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फिर पीएम मोदी ने त्रिनिदाद-टोबैगो की PM को दिया अयोध्या वाला खास गिफ्ट, स्वागत में खास डिनर, पत्ते पर खाना…

 पोर्ट ऑफ स्पेन  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय कैरिबियाई देश त्रिनिदाद एवं टोबैगो के दो दिवसीय दौरे पर हैं. यह उनकी पांच देशों की यात्रा का दूसरा चरण है. यहां राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन के पियार्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया. उन्हें यहां गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. त्रिनिदाद एवं टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर ने अपनी पूरी कैबिनेट के साथ एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत किया. इस दौरान उनकी कैबिनेट के 38 मंत्री और चार सांसद मौजूद थे. खुद पीएम कमला ने पारंपरिक भारतीय परिधान साड़ी पहनी थी. उनके साथ कई मंत्री और सांसद भी भारतीय परिधानों में नजर आए, जो दोनों देशों के सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है. पीएम मोदी के स्वागत समारोह में भारतीय संस्कृति की छठा बखूबी दिखाई दी. वहां के भारतीय समुदाय ने तिरंगा झंडा लहराकर और पारंपरिक लोकगीत गाकर पीएम मोदी का स्वागत किया. यह सांस्कृतिक प्रदर्शन दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक था. पोर्ट ऑफ स्पेन में भारतीय मूल के लोगों में पीएम मोदी के आगमन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया. लोगों ने हाथों में तिरंगे लेकर और पारंपरिक नृत्य पेश किए गए. पीएम मोदी ने भी इस गर्मजोशी का जवाब देते हुए भारतीय समुदाय का अभिनंदन किया. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने पोस्ट कर बताया कि पीए मोदी का पोर्ट ऑफ स्पेन में ऐतिहासिक स्वागत किया गया. प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर और त्रिनदाद एवं टोबैगो की पूरी कैबिनेट एयरपोर्ट पर पीएम मोदी के स्वागत के लिए मौजूद थी. 38 मंत्री और चार सांसदों ने पीएम मोदी का स्वागत किया, जो वैश्विक मंच पर पीएम मोदी के नेतृत्व के प्रति सम्मान को दर्शाता है. बता दें कि पीएम मोदी की त्रिनिदाद एवं टोबैगो की यह पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा है. 1999 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है. त्रिनिदाद और टोबैगो की 40 फीसदी से अधिक आबादी भारतीय मूल की है. यहां के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा स्पीकर भी भारतीय मूल के हैं.भी खास बनाता है. पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और महाकुंभ का जिक्र भी किया. उन्होंने कमला प्रसाद बिसेसर को राम मंदिर की रिप्लिका और सरयू नदी का पवित्र जल भी भेंट किया. पीएम मोदी ने त्रिनिदाद-टोबैगो की PM को दिया अयोध्या वाला खास गिफ्ट ग्लोबल साउथ के भारत के साथ संबंध मजबूत करने निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 देशों की यात्रा पर हैं। इस दौरान पीएम मोदी त्रिनिदाद एंड टोबैगो की यात्रा पर भी पहुंचे हैं। यहां भारत के प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत किया गया। पीएम मोदी के स्वागत में त्रिनिदाद एंड टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर ने रात्रिभोज का आयोजन किया। रात्रिभोज में प्रधानमंत्री मोदी को सोहारी पत्ते पर भोजन परोसा गया। दरअसल, त्रिनिदाद एंड टोबैगो के लोगों में सोहारी के पत्ते पर भोजन करने का बहुत अधिक महत्व है। खासकर भारतीय मूल के लोगों के लिए इस सांस्कृतिक परंपरा के तौर पर देखा जाता है। इस देश में त्यौहारों और विशेष कार्यक्रमों के दौरान अक्सर इस पत्ते पर भोजन परोसा जाता है। सोशल मीडिया पर खुद पोस्ट की तस्वीरें पीएम मोदी ने खुद रात्रिभोज की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने रात्रिभोज का आयोजन किया, जिसमें मैंने अयोध्या में राम मंदिर की प्रतिकृति (स्वरूप) और सरयू नदी के पवित्र जल के साथ-साथ प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ का जल भी भेंट किया। ये भारत और त्रिनिदाद और टोबैगो के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत होगा संबंध इससे पहले पीएम मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की छठी पीढ़ी को भी संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि यहां रह रहे भारतीय मूल के लोगों को ओसीआई कार्ड जारी करने के हमारे निर्णय से भारत के साथ उनका संबंध मजबूत होगा। इसके साथ ही भावी पीढ़ियों के लिए हमारी साझा विरासत सुरक्षित रहेगी।    प्रधानमंत्री मोदी और त्रिनिदाद का रिश्ता, 25 साल पहले विश्व हिंदू सम्मेलन को किया था संबोधित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शुक्रवार) को कैरिबियाई सागर में स्थित त्रिनिदाद और टोबैगो के दो दिवसीय दौरे पर हैं. यहां उन्होंने भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए कहा है कि इस देश में भारतीय समुदाय की यात्रा साहस और धैर्य की मिसाल है. जिस परिस्थिति में भारतीय लोग यहां आए वो मज़बूत आत्मा को भी तोड़ सकती है. लेकिन, उन्होंने संघर्ष को उम्मीद और हिम्मत से झेला.  नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री के तौर पर त्रिनिदाद और टोबैगो की यह पहली यात्रा है. लेकिन, उनका इस धरती से पुराना संबंध है. उन्होंने 25 साल पहले 1999 में बीजेपी के महासचिव के तौर पर राष्ट्र की यात्रा की थी. इस दौरान उन्होंने अगस्त 2000 में विश्व हिंदू सम्मेलन द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में भाग लिया था.  विश्व हिंदू सम्मेलन द्वारा इसका सम्मेलन का आयोजन राजधानी पोर्ट‑ऑफ‑स्पेन में किया गया था. इस सम्मेलन में दुनिया भर के प्रतिनिधि आए थे. इस सम्मेलन में त्रिनिदाद-टोबैगो के तत्कालीन प्रधानमंत्री बासदेव पांडे, तत्कालीन आरएसएस सरसंघचालक के. सुदर्शन और आरएसएस के वरिष्ठ नेता मौजूद थे. इस सम्मेलन का विषय 'हिंदू धर्म और समकालीन विश्व समस्याएं – विकासशील तकनीक और मनुष्य की चुनौतियां' थी. नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन में भाषण दिया था और ख़ुद को ग्लोबल हिंदू नेतृत्व वाला व्यक्तित्व के रुप में स्थापित किया. इसके बाद ही नवंबर 2000 में उन्हें बीजेपी के संगठन प्रभारी महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया था और अगले साल वह गुजरात के मुख्यमंत्री बने.  सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजे गए प्रधानमंत्री मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऑर्डर ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो’ से नवाजा गया है. यह त्रिनिदाद एंड टोबैगो का सबसे सर्वोच्च सम्मान है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यहां के भारतीय समुदाय ने यहां कि इकोनॉमिक, कल्चरल और स्पिरिचुअल प्रगति में अहम योगदान दिया है. त्रिनिदाद एंड टोबैगो और भारत के लोग एक ही परिवार के हैं. हमारी और इनकी मित्रता भूगोल या पीढ़ियों से कहीं आगे की चीज़ है. यहां के भारतीय प्रवासी राष्ट्रदूत हैं, जो भारत के संस्कृति, मूल्यों और विरासत को दुनियाभर में ले जा रहे हैं. त्रिनिदाद एंड टोबैगो के प्रधानमंत्री के साथ नरेंद्र मोदी की रात्रिभोज … Read more

विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हुई राज सैनी की पेंटिंग, मूड्स ऑफ नरेन्द्र मोदी थीम पर बनाई

 भोपाल भोपाल के वरिष्ठ चित्रकार राज सैनी का नाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आधारित पेंटिंग वन कैरेक्टर, वन कैनवास, वन आर्टिस्ट के लिए वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड लंदन में दर्ज हुआ है। राज सैनी को यह सम्मान पिछले दिनों इंदौर में आयोजित हुए वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड के समारोह में दिया गया। सैनी को यह सम्मान हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा, पूर्व राज्यपाल न्यायमूर्ति विष्णु सदाशिव कोकजे, भजन गायक पद्मश्री अनूप जलोटा, सांसद शंकर लालवानी, स्पेशल डीजी वरुण कपूर ने दिया। उल्लेखनीय है कि राज सैनी द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर केंद्रित की गई अब तक की सबसे बड़ी पेंटिंग है। पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से कला के क्षेत्र में सक्रिय राज सैनी ने अब तक देश के कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साथ मुलाकात, कार्यशैली, ऐतिहासिक फैसलों को पोर्ट्रेट के माध्यम से तैयार कर उन्हें भेंट किए हैं। रंग और कूची के माध्यम से कैनवास पर दिया आकार राज सैनी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2014 में इस पेंटिंग को बनाने का निर्णय लिया। इस पेंटिंग को उन्होंने मूड्स ऑफ नरेन्द्र मोदी थीम पर तैयार किया, जिसमें प्रधानमंत्री के विभिन्न देशों में किए गए दौरे, प्रतिष्ठित व्यक्तियों से मुलाकात, कार्यशैली, ऐतिहासिक फैसलों को शामिल करते हुए उन्हें रंग और कूची के माध्यम से कैनवास पर आकार दिया। राज सैनी कहते हैं कि दो सौ फीट लंबी और पांच फीच चौड़ी इस पेंटिंग को बनाने में उन्हें दो वर्ष का समय लगा था, जिसमें उन्होंने कभी किसी दूसरे कलाकार का सहयोग नहीं लिया और अकेले ही यह पेंटिंग वर्ष 2016 में पूरी की। राज सैनी कहते हैं कि लगभग दो वर्ष पहले वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड लंदन की मुझे जानकारी मिली और मैंने इस पेंटिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। समय-समय पर टीम के सदस्यों ने मेरे द्वारा भेजी गई तमाम जानकारियों को पुष्टि की और उसके बाद विभिन्न देशों के कुल 100 कलाकारों का चयन किया। मेरा चयन भारत में सबसे लंबी पेंटिंग बनाने की कैटेगरी में हुआ।

PM मोदी ने घाना जाते ही इस दुर्लभ खजाने के लिए कर लिया बड़ा करार

अक्करा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नैचुरल रिसोर्स से भरपूर अफ्रीकी देशों के साथ संबंधों को नई ऊंचाई देने में जुटे हैं. इसके मद्देनजर पीएम मोदी 2 जुलाई 2025 को वेस्‍ट अफ्रीकी देश घाना पहुंचे. उन्‍होंने राष्‍ट्रपति जॉन ड्रमानी महामा के साथ डेलिगेशन स्‍तर की बैठक की और रणनीतिक और सामरिक तौर पर कई महत्‍वपूर्ण करार किए गए. इनमें सबसे महत्‍वपूर्ण रेयर अर्थ मिनरल्‍स की माइनिंग को लेकर बनी सहमति है. बता दें कि रेयर अर्थ मिनरल्‍स से भरपूर चीन ने रेयर मैग्‍नेट के एक्‍सपोर्ट पर लगाम लगाया है, जिससे भारत के इलेक्ट्रिक व्हिकल (EV) प्रोजेक्‍ट को धक्‍का लगा है. ऐसे में पीएम मोदी और घाना के राष्‍ट्रपति महामा के बीच रेयर अर्थ मिनरल्‍स की माइनिंग पर बनी सहमति अपने आप में ऐतिहासिक है. इसके साथ ही भारत ने अफ्रीका से चीन को करारा जवाब देते हुए रेयर अर्थ मिनरल्‍स पर उसके एकाधिकार को तोड़ने के अभियान की शुरुआत भी कर दी है. इसके साथ ही भारत और घाना ने द्विपक्षीय संबंधों को कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप का दर्जा दिया है, जिससे सहयोग के नए दरवाजे खुलने की संभावना बढ़ गई है. भारत और घाना ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए इन्हें समग्र साझेदारी (Comprehensive Partnership) में बदल दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रमानी महामा के बीच विस्तृत वार्ता के बाद यह महत्वपूर्ण घोषणा की गई. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘भारत अब केवल एक भागीदार नहीं, बल्कि घाना की राष्ट्र-निर्माण यात्रा में एक सहयात्री है.’ यह बयान न केवल भारत की अफ्रीका नीति को मजबूती देता है, बल्कि घाना के साथ उसके ऐतिहासिक संबंधों को भी नई दिशा देता है. यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की तीन दशकों में घाना की पहली आधिकारिक यात्रा थी. राजधानी अकरा पहुंचने पर घाना के राष्ट्रपति महामा ने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत कर विशेष सम्मान दिया. व्यापार और निवेश में बड़ी छलांग की तैयारी दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय कंपनियों ने अब तक घाना में लगभग दो अरब डॉलर (17138 करोड़ रुपये) का निवेश किया है और 900 से अधिक प्रोजेक्‍ट ऑपरेट की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि भारत घाना के साथ फिनटेक (FinTech) क्षेत्र में सहयोग को तैयार है और यूपीआई (UPI) डिजिटल भुगतान प्रणाली साझा करने की पेशकश की है. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति महामा की बैठक के बाद दोनों देशों के बीच चार अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. ये समझौते संस्कृति, पारंपरिक चिकित्सा, खनिज संसाधन और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में सहयोग को लेकर हैं. रेयर अर्थ मिनरल्‍स माइनिंग पर करार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि भारत घाना के साथ महत्वपूर्ण खनिजों की खोज (रेयर अर्थ मिनरल्‍स) और खनन में सहयोग करेगा. साथ ही रक्षा और मैरीटाइम सिक्‍योरिटी के क्षेत्र में भी दोनों देश साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे. उन्होंने इसे सुरक्षा के लिए एकजुटता (Security Through Solidarity) का मंत्र बताया. बता दें कि रेयर अर्थ मैटीरियल को लेकर इन दिनों पूरी दुनिया में घमासान मचा हुआ है. चीन के मनमाने रवैये की वजह से कई सेंसिटव इंडस्‍ट्री (खासकर ऑटो और डिफेंस सेक्‍टर) के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. इसे देखते हुए भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए वेस्‍ट अफ्रीकी देश से चीन को सीधा संदेश भी दिया है. आतंकवाद पर चिंता, ग्‍लोबल पीस पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत और घाना आतंकवाद को मानवता का शत्रु मानते हैं और इस खतरे से निपटने के लिए सहयोग और समन्वय को और मजबूत करने का निर्णय लिया गया है. पहलगाम हमले के बाद घाना ने भारत के साथ एकजुटता दिखाते हुए आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाई है. वहीं, पश्चिम एशिया और यूरोप में जारी संघर्षों को लेकर दोनों नेताओं ने चिंता जताई और संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान का आह्वान किया. पीएम मोदी ने दोहराया कि यह युद्ध का युग नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत और घाना दोनों वैश्विक दक्षिण (Global South) के सदस्य हैं और दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने आगे कहा कि यह भारत के लिए गर्व की बात है कि हमारी G20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को G20 की स्थायी सदस्यता मिली.

पीएम मोदी कोघाना देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से किया गया सम्मानित, दोनों देशों के बीच अहम समझौतों पर हुए हस्ताक्षर

अक्करा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को पश्चिम अफ्रीकी देश घाना के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान 'द ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना' से सम्मानित किया गया। भारतीय प्रधानमंत्री को यह सम्मान उन्हें उनकी 'प्रतिष्ठित राजनीति और प्रभावशाली वैश्विक नेतृत्व' के लिए दिया गया। घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा ने पीएम मोदी को पुरस्कार प्रदान किया। प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों की यात्रा के पहले चरण में घाना पहुंचे हैं। इस दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच बैठक हुई, जिसमें अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घाना के राष्ट्रीय सम्मान मिलने की जानकारी दी और कहा, 'द ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द घाना से सम्मानित होने पर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।' अपने स्वीकृति संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि यह पुरस्कार उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा, 'मैं 140 करोड़ भारतीयों की ओर से विनम्रतापूर्वक यह पुरस्कार स्वीकार करता हूं।' उन्होंने पुरस्कार को भारत के युवाओं की आकांक्षाओं और उज्ज्वल भविष्य, इसकी सांस्कृतिक परंपराओं और विविधता तथा घाना और भारत के बीच ऐतिहासिक संबंधों को समर्पित किया। पांच वर्षों में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों ने अपने संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक विस्तार दिया। वार्ता के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक बयान में कहा कि दोनों पक्षों ने अगले पांच वर्षों में दोतरफा व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है और भारत घाना की विकास यात्रा में न केवल भागीदार है, बल्कि सह-यात्री भी है। चार समझौतों पर हुए हस्ताक्षर दोनों पक्षों ने संस्कृति और पारंपरिक चिकित्सा समेत कई क्षेत्रों में चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए। महामा की मौजूदगी में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'राष्ट्रपति महामा और मैंने द्विपक्षीय संबंधों को एक व्यापक साझेदारी का दर्जा देने का फैसला किया है।' प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर एकमत हैं कि आतंकवाद मानवता का दुश्मन है तथा इस खतरे से निपटने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत करने का निर्णय लिया गया। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में घाना का साथ मोदी ने कहा, 'हमने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में घाना के सहयोग के लिए आभार जताया।' प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया और यूरोप में संघर्षों पर गंभीर चिंता व्यक्त की और बातचीत एवं कूटनीति के माध्यम से समस्याओं का समाधान तलाशने का आह्वान किया। मोदी ने कहा, 'यह युद्ध का युग नहीं है, समस्याओं का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।'  

कपड़ा उद्योग को नई गति देने के लिए धार में 2158 एकड़ भूमि पर विकसित हो रहा पीएम मित्र पार्क

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार केंद्र सरकार से मिली पीएम मित्र पार्क की सौगात – प्रदेश के विकास और कपड़ा  उद्योग में नए युग का शुभारंभ – मुख्यमंत्री डॉ. यादव पीएम मित्र पार्क के प्रथम चरण में विकास कार्यों की प्रक्रिया प्रारम्भ कपड़ा उद्योग को नई गति देने के लिए धार में 2158 एकड़ भूमि पर विकसित हो रहा पीएम मित्र पार्क भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार जिले में निर्माणाधीन प्रधानमंत्री मित्र पार्क के प्रथम चरण में अधोसंरचना विकास की प्रक्रिया आरंभ होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह का हृदय से आभार माना है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा धार की 2158 एकड़ भूमि पर लगभग 2050 करोड़ की लागत से विकसित हो रहे पीएम मित्र पार्क के लिए हाल ही में 773 करोड़ रुपए लागत के टेंडर जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह पहल मध्यप्रदेश में कपड़ा उद्योग (टेक्सटाइल सेक्टर) को नई गति प्रदान करेगी। मध्यप्रदेश लगातार विकसित राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दी गई पीएम मित्र पार्क की सौगात निश्चित रूप से प्रदेश के विकास और कपड़ा उद्योग में नए युग का शुभारंभ करेगी।  

रूस से सस्ता कच्चा तेल मगाया तो पांच सौ फीसदी टैक्स, डोनाल्ड सीनेट में नया बिल लाने की तयारी में

नई दिल्ली  अमेरिका ने रूस के साथ व्यापार करने वाले मुल्कों पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। रूस की यूक्रेन के खिलाफ जंग के तीन साल बाद भी कुछ देश, खासकर भारत और चीन, रूस से तेल खरीद रहे हैं। इसके बाद अब अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक बिल को पेश किया है। इसमें रूस से व्यापार करने वाले मुल्कों पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही गई है। इस बिल को खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन हासिल है। इस खबर ने भारत जैसे मुल्कों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है, जो रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है। आइए जानते हैं, ये बिल क्या है और भारत पर इसका क्या असर पड़ सकता है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडेस ग्राहम ने एबीसी न्यूज के साथ बातचीत में ये जानकारी दी है.  एबीसी न्यूज के अनुसार ग्राहम ने कहा, "यदि आप रूस से प्रोडक्ट खरीद रहे हैं, और आप यूक्रेन की मदद नहीं कर रहे हैं, तो आपके द्वारा अमेरिका में आने वाले उत्पादों पर 500% टैरिफ लगेगा. भारत और चीन पुतिन के तेल का 70% खरीदते हैं. वे रूस के वॉर सिस्टम को चालू रखते हैं." माना जा रहा है कि इस विधेयक को अगस्त में पेश किया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो इसे रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के अमेरिकी प्रयास में बड़ा स्टेप माना जाएगा. अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तो इससे भारत और चीन पर गंभीर असर पड़ सकता है. क्योंकि ये दोनों ही देश छूट वाले रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं. इस अमेरिकी कदम से भारत के लिए फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और आईटी सेवाओं जैसे निर्यात पर टैरिफ का भी जोखिम है. भारत रूसी तेल का एक प्रमुख खरीदार है. यूक्रेन पर आक्रमण के तीसरे वर्ष में भारत ने 49 बिलियन यूरो का कच्चा तेल आयात किया. परंपरागत रूप से भारत अपना तेल मध्य पूर्व से प्राप्त करता है, लेकिन फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के तुरंत बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में तेल आयात करना शुरू कर दिया. अमेरिका द्वारा इस बिल की चर्चा तब हो रही है जब भारत-अमेरिका व्यापार समझौता (Indo-US Trade deal) होने जा रहा है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने मंगलवार को कहा कि व्यापार समझौता "बहुत करीब" है. जबकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार चर्चा कर रहे हैं.  इंडिया टुडे को सूत्रों ने बताया कि दोनों देशों के बीच कृषि संबंधी प्रमुख मांगों को लेकर ट्रेड डील वार्ता में गतिरोध आ गया था.  ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल द्वारा सह-प्रायोजित प्रस्तावित विधेयक को कथित तौर पर 84 दूसरे सीनेटर भी सपोर्ट कर रहे हैं.  आपके बिल को आगे बढ़ाने का समय आ गया है इस बिल का उद्देश्य दुनिया के देशों पर रूसी तेल की खरीद को रोकने, "मॉस्को की युद्ध अर्थव्यवस्था" को कमजोर करने और रूस को यूक्रेन के साथ शांति वार्ता करने के लिए दबाव डालना है. ग्राहम ने एबीसी न्यूज को बताया कि जब वो कल ट्रंप के साथ गोल्फ खेल रहे थे तो उन्होंने इस बिल को हरी झंडी दे दी. लिंडसे ग्राहम ने कहा, "कल पहली बार उन्होंने कहा- अब आपके बिल को आगे बढ़ाने का समय आ गया है, तब मैं उनके साथ गोल्फ़ खेल रहा था." मूल रूप से इस बिल को मार्च में ही प्रस्तावित किया गया था. यानी कि इस बिल को तब ही आना था. लेकिन व्हाइट हाउस द्वारा विरोध के संकेत दिए जाने के बाद ये बिल अटक गया.  वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इस बिल पर रिपोर्ट जारी कर कहा था कि तब ट्रंप ने इस बिल की भाषा में बदलाव करने के लिए चुपचाप दबाव डाला था. इसमें 'करेगा' (Shall) की जगह 'हो सकता है' (May) का इस्तेमाल करने को कहा गया था.  बाद में ग्राहम ने कथित तौर पर यूक्रेन का समर्थन करने वाले देशों के लिए एक अलग प्रस्ताव रखा, ताकि संभवतः अमेरिका के यूरोपीय सहयोगियों के बीच चिंता कम हो सके. ग्राहम ने कहा, "हम राष्ट्रपति ट्रम्प को एक उपाय देने जा रहा है." अगर यह विधेयक कानून बन जाता है, तो इससे चीन और भारत दोनों के साथ अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में व्यापक बदलाव आ सकता है. चूंकि अमेरिका भारत का मुख्य निर्यात बाजार है, इसलिए यह नीति बड़े पैमाने पर कूटनीतिक तनावों को भी जन्म दे सकती है. अमेरिका द्वारा भारत पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने से अमेरिकी बाजार में जाने वाले भारत के उत्पादों के दाम बेतहाशा बढ़ जाएंगे. इससे वहां भारतीय प्रोडक्ट की बिक्री कम हो सकती है. इस कदम का फर्मास्यूटिक्ल और ऑटोमोबिल इंडस्ट्री पर व्यापक असर पड़ सकता है. राहत लेकर आया है रूस का तेल रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस ने भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल बेचा. रूस से कच्चे तेल के आयात ने भारत को आर्थिक, रणनीतिक और एनर्जी सिक्योरिटी के लिहाज से कई लाभ पहुंचाए हैं. सस्ते तेल ने आयात बिल को कम किया, रिफाइंड उत्पादों के निर्यात को बढ़ाया और वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित करने में मदद की. रूस के तेल की वजह से ही भारत मध्य पूर्व संकट, यूक्रेन वॉर के समय अपने देश कच्चे तेल की कीमतों को स्थिर रख सका.  यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से 24 फरवरी 2022 से 2 मार्च 2025 तक भारत ने रूस से लगभग 112.5 अरब यूरो (लगभग 118 अरब डॉलर, 1 यूरो = 1.05 डॉलर के हिसाब से) मूल्य का कच्चा तेल आयात किया है. यह जानकारी सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की एक रिपोर्ट के आधार पर है. रूस से कच्चे तेल की हिस्सेदारी युद्ध से पहले 1% से भी कम थी जो 2023-24 में बढ़कर 35-45% हो गई.  रूस का तेल भारत को सऊदी अरब और इराक जैसे देशों की तुलना में सस्ता मिला. इससे देश का आयात बिल कम हो गया. रूस से कच्चे तेल के आयात से भारत को 25 अरब डॉलर तक की आर्थिक बचत हुई.  CREA और अन्य स्रोतों के अनुसार भारत ने 2022-2025 के बीच रूसी तेल आयात पर 10.5 से 25 अरब डॉलर तक की बचत की.   

पीएम Modi की विदेश नीति को नई दिशा देने की तैयारी, पीएम की सबसे लंबी राजनयिक यात्रा, BRICS में लेंगे हिस्सा

पीएम मोदी की त्रिनिदाद व टोबैगो की ऐतिहासिक यात्रा न सिर्फ 180 वर्षों की विरासत से जुड़ी हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आठ दिनों के डिप्लोमैटिक दौरे पर आज रवाना होंगे, यात्रा से पहले चर्चा में ये कुर्सी  पीएम Modi की विदेश नीति को नई दिशा देने की तैयारी, पीएम की सबसे लंबी राजनयिक यात्रा, BRICS में लेंगे हिस्सा नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 2 जुलाई, 2025 से 5 देशों की यात्रा के लिए रवाना होने वाले हैं. 2 जुलाई से शुरू होने वाली पीएम की ये यात्रा 9 जुलाई को पूरी होगी. पीएम के इस दौरे में दो महाद्वीप भी शामिल हैं. इस दौरे में प्रधानमंत्री घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया की यात्रा करने वाले हैं. इस यात्रा में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर प्रधानमंत्री 4 दिनों तक ब्राजील में रहेंगे. 11 सालों के अपने कार्यकाल में पीएम मोदी दूसरी बार 5 देशों के दौरे पर जा रहे हैं. इससे पहले साल 2016 में उन्होंने 5 देशों को दौरा किया था, जिसमें अमेरिका, स्विट्जरलैंड, अफगानिस्तान, मैक्सिको और कतर देश शामिल था. 2 जुलाई से पीएम की ये यात्रा घाना से शुरू होगी. भारत के प्रधानमंत्री 30 साल बाद घाना का दौरा करने वाले हैं. 2 से 3 जुलाई तक पीएम मोदी यहां घाना के राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के राजनीतिक और आर्थिक सम्बन्धों पर चर्चा करेंगे.     ऐतिहासिक यात्रा न सिर्फ 180 वर्षों की विरासत से जुड़ी हुई पीएम मोदी का इस कैरेबियाई देश का दौरा इसलिए भी कई मायनों में अहम है, क्योंकि 180 साल पहले भारतीयों ने समुद्री रास्ते से पहली बार इस धरती पर कदम रखा था। पीएम मोदी के दौरे को लेकर प्रवासी भारतीयों में जबरदस्त उत्साह है। विदेश मंत्रालय में सचिव नीना मल्होत्रा ने सोमवार को मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि इस दौरे के दौरान पीएम मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो की राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कांगालू और प्रधानमंत्री कमला पर्साड-बिसेसर से मुलाकात करेंगे। वे देश की संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित करेंगे। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय के साथ संवाद का भी आयोजन होगा। इस देश की कुल जनसंख्या का लगभग 45% हिस्सा भारतीयों का है। जहाज पर सवार होकर पहुंचे थे 225 भारतीय करीब 180 साल पहले 30 मई 1845 को भारत से रवाना हुए 'फतेह-अल-रज़ाक' नामक जहाज ने त्रिनिदाद और टोबैगो के तट पर 225 भारतीय गिरमिटिया मजदूरों को उतारा था। भारतीयों का इस देश में यह पहला दौरा था। ये लोग गिरमिटिया मजदूर के रूप में ब्रिटिश उपनिवेश में काम करने भेजे गए थे। तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन भारत का प्रधानमंत्री उसी धरती पर आधिकारिक यात्रा पर पहुंचेगा। ब्रिटिश शासन के दौरान चीनी और कैरेबियाई गन्ना बागानों में सस्ता श्रम जुटाने के लिए भारत से मजदूरों को भेजा गया था। फतेह-अल-रज़ाक से त्रिनिदाद पहुंचे पहले भारतीयों में ज़्यादातर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों से थे। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों भारतवंशी पीएम मोदी की यह यात्रा इसलिए भी विशेष है, क्योंकि कैरेबियाई देश में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों भारतवंशी महिलाएं हैं, वे स्वयं को "भारत की बेटियां" बताती हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेता न सिर्फ भारत की विरासत से जुड़ी हैं, बल्कि भारत के साथ राजनयिक और विकास सहयोग को नई दिशा देने को लेकर उत्सुक हैं। द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा पीएम मोदी के दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, अक्षय ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। इसके अलावा, खेल, शिक्षा और सांस्कृतिक संबंध भी एजेंडे में शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया, “दोनों देश एक विस्तृत सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।” प्रधानमंत्री मोदी को त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद में संयुक्त सत्र को संबोधित करने का विशेष सम्मान मिलेगा। साथ ही, प्रधानमंत्री कमला बिसेसर पीएम मोदी के सम्मान में औपचारिक रात्रिभोज का भी आयोजन करेंगी। घाना के साथ भारत के अच्छे सम्बन्ध घाना पश्चिम एशिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में से एक है. साथ ही घाना के साथ भारत के व्यापारिक सम्बन्ध काफी अच्छे हैं. भारत और घाना के बीच द्विपक्षीय व्यापार 3,137.29 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें भारत से सोने का आयात काफी ज्यादा होता है. इसके अलावा भारत की कई कंपनियों ने घाना में कृषि, विनिर्माण, निर्माण, शिक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, आईसीटी और ऑटोमोटिव जैसी कंपनियों में भी काफी पैसे निवेश किए हैं. घाना के बाद पीएम इस देश की करेंगे यात्रा घाना के बाद पीएम मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो का दौरा करेंगे. त्रिनिदाद और टोबैगो में लगभग 40 से 45 प्रतिशत भारतीय प्रवासी निवास करते हैं. त्रिनिदाद और टोबैगो कैरिबियन क्षेत्र का पहला देश बन गया है, जिसने भारत के यूपीआई प्लेटफॉर्म प्रोजेक्ट को अपने देश में मंजूरी दी है. 4 जुलाई को पीएम मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो से अर्जेंटिना जाएंगे. भारत का अर्जेंटिना में कुल निवेश 1.2 बिलियन अमरीकी डॉलर है. पीएम मोदी अर्जेंटिना में वहां के प्रमुख क्षेत्रों, जैसे आर्थिक, रक्षा, खनिज, तेल और गैस, परमाणु ऊर्जा, विज्ञान पर चर्चा कर सकते हैं. 4 दिनों तक ब्राजील में रहेंगे पीएम मोदी उसके बाद 5 से 8 जुलाई तक प्रधानमंत्री ब्राजील की यात्रा पर रहेंगे और वहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे. पीएम मोदी अपने कार्यकाल में चौथी बार ब्राजील की यात्रा करने वाले हैं. पीएम यहां राष्ट्रपति लूला से वैश्विक स्तर में सुधार, शांति और सुरक्षा, एआई, जलवायु परिवर्तन और हेल्थ सहित कई मुद्दों पर बात करेंगे. नामीबिया की यात्रा करेंगे पीएम मोदी अपनी यात्रा के आखिरी दौरे में पीएम मोदी नामीबिया पहुचेंगे. नामीबिया में पीएम मोदी की पहली यात्रा होगी. साथ ही मार्च में पदभार संभालने के बाद नामीबिया के राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी की भारत देश से पहली द्विपक्षीय वार्ता होगी. हालांकि भारत और नामीबिया के बीच व्यापार में तेजी आई है. भारत और नामीबिया के बीच व्यापार बढ़कर 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर पहुंच गया है, जो दोनों देशों के सम्बन्धों को मजबूत करने का काम करता है. PM मोदी की विदेश यात्रा से पहले चर्चा में क्यों ये कुर्सी इस दौरे से पहले एक कुर्सी भी चर्चा में आ गई है. खास बात यह है कि विदेशी सरजमीं के संसद में रखी इस कुर्सी पर … Read more