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‘मिशन से वापस नहीं लौटा अमेरिका का एक B-2 बॉम्बर लापता! वॉशिंगटन में सन्नाटा

वॉशिंगटन  अमेरिकी वायु सेना के ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए बमबारी अभियान ने एक आश्चर्यजनक मोड़ लिया है. दरअसल, अमेरिकी वायु सेना के ऑपरेशन में शामिल एक बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर ऑपेशन के बाद अपने बेस पर वापस नहीं पहुंचा है. इसे लेकर अब कई तरह के सवाल उठने लगे हैं. 27 जून को यूरेशियन टाइम्स की छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने 21 जून को मिसौरी स्थित व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस से बी-2 बॉम्बर्स के दो अलग-अलग समूहों को रवाना किया था. बी-2 स्पिरिट बॉम्बर्स के एक समूह ने प्रशांत महासागर की ओर पश्चिम की दिशा में उड़ान भरी, जिसका मकसद ईरान के डिफेंस को चकमा देना था. वहीं बॉम्बर्स के दूसरे समूह में सात बी-2 स्पिरिट बॉम्बर शामिल थे. इन्होंने पूर्व दिशा में तेहरान के फोर्डो और नतांज स्थित अंडरग्राउंड परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के लिए रवाना किया गया था. 37 घंटे के बाद मिशन पूरा कर लौटे थे बॉम्बर विमान ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने गई टीम 37 घंटे की बिना रुके की गई राउंड ट्रिप के बाद अपना मिशन पूरा कर बेस पर वापस सुरक्षित लैंड कर गई. वहीं प्रशांत महासागर की ओर से ईरानी डिफेंस को चकमा देने के लिए उड़ान भरने वाले बॉम्बर समूह के बारे में अब तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि, बाद में इस बात का खुलासा हुआ कि अमेरिकी बी-2 बॉम्बर के समूह से लापता हुआ विमान हवाई में किसी कारण से इमरजेंसी लैंडिंग को मजबूर हो गया. उल्लेखनीय है कि यह स्टील्थ बॉम्बर डैनियल के. इनौये इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुआ, यह एयरपोर्ट होनोलूलू में हिकम एयरफोर्स बेस के साथ रनवे शेयर करता हैं. जानिए क्या हुआ था उस दिन मिशन के तहत दो ग्रुप बनाए गए थे. दोनों ने उड़ान भरी मिसौरी के व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस से. एक ग्रुप पश्चिम की ओर गया, यानी प्रशांत महासागर की दिशा में. मकसद था – ईरान को गुमराह करना. दूसरा ग्रुप, जिसमें सात B-2 बॉम्बर थे, सीधे ईरान की ओर बढ़ा. उनका टारगेट था ईरान के न्यूक्लियर फैसिलिटी – फोर्डो और नतांज. साथ में फ्यूल टैंकर और फाइटर जेट्स भी थे. इन जेट्स ने अपनी-अपनी जगह से मिसाइलें दागीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन B-2 बॉम्बर्स ने कुल 14 GBU-57 बंकर बस्टर बम गिराए. सातों बॉम्बर 37 घंटे बाद सुरक्षित लौट आए. लेकिन इस बीच पश्चिम की ओर भेजे गए डिकॉय ग्रुप का एक B-2 बॉम्बर अब तक नहीं लौटा. लापता बॉम्बर को लेकर क्या पता चला है? खबर है कि यह बॉम्बर उड़ान के दौरान इमरजेंसी में फंस गया था. इसे हवाई के डेनियल K इनोए इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतारा गया. यही रनवे हिकम एयर फोर्स बेस के साथ साझा किया जाता है. इस बॉम्बर का कॉलसाइन था – ‘MYTEE’. लैंडिंग के बाद से यह वहीं खड़ा है. इसकी मरम्मत या वापसी को लेकर कोई अपडेट अब तक नहीं आया है. इस लैंडिंग का एक वीडियो भी वायरल है, जिसे पूर्व अमेरिकी एयरफोर्स पायलट डेविड मार्टिन ने शेयर किया है. हालांकि, अमेरिकी वायुसेना ने अब तक इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साध रखी है. न कोई बयान, न कोई स्पष्टीकरण. पहले भी दिक्कत में रहे हैं B-2 बॉम्बर B-2 बॉम्बर टेक्नोलॉजी का चमत्कार माना जाता है. लेकिन यह पहली बार नहीं है जब इन्हें तकनीकी संकट झेलना पड़ा हो. अप्रैल 2023 में भी एक B-2 को हवाई में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी. 2022 में तो पूरे B-2 फ्लीट को ग्राउंड कर दिया गया था, जब एक बॉम्बर मिसौरी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. 2008 में सबसे गंभीर हादसा हुआ था. ‘स्पिरिट ऑफ कंसास’ नाम का B-2 उड़ान भरते ही गुआम में क्रैश हो गया. हालांकि पायलट बच गए थे. B-2 बॉम्बर की खासियत क्या है? B-2 अमेरिका का सबसे महंगा और हाईटेक बॉम्बर है. एक यूनिट की कीमत है दो अरब डॉलर. इसका मुख्य रोल है – दुश्मन की परमाणु और अंडरग्राउंड फैसिलिटी को बर्बाद करना. अमेरिका के पास सिर्फ 19 B-2 बॉम्बर हैं. यानी, हर एक का नुकसान अमेरिका की ताकत में बड़ी सेंध है. ईरान की प्रतिक्रिया क्या रही? ईरान ने दावा किया है कि उनके न्यूक्लियर साइट्स को कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ. वहीं अमेरिका कहता है कि यह हमला पूरी तरह सफल था और ईरान का परमाणु प्रोग्राम पीछे चला गया. लेकिन लापता बॉम्बर की गूंज अब वॉशिंगटन से लेकर तेहरान तक सुनाई दे रही है. क्या यह तकनीकी फेलियर था? क्या ईरान ने जवाबी हमला किया? या फिर अमेरिका कुछ छुपा रहा है?

‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को नया मंत्र दिया , सहकारिता के साथ लोकतंत्र की भावना के साथ देश आगे बढ़ रहा : CM डॉ. यादव

भोपाल   'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को नया मंत्र दिया है। सहकारिता के साथ लोकतंत्र की भावना के साथ देश आगे बढ़ रहा है। परस्पर स्वावलंबन के साथ जीने का नाम ही सहकारिता है। इस मंत्र पर देश और प्रदेश में काम किया जा रहा है। हर दिन नए आंकड़े सामने आ रहे हैं। विद्यार्थियों वास्तविक जीवन जीकर जानकारी और अनुभव हासिल करते हैं। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 जुलाई को कही। सीएम डॉ. यादव अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के मौके पर भोपाल के समन्वय भवन में आयोजित 'सहकारी युवा संवाद' को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कई युवाओं के साथ संवाद भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कॉलेज की पढ़ाई मात्र किताबी ज्ञान तक सीमित रहती है। हमारा प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से भरा है। इसे नदियों का मायका भी कहा जाता है। आधुनिकता के इस दौर में औद्योगिकीकरण की जरूरत है। इसीलिए हमने उद्योगों को बढ़ावा दिया है। उद्योगों के बढ़ने से प्रदेश में मौजूद वस्तुओं की कीमत बढ़ी है। युवाओं को नई दिशा और रोजगार के अवसर मिले हैं।  साकार करना है पीएम मोदी का सपना सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि हर व्यक्ति के सपनों को पंख मिलें। हमारी कामना है कि उन्नति के दरवाजे सबके लिए खुलें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 2047 तक भारत नंबर वन बनेगा, इसके प्रयास किए जा रहे हैं। हमारी सहकारिता का सबसे बड़ा उदाहरण हमारी धार्मिक गतिविधियां हैं, जो बिना सबके कल्याण के पूरी नहीं होती। 

भाजपा सरकार हर वर्ग के हक में ठोस काम कर रही, ओबीसी को 27 % आरक्षण देने के लिए पूर्णरूप से प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आंकड़ों के अनुसार कानून का मसौदा तैयार किया जाए, जिसे विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। 14 प्रतिशत बचे लोगों को भी आरक्षण का  लाभ मिले। प्रमोशन में सबको लाभ दिया गया। भाजपा सरकार आरक्षण भी ठोस काम कर रही हैं। भाजपा की सरकार ने तो सामान्य को भी 10 प्रतिशत का आरक्षण दिया हैं। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सिर्फ भ्रम फैलाने का काम करती है। हमने जातिगत जनगणना की पहल की, लेकिन कांग्रेस अब उसका श्रेय लेने की कोशिश कर रही है। सच ये है कि कांग्रेस ने कभी ओबीसी को न मुख्यमंत्री बनाया, न उन्हें आरक्षण देना चाहा। जनता अब सब जान चुकी है।  यहां कांग्रेस की दाल नहीं गलने वाली  राहुल गांधी के भोपाल दौरे को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी यहां आकर क्या करेंगे? उनकी और कांग्रेस की दाल अब मध्यप्रदेश में नहीं गलने वाली है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब आंबेडकर ने जीवन भर संघर्ष किया, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें कभी सम्मान नहीं दिया। हमारी सरकार सभी वर्गों को साथ लेकर चल रही है।  मध्यप्रदेश को बताया शांति का टापू मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस जितनी भी कोशिश कर ले, मध्यप्रदेश की शांति को भंग नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश शांति का टापू है और हमारी सरकार इस अमन-चैन को बनाए रखने के लिए पूरी तरह सजग है।  सीएम ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही सहकारिता के क्षेत्र को गंभीरता से ले रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सहकारिता विभाग का गठन किया गया है और मध्यप्रदेश में भी सरकार इस दिशा में प्रतिबद्धता से काम कर रही है।  

लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की जड़ें जितनी गहरी और स्थानीय स्तर पर सिंचित होंगी, हमारा राष्ट्र उतना ही सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनेगा- कैलाश विजयवर्गीय

भोपाल  गुरुग्राम की पुण्यभूमि मानेसर में आयोजित शहरी स्थानीय निकायों के अध्यक्षों के राष्ट्रीय सम्मेलन में मध्य प्रदेश 'मॉडल स्टेट' के रूप में उभर करके सामने आया। सम्मेलन के अंतिम दिन मध्य प्रदेश के शहरी विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी पहुंचे। यहां उन्होंने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शहरी स्थानीय निकायों के अध्यक्षों के प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साल 2014 के बाद से शहरी स्थानीय निकाय के बजट में काफी वृद्धि हुई है। शहरी स्थानीय निकाय हमारे लोकतंत्र की नींव है। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की जड़ें जितनी गहरी और स्थानीय स्तर पर सिंचित होंगी, हमारा राष्ट्र उतना ही सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनेगा। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शहरी स्थानीय निकायों में जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इंदौर का उदाहरण को देते हुए जनभागीदारी के बारे में बताया। उन्होंने बीते समय की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक बार इंदौर नगर निगम में फंड की कमी हो गई थी। तब उन्होंने आमजन से सीमेंट के लिए बोला था। उस दौरान जनभागीदारी की पहल से उनके पास 80 करोड़ रुपये की सीमेंट इकट्ठा हुई थी। इसी सीमेंट से फिर सड़कों का निर्माण कराया गया। ये जन सहभागिता की सफलता का प्रमाण है। आज अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के पावन अवसर पर उन सभी सहकारी संस्थाओं को हार्दिक शुभकामनाएं, जो राष्ट्र के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय सहकारिता मंत्री जी के कुशल मार्गदर्शन में भारत में सहकारिता एक नई ऊर्जा और विस्तार के साथ आगे बढ़ रही है। गांव-गांव में रोजगार, संसाधन और सहभागिता का सशक्त माध्यम बन चुकी सहकारिता, आज समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की नींव बन रही है।  

आर्म्स डीलर संजय भंडारी की बढ़ी मुश्किल, ED की याचिका पर दिल्ली की कोर्ट ने किया ‘भगोड़ा’ घोषित

नई दिल्‍ली दिल्ली की एक विशेष अदालत ने शनिवार को ब्रिटेन में रह रहे और विवादों में घिरे हथियार डीलर संजय भंडारी (Sanjay Bhandari) को 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' (Fugitive Economic Offender) घोषित कर दिया. यह कार्रवाई फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट (FEO Act) के तहत की गई है, जो अघोषित विदेशी संपत्तियों से जुड़े आयकर मामले से संबंधित है. 100 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी सपत्तियां यह आदेश एडिशनल सेशंस जज संजीव अग्रवाल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनाया. ED ने अदालत को बताया कि भंडारी ने भारतीय कानून से बचने की कोशिश की और ₹100 करोड़ से अधिक की विदेशी संपत्तियां बनाई हैं. ED का यह भी कहना है कि यूके अदालत द्वारा भंडारी के प्रत्यर्पण से इनकार का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि यह कार्यवाही भारतीय कानून के तहत स्वतंत्र रूप से की जा रही है. भंडारी ने किया प्रत्यर्पण से इंकार हालांकि, भंडारी ने ED की याचिका को चुनौती दी और कहा कि वह यूके में कानूनी रूप से रह रहा है. भंडारी के वकील सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने तर्क दिया कि लंदन हाईकोर्ट ने उनके टीहार जेल में सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए प्रत्यर्पण से इनकार कर दिया था. उन्होंने यह भी कहा कि ED की याचिका अस्पष्ट है, इसमें अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है और यह FEO कानून की वैधानिक शर्तों को पूरा नहीं करती. मनिंदर सिंह ने यह भी दावा किया कि आयकर विभाग ने 2020 में जो मूल्यांकन किया था, उसमें यह राशि ₹100 करोड़ से कम बताई गई थी. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भंडारी के खिलाफ कोई नया गिरफ्तारी वारंट भी लंबित नहीं है. अदालत का फैसला और ED का पक्ष बावजूद इसके, अदालत ने ED के पक्ष में फैसला सुनाया. इस मामले में विशेष लोक अभियोजक जोहेब हुसैन ने ED की ओर से पक्ष रखा और बताया कि भंडारी लगातार भारतीय कानूनी प्रक्रिया से भाग रहा है और उसके खिलाफ कार्रवाई जरूरी है. FEO घोषित होने के बाद अब भारतीय एजेंसियां संजय भंडारी की भारत और विदेश में स्थित संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं. इससे पहले भी विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे कई हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराधियों को FEO घोषित किया जा चुका है. क्या है FEO अधिनियम? FEO Act, 2018 के तहत, उन लोगों को 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित किया जाता है जो ₹100 करोड़ या उससे अधिक के आर्थिक अपराधों में शामिल हैं और भारत की अदालतों में पेश होने से बचते हैं. यह कानून एजेंसियों को उनकी संपत्ति को जब्त करने की शक्तियां देता है. इस मामले से जुड़ी जांच अभी जारी है और संभावना है कि ED कुछ और अधिकारियों या फर्मों की भूमिका की भी जांच करेगी. रॉबर्ट वाड्रा जंग भी जुड़ा था नाम संजय भंडारी का नाम कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी आया है. ईडी का दावा है कि भंडारी ने रक्षा सौदों में दलाली कर करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति विदेशों में बनाई. 2016 में आयकर विभाग की छापेमारी में भंडारी के पास से गोपनीय रक्षा दस्तावेज और गैर-घोषित विदेशी संपत्तियों के सबूत मिले थे. जांच में भंडारी का संबंध कई विदेशी हथियार कंपनियों से सामने आया जो भारत सरकार से रक्षा खरीद के ठेके पाने की होड़ में थीं. कोर्ट द्वारा भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद ईडी अब उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया तेज करेगी. यह फैसला भारत के लिए ब्रिटेन में प्रत्यर्पण की संभावित अपीलों में भी कानूनी आधार मजबूत करेगा. ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा को भी किया था तलब इससे पहले जून में ईडी ने भगोड़े हथियार डीलर संजय भंडारी से जुड़ी चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के पति व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा को तलब किया था. केंद्रीय एजेंसी को संदेह है कि भंडारी ने यूपीए शासन के दौरान रक्षा अनुबंधों के जरिये मिले अवैध धन का इस्तेमाल विदेशों में संपत्तियां खरीदने के लिए किया. विशेष रूप से लंदन में प्रमुख रियल एस्टेट संपत्तियों में से कुछ में कथित तौर पर रॉबर्ट वाड्रा को लाभकारी मालिक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. 2018 से ईडी की जांच के दायरे में रहे वाड्रा ने राजनीतिक प्रतिशोध का दावा करते हुए सभी आरोपों से इनकार किया है. कर चोरी, काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में भारत में लंबे समय से वांछित संजय भंडारी एक बड़ी कानूनी जीत के बाद लंदन में रह रहा है. फरवरी में लंदन के हाईकोर्ट ने प्रत्यर्पण के खिलाफ भंडारी की अपील को स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया कि भारत की तिहाड़ जेल में कैदियों और जेल अधिकारियों दोनों की ओर से जबरन वसूली और हिंसा का असली खतरा है.  

CM साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में लिया गया बड़ा निर्णय : उद्योग विभाग को सौंपा जाएगा जशप्योर का ट्रेडमार्क

रायपुर छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचल जशपुर की आदिवासी महिलाओं के समूह द्वारा प्राकृतिक वनोपज का प्रसंस्करण कर तैयार की गई विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्रियों का ब्रांड जशप्योर अब जशपुर और छत्तीसगढ़ की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कदमताल करने को तैयार है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के वोकल फॉर लोकल अभियान को आत्मसात करते हुए एक अहम निर्णय लिया गया है जिसके तहत जशपुर जिले की महत्वाकांक्षी महिला केंद्रित ब्रांड जशप्योर का ट्रेडमार्क अब उद्योग विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा। यह ऐतिहासिक निर्णय जशप्योर को व्यापक उत्पादन, संस्थागत ब्रांडिंग और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच दिलाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम है। जशप्योर – परंपरा को उद्यमिता से जोड़कर खोली उन्नति की राह जशप्योर ब्रांड महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला उपक्रम है, जिसे जशपुर जिले की आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित किया जाता है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक, पोषणयुक्त और रसायनमुक्त खाद्य उत्पादों का निर्माण करते हुए स्थानीय समुदायों को रोजगार उपलब्ध कराना और सतत विकास को बढ़ावा देना है। इस ब्रांड का लक्ष्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि और वनोपज का प्रसंस्करण कर खाद्य उत्पादों के रूप में तैयार करना तथा रोजगार से जोड़ते हुए व्यावसायिक स्तर पर इन्हें व्यापक पहचान दिलाना है। जशप्योर के उत्पादों की मुख्य विशेषता यह है कि ये पूरी तरह से प्राकृतिक हैं। इनमें किसी भी प्रकार के प्रिज़र्वेटिव, रंग या कृत्रिम स्वाद का उपयोग नहीं किया जाता और ये सस्टेनेबल पैकेजिंग में उपलब्ध हैं। जशप्योर केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ी माटी की महक, आदिवासी बहनों की मेहनत और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का प्रतीक बन चुका है। जशप्योर के उत्पाद बना रहे हैं अपनी अलग पहचान जशप्योर द्वारा महुआ और अन्य वनोपज को शामिल करते हुए कई प्रकार के पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें महुआ आधारित उत्पाद जैसे महुआ नेक्टर, महुआ वन्यप्राश, महुआ कुकीज़, रागी महुआ लड्डू, महुआ कैंडी और महुआ नेक्टर कोकोआ शामिल हैं। इसके अलावा, ढेकी कूटा जवा फूल चावल, मिलेट आधारित पास्ता और कोदो, कुटकी, रागी तथा टाऊ से बने विभिन्न उत्पाद भी पूरे भारत में अपनी पहचान बना रहे हैं। महिला उद्यमिता को मिल रहा बढ़ावा जशप्योर ब्रांड का उद्देश्य केवल व्यापार नहीं है, बल्कि यह आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने का एक सशक्त प्रयास भी है। इस ब्रांड के माध्यम से महिलाओं को रोजगार का अवसर मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हुई हैं। जशप्योर द्वारा निर्मित हर उत्पाद आदिवासी महिलाओं की मेहनत और समर्पण का प्रतीक है। ये उत्पाद देशभर के विभिन्न स्टोर्स पर उपलब्ध हैं, जो ब्रांड की व्यापक पहुँच का प्रमाण हैं। जशप्योर के सभी उत्पाद पूर्णतः प्राकृतिक हैं। इनमें किसी भी प्रकार के प्रिज़र्वेटिव, कृत्रिम रंग या स्वाद का उपयोग नहीं किया जाता। यह उत्पाद श्रृंखला न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि पोषण से भरपूर और पर्यावरण-संवेदनशील पैकेजिंग में उपलब्ध है। जशप्योर के प्रमुख उत्पादों में महुआ नेक्टर, महुआ वन्यप्राश, रागी महुआ लड्डू, महुआ कुकीज़, महुआ कोकोआ ड्रिंक, कोदो, कुटकी, रागी आधारित पास्ता और ढेकी कूटा चावल शामिल हैं। जशप्योर की सबसे खास बात इसकी महिला प्रधान कार्यशक्ति है। यहां 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी आदिवासी महिलाएं हैं, जो उत्पादन से लेकर पैकेजिंग तक हर स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इस मंच के माध्यम से ये महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि परंपरागत ज्ञान और तकनीकों को आधुनिक बाजार में प्रस्तुत करने में भी सक्षम हो रही हैं। वर्ल्ड फूड इंडिया 2024 में मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया 20 सितंबर 2024 को नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित वर्ल्ड फूड इंडिया 2024 में जशप्योर का स्टॉल सभी के आकर्षण का केंद्र बना रहा। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने वाले उपभोक्ताओं, पोषण विशेषज्ञों और उद्यमियों ने विशेष रुचि के साथ महुआ और मिलेट से बने उत्पादों की सराहना की। इन उत्पादों में कोई एडिटिव, प्रिज़र्वेटिव या स्टेबलाइजर नहीं है, जिससे ये पूरी तरह से प्राकृतिक, सुरक्षित और पोषणयुक्त हैं। रेयर प्लेनेट के साथ ऐतिहासिक समझौता जशप्योर की पहुँच अब देशभर के प्रमुख एयरपोर्ट स्टोर्स तक होगी। रेयर प्लेनेट के साथ हुए समझौते के तहत पहले चरण में पाँच एयरपोर्ट्स पर महुआ और अन्य उत्पादों की बिक्री शुरू की जा रही है। यह पहल जशप्योर को राष्ट्रीय उपभोक्ताओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस एमओयू पर हस्ताक्षर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा ऑनलाइन माध्यम से किए गए, जो राज्य के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जशप्योर – लोकल टू ग्लोबल की राह पर अग्रसर जशप्योर से जुड़े जशपुर जिले के युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन ने बताया कि जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ शासन के प्रयासों से "महुआ को अब केवल शराब तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे फॉरेस्ट गोल्ड या ग्रीन गोल्ड के रूप में भी देखा जाएगा।" जशप्योर ने यह साबित कर दिया है कि स्वास्थ्यवर्धक भोजन स्वादिष्ट भी हो सकता है। उनका मानना है कि शासन की इस पहल से जशप्योर को लोकल टू ग्लोबल ब्रांड बनाने में मदद मिलेगी और निश्चित ही यह निर्णय प्रदेश भर में वनोपज और स्थानीय उत्पादकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। ब्रांड ट्रेडमार्क हस्तांतरण के इस ऐतिहासिक निर्णय से जशप्योर को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही कच्चे माल की माँग में वृद्धि होगी और आदिवासी महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त होंगे। इस निर्णय से जशप्योर ब्रांड का ट्रेडमार्क उद्योग विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा, ताकि इसके दायरे और प्रभाव को और व्यापक बनाया जा सके। इससे जशप्योर के उत्पादों को विश्वस्तरीय बनाने, उत्पादन में वृद्धि के लिए उन्नत मशीनें लगाने और प्रभावी मार्केटिंग सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।  

भगोड़े नीरव मोदी का भाई नेहल मोदी वाशिंगटन में गिरफ्तार, CBI-ED ने करवाया अरेस्ट

 वाशिंगटन भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी के भाई नेहल मोदी को अमेरिका में गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई और ईडी के प्रत्यर्पण के अनुरोध के बाद उन पर शिकंजा कसा गया है। यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, भगोड़े आर्थिक अपराधी नीरव मोदी के भाई को 4 जुलाई को अमेरिकी अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से संयुक्त रूप से किए गए प्रत्यर्पण अनुरोध के बाद हुई।  प्रत्यर्पण की कार्यवाही दो मामलों में की जा रही अमेरिकी अभियोजन पक्ष की ओर से दर्ज की गई शिकायत के मुताबिक, प्रत्यर्पण की कार्यवाही दो मामलों में की जा रही है- एक मामला धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 की धारा 3 के तहत धन शोधन का और दूसरा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120-बी और 201 के तहत आपराधिक साजिश का।  पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी मामले में वांछित नेहल मोदी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी मामले में वांछित है। यह देश के इतिहास में सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से की गई जांच में नेहल मोदी को नीरव मोदी की आपराधिक आय को वैध बनाने के लिए काम करने वाले अहम शख्स पाया गया था, जो ब्रिटेन से प्रत्यर्पण का भी सामना कर रहा है। अगली सुनवाई की तारीख 17 जुलाई नेहल पर आरोप है कि उसने भारतीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए शेल कंपनियों और विदेशी लेनदेन के नेटवर्क के जरिए भारी मात्रा में अवैध धन को छिपाने और स्थानांतरित करने में सहायता की। प्रत्यर्पण कार्यवाही के लिए अगली सुनवाई की तारीख 17 जुलाई 2025 निर्धारित की गई है। वह इस दौरान जमानत के लिए आवेदन कर सकता है, जिसका अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने विरोध करने की बात कही है। इस सेक्शन के तहत की गई गिरफ्तारी प्रत्यर्पण का अनुरोध क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी सेक्शन 120 बी, 201 इंडियन पीनल कोड और 3 प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट 2002 के तहत किया गया था। नीरव मोदी के साथ ही नेहाल मोदी पर भी पंजाब नेशनल बैंक से हजारों करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप हैं। सीबीआई और ईडी की जांच के मुताबिक नीरव मोदी के इस स्कैम को अंजाम देने में उसके भाई नेहाल मोदी ने अहम रोल निभाया था। नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की कोशिश भी जांच एजेंसियां यूके से कर रही हैं। सुनवाई की अगली तारीख 17 जुलाई की है। इसमें नेहाल मोदी जमानत के लिए भी अपील कर सकता है और यूएस अथॉरिटी भारतीय एजेंसियों के तर्क पर इसका विरोध करेंगी। किस मामले में है वांटेड नेहल मोदी भारत में पंजाब नेशनल बैंक यानी पीएनबी घोटाले में वांछित है, जो देश का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला कहा जाता है। जांच एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि उसने अपने भाई नीरव मोदी की मदद करते हुए हजारों करोड़ रुपये की काली कमाई को विदेशों में शेल कंपनियों के जरिए ट्रांसफर किया। ED और CBI की जांच में ये साफ हुआ है कि नेहल मोदी ने न सिर्फ घोटाले की रकम को इधर-उधर किया, बल्कि कई दस्तावेजी सबूतों को भी मिटाने की कोशिश की।      

‘जो बाला साहेब नहीं कर पाए वो आज हुआ…’, मुंबई में राज ठाकरे ने किया शक्ति प्रदर्शन

20 साल बाद एक मंच पर आए ठाकरे बंधु, राज बोले- महाराष्ट्र को तिरछी नजर से कोई नहीं देखेगा 'आप किसी पर हिंदी नहीं थोप सकते', मुंबई की रैली से गरजे राज ठाकरे  'जो बाला साहेब नहीं कर पाए वो आज हुआ…', मुंबई में राज ठाकरे ने किया शक्ति प्रदर्शन मुंबई से राज ठाकरे की हुंकार, बोले – महाराष्ट्र के लिए जो कर सकते हैं वो करेंगे    ठाकरे ब्रदर्स के एक मंच पर आने को लेकर संजय राउत बोले- यह पूरे महाराष्ट्र के लिए त्यौहार जैसा दिन मुंबई  महाराष्ट्र की सियासत में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. लंबे समय से जिस तस्वीर को लेकर कयासबाजी चल रही थी वो आज देखने को मिली जब उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एकसाथ एक मंच पर दिखे, वो भी परिवार के साथ में.   दोनों भाई वर्ली में मराठी विजय दिवस मनाने के नाम पर मंच साझा कर हैं, लेकिन सियासी पंडित इस बात का आकलन कर रहे हैं कि महाराष्ट्र की सियासत दोनों भाइयों की साथ आना क्या बड़ा बदलाव साबित होने वाला है? – दक्षिण में स्टालिन, कनमोझी, जयललिता, नारा लोकेश, आर रहमान, सूर्या, सभी ने अंग्रेजी में पढ़ाई की है? रहमान ने डायस छोड़ दिया जब एक वक्ता ने हिंदी में बोलना शुरू किया.बालासाहेब और मेरे पिता श्रीकांत ठाकरे ने अंग्रेजी में पढ़ाई की है, लेकिन वे मातृभाषा मराठी के प्रति बहुत संवेदनशील थे. बालासाहेब ठाकरे ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की, लेकिन उन्होंने मराठी भाषा से समझौता नहीं किया. किसी को भी मराठी को तिरछी नज़र से नहीं देखना चाहिए: राज ठाकरे – हमारे बच्चे इंग्लिश मीडियम जाते है तो हमारे मराठी पर सवाल उठते है , लालकृष्ण आडवाणी मिशनरी स्कूल में पढ़े है तो क्या उनके हिंदुत्व पर सवाल उठाए क्या? हम हिंदी थोपना बर्दाश्त नहीं करेंगे. वे बस मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना चाहते हैं, यही उनका एजेंडा है. लेकिन वे ऐसा करने की हिम्मत करते हैं.. तब उन्हें मराठी मानुस की ताकत समझ में आएगी.वे मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. अब वे यह मुद्दा उठा रहे हैं कि ठाकरे के बच्चे अंग्रेजी में पढ़े हैं. यह क्या बकवास है? कई भाजपा नेताओं ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की है.. लेकिन किसी को उनके हिंदुत्व पर संदेह है: राज ठाकरे -इस दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा,'ये त्रिभाषा सूत्र कहा से लेकर आए? छोटे-छोटे बच्चों से जबरदस्ती करोगे क्या? महाराष्ट्र को कोई तिरछी नजर से नहीं देखेगा. हिंदी अच्छी भाषा है, सारी भाषा अच्छी हैं. किसी की हिम्मत है तो मुंबई पर हाथ डालकर देख लें.' -राज ठाकरे ने कहा, "मैंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि मेरा महाराष्ट्र किसी भी राजनीति और लड़ाई से बड़ा है. आज 20 साल बाद मैं और उद्धव एक साथ आए हैं. जो बालासाहेब नहीं कर पाए, वो देवेंद्र फडणवीस ने कर दिखाया… हम दोनों को साथ लाने का काम…" -राज ठाकरे अपनी पत्नी शर्मिला और बेटे अमित, बेटी उर्वशी के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. साथ ही उद्धव अपनी पत्नी रश्मि और बेटे आदित्य, तेजस के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे हैं. -उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे वर्ली में ‘विजय सभा’ में आने से पहले शिवाजी पार्क में स्थित बाल ठाकरे के स्मारक ‘स्मृति स्थल’ पर जा सकते हैं. -रैली को लेकर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा, "… यह महाराष्ट्र में हम सभी के लिए एक त्यौहार की तरह है कि ठाकरे परिवार के दो प्रमुख नेता, जो अपनी राजनीतिक विचारधाराओं के कारण अलग हो गए थे, आखिरकार 20 साल बाद एक मंच साझा करने के लिए एक साथ आ रहे हैं. हमारी हमेशा से यह इच्छा रही है कि हमें उन लोगों से लड़ना चाहिए जो महाराष्ट्र के लोगों के खिलाफ हैं. आज एक साथ आकर उद्धव और राज ठाकरे निश्चित रूप से मराठी मानुष को दिशा देंगे."  -यह पुनर्मिलन सियासी भूचाल जैसा माना जा रहा है क्योंकि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) लंबे समय से अलग-अलग राह पर हैं. लेकिन केंद्र में लाए गए त्रिभाषा फार्मूले का ठाकरे बंधुओं ने मिलकर विरोध किया, जिसके चलते राज्य सरकार को प्रस्तावित नीति फिलहाल टालनी पड़ी. महाराष्ट्र में आज कई सालों बाद एक सियासी तस्वीर नजर आ रही है. शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे आज पूरे 19 साल के बाद एक स्टेज पर एक साथ नजर आ रहे हैं. मराठी भाषा के लिए दोनों भाई सारे गिले-शिकवे भुलाकर एक मंच पर साथ आ चुके हैं. दोनों भाई एक साथ विक्ट्री रैली में शामिल हुए. महाराष्ट्र में भाषा के छिड़े विवाद के बाद यह रैली निकाली जा रही है. दोनों भाइयों को मराठी भाषा से प्यार ने एक बार फिर एक स्टेज पर एक साथ आने का मौका दिया है. इससे पहले यह दोनों आखिरी बार साल 2005 में चुनाव के समय प्रचार करने के लिए एक मंच पर दिखे थे. इसी के बाद इसी साल राज ठाकरे ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. परिवार के साथ रैली में पहुंचे राज-उद्धव रैली में शामिल होने के लिए राज ठाकरे अपने घर शिवतीर्थ से एनएससीआई डोम में पहुंच गए हैं. राज ठाकरे के साथ उनके बेटे अमित और उनकी पत्नी शर्मिला भी पहुंची हैं. तो वही उद्धव ठाकरे भी रैली में पहुंच चुके हैं. उद्धव के साथ उनके बेटे आदित्य उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे भी साथ रहेंगे. कार्यक्रम खत्म होने के बाद दोनों भाई मुंबई के शिवाजी पार्क में स्थित बालासाहेब ठाकरे की समाधि स्थल पर जा सकते हैं. इसी के चलते आज विक्ट्री रैली निकाली जा रही है. इस रैली में कई नेता जुड़ेंगे. राज ठाकरे ने सरकार पर साधा निशाना सही में तो मोर्चा निकालना चाहिए था. मराठी आदमी कैसे एक साथ आता है, लेकिन सिर्फ मोर्चा की चर्चा हुई तो उससे सरकार बैकफुट पर आगई. किसी भी झगड़े से बड़ा महाराष्ट्र है. 20 साल बाद उद्धव और राज ठाकरे एक मंच पर साथ है. उन्होंने आगे कहा, बालासाहेब हमें एक नहीं कर पाए, लेकिन फडणवीस ने कर दिया. उन्होंने सवाल पूछा, हिंदी किसके लिए, छोटे-छोटे बच्चों के साथ जबरदस्ती करोगे? कोई दूसरा एजेंडा नहीं, सिर्फ मराठी एजेंडा है. उन्होंने आगे कहा, आप हिंदी किसी … Read more

प्रधानमंत्री मोदी ने शून्य-बैलेंस खातों ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की नींव रखी इसका फायदा सीधे गरीबों के खातों में पहुंचा :CM यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह पर तंज कसा। अपनी टिप्पणी में डॉ. यादव ने कहा कि शून्य-बैलेंस खाता (zero balance account) क्या होता है, देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ये भी नहीं जानते थे। बकौल डॉ. मोहन यादव, वह (मनमोहन सिंह) आरबीआई के गवर्नर और वित्त मंत्री भी रहे, बहुत बड़े अर्थशास्त्री थे, विदेश की डिग्री थी, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा कि बिना पैसे के भी जीरो बैलेंस में बैंक में खाता खोला जा सकता है, लेकिन नरेन्द्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने, उन्होंने यह बात सोची और जीरो बैलेंस में खाते खुलवाए। आगे कहा, उनके कार्यकाल में डीबीटी का शुभारंभ हुआ, जिससे शासन की कार्यशैली में व्यापक स्तर पर पारदर्शिता आई है। आज हितग्राहियों के खाते में डीबीटी के माध्यम से पूरा पैसा पहुंच रहा है।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मनमोहन सिंह कहते थे- गांवों में सड़क क्यों बनाएं, गांव के लोग तो बैलगाड़ी से चलते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू हुई। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना से देश की चारों दिशाओं को जोड़ गया। उन्होंने शिक्षित वर्ग की ओर संकेत करते हुए जोड़ा कि जिनके पास बड़ी-बड़ी डिग्रियां हैं, उन्हें समझना चाहिए कि जब जमीन बदलती है, तो किताबों से नजर हटाकर थोड़ा जमीन की हकीकत भी देख लेनी चाहिए। मुख्यमंत्री डा. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी कहते थे- केंद्र सरकार एक रुपये भेजती है तो आम आदमी तक केवल 15 पैसे पहुंचता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस व्यवस्था को नीति नहीं, बल्कि नीयत से ठीक किया। वर्ष 2013 से पहले इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया था। अब 25,000 रुपये सीधे मेधावी विद्यार्थियों के खातों में पहुंचे हैं।  

पीएम मोदी को मिला त्रिनिदाद एंड टोबैगो का सर्वोच्च सम्मान, 25 देश दे चुके हैं अपना सबसे बड़ा सम्मान

पोर्ट ऑफ स्पेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को त्रिनिदाद एंड टोबैगो की राष्ट्रपति क्रिस्टीन कंगालू ने देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'द ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो' प्रदान किया. इस सम्मान को पाने वाले वे पहले विदेशी नेता बन गए हैं. यह न केवल त्रिनिदाद-भारत रिश्तों की गहराई का प्रतीक है, बल्कि भारत की वैश्विक कूटनीति के उस विस्तार का भी उदाहरण है, जिसमें सांस्कृतिक रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने की क्षमता हो. पीएम मोदी को 25वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया भर से मिले 25 अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में शामिल हो गया है. इससे पहले उन्हें घाना, यूएई, रूस, फ्रांस, मिस्र जैसे देशों से भी उनके वैश्विक नेतृत्व के लिए शीर्ष नागरिक पुरस्कार मिल चुके हैं. त्रिनिदाद और टोबैगो में उन्हें यह सम्मान ऐसे समय पर मिला है जब दोनों देश भारतीय मूल के श्रमिकों के आगमन की 180वीं वर्षगांठ मना रहे हैं — एक ऐतिहासिक अवसर, जिसने दोनों देशों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया है. 25वां अंतरराष्ट्रीय नागरिक सम्मान यह पीएम मोदी का 25वां अंतरराष्ट्रीय नागरिक सम्मान है. इससे दो दिन पहले ही घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रमानी महामा ने उन्हें देश का राष्ट्रीय सम्मान ‘ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ प्रदान किया था. विशेषज्ञों का मानना है कि ये सम्मानों की श्रृंखला दर्शाती है कि पीएम मोदी आज विश्व राजनीति में एक प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं.  जून में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस ने प्रधानमंत्री मोदी को निकोसिया में राष्ट्रपति भवन में साइप्रस का सम्मान – ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस III – प्रदान किया था. इस साल की शुरुआत में मॉरीशस और श्रीलंका ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया था.अप्रैल में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने प्रधानमंत्री मोदी को 'श्रीलंका मित्र विभूषण' से सम्मानित किया, जो कि द्वीप राष्ट्र के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार के लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. बीजेपी ने कांग्रेस से की तुलना बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख मुखिया अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'पीएम मोदी ने फिर रचा इतिहास! उन्हें ‘द ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो’ से सम्मानित किया गया है – जो कि कैरेबियाई राष्ट्र का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. वह इस सम्मान को पाने वाले पहले विदेशी नेता बन गए हैं. यह प्रधानमंत्री मोदी को किसी विदेशी सरकार द्वारा प्रदान किया गया 25वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है. अगर तुलना करें तो: जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह, दशकों तक सत्ता में रहे लेकिन इसके बावजूद सिर्फ 6 अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले. फिर भी कांग्रेस भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाने की हिम्मत करती है. मजाक सरकार पर नहीं है, मजाक हम पर है कि हमारे पास इतनी अज्ञानी विपक्षी पार्टी है.' हाल के वर्षों में कुवैत, मॉरिशस, श्रीलंका, साइप्रस, गयाना, डोमिनिका, नाइजीरिया, सऊदी अरब, अफगानिस्तान, यूएई, रूस, मालदीव, बहरीन, अमेरिका, भूटान, फिजी, मिस्र, फ्रांस, ग्रीस, पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों ने भी पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा है.इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र, गेट्स फाउंडेशन, सीईआरए, सेओल पीस प्राइज़ फाउंडेशन, फिलिप कोटलर पुरस्कार जैसी वैश्विक संस्थाओं ने भी पीएम मोदी के नेतृत्व को सम्मानित किया है. मॉरीशस और कुवैत में भी मिला था सम्मान मार्च में, पोर्ट लुइस में राष्ट्रीय दिवस समारोह के दौरान, मॉरीशस के राष्ट्रपति धर्मबीर गोखूल ने प्रधानमंत्री मोदी को मॉरीशस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन' (GCSK) से भी सम्मानित किया. यह पहली बार था जब किसी भारतीय नेता को यह सम्मान मिला. दिसंबर 2024 में, कुवैत ने प्रधानमंत्री मोदी को उनकी विशिष्ट उपलब्धियों और दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए अपना सर्वोच्च सम्मान 'ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर' प्रदान किया था. यह ऑर्डर मित्रता के प्रतीक के रूप में राष्ट्राध्यक्षों और विदेशी मुखियाओं और विदेशी शाही परिवारों के सदस्यों को प्रदान किया जाता है. इससे पहले बिल क्लिंटन, प्रिंस चार्ल्स और जॉर्ज बुश जैसे विदेशी नेताओं के अलावा क्वीन एलिजाबेथ और प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान जैसे अन्य गणमान्य लोगों को भी यह सम्मान दिया जा चुका है. गुयाना के राष्ट्रपति मोहम्मद इरफान अली ने प्रधानमंत्री मोदी को उनकी दूरदर्शी राजनीति, वैश्विक मंच पर विकासशील देशों के अधिकारों की वकालत, वैश्विक समुदाय के लिए असाधारण सेवा और भारत-गुयाना संबंधों को मजबूत करने की उनकी प्रतिबद्धता के लिए गुयाना के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'द ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस' से सम्मानित किया था. गुयाना में भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन के दौरान, डोमिनिका ने भी कोविड-19 महामारी के दौरान उनके महत्वपूर्ण समर्थन और भारत-डोमिनिका संबंधों को बढ़ावा देने की उनकी प्रतिबद्धता के लिए पीएम मोदी को अपना सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान 'डोमिनिका अवार्ड ऑफ ऑनर' प्रदान किया. नाइजीरिया ने नवंबर 2024 में देश की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को ग्रैंड कमांडर ऑफ़ द ऑर्डर ऑफ़ द नाइजर (GCON) का राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया. भारतीय प्रधानमंत्री 1969 के बाद से इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले पहले विदेशी नेता हैं, जब महारानी एलिजाबेथ को नाइजीरिया का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान मिला था. पीएम मोदी को मिल चुके हैं 25 इंटरनेशनल अवॉर्ड ये पुरस्कार प्रधानमंत्री मोदी को मिला 25वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है जो उन्हें अलग-अलग देशों की ओर से दिया गया है। इससे यह भी साबित होता है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की वैश्विक छवि और नेतृत्व क्षमता को दुनियाभर में सराहा गया है। त्रिनिदाद एंड टोबैगो का है भारत से जुड़ाव त्रिनिदाद एंड टोबैगो एक ऐसा देश है जहां भारतीय मूल के लोगों की आबादी बड़ी संख्या में है। वहां की संस्कृति, उत्सव और परंपराएं आज भी भारत से गहराई से जुड़ी हैं। ऐसे में यह सम्मान दोनों देशों के बीच सहयोग, विश्वास और साझा मूल्यों की झलक देता है। किस पुरस्कार से नवाजे गए पीएम मोदी? ये पुरस्कार त्रिनिदादएंड टोबैगो के सर्वोच्च सम्मान की श्रेणी में आता है और इसे पाने वाले व्यक्ति को उस देश के प्रति विशेष योगदान के लिए पहचाना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनके नेतृत्व, लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए दिया गया है। हमारे रिश्तों … Read more