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चित्रकूट में नौकरानी की मौत का मामला गहराया, पूर्व कांग्रेस नेता की पत्नी पर संगीन आरोप

 सतना चित्रकूट में कांग्रेस के पूर्व विधायक नीलांशु चतुर्वेदी के निवास पर काम करने वाली 24 साल की नौकरानी सुमन की आत्महत्या मामले में पुलिस ने पूर्व विधायक की पत्नी अर्चना चतुर्वेदी पर केस दर्ज किया है। पुलिस ने इस केस में अहम खुलासे किए हैं। मृतका के प्रेमी अरविंद उर्फ रज्जू यादव को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वहीं पूर्व विधायक की पत्नी अर्चना चतुर्वेदी पर शस्त्र अधिनियम के तहत लापरवाही का केस दर्ज किया गया है। 29 जुलाई को नौकरानी सुमन ने पूर्व कांग्रेस विधायक नीलांशु चतुर्वेदी के घर में मौजूद लाइसेंसी रिवॉल्वर से कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। जांच में पता चला कि यह हथियार अर्चना चतुर्वेदी के नाम पर है और उसे घर में असुरक्षित तरीके से रखा गया था। इस लापरवाही के आधार पर पुलिस ने उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि सुमन का प्रेम संबंध अरविंद उर्फ रज्जू यादव से था। अरविंद उर्फ रज्जू यादव दास हनुमान गोशाला में काम करता था। वह उत्तर प्रदेश के बांदा जिले का रहने वाला है। दोनों की नजदीकियां सब्जी दुकान के पास बैठने के दौरान बढ़ीं, जहां सुमन का परिवार दुकान लगाता था। जब सुमन की मां को इस रिश्ते की भनक लगी, तो उन्होंने उसकी शादी कटनी निवासी एक युवक से तय कर दी। इसके बाद सुमन और अरविंद के बीच तनाव गहराता गया। अरविंद लगातार सुमन से संपर्क करने की कोशिश करता रहा और उसे दो बार मोबाइल फोन देकर बातचीत के लिए दबाव बनाया। 28 जुलाई को सुमन की मां ने अरविंद का दिया दूसरा मोबाइल भी जब्त कर लिया। इसके बाद घर में विवाद हुआ और सुमन पर सामाजिक और भावनात्मक दबाव काफी बढ़ गया। मां की सख्ती, प्रेमी का दबाव और तय विवाह की उलझनों के बीच मानसिक तनाव में सुमन ने अगले दिन खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली। साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर चित्रकूट पुलिस ने अरविंद की भूमिका की पुष्टि की है। उसके खिलाफ बीएनएस की धारा-108 और 107 के तहत केस दर्ज किया गया है। उसे न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने एक ओर प्रेमी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया है, तो दूसरी ओर पूर्व विधायक की पत्नी पर लापरवाही से शस्त्र रखने को लेकर मामला दर्ज कर अलग से जांच कर रही है। पुलिस ने इस मामले की जांच के दौरान युवती सुमन और पूर्व विधायक के घर के कई सदस्यों के फिंगर प्रिंट की जांच कराई थी। गौर करने वाली बात यह कि मृतका की मां ने पुलिस से कहा था कि सुमन को दो माह पूर्व दिमागी बुखार आया था जिससे वह परेशान थी। 

सेवकराम ने कुटुंब न्यायालय में अर्जी दाखिल कर पत्नी की पेंशन से 25 हजार रुपए प्रतिमाह की मांग

 पथरिया  एमपी के जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है। पथरिया से BJP की पूर्व MLA सोना बाई के दिव्यांग पति सेवकराम अहिरवार ने उनसे गुजारा भत्ता मांगा है। सेवकराम ने कुटुंब न्यायालय में अर्जी दाखिल कर पत्नी की पेंशन से 25 हजार रुपए प्रतिमाह की मांग की है। उनका कहना है कि 2016 में दुर्घटना में पैर खराब होने के बाद वे दिव्यांग हो गए और अब मजदूरी करने में भी असमर्थ हैं। सेवकराम का आरोप है कि सोना बाई ने उन्हें अपमानित किया और बाद में छोड़ दिया, क्योंकि उन्हें उनके साथ रहने में शर्म आती थी। 1993 में हुई थी शादी सेवकराम अहिरवार और सोना बाई की शादी 1993 में हुई थी। सेवकराम ने बताया कि 2003 में सोना बाई ने राजनीति में आने की इच्छा जताई। उनके सहयोग से सोना बाई 2003 में से BJP के टिकट पर चुनाव जीतीं और 2008 तक MLA रहीं। सेवकराम के अनुसार, पत्नी के MLA रहते सब ठीक था, लेकिन 2009 में सोना बाई ने उन्हें अपमानित करना शुरू कर दिया और कुछ समय बाद छोड़ दिया। हालांकि, दोनों का तलाक नहीं हुआ है। 2016 में एक पैर खराब हो गया सेवकराम ने बताया कि 2016 में एक दुर्घटना में उनका एक पैर खराब हो गया। अब वे दिव्यांग हैं और मजदूरी भी नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने पत्नी से गुजारा भत्ता मांगा है। सेवकराम के वकील नितिन मिश्रा ने बताया कि दिव्यांग होने के कारण सेवकराम को भरण पोषण की आवश्यकता है। कोर्ट से नोटिस मिलने पर देंगे जवाब इस मामले पर सोना बाई का कहना है कि वे कोर्ट से नोटिस मिलने पर ही जवाब देंगी। सोना बाई और सेवकराम के तीन बच्चे हैं। सौरव, नीरज और प्रवीण. तीनों बच्चे अपनी मां सोना बाई के साथ रहते हैं। उनका एक बेटा डॉक्टर है और मकरोनिया के सरकारी अस्पताल में कार्यरत है। सोना बाई अभी भी BJP में हैं, लेकिन उनके पास कोई पद नहीं है। पहले सेवकराम करते थे ठेकेदारी पहले सेवकराम ठेकेदारी करते थे, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्होंने यह काम बंद कर दिया। उनका कहना है कि पत्नी के MLA बनने के बाद उनके व्यवहार में बदलाव आया। बड़े-बड़े नेताओं से संपर्क होने के कारण उनमें गुरूर आ गया। सेवकराम का आरोप है कि सोना बाई को उनके साथ रहने में शर्मिंदगी महसूस होती थी।