पहाड़ों में रहने वाली रेड राइस लेडी बनी ब्रांड एंबेसडर
पहाड़ों से विलुप्त होते अन्न को फिर बनाया व्यंजन रेड रोज लेडी के संघर्ष की अनूठी कहानी भोपाल भोपाल: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के नौगांव में रहने वाली स्वतंत्री बंधानी को भोजन करते समय कुछ ऐसा लगा कि उनके पूर्वजों के अनाज तो अब थाली में है ही नहीं जिसके बाद उन्होंने पहाड़ों की जमीनों पर उगने वाले अनाज की सूरत बदल का सोचा स्वतंत्री बताती हैं मैं रोज थाली देख कर उदास हो जाती थी और फिर एक दिन उनके मन में आया कि हमारे पूर्वजों कि द्वारा उगाए जाने वाले मोटे अनाज को विलुप्त नहीं होने दूंगी और अब उन अनाजों को फिर से थाली में लाएंगी जो मेरे मां नानी दादी थाली में परोसा करती थी. श्रीअन्न की खोज उन्हें खेतों तक ले आई. जहां पहाड़ों पर किसान पारंपरिक खेती से किनारा कर चुके थे। अब स्वतंत्र बंधानी ने पहाड़ों के खेती कर जो अन्न पूर्वजों का थाली से गायब हो गया था उसे भोजन में वापस लाने का पीड़ा उठाया ओर खेती करना शुरू किया और एक ऐसी मुहिम छेड़ी कि आज 10 हजार से ज्यादा किसानों को अपने साथ जोड़ा और खेतों में मोटे अनाज की पैदावार शुरु कर दी पहाड़ों के गायब हो चुके चीणा कोणी के बीज स्वतंत्री बांधना ने अनाज बाहरी पहाड़ों से पहनेंगे दामों पर खरीद कर गांव के किसानों तक पहुंचाया. पहाड़ों के लाल चावल को बचाने से लेकर उगाने और उसे बाजार तक पहुंचाने में बीते 10 सालों से मेहनत कर रही है। ऐसे पहाड़ों में उगाए जाने वाले अनाजों से पहले के समय में कई बीमारियों का इलाज किया जाता था जिसमें शुगर,ब्लडप्रेशर जैसी कई बीमारियां ठीक हो जाती थी जिस विरासत को पहाड़ में रहने वाले लोग सम्हाल नहीं पाए. मोटे चावल से बड़े मंडुवे शुगर फ्री होते हैं, अगर यह नियमित रूप से खाए जाए तो डायबिटीज हो ही नहीं सकती. इतना ही नहीं ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल रहता है. इसके अंदर अधिक मात्रा में फाईबर होता है जो कि तीन रोटी के बराबर एक लड्डू है. उन्होंने बताया जो मोटा अनाज हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी था हमें ताकत देता था, हमारी सेहत अच्छी रखता था उसे ही हमने अपने खाने से अलग कर दिया था , किसानों ने ये देखा ही नहीं कि अपनी जमीन की पैदावार बदल कर वो कितना नुकसान कर रहे हैं. स्वतंत्री ने बताया अब भी बहुत से ऐसे दुर्लभ श्री अन्न हैं, जो लगभग हमारे पहाड़ों में खत्म हो चुके है. जैसे चीणा कोणी मैंने हिमाचल ओर अन्य पहाड़ों से ये बीज मंगवाए फिर इनकी खेती की और अन्य किसानों को भी खेती करने के लिए दिए