नहीं मिल पाता है, जिसके कारण लाडली बहना की अतिरिक्त राशि जुलाई में ही जारी की जाएगी. कब से मिलेंगे 1500 रुपए इस साल लाडली बहना योजना के तहत महिलाओं को बहुत फायदा होने वाला है. सबसे पहले तो जुलाई में उनके खाते में 1500 रुपए की बढ़ी हुई राशि ट्रांसफर की जाएगी. दूसरा, दिवाली से हर महीने ये तय राशि महिलाओं के खाते में ट्रांसफर की जाएगी. यानि दिवाली से हर महीने महिलाओं के खाते में 1500 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे, जिसे साल 2028 तक बढ़ाकर 3000 रुपए किए जाने का अनुमान है. अब इस साल ही अगस्त और सितंबर के महीने में 1250 रुपए की राशि बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी. लाडली बहना योजना का नया रजिस्ट्रेशन कब से शुरू होगा? योजना से जुड़ा एक सवाल जो प्रदेश की हर बहन जानना चाहती है वो ये कि लाडली बहना योजना का नया रजिस्ट्रेशन कब शुरू होगा? आपको बता दें कि एमपी सरकार की तरफ से इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है. लाडली बहना योजना रजिस्ट्रेशन पोर्टल 2023 यानी करीब डेढ़ से दो साल से बंद है. ऐसे में वो महिलाएं जो इन सालों में योजना की पात्र हो गई हैं या फिर रजिस्ट्रेशन से चूक गई हैं, उन्हें लाडली बहना योजना का नया रजिस्ट्रेशन पोर्टल खुलने का बेसब्री से इंतजार है.  खाते में पैसा आने में हो सकती है देरी मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना की 26वीं किस्त के पैसों के लिए 1.27 करोड़ महिलाओं को थोड़ा ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है। आमतौर पर सरकार की ओर से 10 से 15 तारीख के बीच 1250 रुपये की राशि महिलाओं के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। मगर संभावना जताई जा रही है कि इस महीने जुलाई की किस्त में थोड़ी देरी हो सकती है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं के खाते में हर महीने 1250 रुपये की राशि दी जाती है। अभी करीब 1.27 करोड़ महिलाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव यह भी ऐलान कर चुके हैं कि दिवाली से महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जाएंगे और 2028 तक इसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 3000 रुपये महीना कर दिया जाएगा। ऐसी जानकारी मिल रही है कि जुलाई महीने की किस्त की तारीख में इस बार थोड़ा फेरबदल हो सकता है। क्या है वजह दरअसल अगले महीने रक्षा बंधन है और मुख्यमंत्री मोहन यादव ऐलान कर चुके हैं कि इस मौके पर लाडली बहनों को 250 रुपये की अतिरिक्त राशि दी जाएगी। रक्षा बंधन 9 अगस्त को है, ऐसे में इस अतिरिक्त राशि को जुलाई में ही खाते में भेजने की तैयारी चल रही है। जानकारी मिल रही है कि रक्षा बंधन का 'शगुन' देने की वजह से इस बार थोड़ी देरी हो सकती है। यह भी माना जा रहा है कि जुलाई में एक साथ खाते में 1500 रुपये नहीं आएंगे बल्कि 1250 रुपये और 250 रुपये की दो किस्तों में पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। रक्षा बंधन की वजह से जुलाइ महीने की किस्त की तारीख थोड़ा आगे बढ़ सकती है। हालांकि अभी तक इस बारे में कोई भी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अप्रैल से बदल गई थी तारीख लाडली बहना योजना का पैसा पहले 7 से 10 तारीख के बीच आता था, लेकिन फंड की कमी से निपटने और केंद्र से मिलने वाली मदद के इस्तेमाल के लिए अप्रैल से इस तारीख को आगे बढ़ाकर 10 से 15 तारीख कर दिया गया। केंद्र सरकार हर महीने की 10 तारीख को टैक्स डेवोल्यूशन का पैसा आता है। ऐसे में सरकार इस फंड का इस्तेमाल कर लाडली बहना योजना की लाभार्थियों के खाते में पैसा भेज रही है। अप्रैल में सीएम मोहन यादव ने 16 तारीख को महिलाओं के खाते में पैसा ट्रांसफर किया था। जबकि अगले महीने 15 मई को लाभार्थी महिलाओं को पैसा मिल गया था। जून में 13 तारीख को पैसा मिलना था, लेकिन विमान हादसे की वजह से इसे टालकर 16 जून कर दिया गया था। जुलाई में मिलेंगे 1500 रुपये जुलाई महीने में महिलाओं को 1250 नहीं बल्कि 1500 रुपये मिलेंगे। 250 रुपये रक्षा बंधन का शगुन इसमें शामिल है। हालांकि अगले दो महीने खाते में 1250 रुपये ही आएंगे। अक्टूबर से हर महीने 1500 रुपये देने का ऐलान सरकार की ओर से किया जा चुका है।

X-गार्ड जैमिंग डिकॉय के जरिए भारत ने कैसे पाकिस्तान को बनाया मूर्ख …US फाइटर पायलट का खुलासा

नई दिल्ली भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को ऐसा चकमा दिया कि उसकी सारी पोल खुल गई. इस ऑपरेशन ने भारतीय वायुसेना (IAF) की उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare – EW) रणनीतियों को दुनिया के सामने ला दिया. पूर्व अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल और F-16 थंडरबर्ड पायलट रयान बोडेनहाइमर ने IAF की रणनीतियों को "अब तक का सबसे बेहतरीन स्पूफिंग और डिसेप्शन" (भ्रम और धोखा) बताया. उन्होंने इस सफलता का श्रेय राफेल जेट के X-गार्ड जैमिंग डिकॉय और SPECTRA EW सूट को दिया, जिसने पाक की PL-15E मिसाइलों को धोखा दिया. ऑपरेशन सिंदूर ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को शुरू हुआ, जब भारतीय वायुसेना ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब दिया, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे. इस ऑपरेशन में IAF ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. राफेल, सुखोई Su-30 MKI और मिराज 2000 जेट्स ने SCALP क्रूज मिसाइलों और स्पाइस-2000 बमों का उपयोग कर सटीक हमले किए, बिना भारतीय हवाई क्षेत्र छोड़े. पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने पांच भारतीय जेट्स, जिनमें तीन राफेल शामिल थे, को मार गिराया. लेकिन भारतीय सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ये नष्ट हुए डिकॉय (X-गार्ड) थे, न कि असली राफेल जेट्स. इस ऑपरेशन में IAF की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों ने पाकिस्तान वायुसेना (PAF) को पूरी तरह भ्रमित कर दिया. X-गार्ड जैमिंग डिकॉय: तकनीकी जानकारी X-गार्ड एक इजरायली निर्मित फाइबर-ऑप्टिक टोड डिकॉय (towed decoy) है, जिसे राफेल जेट्स के SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सूट के साथ एकीकृत किया गया है. यह 30 किलोग्राम का उपकरण राफेल जेट के पीछे तार द्वारा खींचा जाता है. दुश्मन के रडार और मिसाइलों को धोखा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है. 360 डिग्री जैमिंग सिग्नल: X-गार्ड 360 डिग्री के दायरे में जैमिंग सिग्नल भेजता है, जो दुश्मन के रडार और मिसाइलों के एक्टिव सीकर्स को भ्रमित करता है. यह रडार सिग्नेचर को नकली बनाता है, जिससे ऐसा लगता है कि यह एक असली जेट है. AI-संचालित तकनीक: X-गार्ड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग होता है, जो रडार सिग्नल के डॉप्लर शिफ्ट (Doppler Shift) और सिग्नेचर की कॉपी करता है.  यह दुश्मन के रडार को भ्रमित करने के लिए रीयल-टाइम में सिग्नल को बदलता रहता है, जिससे मिसाइलें असली जेट के बजाय डिकॉय को निशाना बनाती हैं. डिजिटल रेडियो फ्रीक्वेंसी मेमोरी (DRFM): X-गार्ड डिजिटल रेडियो फ्रीक्वेंसी मेमोरी (DRFM) तकनीक का उपयोग करता है, जो दुश्मन के रडार सिग्नल को रिकॉर्ड और हेरफेर करता है. यह झूठे लक्ष्य (false targets) बनाता है, जिससे दुश्मन का रडार और मिसाइल सिस्टम गलत दिशा में भटक जाते हैं. एंटी-मिसाइल सुरक्षा: X-गार्ड हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (जैसे PL-15E) और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (SAMs) दोनों से रक्षा करता है. यह राफेल को मिसाइलों के नो-एस्केप ज़ोन (जहां मिसाइल से बचना मुश्किल होता है) से बाहर रखता है. वज़न और डिज़ाइन: X-गार्ड का वज़न केवल 30 किलोग्राम है, जिससे यह हल्का और प्रभावी है. इसे फाइबर-ऑप्टिक केबल के माध्यम से जेट से जोड़ा जाता है, जो इसे तेज़ गति पर भी स्थिर रखता है. SPECTRA EW सूट: राफेल की रक्षा प्रणाली राफेल जेट का SPECTRA (Système de Protection et d’Évitement des Conduites de Tir du Rafale) इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सूट इसकी सबसे बड़ी ताकत है. यह थेल्स और MBDA द्वारा विकसित एक प्रणाली है, जो राफेल को दुश्मन के रडार और मिसाइलों से बचाने के लिए डिज़ाइन की गई है. इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं… थ्रेट डिटेक्शन: SPECTRA में एक्टिव और पैसिव सेंसर होते हैं, जो 360 डिग्री में रडार और मिसाइल सिग्नल का पता लगाते हैं. यह लो प्रोबेबिलिटी ऑफ इंटरसेप्ट (LPI) रडार डिटेक्शन का उपयोग करता है, जिससे दुश्मन को इसका पता लगाना मुश्किल होता है. जैमिंग और काउंटरमेज़र्स: SPECTRA दुश्मन के रडार और मिसाइलों को भ्रमित करने के लिए चैफ, फ्लेयर्स और डायरेक्टेड जैमिंग का उपयोग करता है. यह एडवांस एल्गोरिदम के साथ रडार सिग्नल को विश्लेषण करता है और तुरंत काउंटरमेज़र्स लागू करता है. एडवांस्ड रडार: SPECTRA राफेल के RBE2-AA एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार के साथ मिलकर काम करता है, जो 145 किमी की दूरी पर 40 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है. डेटा लिंक और नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध: SPECTRA राफेल को अन्य जेट्स, AWACS (Airborne Warning and Control System) और ग्राउंड स्टेशनों के साथ रीयल-टाइम डेटा साझा करने की अनुमति देता है, जिससे समन्वित हमले संभव होते हैं.  ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय रणनीति ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने कई उन्नत रणनीतियों का उपयोग किया, जो इसकी सफलता का कारण बनीं.  मल्टी-स्पेक्ट्रम इलेक्ट्रॉनिक युद्ध: IAF ने DRFM जैमिंग, GPS स्पूफिंग और रडार क्रॉस-सेक्शन मैनिपुलेशन का उपयोग किया. इससे पाकिस्तानी रडार और मिसाइल सिस्टम की सेंसर फ्यूजन और टारगेटिंग एल्गोरिदम बाधित हो गए. राफेल और Su-30 MKI जेट्स ने EL/M-8222 जैमिंग पॉड्स और तरंग रडार वॉर्निंग रिसीवर का उपयोग किया, जिसने PL-15E मिसाइलों के डेटा लिंक और AESA सीकर्स को बाधित किया. X-गार्ड डिकॉय की भूमिका: X-गार्ड ने नकली रडार सिग्नेचर बनाकर पाकिस्तानी J-10C और JF-17 जेट्स को भ्रमित किया. पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने राफेल जेट्स को मार गिराया, लेकिन भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सूत्रों ने पुष्टि की कि ये X-गार्ड डिकॉय थे. X-गार्ड ने PL-15E मिसाइलों के एक्टिव सीकर्स को गलत लक्ष्य की ओर मोड़ दिया, जिससे मिसाइलें असली जेट्स के बजाय डिकॉय को निशाना बनाती रहीं. लंबी दूरी की सटीक हमले: राफेल जेट्स ने SCALP क्रूज मिसाइलों (450 किमी रेंज) और HAMMER बमों (70 किमी रेंज) का उपयोग किया, जो स्टील्थ और जैम-प्रतिरोधी हैं. ये हथियार भारतीय हवाई क्षेत्र से लॉन्च किए गए, जिससे पायलटों और जेट्स को जोखिम कम हुआ. S-400 और आकाश सिस्टम: भारत की S-400 और आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों ने पाकिस्तानी जेट्स को भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसने से रोका. इन प्रणालियों ने पाकिस्तानी J-10C और JF-17 जेट्स को लंबी दूरी से ही मिसाइलें दागने के लिए मजबूर किया, जिससे उनकी सटीकता कम हो गई. पाकिस्तान की PL-15E मिसाइल और उसकी विफलता पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी J-10C और JF-17 ब्लॉक III जेट्स से PL-15E मिसाइलों का उपयोग किया, जो चीन की … Read more

हीरा उगलने वाली छतरपुर की धरती में अब एक और खनिज का विशाल भंडार मिला, मध्य प्रदेश की किस्मत चमक जाएगी

छतरपुर   प्राकृतिक संसाधनों से मध्य प्रदेश की झोली जल्द ही भरने जा रही है. केन्द्र सरकार की मदद से मध्यप्रदेश को कोलबेड मीथेन की खोज में बड़ी सफलता हाथ लगी है. छतरपुर व दमोह जिले के इलाके में प्राकृतिक गैस के लिए कोलबेड मीथेन का बड़ा भंडार मिला है. छतरपुर और दमोह जिले के इस 462 वर्ग किलोमीटर एरिया में जल्द ही खनन की तैयारी की जा रही है. ONGC को खनन की जिम्मेदारी मिली खनन का काम देश की नवरत्न कंपनियों में शामिल ओएनजीसी यानी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन द्वारा किया जाएगा. इसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. अधिकारियों के मुताबिक खनन के लिए ओएनजीसी को प्रोविनजल लीज आवंटित कर दी गई है. कोल बेड मीथेन का मध्य प्रदेश बड़ा उत्पादक मध्यप्रदेश में प्राकृतिक गैस के भंडार के कई बड़े संभावित क्षेत्रों को लेकर लंबे समय से खोज चल रही है. कोलबेड मीथेन का मध्य प्रदेश बड़ा उत्पादक रहा है. देश का 40 फीसदी कोलबेड मीथेन का उत्पादक मध्यप्रदेश है. मध्य प्रदेश में अभी यह 40 फीसदी की पूति सिर्फ सोहागपुर के दो ब्लॉक ईस्ट और वेस्ट से ही हो रही है. इन स्थानों पर रिलायंस कंपनी के 300 कुएं हैं, जिससे गैस निकाली जा रही है. छतरपुर और दमोह करेगा मध्य प्रदेश की जरूरत पूरी रिलायंस की सब्सिडियरी कंपनी रिलायंस गैस पाइपलाइन लिमिटेड यहां से उत्तर प्रदेश के फूलपुर तक 302 किलोमीटर की एक पाइपलाइन भी ऑपरेट करती है. अभी इन कुओं से 234.37 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर सीबीएम का उत्पादन हो रहा है. मध्यप्रदेश के छतरपुर और दमोह में कोल बेडमीथेन के उत्पादन के बाद मध्यप्रदेश बड़े स्तर पर इसकी जरूरत को पूरा करेगा. विन्ध्य, सतपुडा के अलावा नर्मदा वैली में संभावनाएं मध्यप्रदेश के विन्ध्य, सतपुडा के अलावा नर्मदा वैली में पेट्रोलियन और प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार की संभावनाएं जताई जा रही हैं. 2017 में हाइड्रोकार्बन रिसोर्स असिस्मेंट की एक स्टडी भी हुई थी, जिसमें संभावना जताई गई थी कि इन क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस के भंडार मौजूद है. अनुमान है कि इन क्षेत्रों में 5 लाख 55 हजार 254 मिलियन टन हाइड्रोकार्बन का भंडार मौजूद है. हालांकि अब खोज के बाद छतरपुर-दमोह में खनन की तैयारियां शुरू की जा रही हैं. खनिज संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव के मुताबिक "इसको लेकर केन्द्र से अनुमतियां मिल गई हैं और इसके तहत प्रोविजनल लीज दी गई है. कुछ और प्रोसेस बची है, इसे भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा." शहडोल व उमरिया जिले में भी ओनजीसी को लाइसेंस मध्यप्रदेश के छतरपुर-दमोह के अलावा शहडोल, उमरिया जिले में में पेट्रोलियम एक्सप्लोर करने के लिए ओएनजीसी को पहले ही लाइसेंस दिया गया है. इसके अलावा बैतूल, छिंदवाड़ा, नर्मदापुर में भी एनवेनियर पेट्रोडाउन लिमिटेड को पेट्रोलियन एक्सप्लोरेशन लाइसेंस दिया गया है. इन दोनों ही स्थानों पर काम भी शुरू हो गया है. इन दोनों स्थानों पर अगले 20 सालों में एक्सप्लोरेशन पर करीबन साढे 8 हजार करोड़ रुपए खर्च होगा. क्या है कोलबेड मीथेन गैस, किस काम आती है गौरतलब है कि कोलबेड मीथेन अपरंपरागत गैस का बड़ा स्रोत है. कोलबेड मीथेन कोयले की चट्टानों में पाई जाती है. इसे चट्टानों में ड्रिल करके निकाला जाता है. इसके लिए चट्टानों के नीचे ग्रिल करके भूमिगत जल को हटाकर इकट्ठा किया जाता है. कोयला भंडार के मामले में भारत दुनिया में पांचवें स्थान पर है.  हीरा उगलने वाली छतरपुर की धरती में अब एक और खनिज का विशाल भंडार मिला छतरपुर जिले के बक्सवाहा के जंगलों में एशिया का सबसे अच्छा हीरा पाया गया. इसके बाद यहां हीरा निकालने के लिए सरकार ने पूरी तैयारियां कर ली हैं. इसी जंगल में अब फॉस्फेट की चट्टानें मिली हैं. इन चट्टानों में बहुतायात में फॉस्फोराइट खनिज है. फिलहाल 57 लाख मीट्रिक टन रॉक फॉस्फेट के भंडार का पता चला है. हीरा के बाद इस खनिज के मिलने के बाद छतरपुर जिला मध्य प्रदेश में नंबर 1 पर पहुंच जाएगा. खाद बनाने के लिए फॉस्फोराइट का इस्तेमाल बता दें कि उर्वरक बनाने के लिए फॉस्फोराइट महत्वपूर्ण कच्चा माल माना जाता. खासकर, डीएपी खाद बनाने के लिए इसका उपयोग होता है. इस खोज से न केवल छतरपुर जिले का विकास होगा, बल्कि आने वाले दिनों में किसानों को खाद की उपलब्धता और उसकी कीमत में भी राहत मिलने की संभावना है. रॉक फॉस्फेट के भंडार की खोज के बाद सरकार ने खनन की अनुमति दे दी है. जल्द ही इस पर काम शुरू होने की उम्मीद है. इससे पहले बक्सवाहा में हीरा भी प्रचुर मात्रा में मिला गौरतलब है कि छतरपुर जिले में खनिज सम्पदा का भंडार है. बक्सवाहा इलाके में हीरा खदानें शुरू होने जा रही हैं. अब रॉक फॉस्फेट का अकूत भंडार मिलने से छतरपुर ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश में रोजगार के नए अवसर बनेंगे. मध्य प्रदेश सरकार का खजाना छतरपुर की खनिज संपदा भर देगी. छतरपुर जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर दूर बड़ामलहरा अनुविभाग के बकस्वाहा तहसील इलाके के सूरजपुरा में फॉस्फोराइट पत्थर की खोज हुई है.  बक्सवाहा के सूरजपुरा में सरकार ने दी खनन की मंजूरी भू-वैज्ञानिकों ने सर्वेक्षण में जिले के सूरजपुरा व इससे लगे पल्दा, सगौरिया, गरदौनियां में 1070 हेक्टेयर में फॉस्फोराइट का विशाल भंडार पाया है. अब इस भंडार पर हाल ही में केंद्र सरकार ने खनन की मंजूरी दे दी है. इससे यहां उद्योग स्थापित होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं. केंद्र सरकार के खनन मंत्रालय ने इस क्षेत्र में खनन कार्य के लिए लीज स्वीकृत कर दी है. यह लीज सनफ्लैग आयरन एंड स्टील कंपनी को दी गई है. इस कंपनी को आगामी 3 साल तक खनन करने की अनुमति दी गई है.  क्या होता है फॉस्फोराइट महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भूगर्भ विभाग में पदस्थ एचओडी डॉ. पीके जैन ने बताया "फॉस्फोराइट एक मिनरल होता है, जिसका स्रोत रॉक फॉस्फेट चट्टान होती है. इसी रॉक फॉस्फेट चट्टान में फॉस्फोराइट मिनरल डिपॉजिट होते हैं. छतरपुर जिले के बक्सवाहा के आसपास के गांव में इस खनिज तत्व के खोज की पुष्टि हुई है. बकस्वाहा तहसील के सूरजपुरा और आसपास के गांवों में फॉस्फोराइट खनिज तत्व डिपोजिट हैं. यह एक सेडिमेंट्री रॉक (अवसादी चट्टान) हैं और फॉस्फोराइट इसका प्रमुख स्रोत माना जाता है.  फास्फोराइट का कैसे होता है उपयोग छतरपुर … Read more

स्टील्थ विमान जितनी बड़ी ताकत, उतनी गोपनीय तकनीक, स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बना रहा भारत

तिरुवनंतपुरम  दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में से एक ब्रिटिश रॉयल नेवी का F-35B 14 जून को तिरुवनंतपुरम में इमरजेंसी लैंडिंग करने के लिए मजबूर हो गया। इससे एक अनोखी स्थिति पैदा हो गई। यह घटना वैश्विक सैन्य तकनीक के समीकरणों को बदल सकती है। अब, लगभग तीन हफ्ते बाद ब्रिटेन की इंजीनियरिंग टीम एयर इंडिया के एमआरओ (Maintenance, Repair and Overhaul-MRO) हैंगर में मरम्मत का काम शुरू कर रही है। इस काम में इस विमान की अमेरिकी निर्माता कंपनी के इंजीनियर भी योगदान देने के लिए तिरुवनंतपुरम पहुंचे हैं। अमेरिकी और ब्रिटिश विशेषज्ञों की यह एक नई श्रृंखला है। ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स का एयरबस ए400ओम एटलस इन्हें उतारकर तुरंत लौट चुका है। इससे पहले कितने ही इंजीनयर आए और विमान को उड़ने लायक बनाने में नाकाम होकर अपने-अपने देश लौट गए। भारत शुरू से चाहता था कि इस फाइटर जेट को मेंटेनेंस हैंगर में ले जाकर आराम से मरम्मत की कोशिश की जाए। लेकिन, अभी तक ब्रिटिश नेवी ऐसा नहीं करने के लिए अड़ी हुई थी। लेकिन, आखिरकार उन्हें भारत की बात मानने के लिए मजबूर होना पड़ गया। बहरहाल,इस वजह से भारत एक दुर्लभ तकनीकी परिस्थितियों के बीच खड़ा है। स्टील्थ फाइटर जेट की दुर्लभ खराबी और तकनीकी अवसर F-35B में आई अचानक तकनीकी खराबी ब्रिटेन और अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। लेकिन भारत के लिए यह एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है। यह विमान 110 मिलियन डॉलर से अधिक का है। इसे कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है। यह तब भी देखने को मिला, जब एयरपोर्ट के वीआईपी पार्किंग से इसे एमआरओ हैंगर में खींचकर ले जाया जा रहा था। अब यह अत्याधुनिक अमेरिकी लड़ाकू विमान भारतीय MRO तकनीशियनों और ग्राउंड टीमों की नजरों के सामने है। भले ही जानबूझकर ऐसा न किया जाए, लेकिन संयोग से ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं कि इस स्टील्थ जेट की बनावट, कूलिंग सिस्टम, कोटिंग तकनीक और सेंसर अलाइनमेंट को देखकर भारतीय इंजीनियरों को भी बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है। उन्हें अत्याधुनिक अमेरिकी स्टील्थ टेक्नोलॉजी के बारे में नई जानकारियां मिल सकती हैं। स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बना रहा भारत यह भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भारत अपना पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) बना रहा है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) वर्षों से स्टील्थ तकनीक पर काम कर रहा है। लेकिन, असली जानकारी और तुलनात्मक डिजाइनिंग के लिए प्रोटोटाइप की कमी के कारण काम में मुश्किलें आती हैं। भारत में F-35B की मौजूदगी से यह देखने को मिलेगा कि एक असली स्टील्थ जेट की तकनीक अंदर से कैसी होती है, उसकी मरम्मत कैसे होती है, और उसे कैसे सर्विस किया जाता है। स्टील्थ विमान जितनी बड़ी ताकत, उतनी गोपनीय तकनीक F-35B कोई साधारण लड़ाकू विमान नहीं है। इसे लॉकहीड मार्टिन जैसी अमेरिकी कंपनी ने बनाया है। इसे नाटो (NATO) के कई देश इस्तेमाल करते हैं। यह रडार से बचने वाली स्टील्थ तकनीक, सुपरसोनिक गति और आधुनिक सेंसरों वाली अत्याधुनिक लड़ाकू मशीन है। ब्रिटिश रॉयल नेवी की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली इसकी वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग (VTOL) क्षमता इसे और भी खास बनाती है। इसकी मरम्मत और समस्या का समाधान बहुत सावधानी से किया जाता है। इसलिए अभी तक बड़े-बड़े इंजीनियर इसे ठीक करने में नाकाम रहे हैं और न ही इसे किसी बड़े विमान से उठाकर ले जाने में सक्षम हो पाए हैं। अमेरिका और यूके के इंजीनियरों को क्यों डालने पड़े'हथियार' पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई F-35B किसी दूसरे देश में हफ्तों तक मरम्मत के लिए बेबस फंसा रहा हो। आमतौर पर, ऐसे विमानों की मरम्मत तुरंत कड़ी सुरक्षा में की जाती है या उन्हें सुरक्षित बेस पर ले जाया जाता है। भारत में, एक कमर्शियल MRO सुविधा में मरम्मत करने के लिए तैयार होने का फैसला एक बड़ा बदलाव है। यह दिखाता है कि यूके और अमेरिका के पास कोई और विकल्प नहीं था। F-35B केस भारत के लिए तकनीकी और कूटनीतिक जीत भारत ने अबतक इस स्थिति को बहुत ही समझदारी से संभाला है। इससे पता चलता है कि भारत का वैश्विक स्तर पर कितना प्रभाव बढ़ गया है। भारत ने इस विमान के बारे में कोई शोर नहीं मचाया। भारतीय अधिकारियों ने ब्रिटिश इंजीनियरों को बिना किसी परेशानी के काम करने दिया और हर संभव सहयोग किया है। यूके ने भारत को 'निरंतर समर्थन और सहयोग' के लिए धन्यवाद भी दिया है। इस सद्भावना से भारत और यूके के बीच रक्षा सहयोग और बढ़ सकता है। इससे पता चलता है कि भारत के तकनीकी ढांचे और काम करने के तरीके पर भरोसा किया जा सकता है। इससे भविष्य में रक्षा उत्पादन और विमान रखरखाव में संयुक्त उद्यम स्थापित किए जा सकते हैं। अनजाने में ही सही, लेकिन तकनीक के क्षेत्र में बेहतर मौका हालांकि, भारत को इस फाइटर जेट के सिस्टम तक पूरी पहुंच नहीं मिलेगी, और ब्रिटेन संवेदनशील चीजों को बचाने के लिए पूरी सावधानी बरतेगा, लेकिन आसपास काम करने वाले भारतीय इंजीनियरों को जेट के निर्माण, थर्मल शील्डिंग, रडार-एब्सॉर्बिंग मटेरियल या सेंसर लेआउट के बारे में कुछ जानकारी मिल सकती है। DRDO के वैज्ञानिकों और HAL (Hindustan Aeronautics Limited) जैसी एयरोस्पेस कंपनियों के लिए, यह घटना उनके रिसर्च या सिमुलेशन के आधार पर बनाए गए विचारों को सही साबित कर सकती है। कम से कम जानकारी मिलने से भी भारत के स्टील्थ जेट की डिजाइन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। खासकर मटेरियल इंजीनियरिंग, वजन का संतुलन, इंजन कूलिंग और एयरफ्रेम रखरखाव के बारे में जानकारी मिल सकती है। "F-35B की आपातकालीन लैंडिंग और इसके बाद हुई मरम्मत से भारत को मिलने वाले तकनीकी लाभों और भविष्य की रक्षा क्षमताओं पर आपकी क्या राय है? क्या यह घटना भारत के लिए वाकई एक सुनहरा अवसर है, या इसके सीमित लाभ ही हैं? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएँ! लॉग इन करें और अपनी प्रतिक्रिया हिंदी या अंग्रेज़ी में साझा करें।

ओला, उबर 8 साल से अधिक पुरानी गाड़ियां नहीं चला सकेंगे, केंद्र ने कैब एग्रीगेटर्स के लिए वाहन की उम्र सीमा तय कर दी

नई दिल्ली सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ओला, उबर और रैपिडो जैसे एग्रीगेटर द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले वाहनों की आयु सीमा को बढ़ाकर आठ वर्ष कर दिया है, जो पहले शून्य थी। मंत्रालय ने मंगलवार को मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश, 2025 जारी किए । नए दिशा-निर्देशों में न केवल कैब एग्रीगेटर्स को आठ साल से ज़्यादा पुराने वाहनों को इस्तेमाल करने से रोका गया है, बल्कि उन्हें उन वाहनों का पंजीकरण रद्द करने के लिए भी कहा गया है जो इस सीमा से ज़्यादा पुराने हैं। अनुशंसित कहानियाँ मंत्रालय ने कहा, "कोई भी एग्रीगेटर ऐसे वाहनों को अपने प्लेटफॉर्म पर नहीं लाएगा जो वाहन के प्रारंभिक पंजीकरण की तारीख से आठ वर्ष से अधिक समय से पंजीकृत हैं और उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके द्वारा अपने प्लेटफॉर्म पर लाए गए सभी वाहनों को अपने प्लेटफॉर्म पर लाए जाने के बाद से आठ वर्ष से अधिक समय नहीं हुआ हो।" सरकार ने मोटरसाइकिल को छोड़कर सभी मोटर वाहनों के अंदर चालक लाइसेंस और मोटर वाहन परमिट की प्रति प्रदर्शित करना भी अनिवार्य कर दिया है। मंत्रालय ने कहा, "उक्त डिस्प्ले ड्राइवर के बगल वाली अगली सीट के पीछे की ओर इस तरह लगाया जाएगा कि मोटर वाहन में बैठे यात्रियों को यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे।" दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि एग्रीगेटर के ऐप पर ड्राइवर की स्पष्ट और उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीर प्रदर्शित होनी चाहिए। मंत्रालय ने यह अनिवार्य कर दिया है कि ड्राइवरों को एग्रीगेटर द्वारा मनोवैज्ञानिक विश्लेषण से गुजरना होगा, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि "वे सेवा में शामिल होने के लिए फिट हैं या नहीं।" इसकी व्याख्या करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि कैब सेवा प्रदाताओं को मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन के माध्यम से ड्राइवर के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का आकलन करने की आवश्यकता है। अधिकारी ने बताया, "यह काम एग्रीगेटर को करना होगा। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि क्या ड्राइवर मानसिक रूप से स्थिर है, भावनात्मक रूप से संतुलित है और ड्राइविंग और यात्रियों के साथ बातचीत के तनाव को संभालने के लिए फिट है।" ये बदलाव एग्रीगेटर वाहनों में सख्त मानकीकरण की ओर एक बदलाव को दर्शाते हैं। अब तक, इनका उल्लेख दिशानिर्देशों में नहीं किया गया था। वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले दिशानिर्देश 2020 के हैं जब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 93 के तहत "मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2020" जारी किए थे। दिशानिर्देशों में राज्य सरकारों को सड़क परिवहन क्षेत्र में लाइसेंस जारी करने और एग्रीगेटर्स को विनियमित करने के लिए एक नियामक ढांचा प्रदान किया गया। यात्रियों को इस फैसले से क्या फायदा?  अब ओला-उबर कैब्स में सफर कर रहे यात्रियों को पुरानी टैक्सियों की बजाय नई, सेफ और कंफर्टेबल गाड़ियां मिलेंगी. अक्सर पुरानी गाड़ियों में सेफ्टी के बेसिक फीचर्स नहीं होते हैं, जिससे यात्रियों को यह बड़ा फायदा होने वाला है. इसके अलावा प्रदूषण के लिहाज से देखा जाए तो पुरानी गाड़ियां ज्यादा धुआं छोड़ती हैं.  ऐसे में 8 साल की टाइम लिमिट होने पर सड़कों पर कम प्रदूषण वाली गाड़ियां चलेंगी.  ड्राइवर्स को होगा इतना बड़ा नुकसान सरकार के इस फैसले के बाद उन ड्राइवर्स को भी नुकसान होने वाला हैं, जिन्होंने अभी तक अपनी गाड़ियों की EMI नहीं भरी हैं. अगर गाड़ी को 8 साल बाद बंद किया जाएगा तो उनके लिए आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा. बिना सहायता योजना के कई ड्राइवर्स को मजबूरी के चलते अपनी टैक्सी भी बंद करनी पड़ सकती है. ओला और उबर का डेटा बताता है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर 20 फीसदी टैक्सियां 8 साल से ज्यादा पुरानी हैं. ऐसे में या तो इन गाड़ियों को रिप्लेस किया जाएगा, या फिर सिर्फ निजी उपयोग के लिए यूज करना पड़ेगा. ऐसे में अगर ड्राइवर्स को नई गाड़ियां लेनी हों तो इलेक्ट्रिक टैक्सी एक सस्ता विकल्प बन सकता है, जिससे EVs को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. कई राज्यों में इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी और टैक्स में भी छूट मिलती है.  मंत्रालय ने कहा, "अब, मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2020 को संशोधित किया गया है ताकि मोटर वाहन एग्रीगेटर पारिस्थितिकी तंत्र में विकास के साथ नियामक ढांचे को अद्यतन रखा जा सके। नए दिशानिर्देश (मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश, 2025) उपयोगकर्ता की सुरक्षा और चालक के कल्याण के मुद्दों पर ध्यान देते हुए एक हल्के-फुल्के नियामक प्रणाली प्रदान करने का प्रयास करते हैं।" किराया हिस्सेदारी अनुपात में कोई बदलाव नहीं, लेकिन भुगतान में देरी की सीमा तय सरकार ने ड्राइवरों और एग्रीगेटर्स के बीच मौजूदा किराया-साझाकरण अनुपात को बरकरार रखा है, लेकिन अब किराया निपटान के लिए समय सीमा निर्धारित कर दी है। संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, ड्राइवरों को – उनके वाहनों के साथ – कुल लागू किराए का कम से कम 80 प्रतिशत प्राप्त करना होगा, जिसमें ड्राइवर के हिस्से के अंतर्गत आने वाले सभी घटक शामिल हैं। शेष राशि एग्रीगेटर द्वारा विभाजित किराए के रूप में रखी जा सकती है। मंत्रालय ने कहा, "ड्राइवर और एग्रीगेटर के बीच समझौते के अनुसार भुगतान दैनिक, साप्ताहिक या पाक्षिक रूप से किया जा सकता है, लेकिन इससे अधिक नहीं।"

एलॉन मस्क ने वैभव तनेजा को थमाई पार्टी के खजाने की चाबी, पॉलिटिक्स भी कॉर्पोरेट स्टाइल में करेंगे

वाशिंगटन  टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की दुनिया में बड़ा नाम बन चुके और दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क अब अमेरिका की राजनीति में भी उसी कॉरपोरेट सोच के साथ कदम रख रहे हैं. हाल ही में मस्क ने अमेरिका पार्टी (America Party) नाम से एक नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा की, जिसका मकसद अमेरिका की दो-दलीय राजनीति को चुनौती देना है. इस पार्टी के एफईसी फॉर्म (रजिस्ट्रेशन दस्तावेज) में सबसे खास नाम सामने आया है भारतवंशी वैभव तनेजा का. इस वक्त तनेजा टेस्ला के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) हैं. उन्हें मस्क ने पार्टी का ट्रेजरार और कस्टोडियन ऑफ रिकॉर्ड नियुक्त किया है यानी पार्टी के खजाने की चाबी थमा दी है. यह कदम इस ओर इशारा करता है कि एलन मस्क पार्टी को कॉरपोरेट मैनेजमेंट के तरीके से चलाना चाहते हैं जहां पारदर्शिता, फाइनेंशियल डिसिप्लिन और प्रोफेशनल मैनेजमेंट को प्रायोरिटी दी जाती है. DU ग्रेजुएट वैभव तनेजा को थमा दी अपने खजाने की चाबी दुनियाभर में भारतवंशियों का डंका बज रहा है. दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों में बड़े पदों की कमान भारतवंशी संभाल रहे हैं. इसी कड़ी में दिल्ली यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट वैभव तनेजा पर एलन मस्क लगातार भरोसा जता रहे हैं. पहले मस्क ने वैभव को अपनी कंपनी टेस्ला के सीएफओ की जिम्मेदारी सौंपी और अब अपनी पार्टी का ट्रेजरार और कस्टोडियन ऑफ रिकॉर्ड बनाया है. भारत में टेस्ला के विस्तार की भी जिम्मेदारी भारत में टेस्ला के विस्तार और ऑपरेशन की जिम्मेदारी भी वैभव तनेजा के हाथ में है. तनेजा को जनवरी 2021 में टेस्ला की भारतीय इकाई टेस्ला इंजिया मोटर्स एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड का डायरेक्टर भी नियुक्त किया गया था. 2017 में टेस्ला में कर रहे काम वैभव तनेजा के लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में ग्रैजुएशन किया है. उन्होंने सीए की भी पढ़ाई की है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्राइवॉटरहाउसकूपर्स में बतौर असिस्टेंट मैनेजर ज्वाइन किया था. उनके पास अकाउंटिंग के क्षेत्र में 2 दशक से भी ज्यादा का अनुभव है. उन्होंने 2017 में टेस्ला ज्वाइन किया था. वैभव सोलरसिटी में वाइस प्रेसिडेंट के पद पर काम कर चुके हैं. टेस्ला ने 2016 में इस कंपनी का अधिग्रहण किया था.

इजरायली रक्षा कंपनी ने भारतीय वायुसेना को अपनी लेटेस्ट Sky Sting 6th जेनरेशन लॉंग रेंज एयर टू एयर मिसाइल की पेशकश की

तेल अवीव भारत के जिगरी दोस्त इजरायल ने छठी पीढ़ी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल का ऑफर भारत को दिया है। इजरायली रक्षा कंपनी रफायल (Rafael) एडवांस डिफेंस सिस्टम ने भारतीय वायुसेना को अपनी लेटेस्ट Sky Sting 6th जेनरेशन लॉंग रेंज एयर टू एयर मिसाइल की पेशकश की है। यह मिसाइल भारतीय Su-30MKI जैसे प्रमुख लड़ाकू विमानों में लगाया जा सकेगा।  इजरायली कंपनी रफायल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि यह प्रस्ताव भारतीय वायुसेना की BVR (बियॉन्ड विजुअल रेंज) युद्ध क्षमता को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक अहम कदम है। आधुनिक हवाई युद्ध के लिए डिजाइन की गई यह मिसाइल, तकनीकी श्रेष्ठता और रणनीतिक बढ़त प्रदान करने का दावा करती है। Sky Sting मिसाइल को एक तीन-चरणीय रॉकेट मोटर से एनर्जी मिलती है और इसकी मारक क्षमता 250 किलोमीटर है। यानि ये मिसाइल 250 किलोमीटर दूर किसी लड़ाकू विमान, सर्विंलास एयरक्राफ्ट या फ्यूल टैंकर एयरक्राफ्ट को चुटकी में मार गिरा सकती है। इस शानदार रेंज के साथ इजरायल का ये मिसाइल दुनिया की सबसे विनाशक मिसाइलों में शुमार हो गई है। चीन के पास पीएल-15 मिसाइल है, जिसका रेंज करीब 200 किलोमीटर है और वो छठी पीढ़ी की लड़ाकू मिसाइल भी नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने चीनी मिसाइल की कब्र खोद डाली थी। इजरायल की Sky Sting मिसाइल की क्षमता क्या है? लंबी दूरी पर लक्ष्यों को भेदने के लिए Sky Sting मिसाइल एयरोडायनामिक लिफ्ट और उच्च गतिशील ऊर्जा का इस्तेमाल करती है, जिसकी वजह से मिसाइल को ना सिर्फ काफी ज्यादा दूरी तक मारने की क्षमता मिलती है, बल्कि ये मिसाइल टारगेट को जवाबी हमले का भी मौका भी नहीं देती। इस मिसाइल में लगे एडवांस RF (रेडियो फ्रीक्वेंसी) सीकर को अत्याधुनिक Electronic Counter-Countermeasures (ECCM) तकनीक से लैस किया गया है, जो दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक जामिंग क्षमताओं को नाकाम करने के लिए डिजाइन किया गया है।  इसका मतलब है कि Sky Sting मिशन के 'एंडगेम' फेज में भी टारगेट को सटीकता से लॉक और नष्ट कर सकती है। यानि अगर दुश्मन के पास स्टील्थ फाइटर जेट है और अगर उसने मिसाइलों को जाम करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक युद्ध का जाल बुना है, फिर भी ये मिसाइल उस विमान को मार गिराएगा। यही क्षमता छठी पीढ़ी की लड़ाकू विमानों की है। यानि ये मिसाइल चीनी जे-35 मिसाइल के लिए काल बन जाएगी, अगर पाकिस्तान चीन से उसे खरीदता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत इजरायल के Sky Sting मिसाइल को Su-30MKI, मिराज-2000 और भविष्य के TEDBF (ट्विन-इंजन डेक-बेस्ड फाइटर) जैसे प्लेटफार्मों में शामिल कर अपनी हवाई वर्चस्व को काफी ज्यादा मजबूत बना सकता है। इसकी लंबी रेंज भारत को हवा से हवा में युद्ध से काफी पहले दुश्मन को निष्क्रिय करने की क्षमता देगी। इसके अलावा Sky Sting जैसे हथियार भारत को चीन और पाकिस्तान जैसे दो मोर्चों पर संभावित खतरों का जवाब देने में काफी ज्यादा शक्तिशाली बनाएंगे, खासकर स्टील्थ लड़ाकू विमानों से होने वाली लड़ाई के दौरान। आपको बता दें कि भारत और इजरायल के रक्षा संबंध पहले से ही गहरे हैं। रफायल कंपनी से भारत पहले से ही Barak-8 एयर डिफेंस सिस्टम और Spike एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल खरीद चुका है। ऐसे में Sky Sting मिसाइल को लेकर अगर कोई सौदा हो तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। आने वाले समय में यदि यह सौदा आगे बढ़ता है तो यह भारतीय वायुसेना को न सिर्फ BVR युद्ध में बढ़त देगा, बल्कि देश की रक्षा आत्मनिर्भरता और स्वायत्तता को भी मजबूत करेगा।  

9 जुलाई को बैंक कर्मचारी करेंगे हड़ताल, बीमाकर्मी भी शामिल होंगे

कोलकाता  ट्रेड यूनियनों का कहना है कि देशभर में मजदूरों के अधिकारों पर हमले हो रहे हैं। साथ ही केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियां भी ठीक नहीं है। इनके खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने आगामी नौ जुलाई को आम हड़ताल का आह्वान किया है। इसके समर्थन में मजदूर संगठनों, किसान संगठनों और महागठबंधन के घटक दल भी सामने आ रहे हैं। अब बैंक कर्मचारियों के एक संगठन ने भी कहा है कि वे इस हड़ताल में शामिल होंगे। यदि ऐसा हुआ तो आगामी बुधवार को आपको बैंकिंग सुविधाओं से वंचित रहना पड़ सकता है। कहां से आई जानकारी बंगाल प्रोविंशियल बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (Bengal Provincial Bank Employees Association), जो AIBEA से जुड़ा है, ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि AIBEA, AIBOA और BEFI जैसे बैंकिंग सेक्टर के ट्रेड यूनियनों ने बुधवार को आम हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है। बीमा क्षेत्र में भी हड़ताल? एसोसिएशन ने एक बयान में यह भी कहा कि बीमा क्षेत्र (insurance sector) ने भी हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है। संगठन के अनुसार, बैंकिंग और अन्य वित्तीय क्षेत्रों में हड़ताल पूरी तरह से सफल रहेगी। हड़ताल पर 15 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी बैंक कर्मचारियों के यूनियन ने दावा किया है कि इस हड़ताल में 15 करोड़ से ज़्यादा कर्मचारी भाग लेंगे। वे सरकार की "प्रो-कॉर्पोरेट आर्थिक सुधारों और एंटी-लेबर नीतियों" का विरोध करेंगे। इसका मतलब है कि कर्मचारी सरकार की उन नीतियों से नाराज़ हैं जो कंपनियों को फायदा पहुंचाती हैं और श्रमिकों के खिलाफ हैं। कर्मचारी सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं।

लुधियाना इंटरैक्टिव सेशन में मिले 15,606 करोड़ के निवेश प्रस्ताव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

20 हजार से अधिक रोजगार का होगा सृजन लुधियाना और पंजाब के निवेशकों को मध्यप्रदेश में किया आमंत्रित मध्यप्रदेश में निवेश करें और विकसित भारत के निर्माण में बने भागीदार पंजाब और मध्यप्रदेश मिलकर करेंगे देश का विकास श्रमिकों के हित में मध्यप्रदेश सरकार ने बड़े स्तर पर लंबित सेटलमेंट किये क्लियर निवेशकों को राज्य की औद्योगिक नीतियों से कराया अवगत इंटरैक्टिव सेशन और संवाद-सत्र में 400 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल वन-टू-वन चर्चा में 15 से अधिक उद्योगपतियों से किया संवाद निवेशकों ने म.प्र. के विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई निवेश के प्रति रूचि   भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश का आर्थिक तंत्र मजबूत हुआ है। देश में औद्योगीकरण बढ़ा है, अब हम विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं। लुधियाना भारत का मैन्चेस्टर है। यहां के उद्योगपतियों ने बड़ी मेहनत से अपनी पहचान बनाई है। लुधियाना में निर्मित ए-वन और हीरो साइकिल्स देश-दुनिया में मशहूर हैं। पंजाब के निवेशक देश की आर्थिक समृद्धि में योगदान देने वाले प्रमुख ध्वजवाहक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज लुधियाना में हुये इंटरैक्टिव सेशन, वन-टू-वन चर्चा और संवाद सत्रों में यहां के उद्योगपतियों से 15 हजार 606 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुये हैं, जिससे 20 हजार से अधिक रोजगार का सृजन होगा। हमने लुधियाना और पंजाब के उद्योपतियोंत को मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने के लिये आमंत्रित किया। साथ ही उन्हें मध्यप्रदेश में उपलब्ध संसाधनों के साथ राज्य की औद्योगिक नीतियों से भी अवगत कराया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को पंजाब की उद्योग नगरी लुधियाना में मध्यप्रदेश में निहित निवेश की संभावनाओं के संबंध में निवेशकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का एकमात्र प्रदेश है, जहां पन्ना जिले में हीरा तो शहडोल में आयरन डिपाजिस्ट्स है। बीते दिनों सिंगरौली जिले में सोने की खदानें भी मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी निवेशकों को मध्यप्रदेश की रत्नगर्भा भूमि में निवेश करने के लिए आत्मीयता से आमंत्रित करते हुए कहा कि यहां व्यापार की असीम संभावनाएं हैं। आइये और मध्यप्रदेश में अपना दूसरा घर बनाईये। उन्होंने कहा कि निवेशक मध्यप्रदेश में जितने चाहें, उतने उद्योग-धंधे लगाएं, सरकार पलक-पावड़े बिछाकर आपका स्वागत करेगी, आपकी हर संभव मदद करेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योग-धंधे लगाने के लिए जरूरत के मुताबिक भूमि, बिजली, पानी, कुशल कार्यशक्ति सब उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और पंजाब दोनों भाइयों की तरह हैं। अनाज के उत्पादन में पंजाब बड़ा और मध्यप्रदेश छोटा भाई है। ‍अब दोनों भाई मिलकर देश और मध्यप्रदेश का विकास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश प्रगति पथ पर है। पंजाब वीरों की धरती है, इसकी अलग ही पहचान है। यह गुरु परंपरा की अद्भुत धरती है। मध्यप्रदेश के इंदौर की पहचान स्वच्छता में है, तो लुधियाना की पहचान उद्योगों से है। हम उद्योगपतियों को मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने के लिए आमंत्रित करने आए हैं। आप खुले दिल से और बिना किसी हिचक के निवेश करें, सरकार जितनी हो सकेगी, आपकी उतनी मदद करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत बदलते दौर में सिरमौर बन रहा है। उद्योगों से कई परिवारों का उदर-पोषण होता है और गरीबों के जीवन में आमदनी का उजाला आता है। यह एक पवित्र कार्य है। उद्योगपति अपने परिवार का पोषण करते हुए दूसरों का भी घर रौशन करते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब अमर शहीद भगत सिंह की धरती है, जिन्होंने सर्वोच्च बलिदान देकर देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप लोग यहां भी काम करते रहें और अपने कारोबार का विस्तार करते हुए एक-दो फैक्ट्री मध्यप्रदेश में भी लगाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी उद्योग अनुकूल नीतियों को दुनिया के सामने रखा। हमने उद्योगपतियों को कई सौगातें दी हैं। टेक्सटाईल्स सेक्टर के इंडस्ट्रियल वर्कर्स की सैलरी में मध्यप्रदेश सरकार 5 हजार रुपए की अतिरिक्त मदद देगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में स्कूली बच्चों को साइकिलें बांटी जा रही हैं। साइकिलें मुख्यत: पंजाब में ही बनती हैं। यही साइकल मध्यप्रदेश में भी बन सकती हैं। उद्योगपति मध्यप्रदेश में साइकल बनाने की फैक्ट्री लगाएं। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में सोने की चिड़िया की पहचान रखता था। वर्ष 1947 में देश आजाद हुआ, तब भारत दुनिया की 15वीं अर्थ-व्यवस्था हुआ करता था। इजरायल और जापान जैसे देश कहां से कहां पहुंच गए। वर्ष 2014 में भारत 11वें स्थान पर था और आज बदलते दौर में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थ-व्यवस्था बन गया है और अब तीसरी अर्थ-व्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने कोयम्बटूर, सूरत और अब लुधियाना में रोड-शो कर निवेशकों के साथ संवाद किया है। राज्य में संभाग स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव भी आयोजित की गईं। इसी साल फरवरी में भोपाल में हुई जीआईएस के माध्यम से मध्यप्रदेश को 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले थे। राज्य में इंडस्ट्री के विभिन्न सेक्टर्स के विकास के लिए अलग-अलग विषयों पर समिट आयोजित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश विभिन्न खनिज संपदाओं से संपन्न क्षेत्र है। यहां निवेश करना नि:संदेह फायदे का सौदा है। श्रमिकों के हित में बड़े स्तर पर सेटलमेंट किये क्लियर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल ही में प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के हित में सैकड़ों करोड़ रुपये के सेटलमेंट क्लियर किये हैं। यह निर्णय प्रदेश सरकार की श्रमिकों के प्रति संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि यदि किसी नीति में निवेशकों को सुविधा देने के लिए संशोधन की आवश्यकता होगी तो सरकार कैबिनेट स्तर पर भी बदलाव करने के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की लुधियाना में प्रमुख उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लुधियाना प्रवास के दौरान पंजाब के प्रमुख उद्योगपतियों से वन-टू-वन बैठक कर उन्हें मध्यप्रदेश की निवेश समर्थक नीतियों से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया कि मध्यप्रदेश सरकार जहाँ भी संभावनाएं दिख रही हैं, वहाँ नीतिगत बदलाव करने के लिए पूरी तत्परता से काम करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में … Read more